पैम्फलेट, पोस्टर आदि के मुद्रण पर नियंत्रण — धारा 127-क
राजस्थान नगरपालिका आम चुनाव 2026 · DLMT / RO / ARO हेतु · आदेश 996 दिनांक 24.01.2026
यह फ़ाइल क्यों बनी। 23.08.2026 को
coverage_check.pyचलाने पर आयोग की सूची में एक ऐसा 2026 का आदेश मिला जो इस परियोजना में न था और न कहीं उद्धृत था — आदेश 996 दिनांक 24.01.2026। मैंने उसके पाँचों पृष्ठ स्वयं पढ़े (स्कैन की गई प्रति, कोई टेक्स्ट-लेयर नहीं थी)।🚨 यह चूक मेरी थी। आदेश की फ़ाइल-संख्या में "पंचा" लिखा है, इसलिए वह पंचायत का लगता है — किन्तु आदेश अपने ही शब्दों में नगरपालिका निर्वाचनों पर लागू है। नीचे प्रमाण दिया है।
1. 🚨 सबसे पहले — यह ULB पर लागू क्यों है
आदेश की पहली ही पंक्ति (पृष्ठ 1, मैंने पढ़ी):
"राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 28 एवं राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 22 के अनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क के प्रावधान नगर पालिका एवं पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचनों में भी लागू माने गये हैं।"
और निर्देश जारी करने वाला वाक्य (पृष्ठ 2):
"…नगरपालिका एवं पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचनों में पैम्फलेटों, पोस्टरों इत्यादि के मुद्रण पर नियंत्रण के संबंध में निम्नानुसार निर्देश जारी करता है…"
और परिशिष्ट-क का अपना शीर्षक (पृष्ठ 4):
"(राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 एवं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 28 के साथ पठित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क देखे)"
✅ निष्कर्ष
तीन अलग-अलग स्थानों पर आदेश स्वयं कहता है कि वह नगरपालिका निर्वाचन पर लागू है। फ़ाइल-संख्या का "पंचा" शब्द इसे पंचायत तक सीमित नहीं करता।
2. आदेश का परिचय-पत्र
| मद | विवरण |
|---|---|
| क्रमांक | एफ.7(1)(3) पंचा / रानिआ / 2014-15 / 996 |
| दिनांक | 24.01.2026 |
| विषय | पैम्फलेटों, पोस्टरों इत्यादि के मुद्रण पर नियंत्रण |
| हस्ताक्षरकर्ता | (राजेश वर्मा) मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव |
| प्रतिलिपि क्रमांक | 997–1003, दिनांक 24.01.2026 — (अम्बा लाल मीणा) उप सचिव |
| शक्ति का स्रोत | संविधान के अनुच्छेद 243-K एवं 243-ZA |
| 🔴 अधिक्रमण | प.7(1)(28)पं.चु./रानिआ/99/4364 दिनांक 22.12.2000 को अधिक्रमित करते हुए |
| पृष्ठ | 5 (पृ. 4 = परिशिष्ट-क, पृ. 5 = परिशिष्ट-ख) |
🔴 अधिक्रमण रजिस्टर की नई पंक्ति: 4364 (22.12.2000) → 996 (24.01.2026)। पुराना आदेश 4364 अब न पढ़ाएँ।
2-क. 🚨 आयोग के संकलन में यही आदेश 1783 (01.05.2018) के रूप में छपा है
यह जान लेना आवश्यक है, अन्यथा कक्षा में भ्रम खड़ा होगा। जो प्रशिक्षक संकलन खोलेगा, उसे मुद्रित पृष्ठ 83–87 पर आदेश 1783 दिनांक 01.05.2018 मिलेगा — 996 नहीं। दोनों में घबराने की कोई बात नहीं है।
मैंने दोनों को आमने-सामने रखकर पढ़ा — पाठ अक्षरशः एक ही है
