साथी-पुस्तक · मतदान दल में आपका पहला दिन
रवानगी से रसीद तक — मतदान दल में आपके पहले दिन की सचित्र साथी-पुस्तिका
हर चुनाव में कुछ लोग पहली बार मतदान दल में जाते हैं।
उन्हें प्रशिक्षण मिलता है, मार्गदर्शिका मिलती है, चेकलिस्ट मिलती है, और फिर भी रवानगी की रात एक बेचैनी बनी रहती है। मैंने प्रशिक्षण देते हुए यह बात बार-बार देखी: प्रश्न प्रायः यह नहीं होता कि नियम क्या कहता है। प्रश्न यह होता है कि "वह क्षण आएगा तब मुझे क्या करना होगा, और किस क्रम में?"
इसका कारण सामग्री की कमी नहीं है। कारण उसका आकार है। मार्गदर्शिका एक संदर्भ-ग्रंथ है — वह उस व्यक्ति के लिए बनी है जो जानता है कि उसे क्या ढूँढ़ना है। जो पहली बार जा रहा है, उसे यही नहीं पता होता कि ढूँढ़ना क्या है। वह अनुक्रमणिका में "निविदत्त मत" तब खोजेगा जब उसके सामने वह मतदाता खड़ा होगा जिसका मत पहले ही पड़ चुका है, और उस समय पन्ने पलटने का अवसर नहीं होता।
इसलिए यह पुस्तिका नियमों के क्रम में नहीं, दिन के क्रम में लिखी गई है। सामग्री लेने से लेकर तीनों काउंटरों पर रसीद लेने तक, जो जिस क्षण सामने आएगा, वह उसी क्षण पर लिखा है। और हर बात के साथ यह भी कि वह क्यों है, क्योंकि जो बात समझ में आ जाती है वह याद रखनी नहीं पड़ती।
दो अध्याय जान-बूझकर जोड़े गए हैं, जो प्रायः किसी सामग्री में नहीं मिलते। अध्याय 9 उन पाँच स्थितियों का है जिनमें नया कार्मिक सचमुच घबराता है: चुनौती, निविदत्त मत, मत देने से इंकार, मशीन का संदेश, और भीड़। और अध्याय 11 उस बात का, जिस पर कोई प्रशिक्षण खुलकर बात नहीं करता — गलती हो जाने के बाद क्या करें। मेरा अनुभव यह है कि नुकसान गलती से नहीं होता; गलती छिपाने से होता है।
यह किसी संस्था का प्रकाशन नहीं है। यह एक प्रशिक्षक का अपना प्रयास है, आयोग की प्रकाशित सामग्री पढ़कर, उसे उस क्रम में रखकर जिसमें वह काम आती है। जहाँ मुझे कोई बात मूल स्रोत में स्पष्ट नहीं मिली, वहाँ मैंने अनुमान लगाने के बजाय यह लिख दिया है कि वह स्पष्ट नहीं है। यही एकमात्र ईमानदार तरीका था।
त्रुटि रह गई हो, और लंबी सामग्री में रह जाती है, तो कृपया बताइए। जो सुधार समय पर मिल जाए, वह अगले पाठक को बचा लेता है।
आपका मतदान दिवस शांत बीते।
भरत चौधरी
ब्लॉक स्तरीय मास्टर ट्रेनर (BLMT) · व्याख्याता, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जेठन्तरी (ब्लॉक समदड़ी, बालोतरा)
कृपया इस पृष्ठ को छोड़िए मत। आगे की हर बात इसी शर्त पर पढ़ी जानी है।
यह है: राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान की मार्गदर्शिका, राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम 1994, तथा आयोग के प्रकाशित आदेशों को पढ़कर, मतदान दिवस के क्रम में सजाई गई एक पठन-सामग्री। हर तथ्य के साथ उसका स्रोत दिया गया है।
यह नहीं है: यह आयोग का प्रकाशन नहीं है। न यह किसी सरकारी संस्था द्वारा अनुमोदित है, न इसे कोई आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। यह विधिक परामर्श भी नहीं है।
1. मूल आदेश ही अंतिम है। इस पुस्तिका और किसी मूल आदेश, नियम अथवा मार्गदर्शिका में कहीं भी अंतर दिखे, तो मूल दस्तावेज़ सही है, यह पुस्तिका नहीं। तिथि, संख्या, नियम-संख्या और आँकड़े उपयोग से पहले मूल स्रोत से मिला लीजिए।
2. मौके पर रिटर्निंग अधिकारी का निर्देश सर्वोपरि है। मतदान केन्द्र पर यदि आपके रिटर्निंग अधिकारी, सेक्टर अधिकारी अथवा ज़ोनल मजिस्ट्रेट का निर्देश इस पुस्तिका से भिन्न हो, तो उनका निर्देश मानिए। यह पुस्तिका नहीं। इसे दिखाकर किसी निर्देश का विरोध न कीजिए।
3. आदेश बदलते रहते हैं। यह सामग्री नगरीय निकाय आम चुनाव 2026 के लिए, उपलब्ध आदेशों के आधार पर बनी है। मतदान से पहले जारी कोई नया आदेश इसमें दर्ज न हो। यह पूरी तरह संभव है। नवीनतम आदेश सदैव आयोग की वेबसाइट पर देखिए: sec.rajasthan.gov.in
4. जहाँ स्रोत मौन है, वहाँ यह पुस्तिका भी मौन है। कुछ स्थानों पर लिखा मिलेगा कि "मार्गदर्शिका में यह विहित नहीं है" अथवा "अपने रिटर्निंग अधिकारी से पुष्टि कर लीजिए"। यह अधूरापन नहीं, जान-बूझकर है। अनुमान लगाकर भरा गया खाना बाद में सबसे महँगा पड़ता है।
आपको एक आदेश मिला और आप "ड्यूटी" पर लगा दिए गए। पहली प्रतिक्रिया प्रायः यही होती है कि यह एक और सरकारी काम है, जो निपटाना है।
बात इससे थोड़ी अलग है, और यही अंतर आगे की हर बात की जड़ है।
जिस दिन आप मतदान केन्द्र पर बैठते हैं, उस दिन आप अपने विभाग के कर्मचारी नहीं रह जाते। उस एक दिन के लिए वह मतदान केन्द्र आपका है, और उसमें जो होता है उसके लिए उत्तरदायी आप हैं: कलक्टर नहीं, आयोग नहीं, आपका विभाग नहीं। आपके सामने जो पाँच सौ या हज़ार लोग आएँगे, उनके लिए "चुनाव" का अर्थ वही होगा जो उन्होंने आपकी मेज पर देखा।
इसीलिए दल का गठन इतनी सावधानी से होता है। नियम 28(1) के अनुसार निर्वाचन अधिकारी प्रत्येक मतदान केन्द्र के लिए एक पीठासीन अधिकारी और उसकी सहायता के लिए एक या अधिक मतदान अधिकारी नियुक्त करता है। जहाँ मतदाता 1400 तक हैं, वहाँ दल बनता है — एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी; 1400 से अधिक होने पर एक अतिरिक्त मतदान अधिकारी लगाया जा सकता है।
और इसीलिए दल जान-बूझकर मिलाकर बनाया जाता है: अलग-अलग विभागों के लोग, और ऐसे लोग जो उस क्षेत्र के निवासी न हों। यह किसी पर अविश्वास नहीं है। यह इसलिए है कि दिन के अंत में कोई यह न कह सके कि "वहाँ तो सब आपस में मिले हुए थे।"
