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आपराधिक मामले और नामांकन: कब अस्वीकार, कब नहीं

साइट पर काम चल रहा है · अपडेट 03.11.2026अगर कोई त्रुटि दिखे तो डेवलपर भरत चौधरी (व्याख्याता, रा.उ.मा.वि., जेठन्तरी — ब्लॉक: समदड़ी, जिला: बालोतरा) को बताइए:
WhatsApp: +91-7357578216
इस पेज पर

उम्मीदवार पर पुलिस में मामला दर्ज है, अदालत में मुकदमा चल रहा है, या पहले कभी सज़ा हो चुकी है: संवीक्षा में उसका नामांकन कब अस्वीकार होगा, और कब नहीं। यह पेज पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और ज़िला परिषद सदस्य के नामांकन की संवीक्षा करने वाले रिटर्निंग अधिकारी (RO) और सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) के लिए है, और प्रशिक्षकों के लिए भी। अयोग्यता के बाकी आधार, काग़ज़ों की जाँच और अपील पर रोक: नामांकन की संवीक्षा: अयोग्यता की जाँच।

हर बात के आगे अधिनियम, मार्गदर्शिका, आयोग के आदेश, अदालत के फ़ैसले, या क़ानून के सरकारी पाठ (India Code से; IPC का पाठ सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमेटी की साइट से) का पन्ना लिखा है। "अधिनियम" यानी राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13)। 1 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 8 का पाठ आयोग की पुस्तिका Manual of Panchayati Raj Election Law (2026) में "EXTRACTS FROM THE REPRESENTATION OF PEOPLE ACT, 1951" के नीचे छपा है, वहीं से लिया है। 23 इस पेज पर आयोग का आदेश क्रमांक एफ. 7(1)(3)/पंचा/रानिआ/2014-15/10055 दिनांक 06.10.2026 (पंच और सरपंच के नामांकन के साथ के काग़ज़) है। 4

पहले यह फ़र्क़ समझिए: सज़ा "हो सकती है" या सज़ा "हुई है"

जो काम हो जाए, उसके आगे वाले खाने में निशान लगाते चलिए। निशान बस इसी फ़ोन या ब्राउज़र में रहते हैं।

  1. धारा 19 में आपराधिक मामलों के तीन खण्ड हैं: (छ) दोषसिद्धि पर, (छछ) चल रहे मुकदमे पर, और (ट) मृत्यु भोज के अपराध पर। 5 इसके अलावा खण्ड (क) से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 भी लगती है, क्योंकि जो व्यक्ति विधानसभा का चुनाव लड़ने के अयोग्य है, वह पंचायत का चुनाव भी नहीं लड़ सकता। 67
  2. खण्ड (छ) में देखा जाता है कि अदालत ने असल में कितनी सज़ा दी: "sentenced to imprisonment for six months or more", यानी कम से कम 6 महीने की कैद सुनाई गई हो। 5
  3. खण्ड (छछ) में देखा जाता है कि उस अपराध में क़ानून कितनी सज़ा तक की इजाज़त देता है: "any offence punishable with imprisonment for five years or more", यानी जिस अपराध में 5 साल या ज़्यादा की कैद दी जा सकती है। 5 यहाँ यह नहीं देखा जाता कि आगे चलकर सज़ा कितनी होगी।
  4. इसलिए 3 साल तक की सज़ा वाले अपराध में आरोप तय हो जाएँ, तब भी (छछ) नहीं लगता; 5 और 7 साल तक की सज़ा वाले अपराध में दोषी ठहराकर अदालत 4 महीने की कैद दे, तो (छ) नहीं लगता, क्योंकि (छ) के लिए कम से कम 6 महीने की कैद सुनाई जानी चाहिए। 5 ऐसे में भी RPA धारा 8 और खण्ड (ट) अलग से देखने होंगे (नीचे दोषसिद्धि हुई हो तो)।

तीन सवाल, इसी क्रम में

  1. पहला सवाल, क्या किसी अपराध में दोषसिद्धि हुई है: हाँ, तो नीचे की दोषसिद्धि वाली तालिका से देखिए कि कौन-सा खण्ड लगता है और कब तक। 53 दोषसिद्धि ऊपर की अदालत ने पलट दी हो, तो खण्ड (छ) नहीं लगता: (छ) सिर्फ़ उस सज़ा पर है जो "not having been subsequently reversed or remitted or the offender pardoned", यानी बाद में पलटी न गई हो, माफ़ न हुई हो, और अपराधी को क्षमा न मिली हो। 5
  2. दूसरा सवाल, क्या मुकदमा चल रहा है: तब खण्ड (छछ) देखिए, और उसकी तीनों शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए: सक्षम न्यायालय ने अपराध का संज्ञान ले लिया हो; उम्मीदवार के खिलाफ़ आरोप तय हो चुके हों; और उन आरोपों में कोई अपराध ऐसा हो जिसमें 5 साल या ज़्यादा की कैद दी जा सकती है। 58 एक भी शर्त अधूरी हो, तो (छछ) नहीं लगता। 5
  3. तीसरा सवाल, अगर न दोषसिद्धि है, न (छछ) वाला मुकदमा: तब आपराधिक मामले के आधार पर नामांकन अस्वीकार नहीं हो सकता। रिटर्निंग अधिकारी नामांकन पत्र सिर्फ़ नियम 27(3) के चार आधारों पर अस्वीकार कर सकते हैं, और उनमें आपराधिक मामले से जुड़ा आधार धारा 19 की अयोग्यता ही है। 95

मुकदमे की हर अवस्था पर फ़ैसला

संवीक्षा के समय मामला किस अवस्था में है, यह देखिए। हर पंक्ति में यह मान लिया है कि उम्मीदवार की कोई दोषसिद्धि नहीं है। 5

अवस्था खण्ड (छछ) लगता है? संवीक्षा में फ़ैसला
पुलिस में FIR दर्ज है, या जाँच चल रही है नहीं: अदालत ने न संज्ञान लिया, न आरोप तय किए इस आधार पर अस्वीकार नहीं
पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र (चालान) पेश कर दिया नहीं, जब तक अदालत आरोप तय न करे इस आधार पर अस्वीकार नहीं
अदालत ने संज्ञान ले लिया, पर आरोप अभी तय नहीं हुए नहीं: आरोप तय होना भी ज़रूरी है इस आधार पर अस्वीकार नहीं
आरोप तय हो गए, पर अपराध की अधिकतम सज़ा 5 साल से कम है नहीं: 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाला अपराध चाहिए इस आधार पर अस्वीकार नहीं
आरोप तय हो गए, और किसी अपराध की अधिकतम सज़ा 5 साल या ज़्यादा है (ठीक 5 साल भी) हाँ अस्वीकार, धारा 19(छछ)
अदालत ने आरोप तय करने के बजाय उम्मीदवार को आरोपमुक्त कर दिया नहीं: उस पर अब मुकदमा नहीं चल रहा इस आधार पर अस्वीकार नहीं
मुकदमे में बरी हो गया नहीं: मुकदमा खत्म, और दोषसिद्धि नहीं इस आधार पर अस्वीकार नहीं

स्रोत: पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 61; मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 30; पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 101

