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बारम्बार पूछे जाने वाले प्रश्न

119 प्रश्न, बारह खण्डों में। हर उत्तर के भीतर जो नियम, आदेश या परिशिष्ट लिखा है, वह अपने ठीक पृष्ठ पर खुलता है। संदेह हो तो वहीं देख लीजिए — किसी भी विवाद में मूल आदेश ही अंतिम है।

कार्यक्रम एवं तिथियाँ

जो हर किसी को सबसे पहले चाहिए

मतदान की तिथि क्या है?

प्रथम चरण 09.09.2026 (बुधवार) और द्वितीय चरण 11.09.2026 (शुक्रवार)। बालोतरा द्वितीय चरण में है। कार्यक्रम की घोषणा प्रेस-नोट 6722 दिनांक 19.08.2026 से हुई।

मतदान का समय क्या रहेगा?

प्रातः 7.00 बजे से सांय 6.00 बजे तक। समय समाप्ति पर जो मतदाता कतार में खड़े हैं उन्हें मत देने दिया जाता है।

मतगणना कब है?

14.09.2026 (सोमवार)।

आदर्श आचार संहिता कब से लागू है?

27.08.2026 से, अर्थात् लोक सूचना जारी होने के दिन से।

सदस्य पद का नामनिर्देशन कार्यक्रम क्या था?

लोक सूचना 27.08, नामनिर्देशन की अन्तिम तिथि 31.08, संवीक्षा 01.09, नाम वापसी 03.09 (अपराह्न 3 बजे तक) और चुनाव चिन्हों का आवंटन 04.09.2026

बालोतरा नगरपालिका बोर्ड है या नगर परिषद?

नगर परिषद, जिसमें 55 वार्ड हैं। यह अन्तर व्यावहारिक है, क्योंकि निक्षेप की दर नियम 22 में निकाय के प्रकार से बदलती है।

मतदाता की पहचान

आदेश 5310 ने पुरानी सूची बदल दी है

पहचान का प्राथमिक दस्तावेज़ कौन-सा है?

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (EPIC)। वैकल्पिक दस्तावेज़ की बात तभी आती है जब मतदाता EPIC प्रस्तुत करने में असमर्थ हो। आधार आदेश 5310 दिनांक 30.07.2026 है।

क्या मार्गदर्शिका का परिशिष्ट-16 अब भी लागू है?

नहीं। परिशिष्ट-16 आदेश 603 दिनांक 19.01.2026 पर आधारित था। आयोग ने आदेश 5310 से उसे और आदेश 559 दिनांक 07.02.2019 को भी अधिक्रमित कर दिया है। लागू सूची अब आदेश 5310 की है।

EPIC न हो तो कौन-से दस्तावेज़ मान्य हैं?

केवल ये ग्यारह, और इनमें से कोई एक मूल दस्तावेज़: आधार कार्ड · विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अथवा मनरेगा कार्ड · बैंकों या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक · श्रम मंत्रालय की योजना का स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड अथवा आयुष्मान भारत हैल्थ कार्ड · ड्राइविंग लाइसेन्स · पैन कार्ड · भारतीय पासपोर्ट · फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज · सरकार, लोक उपक्रम या पब्लिक लिमिटेड कंपनी का फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र · सांसदों एवं विधायकों को जारी सरकारी पहचान पत्र · यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड।

वे तीन शर्तें क्या हैं जो हर दस्तावेज़ पर लगती हैं?

एक, दस्तावेज़ चुनाव की घोषणा किये जाने से पूर्व जारी हुआ हो। दो, मूल दस्तावेज़ ही मान्य है, छायाप्रति नहीं। तीन, यदि उस पर कालातीत अवधि अंकित है तो वह उसी अवधि तक मान्य है। तीनों एक साथ लगती हैं।

राशन कार्ड पर फोटो है, क्या उससे पहचान बनेगी?

नहीं। आदेश 5310 की सूची बन्द है और राशन कार्ड उसमें नहीं है। फोटो होना कसौटी नहीं है, सूची में होना कसौटी है।

छायाप्रति स्वीकार की जा सकती है?

नहीं। आदेश के शब्द हैं, कोई एक मूल दस्तावेज़। दस्तावेज़ सूची में हो तब भी छायाप्रति से पहचान नहीं बनेगी।

समय-सीमा समाप्त पासपोर्ट या लाइसेंस चलेगा?

नहीं। तीसरी शर्त कहती है कि यदि कालातीत अवधि अंकित हो तो पहचान पत्र उसी अवधि तक मान्य होगा।

क्या परिवार का मुखिया दूसरों की पहचान करा सकता है?

हाँ, पर शर्त के साथ। आदेश 5310 का प्रावधान है कि केवल परिवार के मुखिया को अपने अन्य पारिवारिक सदस्यों की पहचान करने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते सभी सदस्य उसके साथ आएँ तथा मुखिया उनकी पहचान स्थापित कर सके। मुखिया अकेला आकर किसी की पहचान नहीं करा सकता।

मतदाता से प्रश्न पूछने की शक्ति किस नियम से आती है?

ईवीएम मतदान में नियम 40-क से। आदेश की प्रस्तावना नियम 40 उद्धृत करती है, किन्तु नियम 77-क के कारण मशीन वाले मतदान में 40 के स्थान पर 40-क लगता है।

क्या प्रश्न पूछना विवेक है या कर्तव्य?

दोनों, स्थिति के अनुसार। नियम 40-क में स्वप्रेरणा से पूछना may है, किन्तु अभ्यर्थी या मतदान अभिकर्ता के कहने पर shall है। अर्थात् उनके कहने पर पूछना ही होगा।

मतदाता पहचान-पर्ची न लाए तो लौटा दें?

नहीं। नामावली में नाम ढूँढना प्रथम मतदान अधिकारी का कर्तव्य है। पर्ची न तो पहचान की गारंटी है, न शर्त।

पर्ची पर अभ्यर्थी का नाम या चुनाव चिन्ह छपा हो तो?