याद रखिए नियम 28(3): यदि पीठासीन अधिकारी बीमारी या किसी अपरिहार्य कारण से केन्द्र से अनुपस्थित हो जाए, तो उसका कर्तव्य वह मतदान अधिकारी निभाएगा जिसे निर्वाचन अधिकारी ने इस हेतु नियुक्त किया हो। दल कभी नेतृत्वहीन नहीं छोड़ा जाता। (आदेश 4038, दिनांक 09.10.2025)
पूरी पुस्तिका में ये बार-बार लौटकर आएँगे, इसलिए एक बार यहीं देख लीजिए:
| क्या | कब / कितना |
|---|---|
| मतदान | प्रथम चरण 09.09.2026 (बुधवार), द्वितीय चरण 11.09.2026 (शुक्रवार) |
| मतदान का समय | प्रातः 7.00 से सांय 6.00 बजे तक |
| मतगणना | 14.09.2026 (सोमवार) |
| आदर्श आचार संहिता | 27.08.2026 से प्रभावी |
| पद | मतदान केन्द्र पर केवल एक पद — वार्ड सदस्य |
| मशीन | ECIL MPSV / MPMV अथवा BEL M3A — END बटन इस चुनाव में मास्क |
(निर्वाचन कार्यक्रम, प्रेस-नोट 6722 दिनांक 19.08.2026; आदेश 7380 दिनांक 27.08.2026)
अंतिम पंक्ति पर एक क्षण रुकिए। मतदान केन्द्र पर केवल एक पद का चुनाव है, वार्ड सदस्य। अध्यक्ष का निर्वाचन बाद में होगा, और वह निर्वाचित सदस्य करेंगे, मतदाता नहीं। इसलिए मशीन पर एक ही मतपत्र है, और जो END बटन आपने प्रशिक्षण की स्लाइडों में देखा होगा वह इस बार बन्द (मास्क) रहेगा। यदि कोई आपसे कहे कि "दो बटन दबाने हैं", तो वह किसी और चुनाव की बात कर रहा है।
पूरी पुस्तिका इसी क्रम में चलती है। जो पड़ाव जिस अध्याय का है, वह वहीं मिलेगा।
पहला काम काग़ज़ पढ़ने का है, और उसमें तीन बातें देखिए: आपका पद क्या है (पीठासीन, या प्रथम/द्वितीय/तृतीय मतदान अधिकारी), प्रशिक्षण कब और कहाँ है, और रवानगी किस दिन, किस स्थान से है।
प्रशिक्षण को औपचारिकता मत समझिए। यह पुस्तिका उसकी जगह नहीं ले सकती। वहाँ जो सुना, उसे बैठाने भर का काम करती है। जो प्रश्न कक्षा में पूछे जा सकते हैं, वे बूथ पर नहीं पूछे जा सकेंगे।
एक बात जो नए कार्मिक को अटपटी लगती है: आपका मतदान केन्द्र कौन-सा है, यह मतदान से तीन दिन पहले तक नहीं बताया जाएगा।
यह अव्यवस्था नहीं, सुरक्षा है, और आपके ही पक्ष में है। जिसे पहले से पता ही नहीं, उस पर कोई दबाव नहीं डाल सकता; न कोई "पहचान" निकालकर आपसे मिलने आ सकता है। इसलिए झुँझलाइए मत, और जब पता चल भी जाए तो उसे सार्वजनिक मत कीजिए। (आदेश 4038, दिनांक 09.10.2025)
यदि आप उसी निकाय के मतदाता हैं जहाँ ड्यूटी है, तो मतदान के दिन आप अपने बूथ पर नहीं होंगे। इसके लिए निर्वाचन ड्यूटी प्रमाण-पत्र — प्ररूप-16 (EDC) की व्यवस्था है, जिससे आप उस केन्द्र पर मत दे सकते हैं जहाँ ड्यूटी है। (नियम 46)
यह समय रहते करना होता है और इसकी प्रक्रिया आपके निर्वाचन अधिकारी बताएँगे। प्रशिक्षण के दिन ही पूछ लीजिए। हर चुनाव में कुछ कार्मिक केवल इसलिए मत नहीं दे पाते कि यह प्रश्न उन्होंने आख़िरी सप्ताह में पूछा।
आयोग आपको मतदान सामग्री देगा। अपनी सुविधा की चीज़ें आपको स्वयं ले जानी हैं, और मतदान केन्द्र प्रायः स्कूल का एक कमरा होता है जहाँ रात बितानी पड़ सकती है:
यह दिन का सबसे अव्यवस्थित घंटा होगा। भीड़, शोर, घोषणाएँ, और सबको जल्दी। ठीक उसी समय आपको वह काम करना है जिसे बाद में करना असंभव है — सामग्री गिनना।
इसे धीरे कीजिए। जो दल पंद्रह मिनट अधिक लगाकर सामग्री मिलाता है, वह रात को दो घंटे बचाता है। जो जल्दी में दस्तख़त कर देता है, उसे शाम को वह चीज़ नहीं मिलती जिसके बिना काम नहीं चलता, और तब कोई काउंटर खुला नहीं होता।
सामग्री परिशिष्ट-4 की रसीद पर मिलती है, और ये रसीदें आपके पास ही रहेंगी:
उस "20" पर निशान लगा लीजिए। रात को जब आप प्ररूप 14-ग की मद 8 भरेंगे, तब लिखना होगा कि कितने निविदत्त मतपत्र प्राप्त हुए थे। सुबह गिने नहीं, तो रात को अनुमान लगाना पड़ेगा — और उस काग़ज़ पर अनुमान नहीं चलता।


मशीन उठाकर चल देना सबसे महँगी भूल है। लेते ही यह कीजिए:
टूटी सील वाली यूनिट स्वीकार न करें। वहीं, उसी समय, लिखित में अवगत कराइए और बदलवाइए। यही एकमात्र क्षण है जब बदलना आसान है। बूथ पर पहुँचकर यह पकड़ना बहुत देर हो जाना है, और दिन के अंत में आपसे पूछा जाएगा कि आपने लेते समय देखा क्यों नहीं।
आयोग का अपना चेक मेमो है: परिशिष्ट-15, चौबीस मदों का। यही लीजिए और भरते चलिए। अपनी याददाश्त से बनाई सूची में हमेशा वही चीज़ छूटती है जिसकी ज़रूरत पड़ती है।
और मार्गदर्शिका की एक पंक्ति है, जिस पर हर पुराना पीठासीन अधिकारी सिर हिलाता है:
"अपनी स्मरण शक्ति और पूर्व अनुभवों पर कदापि निर्भर न रहें।" (मार्गदर्शिका, परिशिष्ट-14)
यह कठोर वाक्य नहीं, दयालु वाक्य है। मतदान के दिन आपका ध्यान सौ जगह बँटा होगा। जो लिखा हुआ साथ है, वही उस दिन आपका साथी है।
रवानगी से पहले दो मिनट निकालकर चारों लोग एक-दूसरे का नाम और मोबाइल नम्बर ले लीजिए। रास्ते में या केन्द्र पर कोई बिछड़ जाए तो यही काम आएगा।
और पीठासीन अधिकारी के लिए: अभी बता दीजिए कि कौन क्या करेगा। बूथ पर पहुँचकर काम बाँटने में जो समय जाता है, वह सुबह के उस घंटे में से जाता है जो पहले ही कम है।
रास्ता छोटा-सा अध्याय है, पर इसमें दो बातें हैं जो चूकती हैं।
पहली बात: सामग्री कभी अकेली न छोड़ें। वाहन में, चाय के ठहराव पर, कहीं भी। मशीन और सीलबन्द सामग्री उस क्षण से आपकी अभिरक्षा में हैं जब आपने रसीद पर हस्ताक्षर किए। यदि रास्ते में कुछ भी असामान्य हो: दुर्घटना, वाहन खराब, कोई रोके, तो सबसे पहले सेक्टर अधिकारी को सूचित कीजिए, और सामग्री के पास दल का कोई सदस्य रहे।
