साइट-परिचय
पन्ने भले आठ हों, बात एक ही है — ड्यूटी पर खड़े आदमी को वह उत्तर मिले जो अपने मूल आदेश पर खुलकर दिखा दे। कहाँ क्या रखा है, यह नीचे लिखा है।
जिस काम से आए हैं, वहीं से शुरू कीजिए। तीनों रास्ते छोटे हैं।
ऊपर की पट्टी इसी क्रम से चलती है — पढ़िए, पढ़ाइए, अभ्यास कीजिए, देखिए, खोजिए, पूछिए।
जहाँ भी किसी नियम, आदेश या प्ररूप का नाम आता है, वह कड़ी बन जाता है — नीचे बिन्दुओं की रेखा और साथ में एक छोटा तीर।
कड़ी आपको दस्तावेज़ के पहले पन्ने पर पटककर नहीं छोड़ती। वह ठीक उसी पन्ने पर ले जाती है, जहाँ बात लिखी है — ताकि आप खुद पढ़कर मिला लें। यही इस साइट पर भरोसा करने का तरीका है — जो लिखा है उसे मानिए नहीं, कड़ी दबाकर मूल में देख लीजिए।
कुछ ब्राउज़र और फोन PDF को सीधे उस पृष्ठ पर नहीं खोलते। ऐसा हो तो पृष्ठ-संख्या कड़ी में लिखी होती है, उसे हाथ से डाल लीजिए।
पूरी साइट बिना सर्वर के चलती है। फ़ोल्डर पेन-ड्राइव में डालिए और index.html पर दो बार दबाइए — पन्ने, खोज, अभ्यास और मूल दस्तावेज़, सब वैसे ही चलेंगे। मतदान केन्द्र पर नेटवर्क मिलता नहीं, और ज़रूरत सबसे ज़्यादा वहीं पड़ती है।
केवल अक्षरों का रूप (फ़ॉन्ट) इंटरनेट से आता है। वह न मिले तो पढ़ने में कोई अड़चन नहीं आती, अक्षर थोड़े अलग दिखते हैं।
हर पुस्तिका में ऊपर “छापिए” का बटन है। छपाई के लिए पन्ने अलग से तैयार किए गए हैं — पट्टियाँ और बटन नहीं छपते, शीर्षक अपने पाठ से अलग होकर दूसरे पन्ने पर नहीं जाते, और हाशिये की टिप्पणियाँ पाठ के साथ आ जाती हैं। ब्राउज़र के छपाई-पर्दे में “पृष्ठभूमि के रंग” चालू रखिए, वरना बक्सों के रंग नहीं छपेंगे।
सब कुछ फोन पर चलता है। चौड़ी तालिका अपने भीतर बगल में खिसकती है — किनारे पर हल्की छाया दिखे तो समझिए कि उधर और भी है। पुस्तिका में ऊपर “अध्याय” दबाकर सीधे किसी भी अध्याय पर जाया जा सकता है।
यह साइट अनौपचारिक है और इसे एक व्यक्ति ने बनाया है, इसलिए इसमें गलती होना सम्भव है। कहीं कुछ खटके तो पहले उसी कड़ी को दबाकर मूल आदेश देखिए। मूल और इस साइट में अन्तर हो तो मूल ही सही है — यहाँ लिखा हुआ नहीं। ड्यूटी पर मान्य वही है जो आयोग के आदेश, नियम और आपके अपने प्रशिक्षण में कहा गया हो।