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रिटर्निंग अधिकारी: जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य, नियम और प्रक्रिया

साइट पर काम चल रहा है · अपडेट 03.11.2026अगर कोई त्रुटि दिखे तो डेवलपर भरत चौधरी (व्याख्याता, रा.उ.मा.वि., जेठन्तरी — ब्लॉक: समदड़ी, जिला: बालोतरा) को बताइए:
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पंचायती राज चुनाव 2026 में जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी के लिए: नामांकन से परिणाम तक, हर बात आयोग के आदेश, नियम या मार्गदर्शिका के हवाले से।

हर बात के बाद छोटा नंबर उसका स्रोत है। नंबर दबाइए: आयोग का आदेश, नियम या मार्गदर्शिका उसी पेज पर खुलेगी, और जिन पंक्तियों पर बात टिकी है वे पीली दिखेंगी। जहाँ लिखा है “प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़”, वह बात सिर्फ़ SLMT की प्रशिक्षण स्लाइड में मिली, किसी आदेश, नियम या मार्गदर्शिका में नहीं।

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राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 · SLMT प्रशिक्षण

जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य

जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव 2026: नामांकन, संवीक्षा, प्रतीक, ख़र्च और जमानत

नियम 58 और धारा 19प्रतीक आदेश 2025 (अधिसूचना 4196)प्ररूप, घोषणाएँ और जाँच-सूची

1

एक नज़र में

  • कौन-से कानून और नियम लागू
  • चार चरणों की नामांकन समय-सारणी
  • नियुक्ति, मतदान दल और अभिकर्ता

कानूनी नक्शा

किस काम के लिए कौन-सा नियम

जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में मतदान कराने से जुड़े कानूनी प्रावधान इन कानूनों में हैं: भारतीय न्याय संहिता 2023, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायतीराज (निर्वाचन) नियम, 1994। 1

मतदाता और मतदाता सूची की बात धारा 18 में है। 2 अभ्यर्थी योग्य है या अयोग्य, यह धारा 19 से तय होता है, और विशेष योग्यता धारा 19A में है। 34 चुनाव का कार्यक्रम नियम 58(1) से बनता है। 5 रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी का प्रावधान नियम 58(2), (3) और (4) में है। 5

नामांकन नियम 58(5) से चलता है। 5 संवीक्षा नियम 27 से, नाम वापसी नियम 28 से और लड़ने वाले अभ्यर्थियों की अंतिम सूची नियम 29 से होती है। 67 ये तीनों नियम 58(5) के साथ पढ़े जाते हैं। 5 प्रतीक का काम नियम 58(6) में है। 8 नामांकन Form IV-A पर होता है, घोषणा Form IV-D पर और अंतिम सूची Form V पर बनती है। 89

नामांकन · चार चरण

हर चरण की नामांकन समय-सारणी

पंचायत समिति सदस्य का नामांकन चार चरणों में होता है; जिला परिषद सदस्य के लिए एक ही समय-सारणी है। 10 हर चरण में सबसे पहले जिला निर्वाचन अधिकारी नियम 58 के तहत निर्वाचन की लोकसूचना जारी करता है। 10 उसके बाद नामांकन की अंतिम तिथि, फिर संवीक्षा और फिर नाम वापसी आती है। 11 नीचे की तालिका में चारों चरणों की तारीखें हैं।

काम चरण 1 चरण 2 चरण 3 चरण 4
लोकसूचना (नियम 58) 08.10.2026 गुरुवार 13.10.2026 मंगलवार 19.10.2026 सोमवार 31.10.2026 शनिवार 10
नामांकन की अंतिम तिथि, अपराह्न 3:00 बजे तक 13.10.2026 मंगलवार 16.10.2026 शुक्रवार 23.10.2026 शुक्रवार 04.11.2026 बुधवार 10
संवीक्षा, प्रातः 11:00 बजे से 14.10.2026 बुधवार 17.10.2026 शनिवार 24.10.2026 शनिवार 05.11.2026 गुरुवार 11
नाम वापसी, अपराह्न 3:00 बजे तक 15.10.2026 गुरुवार 19.10.2026 सोमवार 26.10.2026 सोमवार 06.11.2026 शुक्रवार 11

नामांकन पत्र पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक लिए जाते हैं। 11 नाम वापसी का समय ख़त्म होते ही प्रतीकों का आवंटन होता है और चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची छपती है। 11

आयोग का पत्र 10090 (06.10.2026)

मतदान और मतगणना की तारीखें

आयोग ने पत्र 10090 (06.10.2026) से मतदान और मतगणना की समय-सारणी भेजी है। 12 इसमें जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मतदान तीन चरणों में है: 22.10.2026 (गुरुवार), 28.10.2026 (बुधवार) और 03.11.2026 (मंगलवार)। 12 मतदान प्रातः 7:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक होगा। 12 मतदान दल एक दिन पहले रवाना होंगे, यानी 21.10, 27.10 और 02.11.2026 को। 12

हर चरण में इसके बाद के तीन दिन पंच-सरपंच के हैं। 12 अगले दिन पंच-सरपंच का नामांकन होता है (23.10, 29.10, 04.11)। 12 उसके अगले दिन उनका मतदान होता है (24.10, 30.10, 05.11), और मतगणना ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मतदान ख़त्म होते ही होती है। 12 तीसरे दिन उपसरपंच का चुनाव है (25.10, 31.10, 06.11)। 12 पत्र में मतगणना वाली पंक्ति पंच-सरपंच पद की ही है। 12

इस पत्र की समय-सारणी में चौथे चरण की तारीखें नहीं हैं। 12 चौथा चरण आयोग के प्रेस नोट 9836 के चुनाव कार्यक्रम में दिया है। 13 उसमें मतदान दल 13.11.2026 को रवाना होंगे और जि.प.-पं.स. सदस्यों का मतदान 14.11.2026 को है। 13 फिर पंच-सरपंच का नामांकन 15.11, मतदान और मतगणना 16.11 और उपसरपंच का चुनाव 17.11.2026 को है। 13

चित्र में आयोग के पत्र 10090 की तालिका है: तीन चरणों के कॉलम, और हर काम की तारीख और समय की पंक्तियाँ। 12

मूल SLMT स्लाइड: आयोग के पत्र की समय-सारणीमूल SLMT स्लाइड: आयोग के पत्र की समय-सारणी

नियम 58(1)

निर्वाचन की सूचना: तारीखें कौन तय करता है

चुनाव की तारीखें नियम 58(1) से तय होती हैं। 5 राज्य निर्वाचन आयोग समय-सारणी तय करता है। 5 उसके अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अधिसूचना जारी करता है। 5 इसी से पंचायत समिति और जिला परिषद के हर निर्वाचन क्षेत्र से एक-एक सदस्य का चुनाव होता है। 5

इस सूचना में छह बातें तय होती हैं। 5 नामांकन पत्र RO या ARO के सामने किस तारीख को और किस समय दिए जाएँगे। 5 संवीक्षा की तारीख और समय, और नाम वापसी की तारीख और समय। 5 मतदान की ज़रूरत पड़े तो मतदान का दिन और मतदान का समय। 5 आख़िर में मतगणना का स्थान, तारीख और समय। 5

मतदान के दिन पर एक शर्त है। नियम के मुताबिक़ मतदान का दिन, नाम वापसी के लिए तय तारीख से कम-से-कम 7 दिन बाद का होना चाहिए। 5

चित्र में नियम 58 वाली "निर्वाचन की सूचना" का खाली प्ररूप है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अधिसूचना जारी करके ये तारीखें, समय और मतगणना का स्थान तय करता है। 5

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): निर्वाचन की सूचना (नियम 58)खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): निर्वाचन की सूचना (नियम 58)

नियुक्ति

किस चुनाव में आपकी नियुक्ति किस नियम से

आपकी नियुक्ति जिला निर्वाचन अधिकारी करते हैं। 14 पंचायत में पंच और सरपंच के चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति नियम 23(2) से होती है, और सरपंच के चुनाव पर यह नियम, नियम 56(3) के ज़रिए लागू होता है। 1415 पंच-सरपंच के चुनाव में मतदान अधिकारी (पीठासीन अधिकारी) की नियुक्ति नियम 31 से होती है: हर मतदान बूथ के लिए यह नियुक्ति वह अधिकारी करता है, जिसे जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) ने नामित किया हो, और सरपंच के चुनाव पर यह नियम, नियम 56(3) के ज़रिए लागू होता है। 1615

उप सरपंच के चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति नियम 23(2) से होती है, और उप सरपंच का चुनाव नियम 65 के तहत होता है। 1417 पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में भी मतदान अधिकारी (पीठासीन अधिकारी) की नियुक्ति नियम 31 से होती है; नियम 58(5) यह नियम इन चुनावों पर लागू करता है। 5

दल और अभिकर्ता

मतदान दल कितना बड़ा, अभिकर्ता कितने

जब चारों पदों के चुनाव एक साथ न हों, तब जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में मतदान दल का आकार मशीन पर टिका है। 18 MPSV मॉडल की मशीनें लगें, तो पीठासीन अधिकारी के अलावा 3 मतदान अधिकारी होंगे। 18 M-2/M-3/MK-4/MK-5 मॉडल की मशीनें लगें, तो पीठासीन अधिकारी के अलावा 4 मतदान अधिकारी होंगे। 18 तुलना के लिए, पंच-सरपंच का चुनाव मतपेटी से हो तो दल में एक मतदान अधिकारी (पीठासीन अधिकारी) और 4 सहायक मतदान अधिकारी होते हैं। 19

अभिकर्ता की गिनती भी तय है। जि.प.-पं.स. सदस्य के चुनाव में 1 निर्वाचन अभिकर्ता होता है। 18 मतदान अभिकर्ता हर बूथ पर 1 होता है, और गणन अभिकर्ता हर टेबिल पर 1, साथ में RO की टेबिल के लिए 1 और 1 राहत (relief) अभिकर्ता। 1820 सरपंच के चुनाव में निर्वाचन अभिकर्ता नहीं होता, मतदान अभिकर्ता हर बूथ पर 1 और गणन अभिकर्ता ज़्यादा से ज़्यादा 2 हो सकते हैं। 21 पंच के चुनाव में कोई अभिकर्ता नहीं होता। 21

स्टिकर

EVM पर स्टिकर: कब लगेगा, कौन-सा

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में EVM पर स्टिकर लगेगा या नहीं, यह मशीन से तय होता है। 22 पंच और सरपंच का चुनाव मतपेटी से हो, तो कोई स्टिकर नहीं लगता (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में ECIL की MPSV या MPMV मशीन लगे, तो दोनों पदों की कन्ट्रोल यूनिट एक ही होती है। 22 तब उस कन्ट्रोल यूनिट पर स्टिकर नहीं लगता। 22 पर अगर वह कन्ट्रोल यूनिट सिर्फ़ एक पद के लिए लगी है, तो उस पर उस पद का स्टिकर लगेगा। 22

BEL की M3A या MK-5 मशीन लगे, तो दोनों पदों की कन्ट्रोल और बैलेट यूनिट अलग-अलग होती हैं। 22 जिला परिषद सदस्य वाली कन्ट्रोल यूनिट और उसके कैरिंग बक्से पर पीला स्टिकर लगता है। 22 पंचायत समिति सदस्य वाली यूनिट पर नीला स्टिकर लगता है। 22

मशीनों के ये नाम आयोग के पत्र 1299 से हैं। 22

2

नामांकन लेना

  • नामांकन के साथ छह चीज़ें
  • प्रस्तावक और जमानत
  • पावती, रजिस्टर और रोज़ की सूचना

छह चीज़ें

नामांकन के समय अभ्यर्थी से ये छह चीज़ें लें

नामांकन लेते समय अभ्यर्थी से कौन-से कागज़ लेने हैं, यह आयोग के पत्र 10062 में बिन्दुवार दिया है। 23 सबसे पहले नाम निर्देशन पत्र, जो प्रारूप 4-A में होता है। 23 फिर जिला परिषद या पंचायत समिति सदस्य पद की घोषणा, प्रारूप 4 घ में। 23

तीसरी चीज़ घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय की घोषणा या अंडरटेकिंग है। 24 चौथी, ₹50 के स्टाम्प पर I-A, यानी उपाबंध-1 A का शपथ पत्र। 23 पाँचवीं, सांख्यिकी सूचना का फार्म, जो परिशिष्ट-6-E है। 2526 छठी चीज़ प्रतिभूति निक्षेप राशि, यानी जमानत की रकम है। 24

दस्तावेज़

नाम निर्देशन पत्र के साथ आने वाले दस्तावेज़

नाम निर्देशन पत्र के साथ आने वाले कागज़ आयोग के पत्र 10062 में बिन्दुवार दिए हैं। 23 RO को इनमें से हर एक देखना है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पहली बात, नाम निर्देशन पत्र अभ्यर्थी ख़ुद प्रस्तुत करता है। 8 यह नियम 58(6)(d) में है, और पत्र प्ररूप-4 क में होता है। 8 इसके साथ प्ररूप 4 घ में घोषणा आती है। 23

तीसरा, उपाबंध-1 A का शपथ पत्र, जो ₹50 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर होता है। 23 चौथा, कार्यशील स्वच्छ शौचालय की घोषणा, जिसका प्ररूप आगे दिया है। 24 पाँचवाँ, जाति प्रमाण-पत्र। 24 यह कलक्टर या राजस्थान सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का जारी किया हुआ होना चाहिए। 24

छठा, प्रतिभूति निक्षेप राशि की रसीद। 24 सामान्य वर्ग के लिए ₹500, और SC, ST, OBC और महिला के लिए ₹250, जो भी लागू हो। 24 सातवाँ, सांख्यिकी सूचना, परिशिष्ट-6-E में। 2526 आठवाँ, प्रस्तावक, जो उसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता हों (नियम 58(5)(e))। 8 मान्यता प्राप्त दल के अभ्यर्थी के लिए 1 प्रस्तावक चाहिए, और निर्दलीय के लिए 5। 8

आयोग का पत्र 10062 (06.10.2026)

दस्तावेज़ों पर आयोग के ताज़ा निर्देश

आयोग ने पत्र 10062 (06.10.2026) में नामांकन के दस्तावेज़ों पर नए निर्देश दिए हैं। 23 यह पत्र नामांकन के साथ लगने वाले दस्तावेज़ों पर पहले जारी आदेशों को अधिक्रमित करता है। 23

प्ररूप 4-क और प्ररूप 4 घ का कोई कॉलम ख़ाली नहीं रहना चाहिए। 23 सिर्फ़ संतान संबंधी योग्यता वाला हिस्सा छोड़ा जा सकता है। 23 4 घ के बिन्दु 3 पर संतान संबंधी योग्यता के प्रावधान विलोपित हो चुके हैं, इसलिए यह सूचना देना ज़रूरी नहीं है। 23 बिन्दु 1 और 2 से अभ्यर्थी की योग्यता या अयोग्यता तय होती है। 23 बिन्दु 3 और 4 की सूचना सिर्फ़ मतदाताओं की जानकारी के लिए है। 23

शौचालय की घोषणा आयोग के तय प्रारूप में भरकर जमा होती है, और इसे प्रमाणित कराने की ज़रूरत नहीं है। 24 धारा 19(झ) या 19(ड) में अभ्यर्थी पर कोई राशि बकाया नहीं है, तो उसे नो-ड्यूज़ देने की ज़रूरत नहीं है। 24 बकाया हो, पर नामांकन से पहले जमा कर रसीद या नो-ड्यूज़ दे दे, तो वह अयोग्य नहीं होगा। 24 चरित्र प्रमाण पत्र लगाना ज़रूरी नहीं है। 24

