DLMT प्रशिक्षण सामग्री — सुधार पत्रक
मास्टर ट्रेनर के लिए · नगरपालिका आम चुनाव 2026 (राजस्थान)
📍 नई फ़ाइल खोज रहे हैं? पहले यहाँ जाएँ → START_HERE_hi — 43 फ़ाइलों में से कब क्या खोलना है, भूमिका और तिथि के अनुसार।
किसके लिए: मास्टर ट्रेनर (DLMT / BLMT) एवं प्रशिक्षण प्रभारी कब तक: 🚨 संवीक्षा 01.09.2026 — मद 2, 3, 4 एवं 7 (आयु की गणना) उसी दिन काम आते हैं। मद 1 मतदान दिवस 09 एवं 11.09.2026 का है।
यह पत्रक क्या है: DLMT की मौजूदा स्लाइडों में वे बिन्दु जिन्हें प्रशिक्षण से पहले बदलना आवश्यक है, और साथ ही — उतना ही महत्वपूर्ण — वे बिन्दु जिन्हें नहीं बदलना है, यद्यपि वे संदिग्ध लगते हैं।
हर मद में यह लिखा है: स्लाइड · उस पर छपा मूल पाठ · सही पाठ · स्रोत · वर्ग · कक्षा में क्या कहें।
🚦 वर्गीकरण — चार अलग-अलग बातें, इन्हें कभी न मिलाएँ
| चिन्ह | वर्ग | अर्थ | क्या करें |
|---|---|---|---|
| ❌ | विधि-विरुद्ध | जैसा छपा है वैसा करने पर विधि का उल्लंघन होगा | तुरन्त बदलें |
| 🕐 | निरसित/अद्यतन नहीं | विधि बदल चुकी है; पुराना उद्धरण अब जीवित नहीं | उद्धरण बदलें |
| ✏️ | शब्दांकन/उद्धरण अशुद्ध | बात सही है, विधिक हुक गलत है | केवल संदर्भ ठीक करें |
| 🟡 | विधिसम्मत, पर वर्तमान व्यवस्था नहीं | गलत नहीं है — बस 2026 का कर्तव्य-विभाजन अलग है | 🚨 इसे "त्रुटि" न कहें |
🔴 यह वर्गीकरण ही इस पत्रक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। झूठी त्रुटि उतनी ही हानिकारक है जितनी छूटी हुई त्रुटि — जो सामग्री सही थी उसे "सुधार" दिया जाए, तो शेष सभी निष्कर्षों की विश्वसनीयता भी चली जाती है।
भाग क — ❌ जिन्हें बदले बिना प्रशिक्षण न कराएँ
मद 1 — PP2_p018 (मॉक पॉल) — "मतदाता BALLOT बटन दबाएगा" ❌
स्लाइड पर छपा है, बिन्दु 3:
"मतदाता कंट्रोल यूनिट के बैलट सेक्शन पर BALLOT बटन दबाएगा। BALLOT बटन दबाने पर, डिस्प्ले सेक्शन पर लाल रंग का Busy लैम्प जलेगा इसके साथ ही BU पर हरी बत्ती जलेगी।"
✅ सही पाठ:
"तृतीय मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट के बैलट सेक्शन पर BALLOT बटन दबाएगा।"
स्रोत: - मार्गदर्शिका अ.9(6)1 — "'Ballot' बटन, कन्ट्रोल यूनिट के प्रभारी तृतीय मतदान अधिकारी द्वारा दबाया जायेगा" - मार्गदर्शिका अ.14(3)10 — तृतीय मतदान अधिकारी "'Ballot' बटन दबाकर मत देने के लिए अनुज्ञात करेगा" - नियम 32-ख(6) — CU पीठासीन अधिकारी और अभिकर्ताओं को पूर्णरूप से दृष्टिगोचर रहेगी - आदेश 1408 दिनांक 04.02.2026 — "कन्ट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी"
कक्षा में क्या कहें:
"मतदाता कंट्रोल यूनिट को कभी नहीं छूता।" CU पीठासीन अधिकारी की मेज पर, अभिकर्ताओं की दृष्टि में रहती है। मतदाता केवल मतदान प्रकोष्ठ में रखी बैलट यूनिट तक जाता है।
यदि ऐसे ही पढ़ाया गया: जिस दल ने "मतदाता BALLOT दबाएगा" रट लिया वह वास्तविक मतदान में भी वही करेगा — मशीन की अभिरक्षा और मत की गोपनीयता दोनों भंग।
⚠️ साथ ही मद 12 (भाग ग) अवश्य पढ़ें — पुराने डेक की "पीठासीन अधिकारी BALLOT दबाएगा" वाली पंक्ति त्रुटि नहीं है। इन दोनों को एक साथ न मिलाएँ।
मद 1-क — 🚨 PP1_p066 — बैलट दबाने से पहले अमिट स्याही की जाँच का चरण गायब है ❌ (नया — 22.08.2026)
कब काटता है: 09 एवं 11.09.2026, हर बूथ पर, हर मतदाता पर।
PP1_p066 — तृतीय मतदान अधिकारी के कर्तव्य, स्लाइड पर छपे 5 बिन्दु (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
| # | स्लाइड पर |
|---|---|
| 1 | तृतीय मतदान अधिकारी पीठासीन अधिकारी के पास उसी की मेज पर बैठेगा |
| 2 | मतदान अधिकारी द्वारा जारी मतदान पर्ची मतदाता से प्राप्त कर अपने पास क्रमबद्ध सुरक्षित रखेगा |
| 3 | 🚨 नियंत्रण यूनिट के बैलट बटन को दबाकर … बैलेट यूनिट को चालू करेगा |
| 4 | मतदाता को उसका मत रिकॉर्ड करने के लिए वोटिंग कम्पार्टमेंट में भेजेगा |
| 5 | बीप की आवाज आने तक मतदाता को वोटिंग कम्पार्टमेंट में रोकेगा |
🚨 बिन्दु 2 से सीधे बिन्दु 3 पर जाया गया है — बीच में अमिट स्याही की जाँच का चरण है ही नहीं।
✅ जो होना चाहिए — आदेश 1408 दिनांक 04.02.2026, पैरा 2 (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
"कन्ट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कन्ट्रोल यूनिट का बैलेट बटन दबाने से पहले, निर्वाचकों की अंगुली पर अमिट स्याही का निशान पूरी तरह से लगा हो। साथ ही मतपेटी से मतदान होने की स्थिति में चतुर्थ सहायक मतदान अधिकारी निर्वाचक द्वारा मत अभिलिखित करने से पूर्व अमिट स्याही का निशान … पूरी तरह लगाया जाना सुनिश्चित करें।"
विधिक आधार: नियम 35-क(2)(क) का द्वितीय परन्तुक — "no voter shall be allowed to vote unless he has allowed a mark to be put on his left forefinger with an indelible ink"
✅ सुधार — PP1_p066 के बिन्दु 2 और 3 के बीच नया बिन्दु जोड़ें:
"2-क. बैलट बटन दबाने से पहले मतदाता की बाईं तर्जनी पर अमिट स्याही का निशान पूरी तरह लगा है, यह सुनिश्चित करेगा। निशान न हो या अधूरा हो तो मतदाता को द्वितीय मतदान अधिकारी के पास वापस भेजेगा — बैलट बटन नहीं दबाएगा।"
⚠️ अति-सुधार न करें — PP1_p067 को हटाएँ नहीं
PP1_p067 कहती है "निर्वाचक के वोटिंग कम्पार्टमेंट से वापिस आने पर … अमिट स्याही के चिन्ह की जांच
करेगा"। यह अपने आप में गलत नहीं है — मार्गदर्शिका अ.3 मद 16 निकलते समय पुनः जाँच की अपेक्षा करती है
कि स्याही सूख गई है।
🚨 दोनों जाँचें अलग हैं और दोनों चाहिए — (क) प्रवेश से पूर्व — निशान लगा है (आदेश 1408) · (ख) निकलते समय — निशान सूख गया है (मार्गदर्शिका)
PP1_p067को हटाना नहीं है;PP1_p066में छूटा हुआ चरण जोड़ना है।💡 आदेश 1408 से दो और बातें जो प्रशिक्षण में बताएँ: (1) स्याही ब्रश से, बाईं तर्जनी के नाखून के आखिरी सिरे से प्रथम जोड़ के नीचे तक लगेगी (पैरा 1, आरेख सहित)। (2) आदेश की एक प्रति पीठासीन अधिकारी की किट में रखी जाएगी (पैरा 3) — यह जाँच लें। (आदेश 5493 दिनांक 26.07.2015 अधिक्रमित)
मद 1-ख — 🚨 PP2_p010 (मद 4) — स्लाईड स्विच का नियम: ठीक 16 अभ्यर्थियों पर कोई नियम ही नहीं, और "नोटा सहित" गायब ❌ (नया — 22.08.2026)
कब काटता है: 09 एवं 11.09.2026, पीठासीन अधिकारी के मशीन-निरीक्षण के समय। यह स्लाइड "पीठासीन अधिकारी द्वारा EVM को तैयार करना" शीर्षक के नीचे है और कहती है "…यह भी निरीक्षण करेगा कि —" — अर्थात् RO द्वारा तैयार मशीन की जाँच-सूची है।
स्लाइड पर छपा है, मद 4 (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
"यदि निर्वाचन के लिए अभ्यर्थियों की संख्या 15 तक है तो काम आने वाली बैलेट यूनिट के स्लाईड स्विच की स्थिति '1' पर निर्धारित होगी तथा अभ्यर्थियों की संख्या 16 से अधिक है तो बैलेट यूनिट पर अभ्यर्थियों की संख्या के अनुरूप स्लाईड स्विच की स्थिति 2, 3, 4 पर निर्धारित होगी।"
🚨 तीन दोष
| # | दोष |
|---|---|
| 1 | "15 तक" और "16 से अधिक" — बीच में "ठीक 16" के लिए कोई नियम ही नहीं है। यह शाब्दिक छेद है |
| 2 | 🚨 "नोटा सहित" कहीं नहीं लिखा — जबकि गिनती में नोटा का पैनल भी आता है |
| 3 | दोनों मशीन-परिवारों में अंतर नहीं किया गया — ECIL MPSV/MPMV में 15 पैनल, BEL M3A/MK-V में 16 पैनल |
✅ सही पाठ — मशीन के अनुसार अलग-अलग
| मॉडल | पैनल | एक BU कब पर्याप्त | अन्यथा |
|---|---|---|---|
| ECIL MPSV / MPMV | 15 (नोटा सहित) | अभ्यर्थी + नोटा 15 तक → स्विच 1 | अतिरिक्त BU लगेंगे |
| BEL M3A / MK-V | 16 (नोटा सहित) | अभ्यर्थी + नोटा 16 तक → स्विच 1 | अतिरिक्त BU लगेंगे |
अतिरिक्त बैलट यूनिटों पर स्विच अपने क्रम के अनुसार लगेगा — दूसरी BU = 2, तीसरी = 3, चौथी = 4। (मार्गदर्शिका: "…यदि एक से अधिक Ballot यूनिट का उपयोग किया जाता है, तो उन इकाइयों में स्विच को क्रमिक रूप से 2, 3 या 4 पर सेट करना होगा।")
🚨 ठोस विफलता — दोनों दिशाओं में
| स्थिति | स्लाइड के अनुसार | वास्तव में |
|---|---|---|
| ECIL MPSV, वार्ड में 15 लड़ने वाले अभ्यर्थी | "15 तक → एक BU, स्विच 1" ✅ लगता है | ❌ 15 + नोटा = 16 पैनल चाहिए, क्षमता 15 → दूसरी BU (स्विच 2) आवश्यक |
| BEL M3A, 16 पैनल की एक BU स्विच 1 पर, सही ढंग से तैयार | "16 से अधिक → स्विच 2,3,4" → PRO इसे गलत बताएगा | ✅ मशीन सही है |
🚨 अर्थात् यह स्लाइड एक गलत मशीन को सही और एक सही मशीन को गलत बता सकती है।
✅ पैरा-क्रमांक अब स्वयं खोले गए — 22.08.2026
पहले यहाँ दर्ज था कि "2184 के पैरा-क्रमांक मैंने स्वयं नहीं खोले"। अब मैंने आदेश 2184 दिनांक 26.02.2026 के पूरे 18 पृष्ठ स्वयं पढ़ लिए हैं। ड्राफ्ट का कथन सही निकला। मूल पाठ —
बिन्दु (2), पृष्ठ 1 (
_r/new/o2184_p01.png):"MPSV एवं MPMV मशीन से चुनाव करवाने के लिए (NOTA सहित 15 उम्मीदवारों तक) एक कन्ट्रोल यूनिट एवं एक बैलेट यूनिट की आवश्यकता होगी। … जबकि अन्य मॉडल MK-V/M3A मशीन से … (NOTA सहित 16 उम्मीदवारों तक) …"
🚨 बिन्दु 9(vi) व 9(vii), पृष्ठ 8 — यही स्लाईड स्विच का शासी पाठ है (
_r/new/o2184_p08.png):"यदि MPSV/MPMV मॉडल … अभ्यर्थियों की संख्या नोटा सहित 15 तक हैं तो बैलेट यूनिट के स्लाईड स्विच को 1 स्थिति पर सेट करेंगे। नोटा सहित 15 से अधिक अभ्यर्थी होने पर … द्वितीय बैलेट यूनिट के स्लाईड स्वीच को 2 और इसी प्रकार तीसरी … 3 एवं चतुर्थ … 4 पर सेट करेंगे।" "यदि MK-V/M3A मॉडल … नोटा सहित 16 तक हैं तो … 1 स्थिति पर … 16 से अधिक … 2, … 3 एवं … 4 पर सेट करेंगे।"
✅ अर्थात् स्लाईड स्विच का नियम स्वयं आदेश में "नोटा सहित" के साथ और दोनों मशीन-परिवारों के लिए अलग-अलग लिखा है — स्लाइड में दोनों गायब हैं। साथ ही आदेश चार बैलेट यूनिट तक का क्रम देता है (2, 3, 4)।
मद 1-ग — ⚠️ PP1_p031 — "अपराह्न 3 बजे बाद रिलीफ मतदान अभिकर्ता को अनुमति नहीं" — आधार नहीं मिला, और डेक स्वयं इससे टकराता है
वर्ग: ⚠️ संदिग्ध — "विधि-विरुद्ध" कहने से पहले पढ़ें।
PP1_p031 की अंतिम पंक्ति (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
"03:00 बजे अपराह्न बाद रिलीफ मतदान अभिकर्ता को अनुमति नहीं होगी।"
🚨 और ठीक अगली स्लाइड PP1_p032 इसके विपरीत कहती है (यह भी मैंने स्वयं पढ़ी):
"मतदान अभिकर्ता मतदान प्रारम्भ होने से कम से कम एक घंटा पूर्व मतदान केन्द्र में प्रवेश कर सकेंगे। यदि मतदान अभिकर्ता विलम्ब से आता है तो वह मतदान केन्द्र पर आगे की कार्यवाहियों में भाग ले सकेगा।"
जो निश्चित है और जो नहीं
| ✅ निश्चित | डेक अपने भीतर ही विरोधाभासी है — पृ. 31 और पृ. 32 एक साथ नहीं चल सकते |
| ✅ निश्चित | PP1_p031 की शेष बातें सही हैं — एक अभिकर्ता + दो रिलीवर प्रति केन्द्र, एक समय में केवल एक, ENTRY-PASS पीठासीन अधिकारी जारी करेगा |
| ⚠️ निश्चित नहीं | मैंने जो नियम पढ़े हैं (नियम 26, 29) उनमें ऐसी कोई समय-सीमा नहीं मिली — किन्तु मैं यह सिद्ध नहीं कर सकता कि किसी आदेश में यह कहीं नहीं है। अभाव सिद्ध करना कठिन है |
🚨 इसलिए इसे "विधि-विरुद्ध" कहकर न पढ़ाएँ। कहें — "डेक की दो स्लाइडें आपस में टकराती हैं; नियमों में ऐसी समय-सीमा मुझे नहीं मिली। जब तक आयोग/DEO से लिखित स्पष्टीकरण न मिले, वैध रूप से नियुक्त रिलीफ अभिकर्ता को — जिसके पास प्ररूप 9 है — प्रवेश से न रोकें।"
यह क्यों मायने रखता है: मतदान प्रातः 7 से सायं 6 बजे तक है। 3 बजे की रोक का अर्थ होगा कि अभिकर्ता मतदान समाप्ति, मशीन की सीलिंग और प्ररूप 14-ग — ठीक उन क्षणों — से बाहर रह जाए जहाँ मार्गदर्शिका उसे उपस्थित रखना चाहती है।
💡 साथ में
PP1_p032की एक बात सही है और उसे रखें: "सरकारी सेवारत व्यक्ति मतदान अभिकर्ता के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा।" — यह धारा 134-क के अनुरूप है (जो निर्वाचन/मतदान/गणन तीनों अभिकर्ताओं पर लागू है)।
मद 1-घ — 🚨🚨 PP2_p019 → PP2_p020 — मॉक पोल में RESULT से पहले CLOSE का चरण है ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: 09 एवं 11.09.2026 की सुबह 5:30 बजे, मॉक पोल के ठीक अन्त में।
डेक में छपे क्रमांकित चरण (मैंने दोनों पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़े):
| पृष्ठ | चरण | डेक का पाठ |
|---|---|---|
PP2_p019 |
6 | "अन्य मॉकपॉल वोटरों … बिन्दु संख्या 1 से 5 में बताई गई प्रक्रिया को दोहराएं…" |
PP2_p020 |
7 | "अब CU पर स्थित RESULT बटन दबाएं।" |
🔴 चरण 6 से सीधे चरण 7 (RESULT) पर जाया गया है। CLOSE का कोई चरण नहीं है।
यह केवल चूक नहीं — मशीन त्रुटि देगी
[MPSV अध्याय 7] — त्रुटि संदेश तालिका, पंक्ति 3(iv):
त्रुटि कारण समाधान INVALID OPERATION+ बाधित बीप —RESULT-Iदबाने परCLOSEदबाकर मतदान बंद नहीं किया गयापहले CLOSEदबाएं➡ अर्थात् डेक का चरण 7 अकेला चलेगा ही नहीं — सीयू
INVALID OPERATIONदेगी।
✅ सही क्रम — हमारी अपनी सामग्री में पहले से दर्ज
मॉक पोल → TOTAL → 🚨 CLOSE → RESULT-I → मिलान → CLEAR → OFF
CLOSE दबाने पर प्रदर्शन: CLOSING → NUMBER OF POSTS → DTE/TME → TOTAL VOTERS →
RJSCU…/RJSDM… → POLL CLOSED [MPSV अध्याय 5]।
✅ स्रोत: EVM/hi §3.1 PRO पुस्तिका चरण 6–7 · मास्टर ट्रेनर स्लाइड
🚨 डेक में चरण 6 के बाद एक नया चरण जोड़ें: "अब
CLOSEबटन की कैप हटाकरCLOSEदबाएं →POLL CLOSEDप्रदर्शित होगा → कैप वापस लगाएं।" तदनुसार आगे के क्रमांक एक-एक बढ़ा दें।