ऐसी पर्ची कानूनी अपराध है और उसे पीठासीन अधिकारी के संज्ञान में लाना चाहिए। किन्तु पर्ची का दोष मतदाता की पहचान समाप्त नहीं करता। मान्य पर्ची पर केवल नगरपालिका व वार्ड, केन्द्र की संख्या व नाम, मतदाता का नाम, तथा भाग व क्रम संख्या होती है।

पर्दानशीन महिला की पहचान कैसे कराएँ?

महिला मतदान अधिकारी अथवा महिला कर्मचारी से। यह व्यवस्था पहले से तय रखनी होती है।

चिन्हित प्रति में कौन-सा चिन्ह किसका है?

पहचाने गए हर मतदाता के नाम के नीचे रेखा; महिला के नाम के बाईं ओर टिक (√); थर्ड जेंडर के बाईं ओर स्टार (*)। इनके अतिरिक्त पी बी डाक मतपत्र वालों पर, ई डी सी निर्वाचन ड्यूटी प्रमाण-पत्र वालों पर, और टी निविदत्त मतपत्र जारी होने पर लगता है।

प्रतिरूपण का प्रयास हो तो किस धारा में कार्यवाही?

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 172, और दण्ड धारा 174 में। आदेश 5310 स्वयं यही कहता है। मार्गदर्शिका का परिशिष्ट-9 अब भी निरसित भारतीय दण्ड संहिता की धारा छापता है, इसलिए शिकायत में भा.न्या.सं. की धाराएँ ही लिखिए।

अमिट स्याही

किस अंगुली पर, और कैसे

सामान्य नगरपालिका मतदान में स्याही किस अंगुली पर?

बाईं तर्जनी पर। आधार नियम 35-क(2)(क) है।

पुनर्मतदान में कौन-सी अंगुली?

बाईं मध्यमा। आधार परिशिष्ट-18, अर्थात् आदेश 2205 दिनांक 04.07.2019 का निर्देश 2।

लोकसभा या विधानसभा चुनाव के तुरन्त बाद हो तो?

तब दाईं तर्जनी पर, और सभी मतदाताओं की। यह तभी लागू होता है जब पूर्व निर्वाचन का निशान अभी दृष्टव्य हो। यह स्थिति जिला या आयोग के आदेश से पुष्ट कर लीजिए।

बाईं तर्जनी न हो तो क्या क्रम है?

नियम 35-A(2)(b) का क्रम यह है। बाईं तर्जनी न हो तो बाएँ हाथ की कोई अन्य अंगुली; बाएँ हाथ की सभी अंगुलियाँ न हों तो दाईं तर्जनी; और दोनों हाथों की अंगुलियाँ न हों तो बाईं या दाईं बाँह का वह छोर जो उसके पास है। क्रम छोड़ा नहीं जाता।

बाईं तर्जनी पर पहले से स्याही का निशान दिखे तो?

नियम 35-क(2)(क) का पहला परन्तुक कहता है कि ऐसा चिन्ह पहले से हो तो यह समझा जाएगा कि वह पहले ही मत दे चुका है और उसे मत नहीं देने दिया जाएगा। यह उपधारणा नियम स्वयं बनाता है। प्रकरण पीठासीन अधिकारी के पास जाएगा।

मतदाता स्याही लगवाने से इनकार कर दे?

दूसरा परन्तुक कहता है कि स्याही लगवाए बिना किसी मतदाता को मत नहीं देने दिया जाएगा। इसमें कोई अपवाद नहीं है। ऐसा मतदाता प्ररूप 14-ग की आइटम 4 में गिना जाएगा।

स्याही अंगुली पर कहाँ तक लगेगी?

नाखून के आखिरी सिरे से प्रथम जोड़ के नीचे तक, ब्रश की सहायता से। आधार परिशिष्ट-17, अर्थात् आदेश 1408 दिनांक 04.02.2026 का निर्देश 1, जिसमें आरेख भी है।

Ballot दबाने से पहले स्याही की जाँच किसका काम है?

नियंत्रण यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी का। आदेश 1408 का निर्देश 2 नाम लेकर यह कर्तव्य उन पर डालता है। लगाना द्वितीय मतदान अधिकारी का काम है, Ballot से पूर्व जाँचना तृतीय का।

परिशिष्ट-17 और परिशिष्ट-18 में टकराव है क्या?

नहीं। दोनों अलग प्रश्नों के उत्तर हैं। आदेश 1408 बताता है कैसे लगाएँ और कौन जाँचेगा; आदेश 2205 बताता है किस अंगुली पर। आदेश 1408 ने पत्र 5493 दिनांक 26.07.2015 को अधिक्रमित किया है, आदेश 2205 को नहीं।

मतदाता रजिस्टर — प्ररूप 14-क

चार स्तम्भ, और उनका अनुशासन

प्ररूप 14-क में कौन-से चार स्तम्भ होते हैं?

स्तम्भ 1 में क्रम संख्या, स्तम्भ 2 में निर्वाचक नामावली की क्रम संख्या, स्तम्भ 3 में हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप, और स्तम्भ 4 में अभ्युक्तियाँ। विधिक आधार नियम 35-क एवं नियम 78 है।

स्तम्भ 4 में हर मतदाता के लिए क्या लिखा जाता है?

पहचान दस्तावेज़ की क्रम संख्या के अन्तिम चार डिजिट। संख्या चार अंक से कम हो तो पूरी संख्या। यह विशेष प्रकरणों के लिए नहीं, हर मतदाता के लिए है।

क्या स्तम्भ 1 की क्रम संख्या कभी बदली जा सकती है?

किसी भी दशा में नहीं। क्रम भंग हो जाए तब भी नहीं। ऐसी स्थिति में स्तम्भ 4 में वास्तविक क्रम संख्या की टिप्पणी लिखी जाती है, और बाद के प्रभावित मतदाताओं के सामने भी।

हस्ताक्षर का अर्थ क्या है?

