नामांकन की संवीक्षा: अयोग्यता की जाँच
WhatsApp: +91-7357578216
पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और ज़िला परिषद सदस्य के नामांकन पत्र जाँचते समय किस आधार पर नामांकन अस्वीकार हो सकता है, कौन-सा काग़ज़ क्या साबित करता है, और किन बातों पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। यह पेज संवीक्षा करने वाले रिटर्निंग अधिकारी (RO) और सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) के लिए है, और प्रशिक्षकों के लिए भी। अधिनियम का नया संशोधन, आयोग के आदेश और अदालती फ़ैसले भी इसमें शामिल हैं। संवीक्षा की जाँच-सूची: पंच और सरपंच के लिए संवीक्षा (पंच, सरपंच), पंचायत समिति और ज़िला परिषद सदस्य के लिए संवीक्षा (ज़िला परिषद, पंचायत समिति)।
संवीक्षा कैसे होती है
- एक ही दिन (पंच, सरपंच): आयोग के आदेश 9809 (02.10.2026) के अनुसार पंच और सरपंच के नामांकन पत्र लेना, उनकी संवीक्षा और नाम वापसी, तीनों काम रिटर्निंग अधिकारी एक ही दिन करवाएँगे, पंचायत मुख्यालय के पंचायत भवन में या ज़िला निर्वाचन अधिकारी की तय जगह पर। 3
- कौन बैठ सकता है: जाँच के समय सिर्फ़ उम्मीदवार खुद आ सकते हैं, कोई और नहीं। 11 रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवारों को उनके दिए नामांकन पत्र देखने की हर उचित सुविधा देंगे। 11
- अस्वीकार करने के चार आधार (नियम 27(3)): रिटर्निंग अधिकारी सारी आपत्तियों पर फ़ैसला करेंगे, और आपत्ति पर या खुद अपनी ओर से, सिर्फ़ इन आधारों पर नामांकन पत्र अस्वीकार कर सकते हैं: उम्मीदवार चुनाव के लिए योग्य नहीं है या अयोग्य है (धारा 19, नीचे खण्ड-वार अयोग्यता); वह वही व्यक्ति नहीं है जिसका नाम या नंबर मतदाता सूची में बताया गया है; उसके हस्ताक्षर या अँगूठे का निशान असली नहीं है, या धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से लिया गया है; या नियम 25 का पालन नहीं हुआ है। 11
- फ़ैसला लिखना: हर नामांकन पत्र पर स्वीकार या अस्वीकार का फ़ैसला लिखिए; अस्वीकार करें तो उसके कारण भी संक्षेप में लिखिए। 11
- उसी दिन पूरा: संवीक्षा उसी दिन पूरी होगी; कार्यवाही आगे के लिए टाली नहीं जा सकती। 11
- पंचायत समिति और ज़िला परिषद: इनके सदस्यों के चुनाव में भी पंच-सरपंच वाले नियम, ज़रूरत के हिसाब से बदलाव के साथ, लागू होते हैं: मतपेटी से चुनाव हो तो नियम 24-क से 54 तक, और वोटिंग मशीन से हो तो नियम 24-क से 31 और आगे के कुछ नियम। 12 दोनों में नियम 27 आता है, यानी यही संवीक्षा यहाँ भी होती है। 12
काग़ज़ों की जाँच: क्या माँगें, क्या नहीं
पंच और सरपंच के लिए आयोग का आदेश 10055 (06.10.2026) है, और पंचायत समिति और ज़िला परिषद सदस्य के लिए आयोग का आदेश 10062 (06.10.2026)। 45 दोनों की ज़्यादातर बातें एक जैसी हैं। हर बात के आगे उस आदेश का हवाला है जिसमें वह लिखी है, और जहाँ फ़र्क़ है (जैसे जमानत राशि), वहाँ अलग लिखा है। पूरी सूची: नामांकन के साथ कौन-से काग़ज़।
- नामांकन पत्र: सारी प्रविष्टियाँ भरी हों, कोई कॉलम खाली न हो; अपवाद एक ही है, संतान संबंधी योग्यता वाला हिस्सा खाली रह सकता है (पंचायत समिति और ज़िला परिषद में यही बात प्ररूप 4-क के लिए)। 45
- सादे काग़ज़ पर हाथ से उतारकर बनाए गए नामांकन पत्र और उसके साथ के प्ररूप या पत्र स्वीकार नहीं होंगे; फ़ॉर्म में जानकारी हाथ से भरी हो या कंप्यूटर पर टाइप करके छापी गई हो, वह चलेगा। 13 देखिए: कौन-सी कॉपी चलेगी।
- प्ररूप 4-घ के चार बिन्दु हैं: (1) लंबित आपराधिक मामले, (2) आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि, (3) संतान संबंधी जानकारी, (4) सम्पत्ति। 45 बिन्दु 3 के बारे में आदेश कहता है: "वर्तमान में संतान संबंधी योग्यता के प्रावधान विलोपित कर दिये गये है। अतः सूचना प्रस्तुत करनी आवश्यक नहीं है।" 45
- बिन्दु 1 और 2 से उम्मीदवार की योग्यता या अयोग्यता तय होती है; बिन्दु 3 और 4 की जानकारी सिर्फ़ मतदाताओं के लिए है, उसके आधार पर योग्यता या अयोग्यता तय नहीं होती। 4 देखिए: प्ररूप 4घ।
- 4-घ में देखिए: बिन्दु 1 में ऐसा मामला तो नहीं जिसमें 5 साल या ज़्यादा की सज़ा हो सकती है और अदालत ने संज्ञान लेकर आरोप तय कर दिए हैं (धारा 19(छछ)); 14 बिन्दु 2 में ऐसी दोषसिद्धि तो नहीं जो अभी भी रोकती है (धारा 19(क), 19(छ), 19(ट))। 1516
- शपथ पत्र: सरपंच के लिए उपाबन्ध-I B, और पंचायत समिति या ज़िला परिषद सदस्य के लिए उपाबन्ध-I A; इनमें सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के क्रम में लंबित मामलों, सम्पत्ति और देनदारी (dues) की जानकारी है। 45
- उपाबन्ध-I B 50 रुपये के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर, नामांकन पत्र के साथ लगेगा। 4 यह न्यायाधीश, न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय के नियुक्त शपथ कमिश्नर, या नोटरी पब्लिक के सामने प्रमाणित हो, और इसका कोई कॉलम खाली न हो। 4 देखिए: शपथ पत्र।
