साइट पर काम चल रहा है · अपडेट 03.11.2026अगर कोई त्रुटि दिखे तो डेवलपर भरत चौधरी (व्याख्याता, रा.उ.मा.वि., जेठन्तरी — ब्लॉक: समदड़ी, जिला: बालोतरा) को बताइए: WhatsApp: +91-7357578216
इस पेज पर
पंचायती राज चुनाव 2026 के सेक्टर मजिस्ट्रेट और ज़ोनल अधिकारी के लिए एक पेज: रवानगी से जमा तक, हर बात आयोग के आदेश या SLMT प्रशिक्षण सामग्री के पृष्ठ के हवाले से।
हर अंश के नीचे उसका स्रोत है। नीला लिंक दबाइए: वही पेज खुलेगा जहाँ से बात ली गई है, पहले आयोग का आदेश, फिर SLMT प्रस्तुति का पृष्ठ।
आयोग का आदेश 9496: आरक्षित मशीन और मतदान के बाद मशीनें जमा
आयोग के आदेश 9496 (28.09.2026) में ज़िला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए ज़ोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट के दो काम लिखे हैं।
आरक्षित मशीन बूथ तक पहुँचाना: आरक्षित मशीनें पंचायत समिति स्तर पर रखी जाएँगी। कौन-सी आरक्षित मशीन किस मतदान केन्द्र पर काम आएगी, यह किसी को पता नहीं होता। ऐसे में जिस मतदान केन्द्र पर आरक्षित मशीन की ज़रूरत हो, उसका मतपत्र आरक्षित मशीन पर लगाकर मशीन तुरंत पंचायत समिति स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञ या कंपनी के इंजीनियर से तैयार करवाई जाएगी, और फिर ज़ोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट के ज़रिए उस मतदान केन्द्र पर पहुँचाई जाएगी। तैयार की जा रही सभी मशीनों का END बटन मास्क रहेगा।
मतदान के बाद मशीनें जमा कराना: हर चरण में मतदान ख़त्म होते ही ज़ोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने इलाक़े के मतदान दलों के पहले सहायक मतदान अधिकारी, चौथे सहायक मतदान अधिकारी और सुरक्षाकर्मी (पुलिस) को साथ लेकर उनके मतदान केन्द्र की सीलबंद मशीनें और बाकी सामान (लिफ़ाफ़े) पंचायत समिति के तय संग्रहण स्थल पर ले जाएँगे, और वहाँ पहले सहायक मतदान अधिकारी के हाथों जमा करवाएँगे। इसके लिए मजिस्ट्रेट को दिए गए मतदान केन्द्रों वाले वाहन (ट्रक, बस) काम में लिए जाएँगे। सामान जमा होने के बाद मजिस्ट्रेट इन तीनों को उसी रात उनके ग्राम पंचायत मुख्यालय पर वापस पहुँचाएँगे, और जिस मतदान दल का वाहन इस काम में लगा, उसे भी वापस उसकी जगह पहुँचवाएँगे।
पंचायत समिति स्तर पर संग्रहण का इंतज़ाम रिटर्निंग अधिकारी (पंचायत) करेंगे। वहाँ से मशीनें और सामान पुलिस के साथ ज़िला मुख्यालय के संग्रहण स्थल पर जमा होंगे। इस्तेमाल हुई, बिना इस्तेमाल हुई और ख़राब मशीनें अलग-अलग जमा होंगी, क्योंकि बिना इस्तेमाल हुई आरक्षित मशीनें FLC के बाद अगले चरण में काम आएँगी।
ज़िला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) आयोग की अनुमति लेकर इस व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं; अपने ज़िले का निर्देश भी देखिए।
कहाँ रखी हैं आरक्षित मशीनें पंचायत समिति स्तर पर रखी जाएँगी। कौन-सी आरक्षित मशीन किस मतदान केन्द्र पर काम आएगी, यह किसी को पता नहीं होता। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 2–3↗
तैयारी ऐसे में जिस मतदान केन्द्र पर ज़रूरत हो, उसका मतपत्र आरक्षित मशीन पर लगाकर मशीन तुरंत पंचायत समिति स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञ या कंपनी के इंजीनियर से तैयार करवाई जाएगी। तैयार की जा रही सभी मशीनों का END बटन मास्क रहेगा। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 2–3↗
आदेश 9496 (28.09.2026): ज़िला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव। हर डिब्बे का स्रोत उसी डिब्बे में है।
एक नज़र में: मतदान के बाद मशीनें जमा
मतदान ख़त्म होते ही हर चरण में ज़ोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने इलाक़े के मतदान दलों के पहले सहायक मतदान अधिकारी, चौथे सहायक मतदान अधिकारी और सुरक्षाकर्मी (पुलिस) को साथ लेकर उनके मतदान केन्द्र की सीलबंद मशीनें और बाकी सामान (लिफ़ाफ़े) पंचायत समिति के तय संग्रहण स्थल पर ले जाते हैं। वाहन वही, जो मजिस्ट्रेट को दिए गए मतदान केन्द्रों के हैं (ट्रक, बस)। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 3–4↗
पंचायत समिति का संग्रहण स्थल सामान वहाँ पहले सहायक मतदान अधिकारी के हाथों जमा होता है। संग्रहण का इंतज़ाम रिटर्निंग अधिकारी (पंचायत) करेंगे। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 3–4↗
उसी रात वापसी सामान जमा होने के बाद मजिस्ट्रेट इन तीनों को उसी रात उनके ग्राम पंचायत मुख्यालय पर वापस पहुँचाते हैं; जिस मतदान दल का वाहन इस काम में लगा, उसे भी वापस उसकी जगह। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 3–4↗
ज़िला मुख्यालय वहाँ से मशीनें और सामान पुलिस के साथ ज़िला मुख्यालय के संग्रहण स्थल पर। इस्तेमाल हुई, बिना इस्तेमाल हुई और ख़राब मशीनें अलग-अलग, क्योंकि बिना इस्तेमाल हुई आरक्षित मशीनें FLC के बाद अगले चरण में काम आएँगी। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 3–4↗
ज़िला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) आयोग की अनुमति लेकर इस व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं; अपने ज़िले का निर्देश भी देखिए। आदेश 9496, दि. 28.09.2026, पृ. 4↗ हर डिब्बे का स्रोत उसी डिब्बे में है।
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 · SLMT प्रशिक्षण
सेक्टर मजिस्ट्रेट: जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्य चुनाव
जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव 2026
मतदान से पहलेमतदान दिवसचुनावी अपराधमशीन और मतदान केंद्रसीलिंग और जमा
एक नज़र में: सेक्टर मजिस्ट्रेट का दिन
मतदान से एक दिन पहले मतदान दल अपने केन्द्रों पर पहुँच गए और पूरी सामग्री उनके पास है; सुरक्षा योजना के हिसाब से पुलिस बल पहुँच गया; मशीन या मतदान प्रक्रिया पर कोई शंका हो, तो दूर; जहाँ वीडियो या फोटोग्राफी होनी है, वहाँ वीडियोग्राफर या फोटोग्राफर पहुँच गया; 200 मीटर के घेरे में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय नहीं; आखिर में नियंत्रण कक्ष को ओ.के. रिपोर्ट। SLMT प्रस्तुति: सेक्टर मजिस्ट्रेट, पृ. 11↗
मॉक पोल मतदान शुरू होने के तय समय से 60 मिनट पहले, मतदान अभिकर्ताओं के सामने। कोई कठिनाई हो, तो उसका समाधान। मतदान तय समय पर ही शुरू होगा। SLMT प्रस्तुति: सेक्टर मजिस्ट्रेट, पृ. 12↗
हाँ मतदान दल 15 मिनट इंतज़ार करेगा; फिर भी कोई न आए, तो मॉक पोल पूरा करके मशीन की सीलिंग। मतदान शुरू होने तक जोनल मजिस्ट्रेट ऐसे सभी केन्द्रों की सूचना इकट्ठा करेंगे; इन केन्द्रों पर बार-बार जाना है और नज़र रखनी है; मतदान शुरू होने के बाद इसकी सूचना देनी है। SLMT प्रस्तुति: सेक्टर मजिस्ट्रेट, पृ. 12↗13↗14↗
मतदान के दौरान अभिकर्ताओं की हाज़िरी और गैरहाज़िरी पर नज़र और रिपोर्ट; उम्मीदवारों के चुनाव बूथ: आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद लगाने की अनुमति है ईवीएम मार्गदर्शिका, पृ. 106↗, और सेक्टर मजिस्ट्रेट की स्लाइड में उसका काम लिखा है कि दलों या अभ्यर्थियों के बूथ 200 मीटर दूर रहें; कोई वाहन मतदाताओं को अवैध रूप से ला-ले जा रहा हो, तो तुरंत पुलिस मोबाइल पार्टी या थाने को सूचना। SLMT प्रस्तुति: सेक्टर मजिस्ट्रेट, पृ. 15↗16↗ उच्चाधिकारी जैसा कहें, उसी हिसाब से मतदान प्रतिशत बताना; शिकायतें निपटाना; केन्द्र की विजिट शीट में एंट्री और हस्ताक्षर। SLMT प्रस्तुति: सेक्टर मजिस्ट्रेट, पृ. 17↗