  1. गिरफ़्तारी हुई हो या उम्मीदवार ज़मानत पर हो, सिर्फ़ इससे (छछ) नहीं लगता; देखना यही है कि अदालत ने संज्ञान लेकर आरोप तय किए हैं या नहीं, और अपराध की सज़ा कितनी हो सकती है। 5
  2. "5 साल या ज़्यादा" में ठीक 5 साल भी आता है, और उम्रकैद वाले अपराध भी: अधिनियम के शब्द हैं "five years or more"। 5
  3. आरोप कई धाराओं में तय हुए हों, तो हर धारा की अधिकतम सज़ा देखिए; इनमें से एक भी अपराध 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाला हो, तो (छछ) लगता है। 5
  4. यह जानकारी उम्मीदवार की प्ररूप 4-घ की घोषणा से मिलेगी: उसमें उसे दोषसिद्धि की, और उन लंबित मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हैं। 8

दोषसिद्धि हुई हो तो: कौन-सा खण्ड, कब तक

अपराध किस तरह का है और अदालत ने क्या सज़ा दी, इन दो बातों से तय होता है कि कौन-सा प्रावधान लगेगा। RPA धारा 8(1) और 8(2) की सूचियाँ: धारा 8(1) के अपराध, धारा 8(2) के अपराध। 23

अपराध सुनाई गई सज़ा कौन-सा प्रावधान कब तक अयोग्य
राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960 का कोई अपराध कोई भी सज़ा, सिर्फ़ जुर्माना भी धारा 19(ट) दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल 510
RPA धारा 8(1) की सूची का अपराध सिर्फ़ जुर्माना धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(1)(i) दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल 63
RPA धारा 8(1) की सूची का अपराध कैद, कितनी भी धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(1)(ii); कैद 6 महीने या ज़्यादा हो तो धारा 19(छ) भी दोषसिद्धि से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक 635
RPA धारा 8(2) की सूची का अपराध (जमाखोरी या मुनाफ़ाखोरी, खाने या दवा में मिलावट, दहेज प्रतिषेध अधिनियम) 6 महीने या ज़्यादा की कैद धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(2), और धारा 19(छ) दोषसिद्धि से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक 35
कोई और अपराध 2 साल या ज़्यादा की कैद धारा 19(छ), और धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(3) दोषसिद्धि से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक 53
कोई और अपराध 6 महीने या ज़्यादा, पर 2 साल से कम की कैद धारा 19(छ) दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल 510
कोई और अपराध, या धारा 8(2) की सूची का अपराध 6 महीने से कम की कैद, या सिर्फ़ जुर्माना कोई नहीं इस दोषसिद्धि के आधार पर अयोग्यता नहीं 53
  1. खण्ड (ग), (छ) या (ट) की अयोग्यता न रहे, तब भी RPA में कोई अयोग्यता बची हो, तो उम्मीदवार अयोग्य ही है। मार्गदर्शिका का नोट: "राज्य सरकार द्वारा उक्त धारा 19 के खण्ड (ग) (छ) एवं (ट) की अयोग्यता को हटा देने के बावजूद भी यदि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951, की धारा 8, 8-क, 9, 9-क, 10 या 10-क के अंतर्गत कोई अपात्रता है तो अपात्रता ही मानी जायेगी"। 11 इसलिए दो प्रावधान साथ लगें, तो दोनों की अवधि अलग-अलग गिनिए; जो बाद में खत्म हो, उस तारीख तक उम्मीदवार अयोग्य है। 11103
  2. खण्ड (छ) और (ट) के 6 साल दोषसिद्धि की तारीख से गिने जाते हैं, रिहाई से नहीं। 10 RPA धारा 8 में कैद होने पर अयोग्यता दोषसिद्धि की तारीख से शुरू होती है और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक चलती है। 3
  3. RPA धारा 8(1) की सूची वाले अपराध में सिर्फ़ जुर्माना हुआ हो, तब भी 6 साल की अयोग्यता है। यहाँ "6 महीने से कम सज़ा, इसलिए स्वीकार" वाला नियम नहीं चलता। 37
  4. मृत्यु भोज निवारण अधिनियम में दोषसिद्धि हो, तो सज़ा कितनी भी हो, खण्ड (ट) लगता है। 5

अपील, ज़मानत और रोक

  1. दोषसिद्धि के खिलाफ़ अपील या पुनरीक्षण (revision) की अर्ज़ी लगी हो, या उम्मीदवार ज़मानत पर छूटा हो, तब भी RPA धारा 8 की अयोग्यता दोषसिद्धि की तारीख से मानी जाती है, और अवधि पूरी होने तक दूर नहीं होती। 7 अपवाद: अपीलीय न्यायालय दोषसिद्धि पर ही रोक लगा दे, अगला बिन्दु देखिए।
  2. सिर्फ़ सज़ा पर रोक हो, या सज़ा निलंबित हो, तो दोषसिद्धि बनी रहती है; दोषसिद्धि पर ही रोक लगे, तो रोक की तारीख से वह लागू नहीं रहती। 121314 उम्मीदवार अपील की बात करे, तो अपीलीय न्यायालय का आदेश देखिए कि रोक किस पर है। विस्तार से: दोषसिद्धि पर अपील: रोक किस पर है।

काग़ज़ों से कैसे पता करें

  1. प्ररूप 4-घ के चार बिन्दुओं में से बिन्दु 1 (लंबित आपराधिक मामले) और बिन्दु 2 (आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि) से उम्मीदवार की योग्यता या अयोग्यता तय होती है। 4 बिन्दु 3 और 4 की जानकारी सिर्फ़ मतदाताओं के लिए है। 4
  2. 4-घ की घोषणा से पता चले कि उम्मीदवार के खिलाफ़ 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाले अपराध का मुकदमा चल रहा है, जिसमें अदालत ने संज्ञान लेकर आरोप तय कर दिए हैं, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अपात्र है। 8
  3. सरपंच के उम्मीदवार का शपथ पत्र (उपाबन्ध-I B) भी लगता है, जिसमें लंबित मामलों की जानकारी है। 4 शपथ पत्र या घोषणा में कोई कॉलम खाली हो, तो क्या करें: काग़ज़ों की जाँच।
  4. उम्मीदवार ने 4-घ या शपथ पत्र में जान-बूझकर कोई मामला छिपाया या झूठी बात लिखी, इसकी शिकायत पर कार्रवाई आयोग के पत्र 793 (20.01.2026) के अनुसार होती है: आपत्ति और शिकायत। 15

अपराध और उनकी सज़ा: (छछ) लगेगा या नहीं

  • "क़ानून में सज़ा" वाले खाने में वह सज़ा है जो क़ानून उस धारा में दे सकता है, यानी सबसे बड़ी सज़ा। किसी को असल में कितनी मिली, वह यहाँ नहीं है।
  • धारा 19(छछ) के शब्द हैं: "punishable with imprisonment for five years or more" 5। इसलिए उस धारा की पंक्ति पढ़िए जिसमें अदालत ने आरोप तय किए हैं; जिस अपराध में ठीक 5 साल तक की कैद हो सकती है, वह भी इसमें आता है।
  • यहाँ वही धाराएँ हैं जिनका पाठ हमने सरकारी प्रति के पन्ने से मिलाया है; हर पंक्ति में उस पन्ने का हवाला है। जो धारा यहाँ नहीं है, उसकी सज़ा उसी क़ानून के सरकारी पाठ में देखिए।