दूसरी बात: रास्ता याद रखिए। शाम को आपको इसी रास्ते लौटना है, प्रायः अँधेरे में, थके हुए, और सामग्री लेकर। जहाँ मुड़ना है वह देख लीजिए।
केन्द्र पर पहुँचकर, यथासंभव सांय 4 बजे तक, सबसे पहले अपने पहुँचने की सूचना सेक्टर अधिकारी को दीजिए।
आप पहुँच गए हैं। मतदान कल है। यह शाम आपके हाथ में है, और जो दल इस शाम का उपयोग कर लेता है उसकी सुबह शांत होती है।
कमरा खुलवाइए और देखिए कि आपको क्या मिला है। जो कमी है, वह आज रात ठीक हो सकती है; कल सुबह नहीं।
यह मत कीजिए मशीन की कोई सील आज रात न खोलिए, न मॉक पोल आज कीजिए। मशीन जुड़ेगी और मॉक पोल होगा कल सुबह, अभिकर्ताओं के सामने; यही उसका पूरा अर्थ है। आज रात मशीन सुरक्षित, बन्द और आपकी दृष्टि में रहेगी।
मशीन और सामग्री रात भर उसी कमरे में, दल की अभिरक्षा में रहेगी। कमरा बन्द रहे, और दल का कोई सदस्य वहीं रहे। तैनात सुरक्षाकर्मी से परिचय कर लीजिए और उसे बता दीजिए कि रात में कौन-कौन भीतर आ सकता है, अर्थात्, आपके दल के अलावा कोई नहीं।
यदि रात में कोई व्यक्ति, चाहे वह कितना ही परिचित या प्रभावशाली क्यों न हो — मशीन देखने या "व्यवस्था देखने" के नाम पर भीतर आना चाहे, तो विनम्रता से मना कीजिए और सेक्टर अधिकारी को सूचित कीजिए। यह अशिष्टता नहीं है; यही आपकी ड्यूटी है।
मतदान के दिन दल को नियत समय से 75 मिनट पूर्व केन्द्र पर होना है, और मशीन की तैयारी कम से कम एक घंटा पूर्व शुरू होनी है। (मार्गदर्शिका परिशिष्ट-14)
यानी सुबह 5.45 तक तैयार, ताकि 6 बजे मॉक पोल शुरू हो सके और 7.00 बजे ठीक समय पर पहला मतदाता भीतर आए। अलार्म दो लगाइए।
केन्द्र का ले-आउट परिशिष्ट-5 में दिया है, और उसके पीछे एक सीधा-सा विचार है: मतदाता एक दिशा में बहे, और उसका मत कोई न देखे।

यह प्रश्न दिन में कम से कम दस बार उठेगा, इसलिए इसे अभी पक्का कर लीजिए। नियम 29 के अनुसार मतदान केन्द्र में केवल ये लोग रह सकते हैं:
इस सूची में कोई और नहीं है। पत्रकार के पास जिला निर्वाचन अधिकारी का प्रवेश-पत्र हो तब भी वह बूथ के भीतर फोटो या वीडियो नहीं लेगा, और मोबाइल फोन भी भीतर नहीं ले जाएगा। (आदेश 1259, दिनांक 03.02.2026)
अभिकर्ता आपके विरोधी नहीं हैं। वे उस पारदर्शिता का हिस्सा हैं जिसके बल पर शाम को आपका काम टिकेगा। उन्हें मतदान प्रारम्भ से कम से कम एक घंटा पूर्व बुलाइए।
उनकी नियुक्ति प्ररूप 9 में होती है, और उस पर तीन खण्ड हैं: अभ्यर्थी की नियुक्ति, अभिकर्ता की सहमति, और गोपनीयता की घोषणा, जिस पर वह आपके सामने हस्ताक्षर करेगा। यह तीसरा खण्ड आपका अपना काम है; काग़ज़ ले लेना पर्याप्त नहीं।
एक अभ्यर्थी एक मतदान अभिकर्ता और दो बदली (रिलीवर) रख सकता है, पर भीतर एक समय में एक ही। बैठने का स्थान ऐसा दीजिए कि वे आते हुए मतदाता का चेहरा देख सकें (चुनौती इसी क्षण दी जा सकती है) पर मत पड़ते हुए न देख सकें। और उनके बैज पर किसी दल का चुनाव चिन्ह या अभ्यर्थी का नाम नहीं होगा।
यदि अभिकर्ता देर से आए उसे रोकिए मत। जो कार्यवाही पूरी हो चुकी है उसे दोबारा करने की आवश्यकता नहीं, पर वैध प्ररूप-9 रखने वाले को प्रवेश से मना नहीं किया जाता।
यदि आपने ईवीएम कभी हाथ में नहीं ली, तो यह अध्याय धीरे पढ़िए। मशीन दो टुकड़ों की है, और दोनों का काम बिल्कुल अलग है।


बैलट यूनिट (BU) वह है जो मतदान कम्पार्टमेंट में जाएगी। उस पर मतपत्र लगा है, हर अभ्यर्थी के सामने एक नीला बटन और एक तीर का निशान, और सबसे नीचे नोटा का अपना पैनल। ऊपर बाईं ओर एक हरी बत्ती है, "Ready"।
कंट्रोल यूनिट (CU) आपकी मेज पर रहेगी। यही तय करती है कि मत कब पड़ सकता है। उस पर आपके काम के दो बटन खुले दिखेंगे — BALLOT (बड़ा) और TOTAL (छोटा), और एक हरी 'On' बत्ती तथा एक लाल 'Busy' बत्ती।
बाकी बटन — CLOSE, RESULT, CLEAR — एक ढके हुए खण्ड में हैं, और मॉक पोल के बाद वह खण्ड सील कर दिया जाएगा। इसीलिए आगे बार-बार कहा जाएगा कि सीलिंग से पहले क्रम ठीक रखिए: एक बार सील लग गई तो CLOSE के अलावा कुछ सुलभ नहीं रहेगा।


जो आप कभी नहीं करेंगे कैंडिडेट सेट सेक्शन और बैलट यूनिट की सीलें रिटर्निंग अधिकारी ने लगाई हैं। आपको उन्हें केवल देखना है — खोलना कभी नहीं। मशीन का कैबिनेट खोलने की कोशिश करने पर यूनिट स्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती है।
मशीन बोलती नहीं, संकेत देती है। दिन भर आप इन्हीं से चलेंगे:
| संकेत | अर्थ |
|---|---|
| हरी 'On' बत्ती | मशीन चालू है |
| लाल 'Busy' बत्ती | BALLOT दब चुका है — मतदाता को मत देना है |
| BU की हरी 'Ready' बत्ती | यह यूनिट अब मत स्वीकार करेगी |
| तीर के पास लाल बत्ती + बीप | मत दर्ज हो गया |
| सब बुझ जाना | मशीन अगले मतदाता के लिए तैयार |
इतना ही याद रखना पर्याप्त है। जब Busy जल रही हो तो TOTAL मत दबाइए। मशीन उत्तर नहीं देगी, और आपको लगेगा कि कुछ बिगड़ गया।
अब वह भाग जिसमें नए कार्मिक सबसे अधिक घबराते हैं, और जहाँ गलती सबसे महँगी पड़ती है — मॉक पोल, जिसे मार्गदर्शिका "दिखावटी मतदान" कहती है।
मॉक पोल किसी औपचारिकता के लिए नहीं है। इसका एक ही उद्देश्य है: अभिकर्ताओं को अपनी आँखों से दिखा देना कि मशीन खाली है और ठीक चल रही है। यदि दिन के अंत में कोई कहे कि "मशीन में पहले से वोट पड़े थे", तो आपका उत्तर यह मॉक पोल और उस पर हुए हस्ताक्षर ही होंगे।
इसलिए इसे जल्दी-जल्दी निपटाने की चीज़ मत समझिए। यही वह आधा घंटा है जो आपको पूरे दिन बचाता है।