| मद | 1783 (01.05.2018) संकलन, मु.पृ. 83–87 | 996 (24.01.2026) SEC साइट |
|---|---|---|
| फ़ाइल शृंखला | एफ.7(1)(3)पंचा/रानिआ/2014-15 | वही |
| विषय | पैम्फलेटों, पोस्टरों इत्यादि के मुद्रण पर नियंत्रण | वही |
| धारा 127-क का उद्धृत पाठ | (1), (2)(क)(ख), (3)(क)(ख), (4) | शब्दशः वही |
| अधिक्रमण | 4364 दिनांक 22.12.2000 | वही 4364 |
| निर्देश | (i)(क)(ख)(ग) · (ii) · (iii) · (iv) · (v) · (vi) · (vii) | शब्दशः वही |
| परिशिष्ट | क (प्रकाशक की घोषणा) · ख (मुद्रक की सूचना) | वही |
| हस्ताक्षर | (चन्द्रशेखर मूथा) मु.नि.अ. एवं सचिव | (राजेश वर्मा) मु.नि.अ. एवं सचिव |
✅ निष्कर्ष — और यह महत्वपूर्ण है
996, 1783 का ही पुनः-निर्गमन (re-issue) है। इसीलिए 996 भी 4364 को ही अधिक्रमित करता है, 1783 को नहीं — दोनों एक ही बात कहते हैं, इसलिए कोई विरोधाभास नहीं है। सही शृंखला: 4364 (22.12.2000) → 1783 (01.05.2018) → 996 (24.01.2026)
➡ आप 1783 उद्धृत करें या 996 — विषय-वस्तु एक ही है। कक्षा में सुविधा के लिए 996 कहें, क्योंकि वह इस चुनाव-चक्र का है।
⚪ एक छोटी मुद्रण-त्रुटि — संकलन में है, 996 में नहीं
| स्रोत | निर्देश (iv) की पंक्ति |
|---|---|
| संकलन (1783), मु.पृ. 85 | "…प्रत्येक ऐसे दस्तावेज के मुद्रण के तीन के भीतर सामूहिक रूप से नहीं…" ⚠️ "दिन" छूटा है |
| आदेश 996, पृ. 2 | "…प्रत्येक ऐसे दस्तावेज के मुद्रण के तीन दिन के भीतर सामूहिक रूप से नहीं…" ✅ |
🎯 यह सारभूत दोष नहीं, केवल छपाई की चूक है — उसी आदेश का निर्देश (i)(ख) दोनों प्रतियों में "तीन दिन के भीतर" ही कहता है। अवधि तीन दिन ही है। संकलन से पढ़ाते समय यह जोड़ लें।
3. 🚨 आदेश किस उद्देश्य से है — यह समझे बिना पालना बेमानी है
आदेश स्वयं कारण बताता है (पृष्ठ 2, प्रथम अनुच्छेद):
"…नियंत्रण इस दृष्टि से आरोपित किए गए हैं कि ऐसे दस्तावेजों के प्रकाशकों (Publishers) और मुद्रकों (Printers) की पहचान स्थापित हो सके, जिससे कि यदि ऐसे दस्तावेज में कोई ऐसी विषय वस्तु हो जो विधि विरुद्ध (अवैध) हो, क्षतिकारक या आपत्तिजनक हो (यथा धर्म, प्रजाति, जाति समुदाय या भाषा के आधार पर अपील, या किसी विपक्षी इत्यादि के चरित्र हनन की सामग्री) तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक दण्डात्मक या निरोधक कार्यवाही की जा सके।"
🎯 प्रशिक्षण में यही वाक्य बोलें
धारा 127-क कागज़ी औपचारिकता नहीं है। गुमनाम, साम्प्रदायिक या चरित्र-हनन करने वाली सामग्री का मुद्रक और प्रकाशक इसी से पकड़ा जाता है। नाम-पता न छपा हो — सामग्री गुमनाम है। गुमनाम सामग्री ही सबसे ज़हरीली होती है।
4. धारा 127-क का पूरा पाठ — जैसा आदेश में उद्धृत है
"127 क. पुस्तिकाओं, पोस्टरों आदि के मुद्रण पर निर्बन्धन :—
| उप-धारा | प्रावधान |
|---|---|
| (1) | कोई भी व्यक्ति कोई ऐसी निर्वाचन पुस्तिका या पोस्टर जिसके मुख्य पृष्ठ पर उसके मुद्रक और प्रकाशक के नाम और पते न हों, मुद्रित या प्रकाशित न करेगा और न मुद्रित या प्रकाशित कराएगा |