भारतीय न्याय संहिता (BNS)

भारतीय न्याय संहिता, 2023 का पाठ India Code से। 16

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
61(2)(a) आपराधिक षड्यंत्र, ऐसे अपराध का जिसकी सज़ा मौत, उम्रकैद या 2 साल या ज़्यादा की कड़ी कैद है, और BNS में उस षड्यंत्र की अलग सज़ा नहीं लिखी उस अपराध के दुष्प्रेरण (abetment) जैसी सज़ा; षड्यंत्र के नतीजे में अपराध हो गया हो, तो वही सज़ा जो उस अपराध की है (धारा 49); न हुआ हो, तो धारा 55 या 56 वाली सज़ा अपराध हो गया हो: उस अपराध की पंक्ति देखिए। न हुआ हो: वह अपराध मौत या उम्रकैद वाला हो, तो 7 साल तक की कैद, यानी हाँ; बाकी अपराधों में उसकी सबसे लंबी कैद का एक-चौथाई हिस्सा तक (अपराध रोकने का ज़िम्मा जिस लोक सेवक पर था, वह शामिल हो तो आधा), तो हाँ तभी, जब यह हिस्सा 5 साल या ज़्यादा बने 17181920
61(2)(b) बाकी आपराधिक षड्यंत्र 6 महीने तक की कैद नहीं 17
64(1) बलात्कार कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद तक हाँ 21
64(2) बलात्कार, उपधारा (2) में गिनाई गई हालतों में कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 21
65(1) 16 साल से कम उम्र की स्त्री से बलात्कार कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 22
65(2) 12 साल से कम उम्र की स्त्री से बलात्कार कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद, या मौत की सज़ा हाँ 22
66 बलात्कार के दौरान ऐसी चोट जिससे स्त्री की मौत हो जाए, या वह लगातार अचेत अवस्था (persistent vegetative state) में चली जाए कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद, या मौत की सज़ा हाँ 22
70(1) सामूहिक बलात्कार कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 23
70(2) 18 साल से कम उम्र की स्त्री से सामूहिक बलात्कार उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद, या मौत की सज़ा हाँ 23
71 धारा 64, 65, 66 या 70 में पहले दोषसिद्धि, और फिर इन्हीं में से किसी में दोषसिद्धि उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद, या मौत की सज़ा हाँ 23
80(2) दहेज मृत्यु कम से कम 7 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 24
103(1) हत्या मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 25
103(2) पाँच या ज़्यादा लोगों का समूह मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म की जगह, भाषा, निजी आस्था या ऐसे ही किसी आधार पर हत्या करे मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 25
105 हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध (culpable homicide not amounting to murder) मौत या ऐसी चोट के इरादे से: उम्रकैद, या 5 से 10 साल की कैद; सिर्फ़ यह जानते हुए कि मौत हो सकती है: 10 साल तक की कैद हाँ 25
107 बच्चे, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, सन्निपात (delirium) में पड़े व्यक्ति या नशे में धुत व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना मौत की सज़ा, उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 25
108 आत्महत्या के लिए उकसाना 10 साल तक की कैद हाँ 25
109(1) हत्या का प्रयास 10 साल तक की कैद; किसी को चोट पहुँची हो तो उम्रकैद हाँ 25
109(2) उम्रकैद की सज़ा भुगत रहे व्यक्ति का हत्या का प्रयास, जिसमें चोट पहुँची मौत की सज़ा, या उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद हाँ 2526
111(2)(a) संगठित अपराध, जिससे किसी की मौत हुई मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 2627
111(2)(b) संगठित अपराध, बाकी मामलों में कम से कम 5 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 2627
111(3) संगठित अपराध में मदद, उसका प्रयास, षड्यंत्र, या उसकी तैयारी कम से कम 5 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 27
111(4) संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य होना कम से कम 5 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 27
111(5) संगठित अपराध करने वाले को जान-बूझकर पनाह देना या छिपाना कम से कम 3 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 27
111(6) संगठित अपराध से मिली संपत्ति अपने पास रखना कम से कम 3 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 27
111(7) सिंडिकेट के सदस्य की ओर से ऐसी संपत्ति रखना जिसका ठीक हिसाब न दे सके कम से कम 3 साल की कैद, 10 साल तक हाँ 27
112(2) छोटा संगठित अपराध (petty organised crime) कम से कम 1 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 27
117(2) जान-बूझकर गंभीर चोट (grievous hurt) पहुँचाना 7 साल तक की कैद हाँ 28
117(3) ऐसी गंभीर चोट जिससे व्यक्ति हमेशा के लिए अपंग हो जाए, या लगातार अचेत अवस्था में चला जाए कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 28
117(4) पाँच या ज़्यादा लोगों का समूह मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म की जगह, भाषा, निजी आस्था या ऐसे ही किसी आधार पर गंभीर चोट पहुँचाए 7 साल तक की कैद हाँ 28
127(2) किसी को गलत तरीके से बंद रखना (wrongful confinement) 1 साल तक की कैद नहीं 29
127(3) 3 दिन या ज़्यादा बंद रखना 3 साल तक की कैद नहीं 29
127(4) 10 दिन या ज़्यादा बंद रखना 5 साल तक की कैद हाँ (ठीक 5 साल) 29
127(5) यह जानते हुए बंद रखना कि उसे छुड़ाने की रिट जारी हो चुकी है 2 साल तक की कैद, इसी अध्याय की दूसरी धारा की कैद के ऊपर अपनी कैद 5 साल से कम; साथ में बंद रखने की जिस धारा में आरोप तय हुआ (जैसे 127(4)), उसकी पंक्ति भी देखिए 29
127(6) इस तरह छिपाकर बंद रखना कि उसके अपनों या लोक सेवक को पता न चले 3 साल तक की कैद, बंद रखने की सज़ा के ऊपर अपनी कैद 5 साल से कम; साथ में बंद रखने की जिस धारा में आरोप तय हुआ (जैसे 127(4)), उसकी पंक्ति भी देखिए 29
127(7) संपत्ति ऐंठने, या कोई गैरकानूनी काम करवाने के लिए बंद रखना 3 साल तक की कैद नहीं 29
127(8) अपराध कबूल करवाने या जानकारी उगलवाने, या संपत्ति लौटवाने के लिए बंद रखना 3 साल तक की कैद नहीं 2930
140(1) हत्या के लिए अपहरण उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 31
140(2) अपहरण करके मौत या चोट की धमकी, ताकि सरकार या किसी और से कोई काम करवाया जाए या फिरौती ली जाए मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 31
140(3) किसी को छिपाकर बंद रखने के इरादे से अपहरण 7 साल तक की कैद हाँ 31
140(4) गंभीर चोट, गुलामी या किसी की हवस का शिकार बनाने के लिए अपहरण 10 साल तक की कैद हाँ 31
143(2) मानव तस्करी (trafficking) कम से कम 7 साल की कड़ी कैद, 10 साल तक हाँ 3132
143(3) एक से ज़्यादा व्यक्तियों की तस्करी कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद तक हाँ 32
143(4) बच्चे की तस्करी कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद तक हाँ 32
143(5) एक से ज़्यादा बच्चों की तस्करी कम से कम 14 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद तक हाँ 32
143(6) बच्चे की तस्करी में एक से ज़्यादा बार दोषसिद्धि उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद हाँ 32
143(7) लोक सेवक या पुलिस अधिकारी का तस्करी में शामिल होना उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद हाँ 32
147 भारत सरकार के खिलाफ़ युद्ध छेड़ना, उसका प्रयास, या उसके लिए उकसाना मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 32
152 अलगाव, सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधि भड़काना, या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना उम्रकैद, या 7 साल तक की कैद हाँ 33
309(4) लूट 10 साल तक की कड़ी कैद; राजमार्ग पर सूरज डूबने से उगने के बीच लूट हो, तो 14 साल तक हाँ 34
309(5) लूट का प्रयास 7 साल तक की कड़ी कैद हाँ 34
309(6) लूट या उसके प्रयास में जान-बूझकर चोट पहुँचाना उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 34
310(2) डकैती उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 3435
310(3) डकैती के दौरान हत्या मौत की सज़ा, उम्रकैद, या कम से कम 10 साल की कड़ी कैद हाँ 35
310(4) डकैती की तैयारी 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 35
310(5) डकैती के लिए इकट्ठा पाँच या ज़्यादा लोगों में शामिल होना 7 साल तक की कड़ी कैद हाँ 35
310(6) आदतन डकैती करने वाले गिरोह का सदस्य होना उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 35
318(2) छल (cheating) 3 साल तक की कैद नहीं 3637
318(3) जिसके हित की रक्षा का क़ानूनी या अनुबंध वाला दायित्व था, उसी से छल, यह जानते हुए कि उसका गलत नुकसान होगा 5 साल तक की कैद हाँ (ठीक 5 साल) 37
318(4) छल करके संपत्ति हथियाना, या मूल्यवान प्रतिभूति (valuable security) बनवाना, बदलवाना या नष्ट करवाना 7 साल तक की कैद हाँ 37
336(2) कूटरचना (forgery) 2 साल तक की कैद नहीं 38
336(3) छल के लिए कूटरचना 7 साल तक की कैद हाँ 38
336(4) किसी की बदनामी के लिए कूटरचना 3 साल तक की कैद नहीं 38
338 मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत आदि की कूटरचना उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 39
351(2) आपराधिक धमकी (criminal intimidation) 2 साल तक की कैद नहीं 40
351(3) मौत या गंभीर चोट की, आग से संपत्ति नष्ट करने की, मौत, उम्रकैद या 7 साल तक की सज़ा वाला अपराध करवाने की, या स्त्री के चरित्र पर लांछन की धमकी 7 साल तक की कैद हाँ 4041