- खाली कॉलम: नामांकन पत्र या उसके साथ के घोषणा पत्र या शपथ पत्र में कोई कॉलम खाली हो (संतान वाले को छोड़कर), तो रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवार को इस बारे में एक मीमो देंगे। 1317 पहले दिए शपथ पत्र में काट-छाँट या सुधार कानूनी तौर पर पूरा नहीं माना जाएगा; आपत्ति दूर करने के लिए अलग से नया शपथ पत्र देना होगा। 1317 मीमो मिलने के बाद भी कॉलम न भरा जाए, या ज़रूरी अलग शपथ पत्र न दिया जाए, तो नामांकन पत्र अस्वीकार करने लायक होगा। 1317 देखिए: खाली कॉलम: मीमो, फिर अलग शपथ पत्र।
- शौचालय की घोषणा: घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय होने और खुले में शौच न जाने की घोषणा या अंडरटेकिंग, आयोग के तय प्ररूप में, नामांकन पत्र के साथ जमा करनी ज़रूरी है। 1819 इसे प्रमाणित (attest) करवाने की ज़रूरत नहीं है। 1819 देखिए: शौचालय की घोषणा।
- नो-ड्यूज: जिस उम्मीदवार पर धारा 19(झ) या 19(ड) में कोई रकम बकाया नहीं है, उसे किसी तरह का नो-ड्यूज देने की ज़रूरत नहीं। 1819 बकाया हो और नामांकन पत्र देने से पहले जमा करवा दिया हो, और जमा की रसीद या नो-ड्यूज सबूत के तौर पर दे, तो वह अयोग्य नहीं होगा। 1819 देखिए: नो-ड्यूज: कब चाहिए, कब नहीं।
- चरित्र प्रमाण पत्र लगाने की ज़रूरत नहीं। 1819
- जाति प्रमाण पत्र: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का उम्मीदवार आरक्षित वार्ड से नामांकन दे, तो कलक्टर या राज्य सरकार के प्राधिकृत अधिकारी का जारी जाति प्रमाण पत्र लगाएगा। 1811 ऐसे वर्ग के उम्मीदवार को सामान्य वार्ड से चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। 11 देखिए: चरित्र और जाति प्रमाण पत्र।
- कोई पुरुष उम्मीदवार महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड से नामांकन नहीं दे सकता। 1811
- जमानत, सरपंच (पंच के लिए नहीं): नियम 56(3) के अनुसार सामान्य वर्ग 500 रुपये; महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग 250 रुपये। 18 राशि जमा करके रसीद भी लगानी ज़रूरी है। 18
- जमानत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद सदस्य: नियम 58 के अनुसार यही 500 और 250 रुपये, रसीद के साथ। 1912 ऐसे वर्ग का उम्मीदवार सामान्य वार्ड से लड़े और जमानत में रियायत (500 की जगह 250 रुपये) चाहे, तो कलक्टर या राज्य सरकार के प्राधिकृत अधिकारी का जाति प्रमाण पत्र लगाना होगा। 19 देखिए: जमानत राशि।
- प्रस्तावक (पंचायत समिति और ज़िला परिषद): मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के उम्मीदवार का एक प्रस्तावक, 20 और बाकी उम्मीदवारों के उसी निर्वाचन क्षेत्र के 5 मतदाता प्रस्तावक। 20 एक मतदाता एक से ज़्यादा उम्मीदवार का प्रस्तावक नहीं बन सकता; बना हो तो रिटर्निंग अधिकारी को पहले मिले नामांकन के अलावा बाकी सब अवैध घोषित होंगे। 20 नामांकन प्ररूप IV-A में होता है, प्ररूप IV-D के साथ। 20
- सांख्यिकी सूचना का फ़ॉर्म भरवाइए, पर न देने पर नामांकन पत्र खारिज नहीं होगा। 1317 देखिए: सांख्यिकी सूचना का फ़ॉर्म।
धारा 19: खण्ड-वार अयोग्यता
पंचायतीराज संस्था की मतदाता सूची में जिसका नाम है, वह पंच या सदस्य का चुनाव लड़ सकता है, जब तक नीचे के किसी खण्ड में अयोग्य न हो। 1521 हर खण्ड के आगे पहले अधिनियम का प्रावधान है, फिर जाँच का तरीका।
- खण्ड (क): जो व्यक्ति उस समय लागू किसी कानून से राजस्थान विधानसभा के चुनाव के लिए अयोग्य है, वह यहाँ भी अयोग्य है; पर 21 साल पूरे कर चुके व्यक्ति को सिर्फ़ इस आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा कि वह 25 साल से कम है। 1521
- उम्र: संवीक्षा के दिन 21 साल पूरे होने चाहिए। 22 मतदाता सूची में लिखी उम्र सिर्फ़ अनुमानित होती है, इसलिए उसे नामांकन के लिए प्रमाणित उम्र नहीं माना जा सकता; असली उम्र मानी जाती है, जैसे स्कूल प्रमाण पत्र वाली। नामांकन पत्र में भी असली उम्र ही लिखी जाती है, अनुमानित नहीं, और उम्र से पात्रता पर असर पड़ता हो तो संवीक्षा के समय उस पर आपत्ति हो सकती है। 22
- संविधान के अनुच्छेद 191 से: भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद रखने वाला, सक्षम न्यायालय से विकृतचित (मानसिक रूप से अस्वस्थ) घोषित व्यक्ति, अनुन्मोचित दिवालिया, और जो भारत का नागरिक नहीं है, वह अयोग्य है। 21 पर राजस्थान विधानसभा सदस्य (निरर्हता-निराकरण) अधिनियम, 1956 के तहत राज्य सरकार के मंत्री, मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक, संसदीय सचिव या अवर संसदीय सचिव, और विधानसभा में विपक्ष के नेता आदि के पद अनुच्छेद 191 वाले लाभ के पद में शामिल नहीं हैं। 21