| (2)(क) | कोई भी व्यक्ति किसी निर्वाचन पुस्तिका या पोस्टर को उस दशा में के सिवाय न तो मुद्रित करेगा, और न मुद्रित कराएगा, जिसमें वह उसके प्रकाशक की अनन्यता के बारे में अपने द्वारा हस्ताक्षरित और ऐसे दो व्यक्तियों द्वारा जो उसे स्वयं जानते हैं अनुप्रमाणित द्विप्रतीक घोषणा मुद्रक को परिदत्त कर देता है |
| (2)(ख) | …उस दशा में के सिवाय जिसमें कि मुद्रक घोषणा की एक प्रति दस्तावेज की एक प्रति के सहित — (i) राज्य की राजधानी में मुद्रित होने पर मुख्य निर्वाचन ऑफिसर को, तथा (ii) किसी अन्य दशा में उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को जिसमें वह मुद्रित की जाती है, दस्तावेज के मुद्रण के पश्चात् युक्तियुक्त समय के भीतर भेज देता है |
| (3)(क) | दस्तावेज की अनेकानेक प्रतियां बनाने की ऐसी प्रक्रिया, जो हाथ से नकल करके प्रतियां बनाने से भिन्न है, "मुद्रण" समझी जायेगी; "मुद्रक" पद का अर्थ तदनुसार |
| (3)(ख) | "निर्वाचन पुस्तिका या पोस्टर" = किसी अभ्यर्थी/अभ्यर्थियों के समूह के निर्वाचन को सम्प्रवर्तित या प्रतिकूलतः प्रभावित करने के प्रयोजन के लिये वितरित कोई मुद्रित पुस्तिका, पर्चा या अन्य दस्तावेज, या निर्वाचन के प्रति निर्देश करने वाला कोई प्लेकार्ड या पोस्टर — किन्तु किसी निर्वाचन सभा की तारीख, समय, स्थान और अन्य विशिष्टियों को केवल आख्यापित करने वाला, या निर्वाचन अभिकर्ताओं/कार्यकर्ताओं को चर्या संबंधी अनुदेश देने वाला कोई पर्चा, प्लेकार्ड या पोस्टर इसके अन्तर्गत नहीं आता |
| (4) | उप-धारा (1) या (2) का उल्लंघन — छः मास तक कारावास या दो हजार रुपये तक जुर्माना, या दोनों" |
⚠️ (3)(ख) का अपवाद — यही सबसे ज़्यादा पूछा जाता है
सामग्री 127-क लागू? अभ्यर्थी का प्रचार-पर्चा, अपील, पोस्टर ✅ हाँ "सभा दिनांक 05.09.2026, समय 4 बजे, स्थान रामलीला मैदान" — केवल इतना ❌ नहीं एजेंट/कार्यकर्ता के लिए कार्य-निर्देश की पर्ची ❌ नहीं ऊपर वाली सभा-सूचना में अभ्यर्थी के पक्ष में अपील भी जुड़ी हो ✅ हाँ — अपवाद समाप्त 🚨 अपवाद केवल तभी है जब पर्चा केवल सूचना दे। ज़रा-सी अपील जुड़ते ही वह "निर्वाचन पुस्तिका या पोस्टर" बन जाता है।
5. 🔴 आयोग के सात निर्देश — (i) से (vii)
(i) जिला मजिस्ट्रेट तीन दिन के भीतर सभी मुद्रणालयों को लिखेगा
"जैसे ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरपालिकाओं के साधारण या किसी उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित किया जायेगा, वैसे ही संबंधित जिला मजिस्ट्रेट निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा किये जाने के तीन दिन के भीतर अपने जिले के सभी मुद्रणालयों को —"
| खण्ड | जिला मजिस्ट्रेट क्या लिखेगा |
|---|---|
| (क) | धारा 127-क की अपेक्षाओं को इंगित करते हुए, और विशेष रूप से यह निर्देश कि उनके द्वारा मुद्रित किसी निर्वाचन पुस्तिका/पोस्टर/अन्य सामग्री पर मुद्रकीय हाशिये में स्पष्ट रूप से मुद्रक एवं प्रकाशक का नाम एवं पता अंकित किया जाए |
