लाभ का पद: रिटर्निंग अधिकारी के लिए
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संविदा, मानदेय या किसी सरकारी योजना में काम करने वाला कोई व्यक्ति पंच-सरपंच का नामांकन भरे, तो संवीक्षा में रिटर्निंग अधिकारी को तय करना होता है कि उसका पद 'लाभ का पद' है या नहीं। इसके लिए सबसे पहले आयोग का पत्र 10297 देखिए, जो 09.10.2026 को जारी हुआ। 1 फिर अधिनियम की धारा 19, और वे फ़ैसले जिनके परीक्षण यह पत्र बताता है। सर्वोच्च न्यायालय के चार फ़ैसलों की प्रति, न्यायालय की अपनी वेबसाइट वाली, इसी पेज से उसी पन्ने पर खुलती है। 2345 यह पेज रिटर्निंग अधिकारियों, उम्मीदवारों और प्रशिक्षकों के लिए है।
आयोग का पत्र 10297
यह राज्य निर्वाचन आयोग का पत्र है: क्रमांक एफ.7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/10297, दिनांक 09.10.2026। नागौर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर)(पंचायत) ने पत्रांक 1749, दिनांक 06.10.2026 से इस बारे में पूछा था; यह पत्र उसी का जवाब है। 1 इसकी प्रति सब ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को, और उनके ज़रिये सब रिटर्निंग अधिकारियों को भी भेजी गई है। 6
पत्र कहता है कि 'लाभ का पद' की परिभाषा संविधान, अधिनियम, नियम या परिपत्रों में साफ़ नहीं लिखी है। फिर भी, यह मार्गदर्शन सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के फ़ैसलों के आधार पर दिया गया है। 1
पत्र में पहले सात पदों के बारे में मार्गदर्शन है। उसके बाद दो फ़ैसलों का सार है: प्रद्युत बोरदोलोई वाला, पाँच परीक्षणों के साथ, और जया बच्चन वाला। आख़िर में लिखा है कि संशय हो, तो क्या देखें। 7
सात पद: पत्र क्या कहता है
| पद | पत्र क्या कहता है |
|---|---|
| संविदा कार्मिक (राजस्थान संविदा नियम, 2022 के तहत नियुक्त) | प्रद्युत बोरदोलोई और जया बच्चन वाले फ़ैसलों के सिद्धान्तों के हिसाब से इसे लाभ का पद माना जाए। रिटर्निंग अधिकारी यह देखेंगे कि इनकी नियुक्ति राज्य सरकार या विभाग करता है, और सेवा शर्तें, नियंत्रण और सेवा ख़त्म करने की शक्ति सरकार के पास है। संविदा होते हुए भी इन पर सरकारी सेवा जैसा ही नियंत्रण माना जाता है। |
| आशा सहयोगिनी | फ़ैसला नीचे लिखे परीक्षणों पर होगा। आख़िरी फ़ैसले से पहले रिटर्निंग अधिकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का परिपत्र, क्रमांक 186, दिनांक 13.07.2022 देखेंगे, और नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचेंगे। |
| साथिन | महिला अधिकारिता विभाग ने इस बारे में कोई निर्देश जारी नहीं किया है। फ़ैसला आशा सहयोगिनी की तरह ही होगा। |
| आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायिका | लाभ का पद नहीं है (बॉम्बे उच्च न्यायालय, रिट याचिका 8022/2021)। पर महिला एवं बाल विकास विभाग के परिपत्र, क्रमांक 4244, दिनांक 12.01.2023 के बिन्दु 12 के हिसाब से, चुनाव लड़ने के लिए नामांकन की तारीख से परिणाम आने तक अवैतनिक अवकाश लेना होगा। चुनाव जीत जाएँ, तो पद की शपथ लेने से पहले आंगनवाड़ी वाले पद से त्याग पत्र देना होगा। |
| विद्या संबल योजना में काम करने वाले | इन पर सीधे लागू होने वाला सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय का कोई फ़ैसला नहीं है, इसलिए फ़ैसला नीचे लिखे परीक्षणों पर होगा। आम तौर पर इनका वेतन या मानदेय राज्य सरकार देती है; फिर भी रिटर्निंग अधिकारी नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचेंगे। किसी भी तरह का संशय हो, तो चुनाव में भाग लेने से पहले त्याग पत्र ले लेना उचित होगा। |
| राशन डीलर (उचित मूल्य दुकानदार) | पत्र के हिसाब से इसे लाभ का पद मानना उचित नहीं है। पत्र लिखता है कि राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) के मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (2014) वाले फ़ैसले से यह तय होता है कि नियमों के दायरे में रहते हुए राशन डीलर राजस्थान में पंचायती राज का चुनाव लड़ सकता है। |
| प्रशासक | आयोग पहले ही जाँच करके इस बारे में दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। रिटर्निंग अधिकारी उसी आदेश के हिसाब से अपने स्तर पर फ़ैसला करेंगे। |