हर पड़ाव की पूरी बात इसी भाग में नीचे है। हर डिब्बे का स्रोत उसी डिब्बे में है।
1
मतदान से पहले के दायित्व
भयग्रस्त परिवार और क्षेत्र पहचानना
मतदान स्थल और चुनाव प्रबंधन
मतदाताओं तक जानकारी
(1) भयग्रस्त परिवार / क्षेत्र (Vulnerable Families/Areas)
चुनाव में Vulnerability का मतलब
मतदान से पहले का पहला काम है भयग्रस्त परिवारों और क्षेत्रों (Vulnerable Families/Areas) की पहचान। चुनाव में Vulnerability का मतलब तीन बातें हैं। पहली, कोई मतदाता या मतदाताओं का समूह डरा हुआ है, चाहे वह ऐसे चिन्हित क्षेत्र में रहता हो या नहीं। दूसरी, मतदाता को आज़ादी से और साफ़ तरीके से वोट देने से गलत ढंग से रोका जाता है। या उस पर असर डाला जाता है। तीसरी, मतदाता को प्रताड़ित किया जाता है, उस पर असम्यक प्रभाव डाला जाता है या किसी तरह का बल प्रयोग होता है।
इस डर को दूर करने की कार्यवाही तीन केन्द्र बिन्दुओं पर टिकी है। पहले ऐसे डरे हुए मतदाता या मतदाताओं के समूह को साफ़-साफ़ पहचानना है। फिर उन लोगों या बातों को पहचानना है, जिनकी वजह से मतदाता या मतदाताओं का वर्ग डरा हुआ है। या जिनकी वजह से वह खुद को असुरक्षित महसूस करता है। तीसरे, सुधार की कार्यवाही की योजना पहले से बनानी है और उस पर कार्यवाही करनी है।
भय और प्रताड़ना से ग्रस्त क्षेत्रों, परिवारों और मतदाताओं की पहचान के लिए जोनल मजिस्ट्रेट सात काम करेंगे। वे जोन के हर मतदान केन्द्र के पूरे क्षेत्र का गहन भ्रमण करेंगे। क्षेत्र के समुदायों और स्थानीय सूत्रों के साथ बैठकें करेंगे और संपर्क बनाए रखेंगे। डर और प्रताड़ना के स्रोतों को चिन्हित करेंगे। घटनाओं और मौजूदा अंदेशों (Current Apprehensions) पर गौर करेंगे।
वे थानाधिकारी, विकास अधिकारी, तहसीलदार और क्षेत्र के स्थानीय प्रशासनिक मजिस्ट्रेट व कर्मचारियों से सलाह लेंगे। कोई राजनैतिक दल या चुनाव लड़ रहा प्रत्याशी डरे हुए इलाकों या वर्गों की सूचना दे, तो उस पर भी गौर होगा। उसके बारे में तथ्य जुटाए जाएँगे। जो लोग डर और प्रताड़ना की वजह बने हैं या असम्यक असर डालते हैं, उनके नाम और विवरण चिन्हित करके जुटाए जाएँगे।
इस कार्यवाही के बाद सेक्टर मजिस्ट्रेट चार सूचनाएँ भी तैयार करेंगे। पहली, उन परिवारों और घरों की सूची जो डर या प्रताड़ना से ग्रस्त हैं, या खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। दूसरी, उन लोगों और बातों की सूची जो डर और प्रताड़ना की वजह बने हैं। इसमें वे भी आते हैं, जिनके कारण मतदाता असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
तीसरी सूचना में ऐसे लोगों और बातों पर की गई कार्यवाही और प्रस्तावित कार्यवाही लिखी जाएगी। चौथी सूचना इन मतदाताओं को डर, प्रताड़ना और अवैध प्रभाव से बचाने और संरक्षण देने के लिए है। इसमें उनके संपर्क के लोगों के नाम और फ़ोन या मोबाइल नंबर होंगे। इन संपर्क सूत्रों को आपात स्थिति में मदद के लिए अपना मोबाइल नंबर भी देना है।
दूसरा काम मतदान स्थल और चुनाव प्रबंधन का है। नक्शे पर दिखाए गए रूट सचमुच चलने लायक हैं, यह जाँचना है। मतदान केन्द्र तक पहुँच हो और आना-जाना आसान रहे। केन्द्र पर पानी, छाया, रैम्प, टॉयलेट, फ़ोन जैसी व्यवस्थाएँ हों, और भवन की हालत भी ठीक हो। नए मतदान केन्द्रों का खूब प्रचार-प्रसार हो। मतदान केन्द्र से संपर्क के लिए मोबाइल या फ़ोन नंबर की जानकारी ले लेनी है।
निगरानी में पहले यह देखें कि मतदान केन्द्र के 200 मीटर के घेरे में किसी दल का कार्यालय तो नहीं चल रहा। प्रचार में अवैध रूप से चल रहे वाहन, संपत्ति का विरूपण और अवैध चुनाव प्रचार पर नज़र रखनी है। सरकारी भवनों, सरकारी वाहनों और सरकारी कर्मचारियों का दुरुपयोग भी देखना है। आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन की हर संभावना पर निगरानी रखकर रिपोर्ट देनी है।
तीसरा काम सीधे मतदाताओं से जुड़ा है। मतदान केन्द्रों की जगह और हैल्पलाइनों की जानकारी मतदाताओं तक पहुँचानी है। मतदाताओं में वोट डालने की जागरूकता लानी है। इसके लिए मतदाताओं से, और क्षेत्र के प्रमुख लोगों, संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों से लगातार संपर्क रखना है।
मतदाताओं का हौसला बढ़ाना है कि वे आज़ाद और निडर होकर, बिना किसी लोभ-लालच के वोट डालें। आखिरी बिंदु मूल स्लाइड पर अधूरा छपा है। जितना छपा है, वह यह है: "किसी राजनैतिक कार्यकर्ता या उम्मीदवार या उसके कार्यकता द्वारा अपने पक्ष में या किसी प्रतिद्वंदी के विरूद्ध किसी प्रकार के लालच या प्रलोभन में नहीं आने के लिए"।
मतदान से एक दिन पहले सेक्टर मजिस्ट्रेट के छह काम हैं। पहले यह पक्का करना है कि मतदान दल अपने केन्द्रों पर पहुँच गए हैं और पूरी सामग्री उनके पास है। फिर देखना है कि सुरक्षा योजना (Security Plan) के हिसाब से केन्द्रों पर पुलिस बल पहुँच गया है।
मतदान कार्मिकों को वोटिंग मशीन चलाने या मतदान प्रक्रिया पर कोई शंका हो, तो उसे दूर करना है। जहाँ केन्द्र पर वीडियो या फोटोग्राफी होनी है, वहाँ वीडियोग्राफर या फोटोग्राफर सुपरवाईजर पहुँच गया हो। केन्द्र के 200 मीटर के घेरे में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय तो नहीं है, यह भी देखना है। आखिर में नियंत्रण कक्ष को ओ.के. रिपोर्ट भेजनी है।
मतदान के दिन सबसे पहले बनावटी मतदान, यानी मॉक पोल आता है। सेक्टर मजिस्ट्रेट को मतदान शुरू होने से पहले दिखावटी मतदान की स्थिति पक्की करनी है। कोई कठिनाई हो, तो उसके समाधान की कार्यवाही करनी है।
बनावटी मतदान, मतदान शुरू होने के तय समय से 60 मिनट पहले मतदान अभिकर्ताओं के सामने होगा। अगर केवल एक अभिकर्ता आया हो या कोई भी न आया हो, तो मतदान दल 15 मिनट तक इंतज़ार करेगा। फिर भी कोई अभिकर्ता न आए, तो बनावटी मतदान पूरा करके मशीन की सीलिंग कर ली जाएगी। मतदान तय समय पर ही शुरू होगा।
सेक्टर मजिस्ट्रेट को दिखावटी मतदान प्रमाणन (Mock Poll Certification) पक्का करना है। कुछ केन्द्रों पर मॉक पोल एक ही अभिकर्ता के सामने हुआ होगा, या तब कोई अभिकर्ता नहीं था। मतदान शुरू होने के समय तक जोनल मजिस्ट्रेट ऐसे सभी केन्द्रों की सूचना इकट्ठा करेंगे।
ऐसे केन्द्रों पर बार-बार जाना है और नज़र रखनी है। मतदान शुरू होने के बाद इसकी सूचना देनी है। मतदान केन्द्र पर लगाया गया पुलिस बल तैनात है, यह पक्का करना है। जहाँ ज़रूरी हो, वहाँ वोटिंग मशीन आर.ओ. से बदलवानी है। आर.ओ. को आरक्षित वोटिंग मशीन भी रखनी है।
मतदान के दिन भ्रमण में सेक्टर मजिस्ट्रेट मतदान अभिकर्ताओं की हाज़िरी और गैरहाज़िरी पर नज़र रखेंगे, और इसकी रिपोर्ट करेंगे। केन्द्र के अंदर की प्रक्रिया में मतदान दल का साथ देना है। हर भ्रमण में देखना है कि मतदान प्रक्रिया की शुद्धता बनी हुई है। मतदान के हर पहलू पर नज़र रखनी है।
