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अध्याय
अभ्यास कीजिए

भूमिका-पुस्तिका · पहली बार ड्यूटी पर

पीठासीन अधिकारी

आपकी मेज पर वे सब प्रश्न आएँगे जिनका उत्तर और कोई नहीं दे सकता। यह पुस्तिका उन्हीं के लिए है।

नगरपालिका आम चुनाव 2026 · राजस्थान11 अध्यायअन्त में पुनरावृत्तिहर उद्धरण मूल दस्तावेज़ पर खुलता है
निर्वाचन ज्ञानकोशपीठासीन अधिकारी — भूमिका-पुस्तिका
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आप कौन हैं, और यह पुस्तिका किसलिए है

पहली ड्यूटी पर सबसे बड़ी कठिनाई नियम याद न होना नहीं होती। कठिनाई यह पहचानना होती है कि सामने खड़ा प्रश्न आपका है या किसी और का।

मतदान केन्द्र पर एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी होते हैं। तीनों मतदान अधिकारियों के काम बँटे हुए हैं और सीमित हैं। आपका काम बँटा हुआ नहीं है। जो कुछ किसी और के हिस्से में नहीं आता, वह आपका है, और जहाँ कोई निर्णय लेना पड़े वहाँ निर्णय भी आपका ही है।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि दिन भर आपकी मेज पर दो तरह की चीज़ें आएँगी। पहली, वे काम जो आपको स्वयं करने हैं, जैसे मॉक पोल कराना या प्ररूप 14-ग भरना। दूसरी, वे प्रकरण जो कोई मतदान अधिकारी आपके पास भेजेगा, क्योंकि उन्हें निपटाने का अधिकार उसके पास नहीं है। दूसरी श्रेणी ही वह है जिसमें नए अधिकारी सबसे अधिक घबराते हैं।

यह पुस्तिका किस क्रम में चलती है

क्रम वही है जो आपके दिन का है। पहले दल और कर्तव्य-विभाजन, फिर केन्द्र की तैयारी, फिर मॉक पोल और सीलिंग, फिर मतदान के दौरान आने वाले कठिन प्रकरण, और अन्त में समाप्ति, प्ररूप 14-ग, लिफाफे तथा सुपुर्दगी। अन्तिम खण्ड पुनरावृत्ति का है, जिसे रवाना होने से ठीक पहले एक बार देख लेना पर्याप्त होगा।

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दल, और कर्तव्यों का बँटवारा

मार्गदर्शिका 2026 का अध्याय 2 यह तय करता है कि कौन क्या करेगा। यह जान लेना आधी तैयारी है, क्योंकि इसी से पता चलता है कि कौन-सा प्रकरण आपकी मेज तक आना ही चाहिए।

दल में आपके अतिरिक्त तीन मतदान अधिकारी होते हैं। तीनों की मेज़ें उसी क्रम में लगती हैं जिस क्रम में मतदाता आगे बढ़ता है, इसलिए कर्तव्य-विभाजन याद रखना कठिन नहीं है।

कौनक्या उसके पास हैवह क्या तय नहीं कर सकता
प्रथम मतदान अधिकारीनिर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति और मतदाता की पहचानचुनौती पर कार्यवाही, और पहचान पर संदेह का अन्तिम निर्णय
द्वितीय मतदान अधिकारीअमिट स्याही, मतदाता रजिस्टर प्ररूप 14-क, मतदाता पर्चीसाथी की अनुमति
तृतीय मतदान अधिकारीनियंत्रण यूनिट और Ballot बटनपेपर सील या मशीन से जुड़ा कोई विवाद
पीठासीन अधिकारीपूरा केन्द्र, और वे सब निर्णय जो ऊपर किसी के पास नहीं
स्रोत: मार्गदर्शिका अ.2(1), अ.2(2) एवं अ.2(3)
छोटे मतदान केन्द्रों पर तृतीय मतदान अधिकारी का काम पीठासीन अधिकारी स्वयं भी कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपके अतिरिक्त दो मतदान अधिकारी पर्याप्त रहेंगे [मार्गदर्शिका अ.2(3)]।

