साइट पर काम चल रहा है · अपडेट 03.11.2026अगर कोई त्रुटि दिखे तो डेवलपर भरत चौधरी (व्याख्याता, रा.उ.मा.वि., जेठन्तरी — ब्लॉक: समदड़ी, जिला: बालोतरा) को बताइए: WhatsApp: +91-7357578216
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पंचायती राज चुनाव 2026 में सेक्टर मजिस्ट्रेट और ज़ोनल अधिकारी के काम के सवाल-जवाब: हर जवाब आयोग के आदेश, मार्गदर्शिका या SLMT प्रशिक्षण सामग्री के पृष्ठ के हवाले से।
हर जवाब के नीचे उसका स्रोत है। नीला लिंक दबाइए: वही पेज खुलेगा जहाँ से जवाब लिया गया है, पहले आयोग का आदेश या मार्गदर्शिका, फिर SLMT प्रस्तुति का पृष्ठ। बिना लिंक वाला स्रोत ऐसी प्रशिक्षण सामग्री है जिसकी PDF इस साइट पर नहीं है।
1सेक्टर मजिस्ट्रेट: मतदान से पहले 11 सवाल
नियुक्ति और मतदान से पहले की तैयारी 4
A2मतदान से पहले सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने क्षेत्र के मतदान केन्द्रों पर जाकर क्या-क्या देखे?
सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने जोन के हर मतदान केन्द्र के पूरे इलाके का गहन भ्रमण करता है, स्थानीय समुदायों और सूत्रों से मिलता है, और थानाधिकारी, विकास अधिकारी, तहसीलदार जैसे स्थानीय अधिकारियों से सलाह करता है। केन्द्र पर यह पक्का करना है कि नक्शे पर दिखाए रूट व्यावहारिक हैं, और पानी, छाया, रैम्प, टॉयलेट, दूरभाष जैसी व्यवस्था तथा भवन की हालत ठीक है। यह भी देखना है कि केन्द्र की 200 मीटर की परिधि में किसी दल का कार्यालय न चल रहा हो, और केन्द्र के संपर्क के लिए फोन नंबर की सूचना लेनी है।
A3Vulnerability mapping में किन गाँवों और किन लोगों की सूची बनती है, और वह सूची किसे दी जाती है?
भय या प्रताड़ना से जुड़ी चार सूचियाँ बनती हैं। पहली, ऐसे परिवारों और घरों की जो भय या प्रताड़ना से ग्रस्त हैं या असुरक्षित महसूस करते हैं। दूसरी, उन व्यक्तियों और तथ्यों की जो भय-प्रताड़ना का कारण बने हैं। तीसरी, ऐसे व्यक्तियों और तथ्यों के बारे में की गई तथा प्रस्तावित कार्यवाही की। चौथी, ऐसे मतदाताओं को सुरक्षित रखने के लिए उनके संपर्क के लोगों के नाम और फोन नंबर की; इन संपर्क लोगों को आपात स्थिति के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट अपना मोबाइल नंबर भी देता है।
A4सेक्टर मजिस्ट्रेट को कौन-सी मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ मिलती हैं, और वे किस काम के लिए हैं?
सेक्टर मजिस्ट्रेट को मजिस्ट्रेटी अधिकार उसके नियुक्ति आदेश के आधार पर मिलते हैं, इसलिए नियुक्ति आदेश देखना होता है, और वह अपने तय क्षेत्र (सेक्टर) की सीमा में ही काम करता है। तुरंत खतरे, दंगे, मारपीट या शांति भंग को रोकने के लिए लिखित आदेश जारी करने की शक्ति तभी है जब राज्य सरकार ने उसे विशेष रूप से सशक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट बनाया हो। अपराध रोकने के लिए गिरफ्तारी की शक्ति पुलिस अधिकारी की है; सेक्टर मजिस्ट्रेट पुलिस के वैध निर्देशों में सहयोग करता है।
A5सेक्टर मजिस्ट्रेट के ज़रिए बूथ तक क्या पहुँचता है, और भ्रमण पर वह बूथ में क्या दर्ज करता है?
आरक्षित मशीन आयोग के आदेश के अनुसार जोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यम से संबंधित मतदान केन्द्र पर पहुँचाई जाती है, यानी जिस केन्द्र को ज़रूरत हो वहाँ सेक्टर मजिस्ट्रेट के ज़रिए जाती है। मतदान केन्द्र के भ्रमण पर सेक्टर मजिस्ट्रेट उस केन्द्र में रखी विजिट शीट में अपने इन्द्राज पर हस्ताक्षर करता है।
B1रवानगी केन्द्र पर सेक्टर मजिस्ट्रेट मशीनों और सामग्री की कौन-सी जाँच करे?
सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड में रवानगी के समय मशीन की ये जाँचें दी गई हैं: कंट्रोल यूनिट और मतदान यूनिट वही हों जो उस बूथ के लिए तैयार की गई थीं, इसकी पुष्टि एड्रेस टैग से होती है। CU चालू करके डिस्प्ले पर तारीख और समय मिलाना है। LINK ERROR या BU NOT RESPONDING दिखे तो CU और BU का कनेक्शन हटाकर दोबारा जोड़ना है, और एक से अधिक BU हों तो उनका क्रम (Sequence) सही होना चाहिए; फिर भी दिखे तो वह BU बदलवानी है। CLOCK ERROR दिखे तो CU बदलवानी है, पर मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली मशीन (MPMV) में CU नहीं बदली जाती, ऐसी स्थिति में पंचनामा तैयार किया जाता है। बैटरी MPSV और MPMV में HIGH मोड में और M3A में 95 प्रतिशत से ऊपर होनी चाहिए, नहीं तो CU बदलवानी है। CU पर दिखी उम्मीदवारों की संख्या और BU के बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों की संख्या बराबर होनी चाहिए। MPSV मशीन में 'SDMM NOT RESPONDING' दिखे तो CU बदलवानी है, और जाँच के बाद CU को OFF करना है। रवानगी से पहले कोई भी संदेह हो तो वितरण के समय ही जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकृत अधिकारियों से चर्चा करके हल करना है।
B2रवानगी के समय दल का कोई सदस्य नहीं पहुँचा, तो क्या होता है?
ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड में उसके इंतज़ाम के कामों में यह लिखा है कि वह मतदान दलों और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की हाज़िरी जाँचे और ज़रूरत हो तो गैरहाज़िर व्यक्ति की जगह किसी और को भेजे। मतदान के दिन ज़रूरत पड़ने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट आरक्षित दलों में से मतदान कर्मियों को बदलता है या मदद के लिए लगाता है।
B3दल मतदान केन्द्र पर पहुँच गया, यह सूचना किसे और कब देनी है?
सेक्टर मजिस्ट्रेट मतदान से पहले के दिन यह पक्का करता है कि मतदान दल केन्द्रों पर पहुँच गए हैं और सामग्री उनके पास है। उसकी प्रशिक्षण स्लाइड में उसी दिन के कामों में नियंत्रण कक्ष को ओ.के. रिपोर्ट भेजना भी अलग से लिखा है।
B4मतदान से पहले के दिन सेक्टर मजिस्ट्रेट केन्द्रों पर क्या-क्या देखता है?
सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण प्रस्तुति जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव की है; उसमें मतदान से पहले के दिन के काम ये हैं। वह पक्का करता है कि मतदान दल केन्द्र पर पहुँच गए हैं और पूरी सामग्री उनके पास है। वह देखता है कि सुरक्षा योजना के अनुसार पुलिस बल केन्द्र पर पहुँच गया है। मतदान कर्मियों को प्रक्रिया में कोई शंका हो तो उसे दूर करता है। जहाँ मतदान केन्द्र में वीडियो या फोटोग्राफी होनी है, वहाँ वीडियोग्राफर/फोटोग्राफर सुपरवाईजर पहुँच गया है, यह देखता है। मतदान केन्द्र की 200 मीटर की परिधि में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय नहीं है, यह देखता है। आखिर में नियन्त्रण कक्ष को ओ.के. रिपोर्ट भेजता है।
C1मॉक पोल कितने बजे शुरू होता है, और अभिकर्ता न आएँ तो कितनी देर रुकना है?
मॉक पोल मतदान शुरू होने के तय समय से 60 मिनट पहले, मतदान अभिकर्ताओं की मौजूदगी में किया जाता है। केवल एक अभिकर्ता हो या कोई भी न हो, तो मतदान दल 15 मिनट इंतज़ार करता है। फिर भी कोई अभिकर्ता न आए तो मॉक पोल करके मशीन की सीलिंग कर ली जाती है और तय समय पर मतदान शुरू होता है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार अभिकर्ताओं को मतदान शुरू होने से एक घण्टा पहले बूथ पर बुलाना चाहिए।
C2मॉक पोल में कम से कम कितने वोट डालने हैं, और नतीजा किससे मिलाना है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मॉक पोल में नोटा सहित हर उम्मीदवार के लिए कम से कम 1-1 वोट डालना अनिवार्य है। मॉक पोल पूरा होने पर CU का Result बटन दबाकर मिला नतीजा हाथ से तैयार किए मॉक पोल प्रमाण-पत्र के नतीजे से मिलाया जाता है। दोनों में कोई फर्क हो तो तुरंत रिटर्निंग अधिकारी को बताया जाता है और उनके निर्देश के अनुसार कार्यवाही होती है।
C4मॉक पोल प्रमाण-पत्र पर किसके हस्ताक्षर होते हैं, और वह कहाँ जाता है?
आयोग के पत्र 1161 (30.01.2026) के अनुसार मॉक पोल प्रमाण-पत्र पर मॉक पोल में भाग लेने वाले मतदान अभिकर्ता या मतदान दल के सदस्य के हस्ताक्षर लिए जाते हैं, और मतदान अधिकारी (PO) भी उसे खुद हस्ताक्षरित करता है। इसके बाद प्रमाण-पत्र को घोषणाओं के साथ जोड़कर जिला परिषद सदस्य के लिफाफे (PE-56) और पंचायत समिति सदस्य के लिफाफे (PE-55), सरपंच पद के लिफाफे (PE-56A) और वार्ड पंच के लिफाफे (PE-55A) में रखा जाता है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान अधिकारी (PO) तैयार परिशिष्ट-19 को परिशिष्ट-7 के साथ लगाता है और डायरी के बिन्दु संख्या 25 में मॉक पोल का ब्योरा और जारी प्रमाण-पत्र का जिक्र करता है।
D1मतदान के दिन सेक्टर मजिस्ट्रेट को कौन-सी सूचनाएँ, किसे और किस समय भेजनी हैं (जैसे मतदान प्रतिशत)?
मतदान प्रतिशत उच्च अधिकारी जिस-जिस समय पर कहें, सेक्टर मजिस्ट्रेट उन्हें समय-समय पर बताता है। जिन केन्द्रों पर मॉक पोल एक ही मतदान अभिकर्ता के सामने हुआ या कोई अभिकर्ता था ही नहीं, उनकी सूचना मतदान प्रारम्भ होने के बाद देनी होती है। इसके अलावा वह मतदान अभिकर्ताओं की मौजूदगी और गैरहाज़िरी की रिपोर्ट करता है, और मतदान के दिन आई शिकायतें निपटाता है।
D2मतदान के बीच मशीन खराब हो जाए, तो सेक्टर मजिस्ट्रेट क्या करे?
जहाँ मशीन बदलना ज़रूरी हो, वहाँ सेक्टर मजिस्ट्रेट रिटर्निंग अधिकारी (RO) से मशीन बदलवाता है; RO को आरक्षित वोटिंग मशीन भी रखनी होती है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार बदली गई मशीन से भी मॉक पोल कराया जाता है। मशीन की खराबी से मतदान संभव न रहे तो मतदान अधिकारी (PO) इसकी रिपोर्ट तुरंत RO को करता है और डायरी में ब्योरा लिखता है।
D3मतदान केन्द्र के अंदर कौन-कौन आ सकता है? क्या कोई मोबाइल लेकर अंदर जा सकता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ में निर्वाचकों के अलावा केवल ये लोग आ सकते हैं: मतदान अधिकारी, चुनाव के संबंध में ड्यूटी पर पुलिस या लोकसेवक, आयोग द्वारा अधिकृत व्यक्ति, अभ्यर्थी, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में उसका निर्वाचन अभिकर्ता, और हर अभ्यर्थी का एक मतदान अभिकर्ता (पंच के चुनाव में मतदान अभिकर्ता नियुक्त नहीं हो सकता), किसी मतदाता की गोद का बच्चा, और वे लोग जिन्हें मतदान अधिकारी (PO) मतदाताओं की पहचान के लिए बुलाए। इनके अलावा कोई भी व्यक्ति केन्द्र में नहीं जाएगा। मार्गदर्शिका यह भी कहती है कि ड्यूटी पर “लोकसेवक” में सामान्य पुलिस ऑफिसर तभी आते हैं जब मतदान अधिकारी (PO) उन्हें कानून और व्यवस्था या ऐसे किसी और उद्देश्य से बुलाए, और संघ व राज्यों के मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री इसमें शामिल नहीं हैं। आयोग के पत्र 6726 (24.12.2009) के अनुसार, जिसके निर्देश आयोग के 20.01.2026 के पत्र के अनुसार 2026 के आम चुनाव में भी यथाशक्य परिवर्तनों के साथ लागू रहेंगे, कोई भी व्यक्ति मतदान बूथ और उसके 100 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन नहीं ले जाएगा, और ले जाने पर वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी फोन अपने पास रख लेता है और दायरे से बाहर जाने के बाद लौटाता है। चुनाव ड्यूटी पर लगे पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट, मतदान अधिकारी, सहायक मतदान अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षक पर यह रोक अपने निर्वाचन कर्तव्य निभाते समय लागू नहीं है, पर वे अपना फोन साइलेंट मोड में रखेंगे।
D4मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र (EPIC) न हो, तो कौन-से दस्तावेज़ चलते हैं?
