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RO के सवाल: जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य

साइट पर काम चल रहा है · अपडेट 03.11.2026अगर कोई त्रुटि दिखे तो डेवलपर भरत चौधरी (व्याख्याता, रा.उ.मा.वि., जेठन्तरी — ब्लॉक: समदड़ी, जिला: बालोतरा) को बताइए:
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जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य चुनाव 2026 के रिटर्निंग अधिकारी के सवाल, एक-एक करके, और हर सवाल का जवाब आयोग के आदेश या SLMT प्रशिक्षण सामग्री के उसी पृष्ठ के हवाले से जहाँ से वह लिया गया है।

सवाल उसी क्रम में हैं जिसमें RO का काम आगे बढ़ता है। नियम और प्रक्रिया शुरू से पढ़ने के लिए रिटर्निंग अधिकारी का मुख्य पेज देखिए।

हर जवाब के नीचे उसका स्रोत है। नीला लिंक दबाइए: आयोग के आदेश का वही पेज खुलेगा जहाँ से जवाब लिया गया है। बिना लिंक वाला स्रोत प्रशिक्षण सामग्री है, या ऐसा आदेश जिसकी PDF अभी इस साइट पर नहीं है।

1तैयारी: कानून, कार्यक्रम, नियुक्ति 6 सवाल

कानून, कार्यक्रम, नियुक्ति 6

A1ZP-PS सदस्य चुनाव किस अधिनियम और किन नियमों से चलता है? (नियम 58 किस बात का नियम है?)
ZP-PS सदस्य का चुनाव राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम और नियम, 1994 से चलता है। 1 स्लाइड में कानूनी प्रावधान की सूची में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारतीय न्याय संहिता 2023 भी लिखे हैं। नियम 58 पंचायत समिति / जिला परिषद के सदस्यों के चुनाव का नियम है: राज्य निर्वाचन आयोग की समय-सारणी के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अधिसूचना निकालता है और हर निर्वाचन क्षेत्र से एक-एक सदस्य के चुनाव की तारीखें तय करता है। 23

A2लोकसूचना कौन जारी करता है, किस नियम में, किस प्ररूप में?
लोकसूचना जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) यानी कलक्टर जारी करता है; जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए नियम 58(1) के अंतर्गत। 34 नियमों में इस सूचना का कोई प्ररूप तय नहीं है, इसलिए आयोग ने आदेश 6251 (26.12.2019) के साथ मॉडल प्ररूप भेजा है, जिसका शीर्षक "निर्वाचन की सूचना: जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के लिए (नियम 58)" है। 4 इसमें नामनिर्देशन लेने की जगह (RO या ARO), संवीक्षा की तारीख़, समय व जगह, नाम वापसी, मतदान और मतगणना का समय-स्थान, और सीटों के आरक्षण का स्टेटमेंट भरा जाता है। 5 सूचना की एक प्रति दफ़्तर के रिकॉर्ड में रखनी है। 6

A3नामांकन कितने दिन, रोज़ किस समय से किस समय तक, कहाँ (किस कार्यालय में) लिए जाते हैं? अंतिम दिन का समय?
नामांकन पत्र रोज़ पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक लिए जाते हैं (सार्वजनिक अवकाश छोड़कर)। 75 लोकसूचना के दिन से लेकर अंतिम तिथि तक किसी भी कार्य-दिवस पर; पहले चरण में अंतिम दिन 13.10.2026 अपराह्न 3:00 बजे तक। 57 जगह: RO या ARO का निर्धारित स्थान (कार्यालय)। 6

A4RO और सहायक RO कौन नियुक्त करता है? ZP सदस्य और PS सदस्य का RO कौन होता है?
पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में हर पंचायत समिति का RO जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) नियुक्त करता है, और RO की मदद के लिए वह सहायक RO (ARO) भी नियुक्त कर सकता है (नियम 58(2))। 3 जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में RO और उसकी मदद के लिए ARO राज्य निर्वाचन आयोग नियुक्त करता है (नियम 58(3))। 3 आयोग के जमानत परिपत्र 2178 (20.06.2019) में लिखा है कि पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में RO/ARO संबंधित उपखण्ड अधिकारी/तहसीलदार और जिला कलक्टर/अतिरिक्त जिला कलक्टर होते हैं। 8 पंच के चुनाव में हर पंचायत सर्किल का RO जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) नियुक्त करता है (नियम 23(2))। 9 सरपंच का चुनाव पंचों के साथ ही होता है (नियम 56(1)), और उस पर भी, जहाँ तक हो सके, नियम 23 से 54 लागू होते हैं (नियम 56(3))। 10

A5चरण-वार समय-सारणी (नामांकन, संवीक्षा, नाम वापसी, मतदान, मतगणना) क्या है? सभी चरणों की तारीख़ें।
आयोग के प्रेस नोट (03.10.2026) के परिशिष्ट-A और पत्र 9867 के अनुसार नामांकन की समय-सारणी यह है। 11 पंचायत समिति के चार चरण: लोकसूचना 08.10 / 13.10 / 19.10 / 31.10.2026; नामांकन की अंतिम तिथि 13.10 / 16.10 / 23.10 / 04.11.2026 अपराह्न 3 बजे तक (सार्वजनिक अवकाश छोड़कर); संवीक्षा 14.10 / 17.10 / 24.10 / 05.11.2026 प्रातः 11 बजे से; नाम वापसी 15.10 / 19.10 / 26.10 / 06.11.2026 अपराह्न 3 बजे तक, और उसके तुरन्त बाद चुनाव प्रतीक आवंटन व अभ्यर्थियों की सूची। 712 नामांकन पत्र प्रस्तुत करने का समय पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक है। 712 जिला परिषद सदस्यों के लिए पत्र 9867 में चार शुरुआती चरण हैं: पहला (17 जिला परिषद) 08.10 / 13.10 / 14.10 / 15.10; दूसरा (7 जिला परिषद) 13.10 / 16.10 / 17.10 / 19.10; तीसरा (16 जिला परिषद, बालोतरा सहित) 19.10 / 23.10 / 24.10 / 26.10; चौथा (पत्र 9867 में केवल सलूम्बर) 31.10 / 04.11 / 05.11 / 06.11.2026 (लोकसूचना / अंतिम तिथि / संवीक्षा / नाम वापसी)। 111314 पत्र 10090 (06.10.2026) ने इसमें बदलाव किया: जिला परिषद जैसलमेर की लोकसूचना अब 31.10.2026 को चौथे चरण में और जिला परिषद सलूम्बर की 19.10.2026 को तीसरे चरण में होगी; बाक़ी जिला परिषदें पत्र 9867 के अनुसार। 15 मतदान जिला परिषद और पंचायत समिति दोनों के लिए संशोधित पत्र 10090 (06.10.2026) और वित्त विभाग की अधिसूचना (पत्र 10450 के साथ) के अनुसार: प्रथम चरण 22.10.2026, द्वितीय 28.10.2026, तृतीय 03.11.2026, चतुर्थ 14.11.2026, प्रातः 7:00 से सायं 6:00 बजे तक। 161718 मतदान दलों का प्रस्थान/पहुँच एक दिन पहले: 21.10, 27.10, 02.11 (पत्र 10090) और चतुर्थ चरण में 13.11.2026 (प्रेस नोट)। 1618 मतगणना जिला मुख्यालय पर 20.11.2026 (शुक्रवार) को प्रातः 8:00 बजे से मतगणना समाप्त होने तक, सभी चरणों के लिए एक साथ। 18 कौन-सी पंचायत समिति किस चरण में है, यह प्रेस नोट का परिशिष्ट-B बताता है। 19 जैसलमेर, बीकानेर और सलूम्बर की पंचायत समितियों के चरण पत्र 10090 में बदले गए हैं। 16

A6लोकसूचना जारी होने के दिन RO को क्या-क्या तैयार रखना है (सूचना बोर्ड, रजिस्टर, रसीद बुक, प्ररूप)?
आयोग के आदेश 6251 (26.12.2019) के अनुसार लोकसूचना की प्रतियाँ चुनाव कार्यक्रम में तय तारीख़ पर इन जगहों पर चस्पा की जाती हैं: कलक्टर (ज़िला निर्वाचन अधिकारी) कार्यालय का सूचना पट्ट, ज़िला परिषद सदस्य के चुनाव में ज़िला परिषद का सूचना पट्ट, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में पंचायत समिति का सूचना पट्ट, निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम दो सहज दिखने वाली जगहें, और वे दूसरी जगहें जो RO ठीक समझे। 20 नामांकन लेने के लिए RO के पास नामांकन पत्र (प्ररूप IV-A) तैयार रहे: इसी प्ररूप में RO का भाग (भाग IV, पर्चे का क्रमांक, समय और तारीख़) और अभ्यर्थी को दी जाने वाली रसीद (भाग VI) छपी है, यानी रसीद का प्रारूप यही है। 2122 पत्र 10062 (06.10.2026) के अनुसार नामांकन पत्र, प्ररूप 4-घ और उपाबन्ध-1A आयोग ने ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को उपलब्ध करवाए हैं। 23 अभ्यर्थी पहले RO या उपखण्ड कार्यालय या ज़िला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से लिया प्ररूप ही इस्तेमाल करेगा। 23 नियम 26 के अनुसार पर्चा मिलने पर RO पर्चा देने वाले को संवीक्षा का दिन, समय और जगह बताता है, और पर्चे पर अपने हाथ से ये लिखता है: अभ्यर्थी जिस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहता है उसका क्रमांक, उस क्षेत्र के लिए पर्चे का क्रमांक, पर्चा देने वाले का नाम (और उसकी पहचान कराने वाले का नाम, अगर कोई हो), और पर्चा मिलने की तारीख़ व समय। 24 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ RO नामांकन का रजिस्टर रखता है, हर दिन दोपहर 3 बजे के बाद उस दिन आए पर्चों की सूची अपने सूचना पट्ट पर लगाता है और आयोग को शाम 4 बजे तक दैनिक सूचना देता है।

2नामांकन और संवीक्षा 36 सवाल

एक नज़र में: पंचायत समिति और ज़िला परिषद सदस्य का नामांकन

नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक। 2526 रिटर्निंग अधिकारी का मुख्यालय: पंचायत समिति सदस्य के लिए पंचायत समिति स्तर पर, ज़िला परिषद सदस्य के लिए ज़िला स्तर पर। 27 नामांकन पत्र उम्मीदवार खुद जाकर रिटर्निंग अधिकारी को देगा; किसी और के हाथ भेजा, तो खारिज हो जाएगा। 28
संवीक्षा सुबह 11 बजे से। 2529 नियम 27 के कारणों से रिटर्निंग अधिकारी नामांकन पत्र खारिज कर सकते हैं; उम्मीदवार खुद मौजूद रह सकता है, कोई दूसरा व्यक्ति नहीं; संवीक्षा उसी दिन पूरी होगी। 3031
ध्यान दीजिए एक ही पंचायती राज संस्था में एक से ज़्यादा सीटों के लिए नामांकन भरा, तो संवीक्षा में इस वजह से खारिज नहीं होगा; पर नाम वापसी के तय समय के अंदर एक सीट छोड़कर बाकी सब से नाम वापस नहीं लिया, तो सभी सीटों से उम्मीदवारी वापस मान ली जाएगी। 32
नाम वापसी दोपहर 3 बजे तक। 2529 लिखित नोटिस, उम्मीदवार के हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी के साथ, दो प्रतियों में, उम्मीदवार खुद जाकर रिटर्निंग अधिकारी को देगा; एक बार दिया नोटिस वापस नहीं लिया जा सकता। 3128

नाम वापसी के बाद चुनाव चिह्न: उम्मीदवार मान्यता प्राप्त दल का माना गया? (ये सब बातें पूरी हों, जैसे नामांकन पत्र में घोषणा, और दल का प्ररूप 'ख' नामांकन की आखिरी तारीख को दोपहर 3 बजे तक रिटर्निंग अधिकारी को) 252933

हाँ उसी दल का आरक्षित चिह्न मिलेगा, कोई दूसरा नहीं। 33
नहीं मुक्त चिह्नों में से ही चिह्न मिलेगा; नामांकन पत्र में इन्हीं में से अपनी पसंद लिख सकता है। 34
पूरी बात: प्रत्याशी प्रबोधन: पंचायत समिति और ज़िला परिषद वाला पेज। हर डिब्बे का स्रोत उसी डिब्बे में है।
लाभ का पद: संविदा, मानदेय या किसी योजना वाले पद पर आपत्ति आए, तो आयोग का पत्र 10297 (09.10.2026), अधिनियम की धारा 19, सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसलों की प्रति और उदाहरण लाभ का पद वाले पेज पर हैं। 35

नामांकन लेना 18

B1नामांकन पत्र कौन दे सकता है: अभ्यर्थी स्वयं, प्रस्तावक, या कोई और? डाक से?
नामांकन पत्र अभ्यर्थी स्वयं, व्यक्तिगत रूप से RO/ARO को देता है। 245 प्रस्तावक अभ्यर्थी का नामांकन पत्र नहीं दे सकता। 24 नियम 25(1) के अनुसार अभ्यर्थी अपना नामांकन पत्र RO को ख़ुद जाकर देगा ("deliver in person"), और नियम 58(5) से यह नियम पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव पर भी लागू होता है; इसलिए डाक से भेजा गया पर्चा नहीं चलता। 243 RO प्रशिक्षण की स्लाइड में जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) की निर्वाचन सूचना (नियम 58) का जो नमूना है, उसमें भी लिखा है कि नामनिर्देशन पत्र "अभ्यर्थी द्वारा व्यक्तिशः परिदत्त किए जा सकेंगे"। 5 RO चेकलिस्ट के मुताबिक़ नामांकन के दिनों में अधिसूचना में बताई गई जगह पर RO या ARO का मौजूद रहना ज़रूरी है, पर नामांकन के आख़िरी दिन पर्चे लेने के लिए ख़ुद RO (सिर्फ़ ARO नहीं) मौजूद रहे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। स्वयं न देने पर यह RO की स्क्रूटनी-सूची में Reject का आधार है। 2436

B2एक अभ्यर्थी एक ही सीट के लिए अधिकतम कितने नामांकन पत्र दे सकता है? एक से ज़्यादा सीटों (ZP + PS) पर एक साथ?
एक निर्वाचन क्षेत्र में एक अभ्यर्थी एक से अधिक नामांकन पत्र भर सकता है और तब एक ही जमा राशि काफ़ी है। 3 हर अलग निर्वाचन क्षेत्र की अलग जमा राशि लगती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। धारा 19-ख के अनुसार कोई व्यक्ति एक ही पंचायत समिति के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से, या एक ही जिला परिषद के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ सकता। 37 ऐसे पर्चे भरे हों तो नाम वापसी के समय तक एक सीट छोड़कर बाकी सबसे लिखित नोटिस देकर नाम वापस लेना है; न ले तो सभी सीटों से उसकी अभ्यर्थिता वापस मान ली जाती है। 37 धारा 19-ख की चारों रोकें (पंच के लिए एक से अधिक वार्ड, सरपंच के साथ उसी पंचायत में पंच, एक ही पंचायत समिति के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र, और एक ही जिला परिषद के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र) एक ही संस्था के भीतर की हैं; पंचायत समिति और जिला परिषद का चुनाव एक साथ लड़ने पर इस धारा में कोई रोक नहीं है। 37 धारा 20(3) के अनुसार कोई व्यक्ति एक साथ दो पंचायती राज संस्थाओं का सदस्य चुना जाए तो उसे चुने जाने की तारीख़ से, और अलग-अलग तारीख़ों पर चुना जाए तो बाद वाली तारीख़ से, 14 दिन के भीतर सक्षम प्राधिकारी को बताना है कि वह किस संस्था में रहेगा, और दूसरी सीट खाली हो जाती है; दी गई सूचना अंतिम है और बाद में बदली नहीं जा सकती (धारा 20(4)); वह न बताए तो सक्षम प्राधिकारी तय करता है कि कौन-सी सीट रहेगी (धारा 20(5))। 37

B3नामांकन पत्र किस प्ररूप में है (ZP सदस्य / PS सदस्य)? साथ में कौन-कौन से कागज़ (पूरी सूची, आयोग का पत्र 10062 दिनांक 06.10.2026)?
नामांकन पत्र प्रारूप 4-क में लिया जाता है; पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य दोनों के लिए यही एक प्रारूप है, और अभ्यर्थी इसे प्रारूप 4-घ के साथ RO को देता है (नियम 58(6)(घ))। 3839 आयोग का पत्र 10062 (06.10.2026, पूर्व के आदेशों को अधिक्रमित करता है) के अनुसार साथ में: (1) नामनिर्देशन पत्र की सभी प्रविष्टियाँ भरी हों, कोई कॉलम खाली नहीं (संतान संबंधी योग्यता को छोड़कर), (2) प्रारूप 4-घ पूरा भरा हुआ, (3) उपाबन्ध-I A का शपथ पत्र 50 रुपये के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर, जो न्यायाधीश, न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय के नियुक्त शपथ कमिश्नर या नोटरी पब्लिक के सामने प्रमाणित हो, 40 (4) घर में शौचालय की घोषणा, आयोग के प्रारूप में, प्रमाणित कराना ज़रूरी नहीं, 41 (5) चरित्र प्रमाण पत्र ज़रूरी नहीं; 41 जिस अभ्यर्थी पर धारा 19(झ) या 19(ड) के तहत कोई राशि बकाया नहीं, उसे कोई नो-ड्यूज़ नहीं देना; 19(झ) में अयोग्यता तब है जब पंचायती राज संस्था का कर या फीस बकाया हो, उसे जमा करने का नोटिस दिया गया हो और नोटिस की तारीख़ से 2 महीने में जमा न हो, और 19(ड) में तब, जब किसी पंचायती राज संस्था का पूर्व सभापति या उपसभापति अपने कार्यकाल का बकाया नोटिस मिलने के 2 महीने में जमा न करे और निर्वाचन की अधिसूचना से कम से कम 2 महीने पहले राज्य सरकार की व्यतिक्रमियों (Defaulter) की सूची में उसका नाम आ गया हो; ऐसा अभ्यर्थी नामांकन से पहले बकाया जमा कर दे और जमा की रसीद या नो-ड्यूज़ प्रमाण लगाए तो वह अयोग्य नहीं होता, (6) आरक्षित वार्ड से लड़ने वाले SC/ST/OBC अभ्यर्थी के लिए कलक्टर या राज्य सरकार के प्राधिकृत अधिकारी का जारी किया जाति प्रमाण पत्र; सामान्य वार्ड से लड़ने वाला SC/ST/OBC अभ्यर्थी जमानत में छूट चाहे तो उसे भी यही प्रमाण पत्र देना है, (7) जमानत की रसीद: नियम 58 के अनुसार पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के लिए जमानत सामान्य वर्ग के लिए 500 रुपये और महिला, SC, ST और OBC के लिए 250 रुपये है, 41 (8) सांख्यिकी सूचना फार्म (न देने पर पर्चा खारिज नहीं)। 23 हस्तलिखित नामनिर्देशन पत्र, यानी सादे काग़ज़ पर हाथ से उतारा हुआ फ़ॉर्म, स्वीकार्य नहीं; छपे, फोटो प्रति या टाइप किए प्ररूप में अभ्यर्थी की जानकारी हाथ से भरी हो या कंप्यूटर पर टाइप करके छापी गई हो, दोनों चलेगा। 23 नियम 58(5) के अनुसार मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अभ्यर्थी के नामांकन पत्र पर उसी निर्वाचन क्षेत्र के 1 मतदाता के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर ज़रूरी हैं, और बाकी अभ्यर्थियों के पर्चे पर उसी क्षेत्र के 5 मतदाताओं के; दल का अभ्यर्थी माने जाने के लिए दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष या प्रमुख, या उनके अधिकृत व्यक्ति, का हस्ताक्षर किया पत्र नामांकन के अंतिम दिन दोपहर 3 बजे तक देना होता है। 38

B4घोषणा 4घ, शपथ पत्र I-A, शौचालय की घोषणा, सांख्यिकी सूचना फार्म: हर एक किस बात की है और कब अनिवार्य है?
(1) प्रारूप 4-घ: बिन्दु 1 लंबित आपराधिक मामले, 2 दोषसिद्धि, 3 संतान (अब विलोपित, सूचना ज़रूरी नहीं), 4 संपत्ति। 40 बिन्दु 1-2 अभ्यर्थी की योग्यता/अयोग्यता के लिए हैं; संपत्ति की सूचना केवल मतदाताओं की जानकारी के लिए है। 40 पूरा भरना आवश्यक है। 40 (2) उपाबन्ध-I A शपथ पत्र: न्यायालय में लंबित मामले, परिसंपत्तियाँ और देयता (Dues) की सूचना के लिए, 50 रुपये के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर, न्यायाधीश, न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट, शपथ कमिश्नर या नोटरी पब्लिक के सामने प्रमाणित। 40 संतान संबंधी योग्यता वाले कॉलम को छोड़कर कोई कॉलम ख़ाली हो तो RO अभ्यर्थी को मीमो देता है; पहले दिए शपथ पत्र में सुधार मान्य नहीं, इसलिए कमी पूरी करने के लिए अलग से शपथ पत्र देना होता है। मीमो मिलने के बाद भी कॉलम न भरा जाए, या यह अलग शपथ पत्र न दिया जाए, तो पर्चा अस्वीकार करने योग्य होगा। 23 (3) शौचालय की घोषणा: आयोग के प्रारूप में, नामांकन पत्र के साथ जमा, प्रमाणित कराना ज़रूरी नहीं। 41 (4) सांख्यिकी सूचना फार्म: न देने पर पर्चा खारिज नहीं, पर यथासंभव भरवाएँ। 23

B5प्रस्तावक कितने चाहिए (दल का अभ्यर्थी / अन्य)? प्रस्तावक किस नामावली का मतदाता हो? एक मतदाता कितने अभ्यर्थियों का प्रस्तावक हो सकता है, और दो पर दस्तख़त कर दे तो?
मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अभ्यर्थी के लिए 1 प्रस्तावक; दूसरे (निर्दलीय / किसी मान्यता प्राप्त दल से न खड़े) अभ्यर्थी के लिए 5 प्रस्तावक। 38 प्रस्तावक उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 38 एक मतदाता एक ही अभ्यर्थी का प्रस्तावक बन सकता है; दो पर दस्तख़त करे तो पहले प्राप्त नामांकन को छोड़कर बाद के नामांकन अवैध माने जाएँगे (RO ने जो पहले प्राप्त किया वही निर्णायक)। 38

B6जमानत (प्रतिभूति निक्षेप) राशि: ZP सदस्य और PS सदस्य के लिए कितनी? SC/ST/OBC/महिला के लिए छूट? (आदेश 753 दिनांक 20.01.2026, सा.आ. 150/2026)
ZP सदस्य और PS सदस्य दोनों के लिए जमानत (प्रतिभूति निक्षेप) सामान्य अभ्यर्थी के लिए 500 रुपये और महिला / अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 250 रुपये है (आयोग का आदेश 753, 20.01.2026, सां.आ. 150/2026)। 34142 रसीद पर्चे के साथ लगानी है (पत्र 10062 की पंक्ति 8)। 41 SC/ST/OBC का अभ्यर्थी सामान्य वार्ड से लड़ सकता है; वहाँ जमानत में रियायत चाहे तो कलक्टर या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का जारी जाति प्रमाण पत्र देना होगा। 41