SC, ST या OBC का अभ्यर्थी सामान्य वार्ड से भी नामांकन दे सकता है। 24 वहाँ जमानत में छूट चाहे तो उसे जाति प्रमाण पत्र देना होगा। 24 कोई पुरुष, महिला के लिए आरक्षित वार्ड से नामांकन का हक़दार नहीं है। 24 सांख्यिकी सूचना न दी जाए, तो नामांकन ख़ारिज नहीं होगा, फिर भी जहाँ तक हो, उसे भरवाएँ। 25

प्ररूप सबसे पहले RO, उपखण्ड अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से लिए जाएँ। 25 वहाँ न मिलें तो उनकी फोटो प्रति चलेगी। 25 सारी एंट्री वाले टाइप किए प्ररूप भी चलेंगे, लेकिन सादे काग़ज़ पर हाथ से उतारकर बनाए नामांकन और प्ररूप स्वीकार नहीं होंगे। छपे, फोटो प्रति या टाइप किए प्ररूप में अभ्यर्थी की जानकारी हाथ से भरी हो या कंप्यूटर पर टाइप करके छापी गई हो, दोनों चलेगा। 25

कोई कॉलम ख़ाली मिले तो RO अभ्यर्थी को इस बारे में मीमो देगा। 25 पहले दिए शपथ पत्र में संशोधन विधि पूर्ण नहीं है, इसलिए कमी पूरी करने के लिए अलग शपथ पत्र लेना होगा। 25 मीमो के बाद भी कॉलम न भरे, या ज़रूरी अलग शपथ पत्र न आए, तो नामांकन अस्वीकार करने योग्य होगा। 25

नामांकन के दिन

नामांकन लेते समय की पाँच बातें

नामांकन पत्र लोकसूचना में दी गई अंतिम तारीख तक किसी भी कार्य दिवस को दिए जा सकते हैं। 27 शर्त इतनी है कि वह दिन सार्वजनिक अवकाश न हो। 2710 नामांकन पत्र RO ले सकता है, और RO के साथ मुख्यालय पर तैनात ARO भी ले सकता है; पर संवीक्षा में अंतिम निर्णय RO का होगा। 28

नामांकन पत्र इन दिनों में पूर्वाह्न 11.00 बजे से अपराह्न 3.00 बजे के बीच दिए जा सकते हैं, और अभ्यर्थी इन्हें ख़ुद देगा। 27 कोई अभ्यर्थी दोपहर 3 बजे नामांकन देने के लिए RO या ARO के कार्यालय में ख़ुद मौजूद है, तो उसका नामांकन 3 बजे प्रस्तुत माना जाएगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

कागज़ पर दो बातें ध्यान रखें। ARO "सहायक रिटर्निंग ऑफिसर" के रूप में हस्ताक्षर करे, "रिटर्निंग ऑफिसर के लिए" लिखकर नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग ने नामांकन के प्ररूप रिटर्निंग ऑफिसर, उपखण्ड अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालयों में उपलब्ध कराए हैं, और अभ्यर्थी पहले इन्हीं से मिले प्ररूप काम में ले। 25 प्ररूप 4-घ में चल रहे (विचाराधीन) आपराधिक मामलों, दोषसिद्धि और संपत्ति की जानकारी होती है; बच्चों वाले बिन्दु की सूचना अब देना ज़रूरी नहीं, क्योंकि संतान संबंधी योग्यता के प्रावधान हटा दिए गए हैं। 23 अभ्यर्थी को साफ़ बताएँ कि ये प्रपत्र नामांकन पत्र के पूरक (Supplement) माने जाते हैं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

अभ्यर्थी किस क्षेत्र का मतदाता हो, यह भी देखें। पंचायत समिति सदस्य का अभ्यर्थी उस पंचायत समिति के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 3 जिला परिषद सदस्य का अभ्यर्थी उस जिला परिषद के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 3 इसका आधार धारा 19 है। 3

आयोग का पत्र 10062 (06.10.2026)

जाति प्रमाण पत्र: तीन बातें

जाति प्रमाण पत्र पर आयोग के पत्र 10062 (06.10.2026) के बिन्दु 7 में तीन बातें हैं। 24 पहली, SC, ST या OBC का अभ्यर्थी आरक्षित वार्ड के लिए नामांकन दे, तो उसे जाति प्रमाण पत्र देना होगा। 24 यह प्रमाण पत्र कलक्टर या राज्य सरकार (राजस्थान सरकार) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का जारी किया हुआ हो। 24

दूसरी, SC, ST या OBC का अभ्यर्थी साधारण वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है, इस पर कोई रोक नहीं है। 24 तीसरी, महिला के लिए आरक्षित वार्ड से कोई पुरुष अभ्यर्थी नामांकन नहीं भर सकता। 24

चित्र में आयोग के पत्र 10062 का बिन्दु 7 है, "जाति प्रमाण पत्र", अपनी तीनों उप-बातों के साथ। 24

मूल SLMT स्लाइड: आयोग के पत्र का बिंदु 7मूल SLMT स्लाइड: आयोग के पत्र का बिंदु 7

प्रारंभिक जाँच

नामांकन मिलते ही की जाने वाली जाँच

नामांकन पत्र मिलते ही RO या ARO उसकी तकनीकी जाँच करे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इस स्तर पर कोई औपचारिक जाँच नहीं करनी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। हर नामांकन पत्र पर अभ्यर्थी और प्रस्तावक दोनों के हस्ताक्षर होने चाहिए; अभ्यर्थी हस्ताक्षर की जगह अँगूठे का निशान भी लगा सकता है। 86 नामांकन के साथ प्ररूप 4-घ और शपथ पत्र (उपाबन्ध-I A) जमा होना ज़रूरी है। 23

फिर अभ्यर्थी की एंट्री को मतदाता सूची की एंट्री से मिलाएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। संवीक्षा में RO यह पाए कि अभ्यर्थी वह व्यक्ति नहीं है, जिसका नाम या क्रमांक नामांकन पत्र में मतदाता सूची से दिया गया है, तो वह नामांकन पत्र अस्वीकार कर सकता है। 6 प्रस्तावक की एंट्री भी मतदाता सूची से मिलानी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अभ्यर्थी से मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति माँगने की ज़रूरत नहीं है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उस पंचायती राज संस्था के सभी निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची RO के पास होती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

प्रस्तावक

दल का अभ्यर्थी या निर्दलीय: कितने प्रस्तावक

प्रस्तावकों की गिनती इस पर टिकी है कि अभ्यर्थी को कौन खड़ा कर रहा है। 8 मान्यता प्राप्त दल का अभ्यर्थी हो, तो नियम 58(5)(e) के तहत केवल 1 प्रस्तावक चाहिए। 8 वह प्रस्तावक उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 8

ऐसे अभ्यर्थी को दल का अभ्यर्थी माना जाए, इसके लिए दल का प्राधिकृत पत्र चाहिए। 8 यह पत्र नामांकन की अंतिम तारीख को 3:00 PM तक आ जाना चाहिए। 8 उस पर दल की State Unit के President या Head, या उनके authorised person के हस्ताक्षर हों। 8

जिसे किसी मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया, ऐसे हर अभ्यर्थी के लिए, निर्दलीय के लिए भी, नियम 58(5)(f) लागू होता है। 8 उसे 5 प्रस्तावक चाहिए, और सभी उसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता हों। 8

ध्यान रहे, प्रस्तावक अभ्यर्थी का नामांकन पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकता। 21 नियम 58(6)(d) के अनुसार अभ्यर्थी ख़ुद व्यक्तिगत रूप से अपना नामांकन प्रस्तुत करता है। 8

नियम 58(5)(g)

एक प्रस्तावक, एक ही अभ्यर्थी

नियम 58(5)(g) एक सीधी रोक लगाता है। 8 कोई मतदाता एक से ज़्यादा अभ्यर्थियों का प्रस्तावक नहीं बन सकता। 8 अगर उसने कई नामांकनों पर प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो पहला नामांकन ही मान्य होगा। 8 बाकी सब अमान्य होंगे। 8

यहाँ निर्णायक बात यह है कि RO ने कौन-सा नामांकन पहले लिया। 8 यह प्रावधान 2009 के संशोधन से जोड़ा गया था, जिसकी अधिसूचना 21.11.2009 की है। 8

पावती · नियम 26

नामांकन पत्र मिलने पर पावती

नामांकन पत्र हाथ में आते ही नियम 26 का काम शुरू होता है। 6 हर नामांकन पत्र पर क्रम संख्या, दिनांक और समय दर्ज करें। 6 कई पत्र एक साथ जमा हों, तो पहले उन्हें क्रम से नंबर दें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उसके बाद हर पत्र पर क्रम संख्या, दिनांक और समय लिखें। 6

फिर अभ्यर्थी को संवीक्षा की तारीख, समय और स्थान बताएँ। 6 नामांकन पत्र पर चार बातें अपने हाथ से लिखें। 6 पहली, जिस वार्ड से अभ्यर्थी लड़ रहा है उसका क्रमांक। 6 दूसरी, उस वार्ड के नामांकन पत्र का क्रमांक। 6 तीसरी, पत्र प्रस्तुत करने वाले का नाम, और पहचानकर्ता हो तो उसका भी नाम। 6 चौथी, पत्र मिलने की तारीख और समय। 6

नामांकन की सूचना

रजिस्टर में दर्ज करें, रोज़ सूची लगाएँ

रोज़ दोपहर 3:00 बजे के बाद उस दिन आए नामांकनों की सूची RO के नोटिस बोर्ड पर लगेगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। ARO भी अपने सामने आए नामांकनों की यही सूची लगाए (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

रोज़ की यह सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भी जाती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इसे शाम 4:00 बजे तक भेजना है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

चित्र में नामांकनों के रजिस्टर का ख़ाली प्ररूप है, "Register of Nominations"। ऊपर पंचायत समिति या जिला परिषद का नाम और निर्वाचन क्षेत्र संख्या लिखने की जगह है। नीचे चार कॉलम हैं: क्रम संख्या, अभ्यर्थी का नाम, मिलने की तारीख और समय, और दल।

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नामांकनों का रजिस्टरखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नामांकनों का रजिस्टर

अंतिम दिन

नामांकन की अंतिम तिथि को समेकित सूची

नामांकन की अंतिम तिथि को समय ख़त्म होते ही एक समेकित सूची बनानी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इसमें RO और ARO दोनों के सामने आए सभी नामांकन आएँगे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। किसी एक अभ्यर्थी के कई नामांकन हैं, तो सबकी सूचना दें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

सूची की एक प्रति RO के नोटिस बोर्ड पर लगाएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग और DEO को यह सूचना ई-मेल से शाम 4:00 बजे तक भेजें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

चित्र में नामांकित अभ्यर्थियों की समेकित सूची का ख़ाली प्ररूप है। ऊपर पंचायत समिति या जिला परिषद का नाम और निर्वाचन क्षेत्र संख्या की जगह है। कॉलम हैं: नामांकन पत्र की क्रम संख्या, अभ्यर्थी का नाम, पता, पसंद के क्रम में चुने प्रतीक, और वह दल जिसने उसे खड़ा किया होने का दावा है, या निर्दलीय।

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नामांकित अभ्यर्थियों की समेकित सूचीखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नामांकित अभ्यर्थियों की समेकित सूची

जमानत · नियम 58(5)

प्रतिभूति निक्षेप राशि (जमानत)

अब जमानत, यानी प्रतिभूति निक्षेप राशि। 5 सामान्य अभ्यर्थी के लिए यह ₹500 है। 245 SC, ST, OBC और महिला अभ्यर्थी के लिए ₹250। 245

ये वर्ग गैर-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से भी लड़ सकते हैं (नियम 58)। 24 तब भी वे रियायती जमानत, यानी ₹250, जमा करने के हक़दार हैं। 24 पर SC, ST या OBC का अभ्यर्थी यह रियायत चाहे, तो उसे कलक्टर या राज्य सरकार (राजस्थान सरकार) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का जारी किया हुआ जाति प्रमाण पत्र देना होगा। 24

जमानत RO के पास, या जैसा मामला हो, ARO के पास जमा हो सकती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। एक ही निर्वाचन क्षेत्र में किसी ने कई नामांकन भरे हैं, तो एक ही जमानत काफ़ी है। 5 किसी निर्वाचन क्षेत्र से अभ्यर्थी तभी विधिवत नामांकित माना जाएगा, जब वह जमानत जमा करे, और किसी अभ्यर्थी के एक से ज़्यादा नामांकन पत्र हों, तो उससे एक से ज़्यादा जमानत नहीं ली जाएगी। 5 अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन हों, तो हर क्षेत्र के लिए अलग जमानत लगेगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अभ्यर्थी हार जाए और कुल वैध वोटों का कम से कम 1/6 भी न पाए, तो जमानत ज़ब्त हो जाती है। 529

नियम 58(5) · मूल पाठ

नियम 58(5) के प्रावधान, अंग्रेज़ी पाठ में

नियम 58(5) का मूल पाठ अंग्रेज़ी में है, और जमानत और प्रस्तावक की सारी बातें इसी से आती हैं। 5 खण्ड (a) जमानत तय करता है: Rs.500/-, और महिला या SC/ST/OBC के लिए Rs.250/-। 5 खण्ड (b) कहता है कि हारे हुए अभ्यर्थी को one sixth से कम वैध वोट मिलें, तो जमानत ज़ब्त होगी। 5 खण्ड (c) के अनुसार कई नामांकन पत्र हों, तब भी एक से ज़्यादा जमानत नहीं ली जाएगी। 5

खण्ड (d) नियम 29 के उप-नियम (3) के खण्ड (ii) वाली सूची के लिए अभ्यर्थियों को दो वर्गों में बाँटता है। 5 पहले मान्यता प्राप्त दलों के खड़े किए अभ्यर्थी, फिर बाकी। 5 हर वर्ग में नाम हिंदी वर्णक्रम में लगते हैं। 5

खण्ड (e) में दल के अभ्यर्थी के लिए एक प्रस्तावक काफ़ी है। 8 उसकी Explanation कहती है कि दल का पत्र अंतिम दिन 3 PM तक आ जाए। 8 खण्ड (f) में बाकी अभ्यर्थियों के लिए 5 प्रस्तावक चाहिए। 8 खण्ड (g) में एक मतदाता एक से ज़्यादा अभ्यर्थियों का प्रस्तावक नहीं बन सकता। 8 अगर किसी मतदाता ने एक से ज़्यादा अभ्यर्थियों के नामांकन पर प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं, तो उनमें से RO को जो नामांकन पहले मिला, बस वही मान्य होगा; बाकी अमान्य होंगे। 8

चित्र में "THE RAJASTHAN PANCHAYATI RAJ (ELECTION) RULES 1994" के Rule 58(5) और उसके परंतुकों (provisos) का अंग्रेज़ी पाठ है। 5 पहले हिस्से में खण्ड (a) से (d) हैं, दूसरे में (d) से (g)।

मूल SLMT स्लाइड: नियम 58(5), खण्ड (a)-(d)मूल SLMT स्लाइड: नियम 58(5), खण्ड (a)-(d)
मूल SLMT स्लाइड: नियम 58(5), खण्ड (d)-(g)मूल SLMT स्लाइड: नियम 58(5), खण्ड (d)-(g)
3

प्ररूप और घोषणाएँ

  • नाम निर्देशन पत्र: प्ररूप IV क
  • घोषणा 4घ, शपथ पत्र I-A, शौचालय की घोषणा
  • सांख्यिकी सूचना का फार्म