मद 1-ङ — 🚨 PP2_p021 — एक ही वाक्य में तीन गलत संख्याएँ ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
"पीठासीन अधिकारी मॉकपॉल का प्रमाण पत्र परिशिष्ट 19 पर दिये गये प्ररूप में तैयार करेगा। इस तैयार परिशिष्ट 19 को परिशिष्ट–7 के साथ संलग्न करेगा तथा पीठासीन अधिकारी की डायरी (परिशिष्ट–8) के बिन्दु संख्या 25 … में मॉकपॉल के विवरण … का उल्लेख करेगा।"
🔴 तीनों संख्याएँ गलत हैं
| # | डेक कहता है | वास्तव में |
|---|---|---|
| 1 | परिशिष्ट-19 को परिशिष्ट-7 के साथ संलग्न करें | ❌ परिशिष्ट-6 (पीठासीन अधिकारी की तीन घोषणाएं) के साथ; लिफाफा E-10 |
| 2 | डायरी = परिशिष्ट-8 | ❌ डायरी = परिशिष्ट-7 (30 मद)। परिशिष्ट-8 = प्ररूप 14-ग का भरा हुआ नमूना |
| 3 | मॉकपॉल का इन्द्राज बिन्दु 25 पर | ❌ बिन्दु 30 पर |
🚨 बिन्दु 25 पर लिखना सबसे खराब है
| डायरी की मद | विषय-वस्तु |
|---|---|
| 🔴 25 | "मशीन द्वारा मतदान निष्फल" — (क) अभिरक्षा से अवैध तरीके से बाहर ले जाना · (ख) खो गई/नष्ट · (ग) विनिष्ट या गड़बड़ी |
| ✅ 30 | "अन्य महत्वपूर्ण घटना का विवरण" — और इसी मद में स्वयं लिखा है: "पीठासीन अधिकारी द्वारा किये गये मॉकपॉल एवं … प्रमाणपत्र (परिशिष्ट-19) का विवरण अंकित करें" |
🔴 यदि पीठासीन अधिकारी एक सामान्य मॉक पोल को बिन्दु 25 में लिख देगा, तो अभिलेख यह कहेगा कि उस केन्द्र पर "मशीन द्वारा मतदान निष्फल" हुआ था। यह RO के स्तर पर अनावश्यक जाँच खड़ी कर सकता है।
✅ स्रोत: EVM/hi §5 — परिशिष्ट-7 डायरी की पूरी 30-मद सूची · मार्गदर्शिका [MG अ.4-A(4),(7),(13)]
मद 1-च — 🚨 PP1_p048 — मतदाता पर्ची PO-1 को सौंप दी गई, जबकि वह PO-2 का काम है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक में "प्रथम मतदान अधिकारी — मुख्य उत्तरदायित्व" शीर्षक के नीचे तीन बिन्दु:
| डेक का बिन्दु | निर्णय |
|---|---|
| पहचान सत्यापन — आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट फोटो दस्तावेजों से | ✅ सही |
| अमिट स्याही जाँच — बाएं हाथ की तर्जनी पर निशान न हो | ✅ सही — नीचे देखें |
| 🔴 सफेद पर्ची — "सदस्य पद के लिए काम आने वाली सफेद रंग की मतदाता पर्ची जारी करना" | ❌ यह PO-1 का काम नहीं है |
मार्गदर्शिका के अनुसार [MG अ.2(1)] PO-1 के नौ कर्तव्यों में पर्ची जारी करना है ही नहीं। उसका कर्तव्य 9 कहता है: "पहचान स्थापित होने पर मतदाता द्वितीय मतदान अधिकारी के पास जाएगा।"
और [MG अ.2(2)] PO-2 के अधीन: "मतदाता पर्ची — PO-2 तैयार कर मतदाता को देगा…" और PO-3 केवल "PO-2 द्वारा जारी मतदाता पर्ची" पर ही प्रवेश देता है।
🚨 व्यावहारिक खतरा: यदि PO-1 पर्ची देने लगे, तो रजिस्टर में प्रविष्टि, हस्ताक्षर/अंगूठा और अमिट स्याही से पहले ही मतदाता को पर्ची मिल जाएगी — यही वह क्रम है जिसे मद 1-क भी बचाना चाहता है।
✅ सही क्रम (यही पढ़ाएँ)
PO-1 पहचान + बाईं तर्जनी पर स्याही की जाँच → नाम जोर से बोले
PO-2 प्ररूप 14-क में प्रविष्टि + हस्ताक्षर/अंगूठा → 🚨 अमिट स्याही → 🚨 मतदाता पर्ची
PO-3 पर्ची देखे + स्याही का निशान देखे → Ballot बटन
⛔ एक साथ यह न बदलें — समीक्षा का एक आरोप मैंने खारिज किया
समीक्षा में कहा गया था कि इसी स्लाइड पर अमिट स्याही के तीन अपवाद गायब हैं — "लोकसभा/विधानसभा का निशान हो तो दाहिनी तर्जनी" तथा "पुनर्मतदान में बायीं मध्यमा"।
🔴 मुझे इनका कोई आधार नगरपालिका-सामग्री में नहीं मिला। मार्गदर्शिका का अपवाद-क्रम अंगुली न होने का है (बांये हाथ की कोई अंगुली → दांये हाथ की तर्जनी → …), न कि लोकसभा-निशान या पुनर्मतदान का। वे भारत निर्वाचन आयोग की सामान्य-चुनाव प्रथा हैं।
➡ स्लाइड की "बाएं हाथ की तर्जनी" वाली पंक्ति सही है — उसे न छेड़ें। केवल तीसरा बिन्दु (सफेद पर्ची) PO-2 के खाने में ले जाएँ।
मद 1-छ — 🚨 PP1_p008 — बैटरी की दो कसौटियाँ आपस में बदल गई हैं — बालोतरा पर सीधे लागू ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: रवानगी के समय और मतदान की सुबह, CU की जाँच पर।
यही डेक दो पृष्ठों पर दो अलग बातें कहता है
| पृष्ठ | जो छपा है | निर्णय |
|---|---|---|
✅ PP1_p010 |
"डिस्प्ले पैनल पर प्रदर्शित बैटरी HIGH मोड (MPSV/MPMV) में हो, 95 प्रतिशत (M3A) से अधिक हो सुनिश्चित करें अन्यथा सीयू परिवर्तित करावें।" | ✅ यह सही है |
❌ PP1_p008 |
"बैटरी स्टेटस: CU पर प्रदर्शित बैटरी 'HIGH' मोड (MPSV/MPMV में 95% से अधिक) में होनी चाहिए।" | ❌ 95% को MPSV/MPMV से जोड़ दिया गया |
✅ सही बात — दो मशीन, दो अलग संकेतक
| मशीन | CU क्या दिखाती है | क्या सुनिश्चित करना है |
|---|---|---|
| 🚨 MPSV / MPMV (बालोतरा) | HIGH / LOW मोड | HIGH मोड में हो |
| M3A | प्रतिशत (%) | 95% से अधिक हो |
🚨 बालोतरा में यह क्यों ख़तरनाक है: बालोतरा को MPSV/MPMV मिलेंगी (प्रेस नोट 6722 — देखें BALOTRA_DISTRICT §2)। इन मशीनों की CU पर कोई प्रतिशत आता ही नहीं — वहाँ HIGH/LOW मोड आता है।
PP1_p008पढ़ा हुआ पीठासीन अधिकारी सुबह 5:30 बजे एक ऐसा अंक ढूँढ़ेगा जो कभी आएगा ही नहीं, और घबराकर एक बिलकुल सही CU को "बदलवाने" भेज सकता है।✅ सुधार:
PP1_p008की पंक्ति कोPP1_p010वाले रूप में बदल दें — "बैटरी HIGH मोड (MPSV/MPMV) में हो, अथवा 95% से अधिक (M3A) — अन्यथा CU बदलवाएँ।"⛔ इसी पृष्ठ का एक आरोप मैंने खारिज किया — END बटन
समीक्षा ने कहा था कि "समस्त BU का END बटन MASK होना चाहिए" गलत है।
🔴 यह पंक्ति बिलकुल सही है — इसे हरगिज़ न बदलें। आदेश 2184, बिन्दु 9(xxi): "MPSV एवं MPMV मशीन से केवल सदस्य पद का चुनाव कराये जाने के कारण आंशिक मतदान की कोई संभावना नहीं रहेगी। अतः MPSV/MPMV मशीन पर स्थित "END" बटन को मास्क करावें।"
⚠️ ECIL की सामान्य पुस्तिका कहती है कि अंतिम BU का END बटन अन-मास्क रखें — इस चुनाव में वह लागू नहीं है। यदि डेक की यह पंक्ति बदल दी गई, तो ठीक वही गलती लौट आएगी जिससे बचने के लिए आयोग ने 9(xxi) लिखा।
मद 1-ज — 🚨 PP1_p067 — स्याही की जाँच मत डालने के बाद कराई जा रही है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक में छपा है (तृतीय मतदान अधिकारी):
"निर्वाचक के वोटिंग कम्पार्टमेंट से वापिस आने पर निर्वाचक की बायीं तर्जनी पर अमिट स्याही के चिन्ह की जांच करेगा।"
🔴 यह उलटा है — जाँच प्रवेश से पहले का द्वार है
मार्गदर्शिका [MG अ.2(3)] में PO-3 का कर्तव्य 2:
"केवल PO-2 द्वारा जारी मतदाता पर्ची के आधार पर मतदान कक्ष में जाने की अनुमति; साथ ही देखे कि अमिट स्याही का निशान स्पष्ट है।"
| डेक | मार्गदर्शिका | |
|---|---|---|
| जाँच कब | लौटने पर ❌ | भेजने से पहले ✅ |
| उद्देश्य | — | यह सुनिश्चित करना कि PO-2 ने स्याही लगा दी है, तभी मत डालने देना |
🚨 मत डाल लेने के बाद स्याही देखने का कोई अर्थ नहीं — नियंत्रण तभी काम करता है जब वह द्वार पर लगे। बिना स्याही वाला मतदाता मत डाल चुका होगा, और अब कुछ नहीं किया जा सकता — ईवीएम से मत वापस नहीं लिया जा सकता।
🔗 यह मद 1-क (
PP1_p066) का ही दूसरा चेहरा है — वहाँ जाँच गायब है, यहाँ जाँच गलत जगह है। दोनों एक साथ ठीक कराएँ।✅ सुधार: "निर्वाचक को मतदान कक्ष में भेजने से पूर्व — PO-2 की पर्ची देखेगा और बायीं तर्जनी पर अमिट स्याही का निशान स्पष्ट है, यह देखेगा — तभी
Ballotदबाएगा।"
मद 1-झ — 🚨 PP2_p073 — गोपनीयता भंग पर "नियम 35" — वह नियम ईवीएम-मतदान पर लागू ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक में छपा है, बिन्दु 1:
"…यदि कोई मतदाता पीठासीन अधिकारी की चेतावनी के बाद भी मतदान प्रक्रिया का पालन करने से मना करें तो उसे नियम 35 के अधीन मत देने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जावें।"
🔴 दो कारणों से गलत
1. नियम 35 ईवीएम-मतदान पर लागू ही नहीं है। नियम 55(5) ईवीएम-मतदान पर लागू नियम गिनाता है — "25 to 29, 30A, 31A, 32A, 32B, 33, 34A, 35A, 36, 37A, 37B, 38A, 39, …" → सूची में 35-क है, सादा 35 नहीं।
2. सही नियम 37-क है, 35-क नहीं। दोनों का बंटवारा स्पष्ट है:
| नियम | किस स्थिति में |
|---|---|
| 35-क | स्याही या हस्ताक्षर से इन्कार |
| ✅ 37-क | विहित प्रक्रिया / गोपनीयता भंग ← यही इस स्लाइड का विषय है |
इस स्लाइड का शीर्षक स्वयं "निर्वाचक द्वारा मतदान की गोपनीयता भंग करना" है।
✅ सुधार: "नियम 35" → "नियम 37-क"।
⚠️ ईमानदारी से: समीक्षा ने "37-क(7)" कहा था। मैंने नियम 37-क की पुष्टि की है, उप-नियम "(7)" की नहीं। डेक में केवल "37-क" लिखवाएँ; उप-नियम तभी जोड़ें जब नियम-पुस्तिका से मिला लिया जाए।
✅ शेष पाँचों बिन्दु सही हैं — पर्ची वापस लेना, प्ररूप 14-क के अभ्युक्ति स्तम्भ में टिप्पणी + PRO के हस्ताक्षर, क्रम संख्या न बदलना, प्रपत्र 14-ग में प्रविष्टि। केवल नियम-संख्या बदलनी है।
मद 1-ञ — 🕛 PP2_p058, PP2_p109, FORMS_p035 — परिशिष्ट-10 में निरसित 1959 का अधिनियम 🕛 (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
तीनों पृष्ठों पर वही परिशिष्ट-10 (निर्वाचक की आयु-घोषणा) छपा है:
"…मिथ्या घोषणा के बारे में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1959 की धारा 15 के दण्डात्मक उपबंधों के बारे में जानकारी है।"
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 1959 (अधि. 38/1959) को धारा 344(1) ने निरसित कर दिया है। प्रभावी अधिनियम 2009 (अधि. 18/2009) है।
✅ राहत की बात — धारा-संख्या वही है
2009 के अधिनियम की भी धारा 15 ही "मिथ्या घोषणा करना" है — और मार्गदर्शिका स्वयं अपने परिशिष्ट-2 में 2009 की धारा 15 का उद्धरण देती है।
➡ अर्थात् केवल सन् "1959" → "2009" गलत है। धारा 15 सही है। और यह एक ही पुस्तक के भीतर का विरोधाभास है — परिशिष्ट-2 में 2009, परिशिष्ट-10 में 1959।
🚨 यहाँ सावधानी — प्रपत्र को स्वयं न बदलें
परिशिष्ट-10 आयोग की मार्गदर्शिका का विहित प्रपत्र है (मुद्रित पृ. 116)। डेक उसे ज्यों का त्यों दोहरा रहा है — यह डेक की अपनी गलती नहीं है।
✅ यह करें ❌ यह न करें प्रशिक्षण में मौखिक रूप से बताएँ कि प्रभावी अधिनियम 2009 है मतदान केन्द्र पर प्रपत्र पर काट-छांट आयोग को सुधार हेतु लिखें अपना नया प्रपत्र छपवाना 🚨 विहित प्रपत्र को स्वयं बदलना उस उद्धरण-दोष से बड़ी गलती होगी।
🔗 यह मद 6 (निरसित भा.दं.सं.) की ही श्रेणी का है — चलन से बाहर उद्धरण, किसी निर्णय को नहीं बदलता।
मद 1-ट — 🚨 FORMS_p031 — भरी हुई नमूना-डायरी स्वयं मिलान में फेल हो रही है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
यह पीठासीन अधिकारी की डायरी का भरा हुआ नमूना है — प्रशिक्षणार्थी इसी को देखकर अपनी डायरी भरना सीखते हैं। डायरी का पूरा उद्देश्य ही मिलान (reconciliation) है।
🔴 दोष 1 — मद 12 का जोड़ 200 से गलत है
| मद 12 में छपा | अंक |
|---|---|
| पुरुष | 400 |
| महिला | 356 |
| थर्ड जेंडर | 01 |
| वास्तविक जोड़ | 757 |
| 🔴 छपा हुआ योग | 957 |
🔴 दोष 2 — मद 18 में भी ठीक वही 200 का अंतर
| मद 18 | अंक |
|---|---|
| (क) फोटो मतदाता पहचान पत्र (EPIC) से | 400 |
| (ख) वैकल्पिक दस्तावेजों से | 357 |
| जोड़ | 757 |
| 🔴 जबकि मद 21 "डाले गये मत" | 957 |
🚨 हर मतदाता दो में से एक रास्ते से पहचाना जाता है — EPIC या वैकल्पिक दस्तावेज। इसलिए 18(क) + 18(ख) ठीक 957 होना चाहिए। नमूने में 200 मतदाता बिना पहचान के मत डालते दिख रहे हैं।**
✅ कौन-सा अंक सही है — 957
मद 11.4 (मशीन के अनुसार रिकार्ड मत) = 957 और मद 21 = 957। मशीन का अंक ही आधार है — अतः मद 12 एवं मद 18 के घटक 200 कम छपे हैं।
⚠️ मैं यह नहीं बता सकता कि 200 को पुरुष/महिला में कैसे बाँटा जाए — यह काल्पनिक उदाहरण है। केवल यह सुनिश्चित कराएँ कि नया नमूना बनाते समय घटकों का जोड़ ठीक 957 बैठे।
✅ दोष 3 — मद 11 की चार पंक्तियाँ — एक सही, एक अस्पष्ट
| मद 11 | अंक |
|---|---|
| 1. केन्द्र पर कुल मतदाता | 987 |
| 2. चिन्हित प्रति के अनुसार अनुज्ञात | 985 |
| 3. प्ररूप 14-क के अनुसार जिन्होंने मत दिया | 960 |
| 4. मशीन के अनुसार रिकार्ड मत | 957 |
✏️ मेरा अपना सुधार (22.08.2026): पहले मैंने यहाँ लिखा था "मद 4 का अंक 3 है, 960 − 3 = 957"। यह अधूरा था।
FORMS_p009स्वयं पढ़ने पर सही बंटवारा यह है —
✅ 960 → 957 सही मिलता है — और प्रपत्र स्वयं यह पूछता है (मद 6):
| प्ररूप 14-ग | नमूने का अंक |
|---|---|
| मद 2 — रजिस्टर में दर्ज | 960 |
| मद 3 — नियम 45(क) के अधीन | 02 |
| मद 4 — नियम 35-क / 37-क के अधीन | 01 |
| मद 5 — मशीन के अनुसार | 957 |
960 − 02 − 01 = 957 ✅ — प्रपत्र की मद 6 का उत्तर "हाँ" सही है।
⚠️ 985 → 960 का 25 का अंतर समझ में नहीं आता। चिन्हित प्रति में अनुज्ञात और रजिस्टर में हस्ताक्षर — दोनों एक ही मतदाताओं पर होते हैं। निविदत्त (05) और अनुमति-नहीं (03) जोड़ने पर भी 968 होता है, 985 नहीं।
⚠️ मैं यहाँ "सही अंक" नहीं बता रहा — केवल यह कह रहा हूँ कि नमूने की ये पंक्तियाँ आपस में नहीं मिलतीं। यदि नया नमूना बने, तो 11.2 और 11.3 का अंतर डायरी की किसी मद से समझाया जाना चाहिए।
🚨 प्रशिक्षण में इसे कैसे उपयोग करें — दोष को अभ्यास बना लें
यह स्लाइड हटाने के बजाय कक्षा से पूछें: "मद 12 का जोड़ करके देखिए — क्या योग सही है?"