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका (अध्याय 15, बिंदु 4) के अनुसार उम्मीदवारों को चुनाव बूथ मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद लगाने की अनुमति है। सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड में उसका यह काम लिखा है कि दलों या अभ्यर्थियों के बूथ मतदान केन्द्र की सीमा से 200 मीटर दूर रहें, यह पक्का करना। कोई वाहन मतदाताओं को अवैध रूप से ला-ले जा रहा हो, तो देर न करें। तुरंत संबंधित पुलिस मोबाइल पार्टी या थाने को कार्यवाही के लिए बताएँ।
मतदान के दिन कुछ काम और हैं। उच्चाधिकारी जैसा कहें, उसी हिसाब से समय-समय पर मतदान प्रतिशत बताना है। मतदान के दिन मिली शिकायतें निपटानी हैं। मतदान दल वोटिंग मशीन की सीलिंग और कागज़ात की तैयारी कैसे कर रहे हैं, इस पर नज़र रखनी है।
फिर मतदान दलों को वोटिंग मशीन के साथ संग्रहण केन्द्र तक सुरक्षित पहुँचाना है। ज़रूरत पड़े तो आरक्षित दलों में से मतदान कार्मिक बदलने हैं, या मदद के लिए लगाने हैं। मतदान कार्मिकों को मानदेय का भुगतान हो, यह पक्का करना है। केन्द्र पर जाएँ, तो वहाँ रखी विजिट शीट में अपनी एंट्री करके हस्ताक्षर करें।
भय या प्रताड़ना से ग्रस्त मतदाताओं पर मतदान के दिन खास ध्यान देना है। मतदान अधिकारी मजिस्ट्रेट को भी अपने केन्द्र के ऐसे चिन्हित मतदाताओं की जानकारी देंगे। चिन्हित मतदाता सूची के अनुभाग में, इनके नामों के सामने साईड-मार्जिन में ऊपर से नीचे लाइन खींची जाएगी।
जोनल मजिस्ट्रेट हर भ्रमण में यह सूचना लेंगे कि इन मतदाताओं ने वोट दिया या वे वोट देने नहीं आए। चिन्हित मतदाता सूची में वोट दे चुके मतदाताओं के नाम पर tick (✓) मार्क लगता है। यह सूचना उसी मार्क से मिल सकती है।
सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस मोबाइल पार्टी मतदान के दिन भयग्रस्त परिवारों और क्षेत्र में कम से कम दो बार जाएँगे। जहाँ मतदाताओं को धमकाने या डराने की आशंका है, उन इलाकों में भी कम से कम दो बार जाना है। सेक्टर मजिस्ट्रेट को पता चल सकता है कि ऐसे परिवार या मतदाता काफी संख्या में वोट देने नहीं आए। तब उन क्षेत्रों में विशेष दल भेजा जाएगा। वहाँ पता लगाया जाएगा कि उन्हें वोट देने में कोई अवरोध तो नहीं है। अवरोध हो, तो उपाय किए जाएँगे।
मतदान खत्म होने के बाद सेक्टर मजिस्ट्रेट पाँच बातें पक्की करेंगे। "मतदान अधिकारी की डायरी" ठीक से भरी गई हो। वोटिंग मशीनें ठीक से सील (मुहरबंद) हों। प्ररूप-14 की प्रतियाँ मतदान अभिकर्ताओं को दे दी गई हों। प्ररूप-12 का रजिस्टर ठीक से भरा गया हो।
आखिरी जाँच गिनती की है। एक ओर प्ररूप 12 के आधार पर वोटों की संख्या है, दूसरी ओर कंट्रोल यूनिट के टोटल बटन के आधार पर। ये दोनों एक समान हों।
पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में खर्च की एक अधिकतम सीमा तय है। यह सीमा धारा "22-क" (Section-22A) के अन्तर्गत है। पद के हिसाब से सीमा इस तालिका में है:
क्र.सं.
पद का नाम
अधिकतम खर्च सीमा
1.
जिला परिषद् सदस्य के लिए
रूपये 300,000/-
2.
पंचायत समिति सदस्य के लिए
रूपये 150,000/-
यानी जिला परिषद् सदस्य के चुनाव में सीमा ₹3 लाख है, और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में ₹1.5 लाख। प्रशिक्षण की स्लाइड इसी जगह इस आदेश के उल्लंघन की बात भी उठाती है।
चुनावी अपराधों के लिए प्रशिक्षण फ़ाइल चार कानूनों की धाराएँ गिनाती है। पहला है Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994 की Section 22 (Electoral Offences)। दूसरा, Representation of the People Act, 1951 की Sections 125 से 136। तीसरा, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की Sections 170 से 177 और 189 से 196।
चौथा कानून Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 है, जिसकी Sections 163, 168, 170, 172 और 173 दी गई हैं। आगे BNSS की तालिका में धारा 15 और 16 भी आती हैं। अगली तालिकाओं में हर धारा का अपराध, सजा और कार्रवाई वैसे ही दी है, जैसे प्रशिक्षण की स्लाइड पर छपी है।
BNS, 2023 के चुनाव संबंधी अपराधों की तालिका प्रशिक्षण में तीन स्लाइडों पर चलती है। पहली छह धाराएँ ये हैं। हर धारा के साथ सजा, सेक्टर मजिस्ट्रेट की मौके पर कार्रवाई और पुलिस की कार्रवाई दी है:
धारा
अपराध
अधिकतम / निर्धारित सजा
सेक्टर मजिस्ट्रेट की मौके पर कार्रवाई
सूचना / पुलिस कार्रवाई
170
चुनाव में रिश्वत (Bribery) देना/लेना
धारा 173 के अनुसार; कारावास 1 वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों; treating में केवल जुर्माना
धन/सामग्री वितरण रोकें, तथ्य/वीडियो/गवाह सुरक्षित कराएँ
पुलिस को तत्काल भेजें; RO/DEO को रिपोर्ट
171
Undue Influence: मतदाता/उम्मीदवार को धमकी या मताधिकार में हस्तक्षेप
धारा 174 के अनुसार 1 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
धमकी वाले स्थान पर पुलिस भेजें; प्रभावित मतदाताओं की सुरक्षा
पुलिस से वैधानिक FIR/निवारक कार्रवाई
172
Personation: दूसरे व्यक्ति के नाम से वोट डालना/प्रयास
धारा 174 के अनुसार 1 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
मतदान अधिकारी (PO) को तत्काल सूचित; व्यक्ति को प्रक्रिया से अलग कराएँ
पुलिस को सूचित; वैधानिक कार्रवाई
175
उम्मीदवार के व्यक्तिगत चरित्र/आचरण के बारे में जानबूझकर झूठा तथ्य प्रकाशित करना
जुर्माना
प्रमाण सुरक्षित करें; स्वयं तथ्यात्मक निष्कर्ष न दें
RO/निर्वाचन प्राधिकारी/पुलिस को रिपोर्ट
176
उम्मीदवार की अनुमति के बिना चुनावी खर्च करना
₹10,000 तक जुर्माना
खर्च/पोस्टर/विज्ञापन का विवरण सुरक्षित करें
Election Expenditure authority/RO को रिपोर्ट
177
कानूनन अपेक्षित चुनाव-व्यय लेखा न रखना
₹5,000 तक जुर्माना
उपलब्ध रिकॉर्ड/साक्ष्य सुरक्षित करें
संबंधित निर्वाचन/व्यय प्राधिकारी को रिपोर्ट
मौके पर रिश्वत बँटती दिखे, तो धन या सामग्री का बँटना रोकें और तथ्य, वीडियो और गवाह सुरक्षित कराएँ। कोई दूसरे के नाम से वोट डाले, तो मतदान अधिकारी (PO) को तुरंत बताएँ। उम्मीदवार के बारे में झूठी बात छपे, तो प्रमाण सुरक्षित करें, पर खुद कोई तथ्यात्मक निष्कर्ष न दें।
भीड़ को नियंत्रित कराएँ; मतदान केन्द्र सुरक्षित करें
पर्याप्त बल लगाकर lawful directions लागू करें
191
Rioting: unlawful assembly द्वारा force/violence
सामान्यतः 2 वर्ष तक; deadly weapon के साथ 5 वर्ष तक, या fine/both
स्थिति तत्काल नियंत्रित; मतदान प्रभावित हो तो RO/DEO को सूचना
हिंसा रोकना, आवश्यक गिरफ्तारी/केस
194
Affray: सार्वजनिक स्थान पर लड़ाई से public peace disturb होना
BNS के अनुसार दंडनीय
भीड़ अलग कराएँ; घायलों को चिकित्सा
पुलिस द्वारा वैधानिक कार्रवाई
195
Riot आदि को suppress करते समय public servant पर assault/obstruction
BNS के अनुसार दंडनीय
पुलिस/मजिस्ट्रेटी सहायता लें; घटना का रिकॉर्ड
सरकारी ड्यूटी में बाधा पर केस
196
धर्म/जाति/भाषा आदि आधार पर enmity/promoting disharmony
परिस्थितिनुसार BNS की धारा 196 की सजा
आपत्तिजनक सभा/प्रचार को तुरंत रोकने हेतु सक्षम प्राधिकारी/पुलिस को सूचना
सामग्री सुरक्षित कर वैधानिक कार्रवाई
भीड़ जुटे, तो उसे नियंत्रित कराएँ और मतदान केन्द्र सुरक्षित करें। दंगे से मतदान पर असर पड़े, तो RO/DEO को सूचना दें। लड़ाई में कोई घायल हो, तो भीड़ अलग कराएँ और घायलों को चिकित्सा दिलाएँ।