भारतीय दंड संहिता (IPC)

भारतीय दंड संहिता, 1860 का पाठ सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमेटी (sclsc.gov.in) की साइट से। 42

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
120B(1) आपराधिक षड्यंत्र, ऐसे अपराध का जिसकी सज़ा मौत, उम्रकैद या 2 साल या ज़्यादा की कड़ी कैद है, और IPC में उस षड्यंत्र की अलग सज़ा नहीं लिखी उस अपराध के दुष्प्रेरण (abetment) जैसी सज़ा; षड्यंत्र के नतीजे में अपराध हो गया हो, तो वही सज़ा जो उस अपराध की है (धारा 109); न हुआ हो, तो धारा 115 या 116 वाली सज़ा अपराध हो गया हो: उस अपराध की पंक्ति देखिए। न हुआ हो: वह अपराध मौत या उम्रकैद वाला हो, तो 7 साल तक की कैद, यानी हाँ; बाकी अपराधों में उसकी सबसे लंबी कैद का एक-चौथाई हिस्सा तक (अपराध रोकने का ज़िम्मा जिस लोक सेवक पर था, वह शामिल हो तो आधा), तो हाँ तभी, जब यह हिस्सा 5 साल या ज़्यादा बने 434445
120B(2) बाकी आपराधिक षड्यंत्र 6 महीने तक की कैद नहीं 43
302 हत्या मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 46
304 हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध मौत या ऐसी चोट के इरादे से: उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद; सिर्फ़ यह जानते हुए कि मौत हो सकती है: 10 साल तक की कैद हाँ 46
304B दहेज मृत्यु कम से कम 7 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 46
307 हत्या का प्रयास 10 साल तक की कैद; चोट पहुँची हो तो उम्रकैद; उम्रकैद भुगत रहे व्यक्ति ने चोट पहुँचाई हो तो मौत की सज़ा हाँ 4647
323 जान-बूझकर चोट पहुँचाना 1 साल तक की कैद नहीं 48
324 खतरनाक हथियार या साधन से जान-बूझकर चोट 3 साल तक की कैद नहीं 48
325 जान-बूझकर गंभीर चोट 7 साल तक की कैद हाँ 48
326 खतरनाक हथियार या साधन से जान-बूझकर गंभीर चोट उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 48
363 अपहरण (kidnapping) 7 साल तक की कैद हाँ 49
364 हत्या के लिए अपहरण उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 49
364A फिरौती आदि के लिए अपहरण मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 4950
376(1) बलात्कार कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद तक हाँ 51
376(2) बलात्कार, उपधारा (2) में गिनाई गई हालतों में कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 5152
376(3) 16 साल से कम उम्र की स्त्री से बलात्कार कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 52
376D सामूहिक बलात्कार कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 53
379 चोरी 3 साल तक की कैद नहीं 54
392 लूट 10 साल तक की कड़ी कैद; राजमार्ग पर सूरज डूबने से उगने के बीच लूट हो, तो 14 साल तक हाँ 55
395 डकैती उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 55
396 डकैती के दौरान हत्या मौत की सज़ा, उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 55
406 आपराधिक न्यासभंग (criminal breach of trust) 3 साल तक की कैद नहीं 56
409 लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी, दलाल, वकील (attorney) या एजेंट द्वारा आपराधिक न्यासभंग उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 56
420 छल करके संपत्ति हथियाना, या मूल्यवान प्रतिभूति बनवाना, बदलवाना या नष्ट करवाना 7 साल तक की कैद हाँ 57
465 कूटरचना 2 साल तक की कैद नहीं 58
466 अदालत के रिकॉर्ड या सरकारी रजिस्टर आदि की कूटरचना 7 साल तक की कैद हाँ 58
467 मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत आदि की कूटरचना उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 58
468 छल के लिए कूटरचना 7 साल तक की कैद हाँ 58
469 किसी की बदनामी के लिए कूटरचना 3 साल तक की कैद नहीं 58
471 कूटरचित दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को जानते हुए असली बताकर इस्तेमाल करना वही सज़ा जो उस दस्तावेज़ की कूटरचना की है जिस कूटरचना की धारा उस दस्तावेज़ पर लगती, उसकी पंक्ति देखिए (धारा 465 से 469) 58
498A पति या पति के रिश्तेदार का स्त्री के साथ क्रूरता करना 3 साल तक की कैद नहीं 59
506, पहला भाग आपराधिक धमकी 2 साल तक की कैद नहीं 60
506, दूसरा भाग मौत या गंभीर चोट की, आग से संपत्ति नष्ट करने की, मौत, उम्रकैद या 7 साल तक की सज़ा वाला अपराध करवाने की, या स्त्री के चरित्र पर लांछन की धमकी 7 साल तक की कैद हाँ 60