| (ख) | उप-धारा (2) के अधीन प्रकाशक से प्राप्त घोषणा-पत्र और मुद्रित सामग्री की प्रतियां — प्रत्येक की तीन अतिरिक्त प्रतियों सहित — मुद्रित किये जाने के तीन दिन के भीतर भेजने के लिए मुद्रकों को लिखेगा |
| (ग) | यह लिखेगा कि उल्लंघन/अतिक्रमण गम्भीरता पूर्वक लिया जाएगा और राज्य के सुसंगत नियमों के अधीन मुद्रणालयों के अनुज्ञा पत्र समाप्त किये जाने सहित अन्य कानूनी कार्यवाही की जाएगी |
🚨🚨 बालोतरा के लिए — यह तिथि निकल चुकी है
तथ्य तिथि आम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा (प्रेस-नोट 6722) 19.08.2026 आदेश 996(i) की तीन दिन की सीमा ➡ 22.08.2026 आज 23.08.2026 ⚠️ मैं यह नहीं कह रहा कि जिला मजिस्ट्रेट ने पालना नहीं की — मुझे यह जानने का कोई साधन नहीं। 🚨 मैं यह कह रहा हूँ कि यह तिथि बीत चुकी है, और DLMT को DEO से यह पूछ लेना चाहिए कि बालोतरा जिले के सभी मुद्रणालयों को पत्र निकल गए या नहीं। यदि नहीं निकले — तो आज ही निकलें।
(ii) जयपुर
जिला मजिस्ट्रेट जयपुर, जयपुर शहर में स्थित मुद्रणालयों के संबंध में भी समान रूप से कार्यवाही करेगा।
(iii) मुद्रक — काम लेने से पहले घोषणा-पत्र ले
"निर्वाचन पुस्तिकाओं, पोस्टरों, आदि के मुद्रण के कार्य को लेने से पूर्व प्रत्येक मुद्रक धारा 127-क की उपधारा (2) की शर्तों के अनुसार आयोग द्वारा विहित "परिशिष्ट-क" में प्रकाशक से हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र प्राप्त कर लेगा। यह घोषणा पत्र दो व्यक्तियों द्वारा सत्यापित भी किया जायेगा जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। मुख्य निर्वाचन अधिकारी … या जिला मजिस्ट्रेट … को उसे प्रेषित करते समय, मुद्रक द्वारा भी उसे प्रमाणित किया जाएगा।"
(iv) मुद्रक — चार प्रतियां, तीन दिन में, अलग-अलग
| अपेक्षा | विवरण |
|---|---|
| कितनी प्रतियां | प्रकाशक के घोषणा-पत्र के साथ मुद्रित सामग्री की चार (4) प्रतियां |
| कब तक | मुद्रित किये जाने के तीन दिन के भीतर |
| साथ में क्या | परिशिष्ट-ख में — प्रतियों की संख्या और ली गई कीमत की सूचना |
| 🚨 कैसे | "प्रत्येक ऐसे दस्तावेज के मुद्रण के तीन दिन के भीतर सामूहिक रूप से नहीं अपितु अलग-अलग प्रस्तुत की जायेगी" |
🔴 (i)(ख) में "तीन अतिरिक्त प्रतियां" और (iv) में "चार प्रतियां" — विरोधाभास नहीं है। मूल 1 + अतिरिक्त 3 = कुल 4। दोनों पंक्तियाँ एक ही बात कहती हैं।
(v) जिला मजिस्ट्रेट — जाँच और सार्वजनिक प्रदर्शन
"किसी मुद्रणालय से पुस्तिकाओं, पोस्टरों आदि के प्राप्त होने के तत्काल पश्चात् जिला मजिस्ट्रेट इस बात की जांच करेगा कि प्रकाशकों और मुद्रकों ने कानून की और … आयोग के निर्देशों की अपेक्षाओं का अनुपालन किया है या नहीं। इसके अतिरिक्त कार्यालय में किसी सहजदृश्य स्थान / नोटिस बोर्ड पर उसकी एक प्रति प्रदर्शित करवाएगा, जिससे कि सभी राजनीतिक दल, प्रत्याशी और दिलचस्पी रखने वाले अन्य व्यक्ति … जांच कर सकें … और … उल्लंघन … संबंधित प्राधिकारियों के संज्ञान में ला सकने में सक्षम होंगे।"