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 8 से: नीचे की तालिका देखिए। राज्य सरकार धारा 19 के खण्ड (ग), (छ) या (ट) की अयोग्यता हटा भी दे, तब भी RPA धारा 8, 8-क, 9, 9-क, 10 या 10-क की अयोग्यता हो तो उम्मीदवार अयोग्य ही रहेगा। 2123
| RPA धारा 8 | किस अपराध में | कितनी सज़ा पर | कब तक अयोग्य |
|---|---|---|---|
| उपधारा (1) | उपधारा (1) में बताए गए अपराध: नीचे की पहली सूची, खण्ड (a) से (n) | सिर्फ़ जुर्माना, या कैद | सिर्फ़ जुर्माना: दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल। कैद: दोषसिद्धि की तारीख से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक। |
| उपधारा (2) | उपधारा (2) में बताए गए अपराध: नीचे की दूसरी सूची, खण्ड (a) से (c) | 6 महीने या ज़्यादा की सज़ा | दोषसिद्धि की तारीख से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक। |
| उपधारा (3) | उपधारा (1) और (2) वाले अपराधों के अलावा कोई भी अपराध | 2 साल या ज़्यादा की सज़ा | दोषसिद्धि की तारीख से, और कैद से छूटने के बाद 6 साल तक। |
स्रोत: मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 28
RPA धारा 8(1) के अपराध: इनमें से किसी कानून या धारा के अपराध में दोषसिद्धि हुई हो, तो सज़ा सिर्फ़ जुर्माना हो तब भी अयोग्यता लगती है। 2425
- (a) Indian Penal Code, 1860: धारा 153A (धर्म, नस्ल, जन्म-स्थान, निवास, भाषा वगैरह के आधार पर अलग-अलग समूहों में दुश्मनी फैलाना, और आपसी सद्भाव बिगाड़ने वाले काम); धारा 171E (रिश्वत); धारा 171F (चुनाव में अनुचित प्रभाव डालना या किसी और का रूप धरना, यानी undue influence या personation); धारा 376 की उपधारा (1) या (2), धारा 376A, 376B, 376C या 376D (बलात्कार से जुड़े अपराध); धारा 498A (पति या पति के रिश्तेदार की ओर से स्त्री के साथ क्रूरता); धारा 505 की उपधारा (2) या (3) (वर्गों के बीच दुश्मनी, नफ़रत या वैमनस्य फैलाने वाला बयान, या ऐसा बयान किसी पूजा-स्थल में, या पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यक्रम में लगी सभा में)। 2426
- (b) Protection of Civil Rights Act, 1955: यह कानून "छुआछूत" का प्रचार करने और उसे बरतने की, और उससे पैदा होने वाली किसी भी पाबंदी को लागू करने की सज़ा देता है। 26
- (c) Customs Act, 1962 की धारा 11 (मनाही वाले सामान का आयात या निर्यात)। 26
- (d) Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 की धारा 10 से 12 (गैर-कानूनी घोषित संगठन का सदस्य होना, ऐसे संगठन के पैसे का लेन-देन, या अधिसूचित जगह के बारे में दिए आदेश का उल्लंघन)। 26
- (e) Foreign Exchange (Regulation) Act, 1973। 26
- (f) Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985। 26
- (g) Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act, 1987 की धारा 3 (आतंकवादी काम करना) या धारा 4 (विध्वंसक काम करना)। 26
- (h) Religious Institutions (Prevention of Misuse) Act, 1988 की धारा 7 (उसी कानून की धारा 3 से 6 का उल्लंघन)। 26
- (i) खुद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951: धारा 125 (चुनाव के सिलसिले में वर्गों के बीच दुश्मनी फैलाना), धारा 135 (मतदान केन्द्र से मतपत्र हटाना), धारा 135A (बूथ कैप्चरिंग), या धारा 136 की उपधारा (2) का खण्ड (a) (किसी नामांकन पत्र को धोखे से बिगाड़ना या नष्ट करना)। 26
- (j) Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 की धारा 6 (पूजा-स्थल का रूपांतरण, यानी conversion)। 26
- (k) Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 की धारा 2 (राष्ट्रीय ध्वज या भारत के संविधान का अपमान) या धारा 3 (राष्ट्रगान गाने से रोकना)। 26
- (l) Commission of Sati (Prevention) Act, 1987। 26
- (m) Prevention of Corruption Act, 1988। 26
- (n) Prevention of Terrorism Act, 2002। 25
RPA धारा 8(2) के अपराध: इनके उल्लंघन में दोषसिद्धि हुई हो और कम से कम 6 महीने की कैद की सज़ा मिली हो। 25
- (a) जमाखोरी या मुनाफ़ाखोरी रोकने वाला कोई भी कानून। 25
- (b) खाने की चीज़ों या दवाओं में मिलावट से जुड़ा कोई भी कानून। 25
- (c) Dowry Prohibition Act, 1961 (दहेज का कानून) का कोई भी प्रावधान। 25
- खण्ड (कक): इस अधिनियम या इसके नियमों के तहत दायर चुनाव याचिका पर सक्षम न्यायालय के आदेश से भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया गया हो। 15 यह अयोग्यता उस आदेश की तारीख से 6 साल तक रहती है। 27
- खण्ड (ख): किसी स्थानीय प्राधिकारी, विश्वविद्यालय, या राज्य सरकार के नियंत्रण वाले या उससे पूरा या आंशिक पैसा पाने वाले किसी निगम, निकाय, उपक्रम या सहकारी समिति में वेतन वाली पूरे समय की या आंशिक समय की नियुक्ति पर हो। 1523