प्ररूप IV क

नाम निर्देशन पत्र: भाग-I दल के लिए, भाग-II बाकी सबके लिए

नाम निर्देशन पत्र प्ररूप-IV क है, और इसमें प्रस्थापक वाले दो विकल्प हैं, भाग-I और भाग-II। 30 भाग-I मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के खड़े किए अभ्यर्थी के लिए है। 30 इस पर एक प्रस्थापक हस्ताक्षर करता है। 30 भाग-II उस अभ्यर्थी के लिए है जिसे मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया। 31

भाग-II में प्रस्थापक के रूप में निर्वाचन क्षेत्र के पाँच निर्वाचक होने चाहिए। 31 अभ्यर्थी पर जो भाग लागू न हो, उसे काट दिया जाता है। 30

पहले चित्र में ख़ाली प्ररूप-IV क का भाग-I है। 30 इसमें अभ्यर्थी का नाम, पिता या पति का नाम, लिंग, आयु और डाक का पता भरना है, और नीचे प्रस्थापक के हस्ताक्षर। 30 दूसरे चित्र में भाग-II की तालिका है: प्रस्थापकों का ब्योरा और उनके हस्ताक्षर। 31 इसमें 1 से 5 तक पाँच पंक्तियाँ हैं, और हर प्रस्थापक का वार्ड, पंचायत, निर्वाचन क्षेत्र, पूरा नाम, हस्ताक्षर और दिनांक भरना है। 31

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप IV क, भाग-Iखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप IV क, भाग-I
खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): भाग-II के प्रस्थापकखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): भाग-II के प्रस्थापक

प्ररूप-4घ

घोषणा 4घ: चार बातों की जानकारी

घोषणा प्ररूप-4घ में अभ्यर्थी चार बातें बताता है। 32 पहली, उस पर कोई लंबित आपराधिक मामला तो नहीं, जिसमें पाँच साल या ज़्यादा की सज़ा वाले अपराध का आरोप तय हो चुका हो। 3233 दूसरी, उसे किसी अपराध में दोषसिद्ध करके दण्ड तो नहीं मिला। 3233 तीसरी, उसकी संतानों के बारे में सूचना। 32 आयोग के पत्र 10062 के बाद यह सूचना देना ज़रूरी नहीं है। 23 चौथी, अपनी, पति या पत्नी और आश्रितों की संपत्ति। 3234

जो व्यक्ति RO से नामांकन पत्र का फार्म ले, उसे RO साथ में यह प्ररूप भी ज़रूर दे। 32 आयोग ने नामांकन के प्ररूप रिटर्निंग ऑफिसर, उपखण्ड अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालयों में भी उपलब्ध कराए हैं। 25 अभ्यर्थी को बताएँ कि यह नामांकन पत्र का पूरक है। 3532

चित्र में प्ररूप-4घ का पहला पृष्ठ है, जिस पर ऊपर "परिशिष्ट-6-B" और "(नियम 25 और 58 देखिए)" छपा है। 33 इसमें बिन्दु 1 पर लंबित मामलों का ब्योरा, बिन्दु 2 पर दोषसिद्धि का ब्योरा, और बिन्दु 3 पर बच्चों के ब्योरे की शुरुआत है। 33

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-4घ, पहला पृष्ठखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-4घ, पहला पृष्ठ

प्ररूप-4घ

4घ का दूसरा पृष्ठ: बच्चे और संपत्ति

4घ में बच्चों का ब्योरा तीन अवधियों में बँटा है। 33 पहली, 27.4.1994 को बच्चों की कुल संख्या। 33 दूसरी, 27.4.1994 से 27.11.1995 के बीच जन्मे बच्चे। 33 तीसरी, 28.11.1995 को और उसके बाद जन्मे बच्चे। 34

इसके बाद स्थावर आस्तियों की तालिका है। 34 इसमें कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन और मकान या अपार्टमेन्ट की पंक्तियाँ हैं। 34 हर पंक्ति में अभ्यर्थी, पति या पत्नी और आश्रितों का ब्योरा अलग कॉलम में भरना है। 34

बच्चों वाले हिस्से पर ध्यान दें। आयोग के पत्र 10062 के अनुसार संतान संबंधी प्रावधान विलोपित हो चुके हैं, और 4घ बिन्दु 3 की सूचना देना ज़रूरी नहीं है। 23

चित्र में प्ररूप-4घ का दूसरा पृष्ठ है। 34 ऊपर बच्चों की तीसरी अवधि और बिन्दु 4 है, फिर "स्थावर आस्तियों का ब्योरा" की तालिका है, जिसमें स्वयं, पति या पत्नी और तीन आश्रितों के कॉलम हैं। 34

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-4घ, दूसरा पृष्ठखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-4घ, दूसरा पृष्ठ

उपाबंध I-A

शपथ पत्र: नामांकन के साथ ही

शपथ पत्र उपाबंध I-A में होता है, और यह नामांकन पत्र के साथ ही आना चाहिए। 3623 यह ₹50 के गैर न्यायिक स्टाम्प पेपर पर दिया जाता है। 2337 शपथ पत्र किसी न्यायाधीश, न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा नियुक्त शपथ कमिश्नर, या नोटरी पब्लिक के सामने प्रमाणित होना चाहिए। 23

इसका हर कॉलम भरा होना चाहिए। 2338 किसी मद की सूचना न हो, तो वहाँ "शून्य" या "लागू नहीं होता" लिखा जाए। 37 एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई नामांकन पत्र भरे हों, तो एक शपथ पत्र काफ़ी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

नामांकन के साथ शपथ पत्र दाखिल न हो, तो यह आयोग के आदेशों का उल्लंघन माना जाएगा। 36 ऐसे में संवीक्षा के दौरान नामांकन पत्र अस्वीकार किया जा सकता है। 36

चित्र में उपाबंध I-A का पहला पृष्ठ है, "जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए नामनिर्देशन पत्र के साथ प्रस्तुत किये जाने वाला शपथ-पत्र"। 39 इसमें अभ्यर्थी लिखता है कि वह किसी दल का खड़ा किया अभ्यर्थी है या स्वतन्त्र। 39 नीचे आय-कर विवरणी की स्थिति की तालिका है। 39

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): उपाबंध I-A, पहला पृष्ठखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): उपाबंध I-A, पहला पृष्ठ

शौचालय की घोषणा

घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय

अभ्यर्थी को घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय की घोषणा या अंडरटेकिंग भी देनी है। 4024 इसमें दो बातें हैं। पहली, उसके घर में स्वच्छ कार्यशील शौचालय है, जो तीन दीवारों, एक दरवाज़े और छत से घिरा है, और उसमें जल-बन्ध (वाटर सील्ड) व्यवस्था है। 414243 दूसरी, परिवार का कोई सदस्य खुले में शौच के लिए नहीं जाता। 4142

यहाँ परिवार के सदस्य का मतलब है पति या पत्नी, बच्चे, और साथ रहने वाले माता-पिता। 4340 यह शर्त धारा 19(q) में है। 44 आयोग के आदेश 5702 (05.12.2019) के मुताबिक़ यह घोषणा या अंडरटेकिंग हर नामांकन पत्र के साथ लेनी है; न दी हो तो RO संवीक्षा से पहले इसे देने का मीमो दे, और फिर भी न मिले तो पर्चा अस्वीकार करने योग्य होगा। 40 जो अभ्यर्थी इस शर्त के कारण अयोग्य हो, उसका नामांकन पत्र RO संवीक्षा में अस्वीकार कर सकता है। 6

एक बात और देख लें। इस घोषणा के प्ररूप पर "परिशिष्ट-6-C" छपा है, और "परिशिष्ट-6-B" प्ररूप-4घ पर छपा है। 4133

चित्र में शौचालय की घोषणा का ख़ाली प्ररूप है, जिस पर ऊपर "परिशिष्ट-6-C" छपा है। 41 इसमें अभ्यर्थी की दोनों घोषणाएँ, उसके हस्ताक्षर, सत्यापन और साक्षी के हस्ताक्षर की जगह है। 41

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): शौचालय की घोषणा / अंडरटेकिंगखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): शौचालय की घोषणा / अंडरटेकिंग

परिशिष्ट-6-E

सांख्यिकी सूचना का फार्म

परिशिष्ट-6-E सांख्यिकी सूचना का फार्म है, जिसे हर अभ्यर्थी भरता है। 2625 यह फार्म नामांकन फार्म के साथ भरकर दिया जाता है। 2625

इसमें अभ्यर्थी का नाम, पता, लिंग, आयु, जाति, व्यवसाय और शिक्षा भरनी है। 26 साथ में यह भी कि वह किस मान्यता प्राप्त दल से जुड़ा है, पहले कोई चुनाव लड़ा है या नहीं, और पहले किसी पंचायती राज संस्था या नगरीय निकाय में किसी पद पर रहा है या नहीं, और रहा हो तो कब तक। 26 फार्म पर पासपोर्ट साइज़ फोटो लगाने की जगह भी है। 26

चित्र में ख़ाली परिशिष्ट-6-E है। 26 ऊपर दाईं ओर फोटो का खाना है, "कृपया अपनी पासपोर्ट साईज फोटो लगायें"। 26 नीचे बारह मदें हैं, और अंत में उम्मीदवार के हस्ताक्षर, दिनांक और स्थान। 26

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): सांख्यिकी सूचना का फार्मखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): सांख्यिकी सूचना का फार्म
4

दल के अभ्यर्थी: प्ररूप क-ख और प्रतीक आदेश

  • प्रतीक आदेश 2025 (अधिसूचना 4196)
  • दल का अभ्यर्थी कब माना जाए
  • प्रतिस्थानी अभ्यर्थी

अधिसूचना 4196 (17.10.2025)

जि.प.-पं.स. सदस्य के प्रतीक: आदेश 2025

ज़िला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में प्रतीक किस आदेश से मिलेंगे, पहले यह जान लें। 45 यह आदेश आयोग की अधिसूचना 4196, दिनांक 17.10.2025 से जारी हुआ है। 45 इसका नाम है "राजस्थान जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य निर्वाचन प्रतीक (सूची और आवंटन) आदेश, 2025"। 45 यह केवल जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के चुनाव पर लागू होता है। 45

इस आदेश में "मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल" का एक तय मतलब है। 45 यह वह दल है, जो निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत राजस्थान में मान्यता प्राप्त है। 45 प्ररूप 'क' और 'ख', प्रतिस्थानी अभ्यर्थी, आरक्षित और मुक्त प्रतीक, और लॉट, ये सब इसी आदेश में तय हैं। 46

यह अधिसूचना 1427, दिनांक 26.04.2019 समेत कई पुरानी अधिसूचनाओं की जगह ले चुकी है। 45

खण्ड 6

दल का अभ्यर्थी कब माना जाएगा: चारों शर्तें

कोई अभ्यर्थी किसी मान्यता प्राप्त दल का अभ्यर्थी तभी माना जाएगा, जब खण्ड 6 की चारों शर्तें पूरी हों। 47

पहली, अभ्यर्थी ने अपने नामांकन पत्र में यह घोषणा की हो। 47 दूसरी, दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष या मुखिया, या उनके प्राधिकृत व्यक्ति, की लिखित सूचना प्ररूप 'ख' में आपको मिले। 47 यह सूचना नामांकन की अंतिम तारीख को अपरान्ह 3 बजे तक मिल जानी चाहिए। 47 तीसरी शर्त तब है, जब अध्यक्ष ने नियम 58 के उपनियम (5) के तहत किसी और को प्राधिकृत किया हो। 47 तब उस व्यक्ति के नमूने के हस्ताक्षर प्ररूप 'क' में, उसी तारीख को अपरान्ह 3.00 बजे तक आपके पास हों। 47 चौथी, प्ररूप 'क' और 'ख' पर केवल स्याही से हस्ताक्षर हों। 47

यहाँ अध्यक्ष का मतलब दल की राज्य इकाई का अध्यक्ष है। 48 जहाँ अध्यक्ष का पद नहीं है, वहाँ सचिव। 48 अध्यक्ष या सचिव के नमूने के हस्ताक्षर लोकसूचना जारी होने से पहले आयोग को दिए जाएँगे। 48 आयोग उन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी के मार्फत आपको भेजेगा। 48

प्ररूप 'क'

प्ररूप 'क': प्राधिकृत व्यक्तियों के नमूने के हस्ताक्षर

प्ररूप 'क' से दल बताता है कि उम्मीदवारों के नाम की सूचना देने के लिए उसने किसे प्राधिकृत किया है। 49 सारणी में प्राधिकृत व्यक्ति का नाम और दल में उसका पद भरा जाता है। 49 साथ में यह भी कि किस जिला परिषद या पंचायत समिति के किन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उसे प्राधिकृत किया गया। 49 इसके नीचे हर प्राधिकृत व्यक्ति के नमूने के हस्ताक्षर की तीन जगहें हैं। 49 सबसे नीचे दल के अध्यक्ष के हस्ताक्षर और नाम होते हैं, दल के नाम और दल की मोहर के साथ। 49

प्ररूप के नोट तीन बातें कहते हैं। 49 यह प्ररूप नामांकन की अंतिम तारीख को 3.00 बजे अपरान्ह तक आपके पास पहुँचना ज़रूरी है। 49 हस्ताक्षर स्याही से हों, अनुकृति हस्ताक्षर या रबड़ स्टाम्प वाले हस्ताक्षर नहीं माने जाएँगे। 49 और फैक्स, ई-मेल या व्हाट्सअप से भेजा गया प्ररूप मान्य नहीं है। 49

चित्र में अधिसूचना 4196 (17.10.2025) के साथ लगा ख़ाली प्ररूप 'क' है। 49 ऊपर "खण्ड 6" का हवाला है, बीच में तीन स्तम्भों की सारणी है। 49 फिर दो व्यक्तियों के लिए (1), (2), (3) नमूने के हस्ताक्षर की जगह है, और नीचे तीन नोट। 49

खाली प्ररूप (अधिसूचना 4196, 17.10.2025): प्ररूप 'क'खाली प्ररूप (अधिसूचना 4196, 17.10.2025): प्ररूप 'क'

प्ररूप 'ख'

प्ररूप 'ख': दल का अनुमोदित और प्रतिस्थानी अभ्यर्थी

प्ररूप 'ख' में दल बताता है कि उसने किस निर्वाचन क्षेत्र से किसे खड़ा किया है। 50 सारणी के स्तम्भ 3 से 5 में दल का अनुमोदित अभ्यर्थी आता है। 50 स्तम्भ 6 से 8 में प्रतिस्थानी अभ्यर्थी आता है। 50 अनुमोदित अभ्यर्थी का पर्चा संवीक्षा में खारिज हो, या वह नाम वापस ले, तो प्रतिस्थानी उसकी जगह लेगा। 51 शर्त यह है कि प्रतिस्थानी तब भी चुनाव लड़ रहा हो। 50

इसी प्ररूप में पहले दी गई सूचना रद्द करने की जगह भी है। 50 अनुमोदित या प्रतिस्थानी के पक्ष में पहले दी गई सूचना यहाँ "विखंडित" की जाती है। 50 आख़िर में दल प्रमाणित करता है कि हर अभ्यर्थी दल का सदस्य है, और उसका नाम दल के सदस्यों की नामावली में है। 50

नए प्ररूप पर "4196 दिनांक 17.10.25 का खण्ड 6" का हवाला है। 50

चित्र में अधिसूचना 4196 के साथ लगा ख़ाली प्ररूप 'ख' है। 50 सारणी में आठ स्तम्भ हैं, पहले दो में जिला परिषद या पंचायत समिति का नाम और निर्वाचन क्षेत्र का क्रम। 50 बाकी में अनुमोदित और प्रतिस्थानी, दोनों का नाम, पिता या पति का नाम और डाक का पता है। 50 नीचे रद्द करने की दो पंक्तियाँ, सदस्यता का प्रमाण, और अध्यक्ष या प्राधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर व दल की मोहर है। 50