आयोग की सेक्टर-अधिकारी प्रस्तुति के अनुसार मॉक पोल मतदान प्रारम्भ के नियत समय से 60 मिनट पूर्व किया जाता है। यदि कोई अभिकर्ता न आए, या केवल एक ही आए, तो दल 15 मिनट प्रतीक्षा करेगा। फिर भी कोई न आए तो मॉक पोल पूर्ण कर, सीलिंग करके, नियत समय पर मतदान प्रारम्भ होगा। मतदान रोका नहीं जाएगा।
ध्यान दें मार्गदर्शिका में मॉक पोल का कोई घड़ी-समय विहित नहीं है; उपर्युक्त "60 मिनट + 15 मिनट" आयोग की इसी प्रस्तुति का निर्देश है। अपने रिटर्निंग अधिकारी के निर्देश से मिला लीजिए।
यह क्रम कंठस्थ कीजिए। यही इस पूरी पुस्तिका का सबसे महत्वपूर्ण पृष्ठ है।
दो चूकें, जो हर चुनाव में होती हैं
पहली: चरण 5 छोड़ देना। सीधे RESULT दबाने पर मशीन INVALID OPERATION दिखा देगी, और आप घबरा जाएँगे कि मशीन खराब है। मशीन ठीक है; क्रम गलत है। CLOSE के बिना RESULT नहीं।
दूसरी: चरण 8 भूल जाना। मॉक पोल के मत मिटाए बिना मतदान शुरू हो जाए तो वे मत असली गिनती में जुड़े रह जाएँगे। यदि ऐसा हो जाए तो स्वयं कुछ मत कीजिए। तुरन्त रिटर्निंग अधिकारी को सूचित कीजिए।
(मार्गदर्शिका अध्याय 4)
एक ही पंक्ति में याद रखिए — CLOSE के बिना RESULT नहीं; CLEAR के बिना मतदान नहीं।
मॉक पोल केवल मशीन पर नहीं होता, काग़ज़ पर भी उतरता है:
परिशिष्ट-19 को परिशिष्ट-6 के साथ नत्थी कर बिना सील लिफाफा E-10 में रखिए।
| मद | प्रविष्टि |
|---|---|
| मतदान केन्द्र | 84, वार्ड 27, न.प. बालोतरा |
| मॉक पोल का समय | प्रातः 6:00 से 6:20 |
| उपस्थित मतदान अभिकर्ता | 4 — नाम, पर्ची-क्रमांक और किसे मत दिया, तीनों दर्ज |
| डाले गए कुल मत | 14 — नोटा सहित प्रत्येक अभ्यर्थी को कम से कम एक-एक ✓ |
| मॉक पोल के बाद | CLEAR दबाकर परिणाम शून्य किया; TOTAL से 0 अभिकर्ताओं को दिखाया ✓ |
| हस्ताक्षर | चारों अभिकर्ता + पीठासीन अधिकारी |
यह नमूना काल्पनिक है — बनावट और मदें आधिकारिक, संख्याएँ केवल सिखाने के लिए। परिशिष्ट-6 के साथ नत्थी कर बिना सील लिफाफा E-10 में; डायरी की मद 30 में उल्लेख।
भाग-1 मतदान प्रारम्भ से पूर्व (धारा 128 जोर से पढ़कर), भाग-2 मशीन बदलने पर, भाग-3 समाप्ति पर — तीनों पर हस्ताक्षर लीजिए, और जो अभिकर्ता हस्ताक्षर से इन्कार करे उसका नाम भी लिखिए।
और एक काम, जो प्रायः छूट जाता है मतदान प्रारम्भ से पूर्व परिशिष्ट-6 की घोषणा पढ़ने के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 128 (मतदान की गोपनीयता) भी जोर से पढ़कर सुनाइए, फिर स्वयं हस्ताक्षर कीजिए और इच्छुक अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर करवाइए। (मार्गदर्शिका, मतदान प्रारम्भ से पूर्व)
और घोषणा पर हस्ताक्षर लेते समय एक बात: जो अभिकर्ता हस्ताक्षर करने से इन्कार करे, उसका नाम भी घोषणा पर लिखिए। इन्कार दर्ज करना उतना ही आवश्यक है जितना हस्ताक्षर लेना।
मॉक पोल के बाद परिणाम खण्ड सील होगा: पिंक पेपर सील, फिर धागा और विशेष टैग, फिर बाहरी कवर, और अंत में ABCD स्ट्रिप सील। इसमें तीन बातें अपने हाथ से कीजिए:



यह अंतिम बिन्दु छोटा दिखता है और सबसे अधिक काम आता है: मतगणना के दिन यही क्रमांक मिलाया जाएगा, और तभी यह सिद्ध होगा कि मशीन से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई।
विशेष टैग को CLOSE बटन के पास ऐसे रखिए कि शाम को CLOSE दबाना सुलभ रहे। यह भूल जाने पर शाम को टैग तोड़ना पड़ता है, और वह दृश्य किसी को अच्छा नहीं लगता।
सात बज गए। पहला मतदाता भीतर आ रहा है। अब ग्यारह घंटे वही चक्र चलेगा, सैकड़ों बार।
इसे नियमों की सूची की तरह मत सीखिए। एक मतदाता के साथ चलिए, आरंभ से अंत तक। फिर सारे नियम अपने आप अपनी जगह पर बैठ जाएँगे।
मतदाता आपके सामने आता है। PO-1 के पास नामावली की चिन्हित प्रति है, और उसका काम एक ही है: यह सिद्ध करना कि यह व्यक्ति वही है जो कहता है।
वह पहचान-दस्तावेज़ देखता है, नामावली में प्रविष्टि ढूँढ़ता है, और फिर वह काम करता है जो प्रायः छूट जाता है — मतदाता का नाम और क्रमांक ऊँची आवाज़ में बोलता है।
यह ज़ोर से बोलना औपचारिकता नहीं है। यही वह क्षण है जिसमें अभिकर्ता सुनकर आपत्ति कर सकता है कि "यह वह व्यक्ति नहीं है"। यदि नाम धीरे बोला गया, तो चुनौती का अवसर ही समाप्त हो गया, और बाद में आने वाला विवाद आपके सिर पर होगा। इसीलिए अभिकर्ताओं को ऐसे बिठाया जाता है कि वे आते हुए मतदाता का चेहरा देख सकें।
फिर PO-1 नामावली में उस प्रविष्टि को चिन्हित करता है, ताकि दुबारा वही व्यक्ति दुबारा न आ सके।
PO-2 के पास दो चीज़ें हैं जो पूरे दिन उसकी ज़िम्मेदारी हैं: रजिस्टर 14-क और अमिट स्याही।
स्याही पहले। बाएँ हाथ की तर्जनी पर, नख के बिल्कुल ऊपर, नख को छूते हुए, एक स्पष्ट रेखा। कम से कम 30 सेकंड सूखने दीजिए। और सबसे महत्वपूर्ण —
स्याही की जाँच BALLOT बटन दबाने से पहले होनी चाहिए, बाद में नहीं। (आदेश 1408, दिनांक 04.02.2026; मार्गदर्शिका अध्याय 2)
कारण सीधा है: एक बार BALLOT दब गया तो मत पड़ जाएगा। यदि तब पता चले कि स्याही पहले से लगी थी, तो कुछ नहीं किया जा सकता। जाँच का मूल्य केवल तभी है जब वह पहले हो।
फिर PO-2 रजिस्टर 14-क में प्रविष्टि करता है: नामावली की क्रम-संख्या, पहचान-दस्तावेज़ का ब्यौरा और मतदाता के हस्ताक्षर/अँगूठे का निशान, और उसे मतदाता पर्ची देता है। पर्ची पर वही क्रम-संख्या रहेगी जो रजिस्टर में है। (नियम 35-क)