✅ यही वह आदत है जो 09/11.09.2026 की शाम बचाएगी — डायरी भरने से पहले हर जोड़ स्वयं जाँचना। गलत जोड़ वाली डायरी RO के यहाँ पकड़ी जाएगी।
मद 1-ठ — 🚨 FORMS_p009 — मद 3 में गलत मतदाता गिना गया ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
नमूने की मद 3 के सामने लाल स्याही में छपा है:
"पोस्टल बैलेट जारी होने के कारण मतदाता रजिस्टर में नाम लिख दिया गया किन्तु लिखने के बाद पीठासीन अधिकारी के प्रसंज्ञान में आया अतः मतदाता को मतदान करने से मना किया।"
🔴 मद 3 और मद 4 का बंटवारा मार्गदर्शिका में स्पष्ट है
| मद | नियम | कौन गिने जाएंगे |
|---|---|---|
| 3 | 45(क) | 🚨 "No Vote" — जिन्होंने हस्ताक्षर कर दिए पर स्वयं मत नहीं डाला · मद 6 इन्हें "मत रिकार्ड न करने का विनिश्चय करने वाले मतदाता" कहती है |
| 4 | 35-क / 37-क | 🚨 जिन्हें आपने मत नहीं देने दिया — स्याही/हस्ताक्षर से इन्कार, या गोपनीयता भंग |
➡ भेद यह है — मद 3 = मतदाता ने स्वयं न डालने का निर्णय लिया · मद 4 = पीठासीन अधिकारी ने मना किया।
नमूने का नोट स्वयं कहता है "मना किया" — अर्थात् यह मद 3 की परिभाषा में आता ही नहीं।
⚠️ किन्तु "सही मद 4 है" यह भी मैं नहीं कह सकता
मद 4 स्वयं केवल नियम 35-क / 37-क तक सीमित है। पोस्टल बैलेट वाला प्रतिषेध इन दोनों नियमों में से किसी में नहीं आता।
➡ इसलिए यह स्थिति प्रपत्र के दोनों खानों में से किसी में ठीक से नहीं बैठती। यह प्रश्न RO/DEO से पूछें — और जब तक उत्तर न मिले, नमूने में यह उदाहरण ही न रखें — सादा "No Vote" का उदाहरण लें (जैसे: हस्ताक्षर के बाद मतदाता लौट गया)।
🚨 महत्वपूर्ण: नमूने का जोड़ सही है (960 − 02 − 01 = 957)। केवल वर्गीकरण पर आपत्ति है, अंकगणित पर नहीं।
मद 1-ड — 🚨 FORMS_p023 ↔ FORMS_p009 — निविदत्त मतपत्र: प्राप्त 20 या 10? ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
एक ही काल्पनिक मतदान केन्द्र (पावटा, वार्ड 21, केन्द्र 122) के दो प्रपत्र टकराते हैं:
| प्रपत्र | क्या कहता है |
|---|---|
FORMS_p023 — रसीद प्रपत्र (सं. 2), मद 1 |
"Ballot Papers (for Tendered votes) — 20" |
FORMS_p009 — प्ररूप 14-ग, मद 8(क) |
"उपयोग के लिए प्राप्त 10" |
✅ FORMS_p009 स्वयं में पूरी तरह संगत है
| मद 8 | अंक |
|---|---|
| (क) प्राप्त | 10 |
| (ख) निर्वाचकों को जारी | 05 |
| (ग) प्रयुक्त न किये गये, वापस लिये | 05 |
| जोड़ | 05 + 05 = 10 ✅ |
| क्रम संख्या | 1223 से 1232 = ठीक 10 मतपत्र ✅ |
✅ अब यह सुलझ गया — 20 सही है (22.08.2026 को जोड़ा)
मार्गदर्शिका [MG अ.8(1)] स्वयं कहती है:
"🚨 मतदान केन्द्र पर बीस (20) निविदत्त मतपत्र दिए जाएंगे; कम पड़ें तो जोनल मजिस्ट्रेट को बताएं।"
➡ अर्थात्
FORMS_p023का "20" ✅ सही है, औरFORMS_p009का "प्राप्त 10" ❌ गलत है। नया नमूना बने तो मद 8(क) = 20 रखें, और क्रम संख्या भी 20 मतपत्रों की हो। (देखें मद 1-ष)🚨 यह क्यों गंभीर है: प्रशिक्षणार्थी इन्हीं दो पृष्ठों से मिलान करना सीखता है। जो PRO 20 मतपत्र लेकर केवल 10 का लेखा देगा, उसके पास 10 मतपत्र बेहिसाब हैं — यह गंभीर अनियमितता है। नमूना स्वयं मिलान में फेल नहीं होना चाहिए।
✅ प्रशिक्षण में: दोनों पृष्ठ साथ-साथ दिखाकर पूछें — "रसीद 20 कहती है, लेखा 10। आप क्या करेंगे?" — उत्तर: जो वास्तव में मिले हैं उनकी गन्ती करें, क्रम संख्या से मिलाएँ, और रसीद पर वही अंक लिखवाएँ।
मद 1-ढ — 🚨 FORMS_p010 — पेपर सील का घटाने का निर्देश उलटा छपा है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
पेपर सील लेखा, मद 4 में छपा है:
"रिटर्निंग अधिकारी को वापस की गई अप्रयुक्त पेपर सीलों की संख्या (मद 3 में से मद 2 घटाइए) — 5"
🔴 निर्देश उलटा है — भरा हुआ उत्तर सही है
FORMS_p009 के पेपर-सील लेखे से —
| मद | विवरण | अंक |
|---|---|---|
| 2 | प्रदान की गई सीलों की कुल संख्या | 07 |
| 3 | प्रयुक्त पेपर सीलों की संख्या | 02 |
| 4 | वापस की गई अप्रयुक्त | 5 ✅ |
| गणना | परिणाम | |
|---|---|---|
| ❌ छपा निर्देश — "मद 3 में से मद 2" | 02 − 07 | − 5 |
| ✅ सही — "मद 2 में से मद 3 घटाइए" | 07 − 02 | 5 ✅ |
✅ सुधार: कोष्ठक को "(मद 2 में से मद 3 घटाइए)" कर दें। भरा हुआ अंक 5 सही है — उसे न बदलें।
🚨 यह क्यों मायने रखता है: पेपर सील का लेखा RO के यहाँ मिलाया जाता है। जो PRO निर्देश का अक्षरशः पालन करेगा, वह ऋणात्मक संख्या लिखेगा या उलझ जाएगा।
मद 1-ण — 🚨 FORMS_p016 ↔ FORMS_p017 — एक ही डाक मतपत्र के दो क्रमांक ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
| प्रपत्र | जो छपा है |
|---|---|
प्ररूप 16-क (FORMS_p016) |
"…क्रम संख्या 122 वाला डाक मतपत्र जारी किया गया है।" |
प्ररूप 16-ख (FORMS_p017) |
"मतपत्र का क्रम संख्यांक … 12332" |
दोनों एक ही निर्वाचक (सुमित कुमार, पावटा, वार्ड 21) के एक ही डाक मतपत्र के लिए हैं।
🔴 "122" वास्तव में मतदान केन्द्र / भाग संख्या है
इसी नमूना-समूह में 122 तीन जगह मतदान केन्द्र/भाग संख्या के रूप में आता है —
FORMS_p009: "मतदान केन्द्र की संख्या … 122 / रा.उ.मा.वि., पावटा … भाग संख्या 122"FORMS_p010: "मतदान केन्द्र संख्या 122"FORMS_p036: "मतदान केन्द्र की संख्या तथा नाम … 122 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पावटा"
➡ अर्थात् 16-क में मतपत्र के क्रमांक की जगह मतदान केन्द्र की संख्या भर दी गई है। सही अंक 12332 है — वही 16-ख में है।
🚨 डाक मतपत्र का क्रमांक ही वह सूत्र है जिससे मतपत्र मतदाता से जोड़ा जाता है। दो प्रपत्रों पर दो अलग क्रमांक हों — तो मतगणना में वह मतपत्र आपत्तियोग्य हो जाएगा।
मद 1-त — 🚨 FORMS_p036 ↔ FORMS_p031 — आयु-घोषणा के अंक दोनों भागों में नहीं मिलते ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
परिशिष्ट-11 (FORMS_p036) में नाम गिने जा सकते हैं:
| भाग | कौन | नाम | गिनती |
|---|---|---|---|
| I | जिनसे घोषणाएं प्राप्त की गईं | सुरेश कुमार · कमल किशोर · रोशन लाल · अंकित | 4 |
| II | जिन्होंने घोषणा से इंकार किया | नयन · रामसिंह · किशन कुमार · चिरंजी लाल | 4 |
डायरी (FORMS_p031) की मद 17 कहती है:
| डायरी | परिशिष्ट-11 | |
|---|---|---|
| (क) घोषणाएं प्राप्त की | 05 ❌ | 4 |
| (ख) घोषणा से इन्कार किया | 05 ❌ | 4 |
🔴 दोनों भाग मेल नहीं खाते — समीक्षा ने केवल भाग-II पकड़ा था। परिशिष्ट-11 ही वह सूची है जिससे डायरी की मद 17 भरी जाती है — नामों की गिनती और डायरी का अंक एक होना ही चाहिए।
✅ सुधार: या तो परिशिष्ट-11 में दोनों भागों में एक-एक नाम और जोड़ें, या डायरी की मद 17 में 05 → 04 कर दें। दोनों में एक ही अंक रहे।
⚠️ समीक्षा ने यह भी कहा था कि यही अंक प्ररूप 14-ग की मद 4 (= 01) से भी मेल खाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा। मद 4 केवल नियम 35-क / 37-क तक सीमित है; आयु-घोषणा से इन्कार उन दो नियमों में आता है या नहीं, यह मैंने सत्यापित नहीं किया — इसलिए उस तीसरे मिलान पर कोई दावा नहीं कर रहा।
मद 1-थ — 🚨🚨 PP2_p026 — मॉक पोल में "समान मत" की शर्त गलत है, और "नोटा सहित" गायब है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: 09 एवं 11.09.2026 की सुबह, मॉक पोल के समय।
डेक पर छपा है (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
"अब बैलेट बटन दबा कर बनावटी मतदान किया जाएगा इसमें प्रत्येक उम्मीदवार को समान मत दिए जायेंगे किन्तु न्यूनतम दिए गए मतों की संख्या 01 होनी चाहिए"
🔴 दो दोष
| # | दोष |
|---|---|
| 1 | 🚨 "नोटा सहित" लिखा ही नहीं — जबकि नोटा को भी कम से कम 1 मत देना अनिवार्य है |
| 2 | "समान मत" कोई शर्त है ही नहीं — और ECIL पुस्तिका इसे स्पष्ट रूप से नकारती है |
✅ सही नियम — मार्गदर्शिका से
"नोटा सहित प्रत्येक उम्मीदवार के लिए न्यूनतम 1–1 मत से मॉकपॉल किया जाना अनिवार्य है।" [MG अ.4 पृ.20; अ.4-A पृ.32]
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| प्रत्येक अभ्यर्थी को न्यूनतम 1 मत | 🚨 अनिवार्य |
| 🚨 नोटा को भी न्यूनतम 1 मत | 🚨 अनिवार्य |
| मतों का समान होना | ❌ आवश्यक नहीं — असमान भी चलेगा |
| कुल मतदाताओं की संख्या | समय के अनुसार अधिक/कम की छूट |
ECIL पुस्तिका 2019 [MPSV अध्याय 5] में स्वयं लिखा है कि वोट समान होना आवश्यक नहीं है। मार्गदर्शिका 2026 ने उसमें न्यूनतम 1-1 मत की अनिवार्यता जोड़ी।
🚨 सबसे बड़ा खतरा नोटा का छूट जाना है। यदि नोटा को एक भी मॉक मत न मिला, तो नोटा का पैनल जाँचा ही नहीं गया — और मतदान के दौरान उसकी खराबी पकड़ी नहीं जाएगी।
✅ सुधार — यह वाक्य लिखवाएँ: "अब बैलेट बटन दबा कर बनावटी मतदान किया जाएगा। नोटा सहित प्रत्येक अभ्यर्थी को न्यूनतम 1-1 मत दिया जाना अनिवार्य है। मतों का समान होना आवश्यक नहीं है।"
⚠️ एक प्रस्तुति-संबंधी सुझाव (दोष नहीं): इसी स्लाइड का चित्र BEL की उस CU का है जिस पर
मद 1-द — 🚨 PP1_p014 एवं PP2_p030 — क्लॉक एरर पंचनामा पंचायत का प्रपत्र है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
प्रपत्र में छपे खाने (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
| खाना | निर्णय |
|---|---|
| मतदान केन्द्र क्रमांक · नाम | ✅ ठीक |
| 🔴 पंचायत समिति सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र संख्या | ❌ पंचायतीराज का खाना |
| 🔴 जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र संख्या | ❌ पंचायतीराज का खाना |
| कंट्रोल यूनिट का आईडी क्रमांक | ✅ ठीक |
प्रमाणन की पंक्ति में भी वही दोष:
"प्रमाणित किया जाता है कि उक्त पंचायत समिति / जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केन्द्र पर उपयोग में लाई गई कंट्रोल यूनिट की क्लॉक में…"
🔴 पंचायत समिति और जिला परिषद पंचायतीराज की संस्थाएँ हैं। नगरपालिका चुनाव में इनका कोई अस्तित्व ही नहीं है।
✅ सही खाने
| हटाएँ | लिखवाएँ |
|---|---|
| पंचायत समिति सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र संख्या | नगरपालिका का नाम |
| जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र संख्या | वार्ड संख्या |
प्रमाणन पंक्ति: "…उक्त नगरपालिका के वार्ड में मतदान केन्द्र पर…"
✅ प्रपत्र का शेष ढाँचा सही है — तीन समय (मॉकपॉल · मतदान प्रारंभ · मतदान समाप्त), वास्तविक बनाम CU में प्रदर्शित समय, PRO के हस्ताक्षर, अभिकर्ताओं की तालिका। केवल दो खाने और एक पंक्ति बदलनी है।
🔗 क्लॉक एरर पर क्या करना है — यह भी याद रखें: मतदान से पूर्व → CU बदलवाएँ · मतदान के दौरान → मतदान जारी रखें [MPSV अ.7] · 🚨 MPMV (मध्यप्रदेश की मशीन) में न बदलवाएँ [
PP1_p010]।
मद 1-ध — 🚨 PP2_p009 — "अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग CU एवं BU" ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है:
"यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि इन मॉडल की मशीनों से निर्वाचन में अलग–अलग पदों के लिए अलग–अलग CU एवं BU का उपयोग किया जायंगे।"
🔴 नगरपालिका चुनाव में मतदान केन्द्र पर केवल एक पद है
आदेश 2184, बिन्दु (2) (मैंने पृष्ठ स्वयं पढ़ा):
"उल्लेखनीय है कि एक ही पद (सदस्य) का चुनाव करवाने के लिए अन्य ई.वी.एम की भांति MPSV एवं MPMV मशीनें भी सिंगल पोस्ट सिंगल वोट मशीनों की तरह ही उपयोग में आयेंगी।"
आदेश 2184, बिन्दु 9(xxi) यही दोहराता है:
"MPSV एवं MPMV मशीन के द्वारा केवल सदस्य पद का चुनाव कराये जाने के कारण…"
| स्थिति | |
|---|---|
| मतदान केन्द्र पर पद | 🚨 केवल एक — वार्ड सदस्य (पार्षद) |
| अध्यक्ष का चुनाव | मतदान केन्द्र पर नहीं — बाद में, निर्वाचित सदस्यों द्वारा (देखें अध्यक्ष मॉड्यूल) |
| CU / BU | एक ही सेट (अभ्यर्थी अधिक हों तो अतिरिक्त BU, अतिरिक्त CU नहीं) |
🚨 व्यावहारिक खतरा: यह पढ़कर मतदान दल दो मशीन-सेट की अपेक्षा करेगा, या एक ही सेट मिलने पर समझेगा कि कुछ छूट गया है — सुबह का अनावश्यक भ्रम।
✅ सुधार: "नगरपालिका चुनाव में मतदान केन्द्र पर केवल सदस्य (पार्षद) पद का मतदान होता है, अतः एक ही CU एवं BU का सेट उपयोग में आएगा।"
मद 1-न — 🚨 PP2_p062 — "1 क रजिस्टार" और "एसेम्बली क्षेत्र" ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है (अंतिम बिन्दु):