खाली प्ररूप (अधिसूचना 4196, 17.10.2025): प्ररूप 'ख'खाली प्ररूप (अधिसूचना 4196, 17.10.2025): प्ररूप 'ख'

स्पष्टीकरण 3

हस्ताक्षर केवल स्याही से; फैक्स, ई-मेल, व्हाट्सअप नहीं

स्पष्टीकरण 3 प्ररूप के हस्ताक्षर पर तीन बातें कहता है। 48 प्ररूप 'क' या 'ख' पर दल के किसी पदाधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति के अनुलिपि (Facsimile) हस्ताक्षर नहीं माने जाएँगे। 48 रबड़ स्टाम्प वाले हस्ताक्षर भी नहीं माने जाएँगे। 48 और फैक्स, ई-मेल या व्हाट्सअप से भेजा गया कोई प्ररूप स्वीकार नहीं होगा। 48

यानी स्वीकार वही प्ररूप होगा, जिस पर केवल स्याही से हस्ताक्षर हों। 47 और वह नामांकन की अंतिम तारीख को 3.00 बजे तक आपके पास पहुँच जाना चाहिए। 49

खण्ड 7 · प्रतिस्थानी

प्रतिस्थानी अभ्यर्थी (Substitute Candidate) कब दल का अभ्यर्थी

संवीक्षा में दल के मुख्य अनुमोदित अभ्यर्थी का पर्चा पहले जाँचें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उसी से तय होगा कि प्रतिस्थानी अभ्यर्थी (Substitute Candidate) दल का अभ्यर्थी है या नहीं। 48 मान लीजिए मुख्य का पर्चा नियम 27 में संवीक्षा में रद्द हुआ, या उसने नियम 28 में नाम वापस ले लिया। 48 तब प्ररूप 'ख' के स्तम्भ 6 वाला प्रतिस्थानी दल का अभ्यर्थी माना जाएगा। 48 शर्त यह है कि उसका अपना पर्चा खारिज न हुआ हो, और उसने नाम वापस न लिया हो। 48

अब उलटी स्थिति लें। मुख्य का पर्चा स्वीकार हुआ और वह नाम वापस नहीं लेता। 48 तब प्रतिस्थानी दल का अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 48 उसका भी कोई पर्चा स्वीकार हुआ और वह भी नाम वापस नहीं लेता, तो उसे खण्ड 12 के अनुसार मुक्त प्रतीक मिलेगा। 48

अगर प्रतिस्थानी ने पाँच प्रस्तावकों के हस्ताक्षर वाला एक और पर्चा भरा है, तो उसकी जाँच निर्दलीय उम्मीदवार की तरह होगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। जिस अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया, उसके पर्चे पर उसी निर्वाचन क्षेत्र के 5 प्रस्तावक होने चाहिए। 8

खण्ड 8-9

दल अभ्यर्थी बदले, या एक सीट पर कई नाम दे

कभी दल अपना अभ्यर्थी बदल देता है। 48 खण्ड 8 कहता है कि दल पहले वाले का मनोनयन निरस्त करके दूसरे को अनुमोदित करे, तो दूसरा ही दल का अनुमोदित अभ्यर्थी है। 48 पर इसकी दो शर्तें हैं। 48 प्ररूप 'ख' में साफ़ लिखा हो कि पहले वाले का मनोनयन निरस्त कर दिया गया है। 48 और प्राधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर वाला यह प्ररूप 'ख' खण्ड 6 की समय-सीमा में आपको मिल जाए। 48

अब मान लीजिए एक ही सीट के लिए अलग-अलग अभ्यर्थियों के नाम वाले कई प्ररूप 'ख' आ गए। 48 दल यह भी नहीं बताता कि पहले वाला प्ररूप वापस ले लिया गया है। 48 तब दल का अभ्यर्थी वही माना जाएगा, जिसका नामांकन पत्र सबसे पहले मिला। 48 बाकी कोई दल का अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 48

खण्ड 9 एक और स्थिति बताता है। 48 दल एक ही सूचना में एक सीट के लिए एक से ज़्यादा अभ्यर्थी अनुमोदित कर दे, तो कोई भी दल का अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 48 यहाँ स्तम्भ 6 वाले प्रतिस्थानी की गिनती नहीं है। 48 दल बाद की किसी सूचना से पहले वाले सभी नाम निरस्त कर सकता है। 48 तब खण्ड 6 के अनुसार अनुमोदित वह एक अभ्यर्थी ही दल का अभ्यर्थी माना जाएगा। 48

व्यवहार की स्थितियाँ

तीन आम स्थितियाँ

अब व्यवहार की तीन स्थितियाँ देखें। पहली, अभ्यर्थी ने अपने नामांकन पत्र में यह घोषणा नहीं की कि उसे किसी दल ने खड़ा किया है। 47 तब वह उस दल का अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 47

दूसरी, अभ्यर्थी ने दो पर्चे भरे। 5 एक में वह मान्यता प्राप्त दल का अभ्यर्थी है, दूसरे में निर्दलीय (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। दोनों पर्चे स्वीकार हो गए, तो उसे दल का अभ्यर्थी माना जाएगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आदेश के खण्ड 11 के अनुसार, दल के खड़े किए अभ्यर्थी के मामले में उस पर्चे में दिखाए दल के आरक्षित प्रतीक पर विचार होगा, जिसमें उसने ख़ुद को उस दल का खड़ा किया होने की घोषणा की है, भले ही वह पर्चा पहला न हो। 52

तीसरी, अभ्यर्थी ने पर्चे के भाग-I और भाग-II दोनों भर दिए, पर प्ररूप 'क' और 'ख' लाना भूल गया (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। तब भी पर्चा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में स्वीकार हो सकता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। शर्त यह है कि भाग-II ठीक से भरा हो, और उस पर पाँच प्रस्तावकों के हस्ताक्षर हों। 318

5

संवीक्षा

  • नियम 27: कौन आए, किस आधार पर अस्वीकार
  • हर पर्चे पर कारण सहित आदेश
  • जाँच-सूची और रेड फ़्लैग

नियम 27 (58(5) के साथ पठित)

संवीक्षा: कब, कौन, किस आधार पर

संवीक्षा नियम 27 से चलती है, जिसे नियम 58(5) के साथ पढ़ा जाता है। 65 नियम 58(1) के तहत संवीक्षा का जो दिन और समय तय है, उसी पर आप नामांकन पत्रों की जाँच करेंगे। 65

संवीक्षा में अभ्यर्थी ख़ुद आ सकते हैं, कोई और नहीं। 653 आपको हर अभ्यर्थी को दो चीज़ें देनी हैं। 6 पहली, नामांकन पत्र देखने की हर उचित सुविधा। 653 दूसरी, किसी भी पर्चे पर आपत्ति करने का उचित मौका। 6 हर नामांकन पत्र पर अलग-अलग फ़ैसला लिखें। 6

नियम 27(3) अस्वीकार करने के चार आधार देता है। 653 (a) अभ्यर्थी योग्य नहीं है, या अयोग्य है। 653 (b) वह वही व्यक्ति नहीं है, जिसका नाम मतदाता सूची में है। 653 (c) हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान असली नहीं है, या धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से लिया गया है। 653 (d) नियम 25 के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ है। 653

नियम 27(4)-(5)

फ़ैसला उसी दिन, और कारण लिखकर

नियम 27(4) के अनुसार हर नामांकन पत्र पर आपको अपना फ़ैसला लिखना है, ACCEPTED या REJECTED। 653 पर्चा अस्वीकार किया, तो कारणों का संक्षिप्त ब्यौरा (Brief Statement of Reasons) लिखना ज़रूरी है। 653 केवल "Rejected" न लिखें, कारण सहित आदेश दें। 6

नियम 27(5) समय की बात करता है। 6 संवीक्षा उसी दिन पूरी करनी है, और कार्यवाही स्थगित नहीं होगी। 65455

यह जाँच एक अर्ध-न्यायिक कर्तव्य है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आप सभी आपत्तियों पर फ़ैसला करेंगे। 653 आपत्ति आने पर, या अपनी ओर से, आप नियम 27(3) के आधारों पर पर्चा अस्वीकार कर सकते हैं। 6 इसके लिए आप ठीक समझें तो संक्षिप्त जाँच करें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अभ्यर्थी को सुनवाई का उचित मौका देने के बाद आप नामांकन को अयोग्य घोषित कर सकते हैं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आधार होगा नियम 27(3) का कोई भी आधार। 6 नियम 58(5) और (6) का पालन न होना भी आधार है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सभी पर्चों की जाँच होगी। 6 अस्वीकृति के हर मामले में कारण दर्ज होंगे। 6 आपत्ति पर फ़ैसले के कारण भी दर्ज करें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

संवीक्षा के सिद्धांत

किस बात पर पर्चा न गिराएँ, किस पर गिराएँ

संवीक्षा के कुछ सिद्धांत और देख लें। ऐसा दोष, जो महत्वपूर्ण प्रकृति का नहीं है, उसके आधार पर पर्चा अस्वीकार नहीं होगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पर्चे में तय प्रतीकों के अलावा कोई और प्रतीक लिखा हो, तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा। 52 प्रतीकों वाली घोषणा अधूरी हो या उसमें कोई गलती हो, तो यह भी अस्वीकृति का आधार नहीं है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

जिस अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया, उसके पर्चे पर उसी निर्वाचन क्षेत्र के 5 मतदाताओं के हस्ताक्षर होने चाहिए। 831 तभी वह विधिवत नामांकित माना जाएगा। 8 मान्यता प्राप्त दल ने एक को मुख्य और दूसरे को स्थानापन्न अभ्यर्थी बनाया हो, तो मुख्य का पर्चा पहले जाँचें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। मुख्य का पर्चा वैध निकला और उसने अपना नाम वापस नहीं लिया, तो स्थानापन्न को उस दल का अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 48

आदेश का नमूना

स्वीकार या अस्वीकार: आदेश ऐसे लिखें

हर पर्चे पर आपका आदेश लिखा जाना है। 6 नामांकन पत्र में इसकी छपी जगह है, "Decision of Returning Officers Accepting or Rejecting the Nomination Paper"। 56 प्रशिक्षण सामग्री इसके दो नमूने देती है। छपे प्ररूप में RO लिखता है कि उसने नामांकन पत्र राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार परखा है, और फिर अपना फ़ैसला लिखता है। 56 प्रशिक्षण के नमूने वाले स्वीकार आदेश में आप लिखते हैं कि Form IV-A और Form IV-D नामांकन पत्र को नियम 27 और नियम 58 के अनुसार परखा गया (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अभ्यर्थी की पात्रता, नामावली में उसकी स्थिति, प्रस्तावक, जमानत और धारा 19 की अयोग्यताएँ जाँची गईं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इनमें कोई वैधानिक कमी नहीं मिली, इसलिए पर्चा स्वीकार किया जाता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

अस्वीकार आदेश में अस्वीकार करने के कारणों का संक्षिप्त ब्यौरा लिखना है। 6 फिर यह कि वह कमी किस नियम और धारा 19 के किस खण्ड के तहत अस्वीकार करने का वैधानिक आधार है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। छपे प्ररूप में फ़ैसले के नीचे दिनांक और रिटर्निंग ऑफिसर के हस्ताक्षर आते हैं। 56 प्रशिक्षण के दोनों नमूनों में समय भी लिखना है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

चित्र में प्रशिक्षण सामग्री के दो ख़ाली नमूने हैं, "नामांकन स्वीकार आदेश" और "नामांकन अस्वीकार आदेश"। अस्वीकार वाले में कमी लिखने की ख़ाली जगह है, और "Rule __() read with Section 19()" भरने की जगह। दोनों के नीचे RO के हस्ताक्षर, दिनांक और समय की जगह है।

मूल SLMT स्लाइड: स्वीकार और अस्वीकार आदेश के खाली नमूनेमूल SLMT स्लाइड: स्वीकार और अस्वीकार आदेश के खाली नमूने

जाँच-सूची A-B

मूल पात्रता और आपराधिक / सांविधिक जाँच

संवीक्षा की यह जाँच-सूची चार हिस्सों में है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पहला हिस्सा A, मूल पात्रता है। अभ्यर्थी का नाम पंचायती राज संस्था की मतदाता सूची में हो। 3 वह संबंधित पंचायत समिति या जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता हो (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उसकी आयु 21 वर्ष पूरी हो चुकी हो। 573 और यह जाँचें कि वह धारा 19 के तहत अपात्र तो नहीं है। 36

दूसरा हिस्सा B, आपराधिक और सांविधिक जाँच है। इसमें 19(g) में दोषसिद्धि, और 19(gg) में संज्ञान और आरोप देखें। 44 धारा 38, PRI का बकाया, legal practitioner, और भूतपूर्व Chairperson का बकाया भी इसी हिस्से में है। 44

एक बात पर ख़ास ध्यान दें। किसी को RPA, 1951 की धारा 8(1) में गिने अपराध में दोषसिद्ध किया गया, और अदालत ने केवल जुर्माना लगाया। 5859 तब धारा 8(1)(i) के अनुसार वह दोषसिद्धि की तारीख से 6 वर्ष तक अयोग्य रहेगा। 5958

जाँच-सूची C-D

आरक्षण और नामांकन की जाँच

तीसरा हिस्सा C, आरक्षण है। सीट SC, ST या OBC के लिए आरक्षित है, तो अभ्यर्थी उसी वर्ग का होना चाहिए। 44 आरक्षित सीट से लड़ने वाला अभ्यर्थी पर्चे के साथ कलक्टर या राज्य सरकार के प्राधिकृत किसी अधिकारी का जारी किया प्रमाण पत्र लगाएगा। 6 सीट महिला के लिए आरक्षित है, तो अभ्यर्थी केवल महिला हो। 446 और सीट SC, ST या OBC महिला के लिए है, तो अभ्यर्थी उसी वर्ग की महिला ही हो। 44

चौथा हिस्सा D, नामांकन है। यहाँ देखें कि ये सब पर्चे के साथ हैं: Form IV-A, Form IV-D, जमानत, दल या निर्दलीय की श्रेणी, और दल का पत्र। 8531 दल के अभ्यर्थी के लिए 1 प्रस्तावक, और दूसरे अभ्यर्थी के लिए 5 प्रस्तावक हों। 8 प्रस्तावक उसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता हों, और प्रस्तावकों का दोहराव भी जाँच लें। 8

अस्वीकृति

नामांकन पत्र इन कारणों से खारिज होगा

अब देखें, किन कारणों से नामांकन पत्र खारिज होगा। पहले अभ्यर्थी से जुड़े कारण। अभ्यर्थी में धारा 19 की कोई अयोग्यता हो। 6 अभ्यर्थी वह व्यक्ति ही न हो, जिसका नाम और मतदाता सूची क्रमांक पर्चे में लिखा है। 6 या वह चुनाव के लिए योग्य ही न हो। 6 जैसे, वह उस पंचायत समिति या जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता न हो (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

फिर कागज़ से जुड़े कारण। पर्चे के साथ उपाबंध-IA न दिया गया हो। 36 पर्चे पर अभ्यर्थी के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान न हो। 6 घोषणा पत्र या उपाबंध-IA पर हस्ताक्षर न होना भी कारण है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। ज़रूरी जमानत जमा न कराई गई हो। 560 या नियम 25 के प्रावधानों के पालन में चूक हुई हो। 653 नियम 58 के उप-नियम (5) और (6) के किसी प्रावधान का पालन न होना भी कारण है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