इसी पृष्ठ पर नीचे FORM-14A / प्ररूप 14-क है (नियम 35-क) — स्तम्भ: क्रम सं. · नामावली में निर्वाचक की क्रम सं. · हस्ताक्षर/अँगूठा · टिप्पणी। दिन के अंत में इसकी कुल प्रविष्टियाँ ही 14-ग की मद 2 बनती हैं, इसलिए हर प्रविष्टि उसी क्रम में, उसी समय। भरा रजिस्टर चपड़ी से सीलबन्द E-2 में।
PO-3 कंट्रोल यूनिट के पास बैठा है, पीठासीन अधिकारी की मेज़ पर। मतदाता पर्ची लेकर उसके पास आता है। PO-3:
और यहाँ दो अनुशासन हैं जो पूरे दिन नहीं टूटने चाहिए:
मतदाता उसी क्रम में जाएगा जिस क्रम में उसका नाम मतदाता रजिस्टर में दर्ज है। इसी से रात को रजिस्टर और मशीन की संख्या मिलती है। (मार्गदर्शिका, मतदान की प्रक्रिया)
BALLOT तभी दबेगा जब पिछला मतदाता मत देकर कम्पार्टमेंट से बाहर निकल जाए (मत पूरा होने पर लम्बी बीप सुनाई देती है)। एक समय में कम्पार्टमेंट में केवल एक व्यक्ति। यह जल्दबाज़ी में सबसे पहले टूटता है, और यही गोपनीयता का सबसे बड़ा उल्लंघन बन जाता है।
BALLOT दबते ही CU पर लाल Busy बत्ती जलेगी और बैलट यूनिट की हरी Ready बत्ती जल जाएगी। अब मशीन एक मत स्वीकार करेगी, केवल एक।
मतदाता भीतर जाता है, अपने अभ्यर्थी के सामने का नीला बटन दबाता है। तीर के पास लाल बत्ती जलती है, एक लम्बी बीप होती है। मत दर्ज हो गया।
यदि वह किसी को नहीं चुनना चाहता, तो सबसे नीचे नोटा का पैनल है — अंतिम अभ्यर्थी के बाद, अपने बटन के साथ। (सां.आ. 144/2026, आदेश 521 दिनांक 15.01.2026)
बत्तियाँ बुझ जाती हैं। मशीन अगले मतदाता के लिए तैयार है। मतदाता निकास द्वार से बाहर जाता है, उसी रास्ते से नहीं जिससे आया था।
कोई भी उसके साथ भीतर नहीं जाएगा, न अभिकर्ता, न दल का सदस्य, न आप। इस एक क्षण के लिए पूरा तंत्र खड़ा किया गया है।
यही चक्र चलता रहेगा। बीच-बीच में तीन बातें ध्यान रखिए:
अब वह अध्याय जिसके लिए यह पुस्तिका लिखी गई। ऊपर का सब कुछ सामान्य दिन है। नीचे के पाँच पल वे हैं जिनमें नया कार्मिक घबराता है, और घबराहट में गलत निर्णय ले लेता है।
हर स्थिति में क्रम एक ही है: रुकिए → समझिए क्या हुआ → नियत काग़ज़ भरिए → आगे बढ़िए। कोई भी स्थिति ऐसी नहीं है जिसका उत्तर पहले से लिखा न हो।
यह आक्षेपित मत (Challenged Vote) है, और यह आपके विरुद्ध आरोप नहीं है। यह व्यवस्था का अपना उपकरण है।
क्या कीजिए:
और अब वह बात जिस पर सबसे अधिक भ्रम है — राशि का क्या होगा:
नियम 43(5): राशि तभी जब्त होगी जब चुनौती तुच्छ (frivolous) अथवा सद्भावपूर्वक न की गई पाई जाए। अन्य हर दशा में राशि लौटाई जाएगी — चुनौती सही सिद्ध होने पर भी।
ध्यान दीजिए, यह उलटा नहीं है। बहुत लोग यह समझते हैं कि "चुनौती सही निकली तो राशि लौटेगी, गलत निकली तो जब्त"। यह ग़लत है। सही चुनौती पर राशि लौटती ही है; जब्ती केवल दुर्भावना पर है। आयोग के अपने प्रशिक्षण डेक (Polling Party PPT-2, स्लाइड 51–53) में भी यही है।
प्ररूप-13 सीलबन्द लिफाफा E-7 में जाएगा; रसीद बुक लिफाफा E-14 में।


| रसीद संख्या | 02 | प्राप्त राशि | ₹2/- नकद |
| किसके विरुद्ध | नामावली भाग 3, क्रम संख्या 412 | ||
| दिनांक | 11.09.2026 | हस्ताक्षर | पीठासीन अधिकारी ✓ |
प्रतिपर्ण के दो खानों में से जो लागू न हो उसे काटिए — जब्ती केवल तुच्छ/असद्भावपूर्ण चुनौती पर (नियम 43(5)); अन्य हर दशा में राशि वापस, चुनौती सही निकलने पर भी।
मतदाता आता है और पता चलता है कि उसके नाम से पहले ही मत पड़ चुका है। वह क्रोधित है, और सही है।
यह निविदत्त मत (Tendered Vote) है। मशीन में यह मत नहीं जाएगा। यह काग़ज़ के मतपत्र पर लिया जाएगा, अलग रखा जाएगा, और गिनती में तभी आएगा जब न्यायालय आदेश दे।
क्या कीजिए:
कहाँ जाएगा: प्ररूप 14-ख → सीलबन्द E-6; प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र → E-5; अप्रयुक्त → E-4। (नियम 44-क)
स्तम्भ 4 पर ध्यान — जिसने पहले मत डाल दिया, उसकी रजिस्टर 14-क वाली क्रम संख्या यहीं लिखी जाती है। सूची सीलबन्द E-6 में; प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र E-5, अप्रयुक्त E-4 में।
कोई भीतर आकर कह देता है कि वह मत नहीं देगा — कभी विरोध में, कभी किसी के कहने पर।
पहले उसे नोटा के बारे में बताइए — कि किसी को न चुनने का विकल्प मशीन पर ही मौजूद है (इस चुनाव में END बटन मास्क है, इसलिए विकल्प नोटा ही है)। प्रायः बात यहीं सुलझ जाती है।
फिर भी न दे, तो रजिस्टर में उसके सामने "No Vote" लिखिए, और यह संख्या प्ररूप 14-ग की मद 3 (नियम 45-क) में आएगी।
यह अलग है: जिन मतदाताओं को आपने स्वयं रोका — पहचान सिद्ध न होने या अन्य कारण से — उनकी गिनती मद 3 में नहीं, मद 4 में होती है (नियम 35-क/37-क)। दोनों को मिलाइए मत; रात को 14-ग का मिलान इसी अंतर पर टिकेगा। (मार्गदर्शिका मु.पृ. 3)
यह वह क्षण है जिससे नया कार्मिक सबसे अधिक डरता है। सच यह है कि अधिकांश "खराबी" खराबी नहीं, संदेश होती है।
| मशीन कहती है | वास्तव में हुआ क्या |
|---|---|
| INVALID OPERATION | क्रम गलत — जैसे CLOSE दबाए बिना RESULT दबा दिया |
| LINK ERROR | CU और BU के बीच केबल ढीली या निकल गई |
| PRESSED ERROR | कोई बटन दबा रह गया / एक साथ दब गया |
| CLOCK ERROR | घड़ी (RTC) की गड़बड़ी — नीचे की तालिका देखिए, उत्तर अवस्था पर निर्भर है |
पहले यह कीजिए: घबराकर कुछ मत दबाइए। केबल का जोड़ देखिए, बटन देखिए, और स्थिति डायरी में उसी समय लिखिए। फिर सेक्टर अधिकारी को सूचित कीजिए।
🚨 CLOCK ERROR: तीन अवस्थाएँ, तीन अलग उत्तर