स्रोत: आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 1–2
प्रशासक और प्रशासकीय समिति
पत्र 10297 का सातवाँ बिन्दु प्रशासक के पद पर है, पत्र के शब्दों में: "प्रशासक का पदः– पूर्व में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा परीक्षण करते हुए दिशा–निर्देशा जारी किए गए है। उक्त आदेश के अनुसार ही रिटर्निंग अधिकारियों को कार्यवाही करते हुए स्वयं के स्तर से निर्णय लिया जाना है।" 9
इसके बाद, 14.10.2026 को, आयोग ने पत्र 10520 पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त को भेजा। उसमें ग्राम पंचायत की प्रशासकीय समिति की बात है, जिसमें पहले के उपसरपंच और वार्ड पंच सदस्य बनाए गए थे। पत्र के शब्दों में: "प्रकरण का परीक्षण करवाया गया। बाद परीक्षण प्रशासकीय समिति के पदों को लाभ की श्रेणी में नहीं मानते हुए अग्रिम कार्यवाही की जावें।" 10
यानी प्रशासकीय समिति के पदों की बात पत्र 10520 में है, और प्रशासक के पद की बात पत्र 10297 के बिन्दु 7 में। 109
क़ानून: धारा 19
पंचायती राज अधिनियम की धारा 19 में अयोग्यताएँ लिखी हैं। ये पंच के लिए हैं, और धारा 26(1) से सरपंच के लिए भी यही लागू हैं। 11 धारा 19 का शीर्षक ही है 'किसी पंच या सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिए अर्हताएं', यानी ये शर्तें पंचायत समिति और ज़िला परिषद सदस्य के चुनाव पर भी हैं। 1213
लाभ के पद से जुड़े खंड ये हैं:
| खंड | क्या लिखा है |
|---|---|
| 19 (क) | विधानसभा सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए जो अयोग्य है, वह पंच-सरपंच के लिए भी अयोग्य है; बस उम्र 25 की जगह 21 साल काफ़ी है। मार्गदर्शिका इसी सूची में अलग से लिखती है कि भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद रखने वाला अपात्र होगा (अनुच्छेद 191)। |
| 19 (ख) | किसी स्थानीय प्राधिकारी या विश्वविद्यालय के अधीन, या किसी ऐसे निगम, निकाय, उपक्रम या सहकारी समिति के अधीन जिस पर राज्य सरकार का नियंत्रण है या जिसे राज्य सरकार से पूरा या कुछ पैसा मिलता है, वेतन वाली पूरे समय की या पार्ट-टाइम नौकरी। |
| 19 (घ) | किसी भी पंचायती राज संस्था के अधीन कोई वेतन वाला पद या लाभ का पद। |
| 19 (ङ) | संबंधित पंचायती राज संस्था के किसी ठेके में ख़ुद, भागीदार, नियोजक या कर्मचारी के ज़रिये अंश या हित। मार्गदर्शिका यहीं धारा 19 का परंतुक (i) भी देखने को कहती है। |
स्रोत: मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 28; मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 29; मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 31; ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 64–65
अधिनियम की अंग्रेज़ी प्रति में खंड (ख) के शब्द हैं: "holds a salaried whole-time or part-time appointment under a local authority, a university or any corporation, body, Enterprises or Co-operative Society, which is either controlled or wholly or partly financed by the State Government"। खंड (घ) के शब्द हैं: "hold any salaried post or place of profit under any Panchayati Raj Institution"। 17
सरकारी कर्मचारी नामांकन भरे
जो व्यक्ति संवीक्षा के दिन केन्द्र सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी का पूरे समय का या पार्ट-टाइम वेतन वाला कर्मचारी है, वह पंच या सरपंच का चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसा कर्मचारी नामांकन भरे, तो संवीक्षा के समय सक्षम अधिकारी की दी हुई त्यागपत्र की स्वीकृति की प्रमाणित प्रति देनी होगी। यह आदेश संवीक्षा की तारीख से पहले वाले दिन तक का होना चाहिए, उसी दिन का नहीं। स्वीकृति न दी, तो नामांकन पत्र अस्वीकार होगा। 15
पंच-सरपंच के नामांकन, संवीक्षा और नाम वापसी, तीनों एक ही दिन होते हैं। 18 बालोतरा में मतदान तीसरे और चौथे चरण में है। 19 पंच-सरपंच के नामांकन तीसरे चरण में 04.11.2026 को हैं, और चौथे चरण में 15.11.2026 को। 2021 इसलिए स्वीकृति का आदेश तीसरे चरण में 03.11.2026 तक का, और चौथे चरण में 14.11.2026 तक का होना चाहिए। 152021