RPA, 1951: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 के माध्यम से लागू (1/2)
वैमनस्य, 48 घंटे, गोपनीयता, 100 मीटर
अब RPA, 1951 की धाराएँ। आयोग के आदेशों में धारा 127-क (पर्चे-पोस्टर की छपाई) और धारा 128 (वोट की गोपनीयता), और मतदान के दिन सवेतन छुट्टी वाले आदेश में धारा 135ख, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 के अनुसार पंचायत चुनावों में भी लागू बताई गई हैं। प्रशिक्षण फ़ाइल इस तालिका की सभी धाराओं को इसी धारा 22 के माध्यम से लागू बताती है। इनकी तालिका चार स्लाइडों पर चलती है। पहली छह धाराएँ ये हैं:
RPA धारा
चुनावी अपराध
सजा / परिणाम
सेक्टर मजिस्ट्रेट की कार्रवाई
125
धर्म, जाति, समुदाय, भाषा आदि के आधार पर चुनाव में वैमनस्य/घृणा बढ़ाना
3 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
सभा/प्रचार की सूचना पुलिस को; प्रमाण सुरक्षित
126
मतदान समाप्ति से पहले 48 घंटे में निषिद्ध public meeting/election matter
2 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
सभा/प्रचार तुरंत बंद करवाने हेतु पुलिस को सूचना
127
Election meeting में disorderly conduct
6 माह तक कारावास या ₹2,000 तक जुर्माना, या दोनों
पुलिस बल से स्थिति नियंत्रित
128
मतदान की गोपनीयता भंग
3 माह तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
secrecy violation रोकें; RO/पुलिस को रिपोर्ट
129
चुनाव अधिकारी/पुलिस द्वारा उम्मीदवार के पक्ष/विपक्ष में voting influence करना
6 माह तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
निष्पक्षता सुनिश्चित; संबंधित अधिकारी की रिपोर्ट
130
Polling station के 100 मीटर के भीतर canvassing/वोट मांगना
₹250 तक जुर्माना
पुलिस से प्रचार/solicitation बंद करवाएँ
मतदान खत्म होने से पहले के 48 घंटों में सभा या प्रचार दिखे, तो उसे बंद करवाने के लिए पुलिस को बताएँ। मतदान केन्द्र के 100 मीटर के भीतर कोई वोट माँगे, तो पुलिस से वह प्रचार बंद करवाएँ। वोट की गोपनीयता भंग होती दिखे, तो उसे रोकें और RO या पुलिस को रिपोर्ट दें।
RPA, 1951: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 22 के माध्यम से लागू (2/2)
लाउडस्पीकर, हथियार, बूथ कैप्चरिंग, शराब
RPA, 1951 की इसी तालिका में आगे सात धाराएँ और हैं:
RPA धारा
चुनावी अपराध
सजा / परिणाम
सेक्टर मजिस्ट्रेट की कार्रवाई
131
Polling station के पास loudspeaker/disorderly conduct
3 माह तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
पुलिस को रोकने/उपकरण जब्त करने हेतु सूचित
132
Polling station पर misconduct/मतदान अधिकारी (PO) के lawful direction की अवहेलना
हटाया जा सकता है; पुनः प्रवेश पर 3 माह तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
मतदान अधिकारी (PO) को सहायता; पुलिस से removal
134-B
Polling station के पास arms लेकर जाना, अधिकृत व्यक्तियों को छोड़कर
2 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
हथियारबंद व्यक्ति को polling area से हटाने हेतु पुलिस कार्रवाई
135
Ballot paper को polling station से अनधिकृत रूप से बाहर ले जाना/प्रयास
1 वर्ष तक कारावास, या ₹500 तक जुर्माना, या दोनों
मतदान अधिकारी (PO)/पुलिस को तत्काल सूचना; ballot सुरक्षित
135-A
Booth Capturing
सामान्य व्यक्ति: 1-3 वर्ष + fine; Government servant: 3-5 वर्ष + fine
तत्काल पुलिस बल; polling station सुरक्षित; RO/DEO को report
135-C
Polling area में निषिद्ध 48 घंटे में liquor बेचना/देना/बाँटना
6 माह तक कारावास, या ₹2,000 तक जुर्माना, या दोनों; liquor confiscation
पुलिस/Excise को सूचना; सामग्री/वाहन/स्थान का रिकॉर्ड
136
Ballot/Election documents को fraudulently deface/destroy करना, ballot box/ballot paper में unauthorized interference आदि
सामान्य व्यक्ति: 6 माह तक या fine/both; official-duty person: 2 वर्ष तक या fine/both
सामग्री को न छेड़ें; सुरक्षित कर पुलिस/RO को सूचना
बूथ कैप्चरिंग हो, तो तुरंत पुलिस बल बुलाएँ, मतदान केन्द्र सुरक्षित करें और RO/DEO को report दें। मतदान अधिकारी (PO) की बात न मानने वाले को हटाया जा सकता है, इसमें मतदान अधिकारी की मदद करें। चुनाव की सामग्री से छेड़छाड़ दिखे, तो उसे खुद न छेड़ें। उसे सुरक्षित कराकर पुलिस या RO को बताएँ।
सूखा दिवस। वित्त (आबकारी) विभाग के 14.10.2026 के आदेश से, जो आयोग ने अपने पत्र 10542 (15.10.2026) से हर ज़िला निर्वाचन अधिकारी को भेजा, हर चरण में मतदान वाले इलाक़े और उसके 5 किलोमीटर के दायरे में ये सूखा दिवस रहेंगे:
किसका मतदान
पहला चरण
दूसरा चरण
तीसरा चरण
चौथा चरण
ज़िला परिषद और पंचायत समिति: शाम 6 बजे से, मतदान वाले दिन शाम 6 बजे तक
20.10.2026 से 22.10.2026
26.10.2026 से 28.10.2026
01.11.2026 से 03.11.2026
12.11.2026 से 14.11.2026
पंच और सरपंच: शाम 6 बजे से, गिनती पूरी होने तक
22.10.2026 से 24.10.2026
28.10.2026 से 30.10.2026
03.11.2026 से 05.11.2026
14.11.2026 से 16.11.2026
ज़िला परिषद और पंचायत समिति की गिनती के दिन, 20.11.2026 को भी, पंचायत इलाक़ों में सूखा दिवस रहेगा।
BNSS, 2023 की इन धाराओं में मजिस्ट्रेट और पुलिस, दोनों की शक्तियाँ हैं। धारा 15 Special Executive Magistrates की है। सेक्टर मजिस्ट्रेट को मजिस्ट्रेटी अधिकार नियुक्ति के आधार पर मिलते हैं। तुरंत का काम है अपना नियुक्ति आदेश देख लेना। धारा 16 Executive Magistrate के local jurisdiction की है। काम अपने तय क्षेत्र में होता है, और कार्रवाई sector boundary के भीतर।
धारा 163 nuisance या apprehended danger के urgent cases की है। State Government ने specially empowered Executive Magistrate बनाया हो, तो written order जारी करने की शक्ति है। यह आदेश तत्काल खतरे, riot, affray या public tranquillity disturbance को रोकने के लिए है। धारा 168 में cognizable offences को रोकना पुलिस का निवारक कर्तव्य है। यहाँ सेक्टर मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत स्थिति बताए।
धारा 170 में cognizable offence रोकने के लिए arrest की power Police Officer की है। अपराध और किसी तरह न रुके, तो पुलिस कानून के अनुसार arrest कर सकती है। धारा 172 पुलिस के lawful directions के पालन की है, इनमें सहयोग करें। अवज्ञा या प्रतिरोध हो, तो पुलिस से वैधानिक कार्रवाई कराएँ। धारा 173 cognizable offence की सूचना और FIR procedure की है। सूचना थाने या पुलिस अधिकारी तक पहुँचाएँ, और शिकायत रिकॉर्ड कराने के लिए पुलिस को भेजें।
पाँच हालात अत्यंत गंभीर हैं। मतदाता को धमकी मिले, तो यह BNS 171 का मामला है; प्राथमिक कार्रवाई: पुलिस, सुरक्षा और RO। पैसा या शराब बँटे, तो BNS 170/173 और RPA 135-C लगती हैं; प्राथमिक कार्रवाई: पुलिस या संबंधित enforcement।
100 मीटर में प्रचार हो, तो RPA 130 के तहत पुलिस से प्रचार बंद करवाएँ। बूथ कैप्चरिंग हो, तो RPA 135-A के तहत तुरंत पुलिस बल बुलाएँ और RO/DEO को बताएँ। EVM या ballot में छेड़छाड़ हो, तो RPA 135/136 और परिस्थिति के अनुसार दूसरे अपराध बनते हैं। तब सामग्री सुरक्षित कराएँ, और पुलिस व RO को बताएँ।
