परीक्षण साइट ट्रस्ट-लेवल (प्रामाणिकता स्कोर) 99% यह कैसे बनी, और यह अंक क्यों →

साइट-परिचय

यह साइट कैसे काम करती है

पन्ने भले आठ हों, बात एक ही है — ड्यूटी पर खड़े आदमी को वह उत्तर मिले जो अपने मूल आदेश पर खुलकर दिखा दे। कहाँ क्या रखा है, यह नीचे लिखा है।

पहले तीन मिनट

जिस काम से आए हैं, वहीं से शुरू कीजिए। तीनों रास्ते छोटे हैं।

कौन-सा पन्ना किस काम का

ऊपर की पट्टी इसी क्रम से चलती है — पढ़िए, पढ़ाइए, अभ्यास कीजिए, देखिए, खोजिए, पूछिए।

ड्यूटी से पहले, इत्मीनान सेपुस्तिकारवानगी से रसीद तक का पूरा दिन, क्रम से। साथ में चारों कुर्सियों की अपनी-अपनी पुस्तिका, और हर एक के अन्त में पुनरावृत्ति — जाने से पहले एक बार।5 पुस्तिकाएँकक्षा में पढ़ाना होप्रशिक्षण डेकPPT और PDF, उतार लीजिए। हर एक पर लिखा है कि उसमें कितने पन्ने हैं और किस कुर्सी के लिए है — उतारने से पहले ही पता चल जाए, बाद में नहीं।14 डेकहाथ साफ़ करना होसिमुलेशनसात कुर्सियों का भूमिका-अभ्यास, नौ पड़ावों की ईवीएम लैब, और MPSV का प्रतिरूप — जिस पर बटन सचमुच दबते हैं और बीप भी बजती है।102 प्रकरणदेखकर समझना होवीडियोमशीन और प्रक्रिया के वीडियो, विषयवार लगे हुए।मूल कागज़ चाहिएआदेश-सूचीआयोग के आदेश, क्रमांक और तारीख़ समेत। साइट पर जो कुछ कहा गया है, उसकी जड़ यहीं है।एक सीधा प्रश्न हैप्रश्नोत्तरखण्डवार लिखे हुए उत्तर, और हर उत्तर के नीचे वह नियम या आदेश जिससे वह निकला है।119 प्रश्नशब्द याद न आ रहे होंपूछिएअपनी भाषा में पूछिए। उत्तर इसी साइट में से आएगा। न मिले तो साफ़ मना कर देगा — अपने मन से कुछ गढ़कर नहीं बताएगा।यह किसकी बनाई हैअस्वीकरणयह किसकी सामग्री है, कितनी दूर तक भरोसे लायक है, और ड्यूटी पर मानना किसे है।

बिन्दु-रेखा वाली कड़ियाँ — साइट का असली काम

जहाँ भी किसी नियम, आदेश या प्ररूप का नाम आता है, वह कड़ी बन जाता है — नीचे बिन्दुओं की रेखा और साथ में एक छोटा तीर।

उदाहरण — नियम 43(5) पर दबाइए, और मूल नियम-पुस्तिका ठीक उसी पृष्ठ पर खुलेगी जहाँ यह नियम छपा है।

कड़ी आपको दस्तावेज़ के पहले पन्ने पर पटककर नहीं छोड़ती। वह ठीक उसी पन्ने पर ले जाती है, जहाँ बात लिखी है — ताकि आप खुद पढ़कर मिला लें। यही इस साइट पर भरोसा करने का तरीका है — जो लिखा है उसे मानिए नहीं, कड़ी दबाकर मूल में देख लीजिए।

कुछ ब्राउज़र और फोन PDF को सीधे उस पृष्ठ पर नहीं खोलते। ऐसा हो तो पृष्ठ-संख्या कड़ी में लिखी होती है, उसे हाथ से डाल लीजिए।

खोजें और पूछिए — दोनों अलग हैं

खोजें — ऊपर की पट्टी में शब्द से पन्ने ढूँढ़ता है। जब आपको मालूम हो कि आप क्या ढूँढ़ रहे हैं, तब यह तेज़ है। की-बोर्ड पर / दबाते ही कर्सर सीधे यहाँ आ जाता है।
पूछिए — अपना प्रश्न, अपनी भाषा में पूरा वाक्य पूछिए, जैसे “कोई मत नहीं देना चाहे तो क्या लिखें”। उत्तर इसी साइट के प्रश्नोत्तर में से आएगा, स्रोत सहित। जिस बात का उत्तर यहाँ नहीं है, उस पर यह साफ़ मना कर देता है — अपनी ओर से कुछ गढ़ता नहीं।

बिना इंटरनेट — पेन-ड्राइव से

पूरी साइट बिना सर्वर के चलती है। फ़ोल्डर पेन-ड्राइव में डालिए और index.html पर दो बार दबाइए — पन्ने, खोज, अभ्यास और मूल दस्तावेज़, सब वैसे ही चलेंगे। मतदान केन्द्र पर नेटवर्क मिलता नहीं, और ज़रूरत सबसे ज़्यादा वहीं पड़ती है।

केवल अक्षरों का रूप (फ़ॉन्ट) इंटरनेट से आता है। वह न मिले तो पढ़ने में कोई अड़चन नहीं आती, अक्षर थोड़े अलग दिखते हैं।

छापना

हर पुस्तिका में ऊपर “छापिए” का बटन है। छपाई के लिए पन्ने अलग से तैयार किए गए हैं — पट्टियाँ और बटन नहीं छपते, शीर्षक अपने पाठ से अलग होकर दूसरे पन्ने पर नहीं जाते, और हाशिये की टिप्पणियाँ पाठ के साथ आ जाती हैं। ब्राउज़र के छपाई-पर्दे में “पृष्ठभूमि के रंग” चालू रखिए, वरना बक्सों के रंग नहीं छपेंगे।

फोन पर

सब कुछ फोन पर चलता है। चौड़ी तालिका अपने भीतर बगल में खिसकती है — किनारे पर हल्की छाया दिखे तो समझिए कि उधर और भी है। पुस्तिका में ऊपर “अध्याय” दबाकर सीधे किसी भी अध्याय पर जाया जा सकता है।

कुछ गलत लगे तो

यह साइट अनौपचारिक है और इसे एक व्यक्ति ने बनाया है, इसलिए इसमें गलती होना सम्भव है। कहीं कुछ खटके तो पहले उसी कड़ी को दबाकर मूल आदेश देखिए। मूल और इस साइट में अन्तर हो तो मूल ही सही है — यहाँ लिखा हुआ नहीं। ड्यूटी पर मान्य वही है जो आयोग के आदेश, नियम और आपके अपने प्रशिक्षण में कहा गया हो।

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