गलत घोषणा-पत्र / मिथ्या साक्ष्य — RO क्या कर सकता है, क्या नहीं
राजस्थान नगरपालिका आम चुनाव 2026 · आदेश 793 दिनांक 20.01.2026 · संवीक्षा — सदस्य 01.09 · अध्यक्ष 17.09
यह फ़ाइल क्यों बनी। आयोग के अपने संकलन में यह आदेश क्रम 43, मुद्रित पृ. 158–159 पर है — और हमारे किसी भी मॉड्यूल में इसका एक शब्द नहीं था। मैंने दोनों पृष्ठ स्वयं पढ़े।
🚨 यह विषय संवीक्षा की मेज पर सीधे उठेगा — "इस अभ्यर्थी ने झूठ लिखा है, आप जाँच कीजिए" — और आदेश बताता है कि RO क्या जाँच सकता है और क्या बिल्कुल नहीं।
1. आदेश का परिचय-पत्र
| मद | विवरण |
|---|---|
| क्रमांक | एफ. 7(1)(3) / पंचा / रानिआ / 2015 / 793 |
| दिनांक | 20.01.2026 |
| किसे | समस्त जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर), राजस्थान |
| विषय | नगर पालिका एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में अभ्यर्थियों द्वारा गलत घोषणा पत्र / मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया जाना — भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 एवं 229 के अन्तर्गत कार्यवाही |
| हस्ताक्षर | (राजेश वर्मा) मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव |
| 🔴 अधिक्रमण | आदेश 502 दिनांक 29.03.2011 एवं पत्र 7358 दिनांक 26.04.2000 |
| स्थान | संकलन, क्रम 43, मुद्रित पृ. 158–159 |
⚠️ दो अलग "502" हैं — इन्हें कभी न मिलाएँ
आदेश दिनांक विषय स्थिति 502 02.06.1999 संतान संबंधी घोषणा 🔴 आदेश 4977 (21.07.2026) से निरस्त → §4-क 502 29.03.2011 मिथ्या साक्ष्य पर कार्यवाही 🔴 आदेश 793 (20.01.2026) से अधिक्रमित — यही फ़ाइल 🚨 संख्या एक है, दस्तावेज़ दो हैं। तिथि देखे बिना "502" न लिखें, न बोलें।
2. 🔴 सबसे बड़ी बात — IPC नहीं, अब BNS
| पहले | अब |
|---|---|
| भारतीय दण्ड संहिता की धारा 191 एवं 193 | 🟢 भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 एवं 229 |
आदेश स्वयं यह प्रतिस्थापन कोष्ठक में लिखता है —
"…भारतीय दण्ड संहिता की धारा 191 एवं 193 (भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 एवं 229 नवीन अधिनियम) के अन्तर्गत उसे मिथ्या साक्ष्य मानते हुए सक्षम न्यायालय में परिवाद दायर करने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।"
🎯 प्रशिक्षण में यही बोलें: "धारा 191/193 IPC अब नहीं — BNS 2023 की धारा 227 और 229।" पुराने डेक/नोट्स में IPC लिखा मिले तो वह पुराना है। 🔗 यह उसी वर्ग की बात है जो संदर्भ-दोष रजिस्टर में परिशिष्ट-9 की निरसित IPC 171-च के बारे में दर्ज है।
3. 🚨 आदेश के चार निर्देश — यही कक्षा में पढ़ाना है
(i) 🔴 चुनाव-पूर्व अयोग्यता की जाँच नहीं होगी
"अभ्यर्थी की चुनाव पूर्व की अयोग्यता की जांच नहीं की जाए अर्थात् यह जांच नहीं की जाए कि अभ्यर्थी चुनाव पूर्व किसी नियोग्यता को धारित करता था अथवा नहीं, क्योंकि यह बिन्दु चुनाव याचिका में ही शामिल हो सकता है।"
(ii) ✅ RO और DEO के लिए जाँच का बिन्दु केवल यह हो सकता है
"…क्या अभ्यर्थी ने अपने नाम निर्देशन पत्रों एवं उसके संलग्न प्रस्तुत किये गए अन्य प्ररूपों / शपथपत्रों / घोषणा पत्रों में चुनाव लडने की मंशा से कोई असत्य कथन किया है या तथ्यों को जान बूझ कर छुपाया है, और क्या उसने रिटर्निंग अधिकारी को मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अपराध किया है। इन्ही बिन्दुओं पर जांच की जा सकती है किन्तु ऐसी कार्यवाही में उस अभ्यर्थी की चुनाव पूर्व की अपात्रता की जांच नही की जा सकेगी।"
(iii) मिथ्या साक्ष्य सिद्ध होने पर — फौजदारी न्यायालय में परिवाद
"…रिटर्निंग अधिकारी जिनके समक्ष अभ्यर्थी ने मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया है उनके द्वारा अथवा जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामित किसी अन्य अधिकारी द्वारा … तथ्यों की जांच से प्रथम दृष्टया मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत होना पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 व 229 के तहत सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने की व्यवस्था की जावे।"