B7जमानत कैसे जमा होती है: नकद RO के पास, चालान, या कोषागार? रसीद किस प्रारूप में (फ़ाइल 16 A)? एक से ज़्यादा नामांकन पर कितनी जमानत?
जमानत की राशि नियम 58(5) के परंतुक (क) में तय है: सामान्य अभ्यर्थी के लिए 500 रुपये, महिला और SC/ST/OBC अभ्यर्थी के लिए 250 रुपये; इसे जमा किए बिना अभ्यर्थी को निर्वाचन क्षेत्र से विधिवत नामित नहीं माना जाता। 3 आयोग का पत्र 10062 (06.10.2026) कहता है कि यह राशि जमा करवाकर रसीद भी लगानी आवश्यक है। 41 एक अभ्यर्थी एक से अधिक पर्चे भरे तो एक ही जमानत लगती है (परंतुक (ग))। 3 हर अलग निर्वाचन क्षेत्र की अलग जमा राशि लगती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ राशि RO या, जैसा भी मामला हो, ARO के पास जमा की जा सकती है। जमानत का हिसाब पंचायत समिति सदस्य का उपखण्ड अधिकारी के कार्यालय में और ज़िला परिषद सदस्य का ज़िला कलक्टर के कार्यालय में रखा जाता है (परिपत्र 2178, 20.06.2019)। 8 आयोग के पत्र 594 (19.01.2026) ने 2026 के आम चुनाव के लिए इस परिपत्र और समसंख्यक परिपत्र 2283 (09.07.2019) को बिना संशोधन लागू रखा है। 43 जमानत लौटाने के लिए अभ्यर्थी के आवेदन का प्रपत्र-1 है, जिसमें जमानत की "रसीद संख्या" और "दिनांक" भरी जाती है, और उसी प्रपत्र में अभ्यर्थी से ली जाने वाली रसीद का प्रारूप है ("मूल रसीद प्राप्त कर संलग्न की जावें")। 44 जमानत जब्ती का आदेश परिणाम घोषित होने के 3 दिन में प्रपत्र-2A में होता है। 45

B8नामांकन पत्र मिलते ही RO क्या करता है: प्रारंभिक जाँच किस-किस बात की, क्रम संख्या, समय, पावती, नामांकन रजिस्टर?
पर्चा मिलते ही RO/ARO उसे तकनीकी दृष्टि से देखता है (औपचारिक जाँच नहीं): उम्मीदवार और प्रस्तावक दोनों के दस्तख़त हैं, फॉर्म 4-डी और शपथ पत्र (उपाबन्ध-IA) साथ है, और प्रविष्टियाँ मतदाता सूची से मिलती हैं (मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति ज़रूरी नहीं, सूची RO के पास रहती है) (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। हर पर्चे पर क्रम संख्या, दिनांक और समय दर्ज होता है। 2436 अभ्यर्थी को संवीक्षा की तारीख, समय और स्थान बताना है; पर्चे पर अपने हस्तलेख में वार्ड/क्षेत्र का क्रमांक, पर्चे का क्रमांक, देने वाले का नाम (और कोई पहचानकर्ता हो तो उसका नाम भी) और प्राप्ति की तारीख व समय लिखना है। 2436 नामांकन रजिस्टर में नाम, प्राप्ति की तारीख/समय और दल दर्ज होता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

B9क्या RO नामांकन लेते समय ही कोई पर्चा लौटा/अस्वीकार कर सकता है (जैसे समय के बाद, जमानत नहीं, प्रस्तावक नहीं)?
नियम 25(2) कहता है कि जो पर्चा उप-नियम (1) के तरीक़े से नहीं दिया गया (अभ्यर्थी स्वयं, तय प्ररूप में, भरा और हस्ताक्षर या अँगूठे के निशान सहित, तय दिन पर), वह अस्वीकार किया जाएगा; यह नियम 58(5) से ZP/PS पर भी लागू है। 243 अस्वीकृति का फ़ैसला RO पर्चे पर "स्वीकार या अस्वीकार" लिखकर और अस्वीकार करने पर संक्षिप्त कारण लिखकर संवीक्षा में करता है (नियम 27(3)-(4)); उससे पहले नामांकन लेते समय RO को पर्चे पर क्रम संख्या, तारीख़ और समय लिखना और अभ्यर्थी को संवीक्षा का दिन, समय और जगह बताना है (नियम 26)। 24 पत्र 10062 (06.10.2026) के अनुसार नामांकन पत्र और उसके साथ लगने वाले घोषणा या शपथ पत्रों का कोई कॉलम ख़ाली नहीं छोड़ा जाएगा (संतान संबंधी योग्यता को छोड़कर); कॉलम ख़ाली हो तो RO अभ्यर्थी को इसका मीमो देता है। 23 पहले दिए शपथ पत्र में संशोधन मान्य नहीं, कमी पूरी करने के लिए अलग (पृथक) शपथ पत्र देना होगा। 23 मीमो मिलने के बाद भी कॉलम ख़ाली रहे, या जहाँ अलग शपथ पत्र ज़रूरी है वहाँ न दिया जाए, तो पर्चा "अस्वीकार करने योग्य" होगा। 23 नियम 58(1)(क) के अनुसार ज़िला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अधिसूचना में वे तारीख़ें और घंटे तय करता है जिनके बीच नामांकन पत्र RO/ARO को दिए जाने हैं। 3 आयोग के आदेश 6251 (26.12.2019) के साथ लगे ZP/PS चुनाव की सूचना के नमूने में लिखा है कि पर्चे तय तारीख़ तक किसी भी कार्य दिवस को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच अभ्यर्थी स्वयं देगा। 5 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ नामांकन लेते समय "कोई औपचारिक जाँच नहीं" की जानी चाहिए।

B10रोज़ नामांकन की सूचना (नोटिस बोर्ड पर, किस प्ररूप में) और उसकी प्रति किसे भेजनी है?
हर दिन दोपहर 3:00 बजे के बाद उस दिन प्रस्तुत नामांकन पत्रों की सूची RO के नोटिस बोर्ड पर लगती है; ARO भी अपने सामने आए पर्चों के लिए यही करता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। राज्य निर्वाचन आयोग को दैनिक सूचना शाम 4:00 बजे तक देनी होगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अंतिम दिन सभी पर्चों की समेकित सूची बनती है (एक अभ्यर्थी के एक से अधिक पर्चे हों तो सब बताए), प्रति नोटिस बोर्ड पर लगती है और आयोग व DEO को ई-मेल से शाम 4:00 बजे तक भेजी जाती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इस सूची के खाने: पर्चे का क्रमांक, नाम, पता, चुने प्रतीक, दल/निर्दलीय (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

स्रोत: रिटर्निंग अधिकारी प्रशिक्षण (जि.प.-पं.स.), पृ. 26, 27

B11अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु क्या है और किस तारीख़ को? आयु का प्रमाण क्या?
पंचायतीराज अधिनियम की धारा 19 पंच और पंचायत समिति/ज़िला परिषद सदस्य, दोनों पर लागू है: जो व्यक्ति विधानसभा चुनाव के लिए अयोग्य है, वह इनके लिए भी अयोग्य है, पर 21 वर्ष पूरे कर चुके व्यक्ति को 25 वर्ष से कम आयु के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। यानी अभ्यर्थी की आयु कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। 46 नामांकन पत्र (प्ररूप IV-A) में अभ्यर्थी स्वयं घोषणा करता है "I have completed ... Years of age"। 21 मार्गदर्शिका के पंच-सरपंच वाले अध्याय में लिखा है कि उम्र संवीक्षा के दिन 21 साल होनी चाहिए, मतदाता सूची में उम्र केवल अनुमानित होती है और इसलिए नामांकन के लिए प्रमाणित नहीं मानी जा सकती, और उदाहरण में शैक्षणिक प्रमाणपत्र की उम्र ली गई है; नामांकन की जाँच के समय इस उम्र पर आपत्ति की जा सकती है। 47

B12अभ्यर्थी का नाम किस नामावली में होना चाहिए: उसी निर्वाचन क्षेत्र की, या पंचायत समिति/जिला परिषद की किसी भी वार्ड की?
धारा 19 के अनुसार जिस पंचायती राज संस्था की मतदाता सूची में किसी का नाम दर्ज है, वह (कोई अयोग्यता न हो तो) उस संस्था का सदस्य चुने जाने के योग्य है। 46 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ इसका मतलब है कि पंचायत समिति सदस्य का अभ्यर्थी उस पंचायत समिति के, और ज़िला परिषद सदस्य का अभ्यर्थी उस ज़िला परिषद के, किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता हो सकता है। प्रस्तावक उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए। 38 अभ्यर्थी उस PS/ZP क्षेत्र का मतदाता न हो तो पर्चा अस्वीकार होता है। 2446

B13आरक्षित सीट (SC/ST/OBC/महिला) पर कौन-सा प्रमाण पत्र, किसका जारी किया हुआ, कितना पुराना चल सकता है? (पत्र 153 दिनांक 06.01.2020, पत्र 10062)
पत्र 10062 (06.10.2026) के अनुसार SC/ST/OBC अभ्यर्थी आरक्षित वार्ड के लिए नामांकन भरे तो कलक्टर या राजस्थान सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का जारी जाति प्रमाण पत्र देगा। 41 SC/ST/OBC अभ्यर्थी साधारण वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है; और जमानत में 250 रुपये की रियायत चाहिए तो साधारण वार्ड में भी यही प्रमाण पत्र लगाना होगा। 41 कोई पुरुष अभ्यर्थी महिला के लिए आरक्षित वार्ड से नामांकन दाख़िल करने का हक़दार नहीं है। 41

B14मान्यता प्राप्त दल का अभ्यर्थी कब माना जाता है: प्ररूप क और ख क्या हैं, कौन दस्तख़त करता है, कब तक (समय) देना है? (अधिसूचना 4196 दिनांक 17.10.2025)
अधिसूचना 4196 (17.10.2025) के अनुसार अभ्यर्थी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल द्वारा खड़ा किया हुआ तभी माना जाता है जब (1) उसने अपने नाम निर्देशन पत्र में इस आशय की घोषणा की हो, (2) दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष/मुखिया (जहाँ अध्यक्ष का पद नहीं, वहाँ सचिव) या उनके प्राधिकृत व्यक्ति ने प्ररूप ख में लिखित सूचना नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख़ को अपराह्न 3 बजे तक RO को दे दी हो, (3) प्राधिकृत व्यक्ति के नमूना हस्ताक्षर प्ररूप क में उसी समय तक RO को मिल गए हों, और (4) प्ररूप क और ख केवल स्याही से हस्ताक्षरित हों। 48 प्ररूप क = दल के प्राधिकृत व्यक्तियों की सूचना (नमूना हस्ताक्षर सहित)। 49 प्ररूप ख = राज्य में मान्यता प्राप्त दल द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के नामों के बारे में RO को दी जाने वाली सूचना (अधिसूचना 4196, 17.10.2025 का खण्ड 6); इसकी सारणी में हर अनुमोदित उम्मीदवार के निर्वाचन क्षेत्र का क्रमांक भी लिखा जाता है। 50 फैक्स, ई-मेल, व्हाट्सअप से भेजा प्ररूप, या अनुकृति/रबड़ स्टाम्प के हस्ताक्षर मान्य नहीं। 51 यदि राज्य इकाई का प्रमुख स्वयं प्ररूप ख पर हस्ताक्षर करे तो प्ररूप क ज़रूरी नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

B15प्रतिस्थानी (substitute) अभ्यर्थी क्या है, और दल ने एक सीट पर दो नाम भेज दिए तो?
यदि मान्यता प्राप्त दल एक अभ्यर्थी को मुख्य और दूसरे को स्थानापन्न (substitute) घोषित करे तो पहले मुख्य अभ्यर्थी का पर्चा जाँचा जाता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग की अधिसूचना 4196 (17.10.2025) के मुताबिक़ मुख्य अभ्यर्थी का पर्चा स्वीकार हुआ और उसने नाम वापस नहीं लिया, तो स्थानापन्न का पर्चा भी स्वीकार होने और उसके नाम वापस न लेने पर उसे दल का खड़ा किया अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा; उसे मुक्त प्रतीक मिलेगा। 52 मुख्य का पर्चा अस्वीकार हुआ तो स्थानापन्न को दल का मुख्य अभ्यर्थी माना जाएगा। 52 किसी दल ने एक सीट के लिए अलग-अलग अभ्यर्थियों के एक से अधिक "फॉर्म ख" दिए और यह नहीं बताया कि पहले वाला फॉर्म ख वापस ले लिया गया है, तो RO उसी अभ्यर्थी को दल का अभ्यर्थी मानेगा जिसका नामांकन पत्र सबसे पहले मिला। 52

B16नामांकन के समय RO कक्ष में अभ्यर्थी के साथ कितने लोग आ सकते हैं? भीड़ और वाहन पर आयोग का पत्र 8918 (16.09.2026) क्या कहता है?
आयोग के पत्र 8918 (16.09.2026) के अनुसार नामांकन पत्र जमा करते समय RO या ARO के कार्यालय में अभ्यर्थी सहित ज़्यादा से ज़्यादा 5 लोग ही रह सकते हैं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार किसी भी चुनाव में (अभ्यर्थी के अपने वाहनों समेत) 3 से ज़्यादा वाहनों की रैली या काफ़िला नहीं निकाला जा सकता, और मतदान ख़त्म होने के तय समय से 48 घंटे पहले से ऐसी रैली या काफ़िला पूरी तरह मना है। 53 नामांकन के दौरान किसी भी तरह की रैली की अनुमति नहीं है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अधिसूचना 5052 के अनुसार ज़िला परिषद सदस्य के चुनाव में अभ्यर्थी ज़्यादा से ज़्यादा तीन, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में दो और सरपंच के चुनाव में एक वाहन इस्तेमाल कर सकता है; वाहन इस्तेमाल करने से कम से कम 24 घंटे पहले वाहन का नंबर, प्रकार और चालक का नाम-पता RO को (सरपंच के चुनाव में उपखण्ड अधिकारी को) लिखित में बताना होता है, और RO की लिखित अनुमति वाहन पर लगानी होती है। 53 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ नामांकन के समय कार्यालय के 100 मीटर के दायरे में भी अभ्यर्थी इतनी ही गाड़ियाँ ला सकता है। अभ्यर्थी नाम वापस न ले तो नामांकन के समय साथ आई गाड़ियों का ख़र्च उसके कुल चुनावी ख़र्च में जोड़ा जाएगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पत्र की प्रति RO प्रशिक्षण की स्लाइडों में है।

B17क्या नामांकन के समय कोई शुल्क/फ़ीस (जमानत के अलावा) है? सांख्यिकी फार्म, फोटो, कितनी प्रतियाँ?
पत्र 10062 (06.10.2026): नामांकन पत्र, प्ररूप 4-घ और उपाबन्ध-1A आयोग ने ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को दिए हैं, अभ्यर्थी पहले उन्हीं कार्यालयों से लिया प्ररूप इस्तेमाल करे; न मिले तो उसकी फोटो प्रति चलेगी; सभी प्रविष्टियाँ भरा टाइप किया प्ररूप भी चलेगा; सादे काग़ज़ पर हाथ से उतारकर बनाया नामांकन पत्र और संलग्न प्ररूप स्वीकार नहीं होंगे; छपे, फोटो प्रति या टाइप किए प्ररूप में अभ्यर्थी की जानकारी हाथ से भरी हो या कंप्यूटर पर टाइप करके छापी गई हो, दोनों चलेगा। 23 सांख्यिकी सूचना का फार्म भी चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी से नामांकन पत्र के साथ भरवाया जाएगा; न देने पर नामांकन खारिज नहीं होगा, पर जहाँ तक हो भरवाया जाना चाहिए। 23 मार्गदर्शिका का परिशिष्ट-6-E यही फार्म है, उसमें ZP/PS सदस्य के उम्मीदवार शामिल हैं, और उसमें अपनी पासपोर्ट साइज़ फोटो लगाने की जगह छपी है। 5455 आयोग के आदेश 666 (20.01.2026) के अनुसार नियमों में तय वे सभी प्ररूप जो अभ्यर्थियों के इस्तेमाल के हैं, इच्छुक लोगों को निःशुल्क दिए जाते हैं, और इन प्ररूपों की फोटो प्रति भी मान्य है। 56 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ बायोडाटा का छपा फार्म भी निःशुल्क मिलता है। नियम 28(1) के अनुसार नाम वापसी का नोटिस लिखित में और दो प्रतियों में होता है, उस पर अभ्यर्थी के दस्तख़त या अंगूठे का निशान होता है, और अभ्यर्थी इसे ख़ुद RO को देता है। 57 आयोग के आदेश 745 (20.01.2026) के अनुसार ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य चुनाव के नामांकन पत्रों की प्रमाणित प्रति आवेदक को उसी दर पर शुल्क देने पर मिलती है जो राजस्व न्यायालय नियमावली में किसी आदेश की प्रति के लिए तय है, और आवेदन में बताना होता है कि उन दस्तावेज़ों में आवेदक का सीधा हित क्या है। 58 प्रति सरकारी काम के लिए चाहिए तो कोई फ़ीस नहीं लगती। 59

B18अभ्यर्थी ने नामांकन पत्र में प्रतीक की पसंद कैसे बतानी है (कितने विकल्प)?
मान्यता प्राप्त दल के अभ्यर्थी को केवल उस दल का आरक्षित चिन्ह आवंटित होता है। 33 उसे तीन चिन्ह लिखने की ज़रूरत नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। निर्दलीय जिला परिषद सदस्य अभ्यर्थी आदेश की तालिका 3 की मुक्त चिन्हों की सूची में से तीन चिन्ह चुनता है। 60 पहले दिए गए पर्चे में चुने चिन्हों पर ही विचार होता है, भले ही वह पर्चा अस्वीकृत हो जाए। 34

संवीक्षा 18

C1संवीक्षा कब और कहाँ होती है? (नियम 27 / नियम 58)
संवीक्षा नियम 27 (नियम 58(5) के साथ) के अंतर्गत नामांकन की अंतिम तिथि के अगले दिन प्रातः 11 बजे से होती है: चरण-1 में 14.10.2026, चरण-2 में 17.10.2026, चरण-3 में 24.10.2026, चरण-4 में 05.11.2026 (आदेश 9836 का परिशिष्ट-A और 9867)। 312 जिला निर्वाचन अधिकारी की लोकसूचना में संवीक्षा की तारीख़ के साथ "स्थान का नाम" भरा जाता है, और RO नामांकन लेते समय अभ्यर्थी को संवीक्षा का दिन, समय और स्थान बताता है (नियम 26)। 524 संवीक्षा RO स्वयं करता है; RO के साथ मुख्यालय पर पदस्थापित ARO भी कर सकता है, पर संवीक्षा में अंतिम निर्णय RO का रहता है। 6

C2संवीक्षा में कौन उपस्थित रह सकता है (अभ्यर्थी, प्रस्तावक, एक प्रतिनिधि, अभिकर्ता)? कौन नहीं?
स्लाइड में नियम 27(2) का अंग्रेज़ी पाठ यह है कि संवीक्षा के समय "the candidates themselves and no other person may attend"। 24 मास्टर चेकलिस्ट में एक पंक्ति है कि कोई candidate/proposer/other person आपत्ति करता है क्या। प्रशिक्षण प्रश्नावली (प्रश्न 43) भी नियम 27(2) को ही दोहराती है: अभ्यर्थी स्वयं उपस्थित हो सकते हैं, कोई और नहीं। 36

C3आपत्ति कौन कर सकता है, कब तक, लिखित या मौखिक? RO आपत्ति पर कैसे फ़ैसला करे?
नियम 27(2) (नियम 58(5) से ZP/PS पर लागू) के अनुसार संवीक्षा के समय सिर्फ़ अभ्यर्थी स्वयं हाज़िर रह सकते हैं, कोई दूसरा व्यक्ति नहीं; RO हर अभ्यर्थी को पर्चों को जाँचने की सारी उचित सुविधा देता है और किसी भी पर्चे पर आपत्ति करने का उचित अवसर देता है। 243 यानी आपत्ति वही अभ्यर्थी कर सकते हैं जो जाँच के समय मौजूद हों, और जाँच तय दिन व समय पर शुरू होकर उसी दिन पूरी होती है (नियम 27(5)), इसलिए आपत्ति का समय वही जाँच है। 24 RO सभी आपत्तियों पर फ़ैसला करता है और आपत्ति के आधार पर या अपनी ओर से नियम 27(3) के आधारों पर पर्चा अस्वीकार कर सकता है; हर पर्चे पर फ़ैसला और अस्वीकार करने पर संक्षिप्त कारण लिखता है (नियम 27(4))। 2436 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ RO संक्षिप्त जाँच के बाद और अभ्यर्थी को सुनवाई का उचित अवसर देकर ही अस्वीकार करे, और आपत्ति व अस्वीकृति के हर मामले में कारण दर्ज हों। प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ केवल मौखिक आपत्ति के आधार पर पर्चा अस्वीकार नहीं होता; RO पर्चे और उपलब्ध वैधानिक अभिलेखों के आधार पर फ़ैसला करे।

C4नामांकन अस्वीकार करने के आधार क्या हैं (नियम 27(3) पूरी सूची)?
नियम 27(3) के अनुसार RO सब आपत्तियों पर फ़ैसला करता है और आपत्ति पर या अपनी ओर से पर्चा इन चार आधारों पर ही नामंज़ूर कर सकता है: (क) अभ्यर्थी निर्वाचन के लिए अर्हित नहीं है या निरर्हित है; (ख) वह वही व्यक्ति नहीं है जिसका मतदाता सूची का नंबर या नाम पर्चे में लिखा है; (ग) उसके हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप असली नहीं है, या धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से ली गई है; (घ) नियम 25 के उपबन्धों का पालन नहीं हुआ (जाति प्रमाण पत्र न लगाना, पुरुष का महिला-आरक्षित वार्ड से पर्चा, पर्चा स्वयं न देना)। 2436 ZP/PS में नियम 58(5) के परंतुक की शर्तें (जमानत, प्रस्तावक) भी जाँची जाती हैं; चुनाव चिन्ह की बातें नियम 58(6) में हैं। 338 हर पर्चे पर RO मंज़ूर या नामंज़ूर का फ़ैसला और नामंज़ूरी का संक्षिप्त कारण लिखता है। 24 (प्रशिक्षण स्लाइड में इन्हीं के साथ (ङ) नियम 25 व 58(5)-(6) की पालना और (च) आयोग द्वारा अपेक्षित हलफनामा भी गिनाए गए हैं; वे नियम 27(3) के खण्ड नहीं हैं।)

C5कौन-सी कमियाँ सारवान नहीं मानी जातीं और उन पर पर्चा अस्वीकार नहीं होता? नाम की वर्तनी, नामावली की प्रविष्टि की त्रुटि?
स्लाइड के अनुसार: मामूली तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि पर उदार रहें; जो दोष सारवान प्रकृति का न हो उस पर अस्वीकृति नहीं; प्रतीकों की घोषणा अधूरी या ग़लत हो तो वह अस्वीकृति का आधार नहीं; मतदाता सूची या नामांकन पत्र में ग़लत नाम, ग़लत विवरण, लिपिकीय, तकनीकी या मुद्रण त्रुटि को अनदेखा करें। नाम की वर्तनी की छोटी भिन्नता पर, यदि पहचान साफ़ है, पर्चा स्वीकार होता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सांख्यिकी फार्म न देना भी आधार नहीं (पत्र 10062)। 23