- सरकारी कर्मचारी: जो संवीक्षा के दिन केन्द्र सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी का पूरे समय या आंशिक समय का वेतन पाने वाला कर्मचारी है, वह चुनाव नहीं लड़ सकता। 23 ऐसा व्यक्ति नामांकन दे तो संवीक्षा के समय उससे सक्षम अधिकारी के जारी किए त्यागपत्र स्वीकृति आदेश की प्रमाणित प्रति माँगिए; यह आदेश संवीक्षा की तारीख से पहले के दिन तक का होना चाहिए, उसी दिन का नहीं; और प्रति न दे तो नामांकन अस्वीकार कीजिए और यही कारण लिखिए। 23
- पंच और सरपंच के लिए नामांकन, संवीक्षा और नाम वापसी एक ही दिन होती है, 3 ऊपर का नियम संवीक्षा के दिन से पहले की स्वीकृति माँगता है, और पंच-सरपंच में संवीक्षा नामांकन वाले दिन ही होती है; इसलिए वहाँ त्यागपत्र स्वीकृति का आदेश नामांकन वाले दिन से पहले का होना चाहिए। 233 देखिए: सरकारी कर्मचारी नामांकन भरे।
- लाभ का पद: संविदा, नियत मानदेय या किसी योजना के पद पर काम करने वाले उम्मीदवार के बारे में आयोग ने नागौर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र 10297 (09.10.2026) में कहा कि संवीक्षा के समय फ़ैसला सर्वोच्च न्यायालय के Pradyut Bardoloi v. Swapon Roy (2001) 2 SCC 1 में तय परीक्षण से करना उचित होगा। 628 पाँच परीक्षण: क्या नियुक्ति सरकार ने की है; क्या सरकार को उसे हटाने का अधिकार है; क्या उस पद से कोई वेतन, मानदेय या दूसरा आर्थिक लाभ जुड़ा है; पद पर रहने वाला क्या काम करता है; और सरकार उस पद पर कितना नियंत्रण रखती है। 28
- Jaya Bachchan v. Union of India (2006) 5 SCC 266 के अनुसार यह निर्णायक नहीं कि सच में कोई आर्थिक लाभ मिला या नहीं; देखना यह है कि वह पद आर्थिक लाभ या मानदेय दे सकता है या नहीं। 28
- लाभ के पद पर शक हो तो उस पद का नियुक्ति पत्र, सेवा शर्तें, वेतन या मानदेय, और सरकारी नियंत्रण देखिए। 28 पत्र और फ़ैसले विस्तार से: आयोग का पत्र 10297, प्रद्युत बोरदोलोई, जया बच्चन।
- खण्ड (ग): नैतिक अधमता वाले कदाचार के लिए राज्य सरकार की सेवा से बर्खास्त हुआ हो और लोक सेवा में नौकरी के लिए अयोग्य घोषित हुआ हो। 15 बर्खास्तगी की तारीख से 6 साल बीतने पर वह फिर योग्य है। 27
- खण्ड (घ): किसी भी पंचायतीराज संस्था के अधीन वेतन वाला पद या लाभ का पद रखता हो। 1523
- खण्ड (ङ): संबंधित पंचायतीराज संस्था के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी ठेके में, खुद या अपने साझेदार, नियोजक या कर्मचारी के ज़रिये, सीधे या परोक्ष रूप से कोई हिस्सा या हित रखता हो। 1523 अपवाद: किसी निगमित कंपनी, या राजस्थान में लागू कानून के तहत पंजीकृत सहकारी समिति का शेयरधारक या सदस्य होने भर से, उस कंपनी या समिति और पंचायतीराज संस्था के बीच के ठेके में उसे हित रखने वाला नहीं माना जाएगा। 27
- खण्ड (च): ऐसे शारीरिक या मानसिक दोष या रोग से पीड़ित हो जिससे वह काम करने लायक न रहे। 15
- खण्ड (छ): सक्षम न्यायालय ने किसी अपराध में दोषी ठहराकर 6 महीने या ज़्यादा की कैद दी हो, और वह सज़ा बाद में न पलटी गई हो, न माफ़ हुई हो, न अपराधी को क्षमा मिली हो। 16 दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल बीतने पर वह फिर योग्य है। 27
- (छ) के साथ RPA भी देखिए: (छ) के 6 साल दोषसिद्धि से गिने जाते हैं, पर खण्ड (क) से RPA धारा 8 भी लगती है: धारा 8(1) वाले अपराध में कैद की कोई भी सज़ा, धारा 8(2) वाले अपराध में 6 महीने या ज़्यादा, या किसी और अपराध में 2 साल या ज़्यादा की सज़ा हो, तो अयोग्यता कैद से छूटने के बाद 6 साल तक चलती है। 2123 ये दोनों अयोग्यताएँ अलग-अलग लगती हैं; मार्गदर्शिका के नोट में लिखा है: "राज्य सरकार द्वारा उक्त धारा 19 के खण्ड (ग) (छ) एवं (ट) की अयोग्यता को हटा देने के बावजूद भी यदि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951, की धारा 8, 8-क, 9, 9-क, 10 या 10-क के अंतर्गत कोई अपात्रता है तो अपात्रता ही मानी जायेगी"। 23 इसलिए दोनों में जो बाद में खत्म हो, उस तारीख तक उम्मीदवार अयोग्य है। सज़ा के हिसाब से पूरी तालिका: दोषसिद्धि हुई हो तो: कौन-सा खण्ड, कब तक।
- खण्ड (छछ): ऐसे अपराध का मुकदमा चल रहा हो जिसकी सज़ा 5 साल या ज़्यादा की कैद हो सकती है, और सक्षम न्यायालय ने संज्ञान लेकर उसके खिलाफ़ आरोप तय कर दिए हों। 1614 दोनों बातें ज़रूरी हैं: संज्ञान भी, और आरोप तय होना भी; यह जानकारी प्ररूप 4-घ की घोषणा से मिलेगी। 14 FIR से फ़ैसले तक हर अवस्था पर क्या करें: मुकदमे की हर अवस्था पर फ़ैसला।
- खण्ड (ज): धारा 38 के तहत फ़िलहाल चुनाव के लिए अयोग्य हो। 16