संवीक्षा में नामांकन खारिज
नियम 27 के हिसाब से, उम्मीदवार चुनाव के लिए पात्र नहीं है या धारा 19 की कोई अयोग्यता रखता है, तो नामांकन पत्र खारिज किया जा सकता है। 22
अदालत के फ़ैसले
पत्र 10297 संवीक्षा के लिए दो फ़ैसलों के नाम लेता है: प्रद्युत बोरदोलोई और जया बच्चन। 6 नीचे इन दोनों के, और सर्वोच्च न्यायालय के दो और फ़ैसलों के ज़रूरी हिस्से हैं, जो लम्बरदार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पर हैं। 2324 ये चारों सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट वाली प्रति से लिए हैं। इनके बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय का वह फ़ैसला है जिसका नाम पत्र आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए लेता है। 925 वह उसी न्यायालय की वेबसाइट वाली प्रति से है। उसके बाद राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) का वह फ़ैसला है जिसका नाम पत्र राशन डीलर के लिए लेता है; वह भी उसी न्यायालय की वेबसाइट वाली प्रति से है। 926 अंग्रेज़ी वाक्य वैसे ही हैं, साथ में हिन्दी में मतलब।
प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय (सर्वोच्च न्यायालय, दिसंबर 2000)
सर्वोच्च न्यायालय की अपनी रिपोर्ट (Supreme Court Reports, 2012) में पी.ए. संगमा बनाम प्रणब मुखर्जी वाले फ़ैसले में इस फ़ैसले का हवाला ऐसे लिखा है: "Pradyut Bordoloi Vs. Swapan Roy 2000 (5) Suppl. SCR 525 = (2001) 2 SCC 19"। 27
मामला: मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में एक उम्मीदवार, स्वपन रॉय, के नामांकन पर शिकायत आई कि वे कोल इंडिया लिमिटेड के कर्मचारी हैं। रिटर्निंग अधिकारी ने आपत्ति मानी और नामांकन खारिज कर दिया। 2 वे कोल इंडिया में क्लर्क ग्रेड-I थे। उच्च न्यायालय ने माना कि नामांकन ग़लत खारिज हुआ था ("improperly rejected"), इसलिए जीते हुए उम्मीदवार प्रद्युत बोरदोलोई का चुनाव शून्य है ("the election of the appellant was void")। 28 सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय का आदेश बरकरार रखा। 29
फ़ैसले में पुराने फ़ैसलों (जैसे शिवमूर्ति वाला) से निकले पाँच सवाल लिखे हैं। पत्र 10297 इन्हें हिन्दी में अपने शब्दों में लिखता है। दोनों साथ-साथ: 306
| पत्र 10297 में | फ़ैसले में (अंग्रेज़ी, वैसे ही) |
|---|---|
| 1. क्या नियुक्ति सरकार ने की है? | (1) Whether the Government makes the appointment; |
| 2. क्या सरकार को उसे हटाने का अधिकार है? | (2) Whether the Government has the right to remove or dismiss the holder; |
| 3. क्या उस पद के साथ कोई वेतन, मानदेय या दूसरा आर्थिक लाभ या परिलाभ जुड़ा है? | (3) Whether the Government pays the remuneration; |
| 4. पद पर बैठा व्यक्ति काम किस तरह का करता है? | (4) What are the functions of the holder? Does he perform them for the Government; and |
| 5. सरकार उस पद पर कितना नियंत्रण रखती है? | (5) Does the Government exercise any control over the performance of those functions? |
स्रोत: आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 3; सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 3
तीसरे सवाल में फ़र्क़ देखिए: पत्र पूछता है कि पद के साथ कोई आर्थिक लाभ जुड़ा है या नहीं; फ़ैसले का सवाल है कि मेहनताना सरकार देती है या नहीं। 630
पुराने गुरु गोबिन्द बसु वाले फ़ैसले का सार देते हुए अदालत ने चार बातें लिखीं: 30
- सरकार के अधीन लाभ का पद रखने के लिए सरकारी नौकरी में होना ज़रूरी नहीं ("one need not be in the service of Government")। 30
- ऊपर की सारी बातें एक साथ होना ज़रूरी नहीं ("all these factors need not co-exist")। 30
- सबसे निर्णायक परीक्षण नियुक्ति का है ("The decisive test for determining whether a person holds any office of profit under the Government ... is the test of appointment")। 30
- पैसा किस खाते से मिलता है, यह अपने-आप में न निर्णायक है, न अहम ("The source from which the remuneration is paid is not by itself decisive or material")। 30