C6हर नामांकन पत्र पर RO क्या लिखता है: स्वीकार/अस्वीकार का आदेश, कारण, दस्तख़त, समय?
हर नामांकन पत्र पर RO "स्वीकृत" (ACCEPTED) या "अस्वीकृत" (REJECTED) का निर्णय लिखता है (नियम 27(4)); अस्वीकार करने पर कारण का संक्षिप्त कथन लिखना अनिवार्य है, केवल "Rejected" लिखना काफ़ी नहीं। 2436 आपत्ति और अस्वीकृति के हर मामले में कारण दर्ज होंगे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। RO का स्वीकार/अस्वीकार आदेश RO के हस्ताक्षर, दिनांक और समय के साथ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नियम 27(5) के अनुसार संवीक्षा उसी दिन पूरी होती है और उसकी कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती, इसलिए हर पर्चे पर फ़ैसला और अस्वीकार का कारण उसी दिन लिखा जाता है। 24 आयोग के आदेश 745 (20.01.2026) के अनुसार नामांकन पत्र की प्रमाणित प्रति शुल्क देने पर मिलती है। 58 सरकारी काम के लिए चाहिए तो कोई फ़ीस नहीं लगती। 59

C7क्या संवीक्षा स्थगित की जा सकती है, कितनी देर/किस कारण?
नहीं। नियम 27(5) कहता है कि संवीक्षा उसी दिन पूरी की जाएगी और कार्यवाही का कोई स्थगन अनुज्ञात नहीं है; यह नियम 58(5) से जिला परिषद और पंचायत समिति पर भी लागू है। 24613 इसलिए स्थगन की कोई अवधि या कारण तय ही नहीं है। 24

C8अभ्यर्थी को अपनी कमी दूर करने या जवाब देने का समय मिलता है?
नियम 27(2) के अनुसार संवीक्षा के समय अभ्यर्थी ख़ुद मौजूद रह सकते हैं (कोई और नहीं), और RO हर अभ्यर्थी को नामांकन पत्र जाँचने की हर उचित सुविधा और उन पर आपत्ति करने का उचित अवसर देता है। 2436 नियम 27(3) के अनुसार RO सभी आपत्तियों पर फ़ैसला करता है, और आपत्ति के आधार पर या अपनी ओर से किसी पर्चे को इन आधारों पर खारिज कर सकता है: अभ्यर्थी चुनाव के योग्य नहीं है या अयोग्य है; वह मतदाता सूची की उस प्रविष्टि वाला व्यक्ति नहीं है जिसका क्रमांक या नाम पर्चे में लिखा है; उसके दस्तख़त या अंगूठे का निशान असली नहीं है या धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से लिया गया है; या नियम 25 का पालन नहीं हुआ है। 24 RO चेकलिस्ट के मुताबिक़ खारिज करने से पहले अभ्यर्थी को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पत्र 10062 के अनुसार नामांकन पत्र या शपथ पत्र का कोई कॉलम खाली नहीं छोड़ा जाता (संतान संबंधी योग्यता को छोड़कर); कोई कॉलम खाली हो तो RO अभ्यर्थी को मेमो देता है; पहले दिए शपथ पत्र में संशोधन विधिपूर्ण नहीं, इसलिए कमी दूर करने के लिए अलग शपथ पत्र देना होगा; मेमो के बाद भी कमी न भरे तो पर्चा अस्वीकार करने योग्य है। 23 नियम 27(5) के अनुसार संवीक्षा उसी दिन पूरी होती है और उसकी कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती; पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में भी यही नियम लागू है (नियम 58(5)), और RO चेकलिस्ट में भी यही लिखा है। 243 RO प्रशिक्षण सामग्री में मेमो पर दी गई टिप्पणी के अनुसार प्रारूप 4-घ (योग्यता-अयोग्यता की घोषणा) न दिया हो तो RO उसे माँग सकता है, और इसका समय RO तय करता है, आम तौर पर संवीक्षा से पहले या संवीक्षा के दौरान; प्रस्तावक, जमानत और मूल नामांकन पत्र या हस्ताक्षर नामांकन देते समय ही पूरे होने चाहिए, और मेमो से नया नामांकन नहीं बनाया जा सकता; दल के अभ्यर्थी का एक प्रस्तावक न हो तो उसे बाद में मेमो देकर जोड़ना सुरक्षित नहीं माना गया, और बाकी अभ्यर्थियों के 5 प्रस्तावक न हों तो संवीक्षा के बाद नए प्रस्तावक जोड़कर मूल पर्चे को सही करना आम तौर पर संभव नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। RO चेकलिस्ट यह भी कहती है कि RO पहले ही पर्चे की शुरुआती जाँच कर सकता है ताकि छोटी बात पर पर्चा खारिज न हो, मामूली तकनीकी या लिखने की गलतियों पर सख़्ती की जगह उदारता बरते, और जो दोष अहम न हो उस पर पर्चा खारिज न करे (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

C9धारा 19 की अयोग्यताएँ: पूरी सूची (आयु, संतान, शौचालय, सरकारी बकाया, लाभ का पद, दोषसिद्धि, दिवाला, मानसिक अस्वस्थता, सरकारी सेवा, ठेका, आदि)। हर एक किस प्रमाण से जाँची जाती है?
प्रशिक्षण स्लाइड (अर्हता-अयोग्यता) की सूची, पृष्ठ-वार: आयु 21 वर्ष; संविधान अनुच्छेद 191 (लाभ का पद, मानसिक अस्वस्थता, दिवालिया, नागरिकता, दल-बदल); लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धाराएँ 8, 8क, 9, 9क, 10, 10क, 11 (दोषसिद्धि, भ्रष्ट आचरण, बर्खास्तगी, सरकारी ठेका आदि), संविधान के अनुच्छेद 243-च और धारा 19 के साथ पढ़ी जाने वाली; पंचायती राज अधिनियम धारा 19 के बिन्दु 1-14 (भ्रष्ट आचरण; वेतनभोगी पद; सरकारी बर्खास्तगी; पंचायती राज संस्था में लाभ का पद; संस्था से ठेके में हित; कुष्ठ रोग/शारीरिक-मानसिक दोष; छह माह या अधिक की सज़ा; पाँच वर्ष या अधिक की सज़ा वाले अपराध में आरोप तय; धारा 38; कर/शुल्क बकाया; संस्था की ओर से/विरुद्ध वकील; मृत्यु भोज निवारण अधिनियम; संतान (अब हटा); पूर्व अध्यक्ष चूककर्ता सूची)। शौचालय की शर्त धारा 19(थ) से (पत्र 10062)। 41 प्रशिक्षण की संवीक्षा-सूची में हर खण्ड के आगे "RO जांच" का कॉलम है: भ्रष्ट आचरण की दोषसिद्धि के लिए कोर्ट ऑर्डर देखना, धारा 38 की अयोग्यता के लिए धारा 38 देखना, और इसी तरह हर खण्ड पर "If Correct - Reject"। संतान (19(l)) और शैक्षणिक योग्यता (19(r)) उस सूची में "हटा दी गयी" हैं। 406255

C10दो से अधिक संतान का नियम: किस तारीख़ के बाद की संतान गिनती है? अपवाद?
आदेश के अनुसार संतान संबंधी योग्यता का प्रावधान अब विलोपित है (25.03.2026 की राजपत्र अधिसूचना, पत्र 4795 के साथ), इसलिए संतान की गिनती या तारीख़ का नियम अब नहीं लगता और 4-घ में संतान की सूचना देना ज़रूरी नहीं। 4063 प्रशिक्षण स्लाइड अब भी पुराना नियम लिखती है: दो से अधिक संतान; 27.04.1994 से 27.11.1995 के बीच जन्मे अतिरिक्त बच्चे को नहीं गिना जाता। यह स्लाइड का पाठ है, आदेश नहीं।

C11शैक्षणिक योग्यता की कोई शर्त है या नहीं (2026 में)?
जिन सूचियों में उम्मीदवार की योग्यता गिनाई गई है, उनमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की कोई शर्त नहीं दिखती। वहाँ शर्तें ये हैं: संवीक्षा की तारीख़ पर कम से कम 21 साल की उम्र, 47 आरक्षित सीट पर उसी जाति/वर्ग का होना, महिला सीट पर महिला होना, 62 और धारा 19-क के तहत राज्य सरकार जिन सीटों के लिए विशेष योग्यता तय करे, उन पर 21 से 35 वर्ष के आयु वर्ग का होना। 37 शिक्षा का ज़िक्र इतना ही है कि ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के नामांकन के साथ दिए जाने वाले शपथ पत्र में अभ्यर्थी को अपनी शैक्षिक योग्यता बतानी होती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सांख्यिकी सूचना के फार्म (परिशिष्ट-6-E, जो ZP/PS सदस्य के उम्मीदवारों के लिए भी है) में "साक्षर या दसवीं पास या ग्रेज्युएट या पोस्टग्रेज्युएट, प्रोफेशनल डिग्री" में से लिखना होता है। 54 प्रशिक्षण की संवीक्षा-सूची में धारा 19(r), "PS/ZP सदस्य हेतु Secondary School Examination पास न होना", के आगे लिखा है "यह हटा दी गयी है", यानी शैक्षणिक योग्यता की शर्त अब नहीं है। 62 RO की स्क्रूटिनी रजिस्टर में एक पंक्ति "आवश्यक शैक्षणिक/अन्य statutory qualification जाँची गई" है, पर उसमें यह नहीं लिखा कि वह योग्यता क्या है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

C12लाभ का पद: आयोग का पत्र 10297 (09.10.2026) क्या कहता है; कौन-से पद अयोग्य, कौन-से नहीं?

आयोग का पत्र 10297 (09.10.2026) नागौर के DEO के प्रश्न का उत्तर है, और कहता है कि लाभ के पद की परिभाषा संविधान, अधिनियम, नियम या परिपत्र में स्पष्ट नहीं है; 35 RO नामांकन की संवीक्षा के समय सर्वोच्च न्यायालय के प्रद्युत बारदलोई (2001) और जया बच्चन (2006) वाले परीक्षण से निर्णय करे (जया बच्चन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि यह निर्णायक नहीं कि वास्तव में आर्थिक लाभ मिला या नहीं; महत्वपूर्ण यह है कि पद आर्थिक लाभ या मानदेय पाने में सक्षम है या नहीं): नियुक्ति सरकार ने की? 64 सरकार हटा सकती है? 64 वेतन/मानदेय जुड़ा है? काम की प्रकृति क्या है? सरकार का नियंत्रण कितना है? 64 पद के अनुसार: राजस्थान संविदा नियम 2022 के कार्मिक = लाभ का पद माना जाना अपेक्षित; 35 आशा सहयोगिनी = उसी परीक्षण से RO तय करे, अंतिम निर्णय से पहले चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के परिपत्र 186 (13.07.2022) के दिशा-निर्देश, नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण की जाँच करके; 35 साथिन = महिला अधिकारिता विभाग के कोई दिशा-निर्देश नहीं, इसलिए आशा सहयोगिनी वाले बिन्दु 2 की तरह ही निर्णय; 35 विद्या संबल योजना वाले = कोई बाध्यकारी न्यायिक निर्णय नहीं, उसी परीक्षण से निर्णय, आम तौर पर वेतन/मानदेय राज्य सरकार देती है, RO नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण जाँचे, और संशय हो तो चुनाव में भाग लेने से पहले त्याग पत्र लेना उचित; 65 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका = पद लाभ का पद नहीं माना गया, पर नामांकन से परिणाम तक अवैतनिक अवकाश लेना होगा और जीतने पर शपथ से पहले त्याग पत्र देना होगा; 65 राशन डीलर = हाई कोर्ट के फ़ैसले (मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य, 2014) के आधार पर लाभ का पद मानना उचित नहीं; 65 प्रशासक = पहले जारी आयोग के निर्देशों के अनुसार RO स्वयं निर्णय ले। 65

जोड़: आयोग का पत्र क्रमांक एफ. 5(2)(1)पंचा/रानिआ/2022/10520, दिनांक 14-10-2026: आयोग ने पंचायतीराज विभाग के पूछने पर लिखा है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पूरा होने पर बनी प्रशासकीय समिति के पद लाभ के पद की श्रेणी में नहीं माने जाएँगे। 66 समिति में उसी ग्राम पंचायत के पुराने उपसरपंच और वार्ड पंच सदस्य बनाए गए थे। 66 यह पत्र विभाग को लिखा गया है, RO को सीधे नहीं। 66 पत्र 10297 के बिंदु 7 (प्रशासक का पद) में आयोग ने लिखा था कि पहले के आदेश के अनुसार RO अपने स्तर पर निर्णय ले। 65

C13मुकदमा/FIR/दोषसिद्धि: केवल FIR से अयोग्यता है या नहीं? कौन-सी सज़ा पर अयोग्यता, कितने साल?
केवल FIR, आरोप-पत्र या संज्ञान से अयोग्यता नहीं होती (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। धारा 19(gg): संज्ञान + आरोप तय + पाँच वर्ष या अधिक की सज़ा वाला अपराध + विचाराधीन (under trial) हो तभी अयोग्यता। 62 दोषसिद्धि पर: धारा 19 में छह माह या अधिक की सज़ा पर दोषसिद्धि की तारीख़ से छह वर्ष तक। 6267 मार्गदर्शिका के मुताबिक़ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 में धारा 8(1) के अपराध में कोई भी सज़ा (सिर्फ़ जुर्माना भी), धारा 8(2) के अपराध में 6 माह या ज़्यादा, और बाकी अपराधों में 2 वर्ष या ज़्यादा की सज़ा पर दोषसिद्धि की तारीख़ से अयोग्यता होती है। 68

C14सरकारी/पंचायत बकाया (कर, ऋण) होने पर क्या?
पंचायती राज संस्था के कर/शुल्क का बकाया: मांग नोटिस की तारीख़ से 2 महीने तक न चुकाने वाला अयोग्य है, पर नियत राशि नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले चुका दी हो तो अयोग्य नहीं। 6267 पूर्व अध्यक्ष/उपाध्यक्ष चूककर्ताओं की सूची में हो (अधिसूचना जारी होने से कम से कम दो महीने पहले कलेक्टर को दी गई) तो अयोग्य, पर नामांकन से पहले देय राशि चुका दे तो अयोग्य नहीं। 67 पत्र 10062 के बिन्दु 1 और 2 के अनुसार जिसने ऐसा बकाया नामांकन से पहले चुकाया है, वह जमा की रसीद या नो-ड्यूज़ प्रमाण लगाए; बिन्दु 3 के अनुसार जिस पर धारा 19(झ)/19(ड) का कोई बकाया नहीं, उसे कोई नो-ड्यूज़ देने की ज़रूरत नहीं। 41

C15जाति प्रमाण पत्र की वैधता RO कैसे जाँचे; शंका हो तो?
जाति प्रमाण पत्र को चुनौती दी जाए तो जाँच अधिकारी को पूछताछ करने की ज़रूरत नहीं है, सिवाय तब जब आरोप हो कि प्रमाण पत्र जाली है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। प्रामाणिकता पर संदेह या आरोप हो तो RO प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी से स्थिति की पुष्टि कराए (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आरक्षित वार्ड में प्रमाण पत्र न लगाना अस्वीकृति का आधार है (नियम 25; 27(3)(d))। 24 प्रमाण पत्र की वैधता-अवधि: B13 देखें।

C16एक अभ्यर्थी के कई पर्चे: एक अस्वीकार, एक स्वीकार हो तो? पहले वाला अस्वीकार हो तो बाद वाला?
नियम 58(5) के परंतुक (ग) के अनुसार एक अभ्यर्थी एक से अधिक पर्चे भरे तो जमानत एक ही लगती है। 3 नियम 27(3) में RO "any nomination paper" यानी हर पर्चे पर अलग फ़ैसला करता है और हर पर्चे पर अपना फ़ैसला व अस्वीकार का कारण लिखता है (नियम 27(4)); इसलिए एक पर्चे की अस्वीकृति दूसरे पर्चे को अपने आप अस्वीकार नहीं करती। 24 मार्गदर्शिका के पंच-सरपंच वाले अध्याय में लिखा है कि एक या दो पर्चे खारिज हों और तीसरा स्वीकृत हो तो वह व्यक्ति उम्मीदवार बना रहेगा, और कई पर्चे स्वीकृत हों तो भी सूची में उसका नाम एक ही बार लिखा जाएगा। 69 आयोग के किसी सामान्य या विशेष निर्देश के अधीन, एक अभ्यर्थी के एक से ज़्यादा पर्चे हों तो सबसे पहले दिए गए पर्चे में चुने गए चिन्ह ही गिने जाते हैं, भले वह पर्चा अस्वीकार हो जाए (नियम 58(6)(ग))। 3834 मार्गदर्शिका के मुताबिक़ नाम वापसी के नोटिस से अभ्यर्थी चुनाव से हटता है, किसी एक पर्चे से नहीं; जिसने एक से ज़्यादा पर्चे दिए हों, उसके सभी पर्चे नाम वापसी के एक ही नोटिस से वापस लिए हुए माने जाते हैं। 69

C17संवीक्षा रजिस्टर/चेकलिस्ट (RO Nomination Scrutiny Register) में क्या-क्या भरना है?
RO नामांकन संवीक्षा रजिस्टर चार पन्नों का है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। पहले पन्ने पर ऊपर जिला, निर्वाचन क्षेत्र, PS/ZP, RO का नाम, संवीक्षा की तारीख़-समय, अभ्यर्थी का नाम, नामांकन नंबर, राजनीतिक स्थिति और आरक्षित सीट भरते हैं, फिर 11 बिंदुओं में नामांकन की प्राप्ति, प्ररूप IV-A और IV-D, जमानत जैसी बातें हाँ/नहीं/N/A में जाँचते हैं। पन्ना 2 पात्रता, मतदाता सूची और प्रस्तावकों की जाँच के 15 बिंदु हैं (आयु 21, नामावली में नाम, धारा 19 की अयोग्यता, मान्यता प्राप्त दल का 1 और अन्य का 5 प्रस्तावक, दोहरे प्रस्तावक की जाँच)। पन्ना 3 संवीक्षा, आपत्ति और निर्णय के 14 बिंदु हैं और नीचे आपत्ति/speaking order की शीट है। पन्ना 4 में अंतिम सूची, नाम वापसी, प्रतीक के 15 बिंदु हैं, और अंत में कुल प्राप्त, स्वीकृत, अस्वीकृत, वापस और अंतिम अभ्यर्थियों की गिनती भरते हैं। हर पंक्ति के आगे आपत्ति/टिप्पणी और RO का निर्णय/हस्ताक्षर का खाना है।

स्रोत: RO Nomination Scrutiny Register (ZP/PS), पृ. 1, 2, 3, 4

C18संवीक्षा के बाद स्वीकृत अभ्यर्थियों की सूची किस प्ररूप में, कहाँ लगती है?
संवीक्षा के दिन ही सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए वैध रूप से नामांकित उम्मीदवारों की सूची निर्धारित प्रारूप में बनाई जाती है और निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकाई जाती है (SEC संख्या 129 दिनांक 6.1.95 का हवाला) (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सदस्यों के चुनाव में नियम 29(1) के मुताबिक़ RO हर वार्ड के लिए प्ररूप V में उन अभ्यर्थियों की सूची बनवाता है जिनके पर्चे स्वीकार हुए और वापस नहीं लिए गए। 57 प्ररूप IV-C (वैध रूप से नामांकित अभ्यर्थियों की सूची) प्रधान/उप-प्रधान/प्रमुख/उप-प्रमुख के चुनाव का प्ररूप है। 70

3नाम वापसी, प्रतीक और मतपत्र 14 सवाल

नाम वापसी, प्रतीक, अंतिम सूची, मतपत्र 14

D1नाम वापसी किस नियम में, किस प्ररूप में, कब तक (दिन, समय), कौन दे सकता है (स्वयं/प्रस्तावक/अभिकर्ता)? एक बार वापस लेने के बाद?
नाम वापसी नियम 28 में है, जो नियम 58(5) के ज़रिए वोटिंग मशीन से होने वाले ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के चुनाव पर लागू होता है (एक से ज़्यादा सीट पर खड़े अभ्यर्थी के लिए धारा 19-B अलग से है)। 57337 अभ्यर्थी अपने हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान वाला लिखित नोटिस दो प्रतियों में ख़ुद आकर RO को देता है; प्रस्तावक, निर्वाचन अभिकर्ता या कोई और नहीं दे सकता। 5769 इसके लिए नियमों में कोई प्ररूप-संख्या तय नहीं है, सादा लिखित नोटिस काफ़ी है। 6957 पंच-सरपंच के लिए आयोग ने सुविधा का मॉडल फ़ॉर्म परिशिष्ट-21 बनाया है। 69 नाम वापसी का आख़िरी दिन, अपराह्न 3 बजे तक: चरण 1 में 15.10.2026, चरण 2 में 19.10.2026, चरण 3 में 26.10.2026 और चरण 4 में 06.11.2026। 12 पंचायत समिति का चरण प्रेस नोट (03.10.2026) से और ज़िला परिषद का चरण आयोग के पत्र 9867 (03.10.2026) से देखें; पत्र 10090 (06.10.2026) ने ज़िला परिषद जैसलमेर को चौथे चरण में (नाम वापसी 06.11.2026) और ज़िला परिषद सलूम्बर को तीसरे चरण में (नाम वापसी 26.10.2026) कर दिया है, और जैसलमेर, बीकानेर व सलूम्बर की पंचायत समितियों के चरण भी बदले हैं। 1615 उस दिन और घंटे के बाद कोई नोटिस नहीं लिया जाएगा, और जिसने एक बार नाम वापस ले लिया वह नोटिस रद्द नहीं करा सकता। 57 एक अभ्यर्थी ने एक से ज़्यादा नामनिर्देशन पत्र दिए हों तो वापसी का एक ही नोटिस सब वापस मान लेता है। 69 नोटिस मिलने पर RO उसकी एक प्रति सहजदृश्य स्थान पर लगवाएगा। 57 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ RO नोटिस देने वाले की पहचान से ख़ुद संतुष्ट होगा और रसीद उसी समय देगा।

D2नाम वापसी की सूचना RO कैसे प्रकाशित करता है?
नाम वापसी की सूचना की एक प्रति सहजदृश्य स्थान पर प्रदर्शित की जाती है (नियम 28(4))। 57 उसके बाद नियम 29(1) के अनुसार नियम 23(1) में तय समय, यानी नाम वापसी का समय (नियम 28(1)), बीतते ही RO प्रपत्र 5 में उन अभ्यर्थियों की सूची बनवाता है जिनके नामांकन स्वीकार हुए और वापस नहीं लिए गए। वार्ड में एक ही अभ्यर्थी हो तो नियम 29(2) के अनुसार RO उसे निर्वाचित घोषित करता है; एक से ज़्यादा हों तो नियम 29(3) के अनुसार हर अभ्यर्थी को चिह्न देता है (D6 देखें)। 57 चिह्न आवंटन भी उसी दिन होता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