- खण्ड (झ): संबंधित पंचायतीराज संस्था का लगाया कोई कर या फ़ीस, माँग का नोटिस प्रस्तुत किए जाने की तारीख से दो महीने तक नहीं चुकाया हो। 161418 छूट: नामांकन पत्र भरने की तारीख से पहले वह कर या फ़ीस चुका दी हो, तो वह अयोग्य नहीं माना जाएगा; 27 इसके सबूत में वह जमा की रसीद या नो-ड्यूज देगा। 18 जिस पर कोई रकम बकाया नहीं, उसे नो-ड्यूज देने की ज़रूरत नहीं। 1819
- खण्ड (ञ): संबंधित पंचायतीराज संस्था की ओर से या उसके खिलाफ़ वकील के रूप में नियुक्त हो। 1614
- खण्ड (ट): राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम, 1960 के अपराध में दोषसिद्ध हुआ हो। 16 दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल बीतने पर वह फिर योग्य है। 27
- खण्ड (ठ), संतान वाली अयोग्यता, हटा दिया गया है: राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2026 (अधिनियम 6/2026) ने खण्ड (ठ), परन्तुक का खण्ड (iv) और स्पष्टीकरण-I हटा दिए, और यह अधिनियम "तुरन्त प्रवृत्त" हुआ। 729 यह अधिनियम राजपत्र में 27.03.2026 को छपा, 7 और आयोग ने पत्र 4795 (13.07.2026) से ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को इसकी सूचना दी। 1
- इसलिए बच्चों की संख्या पर कोई आपत्ति आए तो उस आधार पर नामांकन अस्वीकार नहीं होगा। 17 आयोग के आदेश 10055 और 10062 (06.10.2026) के अनुसार प्ररूप 4-घ का बिन्दु 3 (संतान) भरना ज़रूरी नहीं। 45
- खण्ड (ड): पहले किसी पंचायतीराज संस्था का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष (सरपंच, उपसरपंच, प्रधान, उप प्रधान, प्रमुख या उप प्रमुख) रहा हो, संस्था के बकाये (dues) का नोटिस विधिवत मिलने के दो महीने बाद भी न चुकाया हो, और चुनाव की अधिसूचना से कम से कम दो महीने पहले राज्य सरकार की कलक्टर (पंचायत) को भेजी बकायादारों की सूची में उसका नाम हो। 163018 छूट: नामांकन पत्र भरने से पहले बकाया चुका दे, तो वह अयोग्य नहीं; सबूत में रसीद या नो-ड्यूज दे। 2718
- खण्ड (ढ): अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर उम्मीदवार उस जाति, जनजाति या वर्ग का न हो। 1630
- खण्ड (ण): महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर उम्मीदवार महिला न हो। 1618
- खण्ड (त): अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर ऐसा उम्मीदवार लड़े जो उस वर्ग की महिला नहीं है। 1630 यानी महिला होना और उसी वर्ग का होना, दोनों ज़रूरी हैं; दूसरे वर्ग की महिला भी वहाँ चुनाव नहीं लड़ सकती। 1630
- खण्ड (थ): घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय न हो, और परिवार का कोई सदस्य खुले में शौच जाता हो; दोनों बातें साथ हों। 1630 "स्वच्छ शौचालय" यानी तीन दीवारों, एक दरवाज़े और छत से घिरी जलबंद (water sealed) शौचालय व्यवस्था; "परिवार के सदस्य" यानी पति या पत्नी, बच्चे, और साथ रहने वाले माता-पिता। 2730 आयोग के प्ररूप में घोषणा नामांकन के साथ लगी हो; इसे प्रमाणित करवाने की ज़रूरत नहीं। 18
- शिक्षा: शैक्षणिक योग्यता वाले खण्ड अधिसूचना संख्या F.2(2)Vidhi/2/2019 दिनांक 22.02.2019 से हट चुके हैं; अब किसी पद के लिए शैक्षणिक योग्यता नहीं चाहिए। 1622
एक से ज़्यादा सीट, एक से ज़्यादा संस्था
- धारा 19ख: कोई व्यक्ति पंच के चुनाव में एक से ज़्यादा वार्ड से, सरपंच लड़ते हुए उसी पंचायत में पंच की सीट से, पंचायत समिति के एक से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्र से, या ज़िला परिषद के एक से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ सकता। 3122
- संवीक्षा में ऐसे नामांकन अस्वीकार नहीं होंगे; पर नाम वापसी के तय समय में वह एक सीट छोड़कर बाकी सब से नाम वापस न ले, तो सभी सीटों से उसकी उम्मीदवारी वापस मानी जाएगी। 22
- धारा 20: इस अधिनियम में साफ़ दी गई छूट को छोड़कर, कोई व्यक्ति एक साथ दो या ज़्यादा पंचायतीराज संस्थाओं का सदस्य नहीं रह सकता; पर एक संस्था का सदस्य रहते हुए दूसरी संस्था का चुनाव लड़ सकता है। 3122
- चुन लिया जाए तो पुरानी सीट उसी दिन खाली हो जाती है; अपवाद: पुरानी सीट दूसरी संस्था में हो और उस संस्था का कार्यकाल चुने जाने की तारीख से चार महीने में खत्म होने वाला हो। 31 एक साथ दो या ज़्यादा संस्थाओं में चुना जाए, तो चुने जाने की तारीख से (तारीखें अलग हों तो बाद वाली से) 14 दिन में सक्षम अधिकारी को बताए कि किसमें रहेगा; बाकी सीटें खाली हो जाएँगी। न बताए, तो सक्षम अधिकारी तय करेगा कि कौन-सी सीट रहेगी। 31
- संवीक्षा में किसी दूसरी पंचायतीराज संस्था का मौजूदा सदस्य होना नामांकन अस्वीकार करने का आधार नहीं। 31
दोषसिद्धि पर अपील: रोक किस पर है
- सर्वोच्च न्यायालय, लोक प्रहरी: इस फ़ैसले ने तीन जजों की बेंच वाले Ravikant S Patil v Sarvabhouma S Bagali फ़ैसले की यह बात दोहराई: "Where the execution of the sentence is stayed, the conviction continues to operate. But where the conviction itself is stayed, the effect is that the conviction will not be operative from the date of stay." 32 यानी सिर्फ़ सज़ा पर रोक हो तो दोषसिद्धि बनी रहती है; दोषसिद्धि पर ही रोक लगे, तो रोक की तारीख से वह लागू नहीं रहती। 32