और अपने निष्कर्ष में अदालत ने लिखा कि सबसे पहला सवाल यह है कि क्या सरकार उस व्यक्ति को पद पर नियुक्त कर सकती है और हटा सकती है। जवाब 'नहीं' है, तो आगे जाँच की ज़रूरत नहीं ("the first and foremost question to be asked is : whether the Government has power to appoint and remove the person on and from the office? If the answer is in the negative, no further enquiry is called for")। जवाब 'हाँ' है, तो शिवमूर्ति वाले सवालों पर आगे जाँच होगी। 29
इसी फ़ैसले में सतरूचर्ला वाले पुराने मामले का भी ज़िक्र है: एक पंजीकृत संस्था (ITDA) के प्राइमरी स्कूल के शिक्षक, जिन्हें प्रोजेक्ट अधिकारी ने नियुक्त किया था। प्रोजेक्ट अधिकारी कलक्टर ही थे, पर नियुक्ति उन्होंने प्रोजेक्ट अधिकारी के रूप में की थी, सरकार के रूप में नहीं; इसलिए वह सरकार के अधीन लाभ का पद नहीं माना गया। 31
जया बच्चन बनाम भारत संघ (सर्वोच्च न्यायालय, 08.05.2006)
मामला: राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की राय (02.03.2006) पर उन्हें 14.7.2004 से राज्य सभा के लिए अयोग्य माना, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यू.पी. फ़िल्म विकास परिषद का अध्यक्ष बनाया था। 3 सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी ("We find no merit in the writ")। 32
फ़ैसले की ज़रूरी बातें: 33
- देखना यह है कि पद से आर्थिक लाभ मिल सकता है या नहीं ("capable of yielding a profit or pecuniary gain"), यह नहीं कि सच में मिला या नहीं ("what is relevant is whether the office is capable of yielding a profit or pecuniary gain and not whether the person actually obtained a monetary gain")। 33
- पैसे को 'मानदेय' कह देने से वह लाभ के दायरे से बाहर नहीं हो जाता ("mere use of the word 'honorarium' cannot take the payment out of the purview of profit, if there is pecuniary gain for the recipient")। 33
- बस जेब से हुए असल ख़र्च की भरपाई लाभ नहीं गिनी जाती ("other than reimbursement of out of pocket/actual expenses")। 33
- पैसा असल में लिया या नहीं, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ("of no consequence")। 32
अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग (सर्वोच्च न्यायालय, 29.10.2010)
मामला: पंजाब के राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 30.4.2008 के एक ज्ञापन (memo) में लिखा था कि लम्बरदार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभ का पद रखते हैं, इसलिए चुनाव नहीं लड़ सकते। 2334 लम्बरदार को हर महीने 900 रुपये मानदेय मिलता था। 35
- सर्वोच्च न्यायालय ने लिखा कि यह ज्ञापन क़ानून की ग़लत व्याख्या पर टिका है ("The circular is based on a misinterpretation of the law"), और रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं जिससे दिखे कि 900 रुपये से लम्बरदार को बचत होती ही है ("There is no material on the record to show that the receipt of Rs.900/- per month by the Lambardar would invariably lead to a saving")। 34
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए यह ज्ञापन उच्च न्यायालय पहले ही रद्द कर चुका था; सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उन्हीं कारणों से लम्बरदारों के लिए भी यह नहीं टिकता ("On this very basis, the High Court has quashed the circular in relation to Anganwari workers. In our opinion, for the same reasons the circular could not be sustained qua the Lambardars also.")। 36
- अदालत ने माना कि लम्बरदार का पद लाभ का पद नहीं ("the office of a Lambardar would not be an 'office of profit'"), अपील मंज़ूर की, और 30.4.2008 का ज्ञापन लम्बरदारों के लिए भी रद्द कर दिया। 37
- भत्ते पर: अदालत ने एक पुराने फ़ैसले (एस. उमराव सिंह बनाम दरबारा सिंह) का हवाला दिया, जिसमें पंचायत समिति के अध्यक्ष का भत्ता भी जेब से होने वाले ख़र्च की भरपाई माना गया था। 3839 उस मामले में यह दिखाने का भार अपील करने वाले (appellant) पर था कि मिलने वाली रक़म ख़र्च से ज़्यादा है ("the burden lay on the appellant to give evidence to show that amount paid would be in excess of the expenses")। 40