पूरा नाम लिखना। कोई साक्षर व्यक्ति केवल निशान बना दे तो उससे अंगूठा निशानी ली जाती है। वह भी न करे तो मत देने की अनुमति नहीं, क्योंकि नियम 35-क(1) का परन्तुक हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी के बिना मतदान नहीं होने देता।

अंगूठा निशानी का क्रम क्या है?

बायाँ अंगूठा, फिर दायाँ अंगूठा, फिर बाएँ हाथ की तर्जनी से प्रारम्भ होने वाली अंगुली, फिर दाएँ हाथ की तर्जनी, फिर तर्जनी से प्रारम्भ होने वाली अंगुली। निशान प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं, केवल स्पष्ट होना चाहिए।

किसी ने हस्ताक्षर कर दिए पर मत नहीं डाला, क्या लिखें?

स्तम्भ 4 में “No Vote”। मार्गदर्शिका कहती है कि ऐसे मतदाता को पहले नोटा में मत डालने के लिए प्रेरित कीजिए; फिर भी न डाले तो यही अंकन होगा। यह संख्या आगे प्ररूप 14-ग की आइटम 3 में जाती है।

रजिस्टर किस लिफाफे में जाएगा?

सीलबन्द लिफाफा E-2 में। यह उन कागज़ों में है जिन्हें नियम 74-क न्यायालय के आदेश बिना खोलने से रोकता है।

नियंत्रण यूनिट एवं मतदान

Ballot, Total, और मशीन की भाषा

Ballot बटन कौन दबाएगा?

सामान्यतः तृतीय मतदान अधिकारी, जो मार्गदर्शिका अ.2(3) के अनुसार नियंत्रण यूनिट का प्रभारी होता है। छोटे मतदान केन्द्रों पर यह काम पीठासीन अधिकारी भी कर सकते हैं। ECIL की 2019 वाली पुस्तिका में सब क्रियाएँ पीठासीन अधिकारी के नाम से लिखी हैं, वह वर्णन इससे अधिक्रमित है।

Ballot दबाने से पहले क्या-क्या देखना है?

तीन बातें। एक, मतदाता के पास द्वितीय मतदान अधिकारी की जारी की हुई मतदाता पर्ची हो। दो, अमिट स्याही का निशान स्पष्ट हो। तीन, पिछला मतदाता मतदान पूरा करके कक्ष से बाहर आ चुका हो।

मतदान कक्ष में प्रवेश किस आधार पर मिलता है?

केवल द्वितीय मतदान अधिकारी की जारी की हुई मतदाता पर्ची पर। अशासकीय पहचान-पर्ची अलग चीज़ है और उससे प्रवेश नहीं मिलता।

Total बटन कब नहीं दबाना चाहिए?

जब Busy बत्ती जली हुई हो, क्योंकि उसका अर्थ है कि कोई मतदाता अभी मत डाल रहा है। शेष समय में बीच-बीच में Total से संख्या ज्ञात कर रजिस्टर से मिलान करना कर्तव्य है; वही संख्या डायरी के बिन्दु 21 में चार बार लिखी जाती है — 10 बजे तक, 1 बजे तक, 3 बजे तक और समाप्ति तक। (मार्गदर्शिका अ.2(3)8 में यहाँ “बिन्दु सं. 19” मुद्रित है, पर परिशिष्ट-7 में बिन्दु 19 दृष्टिहीन मतदाताओं की संख्या का है।)

बीप बजते समय नियंत्रण यूनिट बन्द कर सकते हैं?

कभी नहीं। बीप का अर्थ है कि क्रिया अभी पूरी नहीं हुई। बीप समाप्त होने पर लाल बत्ती और Busy बुझेंगे, तभी मत रिकार्ड पूरा माना जाता है।

मशीन की बत्तियों का क्या अर्थ है?

नियंत्रण यूनिट की हरी बत्ती का अर्थ बिजली चालू; लाल Busy का अर्थ मशीन व्यस्त; बैलेट यूनिट की हरी Ready का अर्थ मतदाता अब मत डाल सकता है; अभ्यर्थी के सामने लाल तीर का अर्थ उसे मत दर्ज हुआ; और बीप के साथ सब बत्तियाँ बुझना का अर्थ मत डल गया।

पर्ची जारी होने का क्रम टूट जाए तो?

रजिस्टर के स्तम्भ 4 में टिप्पणी लिखवाइए, और बाद के प्रभावित मतदाताओं के लिए भी समरूप प्रविष्टि कराइए। स्तम्भ 1 की क्रम संख्या फिर भी नहीं बदलेगी।

आक्षेपित मत — चुनौती

₹2 का प्रश्न, जहाँ मार्गदर्शिका और नियम अलग हैं

चुनौती कौन दे सकता है, और पहला कदम क्या है?

नियम 43(1) के अनुसार कोई भी मतदान अभिकर्ता किसी व्यक्ति की पहचान को चुनौती दे सकता है, और उसके लिए पीठासीन अधिकारी के पास नगद ₹2 जमा करने होंगे। मार्गदर्शिका अ.6(2) भी कहती है कि राशि जमा हुए बिना चुनौती स्वीकार न करें।

रसीद किस प्ररूप में दी जाती है?

परिशिष्ट-13 की चैलेंज फीस रसीद बुक में। उसका प्रतिपर्ण स्वयं “नियम 43(5) के अन्तर्गत” लिखता है।

संक्षिप्त जाँच का क्रम क्या है?

पहले चुनौतीकर्ता प्रथम दृष्ट्या सिद्ध करे कि व्यक्ति असली मतदाता नहीं है। वह ऐसा न कर पाए तो चुनौती नहीं मानी जाएगी। सिद्ध कर दे, तभी मतदाता से खण्डन का साक्ष्य माँगा जाता है। दोनों को शपथ दिलाई जाती है, और आसपास के लोगों से तथ्य जानने के लिए पीठासीन अधिकारी स्वतंत्र हैं।

₹2 जब्त कब होंगे?