10 रेड फ़्लैग

RO के लिए दस रेड फ़्लैग

प्रशिक्षण सामग्री RO के लिए दस "Red Flag" जाँचें गिनाती है। पहली पाँच अभ्यर्थी और प्रस्तावक की हैं। अभ्यर्थी का नाम मतदाता सूची में न हो, या उसकी आयु 21 वर्ष पूरी न हो। 357 प्रस्तावक गलत निर्वाचन क्षेत्र का हो। 8 मान्यता प्राप्त दल के अभ्यर्थी के लिए 1 प्रस्तावक की शर्त पूरी न हो, या निर्दलीय के लिए 5 वैध प्रस्तावक न हों। 8

छठी, एक मतदाता ने एक से ज़्यादा अभ्यर्थियों के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हों। 8 तब नियम 58(5)(g) के अनुसार पहले मिले नामांकन को छोड़कर बाद वाले अमान्य होंगे। 8

बाकी चार ये हैं। ज़रूरी जमानत जमा न हो। 5 आरक्षित सीट के लिए जाति प्रमाण पत्र या आरक्षण की शर्त पूरी न हो। 62444 प्ररूप 4-घ (Form IV-D) पर्चे के साथ न लगा हो। 8 या वह अधूरा भरा हो: इसका हर कॉलम भरना ज़रूरी है, बस संतान वाली योग्यता का कॉलम खाली छोड़ा जा सकता है। 23 और धारा 19 की कोई वास्तविक अयोग्यता हो। 3

मास्टर जाँच-सूची

मास्टर जाँच-सूची: जमानत और दल

प्रशिक्षण सामग्री में एक मास्टर जाँच-सूची भी है, जिसमें 46 बिंदु हैं। हर बिंदु के आगे लिखा है कि क्या जाँचना है और किस आधार पर, साथ में ✓ या ✗ का खाना। यहाँ उसके दो पन्ने हैं।

जमानत वाले पन्ने पर चार बिंदु हैं। सामान्य उम्मीदवार के ₹500, और महिला, SC, ST या OBC के ₹250 जमा हों, नियम 58(5)(a)। 560 जमा का सबूत देखें, जैसे treasury या challan का रिकॉर्ड (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। एक अभ्यर्थी ने कई नामांकन पत्र दिए हों, तो जमानत एक ही काफ़ी है, नियम 58(5)(c)। 5

दल वाले पन्ने पर भी चार बिंदु हैं। अभ्यर्थी मान्यता प्राप्त दल का है या नहीं, नियम 58(5)(e)। 8 दल के President, राज्य इकाई प्रमुख या authorised व्यक्ति का पत्र है या नहीं। 847 यह पत्र नामांकन के आख़िरी दिन 3:00 PM तक आना चाहिए। 847 और दल ने उस निर्वाचन क्षेत्र में एक ही अभ्यर्थी खड़ा किया है या नहीं, नियम 58(6)(b)। 848

चित्र में प्रशिक्षण सामग्री की जाँच-सूची के दो पन्ने हैं, "प्रतिभूति निक्षेप राशि" (बिंदु 14-17) और "मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल" (बिंदु 18-21)। हर पंक्ति में क्रम, जाँच-बिंदु, क्या जाँचें, आधार और ✓/✗ का खाना है।

मूल SLMT स्लाइड: जमानत की जाँचमूल SLMT स्लाइड: जमानत की जाँच
मूल SLMT स्लाइड: मान्यता प्राप्त दल की जाँचमूल SLMT स्लाइड: मान्यता प्राप्त दल की जाँच

संवीक्षा के बाद

RO का विनिश्चय और वैध नामांकनों की सूची

संवीक्षा के बाद हर पर्चे पर आपका फ़ैसला, यानी विनिश्चय, दर्ज होता है। 6 नामांकन पत्र का भाग-IV आप भरते हैं। 61 इसमें पर्चे की क्रम संख्या लिखी जाती है, और यह कि अभ्यर्थी ने पर्चा आपके कार्यालय में किस तारीख को कितने बजे दिया। 61 भाग-V में आप पर्चा स्वीकार या अस्वीकार करते हुए अपना विनिश्चय लिखते हैं। 56 इसमें पहले से छपा है कि आपने पर्चे को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 और उसके नियमों के अनुसार परख लिया है। 56

इसके बाद सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए वैध रूप से नामांकित उम्मीदवारों की सूची बनती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। यह सूची निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकाई जाती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। मास्टर जाँच-सूची में इसके बाद नाम वापसी आती है, फिर Form V में अंतिम सूची, और फिर प्रतीक का आवंटन। 7

पहले चित्र में नामांकन पत्र का भाग-IV और भाग-V है, दोनों के नीचे तारीख और रिटर्निंग अधिकारी की जगह। 6156 दूसरे चित्र में ख़ाली FORM IV (C) है, "(See Rule 59, 61, 62)"। 62 इसकी सारणी में S.No., उम्मीदवार का नाम और विवरण, पता, और Remarks के स्तम्भ हैं, नीचे Signature of the Returning Officer। 62

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नाम निर्देशन पत्र, भाग-IV और भाग-Vखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): नाम निर्देशन पत्र, भाग-IV और भाग-V
खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): Form IV (C)खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): Form IV (C)
6

पात्रता और अयोग्यता

  • धारा 19 की जाँच-सूची
  • मुकदमा: कब अयोग्यता
  • लाभ का पद: आयोग का पत्र 10297

धारा 19(a)

जो विधानसभा के लिए अयोग्य, वह पंचायत के लिए भी

धारा 19 की जाँच-सूची 19(a) से शुरू होती है। 3 इसकी बात सीधी है: जो व्यक्ति राजस्थान विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है, वह पंचायत का चुनाव भी नहीं लड़ सकता। 357 इसकी जाँच संविधान के Article 191 से होती है। 58

पाँच बातें देखनी हैं। पहली, वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन Office of Profit का पद रखता हो, यह Article 191(1)(a) है; पर जिस पद को राज्य विधानमंडल ने क़ानून बनाकर इस अयोग्यता से बाहर रखा है, वह इसमें नहीं गिना जाता। 63 दूसरी, सक्षम न्यायालय ने उसे Unsound Mind घोषित किया हो, यह 191(1)(b) है। 63 तीसरी, वह Undischarged Insolvent यानी दिवालिया हो, यह 191(1)(c) है। 63 चौथी, वह भारत का नागरिक न हो, या उसने अपनी मर्ज़ी से विदेशी नागरिकता ली हो, या वह विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा रखता हो, यह 191(1)(d) है। 63 पाँचवीं, संसद के बनाए किसी कानून के तहत वह अयोग्य हो, यह 191(1)(e) है। 63 इनमें से कोई भी बात हो तो निर्णय है अयोग्य। 63

दल-बदल यानी Defection की पंक्ति Article 191(2) और दसवीं अनुसूची की है। 63 यह पंक्ति इस चुनाव पर लागू नहीं है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। प्रशिक्षण सामग्री के एक पुराने रूप में "अयोग्य" का एक ही कॉलम दल-बदल समेत सब पंक्तियों पर फैला था। प्रशिक्षण सामग्री के बाद के एक रूप में दल-बदल के आगे "लागू नहीं" छपा है।

चित्र में प्रशिक्षण सामग्री की यही तालिका है। बाईं ओर 19(a) का कथन है, बीच में पाँच अयोग्यताएँ और उनके Article हैं। दाईं ओर पहली पाँच पंक्तियों के आगे "अयोग्य" है, और सबसे नीचे दल-बदल के आगे "लागू नहीं"।

मूल SLMT स्लाइड (SDM/DM फ़ाइल): धारा 19(a) की जाँच-सूचीमूल SLMT स्लाइड (SDM/DM फ़ाइल): धारा 19(a) की जाँच-सूची

धारा 19 · 1

धारा 19(aa) से 19(d): क्या देखें

धारा 19 के अगले चार खण्ड 19(aa) से 19(d) तक हैं। हर खण्ड के साथ लिखा है कि RO कौन-सा कागज़ देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। बात सही निकले तो पर्चा Reject होगा। 6

19(aa) में व्यक्ति को किसी सक्षम अदालत ने भ्रष्टाचार के काम का दोषी पाया हो। 3 यह फ़ैसला इस एक्ट या इसके नियमों के तहत दायर चुनाव याचिका के नतीजे में आया हो। 3 यहाँ RO कोर्ट ऑर्डर देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। 19(b) वेतन वाले पद की बात है, पद पूरे समय का हो या कुछ समय का। 3 यह पद किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन हो सकता है। 3 या किसी ऐसे विश्वविद्यालय, निगम, निकाय, उद्यम या सहकारी समिति के अधीन, जो राज्य सरकार के नियंत्रण में हो, या जिसका पैसा पूरा या कुछ हिस्सा राज्य सरकार देती हो। 3 यहाँ RO नियुक्ति पत्र देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

19(c) में व्यक्ति नैतिक अधमता से जुड़े कदाचार पर राज्य सरकार की सेवा से बर्ख़ास्त हुआ हो। 3 साथ में सार्वजनिक सेवा में रोज़गार के लिए अयोग्य भी घोषित हुआ हो। 3 यहाँ बर्ख़ास्तगी का ऑर्डर देखें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। 19(d) में वह किसी पंचायती राज संस्था के अधीन वेतन वाला पद या लाभ का पद रखता हो। 3 यहाँ सेवा रिकार्ड देखें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। लाभ का पद है या नहीं, इसके पाँच परीक्षण आगे आयोग के पत्र 10297 में हैं। 64

धारा 19 · 2

धारा 19(e) से 19(gg): क्या देखें

19(e) अनुबंध की बात है। 3 संबंधित पंचायती राज संस्था के किसी अनुबंध में उम्मीदवार का सीधा या अप्रत्यक्ष हिस्सा या हित हो, और उस काम के लिए किए गए किसी काम में उसका ऐसा हिस्सा या हित हो, तो वह अयोग्य है। 3 हिस्सा ख़ुद का हो या साझेदार, नियोक्ता या कर्मचारियों के ज़रिए, बात वही है। 3 यहाँ RO उसका Contract record देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। 19(f) में ऐसा शारीरिक या मानसिक दोष या बीमारी हो जो उसे काम करने में असमर्थ बनाती हो। 3 यहाँ RO कानूनी साक्ष्य का आधार ले (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

19(g) में सक्षम न्यायालय ने उसे किसी अपराध का दोषी ठहराया हो और छह महीने या ज़्यादा की कैद सुनाई हो। 44 सज़ा बाद में न रद्द हुई हो, न माफ़ हुई हो, न क्षमादान मिला हो। 44 यहाँ RO कानूनी फ़ैसला देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

19(gg) मुकदमे की बात है। 44 जिस अपराध में पाँच वर्ष या ज़्यादा की कैद हो सकती है, उसमें सक्षम न्यायालय ने संज्ञान लिया हो। 44 उसी न्यायालय ने उसके विरुद्ध आरोप तय किए हों और मुकदमा चल रहा हो। 44 यहाँ RO कोर्ट ऑर्डर देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इन चारों में भी बात सही निकले तो पर्चा Reject होगा। 6

धारा 19 · 3

धारा 19(h) से 19(k): क्या देखें

19(h) में व्यक्ति अभी धारा 38 के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो। 44 यहाँ RO धारा 38 देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। धारा 38 के तहत अयोग्य घोषित लोगों की सूची जिला निर्वाचन अधिकारी देंगे। 65 19(i) बकाये की बात है। 44 संबंधित पंचायती राज संस्था का कोई टैक्स या फीस, माँग का नोटिस पेश होने की तारीख से दो महीने में न चुकाया हो। 44 यहाँ RO उसके Dues Record देखे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

19(i) में एक छूट भी है। 43 उम्मीदवार ने नामांकन पत्र भरने की तारीख से पहले बकाया टैक्स या फीस चुका दी हो, तो वह अयोग्य नहीं माना जाएगा। 43

19(j) में वह संबंधित पंचायती राज संस्था की ओर से या उसके विरुद्ध वकील के रूप में काम कर रहा हो। 44 यहाँ RO उसका Professional status जाँचे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। 19(k) में वह राजस्थान मृत्यु भोज रोकथाम अधिनियम, 1960 के तहत दंडनीय अपराध का दोषी ठहराया गया हो। 44 यहाँ RO देखे कि Conviction हुआ है या नहीं। 44 इन चारों में बात सही निकले तो पर्चा Reject होगा। 6

धारा 19 · 4

धारा 19(l) से 19(o)

19(l) दो से ज़्यादा बच्चों वाली शर्त है। 65 सूची में इसके आगे लिखा है "यह हटा दी गयी है", और निर्णय Accept है। 23 यानी संतान से जुड़ी योग्यता के प्रावधान अब हटा दिए गए हैं। 23

19(m) पुराने चेयरपर्सन या डिप्टी चेयरपर्सन के लिए है। 44 ऐसे व्यक्ति ने संस्था के बकाये का नोटिस मिलने के दो महीने बाद भी पैसा न चुकाया हो। 44 साथ में उसका नाम डिफॉल्टरों की उस सूची में हो जो राज्य सरकार ने कलेक्टर (पंचायत) को दी है। 44 यह सूची चुनाव की अधिसूचना से कम से कम दो महीने पहले दी गई हो। 44 RO देखे कि उसका नाम Defaulter list में है या नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नाम हो तो Reject, पर अगर उसने नामांकन पत्र देने से पहले बकाया जमा करा दिया, तो वह अपात्र नहीं होगा। 63543

19(n) में सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित है, पर व्यक्ति उस वर्ग का सदस्य नहीं है। 44 यहाँ RO उसका Caste Certificate जाँचे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। 19(o) में सीट महिला के लिए आरक्षित है, पर उम्मीदवार महिला नहीं है। 44 यहाँ RO उसकी पात्रता जाँचे कि वह महिला है या नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इन दोनों में दावा गलत निकले तो पर्चा Reject। 6

धारा 19 · 5

धारा 19(p) से 19(r)

19(p) में सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। 44 व्यक्ति उस जाति, जनजाति या वर्ग का सदस्य नहीं है और महिला भी नहीं है। 44 RO जाँचे कि उम्मीदवार महिला है और उसी वर्ग की है या नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। बात सही निकले तो Reject। 6

19(q) शौचालय की शर्त है। 44 घर में इस्तेमाल लायक साफ़-सुथरा शौचालय नहीं है, और परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच करता है। 44 इसके लिए अभ्यर्थी से घोषणा/अण्डरटेकिंग ली जानी है, जिसका प्रारूप परिशिष्ट 6-C आयोग ने तैयार किया है। 35 बात सही निकले तो वह चुनाव लड़ने के लिए अपात्र होगा। 35

19(r) शैक्षिक योग्यता से जुड़ा खण्ड था। 44 इसमें पंचायत समिति या जिला परिषद सदस्य के लिए Secondary School Examination पास न होना लिखा है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पर अब यह खण्ड हटा दिया गया है, इसलिए इस आधार पर पर्चा खारिज नहीं होगा, Accept होगा। 35 प्रशिक्षण सामग्री में इस तालिका के क्रमांक 14 से 16 पिछली तालिका के क्रमांकों से दोहराए गए हैं। इसलिए पंक्ति को खण्ड के अक्षर से पहचानें।

धारा 19(1)(gg)

FIR से मुकदमे तक: अयोग्यता कब बनती है

धारा 19(gg) में सवाल यह है कि अयोग्यता किस मोड़ पर बनती है। आपराधिक मामला FIR से चलकर Chargesheet, Cognizance, Charge Framed, Trial और Conviction तक जाता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। हर मोड़ पर RO का निर्णय अलग है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