इसका असर आपके दिन पर

जब प्रथम मतदान अधिकारी किसी मतदाता को आपके पास भेजे, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसने काम टाल दिया। इसका अर्थ यह है कि नियम ने वह निर्णय उसके हाथ में रखा ही नहीं। इसी तरह द्वितीय मतदान अधिकारी साथी की अनुमति नहीं दे सकता, चाहे मतदाता की दृष्टिहीनता कितनी ही स्पष्ट क्यों न हो। अनुमति देना आपका काम है, और उसका आधार मार्गदर्शिका अ.7 है।

3

एक रात पहले, और सुबह

मतदान दिवस की अधिकांश गड़बड़ियाँ उस रात तय होती हैं जब दल केन्द्र पर पहुँचता है। इसलिए यह अध्याय सबसे छोटा नहीं है।

केन्द्र पर पहुँचते ही सामग्री का मिलान कीजिए। जो चीज़ें कम मिलें उनकी सूचना उसी समय सेक्टर अधिकारी को दीजिए, सुबह नहीं। सुबह के लिए कुछ भी छोड़ना महँगा पड़ता है, क्योंकि सात बजे मतदान आरम्भ होना है और उससे पहले मॉक पोल भी होना है।

मशीन प्राप्त करते समय की जाँच

  1. मशीन का क्रमांक मिलाइएजो नियंत्रण यूनिट और बैलेट यूनिट आपको दी गई हैं, उनके क्रमांक आपके अभिलेख से मिलने चाहिए। यही क्रमांक आगे प्ररूप 14-ग के शीर्ष में भी लिखने हैं।
  2. सीलें देखिएकमीशनिंग के समय लगी सीलें अविकल हैं या नहीं, यह अभी देख लीजिए। बाद में यह प्रश्न उठा तो उत्तर देना कठिन होगा।
  3. पेपर सीलों के क्रमांक नोट कीजिएआपको दी गई पेपर सीलों के क्रम संख्यांक लिख लीजिए। मतदान समाप्ति पर इन्हीं का लेखा प्ररूप 14-ग की आइटम 9 में देना है, और मतगणना के दिन गणन पर्यवेक्षक इसी से मिलान करेगा।
  4. निविदत्त मतपत्र गिन लीजिएमतदान केन्द्र पर बीस निविदत्त मतपत्र दिए जाते हैं। क्रम संख्या 'से' और 'तक' अभी नोट कर लीजिए [मार्गदर्शिका अ.8(1)]।
  5. अपनी किट देखिएअमिट स्याही लगाने संबंधी आदेश 1408 की एक प्रति पीठासीन अधिकारी की किट में रखी जानी होती है। यह सामग्री-जाँच की मद है, इसलिए इसकी अनुपस्थिति भी दर्ज कराने योग्य है।

कमरा किस तरह लगेगा

मतदान कक्ष का ले-आउट मार्गदर्शिका के परिशिष्ट-5 में दिया गया है। उसे देखकर मेज़ें उसी क्रम में लगाइए जिस क्रम में मतदाता बढ़ेगा। मतदान कम्पार्टमेंट ऐसा रखिए कि मत की गोपनीयता बनी रहे और साथ ही आपकी दृष्टि कक्ष पर बनी रहे।

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मॉक पोल

मॉक पोल कोई औपचारिकता नहीं है। यह वह क्षण है जिसमें अभिकर्ताओं के सामने यह सिद्ध होता है कि मशीन खाली है।

मॉक पोल मतदान आरम्भ होने से पहले, उपस्थित मतदान अभिकर्ताओं के सामने किया जाता है। इसमें प्रत्येक अभ्यर्थी को, तथा नोटा को भी, कम से कम एक मत डाला जाता है। इसके बाद परिणाम निकालकर दिखाया जाता है कि जितने मत डाले गए उतने ही दर्ज हुए हैं।

मॉक पोल का प्रमाणपत्र परिशिष्ट-19 के प्ररूप में बनता है। यह आगे लिफाफा E-10 में जाएगा, उन घोषणाओं के साथ जो आप दिन भर करेंगे।