"द्वितीय मतदान अधिकारी EDC द्वारा मतदान करने वाले अधिकारियों के लिये 1 क रजिस्टार के द्वितीय कॉलम में उनका क्रमांक भाग संख्या और एसेम्बली क्षैत्र का नाम लिखेगें"
🔴 दो दोष
| # | डेक | सही |
|---|---|---|
| 1 | "1 क रजिस्टार" | ✅ प्ररूप 14-क — मतदाताओं का रजिस्टर (नियम 35-क एवं 78) |
| 2 | 🚨 "एसेम्बली क्षेत्र का नाम" | ✅ नगरपालिका का नाम एवं वार्ड संख्या |
🔴 नगरपालिका निर्वाचन में "विधानसभा क्षेत्र" जैसी कोई इकाई है ही नहीं। निर्वाचन क्षेत्र वार्ड है — "नगरपालिका चुनावों में प्रत्येक वार्ड एक निर्वाचन क्षेत्र है" [आदेश 2184 पैरा 9(iii)]।
🔗 यह उसी परिवार का दोष है जो
PP2_p061में है — वहाँ EDC को "उसी लोकसभा" से जोड़ा गया है। दोनों भारत निर्वाचन आयोग की सामान्य-चुनाव सामग्री से आई भाषा है। पूरे डेक में "लोकसभा / विधानसभा / एसेम्बली" शब्द खोजकर हटवाएँ।
मद 1-प — 🚨 RO_p077 — अस्वीकृति का आधार "धारा 24 के अनुसार आयुवर्ग" ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: संवीक्षा के दिन — यह अस्वीकृति की स्लाइड है, RO सीधे इस पर कार्यवाही करेगा।
डेक पर छपा है (तीसरा बॉक्स):
"यदि वार्ड या नगर पालिका का पद विशेष अर्हता वर्ग (धारा 24 के अनुसार आयुवर्ग) के लिये चिन्हित है … और अभ्यर्थी उस विशेष अर्हता वर्ग/आयु वर्ग का नहीं है।"
🔴 धारा 24 इस बारे में है ही नहीं
| धारा | विषय |
|---|---|
| धारा 24 | 🚨 निर्हर्ताएँ (Disqualifications) — जैसे 24(x), विलोपित 24(xvii) संतान संबंधी प्रावधान |
| धारा 21(e) | अर्हता — आयु 21 वर्ष (सभी के लिए एक समान) |
🔴 मेरा अपना सुधार — 22.08.2026 (उसी दिन, बाद में)
पहले मैंने यहाँ लिखा था: "'आयु वर्ग' नाम की कोई आरक्षण-श्रेणी नगरपालिका चुनाव में है ही नहीं" तथा "सही धारा मैं नहीं बता रहा"।
🔴 वह गलत था। ऐसी श्रेणी है — और अब मैंने अधिनियम से सीधे पढ़ ली है।
✅ सही धारा — धारा 21-क (21A), न कि धारा 24
स्रोत: ULB Manual 2026, PDF पृष्ठ 66 (मैंने मूल पाठ स्वयं पढ़ा):
"21A. Special qualification for election on certain seats.— Notwithstanding anything to the contrary … a person shall not be eligible for election on such seats in a Municipality, as may be determined by the State Government in the prescribed manner, unless he or she is within the age group of twenty one years to thirty five years and is otherwise eligible … Provided that— (i) not more than two seats each from the seats reserved for the Scheduled Castes, Scheduled Tribes, Backward Classes or women in a Municipality shall be determined under this section;"
और स्वयं प्ररूप-2 (नियम 11) का खंड (1), स्तम्भ 3 कहता है:
"Whether general, reserved for S.C., S.T., Backward Classes [Women or person having special qualification specified under section 21A]"
🔴 अब सही निष्कर्ष
| बात | स्थिति |
|---|---|
| क्या "विशेष अर्हता / आयु वर्ग" वाली सीटें होती हैं? | ✅ हाँ — धारा 21-क |
| आयु सीमा | ✅ 21 से 35 वर्ष |
| कौन तय करता है | राज्य सरकार (विहित रीति से) |
| कितनी सीटें | अनु.जाति / अनु.जनजाति / पिछड़ा वर्ग / महिला — प्रत्येक से अधिकतम दो |
| 🔴 डेक का दोष | केवल धारा-संख्या — "24" के स्थान पर "21-क" |
✅ सुधार (सरल है):
RO_p077पर "धारा 24 के अनुसार आयुवर्ग" → "धारा 21-क के अनुसार विशेष अर्हता (आयु 21–35 वर्ष)" कर दें। स्लाइड की बाकी बात सही है — हटाना नहीं है।🚨 बालोतरा के RO के लिए: यदि आपके किसी निकाय की कोई सीट धारा 21-क के अधीन चिन्हित है, तो 35 वर्ष से अधिक आयु का अभ्यर्थी उस सीट पर अपात्र है — यह बात संवीक्षा में सीधे काम आएगी। DEO से पूछें कि कोई सीट 21-क के अधीन चिन्हित है या नहीं।
🔗 साथ में पढ़ाएँ: आरक्षित पद पर जाति प्रमाण-पत्र नामांकन के साथ ही लगेगा (आदेश 5164) — देखें BALOTRA_DISTRICT §4।
मद 1-फ — 🚨🚨 PP1_p049 (एवं p053) — थर्ड जेंडर का तारा गायब है, और टिक गलत जगह है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
यह "छोटी त्रुटि" नहीं है — इसी पर डायरी की मद 12 टिकी है।
डेक पर छपा है ("चिन्हित करना"):
"पहचान सुनिश्चित होने के बाद नाम पर अंडरलाइन करना। महिला मतदाता के आगे क्रमांक पर लाल स्याही से (✓) बनाना।"
🔴 दो दोष
| # | डेक | मार्गदर्शिका [MG अ.2(1)5 · अ.3(1)17] |
|---|---|---|
| 1 | महिला का टिक "आगे क्रमांक पर" | ✅ नाम के बांयी तरफ (✓) |
| 2 | 🔴 थर्ड जेंडर का कोई उल्लेख ही नहीं | 🚨 नाम के बांयी तरफ स्टार ( * ) |
मार्गदर्शिका का मूल पाठ:
"पहचान के तुरन्त बाद नाम के नीचे लाईन (Underline) खींचे; महिला मतदाता के नाम के बांयी तरफ टिक (√); थर्ड जेन्डर के नाम के बांयी तरफ स्टार (*) — ताकि अंत में पुरुष/स्त्री/थर्ड जेन्डर मतदाताओं की गिनती हो सके।"
🚨 यही गिनती शाम को डायरी में चाहिए
पीठासीन अधिकारी की डायरी, मद 12: "मतदान करने वालों की संख्या — पुरूष / महिला / थर्ड जेंडर / योग"
🔴 यदि दिनभर थर्ड जेंडर का स्टार लगाया ही नहीं गया, तो शाम को मद 12 भरना असंभव है — गिनती का कोई आधार ही नहीं बचेगा। और गलत जगह (क्रमांक पर) टिक लगाने से वह अंडरलाइन या अन्य चिन्हों से गड्ड-मड्ड हो जाता है।
✅ सुधार — यह लिखवाएँ: "पहचान सुनिश्चित होने पर नाम के नीचे अंडरलाइन खींचें। महिला के नाम की बाईं ओर टिक (✓) लगाएँ। 🚨 थर्ड जेंडर के नाम की बाईं ओर स्टार ( * ) लगाएँ। यही तीनों गिनतियाँ डायरी की मद 12 में जाएँगी।"
✅
PP1_p055सही है — उसे न छेड़ें। सुधार केवलp049एवंp053में कराएँ।
मद 1-ब — §3 (छोटी त्रुटियाँ) में से चार और जो सत्यापित हुईं (22.08.2026)
ये चारों मैंने उन्हीं पृष्ठों से स्वयं पुष्ट की हैं जो मैंने ऊपर के मदों के लिए पढ़े।
✅ क. PP2_p020 — हल किए उदाहरण में नोटा का पैनल है ही नहीं
छपा है: "(यदि 9 उम्मीदवार है एवं मॉकपोल में 54 मत पडे है एवं सभी उम्मीदवारों को 6–6 दिये गये हो तो)"
9 × 6 = 54 — गणित सही है, पर नोटा कहीं नहीं।
🔴 नोटा सहित होता तो 10 पैनल होते और योग 60 आता। यह मद 1-थ का ही विस्तार है — पूरे डेक में नोटा छूटा हुआ है। ✅ उदाहरण बदलवाएँ: "9 अभ्यर्थी + नोटा = 10 पैनल, प्रत्येक को 6 → कुल 60 मत।"
✅ ख. PP2_p035 — परिशिष्ट-19 कहाँ लगेगा — एक ही डेक में तीन उत्तर
| पृष्ठ | क्या कहता है |
|---|---|
PP2_p035 |
पीठासीन अधिकारी की डायरी के साथ ❌ |
PP2_p021 |
परिशिष्ट-7 के साथ ❌ |
| ✅ सही | परिशिष्ट-6 (पीठासीन अधिकारी की तीन घोषणाएँ); लिफाफा E-10 |
➡ देखें मद 1-ङ — वहीं पूरा आधार दिया है। दोनों पृष्ठ एक साथ ठीक कराएँ।
✅ ग. PP2_p106 / p096 — वही उलटा घटाने का निर्देश
"(मद 3 से मद 2 घटाइए)" — वही दोष जो FORMS_p010 पर है।
✅ सही: "मद 2 में से मद 3 घटाइए" — देखें मद 1-ढ।
यह तीन पृष्ठों पर दोहराया गया है — तीनों ठीक कराएँ।
✅ घ. FORMS_p031 मद 13 — जब्त धनराशि ✅ 06 किसी से मेल नहीं खाती
छपा है: अनुमत 05 · अस्वीकृत 02 · जब्त की गई धनराशि 06
चुनौती फीस = ₹2 प्रति चुनौती (नकद; परि-13 रसीद बुक) — हमारी सामग्री में सत्यापित।
| संभावित आधार | ₹2 × संख्या | परिणाम |
|---|---|---|
| अस्वीकृत (02) | 2 × 2 | ₹4 |
| अनुमत (05) | 5 × 2 | ₹10 |
| कुल (07) | 7 × 2 | ₹14 |
| 🔴 छपा हुआ | — | ₹6 |
🔴 ₹6 किसी भी संयोजन से नहीं बनता — वह 3 चुनौतियों के बराबर है, जो मद 13 में कहीं नहीं।
⚠️ मैं यह नहीं बता रहा कि किस स्थिति में फीस जब्त होती है (चुनौती सही निकलने पर या गलत निकलने पर) — यह मैंने सत्यापित नहीं किया। केवल यह कह रहा हूँ कि ₹6 इस नमूने के अपने अंकों से नहीं निकलता।
मद 1-भ — 🚨🚨 PP1_p012 — CLOCK ERROR की तालिका में MPSV की पंक्ति है ही नहीं — यही बालोतरा की मशीन है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: रवानगी के समय — जब दल को मशीन सौंपी जा रही होगी।
डेक की तालिका ("रवानगी के समय मशीन का परिवर्तन") में चार पंक्तियाँ हैं:
| क्रम | CU पर प्रदर्शन | EVM का प्रकार | प्रक्रिया |
|---|---|---|---|
| 1 | LINK ERROR / BU NOT RESPONDING | MPSV/MPMV/M3A | पुनः कनेक्ट, अनुक्रम जाँचें |
| 2 | फिर भी प्रदर्शित हो | MPSV/MPMV/M3A | बीयू बदलवाएँ |
| 3 | CLOCK ERROR | M3A | CU परिवर्तित करें |
| 4 | CLOCK ERROR | MPMV (मध्यप्रदेश) | CU परिवर्तित नहीं करें, पंचनामा तैयार करें |
🔴 पंक्ति 3 एवं 4 केवल M3A और MPMV को लेती हैं — MPSV छूट गई है
🚨 बालोतरा को MPSV या MPMV मिलेंगी (प्रेस नोट 6722 — देखें BALOTRA_DISTRICT §2)। यदि बालोतरा के किसी दल को MPSV मिली और CLOCK ERROR आया — तो यह तालिका उसे कुछ भी नहीं बताती।
✅ MPSV का सही उत्तर — दो स्रोतों से
1. इसी डेक का PP1_p010 (वर्णनात्मक स्लाइड) सामान्य नियम देता है:
"डिस्प्ले पैनल पर
CLOCK ERRORप्रदर्शित हो रहा है, तो सीयू परिवर्तित करावें। यदि मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली ईवीएम मशीन (MPMV) में परिवर्तित नहीं करना है।"
2. [MPSV अध्याय 7] की त्रुटि-तालिका: CLOCK ERROR — मतदान से पहले → CU बदलें ·
मतदान के दौरान → मतदान जारी रखें (कार्यक्षमता या डेटा पर कोई प्रभाव नहीं)।
✅ पूरी तालिका ऐसी होनी चाहिए
| मशीन | मतदान से पूर्व CLOCK ERROR | मतदान के दौरान |
|---|---|---|
| 🚨 MPSV (छूटी हुई पंक्ति) | CU बदलवाएँ | मतदान जारी रखें |
| M3A | CU बदलवाएँ | मतदान जारी रखें |
| 🚨 MPMV | न बदलवाएँ — पंचनामा बनाएँ | मतदान जारी रखें |
🔗 एक जरूरी कड़ी — मद 1-द के साथ पढ़ें: पंक्ति 4 कहती है कि MPMV पर पंचनामा बनाना है — और वही पंचनामा-प्रपत्र (
PP1_p014) पंचायत समिति / जिला परिषद का है — देखें मद 1-द।🔴 अर्थात् बालोतरा को MPMV मिलने पर दोनों दोष एक साथ टकराएंगे — पंचनामा बनाना भी है, और जो प्रपत्र दिया गया है वह गलत निकाय का है। दोनों एक साथ ठीक कराएँ।
मद 1-म — ⛔ RO_p071 — CrPC 110/117 एवं "खाद्य अपमिश्रण 1954" — समीक्षा के दोनों आरोप खारिज ⛔ (22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
🔴 यह स्लाइड न बदलें। यह अधिनियम को शब्दशः दोहरा रही है।
समीक्षा का आरोप था: "CrPC 1973 निरसित; अब भा.ना.सु.सं. 2023" तथा "खाद्य अपमिश्रण कानून 1954 — FSSA 2006 से प्रतिस्थापित"।
✅ मैंने अधिनियम की धारा 24 स्वयं पढ़ी — डेक बिलकुल सही है
स्रोत: ULB Manual 2026, PDF पृष्ठ 67 — अधिनियम की धारा 24 का मूल पाठ:
"24. General disqualifications for members.— A person, notwithstanding that he is otherwise qualified, shall be disqualified, for being chosen as or for being a member of a Municipality— (iv) if he has been convicted of an offence under the Prevention of Food Adulteration Act, 1954 (Central Act No. 37 of 1954), or (v) against whom an order has been passed under section 117 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (Central Act No. 2 of 1974), in proceedings instituted under section 110 of the said Code, such order not having been subsequently reversed, or (vii) if, he having been a professional practitioner, has been debarred from practicing as such by order of any competent authority…"
| डेक का बिन्दु | अधिनियम का खंड | मेल |
|---|---|---|
| 4. खाद्य अपमिश्रण कानून, 1954 | 24(iv) — वही 1954 | ✅ |
| 5. CrPC की धारा 117, धारा 110 की कार्यवाही | 24(v) — वही 117 / 110 | ✅ |
| 6. पेशेवर को अभ्यास से वंचित | 24(vii) | ✅ |
➡ तीनों बिन्दु अधिनियम से अक्षरशः मेल खाते हैं। कोई त्रुटि नहीं।
🚨 किन्तु एक सच्ची बात बचती है — वह डेक की नहीं, अधिनियम की है
| केन्द्रीय अधिनियम | स्थिति |
|---|---|
| खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 | खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 से प्रतिस्थापित (05.08.2011 से) |
| दंड प्रक्रिया संहिता 1973 | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 से प्रतिस्थापित (01.07.2024 से) |
अर्थात् धारा 24 अब भी निरसित केन्द्रीय अधिनियमों का हवाला देती है। सामान्य खंड अधिनियम की धारा 8 के अनुसार निरसित अधिनियम का निर्देश पुनः-अधिनियमित प्रावधान का निर्देश माना जाता है — अतः निर्हर्ता समाप्त नहीं हुई।
✅ RO को क्या बताएँ