कर्नाटक राज्य बनाम अमीरबी (सर्वोच्च न्यायालय, 07.12.2006)
यह चुनाव का नहीं, सेवा का मामला था: सवाल यह था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का पद 'सिविल पद' है या नहीं। 41 अदालत ने लिखा: "The posts of Anganwadi workers are not statutory posts. They have been created in terms of the scheme." (आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पद क़ानून से बने पद नहीं; ये योजना के तहत बने हैं।) 24
अपने सामने उठे एक और सवाल के जवाब में अदालत ने चुनाव लड़ने पर भी लिखा: "They are indisputably free to do so. A holder of a civil post may not be entitled thereto." (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के लिए बेशक आज़ाद हैं; सिविल पद वाले को शायद यह हक़ न हो।) 42
बॉम्बे उच्च न्यायालय: रिट याचिका 8022/2021 (10.02.2026)
पत्र 10297 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के लिए इसी फ़ैसले का नाम लेता है: "रिट याचिका संख्या 8022/2021 प्रतिभा धाडिवा गायगवाड बनाम भारत संघ व अन्य", बॉम्बे उच्च न्यायालय। 9 फ़ैसला उस न्यायालय की औरंगाबाद बेंच का है, 10 फ़रवरी 2026 का। 43 यहाँ जो लिखा है, वह उसकी वेबसाइट से ली गई प्रति से है।
मामला: महाराष्ट्र की एक आंगनवाड़ी सेविका ग्राम पंचायत की सदस्य चुनी गईं। महाराष्ट्र सरकार के 05.08.2010 वाले शासन निर्णय (Government Resolution) के हिसाब से उन्हें दोनों में से एक पद चुनना था। 23.03.2021 के आदेश से उनकी सेवा ख़त्म कर दी गई, इस वजह से कि उन्होंने दो में से एक पद नहीं चुना। 44 सेविका ने अदालत में कहा कि वे पंचायत वाला पद छोड़ने का विकल्प पहले दे चुकी थीं, पर उस पर अमल होने से पहले ही उनकी सेवा ख़त्म कर दी गई। 45
अदालत ने क्या लिखा:
- आंगनवाड़ी सेविका लाभ का पद रखती है या नहीं, यह सवाल अब खुला नहीं है। अदालत के शब्दों में, सर्वोच्च न्यायालय अमीरबी वाले फ़ैसले में यह कह चुका है: "the Anganwadi Sevika does not hold a civil post and she is free to contest elections"। 46 सर्वोच्च न्यायालय के अपने शब्द ऊपर अमीरबी वाले हिस्से में हैं।
- शासन निर्णय चुनाव लड़ने से नहीं रोकता, बस चुने जाने पर दो में से एक पद चुनने को कहता है, और यह शर्त ठीक है ("Petitioner's right to contest the election is not taken away but the Government Resolution has put a condition to elect one of the post")। 4748
- सेविका ने 23.01.2026 को पंचायत सदस्य के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। इसलिए अदालत ने सेवा ख़त्म करने वाला आदेश रद्द कर दिया: पंचायत इस्तीफ़ा मान ले, तो वे आंगनवाड़ी सेविका बनी रहेंगी, पिछला वेतन नहीं मिलेगा। 49
राजस्थान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए क्या करना है, वह पत्र 10297 का बिन्दु 4 बताता है (ऊपर की तालिका में)। 9
मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर, 04.12.2014)
राशन डीलर के लिए पत्र 10297 राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) के मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (2014) वाले फ़ैसले का नाम लेता है, दिनांक 04.12.2014। 9 यह फ़ैसला उच्च न्यायालय की वेबसाइट वाली प्रति से है: एस.बी. सिविल रिट याचिका 5292/2010, न्यायाधीश संगीत लोढ़ा। 26
मामला: ग्राम पंचायत लवेरा खुर्द के सरपंच पद पर मंगला राम का नामांकन पत्र मंज़ूर होने और उनके चुनाव को याचिका में चुनौती दी गई थी। याचिका के मुताबिक़ वे ज़िला रसद अधिकारी, जोधपुर के प्राधिकार पत्र पर उचित मूल्य की दुकान चलाते हुए ग़ैरक़ानूनी काम करते थे, इसलिए उनके ख़िलाफ़ जाँच शुरू हुई थी। याचिका यह नहीं कहती कि जाँच में वे दोषी पाए गए या उनका प्राधिकार पत्र रद्द हुआ। रिकॉर्ड पर यह भी आया कि वह दुकान बाद में एक सहकारी समिति को दे दी गई। 26