यदि निर्धारित समय पर कोई मतदान अभिकर्ता उपस्थित न हो तो प्रतीक्षा का नियम और उसके बाद की कार्यवाही मार्गदर्शिका अ.5 में दी गई है। इसे रात में ही पढ़ लीजिए।
5

मशीन सील करना, और घोषणाएँ

मॉक पोल के बाद मशीन उसी रूप में सील होती है जिसमें वह दिन भर रहेगी। यहाँ क्रम मायने रखता है।

सीलिंग की पूरी शृंखला मार्गदर्शिका अ.11 और परिशिष्ट-20 में दी गई है। पेपर सील का क्रमांक इसी समय अभिलिखित कर लीजिए, क्योंकि वही क्रमांक आगे प्ररूप 14-ग की आइटम 9 में जाएगा।

मतदान आरम्भ होने से पूर्व की घोषणा परिशिष्ट-6 के भाग-1 में की जाती है। दिन में यदि मशीन बदलनी पड़े तो भाग-2, और समाप्ति पर भाग-3। तीनों घोषणाएँ अन्त में लिफाफा E-10 में जाएँगी, और वह लिफाफा सीलबन्द नहीं होता।

6

मतदाता का चक्र, और आपकी मेज तक क्या आता है

मतदान चलते समय आपका काम मुख्यतः देखना और तय करना है। इसलिए यह जान लीजिए कि किन स्थितियों में मतदाता आपके पास आएगा।

सामान्य मतदाता आपकी मेज तक आता ही नहीं। वह प्रथम मतदान अधिकारी के पास पहचान कराता है, द्वितीय के पास स्याही लगवाकर रजिस्टर में हस्ताक्षर करता है, पर्ची लेता है, और तृतीय मतदान अधिकारी के पास जाकर मतदान कक्ष में प्रवेश करता है। आपके पास वही आता है जहाँ कुछ अटका हो।

स्थितिआपके पास क्यों आईकिस अध्याय में
पहचान पर एजेंट की चुनौती₹2 और संक्षिप्त जाँच केवल आपके अधिकार में हैअध्याय 7
बाईं तर्जनी पर पहले से स्याहीनियम 35-क का परन्तुक मत देने से रोकता हैअध्याय 7
मतदाता स्याही लगवाने से इनकार करेदूसरा परन्तुक अनुमति नहीं देताअध्याय 7
असली मतदाता बाद में आएनिविदत्त मतपत्र आप ही जारी करेंगेअध्याय 8
दृष्टिहीन या शिथिलांग मतदाता साथी माँगेअनुमति केवल आप दे सकते हैंअध्याय 9
नामावली में लिपिकीय त्रुटिकारण लिखकर अनुमति देना आपका काम हैअध्याय 7
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आक्षेपित मत, और ₹2 का प्रश्न

यह वह प्रकरण है जिसमें आयोग की मुद्रित मार्गदर्शिका और नियम एक-सी बात नहीं कहते। इसलिए इसे ध्यान से पढ़िए।

चुनौती प्रथम मतदान अधिकारी की मेज पर उठती है, पर उस पर कार्यवाही आप करेंगे। पहला कदम राशि है। मार्गदर्शिका अ.6(2) स्पष्ट कहती है कि चुनौती तब तक स्वीकार न करें जब तक चुनौती करने वाला नगद ₹2 जमा न करा दे। राशि मिलने पर परिशिष्ट-13 के प्ररूप में रसीद दीजिए।