✅ यह कहें ❌ यह न करें "ये निर्हर्ताएँ अधिनियम की धारा 24 से हैं और जीवित हैं।" स्लाइड में धारा-संख्या बदलना "इन आधारों पर अस्वीकृति से पूर्व DEO से लिखित विधि-राय लें।" संवीक्षा की मेज पर स्वयं निर्णय लेना 🚨 कारण: ये दुर्लभ आधार हैं और इन पर निरसित केन्द्रीय विधि की उत्तरजीविता का प्रश्न जुड़ा है — यह RO के स्तर का निर्णय नहीं है।
🔗 यह मद 1-प (
RO_p077) से अलग है। वहाँ धारा 24 का गलत उपयोग था (आरक्षण/आयुवर्ग के लिए); यहाँ धारा 24 का सही उपयोग है। दोनों को न मिलाएँ।
⚠️ साथ में दो और बातें जो इसी पाठ से निकलीं
1. RO_p101 का "1955" — सही सन् 1954 है।
अधिनियम की धारा 24(iv) "1954 (केन्द्रीय अधि. 37/1954)" कहती है, और लो.प्र.अ. 1951
की धारा 8 का स्पष्टीकरण (ख) भी 1954 कहता है (Manual PDF पृ. 34)।
➡ यदि RO_p101 पर "1955" छपा है तो वह सन् गलत है — 1955 आवश्यक वस्तु अधिनियम है।
(मैंने इस चरण में RO_p101 का पृष्ठ-चित्र पुनः नहीं खोला — बदलने से पूर्व एक बार देख लें।)
2. धारा 24(i) पर समीक्षा का आरोप — ⚠️ मैं तय नहीं कर पाया।
खंड (i) का मूल पाठ: "convicted of an offence involving moral turpitude … and sentenced to
imprisonment for six months or more" — इस खंड में स्वयं कोई समय-सीमा नहीं है।
किन्तु धारा 24 का परन्तुक आगे चलता है और मैंने वह पूरा नहीं पढ़ा।
➡ तब तक RO_p067 में कोई परिवर्तन न कराएँ।
मद 1-य — 🚨🚨 RO_p067 — धारा 24(i) की छह-वर्षीय सीमा साथ नहीं दी गई ❌ (नया — 22.08.2026, अधिनियम से स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: संवीक्षा के दिन — एक पात्र अभ्यर्थी गलत अस्वीकृत हो सकता है।
✅ अधिनियम का मूल पाठ — धारा 24 का परन्तुक (क)
स्रोत: ULB Manual 2026, PDF पृष्ठ 68 (मैंने मूल पाठ स्वयं पढ़ा):
"Provided that— (a) the disqualification mentioned in clause (i) shall cease to operate after the expiry of six years from the date of the release of the disqualified person from imprisonment;"
और खंड (i) स्वयं:
"if he has been convicted of an offence involving moral turpitude or of any other offence by a competent court of law and sentenced to imprisonment for six months or more"
🔴 दोनों एक साथ पढ़े बिना निर्णय गलत होगा
| स्थिति | निर्णय |
|---|---|
| 6 माह या अधिक की सज़ा, रिहाई को 6 वर्ष से कम हुए | ❌ निर्हर्त — नामांकन अस्वीकृत |
| 🚨 6 माह या अधिक की सज़ा, रिहाई को 6 वर्ष पूरे हो चुके | ✅ निर्हर्ता समाप्त — अभ्यर्थी पात्र है |
🔴 यदि
RO_p067को अकेले पढ़ाया गया — जहाँ निर्हर्ता निरपेक्ष रूप में दी गई है — तो RO एक पात्र अभ्यर्थी का नामांकन अस्वीकृत कर देगा। यह वह गलती है जो चुनाव याचिका तक जाती है।✅ सुधार:
RO_p067पर खंड (i) के साथ ही यह पंक्ति जोड़वाएँ — "🚨 रिहाई की तारीख से 6 वर्ष बीतने पर यह निर्हर्ता समाप्त हो जाती है — धारा 24 का परन्तुक (क)।" याRO_p070का स्पष्ट संदर्भ उसी स्लाइड पर दें। दोनों स्लाइड कभी अलग-अलग न पढ़ाएँ।
📌 परन्तुक के तीन और खंड — सभी संवीक्षा में काम आएँगे
| परन्तुक | किस खंड पर | कब समाप्त |
|---|---|---|
| (क) | खंड (i) — नैतिक अधमता/6 माह+ की सज़ा | रिहाई से 6 वर्ष बाद |
| 🚨 (ख) | खंड (v) — CrPC धारा 117/110 का आदेश | जितनी अवधि के लिए प्रतिभूति देने का आदेश हुआ, वह बीतने पर |
| (ग) | खंड (ix) — धारा 35/41 | अवधि बीतने पर; आयोग पहले भी हटा सकता है |
🔗 परन्तुक (ख) मद 1-म को पूरा करता है। वहाँ मैंने CrPC वाले आधार पर "विधि-राय लें" कहा था — अब यह भी जोड़ लें कि वह निर्हर्ता प्रतिभूति-अवधि बीतते ही स्वतः समाप्त हो जाती है।
⚠️ परन्तुक (ङ) — संतान संबंधी — अब विलोपित है (अधिनियम 7/2026)। मैनुअल अब भी उसे छापता है — देखें BALOTRA_DISTRICT §4-क एवं मद 9।
मद 1-र — 🚨 RO_p099 / RO_p100 / RO_p101 — लो.प्र.अ. की धारा 8 का ढाँचा गलत दिखाया गया ❌ (नया — 22.08.2026, अधिनियम से स्वयं सत्यापित)
✅ मैंने लो.प्र.अ. 1951 की धारा 8 का मूल पाठ पढ़ा
स्रोत: ULB Manual 2026, PDF पृष्ठ 32–34 — "EXTRACTS FROM THE REPRESENTATION OF PEOPLE ACT, 1951"
| उप-धारा | ढाँचा |
|---|---|
| 8(1) | "A person convicted of an offence punishable under—" → खंड (a) से (m) |
| 8(2) | "A person convicted for the contravention of—" → खंड (a), (b), (c) |
| 🚨 (i) / (ii) | ये खंड नहीं हैं — ये सज़ा के भेद हैं ("where the convicted person is sentenced to— (i)… (ii)…") |
8(1) के खंड (ज्यों के त्यों): (a) भा.दं.सं. की धाराएँ 153A, 171E, 171F, 376…, 498A, 505 · (b) नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 · (c) सीमाशुल्क अधि. 1962 की धारा 11 · (d) विधिविरुद्ध क्रियाकलाप अधि. 1967 की धारा 10–12 · (e) फेरा 1973 · (f) NDPS 1985 · (g) TADA 1987 · (h) धार्मिक संस्था अधि. 1988 · … · (l) सती निवारण 1987 · (m) भ्रष्टाचार निवारण
8(2) के खंड: (a) जमाखोरी/मुनाफाखोरी · (b) खाद्य या औषधि अपमिश्रण से संबंधित कोई विधि · (c) दहेज प्रतिषेध अधि. 1961
🔴 दोष 1 — RO_p099/p100 का "धारा 8(1)(ii)(क)…(ढ)" कोई प्रावधान है ही नहीं
अपराध 8(1) के खंड (a)–(m) में हैं, और (i)/(ii) सज़ा के भेद हैं। दोनों को मिलाकर "8(1)(ii)(क)" लिखना एक ऐसा प्रावधान गढ़ देता है जो है ही नहीं।
✅ सुधार: पंक्तियाँ "धारा 8(1) का खंड (क)…(ढ)" के रूप में लिखवाएँ, और सज़ा के भेद (i)/(ii) को अलग पंक्ति में रखें।
🔴 दोष 2 — RO_p101 का "खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1955" — सन् गलत
धारा 8 का स्पष्टीकरण (Manual PDF पृ. 34) दो लगातार पंक्तियों में:
"(c) 'essential commodity' has the meaning assigned to it in the Essential Commodities Act, 1955 (10 of 1955); (d) 'food' has the meaning assigned to it in the Prevention of Food Adulteration Act, 1954 (37 of 1954)."
| सन् | किस अधिनियम का |
|---|---|
| 1955 | ✅ आवश्यक वस्तु अधिनियम (10/1955) |
| 1954 | ✅ खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (37/1954) |
🔴 दोनों एक ही स्पष्टीकरण में, आगे-पीछे की पंक्तियों में हैं — यहीं से सन् बदल गया लगता है।
✅ सुधार:
RO_p101पर "1955" → "1954"। अधिनियम की धारा 24(iv) भी 1954 (केन्द्रीय अधि. 37/1954) कहती है — दोनों स्थानों पर 1954।⚠️ ध्यान दें — यह
RO_p071से भिन्न है।RO_p071पर "1954" छपा है और वह सही है — देखें मद 1-म (वहाँ समीक्षा का आरोप खारिज किया गया)। केवलRO_p101पर सन् गलत है।⚠️ मैंने
RO_p101का पृष्ठ-चित्र इस चरण में नहीं खोला — यह निष्कर्ष समीक्षा के विवरण पर आधारित है, पर सही सन् 1954 है — यह मैंने अधिनियम से स्वयं पक्का किया है। बदलने से पूर्व पृष्ठ एक बार देख लें।🔗 यह मद 5 (अपास्त धारा 8(4)) से जुड़ता है — वही
RO_p101पृष्ठ। दोनों सुधार एक साथ कराएँ।
मद 1-ल — 🚨🚨 PP1_p025 — पहचान दस्तावेजों की सूची सही, पर तीनों शर्तें गायब ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: मतदान दिवस, प्रथम मतदान अधिकारी की मेज पर, हर मतदाता पर।
✅ सूची सही है — उसे न छेड़ें
PP1_p025 पर छपे 11 दस्तावेज — आधार, VB-G RAM G/मनरेगा, फोटोयुक्त पासबुक,
स्वास्थ्य बीमा/आयुष्मान, ड्राइविंग लाइसेन्स, पैन, पासपोर्ट, पेंशन दस्तावेज, सेवा पहचान पत्र,
सांसद/विधायक पहचान पत्र, UDID — आदेश 5310 दिनांक 30.07.2026 से मेल खाते हैं। ✅
🔴 किन्तु स्लाइड पर केवल सूची है — शर्तें एक भी नहीं
आदेश 5310 (जिसने मार्गदर्शिका का परिशिष्ट-16 / आदेश 603 अधिक्रमित किया) तीन शर्तें जोड़ता है:
| # | शर्त | न होने पर क्या होगा |
|---|---|---|
| 1 | 🚨 चुनाव की घोषणा से पूर्व जारी हुआ हो | 19.08.2026 के बाद बना आधार भी चल जाएगा |
| 2 | मूल दस्तावेज हो | फोटोकॉपी चल जाएगी |
| 3 | कालातीत अवधि अंकित हो तो उसी अवधि तक मान्य | समाप्त ड्राइविंग लाइसेंस चल जाएगा |
और एक चौथी बात: EPIC ही प्राथमिक दस्तावेज है — ये 11 विकल्प उनके लिए हैं जो EPIC नहीं दे पाएँ। साथ ही "प्रथम मतदान अधिकारी को स्वयं संतुष्ट होना होगा।"
✅ सुधार: सूची के नीचे यह बॉक्स जोड़वाएँ — "🚨 EPIC प्राथमिक है। ऊपर के विकल्प तभी, जब वे — (1) चुनाव की घोषणा से पूर्व जारी हों, (2) मूल हों, और (3) यदि अवधि अंकित है तो वह बीती न हो।"
🔗 स्रोत: आदेश एफ.1(2)(1)नपा-पंचा/सा.आ./रानिआ/14/5310 दिनांक 30.07.2026 — पूरा मूल पाठ EVM/hi §1 में है।
मद 1-व — 🚨 PP2_p051 — चुनौती केवल "मतदान अभिकर्ता" तक सीमित कर दी गई ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है:
2. "उसी समय कोई भी मतदान अभिकर्ता मतदाता की पहचान को चुनौती दे सकता है।" 4. "पीठासीन अधिकारी मतदान अभिकर्ता द्वारा दी गई चुनौती को…"
🔴 चुनौती तीन लोग दे सकते हैं, एक नहीं
मार्गदर्शिका [MG अ.2(1)] में PO-1 का कर्तव्य 7:
"पोलिंग एजेंट / उम्मीदवार / इलैक्शन एजेंट इसी स्टेज पर पहचान को चुनौती दे सकते हैं, बाद में नहीं।"
| डेक | मार्गदर्शिका |
|---|---|
| केवल मतदान अभिकर्ता ❌ | मतदान अभिकर्ता · अभ्यर्थी स्वयं · निर्वाचन अभिकर्ता ✅ |
🚨 व्यावहारिक खतरा: यदि अभ्यर्थी स्वयं केन्द्र पर हो और चुनौती दे — इस स्लाइड के आधार पर पीठासीन अधिकारी उसे लौटा देगा — जो गलत है।
✅ सुधार: बिन्दु 2 एवं 4 में — "कोई भी मतदान अभिकर्ता, अभ्यर्थी स्वयं या निर्वाचन अभिकर्ता चुनौती दे सकता है।"
✅ शेष बिन्दु सही हैं — ₹2 नकद की शर्त ✅ एवं परिशिष्ट-13 की रसीद ✅ हमारी सामग्री से मेल खाते हैं। केवल "कौन दे सकता है" बढ़ाना है।
मद 1-श — 🚨 PP2_p078 — मतदान बंद करना केवल ECI मशीन की भाषा में ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है:
"…नियन्त्रण यूनिट पर लगी काले रंग की रबड़ की सील को हटा कर छिद्र में अंगुली की सहायता से काले रंग का क्लोज बटन दबायें।"
🔴 MPSV पर ऐसा कुछ नहीं है
| डेक (ECI मशीन) | 🚨 MPSV — बालोतरा की मशीन | |
|---|---|---|
| CLOSE कैसे खुलता है | काली रबड़ की सील हटाकर, छिद्र में अंगुली डालकर | ✅ CLOSE की कैप हटाएँ → दबाएँ → कैप वापस लगाएँ [SO 145 पैरा 1] |
🔴 स्लाइड के दोनों चित्र भी ECI की मशीनों के हैं — उन पर "Control Unit" लिखा है और भारत निर्वाचन आयोग की पिंक पेपर सील लगी है।
🚨 बालोतरा का पीठासीन अधिकारी शाम 6 बजे, एजेंटों के सामने, एक ऐसी "काली रबड़ की सील" ढूँढेगा जो उसकी मशीन पर है ही नहीं।
✅ सुधार: या तो स्लाइड पर दोनों मशीनों की पंक्ति रखें, या बालोतरा के प्रशिक्षण में मौखिक रूप से बताएँ — "आपकी मशीन पर रबड़ की सील नहीं, कैप होगी। कैप हटाएँ,
CLOSEदबाएँ, 🚨 कैप वापस लगाएँ — कैप खुली छोड़ना घोर चूक है।"⚠️ मैंने केवल
PP2_p078पढ़ा है। समीक्षा कहती है किp079–p082भी इसी शब्दावली में हैं — वह मैंने सत्यापित नहीं किया। चारों पृष्ठ एक बार देख लें।
मद 1-ष — 🚨 PP2_p070 — निविदत्त मत की प्रक्रिया अधूरी है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
कब काटेगा: निविदत्त मत विरले ही आते हैं — इसलिए जब आएंगे, दल इसी स्लाइड के भरोसे होगा।
✅ पहले वह जो समीक्षा ने गलत कहा — पृष्ठांकन मौजूद है
समीक्षा ने कहा था कि "पीछे 'निविदत्त मतपत्र' की मुहर … कुछ भी नहीं"। 🔴 यह सही नहीं है। स्लाइड का बिन्दु 3 कहता है —
"ऐसे मतपत्र के पीछे पीठासीन अधिकारी हाथ से निविदत्त मतपत्र लिखेगा।"
⚠️ किन्तु वह भी अधूरा है — मार्गदर्शिका [MG अ.8(1)] कहती है:
"उसकी पीठ पर 'निविदत्त मतपत्र' स्टाम्पित करें और स्टाम्प न हो तो हाथ से लिखकर नीचे हस्ताक्षर।"
➡ स्टाम्प प्राथमिक है, हाथ से लिखना विकल्प है — और उस पर हस्ताक्षर भी आवश्यक हैं।
🔴 जो सचमुच गायब है — पाँच बातें
| # | गायब | मार्गदर्शिका [MG अ.8(1)] |
|---|---|---|
| 1 | 🚨 अमिट स्याही | निविदत्त मतदाता को भी स्याही लगेगी |
| 2 | 🚨 क्रम का नियम | प्ररूप 14-ख में प्रविष्टि व हस्ताक्षर के पश्चात् ही मतपत्र जारी करें |
| 3 | 20 की संख्या | प्रत्येक केन्द्र को 20 निविदत्त मतपत्र; कम पड़ें → जोनल मजिस्ट्रेट |
| 4 | सुभिन्नकारी चिन्ह / ऐरोक्रॉस सील | मतपत्र पर चिन्हित करना |
| 5 | लिफाफे | E-4 अप्रयुक्त · E-5 प्रयुक्त · E-6 प्ररूप 14-ख |
✅ पूरा क्रम — यही पढ़ाएँ
फर्जी मत पहले पड़ चुका → पहचान से समाधान → 🚨 अमिट स्याही
→ 🚨 प्ररूप 14-ख में प्रविष्टि + हस्ताक्षर/अंगूठा → तब मतपत्र जारी