D3प्रतीक आवंटन: आरक्षित प्रतीक (मान्यता प्राप्त दल), मुक्त प्रतीक की सूची (पत्र 5083 दिनांक 24.12.2025, अधिसूचना 4196)। कौन-सा प्रतीक किस क्रम में?
अधिसूचना 4196 (17.10.2025) जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के लिए प्रतीकों की सूची और आवंटन का आदेश है। 7172 आयोग के पत्र 5083 (24.12.2025) से आरक्षित और मुक्त चुनाव प्रतीकों के नमूनों की सॉफ्टकॉपी मतपत्र छापने के लिए भेजी गई है। 72 सारणी-1 के आरक्षित प्रतीक: आम आदमी पार्टी झाड़ू; बहुजन समाज पार्टी हाथी; भारतीय जनता पार्टी कमल; कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) हथौड़ा, हँसिया और सितारा; इंडियन नेशनल कॉंग्रेस हाथ; नेशनल पीपुल्स पार्टी किताब; राज्यीय दल (राजस्थान के लिए): राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बोतल, भारत आदिवासी पार्टी हॉकी और बॉल। 73 जिसे किसी मान्यता प्राप्त दल ने खड़ा नहीं किया (निर्दलीय या किसी और दल का), उसे पंचायत समिति में सारणी-2 के 20 मुक्त प्रतीकों में से और जिला परिषद में सारणी-3 के 20 मुक्त प्रतीकों में से, अपनी पसंद का (पहला, दूसरा, तीसरा) क्रम देखकर; बाक़ी बचे को सूची में सबसे ऊपर वाला जो किसी को न मिला हो, हिंदी वर्णक्रम की सूची के अनुसार। 34 सारणी-3 (ZP) के 20: लिफाफा, टेलीविजन, फव्वारा, टेलीफोन, फूलगोभी, गैस का चूल्हा, जंजीर, टॉफियाँ, चक्की, साइकिल पम्प, अंगूर, आरी, हरी मिर्च, स्कूल का बस्ता, हाथ गाड़ी, कैंची, हारमोनियम, सिलाई की मशीन, आइस क्रीम, जूता। 7475 सारणी-2 (PS) के 20: अलमारी, चप्पलें, सेब, कोट, गुब्बारा, चारपाई, चूड़ियाँ, मिक्सी, मोतियों का हार, पेन्सिल डिब्बा, बेन्च, तकिया, आदमी व पाल युक्त नौका, बिजली का खंभा, बक्सा, बाँसुरी, ईंटें, फ्राक, बाल्टी, रेफ्रिजरेटर। 74

D4दो निर्दलीय एक ही मुक्त प्रतीक माँगें तो RO कैसे तय करे?
अधिसूचना 4196 के अनुसार यदि एक ही मुक्त प्रतीक को एक से अधिक अभ्यर्थियों ने अपनी पहली पसंद पर रखा है तो फ़ैसला लॉट (Lot) से होता है; जिसके पक्ष में लॉट निकले उसे वह प्रतीक मिलता है। 34 लॉट की कार्यवाही उपस्थित अभ्यर्थियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं के सामने होती है। 34 फिर बाक़ी अभ्यर्थियों के लिए दूसरी, फिर तीसरी पसंद पर वही तरीक़ा। 73 नियम 58(6)(e)(ii) भी लॉट (कम्प्यूटरीकृत यादृच्छिक ड्रा सहित) बताता है। 38

D5दल ने प्ररूप ख समय पर नहीं दिया तो अभ्यर्थी को प्रतीक कैसे मिलेगा?
आदेश (अधिसूचना 4196, पैरा 6) की चार शर्तें हैं: (क) अभ्यर्थी ने नाम निर्देशन पत्र में घोषणा की हो; (ख) दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष/मुखिया या उनके प्राधिकृत व्यक्ति ने प्ररूप ख में लिखित सूचना नामांकन की अंतिम तारीख को अपराह्न 3 बजे तक RO को दे दी हो; (ग) प्राधिकृत व्यक्ति ने सूचना दी हो तो उसके नमूना हस्ताक्षर प्ररूप क में उसी समय तक RO के पास हों; (घ) प्ररूप क और ख केवल स्याही से हस्ताक्षरित हों। 33 अनुलिपि (facsimile) या रबड़ की मुहर वाले हस्ताक्षर नहीं माने जाएँगे, और फ़ैक्स, ई-मेल या व्हाट्सऐप से भेजा प्ररूप स्वीकार नहीं होगा। 52 राज्य इकाई के प्रमुख ने प्ररूप ख पर खुद हस्ताक्षर किए हों तो प्ररूप क की ज़रूरत नहीं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। कोई शर्त पूरी न हो, या सूचना अपराह्न 3 बजे तक RO के पास न पहुँची हो, तो अभ्यर्थी दल द्वारा खड़ा किया हुआ नहीं माना जाएगा और उसे दल का आरक्षित चिन्ह नहीं मिलेगा। 33 SEC या DEO को प्ररूप देना RO को देना नहीं माना जाता (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। ऐसा अभ्यर्थी, जिसे किसी दल ने खड़ा नहीं किया, मुक्त प्रतीकों में से अपनी पसंद के क्रम से प्रतीक पाता है। 34

D6लड़ने वालों की अंतिम सूची (प्रपत्र 5): नामों का क्रम (दल/निर्दलीय, वर्णानुक्रम किस लिपि में), समान नाम वाले अभ्यर्थियों की पहचान कैसे?
नियम 29(1) के अनुसार प्रपत्र 5 की सूची में वे उम्मीदवार आते हैं जिनके नामांकन स्वीकार हुए और वापस नहीं लिए गए, और RO यह सूची नियम 23(1) में तय समय, यानी नाम वापसी का समय (नियम 28(1)), बीतते ही बनवाता है। 57 प्रपत्र 5 में हर उम्मीदवार को आवंटित चिह्न का भी स्तंभ होता है। 76 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ यह सूची चिन्ह आवंटन के तुरन्त बाद, उसी दिन बनती है। दो श्रेणियाँ: (i) मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के उम्मीदवार, (ii) अन्य; हर श्रेणी में हिंदी वर्णमाला क्रम। 372 पंचायत समिति/ज़िला परिषद सदस्य के उम्मीदवार का दल (अगर हो) प्रपत्र 5 में एक अलग स्तंभ में लिखा जाता है, जो स्तंभ 2 (उम्मीदवार की क्रम संख्या, नाम और पता) और स्तंभ 3 (आवंटित चिह्न) के बीच है। 76 एक ही नाम हों तो पिता/पति का नाम जोड़कर या RO जैसा उचित समझे, अलग पहचान दी जाती है। 57 मतपत्र पर नाम इसी क्रम में, पर श्रेणियों के शीर्षक नहीं। 5772 भाषा: आयोग के पत्र 1100 (28.01.2026) के मुताबिक़ चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची हिंदी में, देवनागरी लिपि में होगी, और नियम 29(3)(ii) भी नाम हिंदी में वर्णक्रम से छपवाने को कहता है। 7257

D7अंतिम सूची की प्रतियाँ किसे भेजनी हैं, कब तक?
प्रपत्र 5 की सूची की प्रति हर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को दी जाती है। 57 प्रति उम्मीदवार की जगह उसके चुनाव प्रतिनिधि को भी दी जा सकती है, और साथ में उसे आवंटित चिन्ह की नमूना प्रति दी जाती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सूची की हिंदी प्रतियाँ (हस्तलिखित और टाइप की हुई) संबंधित सरकारी प्रेस, "चुनाव अधिकारी/विधायक (डीईओ)" और "चुनाव सचिव" को (प्रश्नावली के यही शब्द हैं) "बिना किसी देरी के" भेजनी हैं (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। आयोग के पत्र 1100 (28.01.2026) के मुताबिक़ चिह्न आवंटन की तारीख़ को ही ज़िला निर्वाचन अधिकारी और RO के प्रतिनिधि चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची और उन्हें दिए गए चिह्न लेकर उस छापाख़ाने पहुँच जाने चाहिए जहाँ मतपत्र छपते हैं। 77 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ हस्ताक्षरित सूची मतपत्र छापने वाले OIC को दी जाती है।

D8केवल एक अभ्यर्थी बचा तो (निर्विरोध): क्या, कब, किस प्ररूप में घोषित?
यदि किसी वार्ड/निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक अभ्यर्थी है और उसका नामांकन स्वीकृत है तो RO उसे विधिवत निर्वाचित घोषित करता है (नियम 29(2))। 57 निर्विरोध चुनाव का परिणाम प्रपत्र VII में दर्ज होता है: इसके कॉलम 2 में नियम 29(2) के तहत निर्विरोध घोषित अभ्यर्थी का नाम लिखा जाता है, और ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए साथ में राजनीतिक दल का नाम भी। 78 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ दल का नाम (यदि हो) कोष्ठक में लिखा जाता है। हस्ताक्षरित घोषणा की प्रतियाँ चार जगह जाती हैं: (i) सचिव, (ii) पंचायती राज विभाग, (iii) जिला परिषद/पंचायत समिति, (iv) डीईओ (पंचायत) (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। घोषणा की तिथि ही परिणाम की तिथि (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। निर्विरोध में भी प्रपत्र 5 की सूची बनती है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

D9कोई अभ्यर्थी नहीं बचा या सब अस्वीकार हो गए तो?
नियम 29(1) के अनुसार RO हर वार्ड (पंचायत समिति और जिला परिषद में हर निर्वाचन क्षेत्र) के लिए प्ररूप 5 में उन अभ्यर्थियों की सूची बनाता है जिनके नामांकन स्वीकार हुए और वापस नहीं लिए गए। 57 एक ही अभ्यर्थी बचे तो RO उसे निर्वाचित घोषित करता है (नियम 29(2)); एक से ज़्यादा बचें तो नियम 29(3) के अनुसार RO हर अभ्यर्थी को राज्य निर्वाचन आयोग के तय चिह्नों में से एक चिह्न देता है, सब अभ्यर्थियों के नाम उनके चिह्न के साथ हिंदी में वर्णमाला के क्रम में वार्ड (निर्वाचन क्षेत्र) में किसी ऐसी जगह लगवाता है जहाँ सबको दिखे और उस सूची की प्रति हर अभ्यर्थी को देता है, तय तारीख़ और समय पर मतदान कराने का निर्देश देता है, और मतदान की बाकी ज़रूरी व्यवस्था करता है। 57 पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में भी यही नियम लागू होते हैं (नियम 58(5))। 3 नियम 27(4) के अनुसार RO हर नामांकन पत्र पर उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का फ़ैसला लिखता है, और अस्वीकार करने पर उसकी वजह भी संक्षेप में लिखता है। 24 आयोग के आदेश 745 (20.01.2026) के अनुसार ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य चुनाव के नामांकन पत्रों की प्रमाणित प्रति आवेदक को उसी दर पर शुल्क देने पर मिलती है जो राजस्व न्यायालय नियमावली में किसी आदेश की प्रति के लिए तय है, और आवेदन में बताना होता है कि उन दस्तावेज़ों में आवेदक का सीधा हित क्या है। 58 प्रति सरकारी काम के लिए चाहिए तो कोई फ़ीस नहीं लगती। 59

D10अभ्यर्थी की मृत्यु: नामांकन के बाद, नाम वापसी के बाद, मतदान से पहले: हर स्थिति में क्या?
नियम 73 के अनुसार मतदान शुरू होने से पहले किसी चुनाव लड़ रहे अभ्यर्थी की मृत्यु हो जाए तो भी मतदान नहीं रोका जाता। 79 पर अगर उसकी मृत्यु से उस पद के लिए एक ही अभ्यर्थी बचे तो RO मृत्यु की बात से संतुष्ट होकर मतदान रोक देता है, जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के ज़रिए आयोग को रिपोर्ट करता है, और चुनाव की सारी कार्यवाही नए चुनाव की तरह फिर से शुरू होती है। 79 तब जो अभ्यर्थी चुनाव लड़ रहा था उसे दोबारा नामांकन नहीं करना पड़ता, और जिसने पहले नाम वापस लिया था वह फिर से नामांकन कर सकता है। 79

D11मतपत्र का प्रारूप (आदेश 28 दिनांक 01.01.2026, सा.आ. 140/2026): भाषा, क्रम, रंग, फोटो, NOTA?
आयोग के आदेश 28 (01.01.2026, सा.आ. 140/2026) में मतपत्र का प्रारूप यह है। 80 मतपत्र की चौड़ाई 4 इंच, ऊपर 2.5 से.मी. की जगह, जिसमें काली सीमा रेखा, बाईं ओर मतपत्र का क्रमांक और दाईं ओर पंचायत समिति या जिला परिषद का नाम, निर्वाचन क्षेत्र की संख्या और चुनाव का साल लिखा जाता है। 80 सब विशिष्टियाँ हिंदी में देवनागरी लिपि में होती हैं। 81 हर अभ्यर्थी और NOTA का अपना पैनल (2.5 से.मी. ऊँचा) होता है, पैनलों के बीच छायादार पट्टी रहती है; नाम और NOTA बाईं ओर, प्रतीक दाईं ओर, और प्रतीक 3.5 x 2.0 से.मी. (चौड़ाई x ऊँचाई) से बड़ा नहीं होता। 82 नाम हिंदी वर्णानुक्रम में एक के नीचे एक आते हैं और अंतिम अभ्यर्थी के बाद NOTA। 83 NOTA सहित 9 तक अभ्यर्थी हों तो एक स्तम्भ, 9 से अधिक पर 18 तक दो स्तम्भ, 18 से अधिक पर तीन स्तम्भ, और आगे इसी तरह। 81 पंचायत समिति सदस्य का मतपत्र नीले कागज़ पर, जिला परिषद सदस्य का पीले कागज़ पर। 83 अभ्यर्थी की फ़ोटो का कोई प्रावधान आदेश में नहीं है: आदेश के पाठ में फ़ोटो का ज़िक्र नहीं और उसके साथ लगे नमूना मतपत्र में सिर्फ़ नाम और प्रतीक हैं। 84

D12EVM के लिए मतपत्र (बैलेट पेपर) और निविदत्त मतपत्र कौन, कितने, कहाँ छपवाता है (पत्र 1100 दिनांक 28.01.2026)?
आयोग के पत्र 1100 दिनांक 28.01.2026 के अनुसार (मतपत्र छपाई के पहले निर्देश पत्र 652 दिनांक 20.01.2026 में हैं) EVM की मतदान यूनिट पर दिखाने वाले मतपत्र और निविदत्त (टेंडर) मतपत्र दोनों एक ही डिज़ाइन में छपते हैं, निविदत्त की पीठ पर "निविदत्त मतपत्र" की मुहर लगती है। 85 छपाई निजी मुद्रणालयों में कराई जाएगी, काग़ज़ राजकीय मुद्रणालय से आएगा, और पत्र (जो DEO और RO दोनों को है) कहता है कि "आपके प्रतिनिधि" अभ्यर्थियों की सूची (प्ररूप-5) और प्रतीक लेकर प्रतीक आवंटन के दिन ही मुद्रणालय पहुँचेंगे; 86 प्रूफ़ जाँचने के बाद RO उस पर हस्ताक्षर करता है, हस्ताक्षर वाले प्रूफ़ की प्रति अपने रिकॉर्ड में रखता है, और ज़िला निर्वाचन अधिकारी को यह प्रमाण पत्र भेजता है कि उसने प्रूफ़ देख लिया है और यह चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची के अनुसार सही है। 87 आयोग के पत्र 652 (20.01.2026) के अनुसार मतपत्रों की छपाई ज़िला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश में ज़िला स्तर पर निजी मुद्रणालयों से होती है, और मतपत्रों की पूरी सुरक्षा, गोपनीयता, शुद्धता और समय पर छपाई की पूरी ज़िम्मेदारी ज़िला निर्वाचन अधिकारी की है। 88 संख्या: हर मतदान यूनिट के लिए एक मतपत्र (रिज़र्व मशीनें मिलाकर), हर मतदान केंद्र को निविदत्त के लिए 20 का बंडल, और इन दोनों की कुल संख्या पर लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त; पत्र के अनुसार इस तरह हर केंद्र के लिए "सामान्यतः 25 मतपत्रों की आवश्यकता होगी"। 89 छपाई प्रतीक आवंटन के दिन से शुरू होकर 3 दिन के भीतर पूरी करनी है, और छपे मतपत्र कोषागार में सुरक्षित रखे जाएँगे। 77

D13मतपत्र का अधिप्रमाणन (आदेश 1031 दिनांक 27.01.2026, सा.आ. 152/2026): क्या, कौन, कैसे?
आदेश 1031 दिनांक 27.01.2026 (सां.आ. 152/2026) नियम 39(1) के तहत कहता है कि पंच, सरपंच और PS/ZP सदस्यों के चुनाव में हर मतपत्र निर्वाचक को जारी करने से पहले अनुप्रमाणित होगा। 90 तरीका: मतपत्र की पीठ पर रबर की मुहर, जिस पर एक वर्गाकार आयतन के अंदर हिंदी में "पं.रा.सं." लिखा हो, लगेगी, और मतदान अधिकारी अपने पूरे हस्ताक्षर करके अनुप्रमाणित करेगा। 90 गिनती में जो मतपत्र इस मुहर और मतदान अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना मिले, उन्हें RO नामंजूर कर देगा; पर अगर RO को संतोष हो कि यह चूक मतदान अधिकारी या सहायक मतदान अधिकारी की भूल या विफलता से हुई, तो ऐसे मतपत्र नामंजूर नहीं होंगे। 90 यह आदेश पंच-सरपंच चुनाव के RO और मतदान दलों को प्रशिक्षण में बताया जाना है। 90 आदेश 465 (27.10.1994) और 243 (12.01.1995) को अधिक्रमित करता है। 90

D14EVM में कितने अभ्यर्थी तक एक BU; ज़्यादा हों तो? (पत्र 1024 दिनांक 27.01.2026)
पत्र 1024 (27.01.2026) के अनुसार BEL की M3A/MK-5 मशीन में नोटा सहित 16 अभ्यर्थी तक एक कन्ट्रोल यूनिट और एक बैलेट यूनिट; 16 से अधिक पर ज़रूरत के अनुसार अतिरिक्त बैलेट यूनिट। 91 ECIL की MPSV/MPMV मशीन में जिला परिषद और पंचायत समिति का एक साथ चुनाव हो और नोटा सहित अभ्यर्थी 15 हों तो एक मतदान केंद्र पर दोनों चुनावों के लिए एक कन्ट्रोल यूनिट और दो बैलेट यूनिट; 15 से अधिक पर अतिरिक्त बैलेट यूनिट। 91 15 प्रतिशत मशीनें आरक्षित और 5 प्रतिशत प्रशिक्षण के लिए अलग रखी जाती हैं। 91

4प्रचार, ख़र्च और आचार संहिता 4 सवाल

चुनाव ख़र्च और आचार संहिता 4

E1ख़र्च की अधिकतम सीमा: ZP सदस्य, PS सदस्य (अधिसूचना 5052 दिनांक 23.12.2025, धारा 22क)?
अधिसूचना 5052 (23.12.2025, सा.आ. 138/2025, धारा 22क) के अनुसार अधिकतम चुनाव खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य के लिए 3,00,000 रुपये; पंचायत समिति सदस्य के लिए 1,50,000 रुपये; सरपंच के लिए 1,00,000 रुपये (पृष्ठ की छवि से मिलान किया)। 92

E2ख़र्च का लेखा कौन, किस प्ररूप/रजिस्टर में, कब तक RO/DEO को देना है? न देने पर?
चुनाव खर्च का लेखा अभ्यर्थी आयोग के प्ररूप "क" में परिणाम की घोषणा के 15 दिन के भीतर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) (कलक्टर) या उसके प्राधिकृत अधिकारी को देता है; यह RO को नहीं, DEO या उसके प्राधिकृत अधिकारी को देना है। 92 DEO या प्राधिकृत अधिकारी मिला लेखा अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर तीन दिन तक लगाएगा, और उसके अगले सात दिन में कोई भी व्यक्ति प्ररूप "क" में दिखाए खर्चे पर आपत्ति दे सकता है। 92 प्ररूप "क" का शीर्षक है "अभ्यर्थी द्वारा किए गए चुनाव खर्च का विवरण"; उसमें वार्ड/निर्वाचन क्षेत्र संख्या, अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम, पता और वाहन आदि खर्च की मदें होती हैं। 93 खर्च की अधिकतम सीमा आदेश में जिला परिषद सदस्य के लिए 3,00,000 रुपये और पंचायत समिति सदस्य के लिए 1,50,000 रुपये है। 92

E3वाहन, लाउडस्पीकर, पोस्टर/बैनर, सभा की अनुमति: कौन देता है, क्या शर्तें?
अधिसूचना 5052 के अनुसार: बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर और किसी भी पशुचालित वाहन (तांगा, ऊँटगाड़ी, बैलगाड़ी) का प्रचार या चुनाव-संबंधी यात्रा में उपयोग पूर्णतः निषिद्ध। 53 अन्य वाहन (जीप, कार, तिपहिया टैम्पो आदि) का उपयोग जिला परिषद सदस्य के चुनाव में अधिकतम तीन और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में अधिकतम दो, उपयोग से कम से कम 24 घंटे पहले वाहन संख्या, प्रकार और चालक का नाम-पता लिखित में RO को देना होगा; RO लिखित अनुमति प्ररूप "ख" में देगा जो वाहन पर लगाई जाएगी। 94 मतदान दिवस पर वाहन के लिए RO से लिखित अनुमति; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 133 सपठित 123(5) का उल्लंघन हो तो RO/उपखण्ड अधिकारी यह अनुमति बिना किसी नोटिस के निरस्त कर देगा। 53 3 से अधिक वाहनों की रैली/काफिला नहीं, और मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले ऐसी रैली पूर्णतः निषिद्ध। 53 लाउडस्पीकर: अभ्यर्थी के चुनाव कार्यालय पर पूर्ण प्रतिबंध; मतदान समाप्ति से पहले 48 घंटे पूर्ण प्रतिबंध; 53 अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थल से 100 मीटर में पूर्ण प्रतिबंध; प्रातः 6 से रात 10 बजे तक उपयोग केवल क्षेत्राधिकार वाले जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट या अन्य सक्षम प्राधिकारी की प्ररूप "ग" में लिखित अनुमति के बाद (आवेदन में कब, कैसे और कहाँ उपयोग होगा, लिखना होगा); यह अनुमति RO नहीं देता। 92 पोस्टर/बैनर: पोस्टर छपवाते समय लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127-क; सार्वजनिक स्थल पर लगाने के लिए सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति; 92 निजी संपत्ति पर, जहाँ स्थानीय विधि में कोई प्रावधान न हो, केवल आसानी से हटने वाली सामग्री (झंडियाँ, बैनर आदि) और वह भी मालिक की लिखित अनुमति लेकर; मतदान बूथ के भवन से 200 मीटर में नहीं; 92 मतदान के दिन बूथ पर एक बैनर, 2x5 फीट से बड़ा नहीं, उस पर नेता/अभ्यर्थी का चित्र, चुनाव चिह्न या नारा नहीं। 92 आमसभा/जुलूस/रैली के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति। 92