इस तालिका में से धारा 376(1), 376(2), 376D और 498A जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 8(1)(a) की सूची में हैं 2। इनमें दोषसिद्धि हो, तो सज़ा सिर्फ़ जुर्माना होने पर भी अयोग्यता बनती है 3; कब तक, यह दोषसिद्धि वाली तालिका में देखिए।

बच्चों से लैंगिक अपराध (POCSO)

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 का पाठ India Code से। 61

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
4(1) बच्चे पर प्रवेशन लैंगिक हमला (penetrative sexual assault, धारा 3) कम से कम 10 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 62
4(2) 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर प्रवेशन लैंगिक हमला कम से कम 20 साल की कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद तक हाँ 62
6(1) गुरुतर (aggravated) प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 5) कम से कम 20 साल की कड़ी कैद, उम्रकैद, यानी बाकी पूरी ज़िंदगी की कैद, या मौत की सज़ा हाँ 63
8 लैंगिक हमला (sexual assault, धारा 7) कम से कम 3 साल की कैद, 5 साल तक हाँ (ठीक 5 साल) 63
10 गुरुतर लैंगिक हमला (धारा 9) कम से कम 5 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 64
12 लैंगिक उत्पीड़न (sexual harassment, धारा 11) 3 साल तक की कैद नहीं 64
14(1) बच्चे का अश्लील सामग्री (pornography) के लिए इस्तेमाल (धारा 13) कम से कम 5 साल की कैद; दोबारा दोषसिद्धि पर कम से कम 7 साल हाँ 65
15(1) बच्चों की अश्लील सामग्री (child pornography) अपने पास रखना, और उसे बाँटने या आगे भेजने के इरादे से न मिटाना, न नष्ट करना, न तय अधिकारी को बताना सिर्फ़ जुर्माना (कम से कम 5,000 रुपये; दोबारा हो तो कम से कम 10,000 रुपये), कैद नहीं नहीं 65
15(2) बच्चों की अश्लील सामग्री आगे भेजने, फैलाने, दिखाने या बाँटने के लिए अपने पास रखना (रिपोर्ट करने या अदालत में सबूत के लिए रखने के सिवा) 3 साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों नहीं 65
15(3) बच्चों की अश्लील सामग्री व्यापार (commercial purpose) के लिए अपने पास रखना पहली बार: कम से कम 3 साल, 5 साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों; दोबारा: कम से कम 5 साल, 7 साल तक की कैद हाँ 65

अनुसूचित जाति और जनजाति पर अत्याचार (SC/ST अधिनियम)

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का पाठ India Code से। 66

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
3(1) धारा 3(1) में गिनाया गया कोई भी अत्याचार, ऐसे व्यक्ति द्वारा जो खुद अनुसूचित जाति या जनजाति का नहीं कम से कम 6 महीने की कैद, 5 साल तक हाँ (ठीक 5 साल) 67686970
3(2)(i) झूठा सबूत देना या गढ़ना, ताकि अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य मौत की सज़ा वाले अपराध में दोषी ठहराया जाए उम्रकैद; उस झूठे सबूत से निर्दोष सदस्य को दोषी ठहराकर फाँसी हो जाए, तो मौत की सज़ा हाँ 70
3(2)(v) IPC का ऐसा अपराध जिसकी सज़ा 10 साल या ज़्यादा है, यह जानते हुए कि पीड़ित अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य है उम्रकैद हाँ 70
4(1) लोक सेवक (जो खुद अनुसूचित जाति या जनजाति का नहीं) का इस अधिनियम और उसके नियमों में सौंपे गए अपने कर्तव्य जान-बूझकर न निभाना कम से कम 6 महीने की कैद, 1 साल तक नहीं 71

नशीले पदार्थ (NDPS अधिनियम)

स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 का पाठ India Code से। 72

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
20(a), सज़ा (i) कैनेबिस (cannabis) का पौधा उगाना 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 7374
20(b)(ii)(A), 21(a), 22(a) कैनेबिस (cannabis, धारा 20), निर्मित ओषधि (manufactured drug, धारा 21) या मनःप्रभावी पदार्थ (psychotropic substance, धारा 22) बनाना, रखना, बेचना, खरीदना, ढोना आदि, कम मात्रा (small quantity) में 1 साल तक की कड़ी कैद, या जुर्माना, या दोनों नहीं 7374
20(b)(ii)(B), 21(b), 22(b) कैनेबिस (cannabis, धारा 20), निर्मित ओषधि (manufactured drug, धारा 21) या मनःप्रभावी पदार्थ (psychotropic substance, धारा 22) बनाना, रखना, बेचना, खरीदना, ढोना आदि, कम मात्रा से ज़्यादा पर व्यावसायिक मात्रा से कम 10 साल तक की कड़ी कैद हाँ 7374
20(b)(ii)(C), 21(c), 22(c) कैनेबिस (cannabis, धारा 20), निर्मित ओषधि (manufactured drug, धारा 21) या मनःप्रभावी पदार्थ (psychotropic substance, धारा 22) बनाना, रखना, बेचना, खरीदना, ढोना आदि, व्यावसायिक मात्रा (commercial quantity) में कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, 20 साल तक हाँ 737475
27A अवैध व्यापार के लिए पैसा लगाना, या ऐसे अपराधियों को पनाह देना कम से कम 10 साल की कड़ी कैद, 20 साल तक हाँ 76

यह पूरा अधिनियम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 8(1)(f) की सूची में है 2। इसलिए इसकी किसी भी धारा में दोषसिद्धि हो, तो सज़ा सिर्फ़ जुर्माना होने पर भी अयोग्यता बनती है 3; कब तक, यह दोषसिद्धि वाली तालिका में देखिए।

भ्रष्टाचार (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 का पाठ India Code से। 77

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
7 लोक सेवक का रिश्वत लेना कम से कम 3 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 78
7A भ्रष्ट या गैरकानूनी तरीके से, या निजी असर से, लोक सेवक पर असर डालने के लिए अनुचित लाभ लेना कम से कम 3 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 78
8 लोक सेवक को रिश्वत देना 7 साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों हाँ 79
11 लोक सेवक का, अपने यहाँ कार्यवाही या काम वाले व्यक्ति से, बिना कुछ दिए अनुचित लाभ लेना कम से कम 6 महीने की कैद, 5 साल तक हाँ (ठीक 5 साल) 80
12 इस अधिनियम के अपराध के लिए उकसाना (abetment) कम से कम 3 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 80
13(2) लोक सेवक का आपराधिक कदाचार: सौंपी गई संपत्ति हड़पना, या पद पर रहते अवैध रूप से धन बढ़ाना (धारा 13(1)) कम से कम 4 साल की कैद, 10 साल तक हाँ 81
14 इस अधिनियम में दोषसिद्धि के बाद फिर इसी अधिनियम का अपराध (आदतन अपराधी) कम से कम 5 साल की कैद, 10 साल तक हाँ 81
15 धारा 13(1)(a) के अपराध (संपत्ति हड़पने) का प्रयास कम से कम 2 साल की कैद, 5 साल तक हाँ (ठीक 5 साल) 81