→ पीठ पर 'निविदत्त मतपत्र' स्टाम्प (या हाथ से + हस्ताक्षर)
→ सुभिन्नकारी चिन्ह / ऐरोक्रॉस सील → लिफाफा E-5 (सील)
→ प्ररूप 14-ग भाग 1 की मद 8 में लेखा
🚨 सबसे ख़तरनाक छूट — क्रम। यदि मतपत्र पहले दे दिया और प्ररूप 14-ख बाद में भरा, तो मतदाता हस्ताक्षर से मना कर सकता है — और मतपत्र बेहिसाब हो जाएगा। मार्गदर्शिका का शब्द "इसके पश्चात् ही" इसीलिए है।
🔗 यह मद 1-ड से जुड़ता है — वहाँ रसीद 20 और लेखा 10 था। 20 की संख्या मार्गदर्शिका से पुष्ट है — अर्थात्
FORMS_p023का 20 सही है, औरFORMS_p009का "प्राप्त 10" ही नमूने की गलती है। मद 1-ड इससे सुलझ गया।⚠️ मैंने केवल
PP2_p070पढ़ा। संभव है कि शेष चरणp071पर हों — बदलने से पूर्व अगला पृष्ठ देख लें।
मद 1-स — 🚨 PP2_p011 — "RESULT और PRINT बटन" — बालोतरा की मशीन पर PRINT बटन है ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है (बिन्दु 4):
"इसके बाद, परिणाम अनुभाग के आंतरिक खण्ड का दरवाजा (RESULT और PRINT बटन के ऊपर) दो छिद्रों के माध्यम से अंगूठा और एक उंगली डालकर… खोला जाना चाहिए।"
🔴 आंतरिक खण्ड के बटन दोनों मशीनों में अलग हैं
| मशीन | आंतरिक खण्ड के बटन |
|---|---|
| 🚨 MPSV / MPMV (बालोतरा) | RESULT-I, RESULT-II, CLEAR — PRINT बटन नहीं |
| M3A / MK-V | RESULT, PRINT (तथा CLEAR) |
स्रोत: EVM/hi §मशीन की पहचान — "M3A/MK-5 में अंतर: आंतरिक खण्ड में RESULT और PRINT बटन होते हैं (RESULT-I / RESULT-II नहीं)"
🚨 बालोतरा का पीठासीन अधिकारी दरवाजा खोलकर
RESULT-IऔरRESULT-IIदेखेगा — "PRINT" नाम का कोई बटन नहीं मिलेगा।✅ सुधार: "…आंतरिक खण्ड का दरवाजा (MPSV/MPMV में
RESULT-I/RESULT-IIके ऊपर; M3A/MK-V मेंRESULT/PRINT` के ऊपर)…"📌 जानने योग्य: MPSV में प्रिंट के लिए ईवीएम डिकोडर प्रिंटर को DI कनेक्टर से जोड़कर
RESULT-IIका उपयोग होता है — यह RO स्तर का काम है, मतदान दल का नहीं।
मद 1-ह — 🚨 PP1_p073 — पीठासीन अधिकारी के प्रपत्रों की सूची में परिशिष्ट-19 है ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
सूची का अंतिम भाग (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
| क्रम | प्रारूप |
|---|---|
| 19 | परिशिष्ट-11 — आयु घोषणा की सूची |
| 20 | परिशिष्ट-12 — साथी द्वारा घोषणा |
| 21 | परिशिष्ट-13 — चैलेन्ज फीस रसीद बुक |
| 22 | परिशिष्ट-14 |
| 23 | परिशिष्ट-15 — चैक मीमो |
| 24 | परिशिष्ट-15A — लिफाफों का विवरण ← सूची यहीं समाप्त |
🔴 1–24 की पूरी सूची परिशिष्ट-15A पर खत्म हो जाती है — परिशिष्ट-19 उसमें है ही नहीं।
🚨 पर परिशिष्ट-19 पीठासीन अधिकारी को मतदान की सुबह ही बनाना है
इसी डेक का PP2_p021 कहता है:
"पीठासीन अधिकारी मॉकपॉल का प्रमाण पत्र परिशिष्ट 19 पर दिये गये प्ररूप में तैयार करेगा।"
और डायरी की मद 30 उसे लिफाफा E-10 में रखने को कहती है।
➡ अर्थात् एक प्रपत्र जो PRO को अनिवार्य रूप से बनाना है, वह "PRO के प्रपत्रों" की सूची में ही नहीं है। मतदान सामग्री मिलाते समय वह छूट सकता है।
✅ सुधार: सूची में क्रम 25 — परिशिष्ट-19 — मॉकपॉल का प्रमाण पत्र जोड़वाएँ।
🔗 यह मद 1-ङ एवं 1-ब(ख) से जुड़ता है — वहाँ परिशिष्ट-19 किसके साथ संलग्न होगा, यह गलत था। तीनों एक साथ ठीक कराएँ।
मद 1-क्ष — ⚠️ PP1_p039 — समीक्षा का "चौथा स्तर" वाला आरोप — मैं सत्यापित नहीं कर सका ⚠️
स्लाइड पर तीन स्तर हैं: राष्ट्रीय दल · राज्यीय दल · निर्दलीय
समीक्षा का आरोप: "पंजीकृत-अमान्यताप्राप्त दल का स्तर छूटा — चार होने चाहिए।"
🔴 मेरी नगरपालिका-सामग्री में मतदान अभिकर्ता की बैठक-प्राथमिकता पर कुछ है ही नहीं। चार-स्तरीय क्रम भारत निर्वाचन आयोग की सामान्य-चुनाव प्रथा है।
⚠️ नगरपालिका चुनाव में पंजीकृत-अमान्यताप्राप्त दलों को भी निर्दलीयों की तरह मुक्त प्रतीक मिलते हैं — इसलिए तीन स्तर होना संभवतः सही भी हो सकता है।
➡ मैं इसे न पुष्ट कर रहा हूँ, न खारिज। — स्लाइड में कोई परिवर्तन न कराएँ जब तक नियम-पुस्तिका या आयोग के आदेश से चार स्तर प्रमाणित न हो जाएँ।
मद 1-त्र — 🚨 PP1_p036 — "निर्वाचकों के अलावा" छूट गया, "केवल" रह गया ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है (शीर्षक: "मतदान केंद्रों में प्रवेश — नियम 29"):
"मतदान केंद्र में केवल मतदान अधिकारी, प्रत्येक अभ्यर्थी, उसका निर्वाचन अभिकर्ता और एक समय में एक मतदान अभिकर्ता प्रवेश पा सकेंगे।"
🔴 दोष 1 — अक्षरशः पढ़ें तो मतदाता ही बाहर हो जाता है
मार्गदर्शिका [MG अ.3(6)] का मूल पाठ इस पंक्ति से शुरू होता है:
🚨 "निर्वाचकों के अलावा केवल निम्न व्यक्ति:"
| ✅ मार्गदर्शिका | "निर्वाचकों के अलावा केवल …" — मतदाता तो आएंगे ही |
| ❌ डेक | "केवल … प्रवेश पा सकेंगे" — मतदाता सूची में है ही नहीं |
🔴 तीन शब्द छूटने से वाक्य का अर्थ उलट गया है। यह स्पष्टतः लिखाई की चूक है, पर प्रश्नोत्तर में यही रटाया जाएगा।
🔴 दोष 2 — तीसरे बिन्दु से प्रयोजन की सीमा हट गई
| डेक | मार्गदर्शिका |
|---|---|
| "पीठासीन अधिकारी द्वारा अधिकृत अन्य व्यक्ति" | "जिन्हें पीठासीन अधिकारी समय-समय पर मतदाताओं की पहचान के लिए बुलाए" |
🚨 सीमा हटने से ऐसा लगता है कि PRO किसी को भी भीतर बुला सकता है। वास्तव में यह शक्ति केवल मतदाता-पहचान के प्रयोजन तक सीमित है।
✅ सुधार — पहली पंक्ति ऐसे लिखवाएँ: "मतदान केन्द्र में निर्वाचकों के अलावा केवल निम्न व्यक्ति प्रवेश पा सकेंगे —…" और तीसरे बिन्दु में "मतदाताओं की पहचान के लिए" जोड़वाएँ।
🔗 साथ में यह भी पढ़ाएँ [MG अ.3(6)]: 🚨 "'लोकसेवक' में सामान्य पुलिस ऑफिसर शामिल नहीं" · 🚨 "'निर्वाचन के संबंध में ड्यूटी पर लोकसेवक' में मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री शामिल नहीं" — ये दोनों स्पष्टीकरण डेक में कहीं नहीं हैं, और मतदान दिवस पर यही टकराते हैं।
मद 1-ज्ञ — 🚨 FORMS_p002 (अनुक्रमणिका) — परिशिष्ट-19 यहाँ भी नहीं, और यही अनुक्रमणिका मद 1-ङ को प्रमाणित करती है ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
🎯 सबसे महत्वपूर्ण — डेक स्वयं अपने आपसे टकराता है
इसी डेक की अनुक्रमणिका में छपा है (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा):
| क्रम | प्रारूप | उपयोग |
|---|---|---|
| 18 | ✅ परिशिष्ट — 7 | पीठासीन अधिकारी (प्रिसाइडिंग ऑफिसर) की डायरी |
| 19 | ✅ परिशिष्ट — 8 | प्ररूप 14 ग — रिकार्ड किये गये मतों का लेखा |
🔴 और उसी डेक का PP2_p021 कहता है: "पीठासीन अधिकारी की डायरी (परिशिष्ट–8)"
🎯 यह मद 1-ङ के तीसरे दोष का स्वतंत्र प्रमाण है। अब इसे सिद्ध करने के लिए मार्गदर्शिका की भी आवश्यकता नहीं — डेक की अपनी अनुक्रमणिका ही
PP2_p021को गलत ठहरा देती है।✅ प्रशिक्षण में यही दोनों पृष्ठ साथ-साथ दिखाएँ — कक्षा स्वयं पकड़ लेगी।
🔴 परिशिष्ट-19 अनुक्रमणिका में भी नहीं है
अनुक्रमणिका 27 मदों तक जाती है और क्रम 27 = परिशिष्ट-15A पर समाप्त होती है।
| परिशिष्ट-14 (क्रम 25) | ✅ अनुक्रमणिका में है |
| परिशिष्ट-15 (क्रम 26) | ✅ अनुक्रमणिका में है |
| 🔴 परिशिष्ट-19 | ❌ अनुक्रमणिका में है ही नहीं |
🔗 यह मद 1-ह (
PP1_p073) के साथ मिलता है — वहाँ भी परिशिष्ट-19 सूची में नहीं था।🚨 अर्थात् परिशिष्ट-19 न तो PRO के प्रपत्रों की सूची में है, न अनुक्रमणिका में — जबकि वही प्रपत्र मतदान की सुबह मॉक पोल के तुरंत बाद भरना है।
✅ सुधार: अनुक्रमणिका में क्रम 28 — परिशिष्ट-19 — मॉकपॉल का प्रमाण पत्र जोड़वाएँ, और उसका पृष्ठ भी डेक में लगवाएँ।
✅ अनुक्रमणिका की एक उपयोगी बात — नियम-संदर्भ सही हैं
प्ररूप 9 (नियम 26(3)) · प्ररूप 12 (28(2)/38क(2)) · प्ररूप 13 (नियम 43) · प्ररूप 14-क (नियम 35-क) · प्ररूप 14-ख (नियम 44-क) · प्ररूप 14-ग (नियम 49-ग, 63-क(2)) — ये सभी हमारी सामग्री से मेल खाते हैं। ✅ अनुक्रमणिका के नियम-संदर्भ न बदलें।
मद 1-ज्ष — 🚨 RO_p035 — "रिटर्निंग ऑफिसर वाले भाग का तृतीय पैरा" है ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक पर छपा है (तीसरा बिन्दु):
"यदि कोई व्यक्ति … अभ्यर्थी के साथ उसकी पहचान करने के लिये उपस्थित हो तो उसका उल्लेख भी … रिटर्निंग आफिसर द्वारा भरे जाने वाले भाग के तृतीय पैरा में कर दिया जावे।"
🔴 प्ररूप-3 के RO-वाले दोनों भागों में तीसरा पैरा है ही नहीं
मैंने RO_p020 पर छपा प्ररूप-3 स्वयं पढ़ा:
| भाग | शीर्षक | पैरा |
|---|---|---|
| भाग-V | (रिटर्निंग अधिकारी का विनिश्चय) | 🔴 कोई क्रमांकित पैरा नहीं — केवल खाली पंक्तियाँ |
| भाग-VI | (रिटर्निंग अधिकारी द्वारा भरे जाने और प्रस्तुतकर्ता को दिये जाने के लिए) | 🔴 केवल दो — (1) क्रम संख्या · (2) समय/तारीख एवं किसने दिया |
🔴 दोनों में से किसी में तीसरा पैरा नहीं है — और पहचान कराने वाले के लिए कोई खाना भी नहीं है। अर्थात् डेक का यह निर्देश ज्यों का त्यों पालन किया ही नहीं जा सकता।**
⚠️ मैं यह नहीं बता रहा कि पहचानकर्ता का उल्लेख कहाँ हो
प्ररूप-3 के पूर्ववर्ती भाग (I–IV) मैंने इस चरण में नहीं पढ़े।
✅ सुरक्षित सुधार — "तृतीय पैरा" हटा दें: "…उसका उल्लेख रिटर्निंग अधिकारी द्वारा भरे जाने वाले भाग में कर दिया जावे।" और DEO से पूछें कि यह अंकन ठीक किस स्थान पर हो।
✅ स्लाइड के शेष बिन्दु सही हैं — भाग-VI का पैरा (1) क्रम संख्या देता है ✅, पैरा (2) समय, तारीख एवं अभ्यर्थी/प्रस्थापक दर्ज करता है ✅, और यही भाग प्रस्तुतकर्ता को दिया जाता है — अर्थात् रसीद वाला बिन्दु भी सही है ✅
मद 1-त्री — 🚨 RO_p003 — प्ररूप-2 में मतगणना का खाना है ही नहीं ❌ (नया — 22.08.2026, स्वयं सत्यापित)
डेक कहता है कि निर्वाचन की सूचना (प्ररूप-2) में पाँच बातें विनिर्दिष्ट होंगी: नामांकन प्रस्तुति · संवीक्षा · नाम-वापसी · मतदान · 🔴 मतगणना का स्थान, तारीख और समय
🔴 पर छपा हुआ प्ररूप-2 (नियम 11) मतदान पर ही समाप्त हो जाता है
मैंने RO_p006 पर छपा FORM 2 स्वयं पढ़ा — खंड (1) से (6):
| खंड | विषय |
|---|---|
| (1) | वार्ड एवं आरक्षण-स्थिति |
| (2) | नामांकन प्रस्तुति — स्थान, 10.30 AM–3.00 PM, अंतिम तारीख |
| (3) | नामांकन प्रपत्र वहीं से मिलेंगे |
| (4) | संवीक्षा — समय एवं तारीख |
| (5) | नाम-वापसी — 3 P.M. से पूर्व, तारीख |
| (6) | मतदान — तारीख एवं समय ← 🔴 प्ररूप यहीं समाप्त |
फिर केवल — Place · Date · Returning Officer।
🔴 मतगणना का कोई खंड प्ररूप-2 में है ही नहीं। अर्थात् RO जो सूचना जारी करेगा, उसमें मतगणना लिखने की जगह ही नहीं होगी।
✅ सुधार:
RO_p003का पाँचवाँ बिन्दु हटा दें, या उसे ऐसे लिखवाएँ — "मतगणना का स्थान/तारीख प्ररूप-2 में नहीं आता — वह आयोग के कार्यक्रम एवं अलग सूचना से आता है।"🔗 बालोतरा के लिए: मतगणना 14.09.2026 को है — वह तिथि प्रेस नोट 6722 से आती है, प्ररूप-2 से नहीं। (देखें BALOTRA_DISTRICT §5)
✅ साथ ही — इसी प्ररूप ने मद 1-प का प्रश्न सुलझा दिया
प्ररूप-2 के खंड (1) का स्तम्भ 3 कहता है:
"… [Women or person having special qualification specified under section 21A]"
➡ यही वह धारा है जो मैं मद 1-प में नहीं बता पाया था — अब वहाँ सुधार कर दिया गया है।
मद 2-ख — 🚨 RO_p078 — अध्यक्ष का प्रस्तावक "निर्वाचित सदस्य" होना चाहिए, केवल मतदाता नहीं ❌ (नया — 22.08.2026)
कब काटता है: 16–17.09.2026 (अध्यक्षीय नामांकन एवं संवीक्षा)।
स्लाइड पर छपा है (तीसरा बुलेट), "नाम निर्देशन पत्र को अस्वीकृत करने के आधार" शीर्षक के नीचे:
"अध्यक्ष के मामले में प्रस्तावक संबंधित नगर पालिका की मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत न हो।"
✅ सही परीक्षण — नियम 78(6)(iv):
"a candidate shall not be deemed to be duly nominated … unless the nomination paper is subscribed by an elected member as a proposer" — मैनुअल मुद्रित पृ. 112 तथा नियम 78(1): "The office of the Chairperson … shall be filled by a person chosen by elected members of the Municipality" — मुद्रित पृ. 111
🎯 दोष का स्वरूप — यह "झूठा कथन" नहीं, "अधूरा परीक्षण" है
| स्लाइड जो कहती है वह असत्य नहीं | निर्वाचित सदस्य आवश्यक रूप से मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत होता ही है |
| 🚨 दोष यह है कि परीक्षण अधूरा है | केवल "मतदाता सूची में है या नहीं" देखने वाला RO एक साधारण मतदाता द्वारा प्रस्तावित अध्यक्षीय नामांकन स्वीकार कर लेगा |
