भूमिका-पुस्तिका · पहली बार ड्यूटी पर
आपकी मेज पर वे सब प्रश्न आएँगे जिनका उत्तर और कोई नहीं दे सकता। यह पुस्तिका उन्हीं के लिए है।
पहली ड्यूटी पर सबसे बड़ी कठिनाई नियम याद न होना नहीं होती। कठिनाई यह पहचानना होती है कि सामने खड़ा प्रश्न आपका है या किसी और का।
मतदान केन्द्र पर एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी होते हैं। तीनों मतदान अधिकारियों के काम बँटे हुए हैं और सीमित हैं। आपका काम बँटा हुआ नहीं है। जो कुछ किसी और के हिस्से में नहीं आता, वह आपका है, और जहाँ कोई निर्णय लेना पड़े वहाँ निर्णय भी आपका ही है।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि दिन भर आपकी मेज पर दो तरह की चीज़ें आएँगी। पहली, वे काम जो आपको स्वयं करने हैं, जैसे मॉक पोल कराना या प्ररूप 14-ग भरना। दूसरी, वे प्रकरण जो कोई मतदान अधिकारी आपके पास भेजेगा, क्योंकि उन्हें निपटाने का अधिकार उसके पास नहीं है। दूसरी श्रेणी ही वह है जिसमें नए अधिकारी सबसे अधिक घबराते हैं।
क्रम वही है जो आपके दिन का है। पहले दल और कर्तव्य-विभाजन, फिर केन्द्र की तैयारी, फिर मॉक पोल और सीलिंग, फिर मतदान के दौरान आने वाले कठिन प्रकरण, और अन्त में समाप्ति, प्ररूप 14-ग, लिफाफे तथा सुपुर्दगी। अन्तिम खण्ड पुनरावृत्ति का है, जिसे रवाना होने से ठीक पहले एक बार देख लेना पर्याप्त होगा।
मार्गदर्शिका 2026 का अध्याय 2 यह तय करता है कि कौन क्या करेगा। यह जान लेना आधी तैयारी है, क्योंकि इसी से पता चलता है कि कौन-सा प्रकरण आपकी मेज तक आना ही चाहिए।
दल में आपके अतिरिक्त तीन मतदान अधिकारी होते हैं। तीनों की मेज़ें उसी क्रम में लगती हैं जिस क्रम में मतदाता आगे बढ़ता है, इसलिए कर्तव्य-विभाजन याद रखना कठिन नहीं है।
| कौन | क्या उसके पास है | वह क्या तय नहीं कर सकता |
|---|---|---|
| प्रथम मतदान अधिकारी | निर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति और मतदाता की पहचान | चुनौती पर कार्यवाही, और पहचान पर संदेह का अन्तिम निर्णय |
| द्वितीय मतदान अधिकारी | अमिट स्याही, मतदाता रजिस्टर प्ररूप 14-क, मतदाता पर्ची | साथी की अनुमति |
| तृतीय मतदान अधिकारी | नियंत्रण यूनिट और Ballot बटन | पेपर सील या मशीन से जुड़ा कोई विवाद |
| पीठासीन अधिकारी | पूरा केन्द्र, और वे सब निर्णय जो ऊपर किसी के पास नहीं | — |
जब प्रथम मतदान अधिकारी किसी मतदाता को आपके पास भेजे, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसने काम टाल दिया। इसका अर्थ यह है कि नियम ने वह निर्णय उसके हाथ में रखा ही नहीं। इसी तरह द्वितीय मतदान अधिकारी साथी की अनुमति नहीं दे सकता, चाहे मतदाता की दृष्टिहीनता कितनी ही स्पष्ट क्यों न हो। अनुमति देना आपका काम है, और उसका आधार मार्गदर्शिका अ.7 है।
मतदान दिवस की अधिकांश गड़बड़ियाँ उस रात तय होती हैं जब दल केन्द्र पर पहुँचता है। इसलिए यह अध्याय सबसे छोटा नहीं है।