- अपीलीय न्यायालय दोषसिद्धि पर रोक लगा दे, तो RPA धारा 8 की उपधारा 1, 2 और 3 की अयोग्यता लागू नहीं होगी। 33
- राजस्थान उच्च न्यायालय, भंवर सिंह (26.10.2026): अपीलार्थी की सज़ा 18.10.2013 को निलंबित हो चुकी थी, फिर भी उसने कहा कि दोषसिद्धि लागू होने से वह आने वाला पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता। 1034 अदालत ने आदेश दिया कि अंतिम अपील के निपटारे तक दोषसिद्धि लागू नहीं रहेगी (रोकी गई); और अगर वह बाकी तरह से योग्य है, तो सिर्फ़ अपील लंबित होने के कारण उसे चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं माना जाएगा। 35
- उम्मीदवार कहे कि अपील चल रही है, तो अपीलीय न्यायालय का आदेश माँगिए और देखिए कि रोक दोषसिद्धि पर है या सिर्फ़ सज़ा पर। 3233 सज़ा निलंबित होने या उसका निष्पादन रुकने से दोषसिद्धि बनी रहती है; दोषसिद्धि पर ही रोक लगे, तभी उस पर टिकी अयोग्यता लागू नहीं रहती। 323335
आपत्ति और शिकायत
- संवीक्षा के समय आपत्ति: रिटर्निंग अधिकारी सारी आपत्तियों पर फ़ैसला करेंगे; आपत्ति पर या अपनी ओर से, वे नियम 27(3) के चार आधारों में से किसी पर नामांकन अस्वीकार कर सकते हैं (ऊपर संवीक्षा कैसे होती है)। 11 हर नामांकन पर फ़ैसला, और अस्वीकार हो तो उसका कारण, लिखिए, और सब उसी दिन पूरा कीजिए। 11
- झूठे तथ्य देकर चुनाव लड़ने की शिकायत: आयोग के पत्र 793 (20.01.2026) ने साफ़ किया कि उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 02.04.2007 के अनुसार चुनाव से पहले की अयोग्यता की जाँच राज्य सरकार नहीं कर सकती; ऐसे मामले पंचायती राज अधिनियम की धारा 43 और निर्वाचन नियम 80 के तहत चुनाव याचिका से ही ज़िला अदालत में तय होते हैं। 2 इसी पत्र के बिन्दु 2 के अनुसार, चुने जा चुके उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ चुनाव से पहले की अयोग्यताओं की जाँच अधिनियम की धारा 39 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 23 के तहत राज्य सरकार और उसके अधीन अधिकारी करेंगे। 2
- पत्र 793 का पहला निर्देश: उम्मीदवार की चुनाव से पहले की अयोग्यता की जाँच न की जाए, क्योंकि यह बिन्दु चुनाव याचिका में ही आ सकता है। 36
- दूसरा निर्देश: रिटर्निंग अधिकारी और ज़िला निर्वाचन अधिकारी सिर्फ़ यह जाँच सकते हैं कि उम्मीदवार ने नामांकन पत्र और उसके साथ दिए प्ररूपों, शपथपत्रों या घोषणा पत्रों में चुनाव लड़ने की मंशा से कोई असत्य कथन किया या तथ्य जान-बूझकर छिपाए, और क्या उसने रिटर्निंग अधिकारी के सामने मिथ्या साक्ष्य दिया; इस जाँच में भी चुनाव से पहले की अपात्रता की जाँच नहीं होगी। 36
- तीसरा निर्देश: जिस रिटर्निंग अधिकारी के सामने मिथ्या साक्ष्य दिया गया, वे या ज़िला निर्वाचन अधिकारी का नामित कोई अधिकारी तथ्यों की जाँच करें; प्रथम दृष्टया मिथ्या साक्ष्य पाया जाए तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 व 229 में सक्षम न्यायालय में परिवाद पेश करने की व्यवस्था करें। 36
- चौथा निर्देश: ऐसी शिकायत की जाँच पंचायती राज संस्थाओं के किसी अधिकारी से नहीं करवाई जाए, और राज्य सरकार को भेजने की ज़रूरत नहीं। 36
उदाहरण
हर उदाहरण में संवीक्षा इसी आम चुनाव की है; उम्मीदवार की बातें मान ली गई हैं।
- एक साल की कैद, सूची के बाहर का अपराध: दोषसिद्धि 15.03.2022, एक साल की कैद, अपराध RPA धारा 8(1) या 8(2) वाला नहीं, और सज़ा पलटी या माफ़ नहीं हुई। खण्ड (छ) लगता है, क्योंकि कैद 6 महीने या ज़्यादा की है, और दोषसिद्धि से 6 साल यानी 15.03.2028 तक वह अयोग्य है; RPA 8(3) नहीं लगती, क्योंकि सज़ा 2 साल से कम है; इसलिए फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(छ)। 162721
- तीन साल की कैद, रिहाई हो चुकी: दोषसिद्धि 10.06.2019, तीन साल की कैद, रिहाई 10.06.2022, अपराध सूची के बाहर का। खण्ड (छ) के 6 साल दोषसिद्धि से गिने जाते हैं, वे 10.06.2025 को पूरे हो गए; पर सज़ा 2 साल या ज़्यादा (यहाँ 3 साल) है, इसलिए खण्ड (क) से RPA 8(3) लगती है, कैद से छूटने के बाद 6 साल, यानी 10.06.2028 तक; इसलिए फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(3)। 272123
- सिर्फ़ जुर्माना, फिर भी अयोग्य: ऐसे अपराध में दोषसिद्धि 05.01.2022 जो RPA धारा 8(1) में बताए गए अपराधों में है, और सज़ा सिर्फ़ जुर्माना। कैद नहीं हुई, इसलिए खण्ड (छ) नहीं लगता; पर RPA 8(1) वाले अपराध में सिर्फ़ जुर्माने पर भी दोषसिद्धि की तारीख से 6 साल की अयोग्यता है, यानी 05.01.2028 तक; इसलिए फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(क) के साथ RPA धारा 8(1)। 21