यह पूरा अधिनियम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 8(1)(m) की सूची में है 3। इसलिए इसकी किसी भी धारा में दोषसिद्धि हो, तो सज़ा सिर्फ़ जुर्माना होने पर भी अयोग्यता बनती है; कब तक, यह दोषसिद्धि वाली तालिका में देखिए।

हथियार (आयुध अधिनियम)

आयुध अधिनियम, 1959 का पाठ India Code से। 82

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
25(1) धारा 5 तोड़कर हथियार या गोला-बारूद बनाना, हासिल करना, बेचना, देना, बदलना, मरम्मत या जाँच करना, या बेचने के लिए रखना; धारा 6 तोड़कर बंदूक की नाल छोटी करना, नकली बंदूक को असली बनाना, या एक श्रेणी की बंदूक को दूसरी में बदलना; धारा 11 तोड़कर हथियार या गोला-बारूद भारत में लाना या बाहर ले जाना कम से कम 7 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 83
25(1A) धारा 7 तोड़कर प्रतिबंधित (prohibited) हथियार या गोला-बारूद हासिल करना, रखना या लेकर चलना कम से कम 7 साल की कैद, 14 साल तक (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत इससे कम भी दे सकती है) हाँ 83
25(1AA) धारा 7 तोड़कर प्रतिबंधित हथियार या गोला-बारूद बनाना, बेचना, देना, बदलना, मरम्मत या जाँच करना, या बेचने के लिए रखना कम से कम 10 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 83
25(1AB) पुलिस या सशस्त्र बलों से ज़बरदस्ती बंदूक छीनना कम से कम 10 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 83
25(1B) बिना लाइसेंस (धारा 3) बंदूक या गोला-बारूद हासिल करना, रखना या लेकर चलना; और उपधारा (1B) में गिनाए बाकी उल्लंघन कम से कम 2 साल की कैद, 5 साल तक (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत इससे कम भी दे सकती है) हाँ (ठीक 5 साल) 8485
25(9) लापरवाही से, या जश्न में (सभा, धार्मिक जगह, शादी आदि में) गोली चलाकर किसी की जान या सुरक्षा खतरे में डालना 2 साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों नहीं 86
26(1) धारा 3, 4, 10 या 12 का उल्लंघन इस तरह छिपाकर करना कि किसी लोक सेवक को, या रेल, विमान, जहाज़, गाड़ी या किसी और सवारी पर काम करने वाले को पता न चले कम से कम 6 महीने की कैद, 7 साल तक हाँ 86
26(2) धारा 5, 6, 7 या 11 का उल्लंघन इसी तरह छिपाकर करना कम से कम 5 साल की कैद, 10 साल तक हाँ 86
27(1) धारा 5 तोड़कर हथियार या गोला-बारूद का इस्तेमाल कम से कम 3 साल की कैद, 7 साल तक हाँ 87
27(2) धारा 7 तोड़कर प्रतिबंधित हथियार या गोला-बारूद का इस्तेमाल कम से कम 7 साल की कैद, उम्रकैद तक हाँ 87
27(3) प्रतिबंधित हथियार या गोला-बारूद का इस्तेमाल, या धारा 7 के खिलाफ़ कोई काम, जिससे किसी और की मौत हो जाए उम्रकैद या मौत की सज़ा हाँ 87
28 अपनी या किसी और की कानूनी गिरफ़्तारी या हिरासत रोकने के इरादे से असली या नकली बंदूक का इस्तेमाल, या उसकी कोशिश 7 साल तक की कैद हाँ 87

दहेज (दहेज प्रतिषेध अधिनियम)

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 का पाठ India Code से। 88

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
3(1) दहेज देना या लेना, या देने-लेने के लिए उकसाना कम से कम 5 साल की कैद, और जुर्माना कम से कम 15,000 रुपये या दहेज की कीमत, जो भी ज़्यादा हो (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) हाँ 89
4 दहेज माँगना कम से कम 6 महीने की कैद, 2 साल तक, और 10,000 रुपये तक जुर्माना (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) नहीं 89
4A शादी के बदले संपत्ति, पैसा या कारोबार में हिस्सा देने का विज्ञापन देना, छापना या बाँटना कम से कम 6 महीने की कैद, 5 साल तक; या 15,000 रुपये तक जुर्माना (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) हाँ (ठीक 5 साल) 8990
6(2) मिला हुआ दहेज तय समय में उस स्त्री को न सौंपना कम से कम 6 महीने की कैद, 2 साल तक; या 5,000 से 10,000 रुपये तक जुर्माना; या दोनों नहीं 90

यह पूरा अधिनियम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 8(2)(c) की सूची में है 3। इसलिए इसमें दोषसिद्धि के साथ कम से कम 6 महीने की कैद हो, तो अयोग्यता बनती है; कब तक, यह दोषसिद्धि वाली तालिका में देखिए।

धन-शोधन (PMLA)

धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 का पाठ India Code से। 91

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
4 धन-शोधन (money-laundering, धारा 3) कम से कम 3 साल की कड़ी कैद, 7 साल तक; अनुसूची के भाग A के पैराग्राफ 2 वाले अपराध से जुड़ा हो, तो 10 साल तक हाँ 92

साइबर अपराध (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम)

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का पाठ India Code से। 93

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
66C पहचान की चोरी (identity theft) 3 साल तक की कैद नहीं 94
66D कंप्यूटर से किसी और का रूप धरकर ठगी 3 साल तक की कैद नहीं 94
66E किसी की मर्ज़ी के बिना, जान-बूझकर उसके निजी अंगों की तस्वीर खींचना, छापना या भेजना (निजता का उल्लंघन) 3 साल तक की कैद, या 2 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों नहीं 94
66F साइबर आतंकवाद उम्रकैद तक हाँ 95
67A यौन क्रिया दिखाने वाली सामग्री इलेक्ट्रॉनिक रूप में छापना या भेजना पहली बार 5 साल तक की कैद; दोबारा 7 साल तक हाँ 95
67B बच्चों को यौन क्रिया में दिखाने वाली सामग्री इलेक्ट्रॉनिक रूप में छापना या भेजना; ऐसी सामग्री बनाना, जुटाना, खोजना, देखना, डाउनलोड करना, उसका विज्ञापन या प्रचार करना, लेना-देना या बाँटना; बच्चों को ऑनलाइन यौन संबंध के लिए फुसलाना; ऑनलाइन बाल शोषण में मदद करना; ऐसे शोषण को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रिकॉर्ड करना पहली बार 5 साल तक की कैद; दोबारा 7 साल तक हाँ 9596

देह व्यापार (अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम)

अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 का पाठ India Code से। 97

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
5(1) वेश्यावृत्ति के लिए किसी को लाना, फुसलाना या ले जाना कम से कम 3 साल की कड़ी कैद, 7 साल तक; उसकी मर्ज़ी के खिलाफ़ हो तो 14 साल तक; बच्चा हो तो कम से कम 7 साल, उम्रकैद तक; नाबालिग हो तो 7 से 14 साल हाँ 98
6(1) किसी को वेश्यालय में रोककर रखना; या किसी जगह इस इरादे से रोककर रखना कि उसका ऐसे व्यक्ति से यौन संबंध हो जो उसका पति या पत्नी नहीं कम से कम 7 साल की कैद, उम्रकैद या 10 साल तक (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) हाँ 99