सिर्फ़ FIR दर्ज होने पर पर्चा Reject नहीं होगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पुलिस ने आरोप-पत्र कोर्ट में पेश कर दिया, तब भी सिर्फ़ chargesheet के आधार पर Reject नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सक्षम कोर्ट ने अपराध का संज्ञान ले लिया, तब भी संज्ञान मात्र से Reject नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

कोर्ट ने 5 वर्ष या ज़्यादा की सज़ा वाले अपराध में charge frame कर दिया, तो RO under-trial की स्थिति जाँचे। 66 charge framing के बाद अभियुक्त under trial है और बाकी शर्तें पूरी हैं, तो यह नामांकन Reject करने का आधार है। 65 trial के बाद दोषसिद्धि हो जाए तो अयोग्यता के अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं, जैसे लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(1) में बताए अपराधों में दोषसिद्धि। 58 जाँच उन्हीं प्रावधानों के अनुसार अलग से होगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सूत्र याद रखें: संज्ञान + आरोप तय + 5 वर्ष या ज़्यादा का अपराध + मुकदमा जारी = धारा 19(gg)। 44

पात्रता के स्पष्टीकरण

धारा 19 के साथ ये भी याद रखें

धारा 19 के साथ पात्रता की चार बातें भी याद रखें। पहली, कोई व्यक्ति राजस्थान में लागू कानून के तहत रजिस्टर्ड किसी कंपनी या को-ऑपरेटिव सोसाइटी का शेयर-होल्डर या सदस्य भर है। 43 सिर्फ़ इस कारण उसे उस कंपनी या सोसाइटी और पंचायती राज संस्था के बीच के कॉन्ट्रैक्ट में हितबद्ध नहीं माना जाएगा। 43

दूसरी, 19(aa) में बताए आदेश की तारीख से छह साल तक व्यक्ति अयोग्य रहेगा। 43 तीसरी, 19(c), (g) और (k) में बर्ख़ास्तगी या दोषी ठहराए जाने की तारीख से छह साल बीतने पर वह फिर चुनाव लड़ने के योग्य हो जाएगा। 43 चौथी, 19(i) में बकाया टैक्स या फीस की बात है। 43 जिसने नामांकन पत्र भरने की तारीख से पहले अपना बकाया चुका दिया, वह अयोग्य नहीं माना जाएगा। 43

इनके अलावा धारा 19 में अलग से स्पष्टीकरण-II है, जो 19(q) यानी शौचालय वाले खण्ड का है। 43 "सैनिटरी टॉयलेट" का मतलब water sealed toilet system या सेटअप है, जो तीन दीवारों, एक दरवाज़े और एक छत से घिरा हो। 43 "परिवार के सदस्यों" में व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे और उसके साथ रहने वाले माता-पिता आते हैं। 43

आयोग का पत्र 10297 (09.10.2026)

लाभ का पद: सात पदों पर आयोग का मार्गदर्शन

लाभ का पद यानी Office of Profit किसे मानें, इस पर आयोग ने पत्र 10297 (09.10.2026) में सात पदों पर मार्गदर्शन दिया है। 67 पत्र नागौर के जिला निर्वाचन अधिकारी के सवाल पर लिखा गया, और इसकी प्रति सभी रिटर्निंग अधिकारियों को गई है। 6764 आयोग ने माना है कि लाभ के पद की परिभाषा संविधान, अधिनियम, नियम या परिपत्र में साफ़ नहीं है। 67 इसलिए मार्गदर्शन उच्चतम और उच्च न्यायालय के पुराने फ़ैसलों पर टिका है। 67 राजस्थान संविदा नियम, 2022 के तहत नियुक्त संविदा कार्मिक का पद लाभ का पद माना जाना है। 67 इनकी नियुक्ति, सेवा शर्तें, नियंत्रण और सेवा ख़त्म करने की शक्ति सरकार के पास होती है। 67

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका और राशन डीलर के पद लाभ के पद नहीं माने गए हैं। 68 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका का पद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने रिट याचिका 8022/2021 में लाभ का पद नहीं माना। 68 पर महिला एवं बाल विकास विभाग के परिपत्र 4244 (12.01.2023) के बिन्दु 12 के अनुसार इन्हें नामांकन तिथि से परिणाम तक अवैतनिक अवकाश लेना होगा। 68 जीतने पर शपथ से पहले उस पद से त्याग पत्र देना होगा। 68 राशन डीलर का पद भी लाभ का पद नहीं है। 68 यह राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर पीठ) के फ़ैसले मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (04.12.2014) से तय है। 68

आशा सहयोगिनी, साथिन, विद्या संबल योजना के तहत काम करने वाले व्यक्ति और प्रशासक: इन मामलों में RO को ख़ुद जाँच कर निर्णय लेना है। 6867 आशा सहयोगिनी के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का परिपत्र 186 (13.07.2022), नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण देखें। 67 साथिन पर महिला अधिकारिता विभाग का कोई निर्देश नहीं है, इसलिए इसका निर्णय आशा सहयोगिनी की तरह होगा। 67 विद्या संबल में भी नियुक्ति पत्र, मानदेय, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचें, और संशय हो तो चुनाव से पहले त्याग पत्र लेना उचित होगा। 68 प्रशासक के पद पर आयोग पहले निर्देश दे चुका है, RO उसी आदेश के अनुसार अपने स्तर से निर्णय ले। 68

पत्र 10297 · परीक्षण

लाभ का पद है या नहीं: पाँच परीक्षण

कोई पद लाभ का पद है या नहीं, यह नामांकन पत्रों की संवीक्षा के समय पाँच सवालों से तय करें। 64 ये परीक्षण उच्चतम न्यायालय ने Pradyut Bardoloi v/s Swapon Roy (2001) 2 SCC 1 में बताए हैं, और आयोग ने पत्र 10297 में इन्हीं पर निर्णय लेने को कहा है। 64

पहला, क्या नियुक्ति सरकार ने की है? 64 दूसरा, क्या सरकार को उसे हटाने का अधिकार है? 64 तीसरा, क्या उस पद से कोई वेतन, मानदेय या दूसरा आर्थिक लाभ जुड़ा है? 64 चौथा, पदधारी जो काम करता है, उसकी प्रकृति क्या है? 64 पाँचवाँ, सरकार उस पद पर कितना नियंत्रण रखती है? 64

Jaya Bachchan v/s Union of India (2006) 5 SCC 266 में उच्चतम न्यायालय ने एक बात और साफ़ की। 64 लाभ सच में मिला या नहीं, यह निर्णायक नहीं है। 64 देखना यह है कि पद आर्थिक लाभ या मानदेय पाने में सक्षम है या नहीं। 64 किसी पद पर संशय हो तो उसका नियुक्ति पत्र, सेवा शर्तें, वेतन या मानदेय और सरकारी नियंत्रण ज़रूर देखें। 64

7

नाम वापसी, प्रतीक और अंतिम सूची

  • नियम 28: नाम वापसी
  • आरक्षित और मुक्त प्रतीक
  • प्रपत्र 5 में लड़ने वालों की सूची

नियम 28

नाम वापसी के नियम

नाम वापसी का रास्ता नियम 28 में है। 697 अभ्यर्थी नाम वापसी का नोटिस ख़ुद, व्यक्तिगत रूप से आकर RO को देगा। 697 नोटिस दो प्रतियों में होगा (नियम 28(1))। 769 नियमों में नाम वापसी का कोई प्रारूप तय नहीं है, पर सुविधा के लिए परिशिष्ट-21 में एक मॉडल फ़ॉर्म तैयार किया गया है। 69 नियम 28(1) के अंग्रेज़ी पाठ के अनुसार नोटिस लिखित हो और उस पर अभ्यर्थी के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान हो। 7

नोटिस तय जगह पर और तय समय में देना है। 69 तय समय के बाद दिया नोटिस अमान्य होगा (नियम 28(2))। 697 एक बार नोटिस दे दिया, तो अभ्यर्थी उसे वापस नहीं ले सकता (नियम 28(3))। 769

ध्यान रहे, इस नोटिस से अभ्यर्थी पूरे चुनाव से हटता है। 69 दो पर्चों में से सिर्फ़ एक पर्चा वापस लेने के लिए यह नोटिस नहीं दिया जा सकता। 69 किसी ने कई पर्चे भरे और नाम वापसी का नोटिस दे दिया, तो उसके सभी पर्चे उसी एक नोटिस से वापस लिए हुए माने जाएँगे। 69 नियम 28 राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 का है। 76945

धारा 19-B

एक संस्था में कई सीटों पर नामांकन

कोई व्यक्ति एक ही पंचायती राज संस्था में एक से ज़्यादा सीटों पर नामांकन भर दे, तो धारा 19-B लागू होती है। 47057 नाम वापसी के तय समय के भीतर उसे एक सीट छोड़कर बाकी सब सीटों से नाम वापस लेना है। 457 ऐसा नहीं किया, तो सभी सीटों से उसकी अभ्यर्थिता वापस मान ली जाएगी। 470

संवीक्षा के समय RO ऐसे पर्चे निरस्त नहीं करेगा। 5770 असर नाम वापसी का समय बीतने पर आता है। 57 तब वह किसी भी सीट से लड़ने वाला अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। 5770

खण्ड 3-5

प्रतीक के बुनियादी नियम

प्रतीक का पूरा ढाँचा आयोग की अधिसूचना 4196 (17.10.2025) में है। 45 हर सविरोध चुनाव में, यानी जिसमें मतदान होता है, हर लड़ने वाले अभ्यर्थी को एक प्रतीक मिलेगा। 71 एक निर्वाचन क्षेत्र में अलग-अलग अभ्यर्थियों को अलग-अलग प्रतीक मिलेंगे। 47

प्रतीक दो तरह के हैं, आरक्षित और मुक्त। 47 आरक्षित प्रतीक सारणी-1 में मान्यता प्राप्त दलों के सामने लिखे हैं। 72 मुक्त प्रतीक पंचायत समिति के लिए सारणी-2 में और जिला परिषद के लिए सारणी-3 में हैं। 47 दल का आरक्षित प्रतीक सिर्फ़ उसी दल के खड़े किए अभ्यर्थी को मिलेगा, किसी और को नहीं। 47 और दल के अभ्यर्थी को सिर्फ़ वही प्रतीक मिलेगा, कोई दूसरा नहीं। 47

अनुमोदित सूची के बाहर का कोई प्रतीक नहीं दिया जा सकता। 52 आवंटन में पहले राष्ट्रीय दलों के, फिर राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त दलों के अभ्यर्थी लें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उन्हें उनके आरक्षित प्रतीक दें, कोई दूसरा नहीं। 47 आयोग ने पत्र 5083 (24.12.2025) के साथ आवंटित आरक्षित और मुक्त प्रतीकों की सूची भेजी है। 73 उस पत्र में मान्यता प्राप्त दलों के नाम, उनके आरक्षित प्रतीक और मुक्त प्रतीकों की सूची है। 74 पत्र के मुताबिक़ ये आरक्षित और मुक्त प्रतीक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए जारी अधिसूचना 4196 (17.10.2025) के अनुसार आवंटित हैं। 73

सारणी-1

मान्यता प्राप्त दल और उनके आरक्षित प्रतीक

अधिसूचना 4196 की सारणी-1 में छह राष्ट्रीय दल और राजस्थान के दो राज्यीय दल हैं। 75 हर दल के सामने उसका आरक्षित प्रतीक लिखा है। 75

सारणी-1 के दल और उनके आरक्षित प्रतीक ये हैं। 75 A राष्ट्रीय दल हैं, B राज्यीय दल (राजस्थान राज्य के लिए)। 75

# दल आरक्षित प्रतीक
A-1 आम आदमी पार्टी झाड़ू 75
A-2 बहुजन समाज पार्टी हाथी 75
A-3 भारतीय जनता पार्टी कमल 75
A-4 कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) हथौड़ा, हँसिया और सितारा 75
A-5 इंडियन नेशनल कॉंग्रेस हाथ 75
A-6 नेशनल पीपुल्स पार्टी किताब 75
B-1 राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बोतल 75
B-2 भारत आदिवासी पार्टी हॉकी और बॉल 75

सारणी-1 · चिह्न

आरक्षित प्रतीक: चिह्न कैसे दिखते हैं

सारणी-1 में सिर्फ़ प्रतीकों के नाम लिखे हैं। 75 ये चिह्न देखने में कैसे लगते हैं, यह नीचे के चित्र में है। आयोग के पत्र 5083 (24.12.2025) के साथ लगी सूची "मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल एवं उनके आरक्षित प्रतीक" में "चुनाव चिन्ह" का एक कॉलम भी है। 76 दलों और प्रतीकों के नाम अधिसूचना 4196 की सारणी-1 से मेल खाते हैं। 7577

चित्र के दो हिस्से हैं। पहले हिस्से में राष्ट्रीय दलों की तालिका की पहली तीन पंक्तियाँ हैं: आम आदमी पार्टी (झाड़ू), बहुजन समाज पार्टी (हाथी) और भारतीय जनता पार्टी (कमल)। 75 हर पंक्ति में क्रम, दल का नाम, आरक्षित प्रतीक और "चुनाव चिन्ह" कॉलम में उसका चित्र है। दूसरे हिस्से में "राज्यीय दल (राजस्थान राज्य के लिये)" की तालिका है। 78 उसमें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (बोतल) और भारत आदिवासी पार्टी (हॉकी और बॉल) हैं। 75

मूल SLMT स्लाइड: राष्ट्रीय दल, पहली तीन पंक्तियाँमूल SLMT स्लाइड: राष्ट्रीय दल, पहली तीन पंक्तियाँ
मूल SLMT स्लाइड: राज्य स्तर के दलमूल SLMT स्लाइड: राज्य स्तर के दल

सारणी-2

पंचायत समिति सदस्य के 20 मुक्त प्रतीक

पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के मुक्त प्रतीक सारणी-2 में हैं, कुल 20। 79 पहले दस हैं: अलमारी, चप्पलें, सेब, कोट, गुब्बारा, चारपाई, चूड़ियाँ, मिक्सी, मोतियों का हार और पेन्सिल डिब्बा। 79 बाकी दस हैं: बेन्च, तकिया, आदमी व पाल युक्त नौका, बिजली का खंभा, बक्सा, बाँसुरी, ईंटें, फ्राक, बाल्टी और रेफ्रिजरेटर। 79

इस सूची का क्रम भी काम का है। 75 पसंद के बाद भी कोई निर्दलीय बच जाए, तो उसे इसी क्रम में सबसे ऊपर का बचा प्रतीक मिलता है। 75

चित्र में आयोग की "पंचायत समिति सदस्य के निर्वाचन के लिए मुक्त प्रतीको की सूची" है। 80 तालिका तीन हिस्सों में है। हर पंक्ति में क्रम, मुक्त प्रतीक का नाम और "चुनाव चिन्ह" कॉलम में उसका चित्र है, क्रम 1 अलमारी से क्रम 20 रेफ्रिजरेटर तक।

मूल SLMT स्लाइड: पं.स. सदस्य के मुक्त प्रतीकमूल SLMT स्लाइड: पं.स. सदस्य के मुक्त प्रतीक

सारणी-3

जिला परिषद सदस्य के 20 मुक्त प्रतीक

जिला परिषद सदस्य के चुनाव के मुक्त प्रतीक सारणी-3 में हैं, ये भी कुल 20। 79 पहले दस हैं: लिफाफा, टेलीविजन, फव्वारा, टेलीफोन, फूलगोभी, गैस का चूल्हा, जंजीर, टॉफियाँ, चक्की और साइकिल पम्प। 79 बाकी दस हैं: अंगूर, आरी, हरी मिर्च, स्कूल का बस्ता, हाथ गाड़ी, कैंची, हारमोनियम, सिलाई की मशीन, आइस क्रीम और जूता। 79