अदालत ने कहा कि याचिका यह नहीं बताती कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के किस प्रावधान के तहत सिर्फ़ जाँच चलने से वे अयोग्य होते। और: "there is nothing on record to establish that the authorisation issued in favour of the respondent was in force or there was a contract subsisting between the respondent- Mangla Ram and the State Government at the relevant time." मतलब: रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं है जिससे साबित हो कि उस समय उनका प्राधिकार पत्र लागू था, या उनके और राज्य सरकार के बीच कोई अनुबंध चल रहा था। इसी पर याचिका ख़ारिज हुई: "the writ petition is devoid of any merit and therefore, it is hereby dismissed." 50
संवीक्षा में किस क्रम से देखें
लाभ के पद की आपत्ति: संवीक्षा में क्रम
उदाहरण: ऐसे मामले आएँ, तो
ये मामले समझाने के लिए बनाए गए हैं; सारे नाम काल्पनिक हैं। जहाँ पत्र, अधिनियम या फ़ैसला साफ़ बात कहता है, वहीं जवाब लिखा है। बाक़ी मामलों में लिखा है कि रिटर्निंग अधिकारी क्या जाँचें और कौन-सा परीक्षण लगेगा।
1. सुनीता एक विभाग में राजस्थान संविदा नियम, 2022 के तहत संविदा पर लगी हैं, और सरपंच का नामांकन भरती हैं।
पत्र 10297 के हिसाब से इसे लाभ का पद माना जाए। रिटर्निंग अधिकारी देखेंगे कि नियुक्ति राज्य सरकार या विभाग करता है, और सेवा शर्तें, नियंत्रण और सेवा ख़त्म करने की शक्ति सरकार के पास है। 1 सरकार के अधीन लाभ का पद धारा 19 की अयोग्यता है, और ऐसी अयोग्यता पर नियम 27 में नामांकन खारिज किया जा सकता है। 1422
2. रेखा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और वार्ड पंच का नामांकन भरना चाहती हैं।
पत्र के हिसाब से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका का पद लाभ का पद नहीं है। पर महिला एवं बाल विकास विभाग के परिपत्र, क्रमांक 4244, दिनांक 12.01.2023 के बिन्दु 12 के हिसाब से उन्हें नामांकन की तारीख से परिणाम आने तक अवैतनिक अवकाश लेना होगा, और जीत जाएँ, तो शपथ से पहले आंगनवाड़ी वाले पद से त्याग पत्र देना होगा। 9 पत्र जिस बॉम्बे उच्च न्यायालय वाले फ़ैसले का नाम लेता है, उसमें भी अदालत ने माना कि चुनाव लड़ने का हक़ बना रहता है और जीतने पर एक पद चुनने की शर्त ठीक है। वह मामला महाराष्ट्र सरकार के आदेश का था। 4748
3. मोहन गाँव में उचित मूल्य की दुकान (राशन की दुकान) चलाते हैं, और पंच का नामांकन भरते हैं।
पत्र के हिसाब से राशन डीलर का पद लाभ का पद मानना उचित नहीं है; पत्र इसके लिए मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (2014) वाले फ़ैसले का नाम लेता है। 9 उस मामले में अदालत ने यह देखा कि उस समय प्राधिकार पत्र लागू था या नहीं, और राज्य सरकार से कोई अनुबंध चल रहा था या नहीं; रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं था, इसलिए याचिका ख़ारिज हुई। 50
4. कमला आशा सहयोगिनी हैं, और सरपंच का नामांकन भरती हैं।
पत्र कहता है कि फ़ैसला परीक्षणों पर होगा। आख़िरी फ़ैसले से पहले रिटर्निंग अधिकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का परिपत्र, क्रमांक 186, दिनांक 13.07.2022 देखेंगे, और नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचेंगे। 1
5. पुष्पा महिला अधिकारिता विभाग में साथिन हैं।
पत्र कहता है कि महिला अधिकारिता विभाग ने इस बारे में कोई निर्देश जारी नहीं किया है, और फ़ैसला आशा सहयोगिनी की तरह ही होगा: परीक्षण, और नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण की जाँच। 1
6. विनोद एक सरकारी स्कूल में विद्या संबल योजना में पढ़ाते हैं।
पत्र कहता है कि इन पर सीधे लागू होने वाला कोई फ़ैसला नहीं है, इसलिए फ़ैसला परीक्षणों पर होगा। आम तौर पर इनका वेतन या मानदेय राज्य सरकार देती है; फिर भी रिटर्निंग अधिकारी नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचेंगे। किसी भी तरह का संशय हो, तो चुनाव में भाग लेने से पहले त्याग पत्र ले लेना उचित होगा। 9
7. रामलाल पिछली बार उपसरपंच थे, और अब अपनी ग्राम पंचायत की प्रशासकीय समिति के सदस्य हैं।
आयोग के पत्र 10520 में पहले के उपसरपंच और वार्ड पंच, जो प्रशासकीय समिति के सदस्य बनाए गए, उनकी बात है: "बाद परीक्षण प्रशासकीय समिति के पदों को लाभ की श्रेणी में नहीं मानते हुए अग्रिम कार्यवाही की जावें।" 10