इस एक संदेश पर सबसे अधिक भ्रम है, क्योंकि उत्तर इस बात पर टिका है कि वह कब दिखा। आदेश 5681 दिनांक 08.08.2026, जो सीधे M3A एवं MPSV मशीनों के लिए है और बालोतरा सहित 14 जिलों को भेजा गया है, तीनों अवस्थाएँ अलग-अलग बताता है:
CLOCK ERROR कब दिखा क्या कीजिए प्रस्थान के समय (खण्ड A, बिन्दु 8-iii) सीयू परिवर्तित करावें मॉकपॉल के समय (खण्ड B, बिन्दु 2) सीयू परिवर्तित करावें मतदान के दौरान (खण्ड C, बिन्दु 7) सीयू न बदलें, उसी का उपयोग कीजिए, और पंचनामा बनाइए मॉकपॉल और मतदान का नियम आपस में उलटा है। मॉकपॉल में सीयू बदल दी जाती है; मतदान शुरू हो जाने के बाद नहीं बदली जाती। यही बात सबसे अधिक भुलाई जाती है।
मतदान के दौरान वाला पंचनामा आदेश के साथ संलग्न सारणी में बनता है: कॉलम 3 में क्लॉक एरर अथवा मशीन पर प्रदर्शित समय लिखिए, उस पर मतदान अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर लीजिए, और चुनाव समाप्त होने पर पंचनामा पीठासीन अधिकारी की डायरी के साथ लगाकर रखिए। समय की भिन्नता से निर्वाचन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, और पंचनामा यही अभिलिखित करता है।
M3A/MPSV की मशीनों के लिए, बालोतरा सहित 14 जिलों को भेजे गए आदेश के अनुसार — MPMV पर नियम भिन्न है।
⚠️ एक बात मशीन के मॉडल पर यह नियम MPMV मशीन पर भिन्न है — उसके लिए अलग आदेश (5674, उसी तिथि का) है, जिसमें प्रस्थान और मॉकपॉल दोनों पर सीयू नहीं बदली जाती। बालोतरा आदेश 5681 की सूची में है, 5674 की नहीं, अर्थात् यहाँ MPSV अथवा M3A अपेक्षित है। फिर भी अपनी मशीन का मॉडल देखकर ही नियम लागू कीजिए, और संदेह हो तो सेक्टर अधिकारी से पुष्टि कर लीजिए।
यदि मशीन बदलनी पड़े, तो नई मशीन पर वह सब दोहराना होगा जो सुबह किया था:
पुरानी मशीन में जो मत पड़ चुके हैं वे सुरक्षित हैं। वह मशीन सीलबन्द होकर जाएगी और गिनती में दोनों जुड़ेंगी। इसलिए मतदाताओं को आश्वस्त कीजिए: किसी का मत नष्ट नहीं हुआ।
यदि कोई समूह ज़बरदस्ती भीतर घुसने, मशीन छीनने या मतदान पर कब्ज़ा करने का प्रयास करे, तो यह बूथ कैप्चरिंग है, और इसका उत्तर नियम में लिखा है।
नियम 55(6) — पीठासीन अधिकारी कंट्रोल यूनिट तत्काल बन्द करेगा और बैलट यूनिट को CU से पृथक कर देगा।
इससे मशीन उसी क्षण आगे कोई मत लेना बन्द कर देती है, और जो मत पड़ चुके हैं वे सुरक्षित रहते हैं।
पर एक चेतावनी: यह निर्णय निश्चित होकर लीजिए। CLOSE के बाद मशीन आगे मत रिकार्ड नहीं करेगी — साधारण भीड़-भाड़ या शोर को बूथ कैप्चरिंग समझ लेना उतनी ही बड़ी भूल है जितनी असली कैप्चरिंग पर चुप रह जाना। पहले सुरक्षाकर्मी और सेक्टर अधिकारी। (मार्गदर्शिका अध्याय 10)
सांय 6 बजे, और कतार अभी लम्बी है।
नियम सीधा है और इसे मतदाताओं को ऊँची आवाज़ में बता दीजिए: 6 बजे कतार में जो लोग खड़े हैं, वे सब मत देंगे, चाहे रात के आठ बज जाएँ। 6 बजे के बाद कतार में कोई नहीं जुड़ेगा।
इसका तरीका मार्गदर्शिका में लिखा है, और उसे अक्षरशः मानिए:
(नियम 25; मार्गदर्शिका, मतदान समाप्ति)
अंतिम छोर से शुरू करने का कारण समझ लीजिए। यदि आगे से बाँटना शुरू करें तो पीछे लोग जुड़ते चले जाएँगे और कतार कभी समाप्त नहीं होगी। पहले सीमा तय कीजिए, फिर गिनिए। पुलिस और कर्मचारियों को भी यही बात बता दीजिए।
आख़िरी व्यक्ति निकल गया। कमरे में सन्नाटा है और आप थके हुए हैं। यहीं से वह भाग शुरू होता है जिसमें सबसे अधिक गलतियाँ होती हैं, इसलिए नहीं कि वह कठिन है, बल्कि इसलिए कि सब जल्दी घर जाना चाहते हैं।
अगले डेढ़ घंटे में जल्दबाज़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। धीरे चलिए।
क्रम यही रहेगा, और इसमें फेरबदल नहीं:
(सां.आ. 145/2026, आदेश 560 दिनांक 16.01.2026)
यदि CLOSE दबता ही न हो
CLOSE तभी काम करता है जब CU का 'Busy' लैम्प बुझा हो। Busy जल रही रह जाती है जब अंतिम मतदाता के बाद भूल से BALLOT दब गया हो, या BALLOT दबाने के बाद मतदाता ने मत देने से इन्कार कर दिया हो। तब यह कीजिए:
कंट्रोल यूनिट से बैलट यूनिट का सम्बन्ध विच्छेद कीजिए → CU का पावर स्विच दुबारा चालू कीजिए → Busy लैम्प बुझ जाएगा और CLOSE क्रियाशील हो जाएगा।
और दो छोटी बातें: अनावश्यक रूप से CLOSE की कैप न खोलिए, और बीप बजते समय CU स्विच ऑफ न कीजिए। (मार्गदर्शिका अ. 11(2))
एक चेतावनी, दबाने से पहले CLOSE के बाद मशीन आगे कोई मत स्वीकार नहीं करेगी। इसलिए पूरी तरह निश्चित हो लीजिए कि नियत समय पर उपस्थित कोई भी मतदाता मत देने से वंचित नहीं रहा।
एड्रेस टैग पर विवरण ठीक से भरिए — मतदान केन्द्र का नाम-क्रमांक, वार्ड, मशीन के क्रमांक। यही टैग मतगणना के दिन पढ़ा जाएगा।
मतपत्र लेखा (Account of Votes Recorded) पूरे दिन का हिसाब है। मशीन कहती है कि उसमें कितने मत पड़े; रजिस्टर कहता है कि कितने लोग आए। दोनों को मिलना चाहिए।
गणित सीधा है:
मद 5 = मद 2 − मद 3 − मद 4
मद 2 — रजिस्टर 14-क में दर्ज कुल मतदाता (जिन्हें पर्ची जारी हुई) मद 3 — जिन्होंने मत देने से स्वयं इंकार किया — "No Vote" (नियम 45-क) मद 4 — जिन्हें आपने रोका (नियम 35-क / 37-क) मद 5 — मशीन में वास्तव में दर्ज मत
और मद 5 का यह आँकड़ा वही होना चाहिए जो CLOSE के बाद मशीन ने दिखाया था। यदि दोनों मिल गए, तो आपका पूरा दिन गणितीय रूप से प्रमाणित हो गया। यदि नहीं मिले, तो आगे मत बढ़िए, पहले कारण ढूँढ़िए (अध्याय 11 देखिए)।
मद 8 में वह अंक आएगा जो आपने सुबह रसीद पर देखा था — प्राप्त निविदत्त मतपत्र: 20।
भाग-II (मतगणना का परिणाम — अभ्यर्थीवार मत, नोटा सहित) अगले पृष्ठ पर छपा है; उसे मतगणना के दिन गणन-पर्यवेक्षक भरता है, आप नहीं।