नियम 43(5) की कसौटी यह है कि चुनौती तुच्छ (frivolous) हो अथवा सद्भावना में न दी गई हो। उसके शब्द हैं, and in any other case, he shall return the deposit। अर्थात् शेष हर स्थिति में राशि लौटानी है।

पर मार्गदर्शिका तो कुछ और कहती है?

हाँ, और यही वह बिन्दु है जहाँ सावधानी चाहिए। मार्गदर्शिका अ.6(2) कहती है कि चुनौती सही पाई जाए तो राशि जब्त कर लीजिए। इससे उस चुनौतीकर्ता की राशि जब्त होगी जो सही निकला, जो निक्षेप के प्रयोजन के विपरीत है। नियम प्रभावी है, क्योंकि नियम 43 ईवीएम मतदान पर लागू है — नियम 77-क की अपवाद-सूची में 43 है ही नहीं — और आयोग का अपना परिशिष्ट-13 स्वयं नियम 43(5) का हवाला देता है। कक्षा में इसे अकेले खण्डित न कीजिए; जिला निर्वाचन अधिकारी से लिखित स्पष्टीकरण लेकर चलिए।

निर्णय कहाँ लिखा जाता है?

प्ररूप-13 के स्तम्भ 8 में, कारण सहित। जब्त करना हो तो नियम की भाषा ही लिखिए, अर्थात् तुच्छ अथवा सद्भावना में नहीं। स्तम्भ 9 तथा रसीद के प्रतिपर्ण पर जब्ती की दशा में हस्ताक्षर के स्थान पर ‘जब्त’ शब्द जाता है।

चुनौती सिद्ध हो जाए तो आगे क्या?

उस व्यक्ति को मत देने से वर्जित कीजिए, ड्यूटी पर तैनात पुलिस को सौंपिए, और क्षेत्र के थानाधिकारी को परिशिष्ट-9 का शिकायती पत्र भेजिए। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 और 174 लिखिए।

प्ररूप-13 और रसीद बुक किन लिफाफों में जाएँगे?

प्ररूप-13 सीलबन्द लिफाफा E-7 में, और चुनौती-रसीद बुक लिफाफा E-14 में, जो सील नहीं किया जाता।

निविदत्त मत

जब कोई और आपके मतदाता के नाम से मत दे जाए

निविदत्त मतपत्र कब दिया जाता है?

जब किसी मतदाता के नाम से कोई और मत देकर जा चुका हो और बाद में असली मतदाता आए। उसे मशीन से मत रिकार्ड कराने के बजाय टेण्डर मतपत्र दिया जाता है। दूसरा व्यक्ति असली है या नहीं, यह पोलिंग एजेंटों की सहायता से पीठासीन अधिकारी तय करते हैं। आधार मार्गदर्शिका अ.8(1) और नियम 44-क है।

मतदान केन्द्र पर कितने निविदत्त मतपत्र मिलते हैं?

बीस। कम पड़ें तो जोनल मजिस्ट्रेट को बताया जाता है।

जारी करने का सही क्रम क्या है?

पहचान से संतुष्ट होइए, फिर बाएँ हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही लगवाइए, फिर प्ररूप 14-ख में प्रविष्टि कर मतदाता के हस्ताक्षर या अंगूठा लीजिए, और इसके पश्चात ही मतपत्र जारी कीजिए। क्रम उलटा नहीं होता।

मतपत्र पर क्या-क्या अंकित होगा?

वह वही मतपत्र होगा जो मतदान यूनिट में लगा है। उसकी पीठ पर ‘निविदत्त मतपत्र’ की स्टाम्प लगेगी, और स्टाम्प न हो तो हाथ से लिखकर नीचे हस्ताक्षर। साथ ही सुभिन्नकारी चिन्ह की मोहर, जिसमें ऊपर वार्ड और नीचे मतदान केन्द्र का क्रमांक होता है।

चिन्हित मतपत्र और सूची कहाँ जाएँगे?

मतपत्र लिफाफा E-5 में और प्ररूप 14-ख पृथक लिफाफा E-6 में। दोनों मतदान समाप्ति के बाद सीलबन्द होते हैं।

क्या निविदत्त मत गिने जाते हैं?

नहीं। नियम 63-क(3) के अनुसार वे गिने नहीं जाते। किन्तु उनकी संख्या प्ररूप 14-ग की आइटम 7 में और प्ररूप-21 की मद (v) में दर्ज होती है। गिनना नहीं, गिनती लिखनी है।

दृष्टिहीन एवं शिथिलांग मतदाता

साथी की अनुमति, और उसकी सीमाएँ

साथी की अनुमति किस आधार पर दी जाती है?

केवल दृष्टिहीनता अथवा अंग-शिथिलता के कारण, जब मतदाता प्रतीक पहचानने या बटन दबाने में असमर्थ हो। आधार मार्गदर्शिका अ.7 है।

क्या निरक्षर होना पर्याप्त है?

नहीं। मार्गदर्शिका स्पष्ट कहती है कि केवल निरक्षर होना साथी की अनुमति के लिए पर्याप्त नहीं है।

साथी की न्यूनतम आयु क्या है?

अठारह वर्ष। इससे कम आयु का साथी नहीं हो सकता।

एक व्यक्ति कितने मतदाताओं का साथी बन सकता है?

एक दिन में केवल एक का। साथी परिशिष्ट-12 में यही घोषणा करके देता है कि वह मत गुप्त रखेगा और किसी अन्य निर्वाचक का साथी नहीं बना।

अनुमति कौन देगा?

पीठासीन अधिकारी। द्वितीय मतदान अधिकारी यह निर्णय नहीं कर सकते, चाहे स्थिति कितनी ही स्पष्ट हो। अनुमति के बाद रजिस्टर की प्रविष्टि उनका काम है।

अभिलेख कहाँ रखा जाता है?