आयोग के आदेश 5310 (30.07.2026) के अनुसार पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में मतदाता को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (EPIC) प्रस्तुत करना होगा। वह न दिखा पाए तो इनमें से कोई एक मूल फोटोयुक्त दस्तावेज चलेगा, जो चुनाव की घोषणा से पहले जारी हुआ हो: आधार कार्ड; VB-G RAM G या मनरेगा कार्ड; बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक; श्रम मंत्रालय की योजना का स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड; ड्राइविंग लाइसेंस; पैन कार्ड; भारतीय पासपोर्ट; फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज; केन्द्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम या पब्लिक लिमिटेड कंपनी का फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र; सांसद और विधायक का सरकारी पहचान पत्र; यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड। जिस दस्तावेज पर कालातीत होने की अवधि लिखी हो, वह उसी अवधि तक मान्य है। पहचान के मामले में केवल परिवार के मुखिया को अपने परिवार के दूसरे सदस्यों की पहचान करने की अनुमति है, बशर्ते सभी सदस्य उसके साथ आएं। झूठी पहचान के मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के अन्तर्गत कार्यवाही करने को आदेश कहता है। यह आदेश पहले के आदेश 559 (07.02.2019) और 603 (19.01.2026) की जगह लागू है।
D5मतदान का समय खत्म होने पर कतार में खड़े लोगों का क्या होता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान खत्म होने के समय बूथ पर जितने मतदाता मौजूद हों, उन सबको वोट देने दिया जाता है, चाहे मतदान कुछ और देर चलता रहे। निर्धारित समय पर मतदान अधिकारी (PO) बाहर आकर कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति से क्रम संख्या 1 से शुरू करते हुए सबको अपने हस्ताक्षर वाली पर्ची दे देता है। इससे कतार में पहले से लगे लोग समय के बाद भी वोट दे पाते हैं, और निर्धारित समय के बाद कोई नया व्यक्ति कतार में शामिल नहीं हो पाता।
D6कोई मतदाता कहे कि उसके नाम से पहले ही वोट डल चुका है, तो क्या होता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार जब असली मतदाता की जगह कोई फर्जी मतदाता वोट देकर चला गया हो और असली मतदाता बाद में आए, तो उसे मशीन से वोट देने की जगह निविदत्त मतपत्र (Tender Vote) दिया जाता है। दूसरा व्यक्ति असली है या फर्जी, यह मतदान अधिकारी (PO) को मतदान अभिकर्ता की सहायता से तय करना होता है। पहचान से संतुष्ट होने पर ही मतदाता की बाएँ हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही लगती है, प्ररूप-13 की सूची में उसकी प्रविष्टि होती है, उसके हस्ताक्षर या अंगूठा लगवाया जाता है और तब निविदत्त मतपत्र जारी होता है। मतदाता मतदान कक्ष में ऐरो क्रॉस मार्क सील से अपना वोट चिन्हित करता है और मतपत्र मोड़कर मतदान अधिकारी (PO) को देता है, जो उसे इसी काम के लिए रखे लिफाफे में डालता है। हर बूथ को निविदत्त मतपत्रों के लिए बीस मतपत्र दिए जाते हैं, और कम पड़ें तो मतदान अधिकारी (PO) जोनल मजिस्ट्रेट को बताता है।
D7दृष्टिहीन या दिव्यांग मतदाता के साथ साथी कौन जा सकता है, और उसकी शर्तें क्या हैं?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में साथी की सहायता से वोट देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए दृष्टिबाधित या दिव्यांग मतदाता के साथ कोई साथी वोट डलवाने नहीं जा सकता। जो मतदाता प्रतीक चिन्ह पहचानने या बटन दबाने में असमर्थ हो, उसकी इच्छा के अनुसार मतदान अधिकारी उसकी ओर से वोट दर्ज करता है। ऐसे हर मामले में रजिस्टर में उस मतदाता की प्रविष्टि के सामने संक्षिप्त टिप्पण और कारण लिखा जाता है, क्रम संख्या पर "AA" भी लिखा जाता है और रजिस्टर के कॉलम-4 में कारण (दिव्यांग/दृष्टिबाधित) दर्ज होता है।
D8मतदाता की उम्र कम लगे, या उसकी पहचान पर आपत्ति हो, तो क्या करना है?
मतदाता की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष से काफी कम लगे, पर उसकी पहचान और नामावली में नाम से संतोष हो, तो मतदान अधिकारी (PO) उससे उम्र की घोषणा परिशिष्ट-10 के प्ररूप में लेता है; यह घोषणा उस वर्ष की 1 जनवरी को उसकी उम्र के बारे में होती है जिसके सन्दर्भ से नामावली तैयार या पुनरीक्षित की गई है। घोषणा लेने से पहले उसे मिथ्या घोषणा पर राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 18-क में लिखे दण्ड के बारे में बताया जाता है। घोषणा देने वालों की सूची परिशिष्ट-11 के भाग-I में और घोषणा से इन्कार करके बिना वोट दिए चले जाने वालों की सूची भाग-II में बनती है, और घोषणाएँ व सूचियाँ लिफाफा नं. PE-57 में रखी जाती हैं, जिसे सील नहीं किया जाता। पंच-सरपंच का मतदान भी ईवीएम से हो तो उसकी ऐसी सूची लिफाफा नं. PE-57A में रखी जाती है, जिसे भी सील नहीं किया जाता। पहचान पर आपत्ति हो तो बूथ पर बैठे मतदान अभिकर्ता, उम्मीदवार या निर्वाचन अभिकर्ता पहचान की जाँच के समय ही चुनौती दे सकते हैं, बाद में नहीं, और चुनौती के बाद की सारी कार्यवाही मतदान अधिकारी (PO) करता है। पंचायत चुनाव में किसी उम्मीदवार द्वारा मतदान बूथ पर मतदाता की पहचान को चुनौती देने से पहले चैलेन्ज फी जमा कराने का कोई प्रावधान नहीं है।
E1मतदान केन्द्र के 100 मीटर और 200 मीटर के भीतर क्या-क्या मना है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ में और मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी तक प्रचार करना अपराध है, ऐसा करने वाले को पुलिस बिना वारन्ट गिरफ्तार कर सकती है। मतदान अभिकर्ता उस उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह या नाम का बैज नहीं पहन सकता, और उम्मीदवारों को अपना चुनाव बूथ मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद ही लगाने की अनुमति है। बूथ के अन्दर या निकट उच्छृंखल आचरण करने वाले को पुलिस से तुरन्त गिरफ्तार करवाया जा सकता है, और लाउडस्पीकर या मेगाफोन की आवाज से कार्यवाही में बाधा हो तो पुलिस उसे फौरन बन्द करवा सकती है (धारा 131)। आयोग के पत्र 6726 (24.12.2009) के अनुसार, जिसके निर्देश आयोग के 20.01.2026 के पत्र के अनुसार 2026 के आम चुनाव में भी यथाशक्य परिवर्तनों के साथ लागू रहेंगे, मतदान बूथ और उसके 100 मीटर के दायरे में कोई मोबाइल फोन नहीं ले जाएगा; ले जाने पर वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी फोन अपने पास रख लेता है और दायरे से बाहर जाने पर लौटाता है। चुनाव ड्यूटी पर लगे अधिकारियों पर यह रोक अपना निर्वाचन कर्तव्य निभाते समय लागू नहीं है, पर वे अपना फोन साइलेंट मोड में रखेंगे। आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के पैरा 6(4) के अनुसार किसी भी मतदान बूथ के भवन के 200 मीटर के दायरे में कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर या बैनर नहीं लगाए जाएँगे, पर मतदान के दिन अभ्यर्थियों के निर्वाचन बूथ पर एक बैनर लगाया जा सकता है, जो 2x5 फीट से बड़ा न हो। आयोग के आदेशों के संकलन में दी गई, राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिये आदर्श आचरण संहिता कहती है कि मतदान केन्द्र से 200 मीटर की परिधि में अभ्यर्थी अपना कैम्प किसी भी स्थिति में न लगाएँ। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड के अनुसार मतदान केन्द्र के 200 मीटर के दायरे में मालिक अपने या परिवार के सदस्यों के लिए निजी वाहन नहीं ले जा सकते। सेक्टर मजिस्ट्रेट को यह भी देखना है कि मतदान केन्द्र की 200 मीटर की परिधि में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय संचालित न हो। सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड में उसका यह काम भी लिखा है कि दलों या अभ्यर्थियों के बूथ मतदान केन्द्र की सीमा से 200 मीटर दूर रहें, यह पक्का करना।
E2बूथ कैप्चरिंग या हिंसा हो जाए, तो सेक्टर मजिस्ट्रेट तुरंत क्या करे?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार बूथ कैप्चरिंग होने पर मतदान अधिकारी (PO) तुरन्त कंट्रोल यूनिट का Close बटन दबाकर मशीन बन्द करता है और यूनिटें अलग कर देता है, रिटर्निंग अधिकारी (RO) को तुरन्त रिपोर्ट करता है और अपनी डायरी में ब्योरा लिखता है। बूथ कैप्चरिंग धारा 135-क के अन्तर्गत अपराध है। सेक्टर मजिस्ट्रेट की कार्रवाई यह है कि तत्काल पुलिस बल बुलाए, मतदान केन्द्र सुरक्षित करे और RO/DEO को report करे। भीड़ जमा हो तो उसे नियन्त्रित कराए और मतदान केन्द्र सुरक्षित करे, दंगे की स्थिति तत्काल नियन्त्रित करे और मतदान प्रभावित हो तो RO/DEO को सूचना दे। मार्गदर्शिका के अनुसार खुली हिंसा से बाधा, किसी दैवीय संकट या किसी और पर्याप्त कारण से बूथ पर मतदान की कार्यवाही बिल्कुल असंभव हो जाए, तो मतदान अधिकारी (PO) उस बूथ पर आगे का मतदान स्थगित घोषित करता है, जल्दी से जल्दी संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को सूचित करता है और लोगों में घोषणा करता है कि स्थगित मतदान के बारे में बाद में सूचित किया जाएगा। फिर वह प्रयोग में लाई गई मतदान मशीन, निर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति और मतदाता रजिस्टर जैसे ज़रूरी कागज़ उम्मीदवारों या उनके निर्वाचन/मतदान अभिकर्ताओं के सामने (पंच/सरपंच के चुनाव में अभ्यर्थी/मतदान अभिकर्ता के सामने) उसी तरह सीलबन्द करता है जैसे मतदान सामान्य रूप से खत्म होने पर किया जाता है। मार्गदर्शिका यह भी कहती है कि हल्की बरसात के छींटे, जोर की हवा या मामूली लड़ाई-झगड़ा मतदान स्थगित करने के लिए काफी कारण नहीं है। स्थगित मतदान जिस स्तर पर छोड़ा गया था वहीं से, राज्य निर्वाचन आयोग की तय तिथि और समय पर फिर शुरू होता है (पंच/सरपंच के चुनाव में जिला निर्वाचन अधिकारी की तय तिथि और समय पर); इसके लिए मतदान अधिकारी (PO) रिटर्निंग अधिकारी से चिन्हित प्रति और मतदाता रजिस्टर का सीलबन्द पैकिट लेता है और नई मतदान मशीन काम में लेता है।
E3मतदान से 48 घंटे पहले से क्या-क्या बंद हो जाता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार वोटिंग समाप्त होने के लिए तय 48 घण्टों की अवधि में चुनाव सभाओं, जुलूसों, सिनेमा, टीवी पर प्रचार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि से चुनाव प्रचार पर रोक रहती है (धारा 126)। इसी 48 घंटे की अवधि में शराब का बेचना, बाँटना या दिया जाना भी अपराध है (धारा 135-ग)।
E4पंचायत चुनाव 2026 में सूखा दिवस कब-कब हैं, और किस इलाक़े में?
वित्त (आबकारी) विभाग के आदेश के अनुसार, जो आयोग के पत्र 10542 (15.10.2026) के साथ जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया, जिन क्षेत्रों में उस चरण में चुनाव होना है वहाँ और उनके 5 कि.मी. परिधीय क्षेत्र में सूखा दिवस रहेगा। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में यह शाम 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक है: पहला चरण 20.10.2026 से 22.10.2026, दूसरा 26.10.2026 से 28.10.2026, तीसरा 01.11.2026 से 03.11.2026 और चौथा 12.11.2026 से 14.11.2026। पंच और सरपंच के चुनाव में यह शाम 6:00 बजे से मतगणना समाप्ति तक है: पहला चरण 22.10.2026 से 24.10.2026, दूसरा 28.10.2026 से 30.10.2026, तीसरा 03.11.2026 से 05.11.2026 और चौथा 14.11.2026 से 16.11.2026। इसके अलावा जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती की तारीख 20.11.2026 को भी पंचायत क्षेत्रों में सूखा दिवस है।
E5पैसा, शराब या तोहफ़े बँटते दिखें, तो यह कौन-सा अपराध है और क्या कार्रवाई होती है?
चुनाव में पैसा या सामग्री बाँटना रिश्वत है, जिसकी सज़ा धारा 173 के अनुसार 1 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों है। मतदान समाप्ति पर पूर्ण होने वाली 48 घंटे की अवधि में शराब का बेचना या बाँटना अलग अपराध है (धारा 135-ग), जिसकी सज़ा सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड के अनुसार 6 माह तक कारावास, या ₹2,000 तक जुर्माना, या दोनों है। सेक्टर मजिस्ट्रेट धन या सामग्री का वितरण रुकवाए, तथ्य, वीडियो और गवाह सुरक्षित कराए, पुलिस को तत्काल भेजे और RO/DEO को रिपोर्ट करे। शराब के मामले में पुलिस या Excise को सूचना दी जाती है और सामग्री, वाहन और स्थान का रिकॉर्ड रखा जाता है।
E6मतदाताओं को ढोने वाले वाहन पकड़े जाएँ, तो क्या करना है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदाताओं को गैर कानूनी ढंग से लाने-ले जाने से रोकने का मतदान अधिकारी (PO) के पास कोई कारगर साधन नहीं है। ऐसी शिकायत सामने आए तो शिकायत करने वाले को समझाया जाए कि वह धारा 133 सपठित धारा 125(5) के तहत संबंधित थाने में FIR दर्ज करवाए, और भ्रमण कर रहे जोनल मजिस्ट्रेटों अथवा रिटर्निंग अधिकारी या सहायक रिटर्निंग अधिकारी और पुलिस कर्मचारी या अधिकारी को भी तुरन्त बताया जाए। सेक्टर मजिस्ट्रेट के लिए डेक कहता है कि वाहन अवैध रूप से मतदाताओं को लाने-ले जाने का काम कर रहा हो तो संबंधित पुलिस मोबाइल पार्टी या थाने को कार्यवाही के लिए तुरन्त सूचित करे।
F1आरक्षित मशीनें कहाँ रहती हैं, उन्हें कौन तैयार करता है, और वे बूथ तक कैसे पहुँचती हैं?