वन्यजीव (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम)

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का पाठ India Code से। 100

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
51(1), पहला परंतुक अनुसूची I के जानवर, या उसके मांस, ट्रॉफी आदि से जुड़ा अपराध; अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान में शिकार, या उनकी सीमा बदलना; अनुसूची IV के परिशिष्ट I में दर्ज प्रजाति के नमूने (specimen) से जुड़ा अपराध कम से कम 3 साल की कैद, 7 साल तक, और कम से कम 25,000 रुपये जुर्माना हाँ 101

विस्फोटक (विस्फोटक पदार्थ अधिनियम)

विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 का पाठ India Code से। 102

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
3(a) विस्फोटक पदार्थ से ऐसा विस्फोट करना जिससे जान को खतरा हो, या संपत्ति को गंभीर नुकसान हो सकता हो उम्रकैद, या कम से कम 10 साल की कड़ी कैद हाँ 103
3(b) विशेष श्रेणी (special category) के विस्फोटक से ऐसा विस्फोट मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 103
4, खण्ड (i) ऐसे विस्फोट के इरादे से कोई काम या षड्यंत्र, या ऐसे इरादे से विस्फोटक पदार्थ बनाना या रखना उम्रकैद, या 10 साल तक की कैद हाँ 103104

रेल (रेल अधिनियम)

रेल अधिनियम, 1989 का पाठ India Code से। 105

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
150(1) रेल पटरी पर कुछ रखना या फेंकना, पटरी या स्लीपर उखाड़ना, कांटे या सिग्नल से छेड़छाड़, ऐसे इरादे या जानकारी से कि रेल से सफ़र कर रहे या रेल पर मौजूद किसी व्यक्ति की सुरक्षा खतरे में पड़े उम्रकैद, या 10 साल तक की कड़ी कैद (कड़ी कैद हो तो कम से कम 3 साल, दोबारा अपराध में कम से कम 7 साल, जब तक अदालत फ़ैसले में ख़ास कारण न लिखे) हाँ 106
150(2) उपधारा (1) वाला कोई काम, किसी की जान लेने के इरादे से, और उससे किसी की मौत हो जाए; या यह जानते हुए कि वह काम इतना खतरनाक है कि उससे किसी की मौत, या जानलेवा चोट, लगभग तय है मौत की सज़ा या उम्रकैद हाँ 106

सार्वजनिक संपत्ति (लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम)

लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 का पाठ India Code से। 107

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
3(1) सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना (mischief) 5 साल तक की कैद, और जुर्माना हाँ (ठीक 5 साल) 108
3(2) पानी, बिजली या ऊर्जा, तेल, सीवर, खान या कारखाने, सार्वजनिक परिवहन या दूरसंचार से जुड़ी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान कम से कम 6 महीने की कड़ी कैद, 5 साल तक, और जुर्माना (कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) हाँ (ठीक 5 साल) 108
4 आग या विस्फोटक से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान कम से कम 1 साल की कड़ी कैद, 10 साल तक, और जुर्माना (ख़ास कारण फ़ैसले में लिखकर अदालत कैद इससे कम भी दे सकती है) हाँ 109

मृत्यु भोज (राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम)

राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960 का पाठ India Code से। 110

धारा अपराध क़ानून में सज़ा आरोप तय हों तो 19(छछ)
3 और 4 मृत्यु भोज करना, देना, उसमें शामिल होना या हिस्सा लेना; या इसके लिए उकसाना या मदद करना 1 साल तक की कैद, या 1,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों नहीं; पर दोषसिद्धि हो तो धारा 19(ट) 110
6 मृत्यु भोज रोकने के लिए अदालत की निषेधाज्ञा (धारा 5) न मानना 1 साल तक की कैद, या 1,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों नहीं; पर दोषसिद्धि हो तो धारा 19(ट) 110
7(2) सरपंच, पंच, पटवारी या लम्बरदार का, अपने इलाके में मृत्यु भोज होने या उसकी तैयारी की जानकारी पास के मजिस्ट्रेट को तुरंत न देना 3 महीने तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों नहीं; पर दोषसिद्धि हो तो धारा 19(ट) 111

इस अधिनियम में किसी भी दोषसिद्धि पर, सज़ा कितनी भी हो, पंचायत चुनाव की अयोग्यता अलग से बनती है: धारा 19(ट) 5। कब तक, यह दोषसिद्धि वाली तालिका में देखिए।

उदाहरण

हर उदाहरण में संवीक्षा इसी आम चुनाव की है; उम्मीदवार की बातें मान ली गई हैं।

  1. चालान पेश, आरोप तय नहीं: उम्मीदवार पर ऐसे अपराध का मामला है जिसमें 7 साल तक की कैद हो सकती है। पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया है, अदालत ने संज्ञान ले लिया है, पर आरोप अभी तय नहीं हुए। खण्ड (छछ) के लिए आरोप तय होना भी ज़रूरी है, इसलिए फ़ैसला: इस आधार पर स्वीकार। 58
  2. आरोप तय, अधिकतम सज़ा ठीक 5 साल: अदालत ने संज्ञान लेकर ऐसे अपराध में आरोप तय कर दिए हैं जिसमें 5 साल तक की कैद हो सकती है। "five years or more" में ठीक 5 साल भी आता है, इसलिए फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(छछ)। 5
  3. 4 महीने की कैद, धारा 8(1) की सूची का अपराध: Indian Penal Code की धारा 498A में दोषसिद्धि 10.02.2022, 4 महीने की कैद, रिहाई 10.06.2022। कैद 6 महीने से कम है, इसलिए खण्ड (छ) नहीं लगता; पर धारा 498A RPA धारा 8(1) की सूची में है, इसलिए कैद से छूटने के बाद 6 साल, यानी 10.06.2028 तक, वह अयोग्य है; फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(1)। 235
  4. सिर्फ़ जुर्माना, मृत्यु भोज: राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960 के अपराध में दोषसिद्धि 20.08.2023, सज़ा सिर्फ़ जुर्माना। खण्ड (ट) में सज़ा की कोई सीमा नहीं, और दोषसिद्धि से 6 साल, यानी 20.08.2029 तक, वह अयोग्य है; फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(ट)। 510
  5. सिर्फ़ जुर्माना, सूची के बाहर का अपराध: ऐसे अपराध में दोषसिद्धि जो RPA धारा 8(1) या 8(2) की सूची में नहीं, और मृत्यु भोज का भी नहीं; सज़ा सिर्फ़ जुर्माना। न 6 महीने की कैद है (खण्ड (छ)), न 2 साल की (RPA 8(3)); फ़ैसला: इस आधार पर स्वीकार। 53
  6. दहेज का अपराध, 8 महीने की कैद: दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 4 (दहेज माँगना) में दोषसिद्धि 01.03.2022, 8 महीने की कैद, रिहाई 01.11.2022। खण्ड (छ) दोषसिद्धि से 6 साल, यानी 01.03.2028 तक; RPA धारा 8(2) कैद से छूटने के बाद 6 साल, यानी 01.11.2028 तक। जो बाद में खत्म हो, वह तारीख: 01.11.2028; फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(छ) और धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(2)। 89510311
  7. अपील में बरी: निचली अदालत ने एक साल की कैद दी थी, पर अपील में ऊपर की अदालत ने दोषसिद्धि और सज़ा पलट दी, और उम्मीदवार वह फ़ैसला दिखाता है। खण्ड (छ) सिर्फ़ उस सज़ा पर है जो बाद में पलटी न गई हो; फ़ैसला: इस आधार पर स्वीकार। 5