यह मार्गदर्शिका का अपना छपा नमूना है, पर इसे आँख खोलकर पढ़िए: इसी में ऊपर केन्द्र "16" और नीचे "15" छपा है (दोनों जगह एक ही संख्या भरें), और मद 9(4) का कोष्ठक "(मद 3 में से मद 2 घटाइए)" उल्टा छपा है — घटाइए मद 2 में से मद 3। छपे नमूने की चूकें भी सिखाती हैं।
| मद | विवरण | प्रविष्टि |
|---|---|---|
| 1 | केन्द्र के लिए नियत निर्वाचकों की कुल संख्या | 1142 |
| 2 | रजिस्टर 14-क में दर्ज मतदाता | 869 |
| 3 | मत रिकार्ड न करने का विनिश्चय करने वाले — "No Vote" (नियम 45-क) | 4 |
| 4 | मतदान के लिए अनुज्ञात न किए गए (नियम 35-क/37-क) | 2 |
| 5 | मशीन के अनुसार रिकार्ड मत | 863 |
| 6 | क्या मद 5 = मद 2 − मद 3 − मद 4 ? | हाँ — 869 − 4 − 2 = 863 ✓ |
| 7 | निविदत्त मतपत्र जारी (नियम 44-क) | 3 |
| 8 | निविदत्त मतपत्र — (क) प्राप्त · (ख) जारी · (ग) वापस | 20 (0201–0220) · 3 (0201–0203) · 17 |
| 9 | पेपर सील — प्रदाय · प्रयुक्त · वापस · नष्ट | 4 (004821–004824) · 1 · 3 · निरंक |
दो जाँचें साथ चलती हैं — मद 8: 3 + 17 = 20 ✓, और मद 9 में वापस = प्रदाय − प्रयुक्त = 4 − 1 = 3 ✓। सावधान: प्ररूप पर मद 9(4) के कोष्ठक में "(मद 3 में से मद 2 घटाइए)" छपा है। यह उल्टा छपा है; घटाइए मद 2 में से मद 3। भरा प्ररूप खुले लिफाफे E-9 में, दूसरी प्रति डायरी के साथ E-11 में; लिफाफे पर "Account of Votes Recorded" लिखना नियम 49-क(2) की अपेक्षा है।
लिफाफे पर "Account of Votes Recorded / रिकार्ड किये गये मतों का लेखा" लिखना नियम 49-क(2) की अपेक्षा है। यह लिखना भूलिए मत।
अब सब कुछ अपने-अपने लिफाफे में जाएगा। यहाँ याद रखने की एक ही बात है — कौन-सा सीलबन्द, कौन-सा खुला:
E-1 से E-8 — चपड़ी से सीलबन्द (E-1 से E-6 का अलग पैकेट बनेगा) E-9 से E-14 — बिना सील (मार्गदर्शिका अध्याय 11; नियम 48-क)
मुख्य लिफाफे:
| लिफाफा | उसमें क्या |
|---|---|
| E-2 (सीलबन्द) | भरा हुआ रजिस्टर 14-क |
| E-4 (सीलबन्द) | अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र |
| E-5 (सीलबन्द) | प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र |
| E-6 (सीलबन्द) | प्ररूप 14-ख — निविदत्त मतों की सूची |
| E-7 (सीलबन्द) | प्ररूप-13 — आक्षेपित मतों की सूची |
| E-8 (सीलबन्द) | प्रयुक्त EDC (प्ररूप-16) — संख्या डायरी की मद 14 में |
| E-9 (खुला) | प्ररूप 14-ग — मतपत्र लेखा |
| E-10 (खुला) | परिशिष्ट-6 की घोषणाएँ + परिशिष्ट-19 मॉक पोल प्रमाण-पत्र |
| E-11 (खुला) | पीठासीन अधिकारी की डायरी (परिशिष्ट-7) + 14-ग की दूसरी प्रति |
| E-14 (खुला) | चैलेंज फीस की रसीद बुक (परिशिष्ट-13), साथी की घोषणाएँ (परिशिष्ट-12) |
एक नियम जो लोग तोड़ देते हैं यदि किसी लिफाफे में डालने को कुछ है ही नहीं — मान लीजिए दिन भर एक भी चुनौती नहीं आई — तब भी वह लिफाफा बनेगा। प्रपत्र पर 'शून्य' लिखिए और लिफाफा वैसे ही जमा कीजिए। ख़ाली लिफाफा "कुछ नहीं हुआ" कहता है; ग़ायब लिफाफा "पता नहीं क्या हुआ" कहता है। दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर है।
लिफाफे बाँधने से पहले यही सूची सामने रखिए। जो लिफाफा जिस मद में है, उस पर सही का निशान लगाते चलिए।
परिशिष्ट-7, तीस मदों की। यदि आपने दिन भर इसे भरा है तो अभी दस मिनट लगेंगे; नहीं भरा तो अब याद करके भरनी पड़ेगी, और वही डायरी बाद में आपके विरुद्ध जाती है।
मद 29 और 30 पर विशेष ध्यान — मशीन बदली हो तो मद 29, और मॉक पोल का विवरण मद 30।
| मद | विवरण | प्रविष्टि | किससे मिले |
|---|---|---|---|
| 6 | प्रयुक्त पेपर सीलें | 1 — 004821 | 14-ग मद 9(3) ✓ |
| 11(2) | चिन्हित प्रति से अनुज्ञात | 869 | 14-ग मद 2 ✓ |
| 12 | मतदान करने वाले — पु/म/थर्ड जेंडर | 441 / 421 / 1 = 863 | 14-ग मद 5 ✓ |
| 16 | निविदत्त मत | 3 | 14-ग मद 7 ✓ |
| 21 | समयवार मत — योग | 128+291+205+168+71 = 863 | 14-ग मद 5 ✓ |
| 30 | अन्य महत्वपूर्ण घटना | "12:40 बजे CU का प्रदर्शन 2 मिनट रुका; सेक्टर अधिकारी को सूचित; मतदान बाधित नहीं।" | |
डायरी का सुनहरा नियम — इनमें से एक भी न मिले तो कोई एक प्रविष्टि गलत है; बूथ छोड़ने से पहले ठीक कीजिए। डायरी E-11 में जाएगी, स्ट्रांग रूम में नहीं (आदेश 858)।
डायरी लिफाफा E-11 में जाएगी। और एक बात, जो चूकती है:
डायरी स्ट्रांग रूम में नहीं जाएगी। सीलबन्द मशीन स्ट्रांग रूम में बन्द होती है, पर डायरी रिटर्निंग/सहायक रिटर्निंग अधिकारी की अभिरक्षा में रहेगी, क्योंकि स्ट्रांग रूम मतगणना तक नहीं खुलेगा, और डायरी उससे पहले देखी जानी है। (आदेश 858, दिनांक 04.10.1999)
संग्रह केन्द्र पर सामग्री तीन जगह जमा होगी:
| काउंटर | क्या जमा होगा |
|---|---|
| 1 — स्ट्रांग रूम | सीलबन्द CU + BU, तथा लिफाफे E-9, E-10, E-11, E-12 |
| 2 — लिफाफे | E-1 से E-8, तथा E-13, E-14 |
| 3 — सामग्री | शेष मतदान सामग्री |
हर काउंटर से रसीद लेकर ही हटिए। तीनों रसीदें अपने पास रखिए, और घर पहुँचकर भी सँभालकर रखिए। महीनों बाद यदि कोई पूछे कि अमुक लिफाफा कहाँ गया, तो आपका उत्तर यही काग़ज़ होगा। (मार्गदर्शिका अध्याय 13)
यह अध्याय किसी नियम-पुस्तक में नहीं मिलेगा, पर सबसे अधिक काम का यही है।
गलती होगी। कहीं न कहीं, कुछ न कुछ। सोलह घंटे की ड्यूटी में सैकड़ों प्रविष्टियाँ करने वाला व्यक्ति यदि दावा करे कि उससे कभी कुछ नहीं चूकता, तो वह सच नहीं बोल रहा।