- अपील लंबित है: दो साल पहले एक साल की कैद हुई; उम्मीदवार की अपील उच्च न्यायालय में लंबित है और सज़ा निलंबित है। सिर्फ़ सज़ा पर रोक है, इसलिए दोषसिद्धि बनी हुई है और खण्ड (छ) लगता है, फ़ैसला: अस्वीकार। 32 अगर अपीलीय न्यायालय ने दोषसिद्धि पर ही रोक लगाई हो और उम्मीदवार वह आदेश दिखाए, तो रोक की तारीख से वह दोषसिद्धि अयोग्यता का आधार नहीं रहती, और इस आधार पर नामांकन स्वीकार होगा। 3335
- आरोप तय हुए या नहीं: उम्मीदवार पर ऐसे अपराध का मुकदमा है जिसकी अधिकतम सज़ा 7 साल है; (अ) अदालत ने संज्ञान लेकर आरोप तय कर दिए हैं, (ब) अदालत ने संज्ञान लिया है, पर आरोप अभी तय नहीं हुए। खण्ड (छछ) के लिए संज्ञान और आरोप तय होना, दोनों चाहिए, और सज़ा 5 साल या ज़्यादा की हो सकती हो; इसलिए (अ) में फ़ैसला: अस्वीकार, धारा 19(छछ), और (ब) में (छछ) नहीं लगता। 1614
- सरकारी कर्मचारी का त्यागपत्र: राज्य सरकार का कर्मचारी सरपंच का नामांकन देता है, और उसका त्यागपत्र नामांकन वाले दिन ही स्वीकार हुआ है। स्वीकृति आदेश संवीक्षा की तारीख से पहले के दिन का होना चाहिए, उसी दिन का नहीं, और सरपंच के लिए संवीक्षा नामांकन वाले दिन ही है; इसलिए फ़ैसला: अस्वीकार, और कारण लिखिए। 233
- पंचायत का कर बकाया था: ग्राम पंचायत ने कर का माँग नोटिस दिया, दो महीने में नहीं चुकाया; नामांकन से एक दिन पहले पूरा जमा कर दिया और रसीद नामांकन के साथ लगाई। नामांकन पत्र भरने से पहले चुका दिया, इसलिए वह अयोग्य नहीं; फ़ैसला: इस आधार पर स्वीकार। 271418
- उम्र: मतदाता सूची में उम्र 21 साल लिखी है, पर स्कूल प्रमाण पत्र के अनुसार संवीक्षा के दिन उम्र 20 साल 10 महीने है। मतदाता सूची की उम्र सिर्फ़ अनुमानित है, और ऐसे व्यक्ति को पंच या सरपंच के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। 22 फ़ैसला: अस्वीकार, क्योंकि धारा 19(क) के परन्तुक में 25 साल से कम उम्र की छूट सिर्फ़ 21 साल पूरे कर चुके व्यक्ति को है। 15
- एक ही पंचायत में दो वार्ड: एक व्यक्ति ने एक ही ग्राम पंचायत के दो वार्डों से पंच का नामांकन दिया। संवीक्षा में नामांकन अस्वीकार नहीं होगा; पर नाम वापसी के समय में एक वार्ड छोड़कर दूसरे से नाम वापस न ले, तो दोनों से उम्मीदवारी वापस मानी जाएगी; फ़ैसला: संवीक्षा में स्वीकार, नाम वापसी पर ध्यान दीजिए। 3122
खुद जाँचिए
- सवाल: उम्मीदवार के तीन बच्चे हैं और कोई आपत्ति करता है; क्या करें? जवाब: इस आधार पर अस्वीकार नहीं; खण्ड (ठ) अधिनियम 6/2026 से हट चुका है, और 4-घ में संतान की जानकारी भी ज़रूरी नहीं। 74
- सवाल: प्ररूप 4-घ का बिन्दु 3 खाली है। जवाब: ठीक है; संतान वाला हिस्सा खाली रह सकता है। 4
- सवाल: सरपंच के शपथ पत्र में एक कॉलम खाली है। जवाब: उम्मीदवार को मीमो दीजिए; पुराने शपथ पत्र में सुधार नहीं चलेगा, अलग शपथ पत्र देना होगा; मीमो के बाद भी न दे, तो नामांकन अस्वीकार करने योग्य है। 13
- सवाल: शौचालय वाली घोषणा नोटरी से प्रमाणित नहीं है। जवाब: ठीक है; इसे प्रमाणित करवाने की ज़रूरत नहीं। 18
- सवाल: उम्मीदवार किसी योजना में संविदा पर काम करता है; लाभ का पद है या नहीं? जवाब: नियुक्ति राजस्थान संविदा नियम, 2022 के तहत है, तो आयोग के पत्र क्रमांक एफ. 7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/10297, दिनांक 09.10.2026 के अनुसार देखिए कि नियुक्ति राज्य सरकार या विभाग ने की है, और सेवा शर्तें, नियंत्रण और सेवा खत्म करने की शक्ति सरकार के पास है। पत्र कहता है कि संविदा होते हुए भी ऐसे कार्मिक पर नियंत्रण असल में सरकारी सेवा जैसा ही माना जाता है, इसलिए प्रद्युत बोरदोलोई और जया बच्चन के फ़ैसलों के सिद्धांतों पर इसे लाभ का पद माना जाना अपेक्षित है। 6 बाकी पदों पर पाँच परीक्षण लगाइए (नियुक्ति, हटाने का अधिकार, वेतन या मानदेय, काम की प्रकृति, सरकारी नियंत्रण); पद को लेकर किसी भी तरह का संशय हो तो नियुक्ति पत्र, सेवा शर्तें, वेतन या मानदेय और सरकारी नियंत्रण पर ध्यान देना ज़रूरी है। 28
- सवाल: 01.07.2021 को 8 महीने की कैद हुई थी (सूची के बाहर का अपराध)। जवाब: खण्ड (छ) से 01.07.2027 तक अयोग्य, इसलिए अस्वीकार; RPA 8(3) नहीं लगती, क्योंकि सज़ा 2 साल से कम है। 162721
- सवाल: आरोप तय हो चुके हैं, पर अपराध की अधिकतम सज़ा 3 साल है। जवाब: खण्ड (छछ) नहीं लगता; उसके लिए 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाला अपराध चाहिए। 16
- सवाल: एक पुरुष ने महिला के लिए आरक्षित वार्ड से नामांकन दिया। जवाब: उसे वहाँ से नामांकन का हक़ नहीं; अस्वीकार कीजिए और कारण लिखिए। 181116