जाँच का क्रम

  1. प्ररूप-13 में प्रविष्टिजिसकी पहचान चुनौती दी गई है, उसका नाम और पता प्ररूप-13 में दर्ज कीजिए और उसके हस्ताक्षर लीजिए। उसे प्रतिरूपण की शास्ति भी समझाइए। परिशिष्ट-1 में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के उद्धरण हैं।
  2. पहले चुनौतीकर्ताभार पहले चुनौती करने वाले पर है। वह प्रथम दृष्ट्या यह सिद्ध करे कि सामने खड़ा व्यक्ति असली मतदाता नहीं है। वह ऐसा न कर पाए तो चुनौती नहीं मानी जाएगी और मतदाता को मत देने दिया जाएगा।
  3. फिर मतदाताचुनौतीकर्ता प्रथम दृष्ट्या सिद्ध कर दे, तभी मतदाता से खण्डन का साक्ष्य माँगा जाता है। वह अपना दावा सिद्ध कर दे तो मत देने की अनुमति दीजिए।
  4. शपथ और आसपास के लोगचुनौती देने वाले को तथा साक्ष्य देने वाले को शपथ दिलाइए। जाँच में पड़ोसी या उपस्थित किसी अन्य व्यक्ति से सही तथ्य जानने के लिए आप स्वतंत्र हैं।

निर्णय जो भी हो, उसे प्ररूप-13 के स्तम्भ 8 में कारण सहित लिखिए। जब्त करना हो तो नियम की भाषा ही लिखिए, अर्थात् 'तुच्छ अथवा सद्भावना में नहीं'। चुनौती सिद्ध हो जाए तो उस व्यक्ति को मत देने से वर्जित कीजिए, ड्यूटी पर तैनात पुलिस को सौंपिए, और थानाधिकारी को परिशिष्ट-9 का शिकायती पत्र भेजिए।

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 172 और 174 लिखिए। परिशिष्ट-9 का छपा प्ररूप अब भी निरसित भारतीय दण्ड संहिता की धारा का हवाला देता है, किन्तु आयोग का अपना आदेश 5310 स्वयं भारतीय न्याय संहिता कहता है।
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निविदत्त मत

जब कोई और आपके मतदाता के नाम से मत डाल जाए, तो असली मतदाता का अधिकार निविदत्त मतपत्र से सुरक्षित रखा जाता है।

स्थिति ऐसी बनती है कि किसी मतदाता के नाम से कोई मत देकर जा चुका होता है और बाद में असली मतदाता आता है। ऐसे में उसे मशीन से मत रिकार्ड कराने के बजाय निविदत्त मतपत्र दिया जाता है। दूसरा व्यक्ति असली है या नहीं, यह पोलिंग एजेंटों की सहायता से आपको ही तय करना है। ये प्रकरण आप स्वयं ही निपटाएँ।

  1. पहचान से संतुष्ट होइएजारी करने से पूर्व पहचान हेतु प्रश्न पूछ सकते हैं। समाधान हो जाए तभी आगे बढ़िए।
  2. स्याही लगवाइएबाएँ हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही लगवाइए। यह मतपत्र देने से पहले होता है।
  3. प्ररूप 14-ख में प्रविष्टिनिविदत्त मतों की सूची में प्रविष्टि कीजिए और मतदाता के हस्ताक्षर अथवा अंगूठा लीजिए। इसके पश्चात ही मतपत्र जारी कीजिए। क्रम उलटा नहीं होना चाहिए।
  4. मतपत्र तैयार कीजिएमतपत्र वही होगा जो मतदान यूनिट में लगा है। उसकी पीठ पर 'निविदत्त मतपत्र' स्टाम्प लगाइए, और स्टाम्प न हो तो हाथ से लिखकर नीचे हस्ताक्षर कीजिए। सुभिन्नकारी चिन्ह की मोहर भी लगेगी, जिसमें ऊपर वार्ड और नीचे केन्द्र का क्रमांक होता है।
  5. मत अंकित कराइएनिर्वाचक को स्याही लगी ऐरोक्रॉस मार्क सील दी जाएगी। वह अभ्यर्थी के प्रतीक पर या नोटा के निर्धारित प्रतीक के पास अपना मत चिन्हित करेगा, मोड़कर आपको देगा।
  6. लिफाफे में रखिएचिन्हित मतपत्र लिफाफा E-5 में जाएगा और प्ररूप 14-ख पृथक लिफाफा E-6 में। दोनों मतदान समाप्ति के बाद सीलबन्द होंगे।
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दृष्टिहीन एवं शिथिलांग मतदाता