🎯 यह सबसे कम जाना जाने वाला खण्ड है। प्राप्त सामग्री नोटिस बोर्ड पर लगनी है — ताकि विरोधी दल भी उल्लंघन पकड़ सकें। यह पारदर्शिता का उपकरण है, केवल फाइलिंग नहीं।
(vi) जयपुर से आयोग को दो प्रतियां
जिला मजिस्ट्रेट जयपुर द्वारा जयपुर शहर के मुद्रणालयों से प्राप्त 4 प्रतियों में से दो प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय को भेजी जायेंगी।
(vii) उल्लंघन पर — सक्षम न्यायालय में परिवाद
"धारा 127-क के प्रावधानों के और आयोग के उक्त निर्देशों के अतिक्रमण/उल्लंघन में प्रकाशित किन्हीं पैम्फलेटों, पोस्टर आदि का मामला यदि जिला मजिस्ट्रेट के संज्ञान में आता है या लाया जाता है तो सम्यक जांच उपरान्त दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर कार्यवाही की जावें।"
⚠️ कार्यवाही का रास्ता = न्यायालय में परिवाद। RO/ARO स्वयं दण्ड नहीं दे सकते; वे जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करते हैं।
समापन पंक्ति (आदेश की अपनी):
"राज्य निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को एतद्द्वारा यह सूचित करता है कि उपर्युक्त विषय पर कानून एवं आयोग के निर्देशों के उल्लंघन को गम्भीरता से लिया जायेगा और दोषियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्यवाही की जायेगी।"
6. परिशिष्ट-क — प्रकाशक का घोषणा-पत्र (पृष्ठ 4, मैंने पढ़ा)
शीर्षक: "निर्वाचन पोस्टर, पर्चे इत्यादि छापने हेतु प्रकाशक द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली घोषणा का प्रारूप" कोष्ठक: (राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 एवं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 28 के साथ पठित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क देखे)
| भरे जाने वाले खाने |
|---|
| मैं …………… (नाम) |
| पुत्र / पुत्री / पत्नी / श्री …………… (नाम), निवासी …………… (पूर्ण पता) |
| एतद्द्वारा घोषणा करता हूँ कि मैं …………… (नाम) |
| …………… (निर्वाचन पोस्टरों, पर्चों-आदि मुद्रित सामग्री का विवरण) का प्रकाशक हूँ |
| जो …………… (छापेखाने का नाम) द्वारा छापे जा रहे हैं |
| स्थान …………… · दिनांक …………… · पूरा पता …………… |
| प्रकाशक के हस्ताक्षर |
| अनुप्रमाणित — (ऐसा व्यक्ति जिसे प्रकाशक व्यक्तिगत रूप से जानता हो) 1. हस्ताक्षर (नाम तथा पता) · 2. हस्ताक्षर (नाम तथा पता) |
🚨 दो अनुप्रमाणकों का खाना खाली नहीं छोड़ा जा सकता — धारा 127-क(2)(क) की यह वैधानिक शर्त है।
7. परिशिष्ट-ख — मुद्रक की सूचना (पृष्ठ 5, मैंने पढ़ा)
शीर्षक: "मुद्रक द्वारा निर्वाचन पोस्टर, पर्चे इत्यादि छापने हेतु प्रस्तुत की जाने वाली सूचना का प्रारूप"
| क्र. | मद |
|---|---|
| 1 | मुद्रक का नाम व पता |
| 2 | प्रकाशक का नाम व पता |
| 3 | प्रकाशक के मुद्रण आदेश की तिथि |
| 4 | प्रकाशन की घोषणा की तिथि |
| 5 | निर्वाचन पोस्टर पर्चे इत्यादि के बारे में संक्षिप्त विवरण |
| 6 | उपर वर्णित दस्तावेज की मुद्रित प्रतियों की संख्या |
| 7 | मुद्रण की तिथि |