(iv) जाँच किससे न कराएँ, और राज्य सरकार को क्यों न भेजें
"…जांच पंचायती राज संस्थाओं के किसी अधिकारी से नहीं करवाई जावे बल्कि रिटर्निंग अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी द्वारा ही तथ्यों की जांच कर उपरोक्तानुसार कार्यवाही की जावे। … राज्य सरकार को संदर्भित करने की आवश्यकता नहीं है।"
4. ✅ एक तालिका में — कर सकते हैं / नहीं कर सकते
| ✅ RO कर सकता है | ❌ RO नहीं कर सकता |
|---|---|
| यह जाँचना कि कागज़ों में असत्य कथन है या तथ्य जानबूझकर छुपाए गए | यह जाँचना कि अभ्यर्थी चुनाव-पूर्व अयोग्य था या नहीं |
| प्रथम दृष्टया मिथ्या साक्ष्य मिलने पर सक्षम न्यायालय में परिवाद | स्वयं दण्ड देना या अयोग्यता घोषित करना |
| जाँच स्वयं करना, या DEO द्वारा नामित अधिकारी से कराना | जाँच पंचायती राज संस्था के अधिकारी से कराना |
| BNS 2023 की धारा 227 / 229 का प्रयोग | IPC 191 / 193 का प्रयोग (अब नहीं) |
| — | प्रकरण राज्य सरकार को भेजना (आवश्यक ही नहीं) |
🚨 यह सीमा संवीक्षा की शक्ति को कम नहीं करती — इसे स्पष्ट समझ लें
संवीक्षा में RO की शक्ति यथावत् है। कागज़ों के आधार पर वह नाम-निर्देशन अस्वीकार कर सकता है। आदेश 793 उस शक्ति को छूता ही नहीं।
793 दूसरी स्थिति का आदेश है — जब शिकायत आए कि "अभ्यर्थी ने असत्य तथ्य देकर चुनाव लड़ा"। तब जाँच केवल असत्य कथन तक रहेगी। अयोग्यता तक नहीं।
⚠️ इन दोनों को न मिलाएँ। मिलाने पर या तो वैध नामांकन अस्वीकार होगा, या अवैध स्वीकार।
5. आदेश की पृष्ठभूमि (जो उसने स्वयं लिखी है)
| तथ्य | आदेश के शब्द |
|---|---|
| उच्च न्यायालय की वृहदपीठ, निर्णय दिनांक 02.04.07 | "चुनाव पूर्व की अयोग्यताओं के मामलों में जांच कार्यवाही राज्य सरकार द्वारा नही की जा सकती" |
| विधि विभाग की राय | "…किन्तु यदि कोई उम्मीदवार द्वारा कोई आपराधिक कृत्य किया है तो तथ्यों की जांच कर फौजदारी न्यायालय में कार्यवाही की जा सकती है।" |
| पिछले आम चुनावों का अनुभव | "…कई शिकायतें इस आशय की प्राप्त हुई कि किन्हीं अभ्यर्थियों ने सही तथ्यों को छुपाते हुए या गलत तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए चुनाव में भाग लिया व निर्वाचित भी हो गये।" |
⚠️ एक बात जो मैं स्पष्ट कर दूँ। आदेश के आमुख में जो व्यवस्थाएँ गिनाई गई हैं (पंचायती राज अधिनियम की धारा 43 · पं.रा. (निर्वाचन) नियम 1994 का नियम 80 · धारा 39 · पं.रा. नियम 1996 का नियम 23) वे पंचायत की व्यवस्थाएँ हैं। नगरपालिका के लिए संगत प्रावधान भिन्न हैं। 🚨 किन्तु आदेश का विषय स्वयं "नगर पालिका एवं पंचायती राज संस्थाओं" कहता है, और निर्देश (i)–(iv) सामान्य रूप से RO/DEO को सम्बोधित हैं — इसीलिए वे नगरपालिका पर लागू हैं। ➡ नगरपालिका में चुनाव याचिका का मार्ग अपने अधिनियम/नियमों से देखें — पंचायत की धारा-संख्या कक्षा में न बोलें।
6. 🚨 बालोतरा के RO/ARO के लिए — तीन वाक्य
| # | वाक्य |
|---|---|
| 1 | "शिकायत आए कि अभ्यर्थी ने झूठ लिखा है — तो मैं केवल यह देखूँगा कि कागज़ में असत्य कथन है या तथ्य छुपाया गया।" |
| 2 | "मैं यह नहीं देखूँगा कि वह अयोग्य था या नहीं — वह चुनाव याचिका का विषय है।" |
| 3 | "प्रथम दृष्टया मिथ्या साक्ष्य मिला तो BNS की धारा 227/229 में सक्षम न्यायालय में परिवाद — राज्य सरकार को भेजने की आवश्यकता नहीं।" |
स्रोत: आदेश 793 दिनांक 20.01.2026 — संकलन क्रम 43, मुद्रित पृ. 158–159, दोनों पृष्ठ स्वयं पढ़े कैसे मिला: संकलन के 85 आदेशों का हमारी सामग्री से मिलान (23.08.2026) — यह उन 24 में था जिन्हें किसी मॉड्यूल ने कभी उद्धृत नहीं किया अंग्रेजी समानांतर: False declarations / false evidence — what the RO may and may not investigate संबंधित: बालोतरा जिला — प्रशिक्षण पैक · DLMT प्रशिक्षण सामग्री — सुधार पत्रक · अधिक्रमण रजिस्टर — कौन-सा आदेश किसे हटाता है · DEO_QUESTIONS_hi · आधिकारिक स्रोतों में पुराने एवं त्रुटिपूर्ण संदर्भ — एक ही रजिस्टर