साथी की अनुमति देना केवल आपका अधिकार है, और उसकी शर्तें संकीर्ण हैं।

यदि आपका समाधान हो जाए कि दृष्टिहीनता अथवा शिथिलांगता के कारण मतदाता प्रतीक पहचानने या बटन दबाने में असमर्थ है, तो आप एक साथी को मतदान कक्ष में ले जाने की अनुमति दे सकते हैं। साथी की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

अभिलेख प्ररूप-12 में रखा जाता है और घोषणाएँ उसके साथ लिफाफा E-14 में जाती हैं। ध्यान रखिए कि E-14 सीलबन्द नहीं किया जाता।

नई मशीनों की बैलेट यूनिट में दाईं ओर ब्रेल लिपि में अभ्यर्थियों के क्रमांक होते हैं, जिससे दृष्टिहीन मतदाता स्वयं मत दे सकते हैं। फिर भी वे नियमों के अन्तर्गत साथी की सहायता के हकदार बने रहते हैं। सुविधा उपलब्ध होने से अधिकार समाप्त नहीं होता।

जिसके हाथ में कोई अंगुली या अंगूठा न हो, वह स्वयं मत रिकार्ड नहीं कर सकेगा और साथी आवश्यक होगा। ऐसे प्रकरण में साथी के हस्ताक्षर या अंगूठा रजिस्टर में लीजिए और प्रविष्टि के सामने अपना नोट लिखिए।
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मतदान समाप्ति, और प्ररूप 14-ग

दिन का सबसे अधिक अंकगणित यहीं है, और सबसे अधिक गलतियाँ भी यहीं होती हैं।

मतदान समाप्ति के पश्चात नियम 49-क के अधीन प्ररूप 14-ग के भाग-1 में लेखा तैयार कीजिए। कुल संख्या Total बटन से अभिनिश्चित कीजिए, और आवश्यक हो तो दोबारा दबाइए।

आइटमक्या भरना हैकहाँ से आएगा
1नियत निर्वाचकों की कुल संख्यानामावली
2मतदाता रजिस्टर में दर्ज कुल मतदाताप्ररूप 14-क के स्तम्भ 1 का अन्तिम क्रमांक
3मत रिकार्ड न करने का विनिश्चय करने वालों की संख्यारजिस्टर में जिनके सामने 'No Vote' लिखा है
4नियम 35-क या नियम 37-क के अधीन अनुज्ञात न किए गएजिन्हें आपने मत नहीं देने दिया
5मशीन के अनुसार दर्ज कुल मतTotal बटन
6मेल करती है या फर्कआपका मिलान
7निविदत्त मतपत्र जारी किए गएप्ररूप 14-ख
8निविदत्त मतपत्रों का हिसाब, तीन उप-आइटमक्रम संख्या से और तक
9पेपर सीलों का लेखाप्रदाय, प्रयुक्त, वापस, नष्ट
स्रोत: परिशिष्ट-8 का भरा हुआ नमूना

आइटम 3 और आइटम 4 का अन्तर

आइटम 3 उस मतदाता की है जिसने रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए, फिर स्वयं मत न डालने का निश्चय किया। मार्गदर्शिका कहती है कि ऐसे मतदाता को नोटा में मत डालने के लिए प्रेरित कीजिए, और फिर भी वह न डाले तो रजिस्टर में उसे 'No Vote' से इंगित कीजिए।

आइटम 4 उस मतदाता की है जिसे आपने मत नहीं देने दिया। कारण दो हो सकते हैं। या तो उसने अमिट स्याही अथवा हस्ताक्षर से इनकार किया, जो नियम 35-क के अधीन आता है, या उसने विहित प्रक्रिया अथवा गोपनीयता भंग की, जो नियम 37-क के अधीन आता है। इस दशा में रजिस्टर के नोट के नीचे आपके पूर्ण हस्ताक्षर भी होंगे।