केन्द्र पर पहुँचते ही सामग्री का मिलान कीजिए। जो चीज़ें कम मिलें उनकी सूचना उसी समय सेक्टर अधिकारी को दीजिए, सुबह नहीं। सुबह के लिए कुछ भी छोड़ना महँगा पड़ता है, क्योंकि सात बजे मतदान आरम्भ होना है और उससे पहले मॉक पोल भी होना है।
मतदान कक्ष का ले-आउट मार्गदर्शिका के परिशिष्ट-5 में दिया गया है। उसे देखकर मेज़ें उसी क्रम में लगाइए जिस क्रम में मतदाता बढ़ेगा। मतदान कम्पार्टमेंट ऐसा रखिए कि मत की गोपनीयता बनी रहे और साथ ही आपकी दृष्टि कक्ष पर बनी रहे।
मॉक पोल कोई औपचारिकता नहीं है। यह वह क्षण है जिसमें अभिकर्ताओं के सामने यह सिद्ध होता है कि मशीन खाली है।
मॉक पोल मतदान आरम्भ होने से पहले, उपस्थित मतदान अभिकर्ताओं के सामने किया जाता है। इसमें प्रत्येक अभ्यर्थी को, तथा नोटा को भी, कम से कम एक मत डाला जाता है। इसके बाद परिणाम निकालकर दिखाया जाता है कि जितने मत डाले गए उतने ही दर्ज हुए हैं।
मॉक पोल का प्रमाणपत्र परिशिष्ट-19 के प्ररूप में बनता है। यह आगे लिफाफा E-10 में जाएगा, उन घोषणाओं के साथ जो आप दिन भर करेंगे।
यदि निर्धारित समय पर कोई मतदान अभिकर्ता उपस्थित न हो तो प्रतीक्षा का नियम और उसके बाद की कार्यवाही मार्गदर्शिका अ.5 में दी गई है। इसे रात में ही पढ़ लीजिए।मॉक पोल के बाद मशीन उसी रूप में सील होती है जिसमें वह दिन भर रहेगी। यहाँ क्रम मायने रखता है।
सीलिंग की पूरी शृंखला मार्गदर्शिका अ.11 और परिशिष्ट-20 में दी गई है। पेपर सील का क्रमांक इसी समय अभिलिखित कर लीजिए, क्योंकि वही क्रमांक आगे प्ररूप 14-ग की आइटम 9 में जाएगा।
मतदान आरम्भ होने से पूर्व की घोषणा परिशिष्ट-6 के भाग-1 में की जाती है। दिन में यदि मशीन बदलनी पड़े तो भाग-2, और समाप्ति पर भाग-3। तीनों घोषणाएँ अन्त में लिफाफा E-10 में जाएँगी, और वह लिफाफा सीलबन्द नहीं होता।
मतदान चलते समय आपका काम मुख्यतः देखना और तय करना है। इसलिए यह जान लीजिए कि किन स्थितियों में मतदाता आपके पास आएगा।
सामान्य मतदाता आपकी मेज तक आता ही नहीं। वह प्रथम मतदान अधिकारी के पास पहचान कराता है, द्वितीय के पास स्याही लगवाकर रजिस्टर में हस्ताक्षर करता है, पर्ची लेता है, और तृतीय मतदान अधिकारी के पास जाकर मतदान कक्ष में प्रवेश करता है। आपके पास वही आता है जहाँ कुछ अटका हो।
| स्थिति | आपके पास क्यों आई | किस अध्याय में |
|---|---|---|
| पहचान पर एजेंट की चुनौती | ₹2 और संक्षिप्त जाँच केवल आपके अधिकार में है | अध्याय 7 |
| बाईं तर्जनी पर पहले से स्याही | नियम 35-क का परन्तुक मत देने से रोकता है | अध्याय 7 |
| मतदाता स्याही लगवाने से इनकार करे | दूसरा परन्तुक अनुमति नहीं देता | अध्याय 7 |
| असली मतदाता बाद में आए | निविदत्त मतपत्र आप ही जारी करेंगे | अध्याय 8 |
| दृष्टिहीन या शिथिलांग मतदाता साथी माँगे | अनुमति केवल आप दे सकते हैं | अध्याय 9 |
| नामावली में लिपिकीय त्रुटि | कारण लिखकर अनुमति देना आपका काम है | अध्याय 7 |
यह वह प्रकरण है जिसमें आयोग की मुद्रित मार्गदर्शिका और नियम एक-सी बात नहीं कहते। इसलिए इसे ध्यान से पढ़िए।