| 8 | उपर वर्णित दस्तावेजों के संबंध में प्रकाशक से वसूल किया गया मुद्रण प्रभार (कागज की कीमत सहित) |
स्थान · तिथि · मुद्रक के हस्ताक्षर मय सील
🎯 मद 8 पर ध्यान दें — मुद्रण प्रभार। यही आँकड़ा अभ्यर्थी के निर्वाचन व्यय लेखे से मिलान करने के काम आता है। कम दिखाया गया प्रचार-व्यय यहीं पकड़ में आता है।
8. ✅ एक पृष्ठ की जाँच-सूची
| # | कौन | क्या | कब तक |
|---|---|---|---|
| 1 | जिला मजिस्ट्रेट | जिले के सभी मुद्रणालयों को पत्र | कार्यक्रम-घोषणा से 3 दिन (= 22.08.2026) |
| 2 | प्रकाशक | परिशिष्ट-क घोषणा — हस्ताक्षरित + 2 परिचितों से अनुप्रमाणित | मुद्रण आरम्भ होने से पहले |
| 3 | मुद्रक | नाम-पता मुद्रकीय हाशिये में छापे | प्रत्येक प्रति पर |
| 4 | मुद्रक | घोषणा + 4 प्रतियां + परिशिष्ट-ख → DM (राजधानी में मुद्रित हो तो CEO) | मुद्रण से 3 दिन, अलग-अलग |
| 5 | जिला मजिस्ट्रेट | अनुपालन की जाँच + नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शन | प्राप्ति के तत्काल पश्चात् |
| 6 | जिला मजिस्ट्रेट | उल्लंघन पर सक्षम न्यायालय में परिवाद | सम्यक जांच के बाद |
दण्ड: छः मास तक कारावास या ₹2,000 तक जुर्माना या दोनों (धारा 127-क(4)) + मुद्रणालय का अनुज्ञा पत्र समाप्त किया जा सकता है (निर्देश (i)(ग))
9. ⚠️ जो मैं नहीं कह सकता
| प्रश्न | ईमानदार उत्तर |
|---|---|
| क्या बालोतरा के DM ने 22.08.2026 तक पत्र भेज दिए? | ❌ मुझे नहीं मालूम। यह जिला अभिलेख में है, आयोग की वेबसाइट पर नहीं |
| क्या आदेश 996 के बाद कोई और आदेश आया? | ✅ आयोग की सभी 9 सूची-पृष्ठों पर 23.08.2026 तक कोई नहीं — _tools/coverage_check.py से जाँचा |
| क्या 4364 (22.12.2000) कहीं और भी काम आता है? | ❌ आदेश 996 ने उसे अधिक्रमित कर दिया। उसे न पढ़ाएँ |
10. 🟠 पेड न्यूज — आदेश 4261 दिनांक 26.09.2014 · तंत्र दर्ज है, प्रभावशीलता अपुष्ट
⚠️ पहले चेतावनी, फिर सामग्री
यह आदेश 2014 का है। हमारे अपने नियम (अधिक्रमण रजिस्टर, भाग 2) के अनुसार 2026 से पहले का आदेश तभी पढ़ाया जा सकता है जब (क) वह 2026 के संकलन में पुनः छपा हो, या (ख) किसी 2026 आदेश के साथ संलग्न भेजा गया हो।
मैंने दोनों जाँचे — दोनों में से कोई भी सत्य नहीं है।
🚨 इसलिए नीचे का विवरण "यह लागू है" कहने के लिए नहीं है। यह DEO से पूछने के लिए है।
जो मैंने वास्तव में जाँचा
| प्रश्न | उत्तर | कैसे जाना |
|---|---|---|
| क्या आयोग ने पेड न्यूज पर कोई 2026 का आदेश निकाला? | ❌ नहीं | आयोग के नौ सूची-पृष्ठों की 1463 प्रविष्टियाँ छानीं — पेड / Paid / मीडिया / MMC / प्रकोष्ठ पर केवल 4261 मिला (General_Orders पर दो बार सूचीबद्ध) |
| क्या 4261 नगरपालिका पर लागू है? | ✅ अपने शब्दों में हाँ | सम्बोधन: "समस्त जिला निर्वाचन अधिकारी (नगरपालिका/पंचायत), (कलक्टर)"; विषय: "नगरपालिका एवं पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचन के दौरान पेड न्यूज" |