✅ सुधार — तीसरे बुलेट को प्रतिस्थापित करें:
"अध्यक्ष के मामले में प्रस्तावक संबंधित नगरपालिका का निर्वाचित सदस्य (वार्ड से निर्वाचित पार्षद) न हो।" [नियम 78(6)(iv)]
🚨 पूरे 109 पृष्ठ के RO डेक में शब्द "निर्वाचित" एक बार भी नहीं आता — अर्थात् यह अपेक्षा डेक में कहीं भी नहीं बताई गई है।
✔ इसी स्लाइड के अन्य दो बुलेट सही हैं — इन्हें न छुएँ
- "यदि अभ्यर्थी का नाम संबंधित नगर पालिका की मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत न हो" ✔
- "पार्षद के मामले में प्रस्तावक संबंधित वार्ड का मतदाता न हो" ✔ [नियम 13(1)(v)]
⚠️ उपाध्यक्ष पद के लिए अलग: वहाँ प्रस्तावक नगरपालिका का सदस्य होना चाहिए [नियम 81(2) सहपठित नियम 82(2)(क)] — "निर्वाचित सदस्य" की शर्त अध्यक्ष पद वाली है।
मद 2 — RO_p013 — निक्षेप राशि सभी निकायों के लिए ₹2000 दिखाई गई ❌
🚨 यह त्रुटि एजेंट-समीक्षा में पकड़ी ही नहीं गई थी; मैंने स्वयं नियम 22 खोलकर पाई।
समस्या: RO_p013 नियम 22(1)(क) का नगरपालिका बोर्ड वाला आँकड़ा लेकर उसे सभी निकायों पर
लागू दिखाती है।
✅ सही स्थिति — नियम 22, सदस्य पद:
| निकाय | सामान्य | अजा/अजजा/पिछड़ा वर्ग/महिला |
|---|---|---|
| नगरपालिका बोर्ड | ₹2,000 | ₹1,000 |
| नगर परिषद | ₹4,000 | ₹2,000 |
| नगर निगम | ₹6,000 | ₹3,000 |
यदि ऐसे ही पढ़ाया गया: नगर परिषद/निगम का अभ्यर्थी कम निक्षेप जमा करेगा → 🚨 संवीक्षा में उसका नामनिर्देशन अस्वीकार — और दोष अभ्यर्थी का नहीं, प्रशिक्षण का होगा।
✅
RO_p014सही है — उसे न छुएँ। भाग ग मद 11 देखें।⚠️ अध्यक्षीय पदों के निक्षेप बिल्कुल अलग हैं — महापौर ₹30,000/₹15,000 · सभापति ₹20,000/₹10,000 · अध्यक्ष ₹10,000/₹5,000 [नियम 78(6)(i)–(iii)]। दोनों तालिकाएँ एक ही स्लाइड पर कभी न रखें।
मद 2-क — 🚨 RO_p010 — "अभ्यर्थी को व्यक्तिशः प्रस्तुत करना आवश्यक है" ❌ (नया — 21.08.2026)
कब काटता है: 27.08 – 31.08.2026, नामांकन प्राप्ति काउंटर पर। मद 3.1 से भी गंभीर — क्योंकि यह अस्वीकृति नहीं, प्राप्ति से इनकार है।
स्लाइड पर छपा है (मैंने पृष्ठ-चित्र स्वयं पढ़ा), दूसरा बुलेट:
"नियम 12 के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी को अपना नाम निर्देशन पत्र (प्ररूप–3) स्वघोषणा पत्र के साथ विधिवत पूर्ति करते हुए और हस्ताक्षरित करते हुए या अंगूठा निशानी लगाते हुए रिटर्निंग अधिकारी को व्यक्तिशः प्रस्तुत करना आवश्यक है।"
✅ सही पाठ — नियम 12(6) (मैनुअल PDF पृ. 97 = मुद्रित पृ. 88):
"…must be delivered to the returning officer in person by the candidate ¹[or any of the proposers between 10.30 AM to 3.00 PM]…"
🎯 ठीक-ठीक क्या गलत है — और क्या सही है
| ✅ "व्यक्तिशः" शब्द सही है | नियम में "in person" वास्तव में है — डाक, कूरियर या संदेशवाहक से नहीं चलेगा |
| ❌ गलत यह है कि "या उसका कोई प्रस्थापक" छोड़ दिया गया | "व्यक्तिशः" प्रस्तुत करने के तरीके को बताता है, प्रस्तुत करने वाले की पहचान को नहीं |
🚨 अति-सुधार न करें। यह मत पढ़ाइए कि "कोई भी, कैसे भी दे सकता है"। सही पाठ है — "अभ्यर्थी स्वयं या उसका कोई प्रस्थापक, व्यक्तिशः आकर, प्रातः 10.30 से अपराह्न 3.00 बजे के बीच।"
पुष्टि — डेक की अपनी सामग्री से: इसी डेक के पृष्ठ 19–20 पर प्ररूप-3 का भाग-IV छपा है, जिसमें RO को भरना होता है — "…यह नामनिर्देशन मुझे … अभ्यर्थी/प्रस्थापक द्वारा दिया गया"। अर्थात् डेक का अपना प्ररूप ही मानता है कि प्रस्थापक भी दे सकता है — पर डेक की स्लाइड उसे मना करती है।
यदि ऐसे ही पढ़ाया गया: RO काउंटर पर प्रस्थापक को लौटा देगा। 🚨 प्राप्ति से इनकार पर कोई अस्वीकृति-आदेश नहीं बनता — इसलिए चुनौती देने को कुछ रहता ही नहीं। अभ्यर्थी के पास केवल परिणाम के बाद चुनाव-याचिका बचती है। खिड़की 31.08.2026 को बंद हो जाती है।
📌 मद 3.1 के साथ पढ़ें — वहाँ यही दोष अस्वीकृति के आधार के रूप में है (
RO_p076)। दोनों स्लाइड एक साथ ठीक कराएँ।
मद 3 — RO_p076 — अस्वीकृति का एक अवैध आधार ❌ (संवीक्षा की स्लाइड — RO सीधे इस पर कार्यवाही करेगा)
स्लाइड का शीर्षक है "नामनिर्देशन पत्र को निम्न कारणों से खारिज किया जायेगा" और उसमें पाँच आधार हैं। उनमें से एक विधि-विरुद्ध है — §3.1।
🔴 सुधार 21.08.2026: इस शीर्षक में पहले "दो अवैध आधार" लिखा था। §3.2 वाला दावा वापस ले लिया गया है — वह आधार वैध निकला। अब केवल §3.1 ही अवैध है।
3.1 ❌ "उम्मीदवार ने अपना नामनिर्देशन पत्र व्यक्तिगत आकर आपको नहीं दिया"
नियम 12(6): "Every nomination paper … must be delivered to the returning officer in person by the candidate or any of the proposers between 10.30 AM to 3.00 PM of the days fixed…"
➡ प्रस्तावकों में से कोई एक भी नामनिर्देशन पत्र दे सकता है। अभ्यर्थी का स्वयं आना अनिवार्य नहीं। (दलेतर अभ्यर्थी के पाँच प्रस्तावक होते हैं — नियम 12(2) का परन्तुक — उनमें से कोई एक।) 🚨 इस आधार पर अस्वीकार करना विधि-विरुद्ध होगा।
3.2 ✅ ~~"नामनिर्देशन पत्र के साथ उपाबन्ध-I प्रस्तुत नहीं किया है"~~ — यह आधार वैध है
🔴 दावा वापस लिया गया — 21.08.2026
इस पत्रक के पहले संस्करण में (आज ही जारी) मैंने इसे "अवैध आधार" बताया था और लिखा था कि आदेश 808 पहले मीमो अनिवार्य करता है। वह गलत था।
मैंने आदेश 808 का पृष्ठ-चित्र
_r/CP/CP_p176.png(संकलन का मुद्रित पृष्ठ 163) स्वयं खोलकर पढ़ा। आदेश की दो अलग-अलग उपधाराएँ हैं और मैंने उन्हें आपस में मिला दिया था —
उपधारा मूल पाठ अर्थ (ii) "किसी भी अभ्यर्थी द्वारा शपथपत्र का न दिया जाना इस आदेश का अतिक्रमण माना जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी का नामनिर्देशन पत्र रिटर्निंग अधिकारी द्वारा संवीक्षा करते समय नामंजूर करने योग्य होगा।" 🚨 शपथपत्र दिया ही नहीं → सीधा अस्वीकृति-आधार। कोई मीमो नहीं। (iii) "शपथ पत्र में कोई कॉलम खाली नहीं छोडा जाये। … शपथ पत्र के कॉलम खाली पाये जाने पर रिटर्निंग अधिकारी द्वारा मेमो (स्मरण पत्र) जारी किया जायेगा इसके बाद भी अभ्यर्थी द्वारा कमी पूर्ति नहीं की जाती है तो … Resurgence India … के अनुसार …" मीमो केवल खाली कॉलम पर है उपधारा (i) स्पष्ट करती है कि उपाबन्ध-I वही शपथपत्र है (₹50 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर)।
✅ सही स्थिति — दो अलग परिस्थितियाँ, दो अलग कार्यवाहियाँ
| परिस्थिति | RO क्या करेगा | स्रोत |
|---|---|---|
| उपाबन्ध-I (शपथपत्र) प्रस्तुत ही नहीं किया | 🚨 सीधे नामंजूर करने योग्य — मीमो की आवश्यकता नहीं | आदेश 808, उपधारा (ii) |
| शपथपत्र प्रस्तुत है, पर कोई कॉलम खाली | पहले मीमो (स्मरण पत्र); उसके बाद भी कमी पूरी न हो तो नामंजूर | आदेश 808, उपधारा (iii) · Resurgence India, 13.09.2013 |
| किसी मद की सूचना न हो | अभ्यर्थी "शून्य" या "लागू नहीं होता" लिखे — खाली न छोड़े | आदेश 808, उपधारा (iii) |
➡ इसलिए RO_p076 का यह आधार आयोग के अपने आदेश के अनुरूप है। इसे न बदलें।
⚠️ एक बात अभी असत्यापित है: पूर्व संस्करण में मैंने आदेश 4831 दिनांक 15.07.2026 का हवाला देकर "घोषणा न देने पर परिशिष्ट-III का मीमो" लिखा था। वह आदेश मैंने स्वयं नहीं खोला है। यदि वह किसी अन्य घोषणा के बारे में है तो उसका अपना नियम होगा — किन्तु उसे उपाबन्ध-I वाले शपथपत्र पर लागू न करें। आवश्यकता हो तो DEO से पुष्टि लें।
✔ स्लाइड के शेष तीन आधार सही हैं — इन्हें रखें
- "उम्मीदवार धारा-24 में उल्लेखित किसी अयोग्यता को धारण करता है" ⚠️ पर ध्यान रहे — धारा 24(xvii) (दो से अधिक संतान) अब विलोपित है (अधिनियम 7/2026)।
- "उम्मीदवार वह व्यक्ति नहीं है जिसका नाम व मतदाता सूची की क्रम संख्या नामनिर्देशन-पत्र में लिखी है"
- "उम्मीदवार उस नगर पालिका क्षेत्र का मतदाता नहीं है"
मद 4 — RO_p083 — "नाम वापसी का नोटिस दूसरे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत करने पर अमान्य" ❌
✅ सही स्थिति — नियम 16 तीन रास्ते देता है:
| # | कौन दे सकता है |
|---|---|
| 1 | अभ्यर्थी स्वयं |
| 2 | उसका कोई प्रस्तावक |
| 3 | जेल/अभिरक्षा में हो तो — उसके द्वारा लिखित रूप से प्राधिकृत व्यक्ति |
यदि ऐसे ही पढ़ाया गया: विधिमान्य नाम-वापसी अस्वीकार → हटा हुआ अभ्यर्थी मतपत्र/EVM पर रह जाएगा → मत विभाजित, और परिणाम पर चुनाव-याचिका का आधार।
⚠️ उपाध्यक्ष पद अलग है। नियम 84(1) कहता है नोटिस "delivered to the returning officer personally" — वहाँ प्रस्तावक वाला रास्ता नहीं है। सदस्य पद (नियम 16) और उपाध्यक्ष पद (नियम 84) को न मिलाएँ।
✅ स्लाइड के शेष बिन्दु सही हैं।
मद 5 — RO_p101 एवं RO_p064 — अपास्त धारा 8(4) को जीवित विधि के रूप में ❌
स्लाइड लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(4) को जीवित बताती है — जिसके अनुसार वर्तमान सांसद/विधायक को दोषसिद्धि पर तीन मास की छूट और अपील लंबित रहने तक निरर्हता स्थगित रहती है।
✅ सही स्थिति: धारा 8(4) उच्चतम न्यायालय द्वारा अपास्त (struck down) की जा चुकी है — Lily Thomas बनाम भारत संघ, निर्णय 10.07.2013। निरर्हता दोषसिद्धि की तारीख से ही प्रभावी है।
यदि ऐसे ही पढ़ाया गया: दोषसिद्ध वर्तमान जनप्रतिनिधि को पात्र मान लिया जाएगा, जबकि वह दोषसिद्धि के दिन से ही निरर्हित है।
⚖️ यह नगरपालिका चुनाव पर किस कड़ी से लागू होता है (21.08.2026 को मूल पाठ से सत्यापित)
प्रशिक्षण में यह प्रश्न अवश्य उठेगा — "लोप्रअ तो संसद/विधानसभा का कानून है, नगरपालिका पर कैसे?" उत्तर धारा 24(x) है, धारा 28 नहीं।
| ❌ धारा 28 नहीं | धारा 28 "निर्वाचन अपराध" केवल लोप्रअ की धारा 125 से 136 आयात करती है (मैनुअल PDF पृ. 70)। धारा 8 उसमें नहीं है। |
| ✅ धारा 24(x) से | "if he is so disqualified by or under any law for the time being in force for the purposes of elections to the Rajasthan Legislative Assembly" (मैनुअल PDF पृ. 68) |
➡ विधान सभा निर्वाचन के लिए दोषसिद्धि पर निरर्हता की विधि लोप्रअ की धारा 8 है — इसलिए वह धारा 24(x) के रास्ते नगरपालिका अभ्यर्थी पर लागू होती है।
🚨 "तत्समय प्रवृत्त" (for the time being in force) शब्द निर्णायक हैं। धारा 24(x) वही विधि आयात करती है जो आज प्रवृत्त है। धारा 8(4) आज प्रवृत्त नहीं है — अपास्त हो चुकी है। इसलिए 8(4) पढ़ाना दोहरी भूल है: मृत विधि, और धारा 24(x) उसे आयात भी नहीं करती।
मद 6 — PP2_p108 एवं FORMS_p034 — निरसित भा.दं.सं. 1860 🕐
स्लाइड (थानाधिकारी को शिकायत का प्रारूप):
"आप से निवेदन है कि आप भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 171—च के अधीन अपेक्षित आवश्यक कार्यवाही करे।"
✅ सही स्थिति: - भा.दं.सं. 1860 — 01.07.2024 से निरसित; स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 - मार्गदर्शिका का परिशिष्ट-1 स्वयं BNS 2023 की धारा 172(घ) एवं 174(च) उद्धृत करता है - 🚨 आयोग का आदेश 5310 दिनांक 30.07.2026 — "…उसके विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के अन्तर्गत कार्यवाही की जावे"
✅ सुधार — और ठीक-ठीक कौनसी धारा, यह अब सत्यापित है (21.08.2026)
पहले यहाँ केवल "BNS 2023 की धारा 172 / 174" लिखा था — यह सही तो था, पर यह नहीं बताता था कि कौनसी धारा क्या करती है। BNS के अध्याय IX (निर्वाचन संबंधी अपराध) का पाठ देखकर मानचित्रण सत्यापित किया — शीर्षक अक्षरशः वही हैं जो IPC की 171क–171झ के थे, उसी क्रम में:
| IPC 1860 | विषय | BNS 2023 |
|---|---|---|
| 171क | अभ्यर्थी / निर्वाचन-अधिकार की परिभाषा | 169 |
| 171ख | रिश्वत | 170 |
| 171ग | निर्वाचन में असम्यक् असर | 171 |
| 171घ | निर्वाचन में प्रतिरूपण (अपराध की परिभाषा) | 🚨 172 |
| 171ङ | रिश्वत के लिए दण्ड | 173 |
| 171च | असम्यक् असर या प्रतिरूपण के लिए दण्ड | 🚨 174 |
| 171छ | निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन | 175 |
| 171ज | अवैध संदाय | 176 |
| 171झ | निर्वाचन लेखा रखने में असफलता | 177 |
➡ स्लाइड जिस धारा 171-च को उद्धृत करती है, उसका सीधा उत्तराधिकारी BNS की धारा 174 है — BNS 174 का शीर्षक IPC 171-च के शीर्षक से अक्षरशः समान है: "Punishment for undue influence or personation at an election."