E4आचार संहिता का उल्लंघन: RO क्या करे (पत्र 8703 दिनांक 14.09.2026)?
आयोग का पत्र 8703 (14.09.2026) आदर्श आचरण संहिता की पालना के बारे में है: संहिता चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में प्रभावी होकर निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक रहती है। 95 DEO को आयोग को निर्धारित प्रपत्रों में रिपोर्ट भेजनी है: प्रपत्र 01 सरकारी संपत्ति को विरूपित करना (24 घंटे) और सरकारी वाहनों का दुरुपयोग, शिकायतों की निगरानी (24 घंटे); प्रपत्र 02 सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करना और सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग (48 घंटे); प्रपत्र 03 निजी संपत्ति का विरूपण (72 घंटे); प्रपत्र 04 विकास/निर्माण संबंधी गतिविधियाँ (72 घंटे)। 95 वाहन के मामले में अधिसूचना 5052 कहती है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 133 सपठित 123(5) का उल्लंघन हो तो RO/उपखण्ड अधिकारी दी हुई अनुमति बिना किसी नोटिस के निरस्त कर देगा। 53 वाहन/लाउडस्पीकर उल्लंघन की शिकायत DEO या उसके अधिकारी को (जो तहसीलदार से नीचे का न हो) की जाती है और जाँच के बाद मामला उपखण्ड अधिकारी को जाता है (E1-E3 के आदेश 5052 के अनुसार)। 96

5मतदान 24 सवाल

मतदान से जुड़े RO के काम 9

F1मतदान अभिकर्ता और मतगणना अभिकर्ता: कौन नियुक्त कर सकता है, किस प्ररूप में, कितने, कब तक?
ज़िला परिषद/पंचायत समिति सदस्य का अभ्यर्थी एक निर्वाचन अभिकर्ता रख सकता है: प्ररूप-8 में, नामनिर्देशन पत्र देते समय या चुनाव से पहले कभी भी (नियम 68); जो व्यक्ति इस समय अधिनियम के तहत चुने जाने या वोट देने से अयोग्य है वह निर्वाचन अभिकर्ता नहीं बन सकता। 97 मतदान अभिकर्ता: अभ्यर्थी या उसका निर्वाचन अभिकर्ता हर मतदान केन्द्र पर एक मतदान अभिकर्ता प्ररूप-9 में, दो प्रतियों में, अपने हस्ताक्षर से नियुक्त कर सकता है; मतदान के दिन वह नियुक्ति पत्र मतदान अधिकारी (PO) के सामने पेश करके घोषणा पर हस्ताक्षर करता है, जब तक यह न करे उसे केन्द्र पर कोई काम नहीं करने दिया जाएगा। 97 नियुक्ति रद्द करनी हो तो अभ्यर्थी या निर्वाचन अभिकर्ता मतदान शुरू होने से पहले कभी भी हस्ताक्षर वाला प्रतिसंहरण पत्र उस केन्द्र के मतदान अधिकारी को देगा, साथ में नए अभिकर्ता का प्ररूप-9 (आयोग का पत्र 9413, 25.09.2026); 98 नियम 71(2) के अनुसार नियुक्ति मतदान शुरू होने से कम से कम सात दिन पहले रद्द हो तो यह पत्र RO को दिया जाता है, नहीं तो RO या उस केन्द्र के मतदान अधिकारी को। 99 मतदान अभिकर्ता के पास फोटो पहचान पत्र (EPIC) या आयोग का बताया वैकल्पिक दस्तावेज़ होना चाहिए; मंत्री, सांसद, विधायक, सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति, आँगनवाड़ी कर्मचारी, उचित मूल्य दुकान के डीलर आदि उसी पत्र की सूची के अनुसार मतदान अभिकर्ता नहीं बन सकते। 100 मतगणना (गणन) अभिकर्ता: प्ररूप-10 में, नियम 70(2) के अनुसार RO की लगाई गिनती की टेबलों जितने, एक RO की टेबल के लिए, और एक रिलीफ अभिकर्ता; पत्र मतगणना की तारीख़ पर RO या उसके प्राधिकृत अधिकारी के सामने पेश करके घोषणा पर हस्ताक्षर होंगे। 99 आयोग का पत्र 1299 (03.02.2026) के अनुसार यह पत्र दो फोटो के साथ मतगणना से कम से कम दो दिन पहले RO को देना है और घोषणा पर हस्ताक्षर गिनती शुरू होने से कम से कम आधा घंटा पहले होने हैं। 101

F2डाक मतपत्र (आदेश 1134 दिनांक 29.01.2026, सा.आ. 153/2026): कौन पात्र, आवेदन कैसे, RO की भूमिका, कब तक लौटाना?
आदेश 1134 दिनांक 29.01.2026 (सां.आ. 153/2026) के अनुसार डाक मतपत्र उन्हें मिलेगा जो चुनाव ड्यूटी पर हैं: मतदान अभिकर्ता, मतदान अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी या कोई और लोक सेवक जो उस पंचायती राज संस्था में वोटर है और ड्यूटी की वजह से अपने केंद्र पर वोट नहीं डाल सकता; अधिग्रहित वाहनों के चालक-खलासी इसमें नहीं आते। 102 ऐसा वोटर मतदान की तारीख़ से कम से कम 7 दिन पहले (या RO जितनी कम अवधि की अनुमति दे) प्ररूप-1 में लिखित सूचना उस RO को देता है; ZP और PS के लिए सूचना अलग-अलग भेजी जाती है। 102 RO संतुष्ट होने पर मतपत्र डाक से भेजता है या हाथ में देता है, प्ररूप-2 के रजिस्टर में प्रविष्टि करता है, मतपत्र की पीठ पर "डाक मतपत्र" की रबर मुहर लगाकर अपने हस्ताक्षर करता है, और साथ में प्ररूप-3 की घोषणा, छोटा लिफाफा 'क' (प्ररूप-4), बड़ा लिफाफा 'ख' (प्ररूप-5) और प्ररूप-6 के अनुदेश देता है। 103 हो सके तो पहले प्रशिक्षण में ही आवेदन पत्र बाँटे और वहीं डाक मतपत्र हाथों-हाथ दिया जाए। 104 वोटर घोषणा पर राजपत्रित अधिकारी, मतदान अधिकारी या RO से हस्ताक्षर प्रमाणित कराकर लिफाफा 'ख' में लौटाता है; वापसी मतगणना शुरू होने के लिए नियत समय से पहले पहुँचनी चाहिए, उसके बाद आया लिफाफा 'ख' खोला नहीं जाएगा और उसके वोट गिने नहीं जाएँगे। 105

F3मॉक पोल का प्रमाण पत्र (पत्र 1161 दिनांक 30.01.2026): RO को क्या देखना है?
पत्र 1161 दिनांक 30.01.2026 के अनुसार जहाँ EVM से चुनाव है, वहाँ मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल कराना अनिवार्य है, और यह काम मतदान अधिकारी (PO) करता है, RO नहीं: मतदान अभिकर्ताओं/मतदान दल के सदस्यों के सामने मॉक पोल करके वह परिशिष्ट-19 में मॉक पोल प्रमाण पत्र बनाता है। 106 प्रमाण पत्र में मॉक पोल में भाग लेने वाले का नाम, उसकी मतदाता पर्ची, ZP/सरपंच और PS/पंच के किस क्रम संख्या के अभ्यर्थी को वोट दिया गया, और उसके हस्ताक्षर दर्ज होते हैं; हर अभ्यर्थी को कम से कम एक वोट दिया जाता है। 106 फिर Result बटन दबाकर मिले नतीजे का प्रमाण पत्र से मिलान होता है, कोई अंतर न हो यह सुनिश्चित करके EVM के रिकॉर्ड वोट Clear (डिलीट) किए जाते हैं। 107 RO के लिए पत्र में बस यह है कि अगर नतीजों में कोई भिन्नता निकले तो उसे तुरंत सूचित किया जाए और उसके निर्देश पर कार्रवाई हो; 108 और प्रमाण पत्र मतदान अधिकारी की घोषणा के साथ ZP के लिए लिफाफा PE-56 और PS के लिए लिफाफा PE-55 में आता है। 108109

F4अमिट स्याही किस हाथ की किस अंगुली पर (ZP-PS चुनाव में)?
आयोग की मार्गदर्शिका के अनुसार यदि पंच-सरपंच और पंचायत समिति/जिला परिषद सदस्य के चुनाव अलग-अलग चरण में हों: प्रथम चरण (पहले होने वाले मतदान) में बाएँ हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही; द्वितीय चरण के चुनाव में मतदाता के दाएँ हाथ की तर्जनी पर; पुनर्मतदान हो तो प्रथम चरण वालों के लिए बाएँ हाथ की मध्यमा पर और द्वितीय चरण के पुनर्मतदान में दाएँ हाथ की मध्यमा पर। 110 आयोग के पत्र 10090 (06.10.2026) की समय-सारणी में हर चरण में जिला परिषद-पंचायत समिति का मतदान पहले है (22.10, 28.10 और 03.11.2026) और पंच-सरपंच का मतदान उसके दो दिन बाद (24.10, 30.10 और 05.11.2026)। 16 मार्गदर्शिका के "प्रथम/द्वितीय चरण" को इसी क्रम में पढ़ें तो जिला परिषद-पंचायत समिति के मतदान में बाएँ हाथ की तर्जनी और पंच-सरपंच के दिन दाएँ हाथ की तर्जनी पर स्याही लगती है; यह "चरण" जिले के पहले/दूसरे/तीसरे चरण वाला नहीं, एक ही चरण के भीतर पहले और दूसरे मतदान का है।

F5मतदाता की पहचान के दस्तावेज़ (आदेश 5310 दिनांक 30.07.2026): सूची।
पहचान के दस्तावेज़ों पर अभी आयोग का आदेश क्रमांक एफ. 1(2)(1)नपा-पंचा/सा.आ./रानिआ/14/5310, दिनांक 30.07.2026 लागू है। 111 इसने पहले के आदेश 559 दिनांक 07.02.2019 और आदेश 603 दिनांक 19.01.2026 को अधिक्रमित कर दिया है, यानी अब वे लागू नहीं हैं। 111 वोट डालने के लिए मतदाता को अपनी पहचान के लिए भारत निर्वाचन आयोग का निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (EPIC) दिखाना होगा। 111 अगर वह EPIC न दिखा सके, तो उसे इन 11 फोटोयुक्त दस्तावेज़ों में से कोई एक मूल दस्तावेज़ दिखाना होगा, जो चुनाव की घोषणा से पहले जारी हुआ हो: आधार कार्ड; विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) या मनरेगा कार्ड; बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक; श्रम मंत्रालय की योजना में जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत हैल्थ कार्ड; ड्राइविंग लाइसेंस; पैन कार्ड; भारतीय पासपोर्ट; फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज़; केन्द्र या राज्य सरकार, लोक उपक्रम या पब्लिक लिमिटेड कंपनी का अपने कर्मचारियों को दिया फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र; सांसदों और विधानसभा सदस्यों को जारी सरकारी पहचान पत्र; और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार का यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड। 111112 किसी दस्तावेज़ पर उसकी मियाद लिखी हो, तो वह उसी अवधि तक मान्य है। 112 परिवार के मुखिया के पास EPIC या इनमें से कोई दस्तावेज़ हो, तो केवल मुखिया ही अपने परिवार के बाकी सदस्यों की पहचान करा सकता है, बशर्ते सब सदस्य उसके साथ आएँ और मुखिया उनकी पहचान पक्की कर सके। 112 कोई मतदाता झूठे या जाली पहचान पत्र के सहारे, या किसी और मतदाता के नाम पर वोट डालने की कोशिश करे, तो उसके खिलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 में कार्रवाई की जाए; 112 धारा 174 में इसकी सज़ा एक साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों है। 113

F6मतदान केंद्र के पास मोबाइल (पत्र दिनांक 20.01.2026): नियम?
आयोग के पत्र (20.01.2026) के साथ का 2009 का पत्र: मतदान बूथ और उसके 100 मीटर के घेरे में कोई व्यक्ति मोबाइल/सैल्युलर फोन न ले जाएगा, न उपयोग करेगा; 114 ले जाए तो वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी अपने पास रख लेगा और उस क्षेत्र से बाहर जाने पर लौटाएगा। 114 मतगणना केंद्रों पर भी अभ्यर्थी, अभिकर्ता या किसी व्यक्ति द्वारा उपयोग निषिद्ध। 114 यह रोक अपने निर्वाचन कर्तव्यों के निर्वहन में लगे पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट, मतदान अधिकारी (PO) और सहायक मतदान अधिकारी (APO), RO/ARO, जिला निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षक पर लागू नहीं होती, पर वे अपना फोन मतदान के दौरान मतदान केंद्र/बूथ में साइलेंट मोड में रखेंगे। 114

F7मतदान स्थगन / पुनर्मतदान: कौन आदेश देता है, किन कारणों से?
पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के मशीन वाले चुनाव में नियम 48, 48-क, 48-ख और 48-ग लागू हैं (निर्वाचन नियम 58(5))। 3 मतदान के दिन स्थगन: रिटर्निंग अधिकारी (RO) लोक शांति भंग होने की संभावना जैसी आपात स्थिति में मतदान बंद करके उसे आगे के किसी दिन तक स्थगित घोषित कर सकता है; वह दिन जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या उसका नामित अधिकारी अधिसूचित करता है, और RO को स्थिति की रिपोर्ट तुरंत उन्हें करनी है (नियम 48)। 115 पुनर्मतदान का आदेश RO नहीं, राज्य निर्वाचन आयोग देता है। 116 अगर मतदान के दौरान कोई वोटिंग मशीन ख़राब हो जाए (mechanical failure), या मतदान केंद्र पर प्रक्रिया की ऐसी गलती या अनियमितता हो जो मतदान को दूषित कर सकती हो, तो RO तुरंत आयोग को रिपोर्ट करता है; तब आयोग उस केंद्र का मतदान शून्य घोषित करके नई तारीख और समय तय करता है, या अगर पुनर्मतदान से परिणाम बदलने वाला न हो (या गड़बड़ी गंभीर न हो) तो चुनाव आगे चलाने के निर्देश देता है (नियम 48-क)। 116 बूथ कैप्चरिंग हो और केंद्र का नतीजा तय न हो सके तो भी RO तुरंत आयोग को रिपोर्ट करता है; आयोग उस केंद्र का मतदान शून्य करके नया मतदान करा सकता है, या बहुत से केंद्र प्रभावित हों और परिणाम पर असर पड़ता हो तो उस क्षेत्र का चुनाव ही रद्द (countermand) कर सकता है (नियम 48-ख)। 116 आयोग ये अधिकार जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या अपने अधीनस्थ किसी अन्य अधिकारी को सौंप सकता है (नियम 48-ग); 117 नियम 48-क और 48-ख में रिपोर्ट आयोग को ही जाती है। 116 गिनती के समय का हाल: आयोग का पत्र 1299 (03.02.2026) कहता है कि अपरिहार्य कारण से RO नियम 49-क में गिनती पूरी होने से पहले उसे निलंबित या स्थगित कर सकता है; तब सारी मशीनें और काग़ज़ सील करके अलग कमरे में रखे जाते हैं, जिस पर अभ्यर्थी भी अपनी सील और ताले लगा सकते हैं। 118 गिनती रोकने और नए मतदान का निर्देश भी आयोग देता है (नियम 48-ख और 49-क), जब मशीन में तकनीकी ख़राबी आए, मतदान प्रक्रिया दूषित हो या बूथ कैप्चरिंग से केंद्र का परिणाम तय न हो सके। 118 पुनर्मतदान हो तो उसके वोटों की गिनती की तारीख, समय और स्थान RO तय करके हर अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता को लिखित में बताता है। 119

F8निविदत्त मतपत्र: कब, कैसे, कहाँ रखना?
पंचायती राज चुनावों में भी निविदत्त मतपत्र (Tender Vote) द्वारा वोट देने वाले व्यक्ति के मामले मतदान अधिकारी (PO) निपटाते हैं। 110 मार्गदर्शिका और नियम 44-क के अनुसार: जिस मतदाता के नाम पर कोई और पहले वोट डाल चुका हो, उसकी पहचान से संतुष्ट होने पर मतदान अधिकारी उसे निविदत्त मतपत्र से वोट देने देता है; 120 निविदत्त मतपत्र वही छपा मतपत्र है जो मतदान यूनिट पर प्रदर्शन के लिए लगता है, उसके पीछे मतदान अधिकारी "निविदत्त मतपत्र" का स्टाम्प लगाता है, स्टाम्प न हो तो हाथ से लिखता है, और नीचे अपने हस्ताक्षर करता है; 121122 प्रारूप-13 में मतदाता का नाम और क्रम संख्या दर्ज करके उसके हस्ताक्षर लिए जाते हैं; 123124 मतदाता स्याही लगी Arrow Cross Mark Seal से मतदान कक्ष में अपनी पसंद के प्रतीक पर निशान लगाकर मतपत्र मोड़कर मतदान अधिकारी को सौंपता है (नियम 44-क(3)(ङ)); 121120 और मिला हुआ निविदत्त मतपत्र तय निविदत्त मतपत्र लिफाफे में रखकर सील होता है। 123120 आयोग का पत्र 1100 (28.01.2026) छपाई पर है: निविदत्त मतपत्र उसी डिज़ाइन का होगा जो मतदान यूनिट पर प्रदर्शन वाले मतपत्र का है, बस उसकी पीठ पर "निविदत्त मतपत्र" स्टांपित होगा। 122

F9RO की मतदान सामग्री/लिफाफे: लिफाफे: पंचायत समिति एवं जिला परिषद् चुनाव 2026 (लिफाफे: पंचायत समिति एवं जिला परिषद चुनाव 2026) में कौन-से लिफाफे, क्या-क्या जाता है?
प्रशिक्षण सामग्री में लिफाफों की तीन स्लाइड हैं: Counter-1, Counter-2 और Counter-3 (शीर्षक सिर्फ़ "लिफाफों का विवरण" है; तीसरी स्लाइड पर "जमा होने वाली सामग्री" लिखा है)। Counter-1 पर: उपयोग की गई कंट्रोल यूनिट और मतदान यूनिट (सीलबंद), PE-52 मतदान अधिकारी (PO) की डायरी, PE-53 रिकॉर्ड किए वोटों और पेपर सीलों का लेखा (प्ररूप-14) PS के लिए, PE-54 वही ZP के लिए, PE-55 मतदान अधिकारी की घोषणा PS, PE-56 वही ZP; ये बिना सील रहते हैं। 125126109 Counter-2 पर सील बंद करने वाले: PE-42 चिह्नित मतदाता सूची, PE-43 मतदाता रजिस्टर, PE-44/PE-45 प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ (PS/ZP), PE-46/PE-47 प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र (PS/ZP), PE-48 निविदत्त वोटों की सूची (PS); 125127123 और बिना सील PE-57 में अप्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ, अप्रयुक्त एड्रेस टैग व स्पेशल टैग, मतदान अभिकर्ता की नियुक्ति प्रपत्र, चिह्नित से भिन्न मतदाता सूचियाँ, मतदाताओं की आयु संबंधी घोषणाएँ व सूची, अप्रयुक्त/क्षतिग्रस्त पेपर सीलें व स्ट्रिप सीलें, और अन्य विविध निर्वाचन कागजात। 128125 Counter-3 पर 14 चीज़ें जमा होती हैं (पीतल की सील, मतदान अधिकारी की पुस्तिका, वोटिंग मशीन की निर्देशिका, स्टाम्प पैड व इंक, अमिट स्याही की शीशी, ऐरोक्रास मार्क सील, मेटल रूल, पर्दे/कंपार्टमेंट, सुभेदक चिह्न की सीलें, रबर सीलें (केन्सिल), अप्रयुक्त मशीनें, कैनवास बैग, डमी बैलेट यूनिट)। 129 स्लाइड की दो गड़बड़ियाँ: Counter-1 में पंक्ति 1 का लिफाफा नंबर खाली है, और पंक्ति 7 में PE-52 दोबारा लिखा है। Counter-2 की सूची में ZP का निविदत्त वोटों की सूची वाला लिफाफा नहीं दिखाया गया।

मतदान दल, बूथ और मतदान-दिन की बातें 15

I1जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में मतदान दल में पीठासीन अधिकारी के अलावा कितने मतदान अधिकारी होते हैं?
मतदान दल कितना बड़ा होगा, यह मशीन के मॉडल से तय होता है। 27 MPSV मॉडल की मशीन हो तो मतदान अधिकारी (PO) के अलावा 3 सहायक मतदान अधिकारी (APO) रहते हैं। 27 M-2, MK-4 या MK-5 मॉडल की मशीनें हों तो मतदान अधिकारी के अलावा 4 सहायक मतदान अधिकारी रहते हैं। 27

I2EVM पर नीला या पीला स्टिकर कब लगता है, और गिनती में नीला/पीला टैग किसका है?
अगर MPSV या MPMV मॉडल की एक ही कंट्रोल यूनिट से दोनों पदों का चुनाव हो रहा है तो उस पर कोई स्टिकर नहीं लगता; वह यूनिट सिर्फ़ एक पद (ज़िला परिषद या पंचायत समिति सदस्य) के लिए लगे, तो उस पर भी उसी पद वाला स्टिकर लगता है। 130 BEL की M3A या MK-5 मॉडल की ईवीएम लगें (इनमें दोनों पदों की यूनिट अलग-अलग होती हैं) तो पंचायत समिति सदस्य के लिए नीला और जिला परिषद सदस्य के लिए पीला स्टिकर लगता है। 13028 गिनती के समय भी यही पहचान है: नीला टैग वाली कंट्रोल यूनिट पंचायत समिति सदस्य के चुनाव की है और पीला टैग वाली जिला परिषद सदस्य के चुनाव की। 131

I3मतदान अभिकर्ता को बूथ पर कब बुलाएँ, देर से आए तो क्या करें, और अंदर किस कागज़ पर आने दें?
मतदान अभिकर्ताओं को मतदान शुरू होने से 1 घंटे पहले आने को कहें। 132 कोई अभिकर्ता देर से आए तो उसे भी अंदर लेकर काम में शामिल करें, प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की ज़रूरत नहीं है। 132 अंदर आने दें प्ररूप-9 दिखाने पर ही, और अधिकृत अभिकर्ता को बैज दें जिसे लगाकर वह बूथ में आए। 132 जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में हर बूथ पर 1 मतदान अभिकर्ता की व्यवस्था है। 132

I4नियम 24-क के अनुसार बूथ के अंदर कौन-कौन आ सकता है?
नियम 24-क के तहत मतदाताओं के अलावा बूथ के अंदर सिर्फ ये लोग आ सकते हैं: मतदान अधिकारी (PO) और सहायक मतदान अधिकारी (APO), चुनाव के सिलसिले में पुलिस या ड्यूटी पर लगा लोक सेवक, राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकृत व्यक्ति, अभ्यर्थी और उसका निर्वाचन अभिकर्ता (नियम 68), मतदाता की गोद का बच्चा, और वे लोग जिन्हें मतदान अधिकारी पहचान के लिए बुलाए। 133 ध्यान रहे कि चुनाव ड्यूटी में "लोक सेवक" कहने से सामान्य पुलिस अधिकारी अपने आप शामिल नहीं हो जाता; वह तभी आए जब उसे बुलाने का निर्णय लिया गया हो। 133