असली प्रश्न यह नहीं कि गलती हुई या नहीं। असली प्रश्न यह है कि उसके बाद आपने क्या किया।
छिपाइए मत। तुरंत बताइए। लिख दीजिए।
जो गलती उसी समय बता दी जाती है, वह प्रायः सुधर जाती है — किसी और के हस्तक्षेप से, किसी वैकल्पिक व्यवस्था से, या केवल यह दर्ज कर देने से कि ऐसा हुआ था। जो गलती छिपाई जाती है, वह मतगणना के दिन निकलती है, जब कुछ नहीं किया जा सकता, और तब वह गलती नहीं, अनियमितता कहलाती है। अंतर बड़ा है।
इसलिए हर स्थिति में तीन काम एक साथ कीजिए: डायरी में लिखिए, सेक्टर अधिकारी को बताइए, और रिटर्निंग अधिकारी का निर्देश लीजिए।
मॉक पोल के बाद CLEAR दबाना भूल गए, और मतदान शुरू हो गया। यह गंभीर है, और इसे छिपाना असंभव भी — मशीन का आँकड़ा रजिस्टर से मिलेगा ही नहीं। जैसे ही ध्यान आए, मतदान रोकिए और तुरंत रिटर्निंग अधिकारी को सूचित कीजिए। निर्णय वे लेंगे। आपका काम है तत्काल बताना, और डायरी में समय सहित लिखना।
रजिस्टर 14-क में किसी की प्रविष्टि छूट गई या ग़लत हो गई। पुरानी प्रविष्टि पर सफ़ेदी मत लगाइए, मिटाइए मत। ग़लत प्रविष्टि पर एक रेखा खींचकर, सही प्रविष्टि साथ में कीजिए, और अपने संक्षिप्त हस्ताक्षर कर दीजिए। काटा हुआ, हस्ताक्षरित सुधार पारदर्शी होता है; मिटाया हुआ स्थान संदिग्ध।
14-ग का मिलान नहीं हो रहा। घबराकर आँकड़ा "ठीक" मत कर दीजिए; यही सबसे बड़ा प्रलोभन है और सबसे बड़ी भूल। पहले ये देखिए: रजिस्टर की गिनती दुबारा कीजिए; "No Vote" वालों को मद 3 में गिना या नहीं; रोके गए मतदाताओं को मद 4 में (मद 3 में नहीं); निविदत्त मत मशीन में नहीं जाते, इसलिए वे मद 5 में नहीं आएँगे। इनसे भी न मिले तो अंतर को वैसा ही रहने दीजिए, कारण डायरी में लिखिए, और सेक्टर अधिकारी को बताइए। न मिलने वाला सच मिलाए हुए झूठ से बेहतर है।
कोई सील टूट गई या ग़लत जगह लग गई। रुकिए। नई सील अपने मन से मत लगाइए। स्थिति डायरी में लिखिए, अभिकर्ताओं को दिखाइए, और सेक्टर अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी का निर्देश लीजिए। सील का पूरा मूल्य इसी में है कि उसकी कहानी में कोई अनकहा अध्याय न हो।
किसी मतदाता के साथ दुर्व्यवहार हो गया, या कोई नाराज़ होकर गया। यह भी दर्ज करने की बात है। डायरी में संक्षेप में लिखिए कि क्या हुआ। बाद में यदि शिकायत आए, तो आपका अपना लिखा हुआ विवरण आपके साथ खड़ा रहेगा।
एक बात, जो कोई प्रशिक्षण में नहीं कहता आपसे पूर्णता की अपेक्षा नहीं है। आपसे ईमानदारी और अभिलेख की अपेक्षा है। जिस दल की डायरी में लिखा है "11.20 बजे मशीन में LINK ERROR आया, सेक्टर अधिकारी को सूचित किया, 11.45 बजे मशीन बदली"। वह दल अपना काम कर चुका। जिस दल की डायरी ख़ाली है और मशीन बदली हुई है, उसे बाद में बहुत कुछ समझाना पड़ता है।
यदि इस पूरी पुस्तिका में से आपको केवल कुछ पंक्तियाँ याद रहें, तो ये रहें:
एक। मॉक पोल का क्रम — मत डलवाइए, CLOSE, फिर RESULT, मिलान, और फिर CLEAR। CLOSE के बिना RESULT नहीं; और CLEAR के बिना मतदान नहीं।
दो। स्याही की जाँच BALLOT दबाने से पहले। बाद में की गई जाँच का कोई मूल्य नहीं।
तीन। कम्पार्टमेंट में एक समय पर एक ही व्यक्ति, और पिछला बाहर आने पर ही अगला BALLOT।
चार। जो घटे, उसी समय डायरी में लिखिए। याद पर मत छोड़िए।
पाँच। जो गलती हो जाए, तुरंत बता दीजिए। छिपाई गई छोटी गलती बड़ी हो जाती है; बताई गई बड़ी गलती प्रायः सुलझ जाती है।
और इन सबके नीचे एक बात, जो नियम नहीं है पर सबसे सच्ची है:
जिस मेज़ पर आप बैठे हैं, उसके सामने से दिन भर में जितने लोग गुज़रेंगे, उनमें से अधिकांश के लिए आप ही चुनाव आयोग हैं। वे न आदेश पढ़ेंगे, न नियम। वे केवल यह देखेंगे कि जिस व्यक्ति ने उनका नाम पुकारा, उसने सबके साथ एक-सा व्यवहार किया या नहीं।
पहली बार जाने वाले प्रायः यह सोचकर घबराते हैं कि कहीं कुछ भूल न जाएँ। सच यह है कि आपको सब कुछ याद रखने की ज़रूरत नहीं है — मार्गदर्शिका साथ है, चेक मेमो साथ है, सेक्टर अधिकारी एक फोन दूर है। आपको केवल दो चीज़ें अपनी ओर से देनी हैं: धैर्य, और निष्पक्षता।
बाकी सब लिखा हुआ है।
| यदि आपको चाहिए | देखिए |
|---|---|
| एक पंक्ति के उत्तर, स्रोत सहित | त्वरित उत्तर |
| हर प्रपत्र का नमूना और भरने का तरीका | प्ररूप एवं लिफाफे |
| 100 मीटर / 200 मीटर की दूरियाँ | दूरियाँ एवं निषेध |
| आक्षेपित मत का पूरा विश्लेषण | आक्षेपित मत |
| कोई भी प्रश्न, अपने शब्दों में | पूछिए |
स्रोत एवं अस्वीकरण
यह पुस्तिका राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की मार्गदर्शिका, राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम 1994, तथा आयोग के प्रकाशित आदेशों पर आधारित है; प्रत्येक तथ्य के साथ उसका स्रोत दिया गया है। जहाँ मार्गदर्शिका में घड़ी-समय या प्रक्रिया विहित नहीं है, वहाँ यह स्पष्ट लिखा गया है।
यह आयोग का प्रकाशन नहीं है और न ही किसी सरकारी निकाय द्वारा अनुमोदित है। किसी भी विरोधाभास में मूल आदेश एवं नियम ही अंतिम हैं, तथा मौके पर रिटर्निंग अधिकारी का निर्देश सर्वोपरि है।
संकलन — बी.एल.एम.टी. भरत चौधरी, व्याख्याता, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जेठन्तरी (ब्लॉक समदड़ी, बालोतरा)। त्रुटि ध्यान में आए तो अवश्य बताइए। यह पुस्तिका सुधार के लिए खुली है।
यह पुस्तक पूरे दिन की कहानी है। नीचे केवल वे बिन्दु हैं जिन्हें रवाना होने से पहले एक बार देख लेना पर्याप्त होगा। विस्तार ऊपर के अध्यायों में है।