चुनौती प्रथम मतदान अधिकारी की मेज पर उठती है, पर उस पर कार्यवाही आप करेंगे। पहला कदम राशि है। मार्गदर्शिका अ.6(2) स्पष्ट कहती है कि चुनौती तब तक स्वीकार न करें जब तक चुनौती करने वाला नगद ₹2 जमा न करा दे। राशि मिलने पर परिशिष्ट-13 के प्ररूप में रसीद दीजिए।
निर्णय जो भी हो, उसे प्ररूप-13 के स्तम्भ 8 में कारण सहित लिखिए। जब्त करना हो तो नियम की भाषा ही लिखिए, अर्थात् 'तुच्छ अथवा सद्भावना में नहीं'। चुनौती सिद्ध हो जाए तो उस व्यक्ति को मत देने से वर्जित कीजिए, ड्यूटी पर तैनात पुलिस को सौंपिए, और थानाधिकारी को परिशिष्ट-9 का शिकायती पत्र भेजिए।
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 172 और 174 लिखिए। परिशिष्ट-9 का छपा प्ररूप अब भी निरसित भारतीय दण्ड संहिता की धारा का हवाला देता है, किन्तु आयोग का अपना आदेश 5310 स्वयं भारतीय न्याय संहिता कहता है।जब कोई और आपके मतदाता के नाम से मत डाल जाए, तो असली मतदाता का अधिकार निविदत्त मतपत्र से सुरक्षित रखा जाता है।
स्थिति ऐसी बनती है कि किसी मतदाता के नाम से कोई मत देकर जा चुका होता है और बाद में असली मतदाता आता है। ऐसे में उसे मशीन से मत रिकार्ड कराने के बजाय निविदत्त मतपत्र दिया जाता है। दूसरा व्यक्ति असली है या नहीं, यह पोलिंग एजेंटों की सहायता से आपको ही तय करना है। ये प्रकरण आप स्वयं ही निपटाएँ।
साथी की अनुमति देना केवल आपका अधिकार है, और उसकी शर्तें संकीर्ण हैं।
यदि आपका समाधान हो जाए कि दृष्टिहीनता अथवा शिथिलांगता के कारण मतदाता प्रतीक पहचानने या बटन दबाने में असमर्थ है, तो आप एक साथी को मतदान कक्ष में ले जाने की अनुमति दे सकते हैं। साथी की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
अभिलेख प्ररूप-12 में रखा जाता है और घोषणाएँ उसके साथ लिफाफा E-14 में जाती हैं। ध्यान रखिए कि E-14 सीलबन्द नहीं किया जाता।
नई मशीनों की बैलेट यूनिट में दाईं ओर ब्रेल लिपि में अभ्यर्थियों के क्रमांक होते हैं, जिससे दृष्टिहीन मतदाता स्वयं मत दे सकते हैं। फिर भी वे नियमों के अन्तर्गत साथी की सहायता के हकदार बने रहते हैं। सुविधा उपलब्ध होने से अधिकार समाप्त नहीं होता।
जिसके हाथ में कोई अंगुली या अंगूठा न हो, वह स्वयं मत रिकार्ड नहीं कर सकेगा और साथी आवश्यक होगा। ऐसे प्रकरण में साथी के हस्ताक्षर या अंगूठा रजिस्टर में लीजिए और प्रविष्टि के सामने अपना नोट लिखिए।दिन का सबसे अधिक अंकगणित यहीं है, और सबसे अधिक गलतियाँ भी यहीं होती हैं।
मतदान समाप्ति के पश्चात नियम 49-क के अधीन प्ररूप 14-ग के भाग-1 में लेखा तैयार कीजिए। कुल संख्या Total बटन से अभिनिश्चित कीजिए, और आवश्यक हो तो दोबारा दबाइए।
| आइटम | क्या भरना है | कहाँ से आएगा |
|---|---|---|
| 1 | नियत निर्वाचकों की कुल संख्या | नामावली |
| 2 | मतदाता रजिस्टर में दर्ज कुल मतदाता | प्ररूप 14-क के स्तम्भ 1 का अन्तिम क्रमांक |
| 3 | मत रिकार्ड न करने का विनिश्चय करने वालों की संख्या | रजिस्टर में जिनके सामने 'No Vote' लिखा है |