सूची प्ररूप-12 में और साथी की घोषणा परिशिष्ट-12 में। दोनों लिफाफा E-14 में जाते हैं, और वह लिफाफा सीलबन्द नहीं होता।

मशीन में ब्रेल है, फिर भी साथी मिलेगा?

हाँ। नई मशीनों की बैलेट यूनिट में दाईं ओर ब्रेल लिपि में अभ्यर्थियों के क्रमांक होते हैं, जिससे दृष्टिहीन मतदाता स्वयं मत दे सकते हैं। फिर भी वे नियमों के अन्तर्गत साथी की सहायता के हकदार बने रहते हैं। सुविधा उपलब्ध होने से अधिकार समाप्त नहीं होता।

दिव्यांग मतदाताओं के लिए और क्या व्यवस्था है?

आदेश 4297 दिनांक 24.10.2019 प्राथमिकता, रैम्प और आवश्यक सहायता की व्यवस्था कहता है; स्थायी रैम्प न हो तो अस्थायी। ध्यान रखिए कि यह आदेश नियम 38-क का स्थान नहीं लेता — रैम्प देने से साथी की अनुमति की आवश्यकता समाप्त नहीं होती, और साथी की अनुमति से रैम्प की ज़िम्मेदारी।

मतदान समाप्ति एवं प्ररूप 14-ग

दिन का सबसे अधिक अंकगणित

प्ररूप 14-ग का मिलान-सूत्र क्या है?

आइटम 5 = आइटम 2 − आइटम 3 − आइटम 4। अर्थात् मशीन के अनुसार दर्ज मत, रजिस्टर में दर्ज कुल मतदाताओं में से उन दो श्रेणियों को घटाकर मिलने चाहिए जिन्होंने मत नहीं डाला।

आइटम 3 और आइटम 4 में क्या अन्तर है?

आइटम 3 उनकी है जिन्होंने रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए और फिर स्वयं मत न डालने का निश्चय किया, अर्थात् “No Vote” वाले। आइटम 4 उनकी है जिन्हें पीठासीन अधिकारी ने मत नहीं देने दिया, चाहे नियम 35-क के अधीन (स्याही या हस्ताक्षर से इनकार) या नियम 37-क के अधीन (प्रक्रिया या गोपनीयता भंग)। आइटम 4 वाले नोट के नीचे पीठासीन अधिकारी के पूर्ण हस्ताक्षर भी होते हैं।

मिलान न बैठे तो क्या करें?

संख्याएँ मत बदलिए। पहले Total दोबारा पढ़िए। फिर भी अन्तर रहे तो आइटम 6 में फर्क का विवरण लिखिए; उस आइटम का शीर्षक ही पूछता है कि मेल करती है या फर्क पाया गया।

आइटम 8 में क्या भरना है?

निविदत्त मतपत्रों का हिसाब, तीन उप-आइटम में: (क) प्राप्त, (ख) जारी और (ग) प्रयुक्त न किए और वापस, क्रम संख्या ‘से’ और ‘तक’ सहित। (ख) की गिनती आइटम 7 से मेल खानी चाहिए, और (ख) + (ग) = (क)।

आइटम 9 में पेपर सीलों का लेखा कैसे बनता है?

पाँच उप-आइटम में: प्रदाय की गई सीलों के क्रम संख्यांक, उनकी कुल संख्या, प्रयुक्त संख्या और उसका क्रमांक, रिटर्निंग अधिकारी को वापस की गई अप्रयुक्त संख्या (कुल घटा प्रयुक्त), और नष्ट हुई सीलों के क्रमांक। पिंक पेपर सील का पृथक लेखा बनाने की आवश्यकता नहीं।

प्ररूप 14-ग के शीर्ष में क्या छूट जाता है?

दोनों यूनिटों के पहचान संख्यांक, अर्थात् नियंत्रण यूनिट और मतदान यूनिट दोनों के। ये अनिवार्य हैं।

14-ग की दो प्रतियाँ कहाँ जाती हैं?

एक लिफाफा E-9 में और दूसरी पीठासीन अधिकारी की डायरी के साथ लिफाफा E-11 में। ये दोनों लिफाफे सील नहीं किए जाते।

E-9 पर कुछ लिखना भी होता है?

हाँ। नियम 49-क(2) के अनुसार लेखा पृथक लिफाफे में रखकर उस पर “Account of Votes Recorded” शब्द पृष्ठांकित करने हैं। केवल “E-9” लिख देना पर्याप्त नहीं है।

सीलबन्दी, लिफाफे एवं सुपुर्दगी

नियम 47-क से 50-क तक की शृंखला

मशीन सील करने का सही क्रम क्या है?

लेखा तैयार करके और अभिकर्ताओं को प्रतियाँ देकर ही मशीन सील कीजिए। पहले नियंत्रण यूनिट का पावर स्विच बन्द, फिर बैलेट यूनिट और नियंत्रण यूनिट का सम्बन्ध-विच्छेद — आदेश 145/2026 पैरा 2 और नियम 47-क(1), दोनों यही क्रम देते हैं। नियम 47-क(2) के अनुसार दोनों यूनिट पृथक-पृथक इस प्रकार सील होंगी कि सील तोड़े बिना खोलना सम्भव न हो। यहाँ दो स्रोत आपस में टकराते हैं। मार्गदर्शिका का अ.11(4)(2) उल्टा क्रम लिखता है, यानी पहले सम्बन्ध-विच्छेद और उसके बाद पावर। वह क्रम 2019 वाले आदेश का है। आदेश 145/2026 उसी मार्गदर्शिका के परिशिष्ट-20 में छपा है और उसने 2019 वाले आदेश को अधिक्रमित कर दिया है। इसलिए ड्यूटी पर वही मानिए जो नया आदेश कहता है — पहले पावर बन्द कीजिए।

अपनी सील कौन-कौन लगा सकता है?