- सवाल: ज़िला परिषद सदस्य के लिए अनुसूचित जाति का उम्मीदवार सामान्य वार्ड से लड़ रहा है, 250 रुपये जमा किए, जाति प्रमाण पत्र नहीं लगाया। जवाब: सामान्य वार्ड से लड़ते हुए जमानत में रियायत तभी मिलेगी जब कलक्टर या राज्य सरकार के प्राधिकृत अधिकारी का जाति प्रमाण पत्र लगा हो। 19
- सवाल: उम्मीदवार का वकील संवीक्षा में बैठना चाहता है। जवाब: नहीं; संवीक्षा के समय सिर्फ़ उम्मीदवार खुद आ सकते हैं, कोई और नहीं। 11
01.11.2026 तक क्या बदला
- 26.09.2018, लोक प्रहरी (सर्वोच्च न्यायालय): दोषसिद्धि पर रोक लगे तो RPA धारा 8(1), (2), (3) की अयोग्यता लागू नहीं। 933
- 20.01.2026, आयोग का पत्र 793: झूठी घोषणा या झूठे साक्ष्य की शिकायत पर कार्रवाई। 2
- 24 से 27.03.2026, अधिनियम 6/2026: राज्यपाल की अनुमति 24.03.2026, अधिसूचना 25.03.2026, राजपत्र 27.03.2026; संतान वाले प्रावधान हटे, और अधिनियम तुरन्त लागू हुआ। 7
- 13.07.2026, आयोग का पत्र 4795: आयोग ने ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को संशोधन की सूचना दी। 1
- 02.10.2026, आयोग का आदेश 9809: पंच-सरपंच के नामांकन, संवीक्षा और नाम वापसी एक ही दिन। 3
- 06.10.2026, आयोग के आदेश 10055 और 10062: नामांकन के साथ के काग़ज़; संतान की जानकारी ज़रूरी नहीं। 45
- 09.10.2026, आयोग का पत्र 10297: संविदा और मानदेय वाले पदों पर लाभ के पद की जाँच। 628
- 26.10.2026, भंवर सिंह (राजस्थान उच्च न्यायालय): पंचायत चुनाव के लिए दोषसिद्धि पर रोक। 103435
यह पेज PDF में
छापने या WhatsApp पर भेजने के लिए: यही पेज, PDF में, विषय-सूची और पेज नंबर के साथ। हर स्रोत का लिंक साइट पर उस आदेश या किताब का वही पन्ना खोलता है।
सावधान: ये फ़ाइलें आयोग की बनाई या जारी की हुई नहीं हैं, सिर्फ़ पूरक प्रशिक्षण सामग्री हैं। अंतिम और मान्य स्रोत आयोग के मूल आदेश और नियम ही हैं।
स्रोत
पाठ में लगी छोटी संख्या पर टैप कीजिए, उसका स्रोत वहीं दिख जाएगा। ↗ वाली कड़ी मूल PDF नए टैब में खोलती है।
- 1.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 1कखगघङ
- 2.आदेश 793, दि. 20.01.2026, संकलन पृ. 432कखगघङ
- 3.आदेश 9809, दि. 02.10.2026, पृ. 1कखगघङच
- 4.आदेश 10055, दि. 06.10.2026, पृ. 1कखगघङचछजझञटठड
- 5.आदेश 10062, दि. 06.10.2026, पृ. 1कखगघङचछज
- 6.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 1कखगघ
- 7.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 2कखगघङच
- 8.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 1 पाठ में
- 9.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 16कखग
- 10.राजस्थान हाई कोर्ट: आपराधिक स्थगन 10247/2026, भंवर सिंह बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 1कखग
- 11.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 101कखगघङचछजझञटठ
- 12.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 119कखग
- 13.आदेश 10055, दि. 06.10.2026, पृ. 3कखगघङच
- 14.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 30कखगघङचछ
- 15.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 60कखगघङचछजझञ
- 16.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 61कखगघङचछजझञटठडढणतथदध
- 17.आदेश 10062, दि. 06.10.2026, पृ. 3कखगघ
- 18.आदेश 10055, दि. 06.10.2026, पृ. 2कखगघङचछजझञटठडढणतथदध
- 19.आदेश 10062, दि. 06.10.2026, पृ. 2कखगघङचछजझ
- 20.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 120कखगघ
- 21.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 28कखगघङचछजझञट
- 22.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 27कखगघङचछज
- 23.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 29कखगघङचछजझञट
- 24.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 4कखग
- 25.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 6कखगघङचछ
- 26.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 5कखगघङचछजझञटठडढ
- 27.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 62कखगघङचछजझञटठ
- 28.आदेश 10297, दि. 09.10.2026, पृ. 3कखगघङच
- 29.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 3 पाठ में
- 30.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 31कखगघङच
- 31.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 63कखगघङच
- 32.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 12कखगघङ
- 33.सुप्रीम कोर्ट: लोक प्रहरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, पृ. 13कखगघङ
- 34.राजस्थान हाई कोर्ट: आपराधिक स्थगन 10247/2026, भंवर सिंह बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 2कख
- 35.राजस्थान हाई कोर्ट: आपराधिक स्थगन 10247/2026, भंवर सिंह बनाम राजस्थान राज्य, पृ. 4कखगघ
- 36.आदेश 793, दि. 20.01.2026, संकलन पृ. 433कखगघ