| 4 | नियम 35-क या नियम 37-क के अधीन अनुज्ञात न किए गए | जिन्हें आपने मत नहीं देने दिया |
| 5 | मशीन के अनुसार दर्ज कुल मत | Total बटन |
| 6 | मेल करती है या फर्क | आपका मिलान |
| 7 | निविदत्त मतपत्र जारी किए गए | प्ररूप 14-ख |
| 8 | निविदत्त मतपत्रों का हिसाब, तीन उप-आइटम | क्रम संख्या से और तक |
| 9 | पेपर सीलों का लेखा | प्रदाय, प्रयुक्त, वापस, नष्ट |
आइटम 3 उस मतदाता की है जिसने रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए, फिर स्वयं मत न डालने का निश्चय किया। मार्गदर्शिका कहती है कि ऐसे मतदाता को नोटा में मत डालने के लिए प्रेरित कीजिए, और फिर भी वह न डाले तो रजिस्टर में उसे 'No Vote' से इंगित कीजिए।
आइटम 4 उस मतदाता की है जिसे आपने मत नहीं देने दिया। कारण दो हो सकते हैं। या तो उसने अमिट स्याही अथवा हस्ताक्षर से इनकार किया, जो नियम 35-क के अधीन आता है, या उसने विहित प्रक्रिया अथवा गोपनीयता भंग की, जो नियम 37-क के अधीन आता है। इस दशा में रजिस्टर के नोट के नीचे आपके पूर्ण हस्ताक्षर भी होंगे।
प्ररूप 14-ग के शीर्ष में नियंत्रण यूनिट और मतदान यूनिट, दोनों के पहचान संख्यांक अनिवार्य हैं। यह वही खाना है जो सबसे अधिक छूटता है।
दिन का अन्तिम काम अभिलेख का है। यहाँ की चूक मतगणना के दिन सामने आती है।
लेखा तैयार करके और अभिकर्ताओं को प्रतियाँ देकर ही मशीन सील कीजिए। पहले नियंत्रण यूनिट का पावर स्विच बन्द कीजिए, फिर बैलेट यूनिट और नियंत्रण यूनिट का सम्बन्ध-विच्छेद — आदेश 145/2026 पैरा 2 तथा नियम 47-क(1), दोनों यही क्रम देते हैं। नियम 47-क(2) के अनुसार दोनों यूनिट पृथक-पृथक इस प्रकार सील होंगी कि सील तोड़े बिना उन्हें खोलना सम्भव न हो।
| लिफाफा | क्या जाएगा |
|---|---|
| E-1 | निर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति |
| E-2 | मतदाताओं का रजिस्टर, प्ररूप 14-क |
| E-3 | प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ |
| E-4 | अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र |
| E-5 | प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र |
| E-6 | निविदत्त मतों की सूची, प्ररूप 14-ख |
| E-7 | आक्षेपित मतों की सूची, प्ररूप-13 |
| E-8 | निर्वाचन ड्यूटी प्रमाण-पत्र |
शेष छह लिफाफे सील नहीं होते। इनमें E-9 प्ररूप 14-ग की एक प्रति, E-10 घोषणाएँ तथा मॉकपोल प्रमाणपत्र, E-11 पीठासीन अधिकारी की डायरी और 14-ग की दूसरी प्रति, E-12 सांख्यिक सूचना, E-13 अप्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ, और E-14 विविध कागजात हैं।
अन्त में नियम 50-क के अधीन रिटर्निंग अधिकारी को चार चीज़ें सौंपनी हैं। मतदान मशीन, प्ररूप 14-ग का लेखा, नियम 48-क के अधीन बने सीलबन्द पैकेट, और मतदान में प्रयुक्त अन्य सभी कागज़ात।
नीचे की सामग्री नई नहीं है। यह ऊपर के अध्यायों का वही सार है जिसे रवाना होने से पहले एक बार देख लेना पर्याप्त होगा।