100 मीटर का यह नियम प्रचार का है, यानी RPA धारा 130 का। आयोग के आदेशों के संकलन में दी गई आदर्श आचरण संहिता के अनुसार अभ्यर्थी मतदान केन्द्र से 200 मीटर की परिधि में अपना कैम्प किसी भी स्थिति में न लगाएँ। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव बूथ लगाने की अनुमति है। सेक्टर मजिस्ट्रेट की प्रशिक्षण स्लाइड में दलों या अभ्यर्थियों के बूथ के लिए यह दूरी मतदान केन्द्र की सीमा से 200 मीटर लिखी है। इसी प्रशिक्षण सामग्री में उसका यह काम भी लिखा है कि मतदान केन्द्र की 200 मीटर की परिधि में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय न हो।
सेक्टर मजिस्ट्रेट का Pocket Flow एक नज़र में बारह पड़ाव का है। पहले टीम और मशीन की जाँच, फिर बूथ का लेआउट, फिर प्रवेश पर नियंत्रण। चौथा पड़ाव Mock Poll है, और उसके बाद पहचान और पर्ची। फिर EVM से मतदान, और विशेष या Tendered Vote।
आठवाँ पड़ाव मतदान का समापन है। उसके बाद CLOSE/TOTAL, और फिर Form-14। आखिर में सीलिंग, और PE पैकेट का हस्तांतरण।
इस प्रस्तुति के चार उद्देश्य हैं। मतदान दल की तैयारी और मतदान केन्द्र की व्यवस्था पर निगरानी रहे। EVM, Mock Poll और मतदान प्रक्रिया की प्रमुख जाँच हो। मतदाता की पहचान, विशेष मतदाता और Tendered Vote पर जल्दी मार्गदर्शन मिले। मतदान खत्म होने के बाद रिकॉर्ड, सीलिंग और पैकेटों की जाँच हो।
सेक्टर मजिस्ट्रेट का मुख्य फोकस पाँच बातों पर है। मतदान दल समय पर और मिलकर काम कर रहा है या नहीं। तय मतदान केन्द्र पर ज़रूरी मशीन और सामग्री है या नहीं। वोट की गोपनीयता, कतार और आने-जाने की व्यवस्था कैसी है। Mock Poll के बाद परिणाम का मिलान और CLEAR की प्रक्रिया हुई या नहीं। समापन पर रिकॉर्ड और सीलिंग पूरी है या नहीं।
मतदान से पहले दल की शुरुआती जाँच करें। मतदान दल के हर सदस्य से परिचय लें। दल को एकजुट करके सबकी जिम्मेदारियाँ साफ़ कराएँ। मतदान की सारी सामग्री इकट्ठी हो गई है, इसकी पुष्टि करें। मतदान केन्द्र और रास्ते की जानकारी दल के पास हो।
फिर EVM की शुरुआती जाँच करें। Control Unit (CU) और Ballot Unit (BU) वही हों, जो उस बूथ के लिए तैयार की गई हैं। Address Tag से मशीन की पहचान मिलाएँ। जिला परिषद् सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के सेट की पहचान अलग है। पीला/नीला रंग-कोड और स्टिकर/Address Tag जाँच लें।
EVM सेट की पहचान रंग से होती है। जिला परिषद् सदस्य के लिए पीले रंग का Address Tag/पहचान है, और पंचायत समिति सदस्य के लिए नीले रंग का। मशीन सेट और कैरिंग बॉक्स की पहचान एक जैसी है, यह देखें। मशीन या सेट गलत हो, तो मतदान शुरू न होने दें। मतदान अधिकारी (PO) से तुरंत सत्यापन कराएँ।
मशीन के हिसाब से भी पहचान अलग है। M-3 EVM हो, तो जिला परिषद् का पीला टैग और पंचायत समिति का नीला टैग। MPSV/MPMV EVM हो, तो एक ही CU होती है, और BU अलग-अलग होती हैं।
मशीन का नाम प्रशिक्षण फ़ाइल में तीन तरह से छपा है: कहीं M-3, कहीं M3A और कहीं M-3(A)। आयोग के पत्र 1299 (03.02.2026) में भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (BEL) की ईवीएम का नाम M3A, MK-5 Model है। इलेक्ट्रोनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) की मशीनें MPSV और MPMV हैं।
MPSV/MPMV EVM हो, तो जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य, दोनों की एक ही CU होती है। कन्ट्रोल यूनिट के कैंडिडेट सैक्शन के बाहरी कवर पर पीले और नीले, दोनों रंग के एड्रेस टैग होते हैं। इन टैग के पीछे SDMM का नंबर लिखा होता है, और आगे उस बूथ की जानकारी। BU अलग-अलग होती हैं। बूथ के लेआउट वाले चित्र में CU के बगल में दो वोटिंग कम्पार्टमेंट दिखाए गए हैं, एक Z.P. MEMBER का और एक P.S. MEMBER का।
स्टीकर के लिए आयोग का पत्र क्रमांक एफ.7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/1299, दिनांक 03.02.2026 देखें। इसके बिन्दु 1.4 के अनुसार, दोनों पदों की एक CU पर स्टीकर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। पर यह CU सिर्फ एक पद के निर्वाचन में भी लग सकती है। यानी सिर्फ जिला परिषद सदस्य या सिर्फ पंचायत समिति सदस्य के लिए। तब सिंगल पोस्ट सिंगल वोट ईवीएम की तरह इस पर भी यथा स्थिति स्टीकर लगाए जाएँगे।
मतदान दल के प्रशिक्षण में स्टिकर की एक तालिका है। पंचायत में पंच, सरपंच का चुनाव मतपेटी से हो, तो कोई स्टिकर नहीं। पंचायत समिति/जिला परिषद् सदस्य के चुनाव में MPSV मॉडल की एक ही मशीन लगे, तो कोई स्टिकर नहीं। M-3 मॉडल की अलग-अलग मशीनें लगें, तो पंचायत समिति सदस्य के लिए नीला और जिला परिषद सदस्य के लिए पीला स्टिकर। उसी प्रशिक्षण की MPSV/MPMV वाली स्लाइड पर "पीले रंग का स्टीकर" भी छपा है।
रवानगी के समय CU का पॉवर स्विच ऑन करें, और डिस्प्ले क्रम से जाँचें। सबसे पहले डिस्प्ले पैनल पर दिनांक एवं समय मिलाएँ। LINK ERROR/BU NOT RESPONDING दिखे, तो CU और BU का कनेक्शन हटाकर फिर जोड़ें। एक से अधिक BU हों, तो उनका अनुक्रम (Sequence) सही हो। इसके बाद भी LINK ERROR/BU # 1/2 NOT RESPONDING दिखे, तो संबंधित BU बदलवाएँ।
CLOCK ERROR दिखे, तो CU बदलवाएँ। पर मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली मशीन (MPMV) में CU नहीं बदलनी है। बैटरी MPSV/MPMV में HIGH मोड में हो, और M3A में 95 प्रतिशत से अधिक हो। ऐसा न हो, तो CU बदलवाएँ।
CU पर दिखी अभ्यर्थियों की संख्या, BU के बैलेट पेपर पर दिखी संख्या से मिलाएँ। दोनों एक समान होनी चाहिए। MPSV मॉडल में SDMM NOT RESPONDING दिखे, तो CU बदलवाएँ। इसके बाद CU को OFF करना न भूलें। मतदान दलों के जाने से पहले कोई भी संदेह हो, तो वितरण के समय ही उसका समाधान करें। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा अधिकृत संबंधित अधिकारियों से चर्चा करें।
CU पर जो दिखे, उसके हिसाब से तय है कि मशीन बदलनी है या नहीं। LINK ERROR/BU NOT RESPONDING दिखे, तो MPSV, MPMV और M3A, तीनों में फिर से कनेक्ट करें। एक से अधिक BU हों, तो उनका अनुक्रम (Sequence) सही हो। फिर भी यही दिखे, तो संबंधित BU बदलवाएँ।
CLOCK ERROR दिखे, तो M3A में CU बदलें। मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली मशीन (MPMV) में CU न बदलें, ऐसे में पंचनामा तैयार करें। MPSV मॉडल की मशीनों में SDMM NOT RESPONDING दिखे, तो CU बदलवाएँ।
बैटरी MPSV/MPMV में HIGH मोड में हो, या M3A में 95 प्रतिशत से अधिक हो, तो CU न बदलें। नहीं तो CU बदलें। अभ्यर्थियों की संख्या CU और BU दोनों पर देखें, यह दोनों प्रकार की मशीनों पर लागू है। संख्या समान हो तो मशीन न बदलें, नहीं तो बदलें।
Candidate Set और मशीन की तैयारी देख लें। Candidate Set section में बैटरी काम कर रही है, यह जाँचें। Power Switch को ON और OFF करके परखें। जितनी Voting Units चाहिए, उतनी मौजूद हों।
हर BU पर बटन की व्यवस्था उम्मीदवारों की संख्या (NOTA सहित) के हिसाब से है, यह देखें। बाकी बटन Masked हों, और मशीन तय तरीके से सीलबंद हो।
प्रस्तावित भवन का निरीक्षण मतदान अधिकारी (PO) करता है। फिर केन्द्र Lay-out के हिसाब से जमाया जाता है।