पंचायत समिति की सूची और जिला परिषद की सूची अलग हैं। 47 इसलिए जिला परिषद के निर्दलीय को सारणी-2 का प्रतीक नहीं मिल सकता, और पंचायत समिति के निर्दलीय को सारणी-3 का नहीं। 52

चित्र में आयोग की "जिला परिषद सदस्य के निर्वाचन के लिए मुक्त प्रतीको की सूची" है। 81 तालिका तीन हिस्सों में है। हर पंक्ति में क्रम, मुक्त प्रतीक का नाम और "चुनाव चिन्ह" कॉलम में उसका चित्र है, क्रम 1 लिफाफा से क्रम 20 जूता तक।

मूल SLMT स्लाइड: जि.प. सदस्य के मुक्त प्रतीकमूल SLMT स्लाइड: जि.प. सदस्य के मुक्त प्रतीक

खण्ड 10-12

निर्दलीय को मुक्त प्रतीक कैसे दें

निर्दलीय, यानी जिसे किसी मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया, उसे सिर्फ़ मुक्त प्रतीक मिलेगा। 52 पंचायत समिति के लिए सारणी-2 से, जिला परिषद के लिए सारणी-3 से। 52 पर्चे में इनके बाहर का कोई प्रतीक लिखा हो, तो उस पर विचार नहीं होगा। 52 RO सिर्फ़ पहले नामांकन पत्र में चुने प्रतीक देखे, भले वह पर्चा संवीक्षा में खारिज हो गया हो। 52 बाद के पर्चों में लिखे प्रतीक नहीं देखे जाएँगे; पर दल के उम्मीदवार के मामले में, जिस पर्चे में उसने ख़ुद को उस दल का उम्मीदवार बताया है, उस पर्चे में दल का आरक्षित प्रतीक देखा जाएगा, भले वह पहला पर्चा न हो। और अगर पहले पर्चे में दल का उम्मीदवार होने की बात लिखी हो पर कोई प्रतीक न चुना हो, और दल ने उसे मंज़ूर न किया हो, तो प्रतीक के लिए दूसरा पर्चा पहला माना जाएगा। 52

पहली पसंद का प्रतीक सिर्फ़ एक अभ्यर्थी ने माँगा, तो वह उसी को मिलेगा। 52 एक प्रतीक कई अभ्यर्थियों की पहली पसंद है, तो फ़ैसला लॉट से होगा। 52 लॉट उपस्थित अभ्यर्थियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं के सामने निकालें। 52 पहली पसंद के प्रतीक बँट जाएँ, तो बचे अभ्यर्थियों को इसी तरह दूसरी पसंद, फिर तीसरी पसंद का प्रतीक दें। 75

इसके बाद भी कोई अभ्यर्थी बचा, या उसने कोई पसंद दी ही नहीं, तो उसे सारणी का सबसे ऊपर का बचा मुक्त प्रतीक मिलेगा। 75 यह बँटवारा लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची में नामों के हिन्दी वर्णक्रम से, एक-एक कर होगा। 75 यह पूरी प्रक्रिया अधिसूचना 4196 (17.10.2025) के खण्ड 12 में है। 82

खण्ड 13 · नियम 58(6)

प्रतीक आवंटन: RO का निर्णय

प्रतीक आवंटन में RO का निर्णय अंतिम है। 758 अपवाद एक ही है: आवंटन आयोग के जारी किसी निर्देश से असंगत हो। 758 ऐसे मामले में आयोग आवंटन का पुनरीक्षण कर सकता है, जिस रीति से वह ठीक समझे। 758 यह अधिसूचना 4196 का खण्ड 13 है। 75

नियम 58(6) ख़ास तौर पर पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में प्रतीकों से जुड़ा है। 8 नियम 58(6)(b) के अनुसार मान्यता प्राप्त दल के अभ्यर्थी को उस दल का आरक्षित प्रतीक मिलेगा। 8 यहाँ मान्यता Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के तहत राज्य में मिली होनी चाहिए। 8 शर्त यह है कि दल एक निर्वाचन क्षेत्र में एक ही अभ्यर्थी खड़ा करे। 8

एक ही प्रतीक पर एक से ज़्यादा लड़ने वाले अभ्यर्थियों ने पसंद दी हो, तो RO लॉट से तय करे कि प्रतीक किसे मिलेगा। 8 लॉट में कंप्यूटर से random draw भी शामिल है (नियम 58(6)(e)(ii))। 8

नियम 29 r/w 58

लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची: प्रपत्र 5

नाम वापसी का समय ख़त्म होते ही RO प्रतीक आवंटित करे और लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची प्रपत्र 5 में बनाए। 107 यह काम नियम 29 को नियम 58 के साथ पढ़कर होता है। 57 सूची हिंदी में बनेगी, और नाम दो श्रेणियों में होंगे (नियम 58(5)(d))। 57 पहली श्रेणी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की है, दूसरी अन्य उम्मीदवारों की। 5 हर श्रेणी में नाम हिंदी वर्णमाला के क्रम में लगेंगे। 5

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में दल का नाम (अगर हो) प्रपत्र 5 के अलग स्तंभ में लिखें: यह स्तंभ अभ्यर्थी के नाम-पते वाले स्तंभ और प्रतीक वाले स्तंभ के बीच है। 9 दो या ज़्यादा अभ्यर्थियों के नाम एक जैसे हों, तो उनके पिता या पति का नाम जोड़कर उन्हें अलग करें। 7 RO चाहे तो किसी और उचित ढंग से भी अलग कर सकता है (नियम 29(4)(C))। 7 वार्ड में सिर्फ़ एक अभ्यर्थी हो और उसका नामांकन स्वीकार हो चुका हो, तो RO उसे निर्वाचित घोषित करे (नियम 29(2))। 7

मतपत्र किस प्ररूप में होगा, यह आयोग तय करता है (नियम 29(4))। 7 आयोग के आदेश सा.आ.140/2026 में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के मतपत्र के लिए आदेश 5755 (05.12.2019, सा.आ.132/2019) का हवाला है। 83

चित्र में खाली प्ररूप है: THE RAJASTHAN PANCHAYATI RAJ (ELECTION) RULES 1994 का "FORM V (See Rule 29)"। 9 इसका शीर्षक है "List of validly nominated candidate whose nominations papers have been accepted and have not been withdrawn"। 9 इसके नीचे "Election to the Ward Panchayat/Panchayat Samiti/Zila Parishad" और "Date of Election" की लाइन है। 9 तालिका में चार कॉलम हैं: वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र का क्रमांक; अभ्यर्थी का क्रमांक, नाम और पता; पं.स.-जि.प. सदस्य के मामले में दल, यदि हो; और आवंटित प्रतीक। 9 नीचे Date, Place और "Signature of the Returning Officer" की जगह है। 9

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): Form Vखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): Form V
8

नामांकन की भीड़ और चुनाव ख़र्च

  • आयोग का पत्र 8918 (16.09.2026)
  • ख़र्च की सीमा
  • ख़र्च का लेखा और प्ररूप

आयोग का पत्र 8918 (16.09.2026)

नामांकन के दिन: कितने लोग, कितनी गाड़ियाँ

नामांकन के दिन की भीड़ पर आयोग ने पत्र 8918 (16.09.2026) से सीमा तय की है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। कारण पत्र में ही लिखा है। हाल के नगरीय निकाय चुनाव में RO कार्यालयों पर समर्थकों की भारी भीड़ थी, और उचित नियंत्रण और व्यवस्था नहीं रह पा रही थी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

पर्चा भरते समय RO या सहायक RO के कार्यालय में अधिकतम 5 लोग रहेंगे, उम्मीदवार को मिलाकर (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नामांकन के दौरान उम्मीदवार को किसी भी तरह की रैली की अनुमति नहीं है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

कार्यालय की 100 मीटर सीमा में गाड़ियों की गिनती भी तय है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। जिला परिषद सदस्य का उम्मीदवार अधिकतम 3, पंचायत समिति सदस्य का अधिकतम 2, और सरपंच का अधिकतम 1 गाड़ी ला सकता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता, तो नामांकन के समय साथ आई गाड़ियों का ख़र्च उसके कुल चुनावी व्यय में जुड़ेगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

ख़र्च की सीमा

प्रचार की कुछ मदों पर ख़र्च की ऊपरी सीमा

चुनाव में अभ्यर्थी के ख़र्च की ऊपरी सीमा आयोग की अधिसूचना 5052, दिनांक 23.12.2025, में तय है, पर यह सीमा उन मदों पर होने वाले ख़र्च की है जो अधिसूचना में पहले गिनाए गए हैं: वाहन, लाउडस्पीकर, और कट-आउट, होर्डिंग, पोस्टर, बैनर। 84 सीमा पद के हिसाब से अलग-अलग है। 85 अधिसूचना के अनुसार इन मदों के ख़र्च की सीमा यह है:

पद इन मदों पर अधिकतम ख़र्च
जिला परिषद सदस्य ₹3,00,000 85
पंचायत समिति सदस्य ₹1,50,000 85
सरपंच ₹1,00,000 85

ख़र्च का लेखा

चुनाव ख़र्च का हिसाब: कब, किसे, फिर क्या

चुनाव के बाद हर अभ्यर्थी को अपने ख़र्च का हिसाब देना है। 85 यह लेखा प्ररूप "क" में, परिणाम घोषणा के 15 दिन के भीतर देना होगा। 85 लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) (कलक्टर) को, या उसके प्राधिकृत अधिकारी को दिया जाएगा। 85

जिला निर्वाचन अधिकारी या प्राधिकृत अधिकारी यह लेखा अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर तीन दिन तक लगाएगा। 85 इसके बाद के सात दिन में कोई भी व्यक्ति प्ररूप "क" में दिखाए ख़र्च पर आपत्ति दे सकता है। 85

इस आदेश से लगी किसी पाबंदी का उल्लंघन हो, तो शिकायत जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या उसके प्राधिकृत अधिकारी के पास होगी। 86 वह अधिकारी ख़ुद जाँच कर सकता है, या अपने किसी अधीनस्थ से करा सकता है। 86 वह अधीनस्थ तहसीलदार स्तर से नीचे का नहीं होगा। 86 शिकायत के तथ्य साबित हों, तो आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण क्षेत्राधिकार वाले उपखण्ड अधिकारी को भेजा जाएगा। 86

प्ररूप क, ख, ग

ख़र्च का विवरण, वाहन और लाउडस्पीकर की अनुमति

ख़र्च और प्रचार से जुड़े तीन खाली प्ररूप नीचे चित्र में हैं। प्ररूप-क में अभ्यर्थी अपने चुनाव ख़र्च का विवरण देता है। 87 प्ररूप-ख चुनाव प्रचार में वाहन के उपयोग की अनुमति है। 88 प्ररूप-ग लाउडस्पीकर या माईक के उपयोग की अनुमति है। 89 प्ररूप-ख पर अनुमति देने वाले की जगह रिटर्निंग अधिकारी जिला परिषद/पंचायत समिति छपा है, और सरपंच के मामले में उपखण्ड अधिकारी। 90

वाहन की अनुमति की दो शर्तें ख़ास याद रखें। तीन से ज़्यादा वाहनों का काफ़िला नहीं चलेगा। 88 मतदान समाप्ति से पहले के 48 घंटे में लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूरी रोक रहेगी। 88

चित्र में तीनों प्ररूप साथ-साथ हैं। प्ररूप-क का शीर्षक "अभ्यर्थी द्वारा किए गए चुनाव खर्च का विवरण" है। 87 ऊपर वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र संख्या, अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम और पता भरना है। 87 नीचे की तालिका में वाहन, लाउडस्पीकर-माइक, पोस्टर-बैनर और अन्य व्यय के मद हैं, फिर कुल राशि और अभ्यर्थी के हस्ताक्षर। 87 प्ररूप-ख "चुनाव हेतु वाहन के उपयोग की अनुमति" है। 91 इसमें वाहन के विवरण की तालिका है (श्रेणी, रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर, वाहन का प्रकार, अनुमति की तारीख़ें), और नीचे 11 शर्तें। 91 प्ररूप-ग "चुनाव हेतु लाउडस्पीकर/माईक के उपयोग की अनुमति" है। 92 इसमें वाहन और स्थान/भवन के विवरण की तालिकाएँ हैं, और नीचे 10 शर्तें। 92

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-क, ख़र्च का विवरणखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-क, ख़र्च का विवरण
खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-ख, वाहन की अनुमतिखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-ख, वाहन की अनुमति
खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-ग, लाउडस्पीकर की अनुमतिखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्ररूप-ग, लाउडस्पीकर की अनुमति
9

मतदान से जुड़े नियम

  • अमिट स्याही: कौन-सी अंगुली
  • अभ्यर्थी की मृत्यु, सहायता, निविदत्त वोट
  • डाक मतपत्र

अमिट स्याही

किस चरण में कौन-सी अंगुली

अमिट स्याही किस अंगुली पर लगे, यह चरण पर टिका है। 5593 यह नियम उस हालत का है, जब पंच-सरपंच का चुनाव और पंचायत समिति, जिला परिषद सदस्य का चुनाव अलग-अलग चरण में हों। 5593 पहले चरण में स्याही बाएँ हाथ की तर्जनी पर लगेगी। 5594 दूसरे चरण में दाएँ हाथ की तर्जनी पर। 5593 आदेश 2235 में दाएँ हाथ वाली बात इस शर्त के साथ है कि पहले चुनाव का निशान अभी दिख रहा हो। 93

पुनर्मतदान हो, तो मध्यमा अंगुली की बारी आती है। 5595 पहले चरण वाले चुनाव के पुनर्मतदान में बाएँ हाथ की मध्यमा पर निशान लगेगा। 9555 दूसरे चरण वाले चुनाव के पुनर्मतदान में दाएँ हाथ की मध्यमा पर। 9555

स्याही कैसे लगे, यह आयोग के पत्र 1408 (04.02.2026) में है। 94 स्याही ब्रश से, बाईं तर्जनी के नाखून के आख़िरी सिरे से पहले जोड़ के नीचे तक लगेगी। 94 इसी पत्र का बिंदु 4 कहता है कि आदेश 2235 (25.06.2019) के निर्देश भी ध्यान में रखे जाएँ। 9693 अंगुलियों का ऊपर वाला नियम उसी आदेश में है। 97

चित्र पत्र 1408 का आरेख है। 94 एक हाथ की तर्जनी ऊपर उठी है, और बगल से एक ब्रश उस पर स्याही लगा रहा है। 94 तीन लेबल हैं: "नाखून का मुक्त छोर या सिरा", "प्रथम जोड़" और "ब्रश"। 94 स्याही का निशान नाखून से नीचे की ओर, पहले जोड़ तक दिखाया गया है। 94

आयोग का पत्र 1408 (04.02.2026): स्याही नाख़ून के सिरे से पहले जोड़ के नीचे तकआयोग का पत्र 1408 (04.02.2026): स्याही नाख़ून के सिरे से पहले जोड़ के नीचे तक

पंचायत चुनाव के अलग नियम

मृत्यु, सहायता और चैलेंज फी

पंचायत चुनाव के तीन नियम अलग से याद रखें। पहला, मतदान शुरू होने से पहले किसी उम्मीदवार की मृत्यु हो जाए, तब भी चुनाव स्थगित नहीं होगा। 9899 पर अगर मृत्यु के बाद उस पद के लिए एक ही अभ्यर्थी बचे, तो RO नियम 73 (परिशिष्ट-4) के तहत उस पद का चुनाव स्थगित करेगा, और जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के ज़रिए आयोग को इसकी रिपोर्ट देगा; फिर उस पद के चुनाव की पूरी कार्यवाही नए चुनाव की तरह फिर से शुरू होगी। 559899 तब जो अभ्यर्थी चुनाव लड़ रहे थे, उन्हें दोबारा नामांकन नहीं भरना होगा। 9899