8. कोई व्यक्ति अभी ग्राम पंचायत का प्रशासक है।
पत्र 10297 कहता है कि आयोग पहले जाँच करके इस बारे में दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, और रिटर्निंग अधिकारी उसी आदेश के हिसाब से अपने स्तर पर फ़ैसला करेंगे। 9
9. गोपाल अपनी ग्राम पंचायत से हर महीने वेतन पाते हैं, और उसी पंचायत में पंच का नामांकन भरते हैं।
धारा 19(घ): किसी भी पंचायती राज संस्था के अधीन वेतन वाला पद या लाभ का पद रखने वाला चुनाव नहीं लड़ सकता। 1517 ऐसी अयोग्यता पर नियम 27 में नामांकन खारिज किया जा सकता है। 22
10. सुरेश की फ़र्म का इसी ग्राम पंचायत से सड़क बनाने का ठेका चल रहा है।
धारा 19(ङ): संबंधित पंचायती राज संस्था के किसी ठेके में ख़ुद, भागीदार, नियोजक या कर्मचारी के ज़रिये अंश या हित रखने वाला चुनाव नहीं लड़ सकता। 15 ऐसी अयोग्यता पर नियम 27 में नामांकन खारिज किया जा सकता है। 22
11. एक पद के साथ मानदेय तय है, पर उम्मीदवार कहता है कि उसने कभी मानदेय लिया ही नहीं।
इससे बात नहीं बदलती। जया बच्चन वाले फ़ैसले के हिसाब से देखना यह है कि पद से आर्थिक लाभ मिल सकता है या नहीं; सच में मिला या नहीं, इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता। 33326 पद सरकार के अधीन है या नहीं, यह फिर भी परीक्षणों से ही तय होगा। 6
12. दीपक एक प्लेसमेंट एजेंसी के ज़रिये सरकारी दफ़्तर में कंप्यूटर ऑपरेटर हैं; नियुक्ति पत्र एजेंसी का है।
इस पर पत्र में कुछ नहीं लिखा, इसलिए जवाब परीक्षणों से निकलेगा। रिटर्निंग अधिकारी नियुक्ति पत्र और अनुबंध देखकर तय करें कि उन्हें नियुक्त करने और हटाने की शक्ति किसके पास है। बोरदोलोई वाले फ़ैसले के हिसाब से यह शक्ति सरकार के पास नहीं, तो सरकार के अधीन लाभ के पद की आगे जाँच की ज़रूरत नहीं। 29 फिर भी धारा 19(ख) देखिए: एजेंसी या जिस संस्था में वे वेतन पर हैं, उस पर राज्य सरकार का नियंत्रण है, या उसे राज्य सरकार से पैसा मिलता है? 15
13. एक समिति के सदस्य को हर बैठक का तय भत्ता मिलता है, और आपत्ति करने वाला कहता है कि यह लाभ है।
बस असल ख़र्च की भरपाई लाभ नहीं गिनी जाती; पर भुगतान को 'मानदेय' कह देने से वह लाभ के दायरे से बाहर नहीं होता। 33 अनोख सिंह वाले फ़ैसले में एक पुराने फ़ैसले का हवाला है, जिसमें पंचायत समिति के अध्यक्ष का भत्ता ख़र्च की भरपाई माना गया, और रक़म ख़र्च से ज़्यादा है, यह दिखाने का भार उस मामले में अपील करने वाले पर था। 3940 संशय हो, तो पत्र 10297 के हिसाब से नियुक्ति पत्र, सेवा शर्तें, वेतन या मानदेय, और सरकारी नियंत्रण देखिए। 6
14. अनिल राज्य सरकार में पटवारी हैं। इस्तीफ़ा दे दिया है, पर स्वीकृति अभी नहीं आई, और नामांकन भरना है।
संवीक्षा के समय सक्षम अधिकारी की दी हुई त्यागपत्र की स्वीकृति की प्रमाणित प्रति देनी होगी, और यह आदेश संवीक्षा से पहले वाले दिन तक का होना चाहिए। स्वीकृति न दी, तो नामांकन पत्र अस्वीकार होगा। 15 पंच-सरपंच की संवीक्षा नामांकन वाले दिन ही होती है। 18 बालोतरा में यह दिन तीसरे चरण में 04.11.2026 है, और चौथे चरण में 15.11.2026। 192021 इसलिए स्वीकृति तीसरे चरण में 03.11.2026 तक की, और चौथे चरण में 14.11.2026 तक की चाहिए। 152021
फ़ैसला लिखते समय
यह बात पत्र में नहीं लिखी, यह हमारी सलाह है: लाभ के पद की आपत्ति पर फ़ैसला लिखें, तो इन बातों का ज़िक्र कीजिए, ताकि बाद में कोई पूछे तो आधार साफ़ दिखे।
- उम्मीदवार का पद और विभाग, और किन काग़ज़ों से यह देखा: नियुक्ति पत्र, सेवा शर्तें, वेतन या मानदेय के काग़ज़। 6
- पत्र 10297 में यह पद है, तो उसका कौन-सा बिन्दु लागू हुआ। 8
- पाँच परीक्षणों में से हर एक पर क्या मिला, ख़ासकर नियुक्ति और हटाने की शक्ति किसके पास है। 63029
- धारा 19 का कौन-सा खंड लगा, या कोई नहीं लगा। 1415
- नामांकन खारिज किया, तो नियम 27 का कौन-सा कारण। 22
और पढ़िए: नामांकन वाले पेज पर लाभ का पद वाला हिस्सा।
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छापने या WhatsApp पर भेजने के लिए: यही पेज, श्री मनीष कुमार गोयल (SLMT) के मार्गदर्शन के लिए आभार के साथ।