✅ शिकायत में क्या लिखें:
प्रतिरूपण का अपराध — भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 172, सहपठित धारा 174 (दण्ड)।
💡 मार्गदर्शिका की "172(घ)" वाली लिखावट का अर्थ अब समझ आता है। परिशिष्ट-1 में "धारा 172(घ) एवं 174(च)" छपा है। यह उप-खण्ड (घ)/(च) नहीं है — यह "BNS 172 = पूर्व IPC 171-घ" और "BNS 174 = पूर्व IPC 171-च" बताने का तरीका है। देवनागरी में घ = D और च = F, और मानचित्रण ठीक यही है। (यह मेरी व्याख्या है — मानचित्रण सत्यापित है, मार्गदर्शिका की मंशा अनुमानित।)
⚠️ आदेश 5310 केवल धारा 172 कहता है — वह पर्याप्त है, क्योंकि 172 अपराध को परिभाषित करती है। दण्ड की धारा 174 भी साथ लिखने से शिकायत अधिक पूर्ण होगी।
⚠️ ईमानदारी से दर्ज: यही दोष आयोग की अपनी मार्गदर्शिका के परिशिष्ट-9 में भी है। DLMT की स्लाइड ने आयोग की ही त्रुटि को आगे बढ़ाया है — दोष DLMT का अकेला नहीं है। प्रशिक्षण में BNS का उल्लेख करें, पर परिशिष्ट-9 के छपे प्रारूप पर भी ध्यान दिलाएँ।
भाग ख — ❌ आयु की गणना — असली त्रुटि, जो पहले छूट गई थी
मद 7 — RO_p059 एवं RO_p060 — आयु किस तारीख को गिनी जाएगी ❌
🔴 पूर्व संस्करण वापस — 21.08.2026
इस पत्रक के पहले संस्करण में मद 7 यह कहता था कि "महत्त्वपूर्ण आदेश" स्लाइड धारा 13(3) का गलत उद्धरण देती है, और "बात सही है, केवल विधिक हुक बदलें"।
मैंने स्वयं जाँचा — वह स्लाइड DLMT सामग्री में मिलती ही नहीं।
मैंने क्या किया परिणाम RO डेक के पृष्ठ 5 व 6 चित्र रूप में खोले पृ. 5 = FORM 1 (See Rule 10) · पृ. 6 = FORM 2 (See Rule 11) — ये प्ररूप हैं, "महत्त्वपूर्ण आदेश" स्लाइड नहीं पाँचों DLMT PDF के टेक्स्ट-लेयर में 10157,13(3),21(f)खोजा🚨 कहीं एक भी नहीं मिला ➡ पूर्व मद 7 एवं मद 8 का आधार सत्यापित नहीं हो सका। उन पर कार्यवाही न करें। SEC पत्र F.4(1)(1)नपा/रानिआ/2020/पार्ट-3/10157 दिनांक 22.11.2020 भी इस संग्रह में कहीं नहीं है — उसे असत्यापित मानें और कक्षा में उद्धृत न करें।
🚨 और इस बीच असली त्रुटि खुली रह गई थी
RO_p059 पर छपा है (मैंने चित्र स्वयं पढ़ा):
"उम्रः– जो मतदाता नाम निर्देशन पत्र की अंतिम तिथि को 21 साल की उम्र का हो गया है वह नगर पालिका सदस्य का चुनाव लड़ सकता है।"
RO_p060 वही बात दोहराता है:
"…उसके स्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार उम्र नामनिर्देशन भरने की तारीख को 20 वर्ष 10 महिने होती है तो वह … योग्य नहीं माना जायेगा।"
✅ विधि क्या कहती है — नियम 13(1), मैनुअल का मुद्रित पृष्ठ 88 (PDF पृ. 97), मैंने चित्र पर पढ़ा:
"On the date and time fixed for scrutiny of nomination papers under rule 10, the Returning Officer shall examine the nomination papers … and declare invalid any nomination on any of the following grounds:- … (iii) that the candidate has not attained the minimum age required for being elected as a member;"
➡ परीक्षण संवीक्षा के दिन लगाया जाता है — और प्रश्न यह है कि उस दिन अभ्यर्थी ने न्यूनतम आयु प्राप्त कर ली है या नहीं।
🚨 यह कहाँ काटता है — ठीक एक दिन की खिड़की
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 31.08.2026 | नामांकन की अंतिम तिथि |
| 01.09.2026 | संवीक्षा |
जिस अभ्यर्थी का 21वाँ जन्मदिन 01.09.2026 को पड़ता है — - डेक के अनुसार → अपात्र (क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि को 21 का नहीं था) - नियम 13(1)(iii) के अनुसार → संवीक्षा के दिन उसने आयु प्राप्त कर ली है, इसलिए अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं — अस्वीकृति विधि-विरुद्ध होगी
⚖️ उपाय केवल चुनाव याचिका है — मतदान से पहले कोई सुधार संभव नहीं। इसीलिए यह गंभीर है।
✔ किन्तु अति-सुधार न करें — डेक की तीन बातें सही हैं
RO_p060 का उदाहरण |
20 वर्ष 10 महिने — यह दोनों तिथियों पर 21 से कम है, अतः उदाहरण सही है |
RO_p060 का तीसरा बॉक्स |
"…इस उम्र को नामनिर्देशन पत्र की जांच के समय आक्षेपित किया जा सकता है" — यह सही है और नियम 13(1) से मेल खाता है |
RO_p059 की शौचालय-अनिवार्यता |
धारा 21(g) — "कार्यशील स्वच्छ शौचालय" — जीवित अर्हता, बिल्कुल सही |
➡ केवल गणना की तिथि बदलनी है — "नाम निर्देशन पत्र की अंतिम तिथि को" के स्थान पर "संवीक्षा की तिथि को"। शेष स्लाइड यथावत् रखें।
मद 8 — ~~"नियम 1994 की धारा 21(f)"~~ — आधार सत्यापित नहीं ⚠️
पूर्व संस्करण में यह मद कहता था कि एक स्लाइड "राजस्थान निर्वाचन नियम 1994 की धारा 21(f)" लिखती है। वह स्लाइड भी मुझे DLMT सामग्री में नहीं मिली (ऊपर मद 7 की जाँच देखें)। 🚨 इस मद पर कार्यवाही न करें।
जो बात स्वतंत्र रूप से सही है और पढ़ाई जा सकती है (मैनुअल से सत्यापित) —
| धारा | स्थिति |
|---|---|
| 21(f) (शैक्षणिक अर्हता) | विलोपित — मैनुअल में 2[(f) *** के रूप में छपी |
| 21(e) | आयु 21 वर्ष — जीवित |
| 21(g) | कार्यशील स्वच्छ शौचालय — जीवित, और RO_p059 पर मौजूद भी है |
⚠️ यदि किसी जिले के पास "महत्त्वपूर्ण आदेश" वाली ऐसी कोई स्लाइड वास्तव में हो, तो वह इस संग्रह की DLMT सामग्री का हिस्सा नहीं है। उसे भेजें — तभी उस पर कुछ कहा जा सकेगा।
भाग ग — 🚨 इन्हें न बदलें — ये त्रुटियाँ नहीं हैं
यह भाग जानबूझकर भाग क जितना ही महत्वपूर्ण माना जाए। पिछली समीक्षा में इनमें से दो को गलती से "त्रुटि" कह दिया गया था। वह स्वयं एक त्रुटि थी।
मद 9 — RO_p034 — संतान संबंधी खाना 🟡 यह अस्वीकृति का आधार नहीं है
एजेंट-समीक्षा ने इसे "संतान संबंधी घोषणा" कहकर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया था। यह वस्तुतः एक सांख्यिकीय प्ररूप का खाना है — धारा 24 की घोषणा नहीं।
- धारा 24(xvii) (दो से अधिक संतान) अधिनियम 7/2026 द्वारा विलोपित हो चुकी है
- ➡ इस खाने के भरे/खाली होने से नामनिर्देशन अस्वीकार नहीं होता
🚨 RO को यह न सिखाएँ कि इस खाने के आधार पर नामनिर्देशन अस्वीकार हो सकता है।
मद 10 — पुराने डेक की पंक्ति "पीठासीन अधिकारी BALLOT बटन दबाएगा" 🟡 विधि-विरुद्ध नहीं
नियम 37-क(2) का मूल पाठ:
"मतदाता … तुरन्त पीठासीन अधिकारी के पास या मतदान मशीन की नियंत्रण यूनिट के भार साधक मतदान अधिकारी के पास जायेगा जो, नियंत्रण यूनिट पर समुचित बटन दबाकर मतदान यूनिट को सक्रिय करेगा।"
| कौन BALLOT दबाता है | वर्ग |
|---|---|
| तृतीय मतदान अधिकारी (PO-3) | ✅ यही पढ़ाया जाए — मार्गदर्शिका [अ.9(6)1], [अ.14(3)10]; परिशिष्ट-5 का ले-आउट PO-3 को CU के साथ बैठाता है; आदेश 1408 दिनांक 04.02.2026 |
| पीठासीन अधिकारी (PRO) | 🟡 विधिसम्मत — नियम 37-क(2) दोनों को अनुमति देता है। मार्गदर्शिका [अ.9(3)1] की मतदाता-पर्ची भी "पीठासीन अधिकारी या यथास्थिति तृतीय मतदान अधिकारी" कहती है |
| 🔴 मतदाता | ❌ यही असली त्रुटि है — PP2_p018, भाग क मद 1 |
➡ निष्कर्ष: मार्गदर्शिका PRO वाली बात को "सुधारती" नहीं — वह कर्तव्य को PO-3 को आवंटित करती है। पुराने डेक अद्यतन नहीं हैं; विधि की दृष्टि से गलत नहीं। कक्षा में कहें: "अब यह काम तृतीय मतदान अधिकारी करेगा" — न कि "पुरानी बात गलत थी"।
मद 11 — RO_p014 🟡 यह स्लाइड सही है — इसे न छुएँ
एजेंट-समीक्षा ने निक्षेप-राशि के विरोधाभास के लिए RO_p014 पर उंगली रखी थी।
मैंने नियम 22 खोलकर दोनों स्लाइडें मिलाईं — RO_p014 सही है; त्रुटि पड़ोस की RO_p013 में है।
👉 भाग क मद 2।
मद 12 — मैनुअल का नियम 86(8) 🟡 मुद्रण-दोष है, विधि का दोष नहीं
मैनुअल के मुद्रित पृष्ठ 115 पर नियम 86(8) इस प्रकार छपा है — "Every person wishing to record his vote shall do in person can be introduced therein but cannot be withdrawn." — अर्थात् उप-नियम (7) की पूँछ (8) में दोहरा दी गई है। आशयित पाठ स्पष्टतः "…shall do so in person." है।
यह मैनुअल की छपाई की त्रुटि है। प्रशिक्षण में उप-नियम (8) को "प्रत्येक व्यक्ति अपना मत व्यक्तिशः देगा" के रूप में पढ़ाएँ, और इसे "विधि में दोष" के रूप में प्रस्तुत न करें।
भाग घ — 🚨 एक नज़र में (कक्षा से पहले पढ़ें)
| # | स्लाइड | वर्ग | एक पंक्ति में |
|---|---|---|---|
| 1 | PP2_p018 |
❌ | "मतदाता" नहीं — तृतीय मतदान अधिकारी BALLOT दबाएगा |
| 1-क | PP1_p066 |
❌ | 🚨 बैलट दबाने से पहले अमिट स्याही की जाँच का चरण गायब [आदेश 1408 पैरा 2] |
| 1-ख | PP2_p010 |
❌ | 🚨 स्लाईड स्विच: "ठीक 16" पर कोई नियम नहीं · "नोटा सहित" गायब · MPSV(15) व M3A(16) में अंतर नहीं |
| 1-ग | PP1_p031 |
⚠️ | "3 बजे बाद रिलीफ अभिकर्ता नहीं" — आधार नहीं मिला; PP1_p032 इससे टकराती है। रोकें नहीं, स्पष्टीकरण लें |
| 2-ख | RO_p078 |
❌ | 🚨 अध्यक्ष का प्रस्तावक "निर्वाचित सदस्य" हो — केवल मतदाता होना पर्याप्त नहीं [नियम 78(6)(iv)] |
| 2 | RO_p013 |
❌ | निक्षेप बोर्ड 2000 · परिषद 4000 · निगम 6000 (आधा आरक्षित वर्ग के लिए) |
| 2-क | RO_p010 |
❌ | 🚨 प्रस्थापक भी नामांकन दे सकता है — "व्यक्तिशः" तरीका बताता है, व्यक्ति नहीं [नियम 12(6)] |
| 3 | RO_p076 |
❌ | केवल "व्यक्तिगत आकर नहीं दिया" वाला आधार अवैध — प्रस्तावक भी पत्र दे सकता है |
| 3-क | RO_p076 |
🟡 | 🔴 दावा वापस: उपाबन्ध-I वाला आधार वैध है — आदेश 808(ii) · न बदलें |
| 4 | RO_p083 |
❌ | नाम वापसी — स्वयं / प्रस्तावक / प्राधिकृत व्यक्ति, तीन रास्ते |
| 5 | RO_p101, RO_p064 |
❌ | RPA धारा 8(4) अपास्त — निरर्हता दोषसिद्धि के दिन से |
| 6 | PP2_p108, FORMS_p034 |
🕐 | IPC 1860 नहीं — BNS 2023 की धारा 172/174 |
| 7 | RO_p059, RO_p060 |
❌ | 🚨 आयु "संवीक्षा की तिथि को" गिनी जाएगी — "नामांकन की अंतिम तिथि को" नहीं [नियम 13(1)(iii)] |
| 8 | ~~महत्त्वपूर्ण आदेश मद 3~~ | ⚠️ | 🔴 आधार सत्यापित नहीं — वह स्लाइड सामग्री में मिली ही नहीं। कार्यवाही न करें |
| 9 | RO_p034 |
🟡 | न बदलें — सांख्यिकीय खाना, अस्वीकृति का आधार नहीं |
| 10 | पुराने डेक — "PRO BALLOT दबाएगा" | 🟡 | न बदलें — विधिसम्मत, बस अद्यतन नहीं |
| 11 | RO_p014 |
🟡 | न बदलें — यह स्लाइड सही है |
| 12 | मैनुअल नियम 86(8) | 🟡 | न बदलें — मुद्रण-दोष, विधि का दोष नहीं |
भाग ङ — ⚠️ इस पत्रक की सीमाएँ (ईमानदारी से दर्ज)
- यह पत्रक DLMT की सम्पूर्ण सामग्री की समीक्षा नहीं है। इसमें केवल वे मद हैं जिन्हें मैंने स्वयं स्लाइड-चित्र और मूल विधि-पाठ, दोनों देखकर सत्यापित किया — DLMT_VERIFIED।
- एजेंट-समीक्षा के 27 अन्य निष्कर्ष (DLMT_REVIEW_FULL, DLMT_REVIEW_PARTIAL) अभी मसौदा हैं। उनमें से 14 तो सत्यापन-चरण की सीमा के कारण जाँचे ही नहीं गए। 🚨 उन्हें स्लाइड-चित्र देखे बिना प्रशिक्षण में न ले जाएँ।
- जाँचे गए 7 एजेंट-दावों में से 1 खण्डित निकला (
RO_p014) और 2 में एजेंट ने बात बढ़ा-चढ़ाकर कही। 👉 अनुपात याद रखें: लगभग हर चौथे एजेंट-दावे में कुछ न कुछ ठीक करना पड़ा। - मैंने दो त्रुटियाँ स्वयं पकड़ीं जो एजेंट से छूट गई थीं —
RO_p013की निक्षेप-राशि, औरRO_p076का "मीमो पहले" वाला बिन्दु। अर्थात् यह सूची पूर्ण नहीं है। - 🔴 इस पत्रक में ही एक झूठी त्रुटि निकली — उसी दिन। पहला संस्करण
RO_p076के उपाबन्ध-I वाले आधार को "अवैध" बताता था। वह गलत था — देखें §3.2 का वापसी-बॉक्स। यह ठीक वही विफलता थी जिससे बचने के लिए यह पत्रक बना है, और यह मेरी अपनी स्व-अंकेक्षण प्रक्रिया ने पकड़ी। ➡ निष्कर्ष: चार-वर्ग वाली प्रणाली आवश्यक है, पर पर्याप्त नहीं। मूल आदेश खोलकर पढ़ना ही अंतिम जाँच है। - एक और झूठी त्रुटि भाग ग मद 10 में दर्ज है (BALLOT बटन वाली)।
मद 1-श्र — 🚨 "नियम 45-क" — यह नियम अब है ही नहीं ⚠️ (नया — 23.08.2026, स्वयं सत्यापित)
वर्गीकरण: यह "त्रुटि" नहीं है — यह "मृत संदर्भ" (dead cross-reference) है। 🔴 डेक में कुछ बदलना नहीं है। यह मद इसलिए है कि प्रश्न पूछे जाने पर आप उत्तर दे सकें।
प्रश्न जो पूछा जाएगा
मार्गदर्शिका (अ.1 का बॉक्स) और प्ररूप 14-ग की मद 3 दोनों कहते हैं — "नियम 45-क के अधीन मतदान करने के लिए अनुज्ञात न किये गये मतदाताओं की कुल संख्या"।
🔴 तथ्य — मैंने स्वयं पढ़ा
ULB Manual, अध्याय III-क में नियम 44-क और 46-क के बीच छपा है:
1[XXX 45-A deleted]
| मूल नियम 45 | "Spoilt and returned ballot papers" — खराब मतपत्र लौटाकर दूसरा लेना |
| 45-क | उसी का ईवीएम संस्करण — विलोपित |
| क्यों | 🚨 ईवीएम में "खराब मतपत्र" होता ही नहीं |
✅ उत्तर जो देना है
"नियम 45-क विलोपित हो चुका है। प्रपत्र पर छपा नियम-संदर्भ एक लेबल है, निर्देश नहीं। मद 3 में वही संख्या जाएगी जो मार्गदर्शिका ने बताई — जिन्होंने रजिस्टर में हस्ताक्षर किए और फिर मत नहीं डाला (No Vote)। गणित वही रहेगा — मद 5 = मद 2 − मद 3 − मद 4।"
🚨 मद 3 और मद 4 को कभी न मिलाएँ:
| मद | कौन | आधार |
|---|---|---|
| 3 | "No Vote" — हस्ताक्षर के बाद मत न डाला | मार्गदर्शिका अ.1 का बॉक्स (लेबल "45-क" — विलोपित) |
| 4 | मत नहीं दिया गया — अमिट स्याही से इनकार (35-क) अथवा चेतावनी के बाद प्रक्रिया न मानी (37-क) | ✅ प्ररूप कहता है "नियम 35-क अथवा 37-क" — दोनों जीवित; "पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर से रिमार्क" नियम 37-क(7) में ही है |
⚠️ सावधानी — यही इस पत्रक का मूल नियम है। यह मद आयोग पर दोष नहीं लगाती। मार्गदर्शिका का निर्देश पूर्णतः प्रभावी है; केवल नियम-संख्या पुरानी रह गई है। प्रपत्र भरने में कोई परिवर्तन न करें।
ℹ️ यही मृत संदर्भ नियम 55(5) की सूची में भी है — वहाँ भी "45 क" छपा है।
पूरा विवरण → EVM/hi 08 §1.1
मद 1-ह्म — 🔴🔴 ₹2 चुनौती राशि — मार्गदर्शिका नियम 43(5) से टकराती है ⚠️ (नया — 23.08.2026, स्वयं सत्यापित)
वर्गीकरण: 🔴 यह सबसे गंभीर वर्ग का है — नियम के विपरीत। ⚠️ किन्तु यह हमारे डेक की त्रुटि नहीं है — डेक मार्गदर्शिका को ज्यों-का-त्यों देता है। टकराव मार्गदर्शिका और नियम के बीच है।
दोनों पाठ — मैंने स्वयं पढ़े
| स्रोत | जब्त कब |
|---|---|
मार्गदर्शिका अ.6(2) पैरा 3 (मुद्. पृ. 44 — MG_p048.png) |
"यदि चुनौती सही पाई गई है तो चुनौति राशि को जब्त कर लिया जावें" |
| 🔴 नियम 43(5) (ULB Manual) | "if … the challenge is FRIVOLOUS or has not been made in GOOD FAITH … forfeited to Government and in ANY OTHER CASE, he shall return the deposit" |
🔴 सबसे आम मामले में दोनों उलटे चलते हैं
चुनौती सिद्ध हो गई (व्यक्ति सचमुच प्रतिरूपक निकला): मार्गदर्शिका → ❌ जब्त · नियम 43(5) → ✅ वापस
🚨 अर्थात् मार्गदर्शिका के अनुसार चलने पर उस चुनौतीकर्ता की राशि जब्त होगी जो सही निकला — निक्षेप का प्रयोजन तुच्छ चुनौतियों को रोकना है, सही चुनौती को दंड देना नहीं।
✅ नियम क्यों प्रभावी है
- नियम 43 ईवीएम मतदान पर लागू है — नियम 77-क की अपवाद-सूची में 43 है ही नहीं
- मार्गदर्शिका मार्गदर्शन है, विधि नहीं
- 🔴 आयोग का अपना प्रपत्र भी नियम के साथ है — परिशिष्ट-13 का प्रतिपर्ण स्वयं "नियम 43(5) के अन्तर्गत" लिखता है
🚨 करना क्या है
- 🔴 प्रशिक्षण से पहले DEO से लिखित स्पष्टीकरण — यह सबसे पहला काम है। कक्षा में अकेले मार्गदर्शिका का खण्डन न करें।
- मेज पर — नियम 43(5) की कसौटी: "तुच्छ या सद्भावना में नहीं?" → जब्त; अन्यथा वापस।
- प्ररूप-13 के स्तम्भ 8 ("पीठासीन अधिकारी का आदेश") में कारण लिखें — जब्त करने पर नियम की भाषा ही लिखें।
- ✅ राहत: ₹2 का मामला है, और ईमानदार पर विफल चुनौती में दोनों रास्ते एक ही जगह पहुँचते हैं — वापसी।
पूरा विवरण → EVM/hi 07 §2.3-क
दिनांक: 21.08.2026 · अंतिम अद्यतन 23.08.2026 (मद 1-घ … 1-श्र बाद में जोड़ी गईं) संबंधित: DLMT_VERIFIED (मेरे स्वयं के सत्यापन — यही प्रमाण हैं) · DLMT_REVIEW · DLMT_REVIEW_FULL (मसौदा) · STATUS · ⛔ नवीनतम आदेश — जो मार्गदर्शिका और संकलन दोनों पर भारी पड़ते हैं · English parallel · आधिकारिक स्रोतों में पुराने एवं त्रुटिपूर्ण संदर्भ — एक ही रजिस्टर (आधिकारिक स्रोतों के पुराने संदर्भ — एक रजिस्टर)