I5बूथ पर मीडिया, कैमरा-मोबाइल और नेता/उम्मीदवार के बैज या चिह्न वाले व्यक्ति के लिए क्या नियम है?
मीडिया कर्मी अधिकृत भी हो तो उसे मतदाता के वोट रिकॉर्ड करते समय फोटो लेने की अनुमति न दें, और कैमरा, वीडियो या मोबाइल अंदर न लाने दें। 132 बूथ के बाहर मतदाताओं की लाइन की फोटो ली जा सकती है। 132 किसी राजनीतिक नेता के नाम या फोटो वाला बैज या प्रतीक चिह्न लगाए व्यक्ति को बूथ के अंदर या 100 मीटर की सीमा में आने न दें। 132 बूथ के अंदर किसी को भी मतदाताओं को प्रभावित करने या प्रचार करने की अनुमति नहीं है। 132

I6नेत्रहीन या दिव्यांग मतदाता को वोट डालने में कौन मदद करेगा, साथी को साथ भेज सकते हैं क्या, और मतदाता सूची में क्या लिखना है?
पंचायती राज चुनावों में दृष्टिबाधित और दिव्यांग मतदाता को वोट डालने में मतदान अधिकारी (PO) ही मदद करेंगे। 110134 साथी की मदद से वोट देने का प्रावधान पंचायती राज चुनावों में नहीं है। 110 मतदाता के कहने पर उसकी इच्छा के अनुसार वोट अंकित किया जाएगा, और मतदाता सूची में उसके नाम के सामने दो अक्षर "AA" लिख दिए जाएँगे। 134135 आयोग के प्रेस नोट 9836 के अनुसार आयोग का आदेश 9022 (18.09.2026) दिव्यांग मतदाताओं की मैपिंग, हर पंचायत समिति में उनकी सहायता के लिए नोडल अधिकारी, उन्हें मतदान बूथ तक लाने-छोड़ने और मतदान केन्द्र पर ज़रूरी सुविधाओं के बारे में है। 136

I7मतदाता की पहचान को चुनौती देने पर उम्मीदवार से चैलेन्ज फी लेनी है क्या, और चुनौती कब तक दी जा सकती है?
पंचायत चुनाव में किसी उम्मीदवार को मतदाता की पहचान को चुनौती देने से पहले चैलेन्ज फी जमा करानी नहीं है; इसका कोई प्रावधान नहीं है। 110 बूथ पर बैठा मतदान अभिकर्ता, उम्मीदवार या निर्वाचन अभिकर्ता पहचान की इस स्टेज पर ही मतदाता की पहचान को चुनौती दे सकता है, बाद में नहीं। 137

I8मतदाता रजिस्टर (प्ररूप-12) में क्या भरवाना है, और मतदाता हस्ताक्षर या अंगूठा देने से मना करे तो क्या होगा?
मशीन से मतदान हो तो नियम 40-A के तहत मतदाता रजिस्टर (प्ररूप-12) में निर्वाचक नामावली में मतदाता की क्रम संख्या और उसके हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी दर्ज होती है। 134 रजिस्टर में मतदाता की अपनी क्रम संख्या भी लिखी जाती है। 138 वोट रिकॉर्ड करने की अनुमति देने से पहले हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी रजिस्टर में करवा लें। 134 कोई मतदाता हस्ताक्षर या अंगूठा देने से मना करे तो उसे वोट देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 134

I9मतदाता की उम्र कम लगे तो क्या करें (परिशिष्ट-10 और 11)?
पंचायती राज अधिनियम की धारा 18-ग(1) के अनुसार जिस व्यक्ति का नाम किसी पंचायती राज संस्था के वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में दर्ज है, उसे (अधिनियम में साफ़ लिखे अपवादों को छोड़कर) उस वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र में वोट देने का अधिकार है। 46 अगर उसकी उम्र पहली नज़र में न्यूनतम उम्र से कम लगे, पर उसकी पहचान और नामावली में नाम होने का समाधान हो जाए, तो उससे परिशिष्ट-10 में उम्र की घोषणा ली जाएगी। 139 घोषणा से पहले उसे बताएँ कि पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 18-क के तहत झूठी घोषणा दंडनीय है। 139140 घोषणा देने वालों की सूची परिशिष्ट-11 भाग-I में बनेगी, और जो घोषणा देने से मना करके बिना वोट दिए चले जाएँ उनकी परिशिष्ट-11 भाग-II में। 121 मतदान के बाद परिशिष्ट-10 और 11 को जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के विविध कागजात के साथ लिफाफा PE-57 में रखा जाएगा। 121

I10मतदान बंद होने के समय जो मतदाता बूथ पर मौजूद हैं, उनका क्या होगा?
मतदान बंद होने के समय जो मतदाता बूथ पर मौजूद हैं, उन सबको वोट देने दिया जाएगा। 141 इसके लिए मतदान अधिकारी (PO) उन्हें पर्चियाँ देगा, और पर्चियाँ पीछे के छोर से शुरू करके दी जाएँगी। 141 यह बात मतदान समाप्ति की प्रक्रिया में "महत्वपूर्ण" बताई गई है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

I11आख़िरी मतदाता के वोट के बाद कंट्रोल यूनिट पर कौन-कौन से काम, किस क्रम में करने हैं?
आख़िरी मतदाता के वोट के बाद पहले मतदान समाप्ति की घोषणा करें और कंट्रोल यूनिट पर क्लोज बटन दबाएँ। 142 फिर TOTAL बटन दबाकर कुल पड़े वोट अभिकर्ताओं को दिखाएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़) और रजिस्टर-12 से मिलान करें, 126 और रजिस्टर में अंतिम मतदाता की प्रविष्टि के नीचे कुल मतदान का प्रमाण-पत्र लिखकर मतदान अधिकारी (PO) और मौजूद अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर करवाएँ (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इसके बाद कंट्रोल यूनिट OFF करें, लिंकिंग केबल अलग करें, 126143 पिछला ढक्कन बंद करके धागे या चपड़ी से सील करें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। फिर प्ररूप-14 बनाकर उसकी प्रतियाँ अभिकर्ताओं को दें और प्रपत्र-7 का भाग-3 भरें। 126109 कैरिंग बॉक्स सील करके एड्रेस टैग पर यूनिट का विवरण लिखें और मतदान अधिकारी की मोहर लगाएँ। 126143 टैग पर मतदान अधिकारी की मुहर के साथ मतदान अभिकर्ताओं (पोलिंग एजेंटों) की मुहर भी लगती है। 144 मतदान अधिकारी की घोषणा वाले प्रपत्र-7 के भाग-3 में अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर भी लें, और जो अभिकर्ता इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने से मना करें उनके नाम उसमें दर्ज करें। 109

I12मतदान के बाद प्ररूप-14 कौन बनाता है, किससे मिलाता है, और अभिकर्ता प्रति न ले तो?
मतदान खत्म होते ही मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट में दर्ज कुल वोटों का लेखा प्ररूप-14 में तैयार करेगा। 120126 इसे मतदाता रजिस्टर और चिन्हित मतदाता सूची (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़) के ब्योरे से मिलाया जाएगा ताकि लेखा सही रहे। 126 बूथ पर मौजूद जो भी मतदान अभिकर्ता चाहे, उसे प्ररूप-14 की सत्यापित प्रति दी जाएगी। 126141 कोई अभिकर्ता प्रति लेने से मना करे तो मतदान अधिकारी अपनी घोषणा में यह बात साफ़ लिखेगा (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

I13चिन्हित मतदाता सूची में लाइन, टिक, स्टार, E और AA किसके लिए लगाते हैं?
पहला सहायक मतदान अधिकारी चिन्हित मतदाता सूची का प्रभारी होता है। 145 पहचान होते ही वह हर ऐसे मतदाता के नाम के नीचे लाइन खींचता है। 145 महिला मतदाता के नाम के बायीं तरफ टिक (√) और थर्ड जेन्डर के रूप में अंकित मतदाता के नाम के बायीं तरफ स्टार (*) लगाता है। 145 पहचान भारत निर्वाचन आयोग के फोटो पहचान पत्र से की गई हो तो नाम के आगे E लिखता है। 145 दृष्टिबाधित या दिव्यांग मतदाता को मतदान अधिकारी की मदद चाहिए हो तो उसकी क्रम संख्या पर AA भी लिखा जाता है। 145146 इन निशानों से गिनकर पता चलता है कि कितने पुरुष, कितनी महिला और कितने थर्ड जेन्डर मतदाताओं ने वोट दिया, और यह जानकारी मतदान अधिकारी (PO) की डायरी और Form of Statistics में लिखी जाती है। 145

I14डाक से वोट देने के लिए चुनाव ड्यूटी प्रमाण पत्र (EDC) चाहिए क्या?
नहीं। नियम 35 में संशोधन करके पंचायती राज संस्थाओं के लिए भी डाक मतपत्र का प्रावधान किया गया है, और चुनाव ड्यूटी पर लगा अधिकारी आयोग की बताई रीति से डाक से वोट दे सकता है, पर चुनाव कर्त्तव्य प्रमाण-पत्र (EDC) का प्रावधान नहीं है। 138 जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में ड्यूटी स्टाफ डाक से वोट दे सकता है। 138147 इसके लिए ड्यूटी पर लगा मतदाता प्ररूप-1 में आवेदन कर सकता है। 138

I15फोटो पहचान पत्र न हो तो आयोग का आदेश 5310 (30.07.2026) क्या कहता है?
आयोग का आदेश क्रमांक एफ. 1(2)(1)नपा-पंचा/सा.आ./रानिआ/14/5310, दिनांक 30.07.2026 कहता है कि मतदाता अपनी पहचान के लिए पहले भारत निर्वाचन आयोग का निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (EPIC) दिखाए। 111 EPIC न दिखा सके, तो वह 11 वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेज़ों में से कोई एक मूल दस्तावेज़ दिखाए, जो चुनाव की घोषणा से पहले जारी हुआ हो; 111 जिस दस्तावेज़ पर मियाद लिखी हो, वह उसी अवधि तक मान्य है। 112 यह आदेश पहले के आदेश 559 और 603 की जगह लागू है। 111 पूरी सूची, परिवार के मुखिया वाला नियम और झूठी पहचान पर कार्रवाई F5 में दी गई है।

6डाक मतपत्र 7 सवाल

डाक मतपत्र: भेजना, जाँचना, गिनना 7

L1डाक मतपत्र किस तरह का होता है और उस पर क्या मुद्रांकित किया जाता है?
डाक मतपत्र उसी तरह का होता है जैसा मतदान केन्द्र पर काम आने वाला साधारण मतपत्र (नियम 29 के अधीन आयोग का विहित), बस फ़र्क यह कि उसके पीछे "डाक मतपत्र" शब्द मुद्रांकित किया जाता है। 102 इसके लिए उस निर्वाचन क्षेत्र के छपे मतपत्रों में से ज़रूरी संख्या से ऊपर वाले, छपी हुई अंतिम क्रम संख्या के मतपत्र काम में लिए जाते हैं। 102 उनके पीछे रबड़ की मुद्रा से "डाक मतपत्र" लगाया जाता है और रिटर्निंग अधिकारी उन पर हस्ताक्षर भी करता है। 102

L2डाक मतपत्र भेजने से पहले RO को रजिस्टर में क्या दर्ज करना है, और मतदाता सूची की चिन्हित प्रति में क्या लिखना है?
डाक मतपत्र भेजने से पहले RO प्ररूप-2 वाले रजिस्टर में निर्वाचक की मतदाता सूची की प्रविष्टि का ब्योरा दर्ज करता है: पंचायत समिति का नाम, निर्वाचन क्षेत्र की क्रम संख्या, पंचायत का नाम, वार्ड संख्या और मतदाता की क्रम संख्या। 104 उसी रजिस्टर में जारी किए गए मतपत्र का क्रमांक और निर्वाचन क्षेत्र संख्या भी लिखी जाती है। 104 मतदाता सूची की चिन्हित प्रति में उस मतदाता के नाम के सामने "डाक मतपत्र" (P.B.) लिखा जाता है, पर उसमें मतपत्र की क्रम संख्या नहीं लिखी जाती। 104

L3डाक मतपत्र के साथ निर्वाचक को कौन-कौन सी सामग्री भेजी जाती है?
रिटर्निंग अधिकारी निर्वाचक को मतपत्र के साथ चार चीज़ें भेजता है: प्ररूप-3 के अनुसार निर्वाचक की घोषणा का फॉर्म, प्ररूप-4 के अनुसार छोटा लिफाफा 'क', प्ररूप-5 के अनुसार बड़ा लिफाफा 'ख', और प्ररूप-6 के अनुसार निर्वाचकों के मार्गदर्शन के अनुदेश। 104

L4गिनती में लिफाफा 'ख' और लिफाफा 'क' खोलने का क्रम क्या है, और घोषणा (प्ररूप-3) में क्या कमी हो तो लिफाफा खोले बिना निरस्त करना है?
गिनती में हर लिफाफा 'ख' खोलकर उसमें रखी प्ररूप-3 की घोषणा जाँचें। 148 घोषणा न मिले, या सही तरह से हस्ताक्षरित और अनुप्रमाणित न हो, या घोषणा पत्र पर लिखा क्रमांक लिफाफा 'क' पर लिखे डाक मतपत्र के क्रमांक से अलग हो, तो लिफाफा 'क' खोले बिना निरस्त कर दें। 148 निरस्त लिफाफे पर पृष्ठांकन करें, घोषणा और लिफाफा 'क' को वापस लिफाफा 'ख' में रखें, ऐसे सभी लिफाफे एक अलग पैकेट में रखकर सील करें, और पैकेट पर पंचायत समिति या ज़िला परिषद का नाम, निर्वाचन क्षेत्र की क्रम संख्या, गिनती की तारीख़ और अंदर रखी चीज़ों का संक्षिप्त ब्योरा लिखें। 148 प्ररूप-3 की जो घोषणाएँ सही मिलें उन्हें एक अलग पैकेट में रखें, और कोई भी लिफाफा 'क' खोलने से पहले उस पैकेट को सील करके उस पर वही ब्योरा लिखें। 148 इसके बाद ही लिफाफा 'क' एक-एक करके खोलकर डाक मतपत्रों की जाँच करें। 148

L5डाक मतपत्र किन आधारों पर प्रतिक्षेपित (रद्द) होता है?
आयोग के आदेश 1134 दिनांक 29.01.2026 के अनुसार, गिनती की जाँच में डाक मतपत्र सात आधारों में से किसी पर प्रतिक्षेपित (नामंजूर) होगा। 148 पहचान: उस पर कोई ऐसा चिह्न या लेख हो जिससे निर्वाचक की पहचान हो जाए (वोट अंकित करने वाले चिह्न को छोड़कर)। 148 वोट की स्थिति: कोई वोट अंकित न हो, वोट पीछे वाले हिस्से पर हो, वोट एक से ज़्यादा अभ्यर्थियों या एक अभ्यर्थी और नोटा दोनों को दिए गए हों, या चिह्न ऐसा हो कि यह तय न हो सके कि वोट किसे दिया। 148 मतपत्र की स्थिति: वह बनावटी हो, या इतना फटा-बिगड़ा हो कि असली मतपत्र के रूप में उसकी पहचान न हो सके। 148 लिफाफा: उसे उस लिफाफे में रखकर न लौटाया गया हो जो RO ने निर्वाचक को भेजा था। 148 इन सात के अलावा किसी और आधार पर डाक मतपत्र प्रतिक्षेपित नहीं होगा। 149 RO हर प्रतिक्षेपित डाक मतपत्र पर उसका साफ़ कारण लिखेगा, और मतपत्र वैध है या प्रतिक्षेपित, इस पर RO का फ़ैसला अंतिम होगा। 149

L6डाक मतपत्र पर क्रॉस या टिक लगा हो, या निशान अस्पष्ट हो, तो क्या वह रद्द होगा (स्पष्टीकरण I और II)?
आयोग के आदेश 1134 दिनांक 29.01.2026 के अनुसार दो स्पष्टीकरण हैं। 149 पहला: जो डाक मतपत्र किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में साफ़ अंकित है, उसे सिर्फ इसलिए नामंजूर नहीं किया जाएगा कि चिह्न निर्धारित उपकरण से नहीं लगा; जिस उम्मीदवार को वोट देना है उसके निर्दिष्ट स्थान में बालपैन या स्याही से क्रॉस या राइट टिक का निशान काफ़ी है। 149 दूसरा: वोट का चिह्न अस्पष्ट हो या एक से अधिक बार लगा हो, तो इसी आधार पर मतपत्र रद्द नहीं होगा, बशर्ते मतपत्र चिह्नित करने के ढंग से साफ़ दिखे कि वोट किसी विशिष्ट अभ्यर्थी या नोटा के लिए है। 149

L7वैध डाक मतपत्रों की गिनती के बाद उन्हें और रद्द मतपत्रों को कैसे रखना है?
डाक मतपत्रों से हर अभ्यर्थी और नोटा को मिले सभी वैध वोट गिनें और उन्हें अभ्यर्थियों को मिले कुल वैध वोटों में जोड़ें। 149 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ गिनने से पहले मतपत्रों को अभ्यर्थी के हिसाब से छाँट लें। हर उम्मीदवार को मिले और निरस्त किए गए डाक मतपत्रों की संख्या परिणाम के प्ररूप-7 में सही जगह लिखें और उसकी घोषणा करें। 149150 निरस्त और सही पाए गए मतपत्रों के अलग-अलग बंडल बनाकर लिफाफे पर विवरण लिखें, हस्ताक्षर करके सील करें। 149 अभ्यर्थी या उनके अभिकर्ता अपनी सील लगाना चाहें तो उन्हें अनुमति दें। 149

7मतगणना और परिणाम 22 सवाल

एक नज़र में: मशीन वाली गिनती से जमानत तक

गिनती 20.11.2026 (शुक्रवार) को सुबह 8 बजे से ज़िला मुख्यालय पर; बालोतरा के दोनों चरणों के वोट उसी दिन गिने जाएँगे। 18151
डाक मतपत्र सबसे पहले उसी कमरे में जहाँ उस क्षेत्र की गिनती होनी है; उस क्षेत्र की मशीनों की गिनती पूरी होने से पहले डाक मतपत्रों की गिनती पूरी हो जाए। गिनती शुरू होने के तय समय के बाद आया लिफ़ाफ़ा खोला नहीं जाएगा। 152
रिज़ल्ट कंट्रोल यूनिट ऑन कीजिए और परिणाम बटन दबाइए (MPSV में 'RESULT-I'); हर उम्मीदवार को मिले वोटों की कुल संख्या पैनल पर दिखेगी। रिज़ल्ट दिखाते समय पहले ज़िला परिषद सदस्य का रिज़ल्ट दिखेगा, फिर पंचायत समिति सदस्य का। 153 154 155
प्रारूप 14, फिर प्ररूप-7 गणना पर्यवेक्षक हर उम्मीदवार और नोटा के वोट प्रारूप 14 के भाग II में लिखें, जोड़ भाग I की मद 5 से मिलाएँ, हस्ताक्षर करें और करवाएँ, फिर प्रारूप सौंपें। प्ररूप-7 में मशीन वाले वोटों में डाक मतपत्रों के वैध वोट, नोटा सहित, जोड़िए; कुल जोड़ ज़रूर जाँचिए। 155 118
वोट बराबर हों और सिर्फ़ एक वोट जुड़ने से ही कोई जीत सकता हो, तो रिटर्निंग अधिकारी उन उम्मीदवारों या उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं के सामने तुरंत लॉटरी निकालेंगे; लॉटरी की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी। 119
घोषणा गिनती की हर उलझन सुलझ जाए, तब प्रारूप 7 में अंतिम परिणाम-पत्र। जिसे सबसे ज़्यादा वैध वोट मिले, वह निर्वाचित घोषित; प्रमाण-पत्र देते समय उससे प्राप्ति रसीद और हस्ताक्षर। 118 119
जमानत जीतने वाले की जमानत जब्त नहीं होगी; जब्त उसी की होगी जो चुना नहीं गया और 1/6 से कम वोट लाया। 42 1/6 कुल वैध वोटों पर गिना जाएगा, और ठीक 1/6 वोट मिलें, तो जमानत लौटेगी। 3 जिनकी लौटनी है, वे 15 दिन के अंदर प्रपत्र-1 में आवेदन करके ले सकते हैं। 45
पूरी बात: मशीन वाली गिनती और प्रत्याशी प्रबोधन: पंचायत समिति और ज़िला परिषद वाले पेज। हर डिब्बे का स्रोत उसी डिब्बे में है।

मतगणना, परिणाम, जमानत, शपथ 8

G1ZP-PS मतगणना (पत्र 1299 दिनांक 03.02.2026): कहाँ, कब, कौन, टेबल, अभिकर्ता, क्रम (डाक मतपत्र पहले?)?
पत्र 1299 दिनांक 03.02.2026 के अनुसार गिनती जिला मुख्यालय पर ही होगी, जगह RO जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर तय करेगा, जहाँ तक हो एक ही भवन में (ज़्यादा बूथ हों तो DEO दो पास-पास भवन ले सकते हैं)। 156 तारीख और समय आयोग के घोषित कार्यक्रम को देखकर RO नियम 49-घ में तय करेगा और हर अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता को मतदान की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले लिखित में बताएगा; बाद में किसी अपरिहार्य कारण से तारीख, समय या जगह बदले तो बदलाव की सूचना फिर से हर अभ्यर्थी और उसके निर्वाचन अभिकर्ता को लिखित में देनी है। 156 इसमें गिनती की कोई ख़ास तारीख या समय दिया ही नहीं गया है, और 06.10.2026 के समय-सारणी पत्र में गिनती की पंक्ति सिर्फ़ पंच-सरपंच की है। 16 BEL की M3A/MK-5 मशीन पर जिला परिषद और पंचायत समिति की गिनती अलग-अलग कक्ष/हॉल में होगी, ECIL की MPSV/MPMV पर एक ही कक्ष में। 156 एक टेबल पर एक गणन पर्यवेक्षक और एक गणन सहायक रहेगा, गणन अभिकर्ताओं की संख्या टेबलों से (RO की टेबल मिलाकर) ज़्यादा नहीं और एक रिलीफ एजेंट अलग; 157 हर गणन टेबल पर हर अभ्यर्थी का एक गणन अभिकर्ता बैठ सकता है। 152 क्रम में डाक मतपत्रों की गिनती सबसे पहले, उसी कक्ष में होती है, और उस निर्वाचन क्षेत्र की मशीनों की गिनती पूरी होने से पहले ख़त्म हो जानी चाहिए। 152 नियंत्रण यूनिट बूथ के क्रम से टेबलों को दी जाती हैं, यानी बूथ 1 की टेबल 1 को। 158 MPSV/MPMV पर नियंत्रण यूनिट में पहले जिला परिषद का परिणाम दिखता है, उसके बाद पंचायत समिति का। 155

