आपकी मेज प्रवेश के ठीक बाद पहली है। आगे की हर मेज उसी पहचान पर टिकी है जो आपने बनाई।
मतदाता कतार से निकलकर सबसे पहले आपके सामने आता है। आप उसकी पहचान करते हैं, उसका विवरण जोर से बोलते हैं, चिन्हित प्रति में निशान लगाते हैं और उसे आगे भेजते हैं। यह छोटा-सा क्रम दिन भर सैकड़ों बार दोहराया जाएगा, इसलिए इसका अनुशासन ही आपका पूरा काम है।
इस क्रम में एक बात ऐसी है जो लौटकर नहीं आती। वह है विवरण जोर से बोलना। पोलिंग एजेंट पीछे बैठे होते हैं और उन्हें एतराज़ उठाने का अवसर केवल उसी क्षण मिलता है। मतदाता आगे बढ़ गया तो वह अवसर समाप्त हो जाता है।
जो आपके अधिकार में नहीं है
पहचान पर संदेह का अन्तिम निर्णय आपका नहीं है, और चुनौती पर कार्यवाही भी आपकी नहीं। दोनों पीठासीन अधिकारी की मेज के हैं। यह जान लेना आपको बचाता है, क्योंकि आपसे अपेक्षा केवल इतनी है कि आप सही प्रकरण सही मेज तक पहुँचा दें।
यह अध्याय सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूची बदल चुकी है और पुरानी सूची अब भी बहुत जगह छपी मिलती है।
प्राथमिक दस्तावेज़ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्वाचक फोटो पहचान पत्र है, जिसे सामान्यतः EPIC कहा जाता है। यदि कोई निर्वाचक उसे प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे, तभी वैकल्पिक दस्तावेज़ों की बात आती है।
ग्यारह वैकल्पिक दस्तावेज़, और केवल ये ग्यारह
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दस्तावेज़
1
आधार कार्ड
2
विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अथवा मनरेगा कार्ड
3
बैंकों अथवा डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक
4
श्रम मंत्रालय की योजना का स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, अथवा आयुष्मान भारत हैल्थ कार्ड
5
ड्राइविंग लाइसेन्स
6
पैन कार्ड
7
भारतीय पासपोर्ट
8
फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज
9
केन्द्र अथवा राज्य सरकार, लोक उपक्रम या पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा अपने कर्मचारी को जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र
10
सांसदों एवं विधानसभा सदस्यों को जारी सरकारी पहचान पत्र
11
यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
सूची बन्द है। किसी दस्तावेज़ पर फोटो होना उसे मान्य नहीं बनाता। राशन कार्ड पर फोटो होते हुए भी वह इस सूची में नहीं है, इसलिए उससे पहचान नहीं बनेगी।
तीन शर्तें, जो हर दस्तावेज़ पर एक साथ लगती हैं
चुनाव की घोषणा से पूर्व जारी हुआ होआदेश के शब्द हैं, चुनाव की घोषणा किये जाने से पूर्व में जारी। इस आम चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा प्रेस-नोट 6722 दिनांक 19.08.2026 से हुई थी।
मूल दस्तावेज़ हीआदेश कहता है, कोई एक मूल दस्तावेज़। छायाप्रति स्वीकार्य नहीं है, चाहे दस्तावेज़ सूची में हो और चाहे प्रति कितनी ही स्पष्ट हो।
कालातीत अवधि अंकित हो तो उसी तकयदि दस्तावेज़ पर वैधता की अवधि छपी है तो वह उसी अवधि तक मान्य है। समय-सीमा समाप्त पासपोर्ट या लाइसेंस से पहचान नहीं बनेगी।
परिवार के मुखिया वाला प्रावधान
आदेश 5310 में एक अपवाद यथावत् रखा गया है। परिवार के मुखिया को अपने अन्य पारिवारिक सदस्यों की पहचान करने की अनुमति दी जा सकती है। किन्तु इसकी शर्त कड़ी है। सभी सदस्य उसके साथ आएँ, और मुखिया उनकी पहचान स्थापित कर सके। मुखिया अकेला आकर किसी की पहचान नहीं करा सकता।
आदेश 5310 का एक नया भाग प्रतिरूपण पर भी है। मिथ्या या कूटरचित पहचान पत्र से मतदान का प्रयास हो तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के अन्तर्गत कार्यवाही होगी। धारा 174 दण्ड बताती है।3
चिन्हित प्रति के निशान
निशान छोटा-सा काम लगता है, पर दिन के अन्त का पूरा हिसाब इसी पर खड़ा होता है।
पहचान बनते ही निशान तुरन्त लगाइए। बाद में लगाने के लिए छोड़ा गया निशान भरोसे का नहीं रहता, क्योंकि क्रम टूट जाता है और गिनती बिगड़ जाती है।