खुद जाँचिए

  1. सवाल: उम्मीदवार के खिलाफ़ FIR दर्ज है और वह ज़मानत पर है। जवाब: इस आधार पर अस्वीकार नहीं; खण्ड (छछ) के लिए अदालत का संज्ञान और आरोप तय होना, दोनों चाहिए। 5
  2. सवाल: आरोप तय हो चुके हैं, अपराध में 3 साल तक की कैद हो सकती है। जवाब: खण्ड (छछ) नहीं लगता; 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाला अपराध चाहिए। 5
  3. सवाल: पिछले साल किसी अपराध में 5 महीने की कैद हुई थी; अपराध RPA धारा 8(1) या 8(2) की सूची में नहीं, और मृत्यु भोज का भी नहीं। जवाब: इस आधार पर स्वीकार; खण्ड (छ) के लिए कम से कम 6 महीने की कैद सुनाई जानी चाहिए। 53
  4. सवाल: वही 5 महीने की कैद, पर अपराध RPA धारा 8(1) की सूची का है। जवाब: अस्वीकार; धारा 8(1) में कैद कितनी भी हो, अयोग्यता कैद से छूटने के बाद 6 साल तक रहती है। 36
  5. सवाल: उम्मीदवार कहता है कि उसकी अपील हाई कोर्ट में लंबित है और वह ज़मानत पर है। जवाब: सिर्फ़ इतने से अयोग्यता नहीं हटती; अपीलीय न्यायालय का आदेश देखिए; अपील लंबित रहते अयोग्यता तभी हटती है जब रोक दोषसिद्धि पर ही लगी हो। 71213

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स्रोत

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  1. 1.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 1 पाठ में
  2. 2.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 19कखगघङ
  3. 3.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 20कखगघङचछजझञटठडढणतथदधन
  4. 4.आदेश 10055, दि. 06.10.2026, पृ. 1कखगघ
  5. 5.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 61कखगघङचछजझञटठडढणतथदधनपफबभमयरलवशसह3334
  6. 6.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 60कखगघ
  7. 7.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 28कखगघ
  8. 8.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 30कखगघङ
  9. 9.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 101कख
  10. 10.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 62कखगघङच
  11. 11.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 29कखग
  12. 12.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 12कख
  13. 13.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 13कख
  14. 14.राजस्थान हाई कोर्ट: आपराधिक स्थगन 10247/2026, भंवर सिंह बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 4 पाठ में
  15. 15.आदेश 793, दि. 20.01.2026, संकलन पृ. 432, 433 पाठ में
  16. 16.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 1 पाठ में
  17. 17.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 35कख
  18. 18.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 32 पाठ में
  19. 19.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 33 पाठ में
  20. 20.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 34 पाठ में
  21. 21.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 37कख
  22. 22.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 38कखग
  23. 23.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 39कखग
  24. 24.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 41 पाठ में
  25. 25.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 47कखगघङचछ
  26. 26.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 48कखग
  27. 27.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 49कखगघङचछज
  28. 28.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 51कखग
  29. 29.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 54कखगघङचछ
  30. 30.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 55 पाठ में
  31. 31.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 58कखगघङ
  32. 32.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 59कखगघङचछ
  33. 33.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 60 पाठ में
  34. 34.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 91कखगघ
  35. 35.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 92कखगघङ
  36. 36.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 95 पाठ में
  37. 37.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 96कखग
  38. 38.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 103कखग
  39. 39.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 104 पाठ में
  40. 40.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 106कख
  41. 41.भारतीय न्याय संहिता, 2023, पृ. 107 पाठ में
  42. 42.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 14 पाठ में
  43. 43.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 35कख
  44. 44.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 31 पाठ में
  45. 45.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 33 पाठ में
  46. 46.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 71कखगघ
  47. 47.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 72 पाठ में
  48. 48.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 74कखगघ
  49. 49.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 81कखग
  50. 50.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 82 पाठ में
  51. 51.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 85कख
  52. 52.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 86कख
  53. 53.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 87 पाठ में
  54. 54.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 89 पाठ में
  55. 55.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 91कखग
  56. 56.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 94कख
  57. 57.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 96 पाठ में
  58. 58.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 103कखगघङच
  59. 59.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 108 पाठ में
  60. 60.भारतीय दण्ड संहिता, 1860, पृ. 111कख
  61. 61.लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), पृ. 1 पाठ में
  62. 62.लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), पृ. 6कख
  63. 63.लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), पृ. 8कख
  64. 64.लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), पृ. 10कख
  65. 65.लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), पृ. 11कखगघ
  66. 66.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 1 पाठ में
  67. 67.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 6 पाठ में
  68. 68.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 7 पाठ में
  69. 69.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 8 पाठ में
  70. 70.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 9कखग
  71. 71.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, पृ. 10 पाठ में
  72. 72.स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS), पृ. 1 पाठ में
  73. 73.स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS), पृ. 18कखगघ
  74. 74.स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS), पृ. 19कखगघ
  75. 75.स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS), पृ. 20 पाठ में
  76. 76.स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS), पृ. 21 पाठ में
  77. 77.भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पृ. 1 पाठ में
  78. 78.भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पृ. 8कख
  79. 79.भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पृ. 9 पाठ में
  80. 80.भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पृ. 10कख
  81. 81.भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पृ. 11कखग
  82. 82.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 1 पाठ में
  83. 83.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 17कखगघ
  84. 84.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 5 पाठ में
  85. 85.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 18 पाठ में
  86. 86.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 20कखग
  87. 87.आयुध अधिनियम, 1959, पृ. 21कखगघ
  88. 88.दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, पृ. 1 पाठ में
  89. 89.दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, पृ. 5कखगघ
  90. 90.दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, पृ. 6कख
  91. 91.धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA), पृ. 1 पाठ में
  92. 92.धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA), पृ. 10 पाठ में
  93. 93.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, पृ. 1 पाठ में
  94. 94.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, पृ. 26कखग
  95. 95.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, पृ. 27कखग
  96. 96.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, पृ. 28 पाठ में
  97. 97.अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956, पृ. 1 पाठ में
  98. 98.अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956, पृ. 6 पाठ में
  99. 99.अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956, पृ. 7 पाठ में
  100. 100.वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, पृ. 1 पाठ में
  101. 101.वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, पृ. 51 पाठ में
  102. 102.विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908, पृ. 1 पाठ में
  103. 103.विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908, पृ. 2कखग
  104. 104.विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908, पृ. 3 पाठ में
  105. 105.रेल अधिनियम, 1989, पृ. 1 पाठ में
  106. 106.रेल अधिनियम, 1989, पृ. 55कख
  107. 107.लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984, पृ. 1 पाठ में
  108. 108.लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984, पृ. 4कख
  109. 109.लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984, पृ. 5 पाठ में
  110. 110.राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960, पृ. 1कखग
  111. 111.राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960, पृ. 2 पाठ में