G2मतगणना के प्रारूप 21, 22, 23: हर एक क्या है, कौन भरता है?
आयोग के पत्र 1299 (03.02.2026) के मुताबिक़ गिनती के समय अपनी ओर से हाज़िर रहने के लिए अभ्यर्थी या उसका निर्वाचन अभिकर्ता प्ररूप-10 में गणन अभिकर्ता नियुक्त कर सकता है (नियम 70)। 157 मतदान ख़त्म होने पर मतदान अधिकारी (PO) मशीन में दर्ज वोटों का लेखा प्ररूप-14 में तैयार करता है (नियम 47-C)। 120 गिनती की टेबल पर नियंत्रण यूनिट में हर अभ्यर्थी और नोटा के वोट दिखते ही गणना पर्यवेक्षक उन्हें अभ्यर्थीवार प्ररूप-14 के भाग II "गणना का परिणाम" में लिखता है और मिलाता है कि कुल वोट भाग I की मद 5 के कुल से मिलते हैं; फिर वह हस्ताक्षर करता है, टेबल पर मौजूद अभ्यर्थियों या अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर करवाता है और प्ररूप RO/ARO को देता है, जो जाँचकर ख़ुद भी हस्ताक्षर करता है और उसे प्ररूप-7 बना रहे अधिकारी को सौंपता है। 155 प्ररूप-7 (अंतिम परिणाम-पत्र) मशीनों के वोटों और डाक मतपत्रों की गिनती के बाद भरा जाता है: हर अभ्यर्थी और नोटा के दोनों जगह के वोट जोड़कर। 155 21, 22, 23 पंच-सरपंच वाली मार्गदर्शिका में मतदान दिन के परिशिष्टों के नंबर हैं, गिनती के प्रपत्र नहीं: परिशिष्ट-22 में आयोग के अधिसूचित पहचान दस्तावेज़ हैं, और परिशिष्ट-21 मतदान अधिकारी की घोषणा है, जो अभ्यर्थियों/अभिकर्ताओं के सामने पढ़कर सुनाई जाती है और जिस पर उनके हस्ताक्षर कराए जाते हैं। 159 परिशिष्ट-23-A "पीठासीन अधिकारी की डायरी" है, जिसमें मतदान दिन की अचानक हुई घटनाएँ और तय समय पर डाले गए वोटों की संख्या जैसी बातें लिखी जाती हैं; पंच-सरपंच की अलग डायरी परिशिष्ट-23-B है। 160 जिला परिषद/पंचायत समिति वाली मार्गदर्शिका में PO की घोषणा परिशिष्ट-7 पर और पहचान दस्तावेज़ों की सूची परिशिष्ट-16 पर है। 146

G3परिणाम की घोषणा किस प्ररूप में, प्रमाण पत्र किस प्ररूप में?
मशीन से हुई गिनती में हर निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम नियंत्रण यूनिट से पहले प्ररूप-14 के भाग II "गणना का परिणाम" में और फिर प्ररूप-7 (अंतिम परिणाम-पत्र) में दर्ज होता है। 161150 प्ररूप-7 का शीर्षक है "Return showing the results of election for the office of Panch/Sarpanch/Member of Panchayat Samiti/Member of Zila Parishad"। 162 आयोग के पत्र 1299 (03.02.2026) के अनुसार गिनती पूरी होने पर RO प्ररूप-7 में परिणाम का विवरण तैयार करता है, और आयोग ने अन्यथा न कहा हो तो परिणाम घोषित करता है; सबसे ज़्यादा विधिमान्य वोट पाने वाला निर्वाचित घोषित होता है। 119 निर्वाचित अभ्यर्थी को निर्वाचन का प्रमाण-पत्र "आयोग द्वारा निर्धारित प्ररूप" में दिया जाता है, और उससे प्राप्ति रसीद और विधिवत हस्ताक्षर लिए जाते हैं। 119163161 परिणाम घोषित करने पर राज्य निर्वाचन आयोग को प्ररूप-7, सारणी-क (जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य), सारणी-ख (पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य) और दोनों सारणियों की CD भेजी जाती हैं। 119

G4बराबर वोट (टाई) पर क्या? पुनर्गणना की माँग पर क्या?
वोट बराबर निकलें और एक वोट जुड़ने से ही किसी को निर्वाचित घोषित करने का हक बनता हो, तो RO उन अभ्यर्थियों या उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं की मौजूदगी में तुरंत लॉटरी निकालेगा। 119 इसका कार्यवाही विवरण बनता है जिस पर मौजूद अभ्यर्थी या अभिकर्ता चाहें तो हस्ताक्षर करते हैं, वह अलग लिफ़ाफ़े में सुरक्षित रखा जाता है, प्ररूप-7 में जिसके पक्ष में लॉट निकला उसके वोटों के आगे प्रविष्टि होती है, और पूरी लॉटरी की वीडियोग्राफी कराई जाती है (पत्र 1299 दिनांक 03.02.2026)। 119 पत्र 1299 के "कानूनी प्रावधान" वाले हिस्से के मुताबिक़ मतगणना से जुड़े क़ानूनी प्रावधान, जिनमें मतों की पुनर्गणना भी है, राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 में हैं। 156 दोबारा जाँचने की ज़रूरत हो तो परिणाम-बटन दबाकर उस मतदान केंद्र का नतीजा नियंत्रण यूनिट के डिस्प्ले पर फिर से दिखाया जा सकता है। 118 प्रशिक्षण स्लाइड कहती है कि EVM चुनाव में अभ्यर्थी लिखित में पुनर्गणना माँगे तो RO नियम 49(6) न लिखे (क्योंकि नियम 55-क ने EVM में नियम 49 को हटाया है), बल्कि लिखे कि नियम 49-ग और 49-घ लागू हैं और आपत्ति को नियंत्रण यूनिट के परिणाम, प्ररूप-14 भाग-II और प्ररूप-7 से मिलाकर जाँचा गया, फिर उस जाँच का नतीजा दर्ज करे।

G5जमानत वापसी/ज़ब्ती: 1/6 का नियम क्या है, परिपत्र 2178 (20.06.2019) की प्रक्रिया, प्रपत्र-1 और प्रपत्र-2? कब तक लौटानी है?
प्रतिभूति निक्षेप: नियम 58(5) के अनुसार जमानत उसी अभ्यर्थी की ज़ब्त होती है जो न जीते और डाले गए कुल वैध वोटों का कम से कम 1/6 भाग भी न पा सके; 3 विजयी उम्मीदवार के वोट 1/6 से कम हों तो भी उसे जमानत वापस। 283 परिपत्र 2178 की शर्त "1/6 या इससे अधिक" है, यानी ठीक 1/6 पर भी वापसी; और नाम वापस लेने वाले अभ्यर्थी को भी आवेदन पर जमानत वापस मिलती है। 45 परिपत्र 2178 (20.06.2019) के जिला परिषद/पंचायत समिति भाग के अनुसार: परिणाम के बाद अभ्यर्थी प्रपत्र-1 में आवेदन दे तो जमानत वापस; 45 ज़ब्ती के आदेश परिणाम घोषित होने के 3 दिन में प्रपत्र-2A में; 45 वापसी की माँग 15 दिन में न की तो राशि अवितरित मानी जाकर अगले 7 दिन में चालान से राजकोष में (प्रपत्र-4 / प्रपत्र-5); 45 DEO जिले का लेखा प्रपत्र-6 में 30 दिन में आयोग को भेजे। 45 ज़ब्त राशि मद 0515 में और अवितरित राशि 8443 सिविल जमा में। 45

G6जीतने के बाद शपथ: कौन दिलाता है, कब?
निर्वाचित पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य को पद का काम शुरू करने से पहले शपथ या प्रतिज्ञान लेना है (अधिनियम की धारा 24), प्ररूप-11 में (नियम 75)। 164165 समय: परिणाम की घोषणा के बाद तीन माह के भीतर कभी भी (नियम 76(1)); 165 शपथ न ली तो सदस्य बने रहने की पात्रता नहीं रहती (धारा 39(1)(f)), और आयोग की मार्गदर्शिका के मुताबिक़ प्रधान/प्रमुख के चुनाव में निर्वाचित सदस्य तभी भाग ले सकेंगे जब वे निर्धारित प्ररूप में शपथ ले चुके हों। 166138 कौन दिलाए (नियम 76(2)): परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी समय रिटर्निंग अधिकारी के सामने, या संबंधित तहसीलदार या कलेक्टर के नियुक्त किए अधिकारी के सामने, या पंचायत समिति/जिला परिषद की बैठक में। 165 हस्ताक्षर किए हुए शपथ के प्ररूप जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के कार्यालय को भेजे या वहीं रखे जाएंगे और पाँच साल बाद नष्ट होंगे। 165 प्ररूप-11 में सदस्य के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान के नीचे "रिटर्निंग अधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति" के हस्ताक्षर की जगह है, यानी RO के सामने ली गई शपथ पर RO दस्तख़त करेगा। 167

G7मतगणना के बाद सामग्री, EVM, मतपत्र किसके पास, कितने दिन सील?
पत्र 1299 दिनांक 03.02.2026 के अनुसार गिनती के बाद BEL की नियंत्रण यूनिट को नियम 52-क में RO की सील से और जो अभ्यर्थी या अभिकर्ता चाहें उनकी सीलों से दोबारा सील करते हैं, कैंडिडेट सेट सेक्शन की बैटरी निकालकर कवर सील होता है (नतीजा मेमोरी में बना रहता है)। 168 ECIL की MPSV/MPMV मशीन सील नहीं होती, उसमें से SDMM/DMM निकालकर वही सील किया जाता है (आयोग का पत्र 710 दिनांक 20.01.2026 SDMM के लिए, पत्र 830 दिनांक 23.01.2026 DMM के लिए)। 168 परिणाम घोषित होने के बाद उसी दिन मशीनें और काग़ज़ों के सीलबंद पैकेट वाले संदूक सरकारी कोषागार/उपकोषागार या DEO के तय EVM भंडारण में दो तालों में जिला निर्वाचन अधिकारी की अभिरक्षा में रखे जाते हैं: एक ताले की चाबी कोषागार अधिकारी के पास, दूसरे की DEO या उनके नामित वरिष्ठ अधिकारी के पास। 169 जब तक सामान कोषागार न पहुँचे, कमरे के बाहर सशस्त्र पुलिस रक्षक दल रहेगा। 169 कितने दिन सील रहेंगे, यह पत्र में नहीं है: निस्तारण आयोग के आगामी नियम 53-ख वाले आदेश के अनुसार होगा। 169 सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना इन पैकेटों को कोई नहीं खोल सकता। 170 काग़ज़ों के ये पैकेट आठ तरह के हैं: प्रारूप 12 के मतदाता रजिस्टर, अप्रयुक्त डाक मतपत्र, प्रयुक्त डाक मतपत्र (वैध और अस्वीकृत, देर से मिले लिफाफों सहित), अप्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ, प्रयुक्त और अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र, अप्रयुक्त (अधिशेष) मतपत्र, निर्वाचक नामावली की चिह्नित प्रतियाँ, और मतदाताओं की घोषणाओं और हस्ताक्षरों के अनुप्रमाणन के पैकेट। 170 प्रयुक्त डाक मतपत्रों (वैध और अस्वीकृत) और मतदाताओं की घोषणाओं व उनके हस्ताक्षरों के अनुप्रमाणन के पैकेट गिनती के समय ही बनते हैं और गिनती ख़त्म होते ही RO अपनी सील से बंद करता है, साथ ही मौजूद अभ्यर्थियों और उनके अभिकर्ताओं से कहता है कि वे भी अपनी सील ज़रूर लगाएँ; मतदाता रजिस्टर, अप्रयुक्त मतदाता पर्चियों, निविदत्त मतपत्रों और नामावली की चिह्नित प्रतियों के पैकेट मतदान अधिकारियों (PO) से सीलबंद मिलते हैं, गिनती में उनकी ज़रूरत नहीं पड़ती, इसलिए मिलते ही दोबारा सील करके लोहे के संदूक में रखे जाते हैं, और हर संदूक में दो ताले लगाकर हर ताला सील होता है। 170 इस सीलिंग की निगरानी के लिए RO एक ज़िम्मेदार प्रभारी अधिकारी लगाए। 170 सब सील हो जाने पर RO गणना स्थल पर ही कार्यवाही लिखता है: मौजूद अभ्यर्थियों/अभिकर्ताओं का पूरा ब्योरा और यह कि उन्हें मशीनों और पैकेटों पर सील लगाने को कहा गया था। 170

G8प्रधान/प्रमुख का चुनाव: RO कौन, कब (केवल संक्षेप में)?
पंचायती राज (निर्वाचन) नियमों के अनुसार प्रमुख का चुनाव जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने में से करते हैं और प्रधान का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य: प्रमुख के लिए नियम 59(1)-(2) सपठित नियम 62, प्रधान के लिए नियम 59(1)-(2); 171172 उप-प्रधान का चुनाव नियम 61 में और उप-प्रमुख का नियम 62(2) में है। 173172 दोनों बैठकों का दिन और समय राज्य निर्वाचन आयोग तय करता है, और बैठक की अध्यक्षता रिटर्निंग अधिकारी (RO) करता है। 171172 पंचायत समिति की बैठक पंचायत समिति कार्यालय में होगी। 171 उप-प्रधान और उप-प्रमुख की बैठक प्रधान और प्रमुख के निर्वाचन के अगले दिन होती है। 173172 आयोग के प्रेस नोट 9836 (03.10.2026) की समय-सारणी के अनुसार ज़िला प्रमुख का चुनाव 25.11.2026 (बुधवार), उप ज़िला प्रमुख का 26.11.2026 (गुरुवार), प्रधान का 27.11.2026 (शुक्रवार) और उप प्रधान का 28.11.2026 (शनिवार) को होगा। 18 प्रधान के चुनाव में RO वह अधिकारी होता है जिसे ज़िला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करे (नियम 59 का स्पष्टीकरण)। 171 प्रमुख और उप प्रमुख के चुनाव के लिए आयोग के आदेश 175 (05.01.2026) ने हर ज़िला परिषद के लिए उस ज़िले के ज़िला कलक्टर एवं ज़िला मजिस्ट्रेट को RO नियुक्त किया है। 174

मतगणना: कक्ष, अभिकर्ता, कर्मचारी और परिणाम पत्र 11

J1MPSV/MPMV मशीन पर मतदाता एक पद का वोट देकर चला जाए तो दूसरे पद की गिनती में क्या माना जाएगा?
MPSV/MPMV मशीन में दोनों पदों के लिए एक ही कंट्रोल यूनिट होती है। 155 कोई मतदाता एक पद के लिए वोट देकर बूथ छोड़कर चला जाए और मतदान अधिकारी (PO) को मतदान चालू रखने के लिए कंट्रोल यूनिट OFF करके फिर ON करनी पड़े, तो जिस पद के लिए उसने वोट नहीं दिया वह उस पद के लिए Under Vote माना जाएगा। 155175

J2जिला परिषद और पंचायत समिति की गिनती साथ-साथ हो तो गणना कर्मचारियों में क्या अतिरिक्त चाहिए?
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुनाव की गिनती साथ-साथ हो रही हो तो एक अतिरिक्त गणना सहायक की ज़रूरत पड़ेगी। 155 ECIL की MPSV या MPMV मशीन से दोनों पदों का चुनाव हो तो दोनों की गिनती एक ही कक्ष/हॉल में होती है। 157 नतीजा दिखाते समय कंट्रोल यूनिट पर पहले जिला परिषद सदस्य का परिणाम आता है, उसके बाद पंचायत समिति सदस्य का। 155

J3गणन अभिकर्ता को गिनती कक्ष में प्रवेश देने से पहले क्या-क्या देखना है (प्ररूप-10, फोटो, बैज, घोषणा)?
गणन अभिकर्ता की नियुक्ति नियम 70 के तहत प्ररूप-10 में होती है, और नियुक्ति पत्र पर अभिकर्ता के अपने हस्ताक्षर सहमति के रूप में ज़रूरी हैं। 157 नियुक्ति पत्र और दो प्रमाणित फोटो मतगणना से कम से कम 2 दिन पहले RO को दिए जाने चाहिए। 101 प्रवेश RO से अनुमोदित नियुक्ति पत्र और फोटोयुक्त बैज देखकर ही मिलेगा, जिस पर RO की सील और क्रमांक हो। 101 गिनती शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले अभिकर्ता घोषणा पढ़कर हस्ताक्षर करेगा। 10199 बिना बैज या नियुक्ति पत्र के प्रवेश नहीं मिलेगा, और बाहर जाने पर दोबारा प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 101

J4गणन अभिकर्ता कहाँ बैठेगा, और किसे किसी भी टेबल पर जाने का हक़ है?
गणन अभिकर्ता गणना कक्ष में सिर्फ उसी टेबल पर बैठ सकता है जो उसे आवंटित की गई है, कहीं और नहीं। 101 केवल अभ्यर्थी और उसके निर्वाचन अभिकर्ता को किसी भी टेबल पर जाने का अधिकार है। 101 जिस निर्वाचन क्षेत्र की गिनती चल रही हो, कक्ष में उसी क्षेत्र के अभ्यर्थी और अभिकर्ता रहें। 101 बैजों का अलग रजिस्टर रखा जाए और अभ्यर्थी तथा निर्वाचन अभिकर्ता को भी फोटोयुक्त बैज दिया जाए। 101

J5गणन पर्यवेक्षक और गणन सहायक कौन नियुक्त करता है, किस स्तर के हों, और किन्हें नहीं रखना है?
आयोग के आदेश क्रमांक एफ.7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/1299, दिनांक 03.02.2026 के मुताबिक़ RO जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुमोदन से गणन पर्यवेक्षक और गणन सहायक नियुक्त करता है, और हर टेबल पर एक पर्यवेक्षक और एक सहायक लगाना है। 157 पर्यवेक्षक राजपत्रित या समकक्ष अधिकारी रखे जाएँ। 157 सहायक राजपत्रित स्तर के न हों तो भी यथासंभव पर्यवेक्षकीय पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के स्तर के हों। 157 किसी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी से जुड़े व्यक्ति को पर्यवेक्षक या सहायक न बनाएँ। 157 रिज़र्व स्टाफ सहित सबको अच्छी तरह प्रशिक्षण दिया जाए। 157

J6गिनती शुरू करने से पहले RO को क्या पढ़कर सुनाना है, और सबसे पहले किसकी गिनती होती है?
गिनती शुरू करने से पहले मतगणना कक्ष में मौजूद सभी लोगों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 128 के प्रावधान समझाए जाते हैं, ताकि सब वोटों की गोपनीयता बनाए रखें। 152 उसके बाद RO सबसे पहले नियम 50-क के तहत डाक मतपत्रों की गिनती करता है। 152150

J7कंट्रोल यूनिट पर Result दबाने पर INVALID दिखे तो क्या करें?
डिस्प्ले पर 'INVALID OPERATION' दिखे और छोटी, रुक-रुक कर बीप सुनाई दे, तो इसका मतलब है कि बटन सही क्रम में नहीं दबाया गया। 176 RESULT-I बटन दबाने पर यह संदेश आए तो कारण यह है कि CLOSE बटन दबाकर मतदान बंद नहीं किया गया है। 177 उपाय: RESULT-I बटन दबाने से पहले CLOSE बटन दबाकर मतदान बंद करें। 177 प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़ ऐसे में RO को सूचित करें, और RO बताए गए तरीके से Close बटन दबाएगा। प्रक्रिया पूरी होने तक रुकें और फिर Result बटन दोबारा दबाएँ; अब उस यूनिट की सारी जानकारी प्रदर्शन खंड में दिखने लगेगी (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

J8अंतिम परिणाम पत्र (प्ररूप-7) कब और कैसे भरना है, और योग की जाँच क्यों ज़रूरी है?
अंतिम परिणाम पत्र (प्ररूप-7) EVM के वोटों की गिनती और डाक मतपत्रों की गिनती दोनों पूरी होने के बाद भरा जाता है। 155 हर अभ्यर्थी के मशीन में दर्ज वोट (नोटा सहित) और डाक मतपत्रों में मिले वैध वोट (नोटा सहित) जोड़कर प्ररूप-7 भरा जाता है। 155 आयोग ने किसी बूथ पर पुनर्मतदान या नया मतदान करवाया हो तो उसका परिणाम पहले प्ररूप-7 में शामिल करें, उसके बाद ही कुल योग निकालें। 178 कुल योग की शुद्धता खुद जाँच लें, क्योंकि योग में कोई भी अंतर परिणाम और उसकी घोषणा को प्रभावित करेगा और आयोग इसे गंभीरता से लेकर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है। 118

J9निविदत्त मतपत्र के लिफाफे गिनती में खोले जाते हैं क्या?
नहीं। निविदत्त मतपत्रों के लिफाफे गिनती में खोले ही नहीं जाएँगे और उनके वोटों की गिनती नहीं की जाएगी। 118179 यह बात अंतिम परिणाम पत्र की तैयारी के निर्देश में साफ़ लिखी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

J10EVM का हर वोट वैध माना जाता है क्या, और किसी बूथ का नतीजा दोबारा देखना हो तो कैसे?
EVM द्वारा रिकॉर्ड किया गया हर वोट सामान्यतः विधिमान्य माना जाएगा। 118 किसी बूथ के वोटों का दोबारा सत्यापन करना हो तो कंट्रोल यूनिट का Result बटन दबाकर परिणाम फिर से दिखाया जा सकता है। 118

J11गिनती बीच में रोकनी पड़े तो मशीनों और कागज़ात का क्या करें?
नियम 49-क के तहत किसी अपरिहार्य कारण से गिनती पूरी होने से पहले रोकनी पड़े तो सभी मतदान मशीनें और चुनाव से जुड़े कागज़ात और पैकेट सील कर दें। 118 हर अभ्यर्थी या उसका अभिकर्ता अपनी सील लगाना चाहे तो लगाने दें। 118 सब सीलबंद मतदान मशीनें और पैकेट एक अलग कमरे में रखें; कमरा RO की सील से और अभ्यर्थियों की सील से भी सुरक्षित हो। 118 कमरे पर RO के ताले के साथ अभ्यर्थी भी अपने ताले लगा सकते हैं। 118

गिनती के बाद सील और SDMM 3

K1परिणाम के बाद SDMM को कंट्रोल यूनिट से क्यों निकालकर सील करना है, और सीलिंग टीम में कौन-कौन होते हैं?
मतगणना के बाद, कंट्रोल यूनिट से परिणाम घोषित हो जाने पर, SDMM को कंट्रोल यूनिट से निकालकर सील करना है और सुरक्षित अभिरक्षा में रखना है, ताकि किसी कानूनी मामले में माननीय न्यायालय चाहे तो मतदान का रिकॉर्ड फिर से देखा जा सके। 180 यह काम 5 सदस्यों का दल करेगा, जिसमें एक सीलिंग प्रभारी और चार सीलिंग सहायक होते हैं, और सील करने तथा सुरक्षित रखने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी। 180

K2SDMM को सील करने की प्रक्रिया क्रमवार क्या है (डिब्बी, पेपर सील, रबर बैंड, नीला लिफाफा)?
गिनती के बाद सीलिंग प्रभारी SDMM को कंट्रोल यूनिट से निकालकर 4.5 x 4.0 x 2.0 सेमी की छोटी प्लास्टिक की डिब्बी में रखता है। 181 फिर SDMM पेपर सील (नीला) पर चुनाव से जुड़ी प्रविष्टियाँ भरी जाती हैं और मतगणना स्थल पर मौजूद इच्छुक अभ्यर्थियों या उनके अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर पेपर सील के खाली स्थान पर लिए जाते हैं। 181 पेपर सील के पीछे से "डी" स्टीकर हटाकर डिब्बी पर चिपकाया जाता है और पेपर सील चारों ओर लपेटी जाती है। 181 इसके ऊपर अतिरिक्त सुरक्षा के लिए रबर बैंड लगाया जाता है। 181 अंत में इसे नीले लिफाफे (Annexure-2 का प्रारूप) में रखकर ज़रूरी प्रविष्टियाँ करके चपड़ी से सील किया जाता है। 181