नियम 47-क(3) में तीन वर्ग हैं — मतदान अभिकर्ता, निर्वाचन अभिकर्ता अथवा अभ्यर्थी स्वयं। केवल ‘पोलिंग एजेंट’ कहकर अभ्यर्थी को मना नहीं किया जा सकता।

कितने लिफाफे सीलबन्द होते हैं?

आठ, E-1 से E-8 तक: चिन्हित प्रति · मतदाताओं का रजिस्टर · प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ · अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र · प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र · निविदत्त मतों की सूची · आक्षेपित मतों की सूची · निर्वाचन ड्यूटी प्रमाण-पत्र। शेष छह (E-9 से E-14) सील नहीं किए जाते।

पैकेट किसकी उपस्थिति में बनते हैं?

नियम 48-क के अनुसार उपस्थित अभ्यर्थी, निर्वाचन अभिकर्ता अथवा मतदान अभिकर्ता की उपस्थिति में। यह शर्त नियम में है, छोड़ी नहीं जा सकती।

सील करने के बाद एक काम और बचता है, कौन-सा?

हर पैकेट पर उसकी अन्तर्वस्तु का विवरण पृष्ठांकित करना। नियम 48-क का अन्तिम वाक्य यही कहता है। यह नियम की अपेक्षा है, केवल सावधानी नहीं, और यही सबसे अधिक छूटता है।

रिटर्निंग अधिकारी को क्या-क्या सौंपना है?

नियम 50-क के अनुसार चार चीज़ें: मतदान मशीन, प्ररूप 14-ग का लेखा, नियम 48-क के अधीन बने सीलबन्द पैकेट, और मतदान में प्रयुक्त अन्य सभी कागज़ात।

मतदान स्थगित हो जाए तो समापन की कार्यवाही बाद में कर लें?

नहीं। नियम 54-क(1) कहता है कि स्थगन पर नियम 47-क, 48-क, 49-क और 50-क वैसे ही लागू होंगे मानो मतदान नियत समय पर बन्द हुआ हो। मशीन बन्द, यूनिट पृथक, सील, पैकेट, पृष्ठांकन, 14-ग और सुपुर्दगी — सब अभी।

नामनिर्देशन एवं संवीक्षा

रिटर्निंग अधिकारी की मेज

नामनिर्देशन पत्र कौन और कब तक दे सकता है?

नियम 12(6) के अनुसार अभ्यर्थी स्वयं अथवा उसके प्रस्तावकों में से कोई एक, प्रातः 10.30 से अपराह्न 3.00 बजे के बीच। अभ्यर्थी का स्वयं आना अनिवार्य नहीं है।

दलेतर अभ्यर्थी को कितने प्रस्तावक चाहिए?

नियम 12(2) के परन्तुक के अनुसार उसी वार्ड के पाँच निर्वाचक। मान्यताप्राप्त राजनैतिक दल के अभ्यर्थी के लिए एक प्रस्तावक पर्याप्त है, और दल का पत्र अन्तिम दिन 3 बजे तक प्रस्तुत करना होगा।

एक अभ्यर्थी के अधिकतम कितने नामनिर्देशन पत्र?

चार प्रति वार्ड। इससे अधिक प्रस्तुत हों तो पहले चार ही विचारणीय होंगे और शेष तत्काल अस्वीकृत।

संवीक्षा में नामनिर्देशन किन आधारों पर अमान्य हो सकता है?

नियम 13(1) सात आधार गिनाता है और सूची बन्द है: अभ्यर्थी नगरपालिका की नामावली में निर्वाचक न हो · निक्षेप न किया हो · न्यूनतम आयु न हो · अधिनियम के अधीन निरर्ह हो · प्रस्तावक उस वार्ड का निर्वाचक न हो · अभ्यर्थी या प्रस्तावक के हस्ताक्षर असली न हों · प्रस्तावक ने उसी वार्ड में एक से अधिक अभ्यर्थी का प्रस्ताव किया हो।

“अभ्यर्थी स्वयं नहीं आया” — क्या यह अमान्यता का आधार है?

नहीं। परिदान का ढंग नियम 13(1) के सात आधारों में है ही नहीं, और नियम 12(6) प्रस्तावक को स्पष्ट अनुमति देता है। इस आधार पर अस्वीकार करना विधि-विरुद्ध होगा। आयोग के अपने RO डेक में यही त्रुटि पकड़ी गई थी।

प्ररूप 3 में प्रतीक वाली घोषणा अधूरी रह जाए तो?

नियम 13(4) कहता है कि यह सारवान् प्रकृति का दोष नहीं माना जाएगा, और नियम 13(3) किसी असारवान् दोष पर नामनिर्देशन अस्वीकार करने से रोकता है।

अभ्यर्थी किसी और वार्ड की नामावली में है, चल जाएगा?

हाँ। नियम 12(3) के अनुसार नगरपालिका की नामावली में नाम रखने वाला व्यक्ति किसी भी वार्ड से लड़ सकता है। वार्ड की शर्त प्रस्तावक पर है, अभ्यर्थी पर नहीं।

निक्षेप कितना है?

नियम 22(1) के अनुसार नगरपालिका बोर्ड के वार्ड हेतु ₹2000 (महिला अथवा अ.जा./अ.ज.जा./अ.पि.व. के लिए ₹1000), नगर परिषद हेतु ₹4000 (छूट-दर ₹2000), और नगर निगम हेतु ₹6000 (छूट-दर ₹3000)। बालोतरा नगर परिषद है। एक से अधिक पत्र होने पर भी निक्षेप एक ही लिया जाता है।

निक्षेप जब्त कब होता है?

नियम 22(2) के अनुसार जब अभ्यर्थी सब अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त कुल वैध मतों का छठा भाग भी न पा सके। ध्यान दीजिए कि नियम का शब्द valid है; डाले गए और वैध मत एक बात नहीं हैं।

नाम वापसी वापस ली जा सकती है?