जमाते समय ये दो बातें देखी जाती हैं। मतदान कक्ष यानी वोटिंग कम्पार्टमेंट और CU के बीच पर्याप्त दूरी हो। मतदाता के आने-जाने के रास्ते में कोई रुकावट न हो।
MPSV या MPMV मशीन वाले बूथ में दोनों पदों के लिए एक ही CU होती है, पर BU अलग-अलग होती हैं। मतदाता अंदर (IN) आकर पहले APO-1 के पास जाता है, फिर APO-2 के पास। APO-3 के पास जि.प. सदस्य और पं.स. सदस्य, दोनों चुनावों की वही एक CU रहती है।
इसके आगे दो अलग वोटिंग कम्पार्टमेंट हैं। पहले में जि.प. सदस्य का वोट पड़ता है, दूसरे में पं.स. सदस्य का। उसके बाद मतदान अधिकारी (POLLING OFFICER) आता है, और फिर बाहर (OUT) का रास्ता।
चित्र में यही नक्शा है। बाईं ओर IN का तीर, फिर APO-1, APO-2 और APO-3 के नीचे CU का डिब्बा। दाईं ओर दो कम्पार्टमेंट, वहाँ से तीर POLLING OFFICER तक और फिर OUT तक। POLLING AGENT का डिब्बा APO-1 और APO-2 के ऊपर दिखाया गया है।
M-3 मशीन वाले बूथ में दोनों पदों की अलग-अलग CU होती हैं, और दो कम्पार्टमेंट। मतदाता अंदर आकर पहले APO-1, फिर APO-2 के पास जाता है। APO-3 के पास जि.प. सदस्य की CU है। उसके आगे जि.प. सदस्य का वोटिंग कम्पार्टमेंट है।
वहाँ से मतदाता APO-4 के पास पहुँचता है। APO-4 के पास पं.स. सदस्य की CU है, और उसके आगे पं.स. सदस्य का कम्पार्टमेंट। फिर मतदान अधिकारी (POLLING OFFICER) और बाहर (OUT)।
चित्र में मतदाता का रास्ता तीरों से दिखाया गया है। ऊपर की लाइन में IN, APO-1, APO-2, APO-3 की CU और जि.प. सदस्य का कम्पार्टमेंट है। वहाँ से तीर नीचे APO-4 की CU तक जाता है, फिर पं.स. सदस्य का कम्पार्टमेंट, POLLING OFFICER और OUT।
बूथ जमाते समय BU को वोटिंग कम्पार्टमेंट में सही जगह पर रखें। CU ऐसी जगह हो जहाँ मतदान की गोपनीयता पर असर न पड़े। CU और BU को जोड़ने वाली केबल मतदाता के चलने में बाधा न बने। अंदर आने और बाहर जाने (IN/OUT) का रास्ता साफ रखें। Polling Agents के लिए तय जगह पक्की करें।
केन्द्र पर कुछ चीज़ें लगाना अनिवार्य है। पहली, केन्द्र का नाम, मतदाताओं की संख्या और उससे जुड़े क्षेत्र की सूचना। दूसरी, भवन या केन्द्र की पहचान और मतदान अधिकारी (PO) का ब्योरा। साथ में प्रारूप-5 में चुनाव लड़ रहे अभ्यर्थियों की सूची लगेगी। मतदाताओं के लिए Do's & Don'ts भी लगें, और वोट कैसे दें, इसका प्रदर्शन भी।
मतदान केन्द्र में हर कोई नहीं आ सकता। अंदर आने का हक मतदान अधिकारी और मतदान दल को है। चुनाव से जुड़ी पुलिस और ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक भी आ सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकृत व्यक्ति भी। अभ्यर्थी के अधिकृत निर्वाचन अभिकर्ता नियम के अनुसार आएँगे। मतदाता की गोद का बच्चा साथ आ सकता है। बाकी कोई भी व्यक्ति केवल मतदान अधिकारी (PO) की अनुमति से अंदर आएगा।
पहचान सहायक आम तौर पर केन्द्र के बाहर रहे। किसी खास मतदाता की पहचान के लिए ज़रूरी हो, तो उसे अंदर बुलाया जा सकता है। केन्द्र के अंदर किसी को प्रचार करने या मतदाता को प्रभावित करने की अनुमति नहीं है। Polling Agent देर से आए, तो उसे अंदर आने दिया जा सकता है। उसके लिए प्रक्रिया फिर से शुरू करने की ज़रूरत नहीं है।
राजनीतिक नेताओं या अभ्यर्थियों के नाम, फोटो या चुनाव-चिह्न वाले बैज और प्रतीक पर रोक है। मतदान केन्द्र के अंदर या उसकी 100 मीटर की सीमा में इनकी अनुमति नहीं है।
अधिकृत मीडिया को भी वोट रिकॉर्ड होते समय फोटो लेने न दें। कैमरा, वीडियो और मोबाइल को केन्द्र के अंदर लाने से रोकें।
अधिकृत Polling Agent को तय प्रपत्र और पहचान के आधार पर अंदर आने दें। उन्हें अधिकृत बैज दिलवाएँ। उनसे कहें कि मतदान शुरू होने से लगभग 1 घंटे पहले पहुँच जाएँ। कोई अधिकृत एजेंट देर से आए, तो उसे प्रक्रिया के अनुसार शामिल करें।
MPSV/MPMV मॉडल में मतदान अधिकारियों की भूमिका बूथ व्यवस्था के अनुसार रहती है। M-3(A) मॉडल में APO-1 से APO-4 तक भूमिका बाँटी जाती है। सेक्टर स्तर पर यह देखें कि हर अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी समझता है। मशीन या मॉडल बदले, तो भूमिका फिर से साफ करवाएँ।
मतदान अधिकारी के चार कर्तव्य हैं। पहला, मतदाताओं के वोट देने की ठीक व्यवस्था करना। हर पोलिंग बूथ में मतदान इन्हीं की देखरेख और निगरानी में होगा।
दूसरा, अंधे और अपाहिज मतदाताओं को उनकी इच्छा के अनुसार वोट अंकित करने में मदद करना। तीसरा, अपने बूथ में टेंडर मतपत्र से मतदान और चैलेंज वोटों के मामले तय करना। चौथा, उम्मीदवारों के चैलेंज किए मतदाताओं के मामले निपटाना।
मतदान से पहले के दिन किसी कार्मिक को मशीन चलाने या मतदान प्रक्रिया पर शंका हो सकती है। उसका समाधान सेक्टर मजिस्ट्रेट को करना है।
प्रथम सहायक मतदान अधिकारी, यानी APO-1, मतदाता की पहचान करता है। पहचान राज्य निर्वाचन आयोग के तय फोटो दस्तावेजों के आधार पर होती है। चिन्हित मतदाता सूची इसी के पास रहती है, और पहचान की ज़िम्मेदारी भी इसी की है।
APO-1 पक्का करता है कि मतदाता की बाईं तर्जनी पर अमिट स्याही का कोई निशान न हो। पहचान हो जाने पर वह मतदाता की एंट्री का पूरा ब्योरा जोर से बोलता है। इससे दूसरे सहायक मतदान अधिकारी (APO-2) और पीछे बैठे पोलिंग एजेंट उसे सुन लेते हैं।
पहचान होते ही APO-1 हर मतदाता के नाम के नीचे लाइन (Underline) खींचता है। महिला मतदाता हो, तो नाम के बाईं तरफ टिक (√) लगाता है। थर्ड जेंडर के रूप में अंकित मतदाता के बाईं तरफ स्टार (*) लगता है।
पहचान भारत निर्वाचन आयोग के फोटो मतदाता पहचान पत्र से हुई हो, तो नाम के आगे 'E' लिखा जाता है। दृष्टिबाधित या दिव्यांग मतदाता हो, तो उसकी क्रम संख्या पर 'AA' भी लिखें।
बूथ पर बैठे मतदान अभिकर्ता, उम्मीदवार या निर्वाचन अभिकर्ता किसी मतदाता की पहचान को चुनौती दे सकते हैं। पर यह चुनौती इसी स्टेज पर होगी, बाद में नहीं।
चिन्हित सूची के ये निशान इसलिए लगते हैं, ताकि आखिर में गिनती हो सके। गिनकर पता चलता है कि कितने पुरुष, कितनी स्त्री और कितने थर्ड जेंडर मतदाताओं ने वोट दिए। मतदान खत्म होने के बाद इन्हीं निशानों से गिनती होती है। ये आँकड़े मतदान अधिकारी की डायरी और Form of Statistics में भरे जाते हैं।
वोट रिकॉर्ड करने देने से पहले मतदाता के हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी मतदाता रजिस्टर (प्ररूप-12) में ले लें। कोई मतदाता रजिस्टर में हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी देने से मना करे, तो उसे वोट देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह नियम आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका में पेज 12, बिंदु 19 पर लिखा है।
द्वितीय सहायक मतदान अधिकारी: रजिस्टर, पर्ची, स्याही
द्वितीय सहायक मतदान अधिकारी, यानी APO-2, के पास मतदाता रजिस्टर रहता है। मतदाता पर्चियाँ पद के हिसाब से अलग-अलग रंग की होती हैं। अमिट स्याही का भार भी इसी पर है। मतदाता आए, तो APO-2 उसकी बाईं तर्जनी देखता है कि उस पर अमिट स्याही का कोई निशान तो नहीं।