आयोग के पत्र 9496 (28.09.2026) के अनुसार आरक्षित मशीनें संबंधित पंचायत समिति स्तर पर रखी जाती हैं, और कौन-सी आरक्षित मशीन किस मतदान केन्द्र पर काम आएगी, यह किसी को ज्ञात नहीं होता। जिस केन्द्र पर आरक्षित मशीन की ज़रूरत हो, उससे संबंधित मतपत्र को आरक्षित मशीन पर लगाकर पंचायत समिति स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञ या कंपनी इन्जीनियर से तुरंत तैयार कराया जाता है। तैयार आरक्षित मशीन को जोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यम से उस मतदान केन्द्र पर पहुँचाया जाता है। MPSV और MPMV मॉडल की आरक्षित मशीन में Enter Ward no. के चार अंकों में पहले दो अंक जिला परिषद क्षेत्र संख्या के और अगले दो अंक पंचायत समिति क्षेत्र संख्या के भरे जाते हैं (जैसे 11 और 51 हो तो 1151), और Enter Booth no. में उस बूथ का क्रमांक भरा जाता है (जैसे 189)। तैयार की जा रही सभी मशीनों का END बटन MASK रहता है।
F2मशीन बदलनी पड़े, तो कौन बदलता है, कब नहीं बदलनी, और क्या लिखा-पढ़ी होती है?
जहाँ मशीन बदलना ज़रूरी हो, वहाँ सेक्टर मजिस्ट्रेट रिटर्निंग अधिकारी (RO) से मशीन बदलवाता है, और RO को आरक्षित वोटिंग मशीन भी रखनी होती है। रवानगी के समय की जाँच में बैटरी HIGH मोड (MPSV/MPMV) में हो या M3A में 95 प्रतिशत से अधिक हो तो CU नहीं बदलना है, अन्यथा बदलना है। CU और BU दोनों पर अभ्यर्थियों की संख्या समान हो तो मशीन नहीं बदलनी है, अन्यथा बदलनी है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार बदली गई मशीन से भी मॉक पोल कराया जाता है। मशीन की खराबी से वोटिंग संभव न रहे तो मतदान अधिकारी (PO) इसकी रिपोर्ट तुरंत RO को करता है और डायरी में भी ब्योरा लिखता है, और वोट रिकॉर्ड करते समय तकनीकी खराबी जैसी घटना के पूरे तथ्यों की रिपोर्ट तत्काल RO को भेजी जाती है।
F3मतदान खत्म होने पर मशीन कैसे बंद और सील होती है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बंद करने के तय समय पर मौजूद कोई मतदाता वोट देने से छूटा नहीं है, यह पक्का करके, और वोट देने दिए गए अंतिम मतदाता के वोट देने के बाद ही, मतदान अधिकारी (PO) मतदान समाप्ति की घोषणा करता है, फिर नियंत्रण यूनिट का Close बटन दबाता है, जो तभी काम करता है जब Busy लैम्प चालू न हो। अंतिम मतदाता का वोट रिकार्ड होने के बाद भूल से बैलेट बटन दब जाने से, या अंतिम मतदाता के बैलेट बटन दबने के बाद वोट रिकार्ड करने से इन्कार करने से Busy लैम्प चालू हो जाए, तो नियंत्रण यूनिट को मतदान यूनिट से अलग करके पावर स्विच फिर से चालू किया जाता है; तब Busy लैम्प बुझ जाता है और Close बटन काम करने लगता है। Close के बाद पैनल पर कुल वोट दिखते हैं, उन्हें प्ररूप-14 के भाग I में तुरंत लिखा जाता है; कुल संख्या Total बटन दबाकर भी देखी जाती है, और मार्गदर्शिका के अनुसार अंत में मतदाता रजिस्टर में दर्ज मतदाताओं की संख्या से उसका मिलान किया जाता है। मार्गदर्शिका के अनुसार मशीन में रिकार्ड मतों की कुल संख्या, मतदाता रजिस्टर (प्ररूप-12) के स्तम्भ-1 में दर्ज मतदाताओं की कुल संख्या में से उन मतदाताओं की संख्या घटाकर, जिन्हें मतदान की गोपनीयता भंग करने पर वोट देने नहीं दिया गया (रजिस्टर के अभ्युक्ति स्तम्भ के अनुसार), उसके बराबर होनी चाहिए। सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड में यह भी लिखा है कि अंतिम मतदाता की प्रविष्टि के नीचे मतदान प्रमाण-पत्र दर्ज कर उस पर हस्ताक्षर लिए जाएँ। हाजिर मतदान अभिकर्ताओं में से जो प्ररूप-14 की प्रति लेना चाहे, उसे प्रमाणित प्रति दी जाती है। फिर नियंत्रण यूनिट का पावर स्विच बन्द कर मतदान यूनिट और नियंत्रण यूनिट का संबंध अलग किया जाता है, मतदान यूनिट के एड्रेस टैग पर मतदान अधिकारी (PO) अपने हस्ताक्षर और मुहर लगाकर उसे सील करता है, और हाजिर अभ्यर्थी या मतदान अभिकर्ता चाहें तो वे भी उस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, दोनों यूनिट कैरिंग बक्सों में रखी जाती हैं और बक्से को धागे से सील कर एड्रेस टैग लगाया जाता है। सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण प्रस्तुति की जाँच-सूची में यह भी है कि CU के पीछे का ढक्कन निर्धारित तरीके से सील किया जाए।
F4मतदान के बाद मशीनें और लिफाफे कौन, कहाँ और कब जमा करता है?