नहीं। नियम 16 कहता है कि वापसी की सूचना दे चुके अभ्यर्थी को उसे रद्द करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे अन्तिम तिथि शेष हो। वापसी प्ररूप 5 में, स्वयं या प्रस्तावक के द्वारा, 3 बजे से पूर्व। जेल या पुलिस अभिरक्षा में हों तो कोई प्राधिकृत व्यक्ति उनकी ओर से परिदान कर सकता है।

प्रतीक-आवंटन कब होता है?

नियम 20(2) के अनुसार नाम वापसी की अन्तिम तिथि के ठीक अगले दिन

एक अभ्यर्थी के दो पत्र थे और पहला अस्वीकृत हो गया, प्रतीक किसका चलेगा?

नियम 20(4) के अनुसार पहले परिदत्त पत्र में किया गया चयन, चाहे वह पत्र अस्वीकृत ही क्यों न हो गया हो।

दो अभ्यर्थी एक ही प्रतीक माँगें तो?

नियम 20(5)(ख) के अनुसार लॉट से तय होगा। उससे पहले यथासाध्य हर अभ्यर्थी को उसकी पसन्द के अनुरूप भिन्न प्रतीक दिया जाता है।

संवीक्षा में कमरे में कौन बैठ सकता है?

नियम 13(2) के अनुसार अभ्यर्थी, उनके निर्वाचन अभिकर्ता, प्रत्येक अभ्यर्थी का एक प्रस्तावक और लिखित रूप से प्राधिकृत एक अन्य व्यक्ति — और इनके अतिरिक्त कोई नहीं।

संवीक्षा स्थगित की जा सकती है?

नियम 14 के अनुसार केवल तब जब कार्यवाही दंगे, खुली हिंसा अथवा रिटर्निंग अधिकारी के नियंत्रण से बाहर के किसी कारण से बाधित हो। दस्तावेज़ लाने के लिए स्थगन नहीं होता।

वापसी के बाद केवल एक अभ्यर्थी बचे तो?

नियम 18 के अनुसार उसे निर्वाचित घोषित किया जाएगा, और निर्विरोध निर्वाचन का परिणाम प्ररूप 22-क में घोषित होगा।

मतगणना

गणन मेज से परिणाम की घोषणा तक

गणन मेज पर कौन-सी मशीन आएगी?

नियंत्रण यूनिट का वितरण मतदान केन्द्रों के क्रमानुसार होता है, अर्थात् केन्द्र 1 की CU गणन टेबल 1 पर। उसी केन्द्र का प्ररूप 14-ग भी साथ आता है। MPSV से परिणाम के लिए केवल CU चाहिए; BEL की MK-V में बैलेट यूनिट जोड़नी पड़ती है।

बक्से की सील टूटी मिले तो?

परिपत्र 2292 कहता है कि बक्से की सील अविकल न हो तब भी गड़बड़ी की सम्भावना नहीं, बशर्ते यूनिट की सीलें, विशेषतः स्ट्रिप सील और पिंक पेपर सील, अविकल हों। और स्ट्रिप सील या स्पेशल टैग क्षतिग्रस्त हो तब भी नहीं, बशर्ते परिणाम अनुभाग के भीतरी कवर की पिंक पेपर सील अविकल हो।

पेपर सील का क्रमांक किससे मिलाया जाता है?

प्ररूप 14-ग के भाग-1 की आइटम 9 से, और उपस्थित अभ्यर्थियों तथा अभिकर्ताओं को भी यह मिलान करने दिया जाता है।

क्रमांक मेल न खाए तो निर्णय किसका?

रिटर्निंग अधिकारी का। गणन पर्यवेक्षक स्वयं निर्णय नहीं लेगा, केवल तुरन्त सूचित करेगा। RO तय करेंगे कि यह लिपिकीय भूल है या छेड़छाड़ का सन्देह।

प्ररूप 14-ग के भाग-2 का कुल किससे मिलना चाहिए?

उसी प्ररूप के भाग-1 की आइटम 5 से, अर्थात् मशीन के अनुसार दर्ज कुल मतों से। मिलान के बाद गणन पर्यवेक्षक हस्ताक्षर करते हैं, फिर उपस्थित अभ्यर्थी या अभिकर्ता, तब प्ररूप RO को जाता है।

नोटा के मत का क्या होता है?

वे अलग कॉलम में दर्ज होते हैं और किसी अभ्यर्थी में जोड़े नहीं जाते। किन्तु परिणाम उनसे प्रभावित नहीं होता — सर्वाधिक वैध मत पाने वाला अभ्यर्थी ही निर्वाचित घोषित होगा।

प्ररूप-21 में क्या-क्या जाता है?

नियम 66 के अनुसार पाँच बातें: अभ्यर्थियों के नाम · प्रत्येक को मिले वैध मत · नोटा को मिले कुल मत · अमान्य घोषित मतों की संख्या · निविदत्त मतों की संख्या। ईवीएम में अमान्य मत सामान्यतः शून्य होते हैं, पर खाना खाली न छोड़िए, “NIL” लिखिए

पुनर्गणना का आवेदन कौन दे सकता है?

नियम 67(2) के शब्द हैं, the candidate or, in his absence, his counting agent। अर्थात् अभ्यर्थी, और उसकी अनुपस्थिति में ही उसका गणन अभिकर्ता। आवेदन लिखित होगा और उसमें आधार बताए जाएँगे।

क्या केवल माँगने से पुनर्गणना हो जाएगी?

नहीं। माँग करने वाले को प्रथम दृष्ट्या यह दिखाना होगा कि मतों की विवरणी ठीक नहीं है और न्याय के हित में पुनर्गणना आवश्यक है।

आवेदन अस्वीकार करने की कसौटी क्या है?