फिर रजिस्टर भरा जाता है। कॉलम 1 में लगातार क्रम संख्या लिखी जाती है, जो 1 से शुरू होती है। कुछ पन्नों पर यह संख्या पहले से लिखकर रख सकते हैं। कॉलम 2 में चिन्हित सूची में मतदाता की क्रम संख्या जाती है। कॉलम 4, यानी अभ्युक्तियाँ (REMARKS), में पहचान दस्तावेज के नंबर के अंतिम चार अंक लिखे जाते हैं।
कॉलम 1, 2 और 4 भर जाने के बाद कॉलम 3 में साक्षर मतदाता के हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी ली जाती है। इसके बाद मतदाता APO-3 के पास जाता है, जो EVM का प्रभारी है।
जो मतदाता हस्ताक्षर नहीं कर सकता, उसके बाएँ अंगूठे की छाप रजिस्टर में ली जाती है। बायाँ अंगूठा न हो, तो दाएँ अंगूठे की छाप लें। दोनों अंगूठे न हों, तो बाएँ हाथ की कोई अंगुली लें, तर्जनी से शुरू करके। बाएँ हाथ में कोई अंगुली न हो, तो दाएँ हाथ की अंगुली लें, यह भी तर्जनी से शुरू करके।
मतदाता रजिस्टर का प्ररूप "प्ररूप-12 (नियम 40क देखिए)" है। इसमें चार कॉलम हैं: "क्र.स", "निर्वाचक नामावली में निर्वाचक का क्रम संख्या", "निर्वाचक के हस्ताक्षर/अंगूठा निशानी" और "अभ्युक्तियां"। नीचे "पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर" की जगह है।
मतदाता पर्ची परिशिष्ट-13 में है। पर्ची पर तीन बातें लिखी जाती हैं। पहली, रजिस्टर के कॉलम 1 के अनुसार मतदाता की क्रम संख्या। दूसरी, नामावली में दर्ज क्रम संख्या। तीसरी, "मतदान अधिकारी के लघु हस्ताक्षर" (प्ररूप पर यही छपा है)। पर्ची दूसरा सहायक मतदान अधिकारी (APO-2) जारी करता है। ईवीएम मार्गदर्शिका में उसका नाम "द्वितीय मतदान अधिकारी" है, क्योंकि मशीन वाले चुनाव में मार्गदर्शिका सहायक मतदान अधिकारी को "मतदान अधिकारी" कहती है। जि.प. सदस्य के चुनाव की पर्ची पीली होती है, पं.स. सदस्य के चुनाव की नीली।
पहले चित्र में प्ररूप-12, मतदाता रजिस्टर का खाली पन्ना है, ऊपर निर्वाचन, वार्ड और बूथ लिखने की जगह के साथ। दूसरे चित्र में परिशिष्ट-13, मतदाता पर्ची का खाली प्ररूप है, उसकी तीन लाइनों और रंग वाले नोट के साथ।
मूल SLMT स्लाइड: प्ररूप-12, मतदाता रजिस्टर
खाली प्ररूप (SLMT प्रपत्र-पुस्तिका, जि.प.-पं.स.): परिशिष्ट-13, मतदाता पर्ची
अमिट स्याही का भार APO-2 पर है। APO-1 और APO-2, दोनों देखते हैं कि मतदाता की बाईं तर्जनी पर अमिट स्याही का कोई निशान तो नहीं है।
आयोग के पत्र 1408 (04.02.2026) के अनुसार स्याही बाईं तर्जनी पर लगेगी। यह नाखून के आखिरी सिरे से पहले जोड़ के नीचे तक, ब्रश से लगाई जाएगी। CU का प्रभारी सहायक मतदान अधिकारी बैलेट बटन दबाने से पहले पक्का करे कि स्याही का निशान पूरी तरह लगा है।
चित्र पत्र 1408 का आरेख है। इसमें एक उठी हुई तर्जनी है। उस पर तीर "नाखून का मुक्त छोर या सिरा", "प्रथम जोड़" और "ब्रश" दिखाते हैं।
MPSV/MPMV मशीन हो, तो तीसरे सहायक मतदान अधिकारी (APO-3) के पास एक ही नियंत्रण यूनिट रहती है। वह जि.प. सदस्य और पं.स. सदस्य, दोनों चुनावों की इसी यूनिट का प्रभारी होता है। वह APO-2 की दी पीली (जि.प. सदस्य) और नीली (पं.स. सदस्य) पर्ची देखकर ही मतदाता को प्रकोष्ठ में जाने देता है। साथ में यह भी जाँचता है कि अमिट स्याही का निशान साफ है।
APO-3 दोनों तरह की पर्चियाँ अलग-अलग इकट्ठा करता है। मतदान खत्म होने पर पीली पर्चियाँ लिफाफा PE-45 में और नीली पर्चियाँ लिफाफा PE-44 में रखकर सील करता है। बूथ में दो अलग मतदान प्रकोष्ठ होते हैं। पहले में जि.प. सदस्य की BU रहती है, दूसरे में पं.स. सदस्य की।
M-3 मशीन हो, तो तीसरे सहायक मतदान अधिकारी (APO-3) जिला परिषद सदस्य चुनाव की Control Unit का प्रभारी होता है। वह APO-2 की दी पीली पर्ची देखकर ही मतदाता को मतदान कक्ष में जाने देता है। अमिट स्याही का निशान भी साफ देखता है।
APO-3 पीली पर्चियाँ इकट्ठा करता रहता है। मतदान खत्म होने पर उन्हें लिफाफा PE-45 में रखकर सील करता है। वोट दर्ज होने के बाद मतदाता कक्ष से बाहर आकर APO-4, यानी चौथे सहायक मतदान अधिकारी, के पास जाता है।
M-3 में एक वोट तीन कदमों में दर्ज होता है। मतदाता मतदान कक्ष में जाए, तो CU का प्रभारी CU का Ballot बटन दबाता है। CU पर Busy की लाल बत्ती जलती है, और BU पर Ready की हरी बत्ती।
अब मतदाता अपने उम्मीदवार या चुनाव-चिह्न का बटन दबाता है, या NOTA का। संबंधित लाल लैम्प जलता है और बीप की आवाज आती है। बीप बंद हो जाए, और लैम्प व Busy की लाल बत्ती बुझ जाए, तो वोट दर्ज हो गया।
M-3 मशीन हो, तो चौथे सहायक मतदान अधिकारी (APO-4) पंचायत समिति सदस्य चुनाव की Control Unit का प्रभारी होता है। वह APO-2 की दी नीली पर्ची देखकर ही मतदाता को मतदान कक्ष में जाने देता है। अमिट स्याही का निशान भी साफ देखता है। Ballot बटन, वोट और उसकी पुष्टि की प्रक्रिया वही है जो APO-3 की है।
मतदाता जो नीली पर्चियाँ लाते हैं, APO-4 उन्हें अपने पास इकट्ठा करता रहता है। मतदान खत्म होने पर सारी पर्चियाँ नीली पर्ची लिफाफा (PE-44) में रखकर तय प्रक्रिया से सील करता है।
मॉक पोल मतदान अधिकारी कराते हैं, मतदान शुरू होने से 1 घंटा पहले। कोई अभिकर्ता न आया हो, या केवल एक आया हो, तो बाकी अभिकर्ताओं के लिए 15 मिनट इंतज़ार होता है। फिर भी कोई न आए, तो मॉक पोल करके मशीन सील कर दी जाती है। मतदान अपने तय समय पर ही शुरू होता है।
मॉक पोल के बाद तय प्रमाण-पत्र पर मौजूद अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। मॉक पोल में भी जि.प. सदस्य के लिए पीली और पं.स. सदस्य के लिए नीली मतदाता पर्ची जारी होती है। दोनों पर्चियाँ अलग-अलग इकट्ठा होती हैं। हर मॉक पोल मतदाता दोनों पदों के लिए एक-एक वोट डालता है।
सेक्टर मजिस्ट्रेट को पक्का करना है कि मतदान शुरू होने से पहले हर केंद्र पर मॉक पोल हो जाए। कहीं कोई कठिनाई हो, तो उसे सुलझाने की कार्यवाही करनी है।
मॉक पोल ऐसे चलता है। CU पर BALLOT बटन दबाकर मतदान शुरू करें। मॉक पोल मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट दे। हर उम्मीदवार को मिले वोटों का लेखा परिशिष्ट-19 के अनुसार अलग-अलग बनाएँ। हर उम्मीदवार को, NOTA सहित, कम से कम 1 वोट मिले। सबको बराबर वोट देना जरूरी नहीं है।
मॉक पोल खत्म हो, तो CU का CLOSE बटन दबाएँ। CU पर जो परिणाम दिखे, उसे परिशिष्ट-19 के लेखे से मिलाएँ। फिर अभ्यर्थियों और मतदान अभिकर्ताओं को परिणाम दिखाएँ। पुष्टि के बाद CLEAR बटन से मॉक पोल के सारे वोट और उनकी गिनती शून्य करें। डिस्प्ले पर END दिखे, तब CU बंद (Power Off) करें।
आयोग के पत्र 1161 (30.01.2026) में भी यही मिलान है। Result बटन से मिला परिणाम, हाथ से बने मॉक पोल प्रमाण-पत्र के परिणाम से मिलाना है। दोनों में कोई भिन्नता हो, तो तुरंत रिटर्निंग अधिकारी को बताना है और उनके निर्देश से काम करना है।
मॉक पोल के वोटों को CLEAR करना अनिवार्य है। परिणाम अनुभाग सील करने से पहले CU को स्विच OFF करना न भूलें। मतदान के बीच पूरा मशीन सेट बदलना पड़े, तब भी मॉक पोल की प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
मॉक पोल पूरा होने पर मतदान अधिकारी परिशिष्ट-19 में मॉक पोल प्रमाण-पत्र बनाते हैं। दोनों चुनावों के लिए यह प्रमाण-पत्र अलग-अलग बनता है। जि.प. और पं.स. के लिए दो मशीनें लगी हों (M-3), तो दोनों के प्रमाण-पत्र अलग बनेंगे। MPSV मॉडल की मशीन हो, तो एक ही प्रमाण-पत्र में दोनों चुनावों का मॉक पोल विवरण आता है।