| क्या 4261 का आधार जीवित है? | 🔴 नहीं | वह अधिसूचना 3982 दिनांक 15.09.2014 की व्यय-सीमा पर टिका है। वह शृंखला 4237 (2019) होते हुए 5041 / सां.आ. 137/2025 (23.12.2025) तक पहुँच चुकी है |
| क्या यह 2026 के संकलन में है? | ❌ नहीं | संकलन में पेड न्यूज / मीडिया प्रकोष्ठ / मॉनिटरिंग कहीं नहीं |
🔴 आदेश का सार (अभिलेख हेतु — चारों पृष्ठ पढ़े)
विधिक आधार जो वह स्वयं बताता है: पेड न्यूज को नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 23 के अधीन कटआउट/होर्डिंग/पोस्टर/बैनर की व्यय सीमा के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया।
मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी (MMC) — जिला स्तर
| क्रम | पद | भूमिका |
|---|---|---|
| 1 | जिला नगरपालिका निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) | अध्यक्ष |
| 2 | जिला स्तर पर पदस्थापित RAS का वरिष्ठ अधिकारी (DEO द्वारा मनोनीत) | सदस्य |
| 3 | जिला जन सम्पर्क अधिकारी | सदस्य सचिव |
🚨 RO का अपना कर्तव्य — और उसकी 48 घण्टे की घड़ी
| चरण | क्या होता है |
|---|---|
| 1 | मीडिया प्रकोष्ठ संदिग्ध प्रकरण चिन्हित करता है → जिला MMC प्रारम्भिक परीक्षण करती है |
| 2 | संदिग्ध माने जाने पर प्रकरण सम्बन्धित नगरपालिका क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी को भेजा जाता है |
| 3 | 🔴 RO अभ्यर्थी को नोटिस जारी करेगा। अभ्यर्थी नोटिस की तामील के 48 घण्टे के अन्दर जवाब दे सकेगा |
| 4 | निर्धारित समय में जवाब न आए → RO नोटिस की प्रति सहित प्रकरण DEO के माध्यम से जिला MMC को भेजेगा |
| 5 | अभ्यर्थी मान ले → लागत DAVP / DPR दर से निकालकर निर्वाचन व्यय खाते में जोड़ दी जाएगी |
| 6 | अभ्यर्थी न माने → प्रकरण पुनः जिला MMC में; निर्णय MMC करेगी। निर्णय की प्रति अभ्यर्थी/दल को दी जाएगी |
| 7 | 🔴 अपील — मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय MMC के समक्ष, 48 घण्टे के अन्दर। अपील में जिला-निर्णय निरस्त हुआ तो जोड़ी गई राशि घटा दी जाएगी |
| 8 | पेड न्यूज हेतु परिशिष्ट-1 के प्रारूप में रजिस्टर संधारित होगा |
लागत कैसे आँकी जाती है
| आधार | विवरण |
|---|---|
| प्राथमिक दर | DAVP की दरें |
| DAVP उपलब्ध न हो | DPR की दरें |
| 🚨 प्रिंट | "पेड न्यूज से संबंधित समाचार कौन से पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ है… उसके अनुरूप लागत बढ़ा दी जायेगी" |
| 🚨 इलेक्ट्रॉनिक | प्रसारण का समय (प्राईम टाईम / साधारण टाईम) ध्यान में रखकर लागत |
मीडिया प्रकोष्ठ (जिला) — नोडल एवं कार्य
नोडल अधिकारी: जिला जन सम्पर्क अधिकारी, अथवा जनसम्पर्क सेवा का जिले में पदस्थापित वरिष्ठतम अधिकारी।
| # | कार्य |
|---|---|
| 1 | जिले के समस्त समाचार पत्र-पत्रिकाएँ मंगवाना, कटिंग नोडल अधिकारी को, नोडल से DEO को |
| 2 | आवश्यक टेलिविजन सेट, केबल, कम्प्यूटर, रेडियो, इंटरनेट की व्यवस्था; विज्ञापन, संदिग्ध पेड न्यूज एवं आदर्श आचार संहिता उल्लंघन की कटिंग/सीडी नोडल अधिकारी को |