सावधान: ये फ़ाइलें आयोग की बनाई या जारी की हुई नहीं हैं, सिर्फ़ पूरक प्रशिक्षण सामग्री हैं। अंतिम और मान्य स्रोत आयोग के मूल आदेश और नियम ही हैं।
स्रोत
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- 1.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 1कखगघङच
- 2.सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 1कख
- 3.सुप्रीम कोर्ट: जया बच्चन बनाम भारत संघ, पृ. 1कख
- 4.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 1 पाठ में
- 5.सुप्रीम कोर्ट: कर्नाटक राज्य बनाम अमीरबी, पृ. 1 पाठ में
- 6.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 3कखगघङचछजझञटठ
- 7.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 1–3 पाठ में
- 8.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 1–2कखग
- 9.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 2कखगघङचछजझञट
- 10.आदेश 10520, दि. 14.10.2026, पृ. 1कखग
- 11.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 31कख
- 12.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 54 पाठ में
- 13.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 144 पाठ में
- 14.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 28कखगघ
- 15.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 29कखगघङचछजझञट
- 16.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 64–65 पाठ में
- 17.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 60कख
- 18.आदेश 9809, दि. 02.10.2026, पृ. 1कख
- 19.आदेश 9836, दि. 03.10.2026, पृ. 12कख
- 20.आदेश 10090, दि. 06.10.2026, पृ. 1कखगघ
- 21.आदेश 9836, दि. 03.10.2026, पृ. 9कखगघ
- 22.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 34कखगघङ
- 23.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 2कख
- 24.सुप्रीम कोर्ट: कर्नाटक राज्य बनाम अमीरबी, पृ. 4कख
- 25.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 1 पाठ में
- 26.राजस्थान हाई कोर्ट: रिट याचिका 5292/2010, मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 1कखग
- 27.सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट्स 2012, खंड 11, भाग 3, पृ. 3 पाठ में
- 28.सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 2कख
- 29.सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 6कखगघङचछ
- 30.सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 3कखगघङचछजझञ
- 31.सुप्रीम कोर्ट: प्रद्युत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय, पृ. 5 पाठ में
- 32.सुप्रीम कोर्ट: जया बच्चन बनाम भारत संघ, पृ. 3कखग
- 33.सुप्रीम कोर्ट: जया बच्चन बनाम भारत संघ, पृ. 2कखगघङचछ
- 34.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 33कख
- 35.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 8 पाठ में
- 36.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 34 पाठ में
- 37.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 35 पाठ में
- 38.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 22 पाठ में
- 39.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 24कख
- 40.सुप्रीम कोर्ट: अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग, पृ. 25कख
- 41.सुप्रीम कोर्ट: कर्नाटक राज्य बनाम अमीरबी, पृ. 9 पाठ में
- 42.सुप्रीम कोर्ट: कर्नाटक राज्य बनाम अमीरबी, पृ. 8 पाठ में
- 43.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 1–2 पाठ में
- 44.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 2–3 पाठ में
- 45.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 9 पाठ में
- 46.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 5–6 पाठ में
- 47.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 7कख
- 48.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 8–9कख
- 49.बॉम्बे हाई कोर्ट: रिट याचिका 8022/2021, प्रतिभा गायकवाड़ बनाम भारत संघ, पृ. 9–11 पाठ में
- 50.राजस्थान हाई कोर्ट: रिट याचिका 5292/2010, मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 2कख