हटाए गए नाम प्रति में Deleted दिखेंगे। मुद्रित क्रम संख्याओं में कोई रद्दोबदल नहीं होगा, चाहे बीच में कितने ही नाम हटे हों।
4
पहचान-पर्ची — पढ़िए कम, सुनिए ज़्यादा
पर्ची सहायक है, प्रमाण नहीं। इस अन्तर से कई गलतियाँ बचती हैं।
पर्ची से केवल क्रम संख्या पढ़िएपर्ची पर लिखा नाम-विवरण मत पढ़िए। पढ़ने से वह व्यक्ति केवल हामी भर देगा।
नाम मतदाता से बुलवाइएउससे उसका नाम, और आवश्यक हो तो अन्य विशिष्टियाँ, जोर से कहलवाइए। तभी पक्का होता है कि पर्ची लाने वाला वही व्यक्ति है।
समाधान न हो तो आगे भेजिएसंदेह बना रहे तो व्यक्ति को पीठासीन अधिकारी के पास भेजिए। निर्णय वहीं होगा।
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मेज पर आने वाले कठिन क्षण
ये पाँच स्थितियाँ लगभग हर केन्द्र पर आती हैं। इनका उत्तर पहले से जान लेना ही तैयारी है।
स्थिति
आप क्या करेंगे
बाईं तर्जनी पर पहले से स्याही का निशान
मत नहीं दिया जाएगा। नियम 35-क का पहला परन्तुक कहता है कि ऐसा चिन्ह पहले से हो तो यह समझा जाएगा कि वह पहले ही मत दे चुका है। प्रकरण पीठासीन अधिकारी को भेजिए।
एजेंट चुनौती दे
मतदाता को रोकिए और पीठासीन अधिकारी के पास भेजिए। ₹2, परिशिष्ट-13 की रसीद और जाँच, सब उनकी मेज का काम है।
मृत या अनुपस्थित सूची का नाम कोई दावा करे
दस्तावेज़ों से कड़ाई से पहचान कीजिए। संदेह बना रहे तो निर्णय पीठासीन अधिकारी का।
नामावली में छपाई की त्रुटि
सही मतदाता को केवल लिपिकीय त्रुटि पर वंचित नहीं किया जाएगा। पीठासीन अधिकारी कारण लिखकर अनुमति देंगे।
पर्दानशीन महिला
पहचान महिला मतदान अधिकारी अथवा महिला कर्मचारी से कराइए। यह व्यवस्था पहले से तय रखनी होती है।
आदेश की प्रस्तावना नियम 40 उद्धृत करती है, किन्तु नियम 77-क के अनुसार जहाँ मतदान मशीन प्रयुक्त हो वहाँ नियम 40 के स्थान पर नियम 40-क लगता है। प्रशिक्षण में 40-क ही उद्धृत कीजिए।6
एतराज़ उठे तो — रास्ता एक ही
आपकी भूमिका यहाँ छोटी है, पर समय बहुत महत्वपूर्ण है।
एतराज़ इसी मेज पर, इसी क्षणचुनौती केवल पहचान के क्षण मान्य है। मतदाता आगे बढ़ गया तो वह अवसर चला जाता है। इसीलिए हर विवरण जोर से बोलना आपका कर्तव्य बनाया गया है।
आप रोकिए, कार्यवाही नहींमतदाता को रोक लीजिए और स्वयं कोई कार्यवाही मत कीजिए।
दोनों को पीठासीन अधिकारी के पास भेजिएमतदाता और एतराज़ करने वाला, दोनों वहाँ जाएँगे।
आगे का काम उनका है₹2 नगद, परिशिष्ट-13 की रसीद, संक्षिप्त जाँच और निर्णय। इनमें से कुछ भी आपका नहीं।
7
समाप्ति पर आपका हिसाब
दिन के अन्त में आपसे तीन चीज़ें अपेक्षित हैं।
गिनती निकालिएरेखा, टिक और स्टार से पुरुष, स्त्री तथा थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या निकालिए।
पीठासीन अधिकारी को दीजिएयह परिणाम उनकी डायरी में अभिलिखित होगा। मद 18 वाली दोनों गिनतियाँ भी उन्हें अभी दे दीजिए।
चिन्हित प्रति सौंपिएयह सीलबन्द लिफाफा E-1 में जाएगी। सील पीठासीन अधिकारी करेंगे, अभ्यर्थी अथवा अभिकर्ता की उपस्थिति में।
इसके बाद आपका काम समाप्त होता है। किन्तु जब तक प्रति आपके हाथ से नहीं जाती, तब तक उसकी शुद्धता आपकी ही जिम्मेदारी है।
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पुनरावृत्ति — जाने से पहले एक बार
नीचे कुछ नया नहीं है। यह ऊपर के अध्यायों का सार है, रवाना होने से पहले एक बार देख लेने के लिए।
सार — पाँच बातें जो बदलती नहीं
1EPIC पहले, फिर ग्यारह में से कोई एकसूची बन्द है। फोटो होना कसौटी नहीं, सूची में होना कसौटी है।
2तीनों शर्तें एक साथ लगती हैंघोषणा से पूर्व जारी, मूल दस्तावेज़, और अंकित अवधि तक ही मान्य।
3रेखा, टिक, स्टार — तुरन्तबाद में लगाया गया निशान भरोसे का नहीं रहता।
4पर्ची से केवल क्रम संख्यानाम मतदाता से बुलवाइए। पर्ची न लाने पर लौटाइए नहीं।
5चुनौती मिलते ही रोकिए₹2 से आगे की हर बात पीठासीन अधिकारी की मेज की है।