| 3 | समाचार पत्रों / संदिग्ध पेड न्यूज की लागत DEO के माध्यम से रिटर्निंग अधिकारी को |
निगरानी की कालावधि: "चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के पश्चात निर्वाचन हेतु लोक सूचना जारी होने की तिथि से मतदान की तिथि तक"।
🆕 आदेश 966 दिनांक 24.01.2026 — आधा प्रश्न यहीं सुलझ जाता है
संकलन क्रम 23, मु.पृ. 101 — स्वयं पढ़ा। यह 2026 का आदेश है।
| बिन्दु | आदेश क्या कहता है |
|---|---|
| कौन-सा प्रकोष्ठ | प्रत्येक जिले में जिला जन सम्पर्क अधिकारी के प्रभार में एक प्रकोष्ठ |
| कब से कब तक | 🔴 मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन के पश्चात् से चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तक |
| क्या करेगा | प्रतिदिन स्थानीय समाचार पत्रों में चुनाव संबंधी समाचारों का संकलन |
| कहाँ जाएगा | संकलन DEO के माध्यम से आयोग की वेबसाइट पर अपलोड |
| आयोग स्तर पर | जनसम्पर्क अधिकारी विश्लेषण करेगा; स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव पर विपरीत प्रभाव डालने वाले समाचार CEO के माध्यम से आयोग के ध्यान में |
| 🔴 अधिक्रमण | "इस संबंध में पूर्व में जारी समस्त आदेशों को अतिक्रमित करते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।" |
✅ अब यह निश्चित है
2026 के लिए जिला स्तर पर DPRO के प्रभार में एक प्रकोष्ठ है ही — यह 2026 के अपने आदेश से गठित है, किसी अनुमान से नहीं।
⚠️ किन्तु यह पूरा उत्तर नहीं है — सावधानी से पढ़ें
आदेश 966 में न "पेड न्यूज़" शब्द है, न MMC, न व्यय-खाते में जोड़ने की कोई बात। उसका विषय समाचार-संकलन है। इसलिए —
प्रश्न स्थिति क्या 2026 के लिए समाचार-प्रकोष्ठ है? ✅ हाँ — आदेश 966 क्या MMC गठित है, और क्या पेड न्यूज़ का आधार 4261 माना जा रहा है? ⚠️ यह अभी भी खुला है — DEO से पूछें
स्रोत: आदेश 966 दिनांक 24.01.2026 — संकलन क्रम 23, मु.पृ. 101
✅ बालोतरा के DLMT के लिए निष्कर्ष
| करें | न करें |
|---|---|
| ✅ DEO से पूछें — क्या 2026 के लिए मीडिया प्रकोष्ठ व MMC गठित हुए, और क्या 4261 को ही आधार माना जा रहा है | ❌ इसे "यह नियम है" कहकर न पढ़ाएँ |
| ✅ RO को बताएँ कि पेड न्यूज का नोटिस उन्हीं को जारी करना पड़ सकता है, और 48 घण्टे की सीमा है | ❌ 3982 की व्यय-सीमा न बताएँ — वह मर चुकी है; 5041 / सां.आ. 137/2025 ही चालू है |
| ✅ व्यय सीमा वही पढ़ाएँ जो चालू है — निगम पार्षद ₹3,50,000 · परिषद पार्षद ₹2,00,000 · नगरपालिका सदस्य ₹1,50,000 | ❌ DEO की पुष्टि के बिना परिशिष्ट-1 रजिस्टर न बँटवाएँ |
प्रति सुरक्षित: SEC_standing/2014-09-26_4261_paid_news.pdf (चारों पृष्ठ चित्र-रूप में पढ़े)
स्रोत: आदेश 996 दिनांक 24.01.2026, पाँचों पृष्ठ स्वयं पढ़े →
SEC_standing/2026-01-24_996_printing_control.pdf
संकलन: 23.08.2026 · कैसे मिला: _tools/coverage_check.py (LIVE gap)
अंग्रेजी समानांतर: Control on printing of pamphlets, posters etc. — section 127-A
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