आयोग के पत्र 9496 (28.09.2026) के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के हर चरण (पहले से चौथे) में मतदान समाप्ति के तत्काल बाद संबंधित जोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने मतदान दलों के पहले सहायक मतदान अधिकारी (APO-1), चौथे सहायक मतदान अधिकारी (APO-4) और सुरक्षाकर्मी (पुलिस) को साथ लेकर सीलबंद मशीनें और अन्य सामग्री अपने क्षेत्र की पंचायत समिति के तय संग्रहण स्थल पर ले जाता है और APO-1 के माध्यम से जमा करवाता है। इसके लिए ज़रूरी वाहन (ट्रक, बस) काम में लिए जाते हैं। जमा होने के बाद APO-1, APO-4 और सुरक्षाकर्मी को उनके ग्राम पंचायत मुख्यालय पर रात में ही वापस पहुँचाया जाता है। रिटर्निंग अधिकारी संग्रहण के समय प्रयुक्त, अप्रयुक्त और खराब मशीनें अलग-अलग लेता है, क्योंकि अप्रयुक्त आरक्षित मशीनों को FLC करवाने के बाद अगले चरण में काम में लिया जाना है। पत्र यह भी कहता है कि जिलों की स्थिति के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) इस पूरी प्रक्रिया में कोई परिवर्तन करना चाहे, तो राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति लेकर निर्णय ले सकता है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका मतदान दल से कहती है कि बूथ पर बिना समय गँवाए जिला निर्वाचन अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी के निर्देश के अनुसार संग्रहण स्थल पहुँचे और बीच रास्ते में कहीं न रुके।
F5संग्रहण केन्द्र पर कितने काउंटर होते हैं, और किस काउंटर पर क्या जमा होता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार संग्रहण स्थल पर साधारणतः तीन काउंटर रखे जाते हैं, जिनमें जिला निर्वाचन अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी थोड़ा फेरबदल कर सकते हैं। काउंटर नं. 1 (स्ट्रांग रूम) पर सीलबंद मतदान यूनिट और कंट्रोल यूनिट, प्ररूप-14 (पंचायत समिति का PE-53, जिला परिषद का PE-54), मतदान अधिकारी (PO) की घोषणा (पंचायत समिति का PE-55, जिला परिषद का PE-56), डायरी (PE-52) और सांख्यिकी सूचना (P-2) जमा होते हैं, ये लिफाफे बिना सील के रहते हैं। काउंटर नं. 2 पर सीलबंद लिफाफे PE-42 से PE-51 (चिन्हित मतदाता सूची, मतदाता रजिस्टर, प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ, प्रयुक्त और अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र, निविदत्त वोटों की सूची) और बिना सील का विविध कागजात लिफाफा PE-57 जमा होता है। काउंटर नं. 3 पर बाकी चुनाव सामग्री जैसे पीतल की सील, पुस्तिका, स्टाम्प पैड, अमिट स्याही की शीशी, अप्रयुक्त मतदान/कंट्रोल यूनिट और डमी बैलेट यूनिट जमा होती है। इसी तरह पंच और सरपंच के चुनाव के लिफाफे PE-42A से PE-51A सील करके और PE-57A बिना सील के जमा किए जाते हैं। पंच-सरपंच के चुनाव के P-2A और PE-52A से PE-56A तक के लिफाफे भी काउंटर नं. 1 पर बिना सील के जमा होते हैं। हर लिफाफा तैयार करके जमा किया जाता है, चाहे उसमें कोई सूचना शून्य ही क्यों न हो, और काउंटर छोड़ने से पहले संबंधित अधिकारियों से उसकी रसीद ली जाती है।
G2पंच-सरपंच के मतदान के बाद गिनती कहाँ होती है, और उसमें सेक्टर अधिकारी की क्या भूमिका है?
पंच और सरपंच के वोटों की गिनती ग्राम पंचायत मुख्यालय पर, मतदान केन्द्र पर ही होती है, और मतदान खत्म होते ही तुरन्त होती है। यह गिनती रिटर्निंग अधिकारी की देख-रेख और निर्देश में होती है, राजस्थान पंचायतीराज निर्वाचन नियम 49 और 50 के अनुसार। जिला परिषद् और पंचायत समिति सदस्य की मतपेटियाँ जिला मुख्यालय भेजी जाती हैं, उनकी गिनती वहीं होती है। गिनती के बाद पंच और सरपंच के आँकड़ों के फॉर्म अलग काउंटर पर जमा होते हैं, या जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश हों तो जोनल मजिस्ट्रेट के माध्यम से जल्दी पहुँचाए जाते हैं।
H1पंचायत चुनाव 2026 में आचार संहिता कब से लागू है, और कब तक रहेगी?
सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश, जो आयोग के पत्र 10568 (15.10.2026) के साथ भेजा गया, कहता है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की तारीख 03.10.2026 के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं, और वे चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक लागू रहेंगे। मतदान चार चरणों में है: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए 22.10.2026, 28.10.2026, 03.11.2026 और 14.11.2026, तथा सरपंच और पंच के लिए 24.10.2026, 30.10.2026, 05.11.2026 और 16.11.2026। आयोग का पत्र 8703 (14.09.2026) भी यही कहता है कि घोषणा के साथ ही संहिता प्रभावी हो जाएगी और निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक प्रभावी रहेगी।
H2आचार संहिता की पालना रिपोर्ट किस प्रपत्र में, किसे और कब भेजनी है?
आयोग का पत्र 8703 (14.09.2026) सभी जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) (पंचायत) को लिखा गया है। उसके अनुसार आदर्श आचरण संहिता की पालना की सूचना पत्र के साथ लगे प्रपत्र 01, 02, 03 और 04 में भरकर पूरी पालना रिपोर्ट विभागीय ईमेल Secraj@rajasthan.gov.in पर हार्ड कॉपी और सॉफ्टकॉपी (Excel Sheet format) में भिजवानी है। पत्र की तालिका में प्रपत्र वार ये समयावधि लिखी हैं: प्रपत्र 01 (सरकारी संपत्ति को विरूपित करना, सरकारी वाहनों का दुरुपयोग और शिकायतों की निगरानी) 24 घंटे, प्रपत्र 02 (सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करना और सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग) 48 घंटे, प्रपत्र 03 (निजी संपत्ति का विरूपण) 72 घंटे, प्रपत्र 04 (विकास और निर्माण संबंधी गतिविधियाँ) 72 घंटे।
H3मंत्री चुनाव वाले इलाक़े में आएँ, तो वे क्या नहीं कर सकते?
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश (आयोग का पत्र 10568, 15.10.2026) में मंत्रियों के लिए ये रोक हैं। मंत्री चुनाव से संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव समाप्त होने तक शासकीय दौरे पर नहीं जाएंगे; केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने या आपात स्थिति में उस विभाग के मंत्री की मौजूदगी ज़रूरी हो तो यह रोक लागू नहीं होगी, पर उसकी सूचना विभाग के शासन सचिव राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेंगे। दौरे पर रहें तो सरकारी वाहन का प्रयोग नहीं करेंगे, निजी वाहन पर लालबत्ती या सायरन नहीं लगाएंगे, और चुनाव से संबंधित अधिकारियों को नहीं बुलाएंगे। वहाँ के विश्राम गृह, डाक बंगले, दूसरे सरकारी आवास या उनसे लगे परिसर को प्रचार कार्यालय बनाने या चुनाव की बैठक करने के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे। दूसरे दलों या अभ्यर्थियों को भी इन विश्राम गृहों, डाक बंगलों और सरकारी आवासों के उपयोग की अनुमति निष्पक्ष तरीके से दी जाएगी, पर वे भी इनका चुनाव के काम में इस्तेमाल नहीं करेंगे। सरकारी अधिकारी मंत्रियों के स्वागत या प्रोटोकॉल में नहीं जाएंगे, और यह सब मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा पाए बोर्ड/निगम के अध्यक्षों पर भी बराबर लागू है। मतदान केंद्र में मंत्रियों के आने पर आयोग की आदर्श आचरण संहिता (राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए) कहती है कि केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री अभ्यर्थी, मतदाता या प्राधिकृत अभिकर्ता की अपनी हैसियत को छोड़कर किसी भी मतदान केन्द्र या गणना स्थल में प्रवेश न करें। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान केंद्र में आने के लिए सरकारी उच्च अधिकारियों या मंत्रियों समेत राजनीतिक नेताओं को तभी अनुमति देनी है, जब उनके पास राज्य निर्वाचन आयोग का जारी किया मान्य प्राधिकार-पत्र हो। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइडों में एक जगह लिखा है कि मंत्री, सांसद, विधायक और सुरक्षा पाने वाले दूसरे लोग मतदान केंद्र में केवल मतदाता के रूप में आ सकते हैं, और दूसरी जगह कि केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री उम्मीदवार के रूप में ही मतदान या मतगणना केंद्र में आएंगे।
H4कोई सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रचार में दिखे, तो क्या होता है?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार किसी सरकारी कर्मचारी का किसी अभ्यर्थी का निर्वाचन अभिकर्ता, मतदान अभिकर्ता या गणन अभिकर्ता होना अपराध माना गया है, और चुनाव ड्यूटी पर लगे अधिकारी या कार्मिक का किसी अभ्यर्थी के पक्ष या विपक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करना भी अपराध माना गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश (आयोग का पत्र 10568) में सरकारी अधिकारी मंत्रियों के स्वागत या प्रोटोकॉल में नहीं जाएंगे। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल से जुड़ नहीं सकता और किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकता, उसके आचरण पर नज़र रखकर उचित कार्रवाई की जानी है, और चुनाव के संबंध में सरकारी कर्तव्य का उल्लंघन करने वाले पर मुकदमा चलाया जाएगा।
H5चुनाव के दौरान नई योजना, शिलान्यास या अनुदान पर क्या रोक है?