दूसरा, नियम 41क के मुताबिक़ जो दृष्टिबाधित या दिव्यांग मतदाता मशीन पर प्रतीक न पहचान सके, या बिना मदद के बटन दबाकर वोट न दे सके, उसकी ओर से और उसकी इच्छा के मुताबिक़ मतदान अधिकारी बटन दबाएगा। 100101 पंचायती राज चुनावों में साथी की मदद से वोट देने का प्रावधान नहीं है। 55

तीसरा, बूथ पर कोई उम्मीदवार किसी मतदाता की पहचान को चैलेंज करे, तो उससे पहले चैलेंज फी जमा कराने का कोई प्रावधान नहीं है। 55

बूथ के रिकार्ड

निविदत्त वोट, मतदाता रजिस्टर और वोटों का लेखा

पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भी निविदत्त मतपत्र (Tender Vote) से वोट देने वाले व्यक्ति के मामले पीठासीन अधिकारी निपटाएँगे। 55102

मतदान मशीनों से हो, तो मतदाता रजिस्टर प्ररूप-12 में तीन बातें दर्ज होंगी। 103101 मतदाता की क्रम संख्या, निर्वाचक नामावली में उसकी क्रम संख्या, और उसके हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी। 103101 इसका आधार नियम 40 A है। 101 वोटिंग मशीनों से चुनाव हो, तो रिकार्ड किए गए वोटों का लेखा प्ररूप-14 में तैयार होगा। 103102

आदेश 1134 (29.01.2026)

चुनाव ड्यूटी वालों का डाक मतपत्र

चुनाव ड्यूटी वाले कर्मचारी भी डाक से वोट दे सकते हैं। 104105 नियम 35 में संशोधन कर पंचायती राज संस्थाओं में भी डाक मतपत्र का प्रावधान किया गया है। 103 पर चुनाव कर्त्तव्य प्रमाण-पत्र (EDC) का प्रावधान नहीं है। 103 डाक से वोट की रीति आयोग के आदेश 1134 (29.01.2026) में है, जो पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव के लिए है। 104

"निर्वाचन ड्यूटी पर मतदाता" कौन है, यह नियम 35 में लिखा है। 105104 मतदान अभिकर्ता, मतदान अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी या कोई और लोक सेवक, जो किसी पंचायती राज संस्था का मतदाता है। 104105 शर्त यह है कि ड्यूटी के कारण वह अपने मतदान केन्द्र पर वोट न दे सके। 104105 अधिग्रहित वाहनों के चालक, खलासी आदि इसमें शामिल नहीं हैं। 104

ऐसा मतदाता प्ररूप-1 में लिखित सूचना संबंधित RO को दे सकेगा। 104 यह सूचना मतदान की तारीख से कम से कम 7 दिन पहले, या RO जितनी कम अवधि की अनुमति दे उसके भीतर, दी जा सकेगी। 104 जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव की सूचना संबंधित RO को अलग-अलग जाएगी। 104 डाक मतपत्र साधारण मतपत्र जैसा ही होगा। 104 उसकी पीठ पर रबड़ की मुहर से "डाक मतपत्र" लगेगा, और RO उस पर हस्ताक्षर करेगा। 104 इसके लिए उस क्षेत्र के छपे मतपत्रों में से, ज़रूरत से ज़्यादा छपे आख़िरी क्रम संख्या वाले मतपत्र लिए जाएँगे। 104 ध्यान रहे, डाक वोट वाला यह प्ररूप-1 जमानत लौटाने वाले प्रपत्र-1 से अलग है। 104106

10

जमानत: वापसी और ज़ब्ती

  • 1/6 वोट का नियम
  • परिपत्र 2178 की प्रक्रिया
  • प्रपत्र-1 और प्रपत्र-2

प्रतिभूति निक्षेप राशि

जमानत कब लौटेगी, कब ज़ब्त होगी

अभ्यर्थी पर्चे के साथ जमानत, यानी प्रतिभूति निक्षेप राशि, जमा कराता है। 521 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए यह ₹500 है। 5 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला उम्मीदवार के लिए ₹250। 5 पंच के चुनाव में कोई जमानत नहीं है। 21107 मूल स्लाइड की तालिका यह है:

चुनाव सामान्य SC / ST / OBC / महिला लौटाना
सरपंच ₹500 ₹250 1/6 वाला नियम (नीचे) 15
पंचायत समिति / जिला परिषद सदस्य ₹500 ₹250 1/6 वाला नियम (नीचे) 5
पंच 0 0 0 21

जमानत कब लौटेगी, यह परिपत्र 2178 बताता है: नाम वापस लेने वाले की, और कुल वैध वोटों के "1/6 या इससे अधिक" वोट पाने वाले की जमानत लौटेगी। 108109 आयोग की मार्गदर्शिका सरपंच की जमानत लौटाने के लिए "1/6 भाग से अधिक" लिखती है। 21 हारे हुए अभ्यर्थी को 1/6 से कम वोट मिलें, तो जमानत ज़ब्त होगी। 529 मार्गदर्शिका यह भी कहती है कि जीते अभ्यर्थी के वोट 1/6 से कम हों, तब भी उसकी जमानत वापस होगी। 215

परिपत्र 2178 (20.06.2019)

पं.स.-जि.प. सदस्य की जमानत: परिणाम के बाद के काम

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य की जमानत का हिसाब परिपत्र 2178 (20.06.2019) से चलता है। 110 इस परिपत्र ने पुराने परिपत्र 1415 (05.04.2018) की जगह ली है। 111 इन चुनावों में RO और सहायक RO, पंचायत समिति सदस्य के लिए उपखण्ड अधिकारी / तहसीलदार होते हैं, और जिला परिषद सदस्य के लिए जिला कलक्टर / अतिरिक्त जिला कलक्टर। 29 पंचायत समिति सदस्य की जमानत का लेखा उपखण्ड अधिकारी के कार्यालय में, और जिला परिषद सदस्य की जमानत का लेखा जिला कलक्टर के कार्यालय में रखा जाएगा। 29

परिणाम घोषित होने के 3 दिन में RO उन अभ्यर्थियों की जमानत ज़ब्ती का आदेश देगा, जिन्हें कुल वैध वोटों के 1/6 से कम मिले। 108 नाम वापस लेने वाले, और 1/6 या ज़्यादा वोट पाने वाले हारे अभ्यर्थी, प्रपत्र-1 में आवेदन कर जमानत वापस ले सकते हैं। 108 15 दिन में माँग न आए, तो राशि अवितरित मानी जाएगी। 29 फिर अगले 7 दिन में RO उसे चालान से राजकोष में जमा कराएगा (प्रपत्र-4 / प्रपत्र-5)। 108

आख़िर में जिला निर्वाचन अधिकारी पूरे जिले का संकलित लेखा प्रपत्र-6 में, 30 दिन में आयोग को भेजेगा। 112 ज़ब्त जमानत बजट मद 0515-101-01 (पंचायत चुनाव प्राप्तियाँ) में जमा होगी। 112 अवितरित जमानत 8443 सिविल जमा में जाएगी। 112

प्रपत्र-1

जमानत लौटाने का आवेदन

जमानत लौटाने का आवेदन प्रपत्र-1 में RO को दिया जाता है। 106 अभ्यर्थी इसमें रसीद संख्या, दिनांक और जमा की गई राशि लिखता है। 106 प्रपत्र में लौटाने के दो कारण छपे हैं। 106 पहला, उसने नाम निर्देशन पत्र नियत तिथि से पहले वापस ले लिया। 106 दूसरा, उसे कुल वैध वोटों के 1/6 से अधिक वोट मिले। 106

नीचे RO का प्रमाण पत्र है कि जमानत लौटाने योग्य है। 106 प्रपत्र में नीचे अभ्यर्थी से ली जाने वाली रसीद का प्रारूप भी है, और नोट कहता है कि मूल रसीद प्राप्त कर साथ लगाई जाए। 106 परिपत्र 2178 के बिंदु 2(ii) के अनुसार 1/6 या इससे अधिक वोट पाने वाले हारे अभ्यर्थी भी प्रपत्र-1 में आवेदन कर जमानत वापस ले सकते हैं। 108109

चित्र में खाली प्रपत्र-1 है। 106 सबसे ऊपर "प्रपत्र–1" लिखा है। 106 "सेवा में, रिटर्निंग अधिकारी" के नीचे ग्राम पंचायत / पंचायत समिति / जिला परिषद और जिले की खाली जगह है। 106 विषय है "जमानत राशि लौटाने के क्रम में।" बीच में अभ्यर्थी का निवेदन, दोनों कारण और अभ्यर्थी के हस्ताक्षर हैं। 106 उसके नीचे "प्रमाण पत्र" और रिटर्निंग अधिकारी के हस्ताक्षर, और सबसे नीचे "अभ्यर्थी से ली जाने वाली रसीद का प्रारूप"। 106

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्रपत्र-1खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्रपत्र-1

प्रपत्र-2

जमानत ज़ब्ती का आदेश

जमानत ज़ब्ती का आदेश प्रपत्र-2 में होता है। 113 यह आदेश राजस्थान पंचायत राज (निर्वाचन) नियम 1994 के नियम 56 और 58 के तहत जारी होता है। 114 जिन अभ्यर्थियों को निर्वाचन क्षेत्र के कुल वैध वोटों के 1/6 से कम मिले, उनकी जमानत इसी आदेश से ज़ब्त होती है। 115

एक बात पर ध्यान दें। परिपत्र 2178 का बिंदु 2(iii) पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के ज़ब्ती आदेश को "प्रपत्र–2A" कहता है। 108109 सरपंच के लिए वही परिपत्र "प्रपत्र–2" कहता है। 111 छपे प्रारूप में यह आदेश "प्रपत्र–2" ही है, और सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य, तीनों के लिए है। 115

चित्र प्रपत्र-2 का ऊपरी भाग है। 115 ऊपर "प्रपत्र–2" लिखा है, और उसके नीचे पंचायत, पंचायत समिति और जिले के नाम की खाली जगह। 115 शीर्षक है "रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जमानत राशि जब्त करने संबंधी प्रपत्र का प्रारूप"। 115 उसके नीचे "आदेश" और ज़ब्ती वाला पूरा वाक्य छपा है। 115

खाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्रपत्र-2 का ऊपरी भागखाली प्ररूप (मूल SLMT स्लाइड): प्रपत्र-2 का ऊपरी भाग

विशेष अनुरोध

संदेह हो तो अधिनियम, नियम और आयोग के निर्देश देखें

प्रशिक्षण सामग्री के आख़िर में एक विशेष अनुरोध है। उसमें लिखा है कि यह प्रस्तुति प्रशिक्षण के लिए बनी है। किसी संशय या संदेह में सभी सुसंगत अधिनियम, नियम और राजस्थान निर्वाचन आयोग के निर्देश देखें, और आयोग की वेबसाइट लगातार देखते रहें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नोट यह भी कहता है कि काम रिटर्निंग अधिकारी के तात्कालिक दिशा-निर्देशों के अधीन हो।

याद रखें

रिटर्निंग अधिकारी की दस बातें

आख़िर में कुछ बातें, जो RO को याद रहें। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के पर्चे नामांकन के दिनों में सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक लिए जाते हैं। 1127 जो उम्मीदवार 3 बजे RO या ARO के कार्यालय में मौजूद है, उसका पर्चा 3 बजे प्रस्तुत माना जाएगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पर्चा अभ्यर्थी ख़ुद देता है। 2168 मान्यता प्राप्त दल के उम्मीदवार का एक प्रस्तावक काफ़ी है, बाक़ी उम्मीदवारों के पाँच। 8 हर पर्चे पर क्रम संख्या, दिनांक और समय लिखें। 6 रोज़ 3 बजे बाद उस दिन की सूची नोटिस बोर्ड पर लगाएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग को दैनिक सूचना शाम 4 बजे तक जानी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

जमानत सामान्य उम्मीदवार की ₹500 है, और SC, ST, OBC व महिला उम्मीदवार की ₹250। 5 हारे उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के 1/6 से कम मिलें, तो जमानत ज़ब्त होगी। 529 प्ररूप क और ख नामांकन की अंतिम तारीख को 3.00 बजे तक ही लिए जाएँगे, और वे केवल स्याही से हस्ताक्षरित हों। 116 फैक्स, ई-मेल या व्हाट्सअप से भेजा प्ररूप मान्य नहीं होगा। 49 संवीक्षा उसी दिन पूरी करें, और हर अस्वीकृति का कारण लिखें। 655 जो दोष महत्वपूर्ण प्रकृति का न हो, या प्रतीकों की घोषणा में कमी हो, उस पर पर्चा न गिराएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

नाम वापसी का नोटिस अभ्यर्थी ख़ुद आकर दो प्रतियों में देगा। 721 नोटिस तय समय में आना चाहिए, बाद में आया नोटिस अमान्य है। 72711 मुक्त प्रतीक के लिए पहले पर्चे में चुने प्रतीक देखे जाते हैं, भले वह पर्चा अस्वीकृत हो गया हो। 528 एक प्रतीक को कई अभ्यर्थी पहली पसंद पर रखें, तो फ़ैसला लॉट से होगा। 528 अधिसूचना 5052 में गिनाए गए मदों (वाहन, लाउडस्पीकर, कट-आउट, होर्डिंग, पोस्टर, बैनर) पर ख़र्च की सीमा जिला परिषद सदस्य की ₹3,00,000 और पंचायत समिति सदस्य की ₹1,50,000 है। 84 ख़र्च का लेखा परिणाम घोषणा के 15 दिन में देना है। 85

?RO के सवाल: जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य
125 सवाल, हर जवाब आदेश या प्रशिक्षण सामग्री के पृष्ठ के हवाले से। अलग पेज।

साभार: मनीष कुमार गोयल · SLMT प्रशिक्षण सामग्री, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान

स्रोत

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  1. 1.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 4 पाठ में
  2. 2.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 55 पाठ में
  3. 3.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 60कखगघङचछजझञटठडढणतथदधनपफब
  4. 4.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 63कखगघ
  5. 5.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 119कखगघङचछजझञटठडढणतथदधनपफबभमयरलवशसह333435363738394041424344454647484950
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  7. 7.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 102कखगघङचछजझञटठडढणतथद
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  88. 88.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 99, 103कखग
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  90. 90.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 103, 99 पाठ में
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  92. 92.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 104कख
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  94. 94.आदेश 1408, दि. 04.02.2026, संकलन पृ. 240कखगघङचछ
  95. 95.आदेश 2235, दि. 25.06.2019, संकलन पृ. 243कखग
  96. 96.आदेश 1408, दि. 04.02.2026, संकलन पृ. 241 पाठ में
  97. 97.आदेश 2235, दि. 25.06.2019, संकलन पृ. 242, 243 पाठ में
  98. 98.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 173कखग
  99. 99.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 128कखग
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  102. 102.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 114कख
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  108. 108.परिपत्र 2178, दि. 20.06.2019 (पत्र 594 के साथ), संकलन पृ. 402कखगघङच
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  110. 110.परिपत्र 2178, दि. 20.06.2019, संकलन पृ. 249, 250 पाठ में
  111. 111.परिपत्र 2178, दि. 20.06.2019, संकलन पृ. 249कख
  112. 112.परिपत्र 2178, दि. 20.06.2019, संकलन पृ. 251कखग
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