K3गिनती के बाद कंट्रोल यूनिट का रिजल्ट सेक्शन और बैटरी सेक्शन किस स्तर पर सील होता है, और सब यूनिट किसकी अभिरक्षा में रहती हैं?
आयोग के आदेश क्रमांक एफ.7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/1024, दिनांक 27.01.2026 के मुताबिक़ मतगणना और परिणाम की घोषणा के बाद, अगर M3A/MK-5 मॉडल की मशीनें काम में ली गई हों तो उनसे बैटरी निकाल ली जाएगी और मशीन सील कर दी जाएगी। 182 अगर MPSV और MPMV मशीनें काम में ली गई हों तो उनसे भी बैटरी निकाल ली जाएगी, और SDMM/DMM कंट्रोल यूनिट से निकालकर सील कर लिया जाएगा। 183 ECIL की बनाई MPSV मशीन को सील नहीं करना है, सिर्फ़ उसका SDMM सील किया जाता है; SDMM सील करने के बाद EVM को सील करने की ज़रूरत नहीं है। 161184 दूसरे मॉडल की मशीनों में कंट्रोल यूनिट नियम 52-क के तहत रिटर्निंग अधिकारी की सील से, और जो अभ्यर्थी चाहें उनकी सील से भी, फिर से सील की जाती है। 161150 इन मशीनों में कैंडिडेट सेक्शन की बैटरी निकालकर उसका कवर फिर से सील किया जाता है, और रिजल्ट सेक्शन का बाहरी कवर बंद करके उसे भी फिर से सील किया जाता है। 161 MPSV और MPMV की कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट रिटर्निंग अधिकारी आगे के चुनावों में काम लेने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को लौटा देंगे। 183 मतदान में काम आई M3A/MK-5 मशीनें ज़िला मुख्यालय पर कोषागार में या जिला निर्वाचन अधिकारी की तय जगह पर रिटर्निंग अधिकारी की सुरक्षित अभिरक्षा में रखी जाएँगी। 183

8प्रधान और प्रमुख का चुनाव 8 सवाल

प्रधान/प्रमुख के चुनाव में RO की कार्यवाही 8

M1प्रधान/प्रमुख और उप-प्रधान/उप-प्रमुख के नामांकन कौन प्रस्तुत कर सकता है?
प्रधान/प्रमुख और उप-प्रधान/उप-प्रमुख के चुनाव में नामांकन उम्मीदवार खुद प्रस्तुत कर सकता है, या उसका प्रस्तावक, जो निर्वाचित सदस्य होता है, प्रस्तुत कर सकता है। 171 कोई सामान्य व्यक्ति प्रस्तुत नहीं कर सकता। 171 जो सिर्फ समर्थक या एजेंट है और प्रस्तावक नहीं है, उसे भी यह अधिकार नहीं है। 171 नामांकन पत्र हर उम्मीदवार का अलग होता है और नोटिस में बताई तारीख, स्थान और समय के भीतर ही प्रस्तुत होना चाहिए। 171

M2प्रधान/प्रमुख के नामांकन की संवीक्षा में किन कमियों पर नामांकन अस्वीकार होगा, और किन पर नहीं?
RO नामांकन पत्र इन आधारों पर अस्वीकार कर सकता है: प्रस्तावक उस निकाय का सदस्य न हो, या नियम 59(4) के खंड (क) से (घ) का पालन न हुआ हो (प्ररूप IV-B में पत्र, सदस्य का प्रस्तावक होना, हर उम्मीदवार का अलग पत्र, तय समय पर प्रस्तुति)। 171 उम्मीदवार की पहचान स्थापित न होना, उम्मीदवार का संबंधित निर्वाचित निकाय का सदस्य न होना, या आरक्षित पद के लिए उम्मीदवार का कानूनन पात्र न होना भी अस्वीकार का आधार है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। अस्वीकार करते हुए RO पत्र पर अपना निर्णय लिखता है और अस्वीकृति का संक्षिप्त कारण लिखित में दर्ज करता है। 185 उम्मीदवार या पिता/पति के नाम की वर्तनी, पते की छोटी गलती या प्रस्तावक के नाम की छोटी गलती अकेले आधार पर अस्वीकार नहीं होती, बशर्ते पहचान साफ़ हो। 171 निर्वाचन क्षेत्र संख्या की लिपिकीय गलती हो और उम्मीदवार की असल सदस्यता साफ़ हो, तो नामांकन सामान्यतः स्वीकार होता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

M3संवीक्षा पूरी होने पर वैध नामांकन की सूची किस प्ररूप में जारी होती है?
संवीक्षा का काम पूरा होते ही (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़) रिटर्निंग अधिकारी प्रारूप IV(c) में वैध नामांकन की सूची जारी करेगा। 185 यह नियम 59 (6) में दिया गया है। 185

M4प्रधान/प्रमुख के चुनाव में नाम वापसी का नोटिस आए तो RO क्या-क्या जाँचे?
नाम वापसी का नोटिस आए तो RO ये जाँचे: नामांकन वैध है या नहीं (वापसी सिर्फ वैध रूप से नामांकित उम्मीदवार की ली जाए) (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़), और नोटिस तय अंतिम तारीख और समय के भीतर आया है या नहीं। 185 नोटिस लिखित हो, मौखिक वापसी स्वीकार न करें; 185 उस पर उम्मीदवार के अपने हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी हो (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़) और नोटिस उम्मीदवार ने खुद पहुँचाया हो। 185 सिर्फ प्रस्तावक नोटिस लेकर आए, या कहे कि उम्मीदवार ने उसे अधिकृत किया है, तो भी नाम वापसी स्वीकार न करें, क्योंकि नोटिस स्वयं पहुँचाने की शर्त है। 185 समय के बाद आया नोटिस भी स्वीकार नहीं होगा। 185 वैध नोटिस मिलने पर उसकी प्राप्ति का समय और तारीख दर्ज करें और मूल नोटिस सुरक्षित रखें (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)।

M5नाम वापसी का नोटिस वैध रूप से ले लिया गया हो, तो क्या उम्मीदवार उसे बाद में वापस ले सकता है?
राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 59(7)(ख) के मुताबिक़ जिस व्यक्ति ने नाम वापसी का नोटिस दे दिया है, उसे वह नोटिस रद्द करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 185

M6नाम वापसी के बाद केवल एक उम्मीदवार बचे तो क्या होगा, और दो या ज़्यादा बचें तो?
नाम वापसी के बाद सिर्फ एक वैध उम्मीदवार बचे तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जाता है। 185 दो या ज़्यादा उम्मीदवार बचें तो गुप्त मतदान कराया जाता है। 185

M7प्रधान/प्रमुख के चुनाव में प्ररूप V-A क्या है, और मतपत्र में नामों का क्रम किससे तय होता है?
नाम वापसी के बाद जिन वैध उम्मीदवारों ने नाम वापस नहीं लिया, उन्हीं की सूची प्ररूप V-A में रहती है। 185 नाम वापस लेने वाले उम्मीदवार को प्ररूप V-A में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के रूप में नहीं रखा जाता। 185 इसके बाद प्ररूप V-A ही मतपत्र और मतदान व्यवस्था का आधार बनता है, और मतपत्र में उम्मीदवारों के नाम का क्रम भी इसी सूची के क्रम के अनुसार रखा जाता है। 186

M8किसी उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का अधिकृत उम्मीदवार मानने के लिए प्ररूप क और ख की क्या शर्तें हैं (RO के प्रधान/प्रमुख डेक के अनुसार)?
आयोग की अधिसूचना संख्या 4(5)(1)पंचा/रानिआ/19/4185, दिनांक 17.10.2025 के खंड 6 के मुताबिक़ प्रधान/प्रमुख के चुनाव में किसी उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का उम्मीदवार तभी माना जाता है जब ये सभी शर्तें पूरी हों। 187 उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र में दल द्वारा खड़ा किए जाने की घोषणा की हो। 187 दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष या अधिकृत व्यक्ति ने प्ररूप 'ख' तय अंतिम तारीख और समय से पहले RO को दिया हो। 187 अध्यक्ष ने किसी और को अधिकृत किया हो तो उसके नमूना हस्ताक्षर प्ररूप 'क' में पहले से RO के पास हों। 187 प्ररूप 'क' और 'ख' पर असली स्याही के हस्ताक्षर हों; 187 फोटोकॉपी या रबर स्टाम्प के हस्ताक्षर मान्य नहीं, और Fax, E-mail या WhatsApp से भेजे फॉर्म स्वीकार नहीं होंगे। 188 जहाँ दल में राज्य अध्यक्ष का पद है, वहाँ अध्यक्ष, और जहाँ यह पद नहीं है, वहाँ सचिव को संबंधित राज्य इकाई का प्रमुख माना जाएगा। 187 अध्यक्ष या सचिव के नमूना हस्ताक्षर लोकसूचना जारी होने से पहले आयोग के पास होने चाहिए; 187 आयोग इन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से RO को भेजता है। 188

9विविध 4 सवाल

विविध 4

H1प्रशासक संबंधी आदेश (विविध आदेश 1, 2): क्या कहते हैं?
प्रशासक के बारे में तीन काग़ज़ हैं। पहला, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश दिनांक 31.08.2026: कोई प्रशासक अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा दे तो संबंधित जिला कलेक्टर इस्तीफ़ा स्वीकार करके उसे पद मुक्त करने का आदेश अपने स्तर पर जारी करेगा और सूचना पंचायती राज विभाग को भेजेगा। 189 यह विभाग का आदेश है, आयोग का नहीं। 189 दूसरा, आयोग के पत्र 10297 (09.10.2026, "लाभ के पद" पर) का बिंदु 7 "प्रशासक का पद": पहले आयोग ने परीक्षण करके दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उसी आदेश के अनुसार रिटर्निंग अधिकारी कार्यवाही करके अपने स्तर से निर्णय लेंगे। 3565 तीसरा, आयोग का पत्र 10520 (14.10.2026) पंचायती राज विभाग को: ग्राम पंचायत का कार्यकाल पूरा होने से पहले जो उपसरपंच और वार्ड पंच प्रशासकीय समिति के सदस्य बनाए गए थे, उस समिति के पदों को लाभ के पद की श्रेणी में नहीं माना जाएगा ("प्रशासकीय समिति के पदों को लाभ की श्रेणी में नहीं मानते हुए अग्रिम कार्यवाही की जावें")। 66

H2पंचायतीराज (संशोधन) अधिनियम 2026 (पत्र 4795 दिनांक 13.07.2026): RO के लिए क्या बदला?
आयोग का पत्र 4795 दिनांक 13.07.2026 सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को लिखा गया है। 190 यह कहता है कि राजपत्र अधिसूचना दिनांक 25.03.2026 से पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 में संशोधन करके पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचन के लिए संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए हैं। 190 संशोधन अधिनियम (2026 का अधिनियम संख्यांक 6, राज्यपाल की अनुमति 24 मार्च 2026, राजपत्र 27 मार्च 2026) धारा 19 का खण्ड (ठ), परन्तुक का खण्ड (iv) और स्पष्टीकरण-I हटाता है, और तुरंत लागू हुआ। 191 RO के लिए बदलाव यह है कि संतान संबंधी अयोग्यता अब नहीं जाँचनी है और नामांकन के साथ संतान की सूचना भी नहीं ली जाती। 19040 आयोग के पत्र 10062 में भी नामांकन के साथ संतान संबंधी सूचना देना ज़रूरी नहीं बताया गया है। 40

H3नामांकन, संवीक्षा, नाम वापसी, प्रतीक की RO चेकलिस्ट (RO चेकलिस्ट: नाम-निर्देशन (Nominations, ZP/PS)..RO Nomination Scrutiny Register (ZP/PS)) में कौन-कौन से बिंदु हैं? (summarise each list's items with page)
ये सातों सूचियाँ प्रशिक्षक की बनाई चेकलिस्टें हैं, आयोग का आदेश नहीं। इनमें पहली पाँच विषयवार हैं और आख़िरी दो में मास्टर चेकलिस्ट (हाँ/नहीं के निशान वाली) और RO का नामांकन संवीक्षा रजिस्टर (RO Nomination Scrutiny Register) है। पहली चेकलिस्ट (नामांकन, 10 शीर्षक, पृष्ठ 1 से 10): नामांकन पत्र लेना; नामांकन की प्रारंभिक जाँच; प्रस्तावक; पावती और नामांकन रजिस्टर; आपराधिक मामले, संपत्ति, शिक्षा की जानकारी (उपाबन्ध-II का शपथ पत्र, 50 रुपये के स्टाम्प पर); नामांकनों की सूचना; नामांकितों की समेकित सूची; सांख्यिकी का प्रपत्र; जमानत राशि; मान्यता प्राप्त दल के प्रपत्र "क" और "ख" का लेना। दूसरी (योग्यता और अयोग्यता, पृष्ठ 1 से 5): आयु और आरक्षण की योग्यताएँ, संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून की अयोग्यताएँ, फिर पंचायती राज अधिनियम की धारा 19 की अयोग्यताओं की गिनी हुई सूची, बिंदु 1 से 14। तीसरी (संवीक्षा, पृष्ठ 1 से 5): संवीक्षा की सामान्य बातें, मुख्य और स्थानापन्न उम्मीदवार, नामांकन अस्वीकार करने के आधार (क) से (च), और वैध नामांकितों की सूची। चौथी (नाम वापसी, पृष्ठ 1 से 2): वापसी की सूचना के नियम और निर्विरोध चुनाव की घोषणा। पाँचवीं (चुनाव चिह्न का आवंटन, पृष्ठ 1 से 4): आरक्षित और मुक्त चिह्न, उम्मीदवार का चिह्न चुनना, प्रपत्र "क"/"ख", और प्रपत्र 5 में चुनाव लड़ने वालों की सूची। छठी (मास्टर चेकलिस्ट, पृष्ठ 1 से 5): 11 शीर्षकों में कुल 46 बिंदु। सातवीं (RO का संवीक्षा रजिस्टर, पृष्ठ 1 से 4): पृष्ठ 1 पर ब्योरा, पृष्ठ 2 पर पात्रता-मतदाता सूची-प्रस्तावक के 15 बिंदु, पृष्ठ 3 पर संवीक्षा-आपत्ति-निर्णय के 14 बिंदु, पृष्ठ 4 पर अंतिम सूची, वापसी और RO प्रमाणन के 15 बिंदु। एक बात ध्यान रखिए: आयोग के पत्र 4795 (13.07.2026) के मुताबिक़ धारा 19 के संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए हैं, इसलिए दूसरी चेकलिस्ट के पृष्ठ 5 पर धारा 19 की सूची का बिंदु 13 "दो से अधिक बच्चे" अब लागू नहीं होता। 190191

H4मेमो (memo) क्या है और RO को क्या करना है?
जिस काग़ज़ को प्रशिक्षक ने memo कहा है, वह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें RO अभ्यर्थी को कमी या दोष बताता है, ज़रूरी जानकारी माँगता है, या कोई घोषणा तय समय में देने का मौक़ा देता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। इसकी सीमा नियम 25, 27, 56, 58 और धारा 19 से तय होती है, और यह नामांकन मिलने के बाद प्रारंभिक जाँच या संवीक्षा के दौरान दिया जाता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। RO को यह देखना है कि कमी सुधारी जा सकती है या मूल कमी है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। सुधारी जा सकने वाली कमी (जैसे धारा 19 की घोषणा, आपराधिक मामले की जानकारी अधूरी) में memo देकर तय समय तक पूरा करवाया जा सकता है (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। मूल कमी (मूल नामांकन ही नियम 25 के अनुसार ठीक नहीं, जाति प्रमाण-पत्र, 1 या 5 प्रस्तावक, जमानत राशि, दल का पत्र अंतिम दिन दोपहर 3 बजे तक) में नोट खुद सावधानी बरतने को कहता है: जाति प्रमाण-पत्र पर "बहुत सावधानी आवश्यक है" और बाद में लाने की छूट "सामान्य नियम नहीं"; 1 प्रस्तावक बाद में जोड़ना "सुरक्षित नहीं माना जा सकता" और 5 प्रस्तावक बाद में जोड़कर नामांकन वैध करना "सामान्यतः संभव नहीं"; दल के पत्र पर memo से समय बढ़ाना "उचित नहीं"; जमानत की कमी memo से बाद में पूरी नहीं कराई जानी चाहिए (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नोट RO को हर अधूरे कॉलम पर पहले तीन बातें देखने को कहता है: क्या वह जानकारी वाक़ई ज़रूरी है, क्या कोई आपत्ति या सामग्री है, और क्या अभ्यर्थी संवीक्षा में ज़रूरी जानकारी देने को तैयार है; और याद दिलाता है कि memo देना अपने-आप नामांकन को वैध नहीं करता (प्रशिक्षण स्लाइड के मुताबिक़)। नामांकन पर अंतिम निर्णय नियम 25 के पालन और नियम 27 की संवीक्षा पर होता है। 24 यह प्रशिक्षक की टिप्पणी है और इसमें हाईकोर्ट के फ़ैसलों (गोपा राम 11.01.2007 और बच्चू सिंह 24.11.2016) का हवाला है, आयोग का आदेश नहीं, इसलिए इसे राय की तरह लें। आयोग के पत्र 10062 (06.10.2026) के मुताबिक़ संतान संबंधी योग्यता के प्रावधान हटा दिए गए हैं, इसलिए संतान की सूचना देना अब ज़रूरी नहीं। 40

साभार: मनीष कुमार गोयल · SLMT प्रशिक्षण सामग्री, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान

स्रोत

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  10. 10.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 118 पाठ में
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  93. 93.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 102 पाठ में
  94. 94.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 99, 103 पाठ में
  95. 95.आदेश 8703, दि. 14.09.2026, पृ. 1कख
  96. 96.आदेश 5052, दि. 23.12.2025, संकलन पृ. 101 पाठ में
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  104. 104.आदेश 1134, दि. 29.01.2026, संकलन पृ. 224कखगघङ
  105. 105.आदेश 1134, दि. 29.01.2026, संकलन पृ. 225, 226 पाठ में
  106. 106.आदेश 1161, दि. 30.01.2026, संकलन पृ. 278कख
  107. 107.आदेश 1161, दि. 30.01.2026, संकलन पृ. 278, 279 पाठ में
  108. 108.आदेश 1161, दि. 30.01.2026, संकलन पृ. 279कख
  109. 109.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 104कखगघ
  110. 110.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 8कखगघङ
  111. 111.आदेश 5310, दि. 30.07.2026, पृ. 1कखगघङचछ
  112. 112.आदेश 5310, दि. 30.07.2026, पृ. 2कखगघङ
  113. 113.आदेश 5310, दि. 30.07.2026, पृ. 3 पाठ में
  114. 114.आदेश 685, दि. 20.01.2026, संकलन पृ. 111कखगघ
  115. 115.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 106 पाठ में
  116. 116.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 107कखगघ
  117. 117.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 108 पाठ में
  118. 118.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 297कखगघङचछजझञटठड
  119. 119.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 298कखगघङचछज
  120. 120.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 114कखगघङ
  121. 121.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 91कखगघ
  122. 122.पत्र 1100, दि. 28.01.2026, संकलन पृ. 325कख
  123. 123.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 92कखग
  124. 124.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 133 पाठ में
  125. 125.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 108कखग
  126. 126.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 103कखगघङचछज
  127. 127.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 96 पाठ में
  128. 128.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 105 पाठ में
  129. 129.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 109 पाठ में
  130. 130.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 288कख
  131. 131.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 293, 288 पाठ में
  132. 132.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 19कखगघङचछज
  133. 133.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 18कख
  134. 134.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 113कखगघङ
  135. 135.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 21 पाठ में
  136. 136.आदेश 9836, दि. 03.10.2026, पृ. 5 पाठ में
  137. 137.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 26 पाठ में
  138. 138.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 9कखगघङ
  139. 139.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 22कख
  140. 140.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 56 पाठ में
  141. 141.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 12कखग
  142. 142.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 102 पाठ में
  143. 143.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 45कख
  144. 144.MPSV अनुदेश पुस्तिका, पृ. 42 पाठ में
  145. 145.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 25कखगघङच
  146. 146.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 11कख
  147. 147.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 104 पाठ में
  148. 148.आदेश 1134, दि. 29.01.2026, संकलन पृ. 226कखगघङचछजझञ
  149. 149.आदेश 1134, दि. 29.01.2026, संकलन पृ. 227कखगघङचछजझ
  150. 150.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 116कखगघ
  151. 151.आदेश 9836, दि. 03.10.2026, पृ. 12 पाठ में
  152. 152.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 292कखगघङ
  153. 153.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 295 पाठ में
  154. 154.MPSV अनुदेश पुस्तिका, पृ. 43 पाठ में
  155. 155.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 296कखगघङचछजझञट
  156. 156.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 289कखगघ
  157. 157.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 290कखगघङचछजझ
  158. 158.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 293 पाठ में
  159. 159.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 18 पाठ में
  160. 160.मतपेटी मार्गदर्शिका, पृ. 21 पाठ में
  161. 161.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 82कखगघङ
  162. 162.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 153 पाठ में
  163. 163.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 81 पाठ में
  164. 164.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 65 पाठ में
  165. 165.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 129कखगघ
  166. 166.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 66 पाठ में
  167. 167.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 158 पाठ में
  168. 168.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 298, 299कख
  169. 169.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 301कखग
  170. 170.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 300कखगघङ
  171. 171.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 121कखगघङचछजझञ
  172. 172.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 125कखगघ
  173. 173.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 124कख
  174. 174.आदेश 175, दि. 05.01.2026, संकलन पृ. 125 पाठ में
  175. 175.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 80 पाठ में
  176. 176.MPSV अनुदेश पुस्तिका, पृ. 47 पाठ में
  177. 177.MPSV अनुदेश पुस्तिका, पृ. 48कख
  178. 178.पत्र 1299, दि. 03.02.2026, संकलन पृ. 296, 297 पाठ में
  179. 179.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 115 पाठ में
  180. 180.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 217कख
  181. 181.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 218कखगघङ
  182. 182.आदेश 1024, दि. 27.01.2026, संकलन पृ. 315 पाठ में
  183. 183.आदेश 1024, दि. 27.01.2026, संकलन पृ. 316कखग
  184. 184.ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 219 पाठ में
  185. 185.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 122कखगघङचछजझञटठड
  186. 186.पंचायती राज चुनाव क़ानून पुस्तिका (अंग्रेज़ी), पृ. 123 पाठ में
  187. 187.आदेश 4185, दि. 17.10.2025, संकलन पृ. 189कखगघङचछ
  188. 188.आदेश 4185, दि. 17.10.2025, संकलन पृ. 190कख
  189. 189.ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश ई-54050, दि. 31.08.2026, पृ. 1कख
  190. 190.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 1कखगघ
  191. 191.आदेश 4795, दि. 13.07.2026, पृ. 2कख