नियम 67(3) के अनुसार तब, जब आवेदन तुच्छ एवं अयुक्तियुक्त (frivolous and unreasonable) प्रतीत हो। और नियम 67(4) के अनुसार हर निर्णय लिखित में, कारण सहित होगा। निर्णय अन्तिम है, पर कारण अभिलिखित करना अनिवार्य।

परिणाम पत्र पर हस्ताक्षर के बाद पुनर्गणना माँगी जा सकती है?

नहीं। नियम 67(6) कहता है कि उसके बाद कोई आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा। इसीलिए उसी उप-नियम का परन्तुक कहता है कि हस्ताक्षर से पूर्व उपस्थित अभ्यर्थियों को अवसर देना अनिवार्य है, और परिपत्र 2292 उसे ‘एक-दो मिनट रोकिए’ के रूप में बताता है।

मतों की बराबरी हो जाए तो?

उन अभ्यर्थियों या उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं की उपस्थिति में तत्काल लॉटरी होगी। कार्यवाही विवरण बनेगा, हस्ताक्षर होंगे, वह पृथक लिफाफे में सुरक्षित अभिरक्षा में जाएगा, प्ररूप-21 एवं प्ररूप-22 में प्रविष्टि होगी, और सम्पूर्ण कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।

प्रति गणन मेज पर कितने गणन अभिकर्ता बैठ सकते हैं?

नियम 60(1)(घ) के अनुसार एक, और वह केवल अपनी आवंटित मेज पर। अभ्यर्थी और उसका निर्वाचन अभिकर्ता किसी भी मेज पर जा सकते हैं। फोटो पहचान पत्र या बैज के बिना किसी को प्रवेश नहीं।

मतगणना के बाद MPSV की नियंत्रण यूनिट सील होगी?

नहीं। ECIL MPSV और MPMV की CU सील नहीं होती; उनमें केवल SDMM सील होता है। अन्य मॉडलों में कैंडिडेट सैट सेक्शन की बैटरी हटाकर कवर पुनः सीलबन्द होता है। बैटरी हटाने से परिणाम मिटता नहीं, CU अपनी स्मृति बनाए रखती है।

SDMM की सीलबन्दी — मतगणना के बाद

परिणाम घोषित होते ही, गिनती कक्ष में ही

मतगणना के बाद SDMM का क्या होता है?

परिणाम की घोषणा के तुरन्त बाद, गिनती कक्ष में ही मेमोरी मॉड्यूल निकालकर सील किया जाता है। यह काम बाद के लिए नहीं टाला जाता। आधार — राज्य निर्वाचन आयोग के परिपत्र 705 दिनांक 20.01.2026 एवं 826 दिनांक 23.01.2026

सीलबन्दी कौन करता है?

पाँच सदस्यों की टीम — एक सीलिंग प्रभारी और चार सहायक, रिटर्निंग अधिकारी की देखरेख में। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य है।

SDMM सील करने की पूरी शृंखला क्या है?

आठ चरण, बाहर से बाहर की ओर — 1. मेमोरी मॉड्यूल कंट्रोल यूनिट से निकालकर छोटी प्लास्टिक डिब्बी (4.5×4.0×2.0 सेमी) में। 2. पेपर सील पर चुनाव-विवरण भरकर हस्ताक्षर; 'D' स्टिकर डिब्बी पर, 'M' चिह्न मिलाते हुए पेपर सील लपेटिए। 3. डिब्बी को चारों ओर रबर बैंड से कसिए ताकि सील पूरी तरह बन्द रहे। 4. सीलबन्द डिब्बी लिफाफे (12×9 सेमी) में, विवरण भरकर मोम से सील। 5. लिफाफा मध्यम डिब्बे (10×6.5×2.5 सेमी) में; मतदान केन्द्र का स्टिकर लगाइए। 6. मध्यम डिब्बे को 1 इंच पारदर्शी टेप से चारों ओर पैक कीजिए। 7. कई मध्यम डिब्बे बड़े डिब्बे (30×12.5×7.5 सेमी) में — वार्ड अनुसार अलग; बड़ा स्टिकर, 3 इंच टेप। 8. बड़े डिब्बे लोहे के बॉक्स (25 x 22 x 18 इंच) में — वार्ड अखण्ड; बॉक्स बन्द कर मोम से सील और खजाने (ट्रेजरी) में सुरक्षित

SDMM और DMM की सील का रंग अलग क्यों है?

MPSV का SDMM — गुलाबी सील एवं लिफाफा; MPMV का DMM — सफेद। मशीन का प्रकार सील के रंग से ही पहचान में आ जाता है।

मॉड्यूल सील करने के बाद क्या EVM को भी अलग से सील करना है?

नहीं। मेमोरी मॉड्यूल सील हो जाने के बाद EVM को अलग से सील करना आवश्यक नहीं है — चुनाव का पूरा डेटा मॉड्यूल में ही रहता है।

सील किया हुआ मॉड्यूल कहाँ रखा जाता है, और कब निकाला जाता है?

ट्रेजरी में सुरक्षित रखा जाता है। न्यायालय द्वारा आवश्यकता पड़ने पर ही उपलब्ध कराया जाता है — इसीलिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी रखी जाती है।

SDMM निकालने से पहले क्या ध्यान रखना है?

कंट्रोल यूनिट बन्द (OFF) कीजिए। CU चालू रहते SDMM न लगाइए, न निकालिए। यही बात BU जोड़ने-हटाने पर भी लागू है।

CLEAR क्यों नहीं चल रहा?

CLEAR तभी सम्भव है जब BU-1 कंट्रोल यूनिट से जुड़ा हो और CU के अन्दर SDMM लगा हो। केबल निकली हो, जुड़ी यूनिट का स्लाइड स्विच 1 पर न हो, या SDMM ढीला हो — तीनों में से कोई भी हो तो CLEAR नहीं चलेगा। SDMM ढीला हो तो: CU बन्द कीजिए, SDMM ठीक से बैठाइए, फिर CU चालू कीजिए।