प्ररूप 14-ग के शीर्ष में नियंत्रण यूनिट और मतदान यूनिट, दोनों के पहचान संख्यांक अनिवार्य हैं। यह वही खाना है जो सबसे अधिक छूटता है।

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सीलबन्दी, लिफाफे और सुपुर्दगी

दिन का अन्तिम काम अभिलेख का है। यहाँ की चूक मतगणना के दिन सामने आती है।

लेखा तैयार करके और अभिकर्ताओं को प्रतियाँ देकर ही मशीन सील कीजिए। पहले नियंत्रण यूनिट का पावर स्विच बन्द कीजिए, फिर बैलेट यूनिट और नियंत्रण यूनिट का सम्बन्ध-विच्छेद — आदेश 145/2026 पैरा 2 तथा नियम 47-क(1), दोनों यही क्रम देते हैं। नियम 47-क(2) के अनुसार दोनों यूनिट पृथक-पृथक इस प्रकार सील होंगी कि सील तोड़े बिना उन्हें खोलना सम्भव न हो।

आठ लिफाफे जो सील होंगे

लिफाफाक्या जाएगा
E-1निर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति
E-2मतदाताओं का रजिस्टर, प्ररूप 14-क
E-3प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ
E-4अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र
E-5प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र
E-6निविदत्त मतों की सूची, प्ररूप 14-ख
E-7आक्षेपित मतों की सूची, प्ररूप-13
E-8निर्वाचन ड्यूटी प्रमाण-पत्र
नियम 48-क सात मदें गिनाता है, जो इन्हीं लिफाफों में जाती हैं

शेष छह लिफाफे सील नहीं होते। इनमें E-9 प्ररूप 14-ग की एक प्रति, E-10 घोषणाएँ तथा मॉकपोल प्रमाणपत्र, E-11 पीठासीन अधिकारी की डायरी और 14-ग की दूसरी प्रति, E-12 सांख्यिक सूचना, E-13 अप्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ, और E-14 विविध कागजात हैं।

अन्त में नियम 50-क के अधीन रिटर्निंग अधिकारी को चार चीज़ें सौंपनी हैं। मतदान मशीन, प्ररूप 14-ग का लेखा, नियम 48-क के अधीन बने सीलबन्द पैकेट, और मतदान में प्रयुक्त अन्य सभी कागज़ात।

पुनरावृत्ति — जाने से पहले एक बार

नीचे की सामग्री नई नहीं है। यह ऊपर के अध्यायों का वही सार है जिसे रवाना होने से पहले एक बार देख लेना पर्याप्त होगा।

सार — पाँच बातें जो बदलती नहीं

1जो किसी और का नहीं, वह आपका हैतीनों मतदान अधिकारियों के काम सीमित हैं। चुनौती, निविदत्त मत, साथी की अनुमति और हर विवाद आपकी मेज पर आएगा।
2मॉक पोल के बाद CLEARआँकड़ा मिटाकर Total से शून्य देख लीजिए, और अभिकर्ताओं को भी दिखा दीजिए।
3₹2 की कसौटी नियम 43(5) हैजब्ती केवल तुच्छ अथवा असद्भावी चुनौती पर। निर्णय प्ररूप-13 के स्तम्भ 8 में कारण सहित लिखिए।
4आइटम 5 = आइटम 2 − आइटम 3 − आइटम 4मेल न बैठे तो संख्या नहीं, आइटम 6 में फर्क का विवरण लिखिए।
5हर पैकेट पर अन्तर्वस्तु लिखिएनियम 48-क की अपेक्षा है, सावधानी मात्र नहीं। और E-9 पर 'Account of Votes Recorded' भी।

अंक जो याद रहने चाहिए

20निविदत्त मतपत्र, प्रति केन्द्र
₹2चुनौती-शुल्क, नगद
18साथी की न्यूनतम आयु, वर्ष
1एक दिन में एक व्यक्ति, एक ही निर्वाचक का साथी
8सीलबन्द लिफाफे, E-1 से E-8
6बिना सील लिफाफे, E-9 से E-14

चलने से पहले की जाँच

जो कभी नहीं

इस पुस्तिका के स्रोत