प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार निर्वाचन की घोषणा की तारीख से निर्वाचन समाप्त होने तक किसी योजना या नई नागरिक सुविधा या सेवा का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं किया जाना चाहिए। पंचायत क्षेत्र में किसी योजना या कार्य की नई स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए, और जो पहले से स्वीकृत योजना घोषणा तक शुरू नहीं हुई थी उसका काम शुरू नहीं किया जाना चाहिए। किसी संगठन या संस्था को किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए सहायता अनुदान स्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए। मंत्रियों और सांसदों/विधायकों के लिए विवेकाधीन अनुदान या कोटे के तहत धन जारी करना या सुविधाओं का विस्तार करना निलंबित किया जाना चाहिए।
I1एक उम्मीदवार प्रचार में कितने वाहन लगा सकता है, और उसकी सूचना या अनुमति किससे लेनी है?
आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार एक अभ्यर्थी जिला परिषद सदस्य के चुनाव में अधिकतम तीन वाहन, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में अधिकतम दो वाहन और सरपंच पद के चुनाव में अधिकतम एक वाहन चुनाव प्रचार में लगा सकता है। वाहन का उपयोग करने से कम से कम 24 घंटे पहले अभ्यर्थी या उसका निर्वाचन अभिकर्ता वाहन की संख्या और प्रकार तथा चालक का नाम और पता लिखित में संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को देगा (सरपंच के मामले में उपखण्ड अधिकारी को)। उस सूचना के अनुसार रिटर्निंग अधिकारी लिखित अनुमति प्ररूप ख में जारी करेगा, जो अभ्यर्थी के वाहन पर प्रदर्शित की जाएगी। मतदान के दिन इन वाहनों के उपयोग के लिए संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होगी, और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 133 सपठित धारा 123(5) का उल्लंघन होने पर रिटर्निंग अधिकारी या उपखण्ड अधिकारी यह अनुमति बिना किसी नोटिस के निरस्त कर देंगे। इस नियम में वाहन का मतलब जीप, कार, तिपहिया टैम्पो आदि है। बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर और पशुचालित वाहन प्रचार में बिल्कुल मना हैं। किसी भी चुनाव में अनुमति वाले प्रचार वाहनों समेत 3 से अधिक वाहनों की रैली या काफिला नहीं निकाला जा सकता, और मतदान समाप्ति के तय समय से पहले के 48 घंटे में ऐसी रैली या काफिला निकालना पूरी तरह मना है। अधिसूचना 5052 आयोग की पहले की अधिसूचना 5596 (02.12.2019) को अधिक्रमित करके जारी हुई है। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड में आयोग के पुराने आदेश 4489 (06.01.2000) के हवाले से जिला परिषद सदस्य के चुनाव में अधिकतम दो वाहन और पंचायत समिति या सरपंच के चुनाव में एक वाहन लिखा है, और यह कि प्रचार में केवल जीप, कार, तिपहिया वाहन, तांगा और पशुगाड़ी चल सकते हैं।
I2लाउडस्पीकर किस समय तक और किसकी अनुमति से चल सकता है?
आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार लाउडस्पीकर प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही चल सकता है, और वह भी क्षेत्राधिकार रखने वाले जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट या अन्य सक्षम प्राधिकारी की प्ररूप ग में लिखित अनुमति मिलने के बाद। अनुमति के आवेदन में साफ लिखना होगा कि लाउडस्पीकर कब, किस प्रकार और किस स्थान पर चलेगा। अभ्यर्थी के चुनाव कार्यालय पर लाउडस्पीकर पर पूरी तरह रोक है। मतदान समाप्त होने से पहले के 48 घंटे में भी पूरी रोक है, और अस्पताल, स्कूल तथा धार्मिक स्थल से 100 मीटर के भीतर भी पूरी रोक है।
I3पोस्टर, बैनर और होर्डिंग कहाँ लग सकते हैं, और कहाँ नहीं?
आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार कट आउट, होर्डिंग, पोस्टर या बैनर सार्वजनिक या निजी स्थान पर कुछ शर्तों के साथ लग सकते हैं। पोस्टर छपवाते समय लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क के उपबंधों का पालन करना होगा। सार्वजनिक स्थल पर लगाने के लिए संबंधित स्थानीय प्राधिकारी या कानून से अधिकृत सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति लेनी होगी। जहाँ स्थानीय कानून में प्रावधान नहीं है, वहाँ निजी संपत्ति पर केवल आसानी से हटाई जा सकने वाली सामग्री, जैसे झंडियाँ और बैनर, लग सकती है, और उससे पहले संपत्ति के मालिक की लिखित अनुमति चाहिए। किसी भी मतदान बूथ के भवन के 200 मीटर के दायरे में कट आउट, होर्डिंग, पोस्टर या बैनर नहीं लगेंगे; केवल मतदान के दिन अभ्यर्थी के चुनाव बूथ पर 2x5 फीट से बड़ा न होने वाला एक बैनर लग सकता है, जिस पर किसी दल के नेता या अभ्यर्थी का चित्र, चुनाव चिह्न या नारा नहीं होगा। आमसभा, जुलूस या रैली के लिए अधिकारिता वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार झंडा टांगने, पोस्टर चिपकाने, नारे लिखने जैसे प्रचार कार्यों के लिए सरकारी और सार्वजनिक भवन, उनके अहाते या अन्य परिसंपत्तियों का उपयोग पूरी तरह मना है। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड में आयोग के पुराने आदेश 4489 (06.01.2000) के हवाले से लिखा है कि सार्वजनिक या निजी स्थानों पर कटआउट और होर्डिंग लगाना पूरी तरह मना है।
I4उम्मीदवार कितना खर्च कर सकता है, और उसका लेखा किसे, कब देना है?
आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के पैरा 7 के अनुसार धारा 22क के तहत आदेश में ऊपर उल्लेखित मदों पर खर्च की अधिकतम सीमा जिला परिषद सदस्य के लिए रुपये 3,00,000, पंचायत समिति सदस्य के लिए रुपये 1,50,000 और सरपंच के लिए रुपये 1,00,000 है। इस अधिसूचना के पैरा 3 और 4 वाहनों के उपयोग, पैरा 5 लाउड स्पीकरों के उपयोग और पैरा 6 कट-आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर और बैनरों के प्रदर्शन के बारे में हैं। खर्च का लेखा प्ररूप क में परिणामों की घोषणा के 15 दिन के अंदर जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) (कलक्टर) या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी के सामने प्रस्तुत करना होगा। वह अधिकारी इस लेखे को अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर तीन दिन तक प्रदर्शित करेगा, और उसके बाद के सात दिन में कोई भी व्यक्ति इस खर्चे पर आपत्ति दे सकता है। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड में आयोग के पुराने आदेश 4489 (06.01.2000) के हवाले से पोस्टर और बैनर पर एक उम्मीदवार के खर्च की सीमा जिला परिषद सदस्य के चुनाव में 20000 रुपये, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में 10000 रुपये और सरपंच चुनाव में 5000 रुपये लिखी है।
J1मतदान के दिन ज़ोनल अधिकारी किन बातों पर नज़र रखे, और कंट्रोल रूम से कैसे जुड़ा रहे?
ज़ोनल अधिकारी के लिए अच्छी तरह सुसज्जित कंट्रोल रूम बनाना है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार उसमें जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन आयोग से संपर्क रखने की संचार व्यवस्था हो और मोबाइल फोन हर समय चालू रहे, साथ में शिकायत निवारण की व्यवस्था, आरक्षित कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था और आपात स्थिति में अतिरिक्त मतपेटी या अन्य सामग्री की व्यवस्था रहे। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइडों में मतदान के दिन के ये नियम दिए गए हैं: मतदान केंद्र में पात्र व्यक्तियों के अलावा कोई प्रवेश न करे; मतदान केंद्र के भीतर या उससे 100 मीटर की दूरी के भीतर किसी सार्वजनिक या निजी स्थान पर वोट के लिए प्रचार न हो; मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में और मतदान बूथ के भीतर चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को छोड़कर कोई भी सेलुलर फोन, कॉर्डलेस फोन, वायरलेस सेट आदि का उपयोग न करे; लाउडस्पीकर या किसी उपकरण से आवाज़ न बढ़ाई जाए; और मतदाताओं को लाने-ले जाने के लिए वाहन किराये पर न लिए जाएं। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार मतदान समाप्त होने के बाद मशीनों की उचित सीलिंग, चुनाव पत्रों के पैकेट बनाना और उन पर सील लगाना, मतदान डायरी भरना, और मतदान एजेंटों को मतपत्र लेखे (Ballot Paper Account) की प्रतिलिपि बनाने देना, इन सबकी व्यवस्था ज़ोनल मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदाताओं को लाने-ले जाने के लिए वाहन गैर कानूनी ढंग से किराये पर लेने की शिकायत आए, तो मतदान अधिकारी (PO) शिकायत करने वाले को संबंधित पुलिस थाने में FIR दर्ज कराने को कहता है, और खुद भी भ्रमण कर रहे ज़ोनल मजिस्ट्रेटों या रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी को तुरंत बताता है।
J2मतदान के दिन उम्मीदवार के कितने वाहन चल सकते हैं, और किस दूरी तक?
आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार उप खण्ड (1) से (3) वाले प्रचार वाहनों (जिला परिषद सदस्य के चुनाव में अधिकतम तीन, पंचायत समिति सदस्य में दो, सरपंच में एक) को मतदान दिवस पर चलाने के लिए संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 133 सपठित धारा 123(5) के उपबंधों का उल्लंघन हो, तो रिटर्निंग अधिकारी या उपखण्ड अधिकारी यह अनुमति बिना किसी नोटिस के रद्द कर देगा। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार उम्मीदवार, उसका निर्वाचन प्रतिनिधि या कोई अन्य व्यक्ति मतदाता को मतदान केंद्र तक लाने-ले जाने के लिए वाहन किराये पर नहीं ले सकता। उसी प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार उम्मीदवार खुद, उसके परिवार के सदस्य या उसका चुनाव प्रतिनिधि मतदान केंद्र से 200 मीटर से अधिक दूरी पर आने-जाने के लिए वाहन का उपयोग कर सकते हैं, जबकि केंद्र के 200 मीटर के दायरे में मालिकों के अपने या परिवार के निजी वाहन की अनुमति नहीं है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका में मतदाताओं को लाने-ले जाने के लिए वाहनों का गैर कानूनी ढंग से किराये पर लेना चुनाव अनियमितता बताया गया है।
J3उम्मीदवार का बूथ (टेबल) मतदान केन्द्र से कितनी दूर और कैसा होना चाहिए?
आयोग के आदेशों के संकलन में दी गई, राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिये आदर्श आचरण संहिता कहती है कि मतदान केन्द्र से 200 मीटर की परिधि में अभ्यर्थी अपना कैम्प किसी भी स्थिति में न लगाएँ। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव बूथ लगाने की अनुमति है। ज़ोनल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइडों में यह दूरी मतदान केंद्र से 200 मीटर लिखी है। आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के अनुसार मतदान के दिन अभ्यर्थियों के लगाए चुनाव बूथों पर एक बैनर लग सकता है, जिसका आकार 2x5 फीट से अधिक नहीं होगा, और उस पर किसी राजनैतिक दल के नेता या अभ्यर्थी का चित्र या फोटो, चुनाव चिह्न या नारा नहीं होगा। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार बूथ एक मेज और दो कुर्सी का होगा; उसके किनारों पर कनात या तंबू नहीं लगेगा, पर छाता या तिरपाल चल सकता है; पार्टी या उम्मीदवार का चिन्ह या नाम दिखाने वाली पहचान पर्चियाँ नहीं दी जाएंगी, भीड़ नहीं होगी और मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास नहीं होगा।
J4जिला परिषद-पंचायत समिति और पंच-सरपंच के चुनाव में कितने मतदान अभिकर्ता अंदर बैठ सकते हैं?
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में प्रत्येक अभ्यर्थी या उसका निर्वाचन अभिकर्ता हर मतदान बूथ के लिए एक मतदान अभिकर्ता नियुक्त कर सकता है, यानी हर अभ्यर्थी का एक। ऐसे बूथ पर अभ्यर्थी, निर्वाचन अभिकर्ता और मतदान अभिकर्ता बैठ या प्रवेश कर सकते हैं। आयोग की मतपेटी मार्गदर्शिका के अनुसार पंच पद का चुनाव लड़ने वाला अभ्यर्थी कोई मतदान अभिकर्ता नियुक्त नहीं कर सकता, और सरपंच पद का अभ्यर्थी हर बूथ के लिए एक मतदान अभिकर्ता नियुक्त कर सकता है। पंच-सरपंच के चुनाव में मतदान बूथ पर केवल पंच पद का अभ्यर्थी, और सरपंच पद का अभ्यर्थी या उसका नियुक्त मतदान अभिकर्ता बैठ सकता है। इनके सिवाय कोई और व्यक्ति, नियम 24(2)(घ) के तहत, मतदान अधिकारी की इजाजत के बिना मतदान केंद्र में नहीं आ सकता।