प्रमाण-पत्र मतदान अधिकारी की घोषणाओं (परिशिष्ट-7) के साथ लगाया जाता है। जि.प. सदस्य वाला लिफाफा PE-56 में रखा जाता है, पं.स. सदस्य वाला लिफाफा PE-55 में।
चित्र भरे हुए फॉर्म का नमूना है, शीर्षक "(परिशिष्ट-19) प्रारूप मॉकपॉल प्रमाण पत्र"। पहले कॉलम में क्रम संख्या है, फिर मॉक पोल में भाग लेने वाले का नाम और मॉकपॉल वोटर पर्ची क्रमांक। फिर जि.प. सदस्य और पं.स. सदस्य के लिए, जिसे वोट दिया उस अभ्यर्थी की क्रम संख्या है। आखिर में हस्ताक्षर का कॉलम है। नीचे लिखा है कि Result-I बटन से मिले वोटों का मिलान हो गया और कोई भिन्नता नहीं है। फिर लिखा है कि वोट Clear (डिलीट) कर दिए गए, और मतदान अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। नमूने के नाम और अंक केवल उदाहरण हैं।
भरा हुआ नमूना (SLMT प्रपत्र-पुस्तिका, जि.प.-पं.स.): परिशिष्ट-19
मतदाता आए, तो उसके बाएँ हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही का निशान जाँचें। मतदाता रजिस्टर में क्रम संख्या क्रम से ही दर्ज हो। यह क्रम संख्या मतदाता सूची की चिन्हित प्रति से मिलाएँ। पहचान दस्तावेज के अंतिम चार अंक Remarks में दर्ज किए जाएँ।
मतदाता रजिस्टर Form-12 में पहचान और बाकी एंट्री पूरी हो जाए, तब मतदाता के हस्ताक्षर या अंगूठा निशान लें। अंगूठा निशान लेना हो, तो तय अंगूठे की ही छाप लें। बायाँ अंगूठा न हो, तो निर्देश के अनुसार दायाँ या कोई दूसरी उपयुक्त अंगुली की छाप लें। रजिस्टर की एंट्री के बीच बेवजह खाली जगह न रहे।
पर्चियों का रंग याद रखें। जिला परिषद् सदस्य के लिए पीली मतदाता पर्ची है, पंचायत समिति सदस्य के लिए नीली। MPSV/MPMV व्यवस्था में दोनों तरह की पर्चियाँ अलग-अलग इकट्ठा होती हैं। मशीन, पर्ची और पद के बीच गलत मिलान न होने दें।
मतदान के दौरान सेक्टर में निगरानी इन बातों पर रहती है। कतार, अंदर आने और बाहर जाने की व्यवस्था सुचारु रखें। वोट की गोपनीयता पर कोई असर न पड़े।
अनधिकृत प्रचार, प्रभाव डालने, या मोबाइल-कैमरा से जुड़ा कोई उल्लंघन हो, तो मतदान अधिकारी (PO) को निर्देश दें। EVM के संकेतों या प्रक्रिया में कुछ असामान्य लगे, तो मतदान दल से तथ्य वाली स्थिति लें। जरूरी घटना या समस्या का समय के साथ रिकॉर्ड रखें।
दृष्टिबाधित या दिव्यांग मतदाता अनुरोध करे, तो मतदान कक्ष में जाकर वोट रिकॉर्ड कराने में मदद दी जाती है। प्रक्रिया मतदाता की इच्छा के अनुसार ही हो। निर्वाचक नामावली में उसकी एंट्री के सामने तय संकेत या अक्षर दर्ज होता है। किसी और व्यक्ति को मदद चाहिए, तो मतदान अधिकारी (PO) नियमों के अनुसार फैसला करे।
कभी मतदाता की उम्र पहली नज़र में तय न्यूनतम उम्र से कम लगती है। फिर भी पहचान और नाम से संतोष हो, तो तय आयु संबंधी घोषणा ली जा सकती है। घोषणा से पहले उसे बताएँ कि झूठी घोषणा पर दंड का प्रावधान है। घोषणाओं की, और बिना घोषणा लौटे मतदाताओं की, अलग सूची या रिकॉर्ड बने। इनसे जुड़े दस्तावेज PE-57 में रखने का निर्देश है।
कभी किसी मतदाता के नाम पर कोई और पहले ही वोट डाल चुका होता है। असली मतदाता की पहचान संतोषजनक हो, तो उसके लिए Tendered Vote की प्रक्रिया होती है।
तय छपे मतपत्र पर 'Tendered Vote' लिखा जाता है। प्रारूप-13 में मतदाता का नाम, क्रम संख्या और हस्ताक्षर दर्ज होते हैं। मतदाता को तय Arrow Cross Mark Seal दी जाती है, ताकि वह मतदान कक्ष में वोट लगाए। फिर मतपत्र मोड़कर मतदान अधिकारी को वापस दिया जाता है। यह मतपत्र तय लिफाफे में सील होता है।
समापन के समय जितने मतदाता मौजूद हों, सबको वोट डालने का मौका मिलता है। मतदान अधिकारी (PO) कतार में मौजूद मतदाताओं के अनुसार पर्चियाँ जारी करें। आखिरी मतदाता के बाद मतदान खत्म होने की घोषणा होती है। फिर CU पर CLOSE बटन दबाएँ।
CU में दर्ज कुल वोटों का लेखा Form-14 में बनता है। Form-14 के वोट मतदाता रजिस्टर और चिन्हित मतदाता सूची से मिलाए जाते हैं। हर मौजूद Polling Agent को Form-14 की सत्यापित प्रति मिलती है। कोई प्रति लेने से मना करे, तो घोषणा में यह साफ लिखा जाता है।
मतदान खत्म होने के बाद EVM ऐसे सील होती है। TOTAL बटन से कुल पड़े वोट देखें और रजिस्टर-12 से मिलाएँ। आखिरी मतदाता की एंट्री के नीचे मतदान प्रमाण-पत्र लिखकर हस्ताक्षर लें। फिर CU OFF करें और Linking Cable अलग करें।
CU के पीछे का ढक्कन तय तरीके से सील करें। Carrying Box या यूनिट पर तय Address Tag और मतदान अधिकारी (PO) की मुहर लगे।
मतदान खत्म होने पर विविध कागजात लिफाफा PE-57 में रखे जाते हैं। इसमें बची हुई, यानी अप्रयुक्त, मतदाता पर्चियाँ जाती हैं। अप्रयुक्त एड्रेस टैग और स्पेशल टैग, और मतदान अभिकर्ता की नियुक्ति के प्रपत्र भी इसी में जाते हैं। चिन्हित मतदाता सूची को छोड़कर बाकी मतदाता सूचियाँ भी यहीं रखी जाती हैं।
मतदाताओं की आयु संबंधी घोषणाएँ और उनकी सूची भी PE-57 में जाती हैं। ये परिशिष्ट-10 और परिशिष्ट-11 हैं, जि.प. सदस्य और पं.स. सदस्य, दोनों के। अप्रयुक्त और खराब हुई पेपर सीलें और स्ट्रिप सीलें भी इसी में रखी जाती हैं। बाकी सारे विविध निर्वाचन कागजात भी।
मतदान के बाद सामान तीन काउंटरों पर जमा होता है। काउंटर-1 पर इस्तेमाल हुई कन्ट्रोल यूनिट और मतदान यूनिट सीलबंद जमा होती हैं। यहीं छह लिफाफे बिना सील जमा होते हैं। PE-52 में मतदान अधिकारी की डायरी जाती है, साथ में वोटों और पेपर सीलों के लेखे की एक प्रति। PE-53 में पं.स. सदस्य का और PE-54 में जि.प. सदस्य का "रिकार्ड किये गये मतों एवं पेपर सीलों का लेखा (प्ररूप-14)" जाता है।
PE-55 में पं.स. सदस्य की और PE-56 में जि.प. सदस्य की, मतदान अधिकारी की घोषणा जाती है। P-2 में सांख्यिकी सूचना होती है। ये सब भी काउंटर-1 पर बिना सील जाते हैं।
काउंटर-2 पर PE-42 से PE-51 तक के लिफाफे सील बंद करके जमा होते हैं। PE-42 में चिन्हित मतदाता सूची और PE-43 में मतदाता रजिस्टर जाता है। प्रयुक्त मतदाता पर्चियाँ पं.स. की PE-44 में और जि.प. की PE-45 में जाती हैं। प्रयुक्त निविदत्त मतपत्र पं.स. के PE-46 में, जि.प. के PE-47 में जाते हैं। "निविदत्त मतों की सूची" पं.स. की PE-48 में, जि.प. की PE-49 में, और अप्रयुक्त निविदत्त मतपत्र PE-50-51 में जाते हैं। विविध कागजात वाला PE-57 भी काउंटर-2 पर बिना सील जमा होता है, और बाकी सामान काउंटर-3 पर जाता है।
काउंटर-3 पर दल को दिया गया बाकी सामान लौटाया जाता है। इसमें मतदान अधिकारी की पीतल की सील और मतदान अधिकारी की पुस्तिका आती है। वोटिंग मशीन की निर्देशिका, स्टाम्प पैड और स्टाम्प पैड इंक भी यहीं जमा होते हैं। अमिट स्याही की शीशी, ऐरोक्रास मार्क सील और मेटल रूल भी यहीं लौटते हैं।
कपड़े के पर्दे या कार्ड-बोर्ड कम्पार्टमेंट भी काउंटर-3 पर जमा होते हैं। साथ में सुभेदक चिन्ह की सीलें, और रबर सीलें, केन्सिल भी। अप्रयुक्त मतदान या कन्ट्रोल यूनिट, केनवास बैग और डमी बैलेट यूनिट भी यहीं लौटती हैं। इनके अलावा जो भी सामग्री दी गई थी, वह भी काउंटर-3 पर ही जमा होती है।
आपात स्थिति में पहले मतदान की सुरक्षा और गोपनीयता पक्की करें। मतदान अधिकारी (PO) से तथ्य और जो रिकॉर्ड मौजूद है, वह लें। मशीन या मतदान प्रक्रिया में दखल न दें, अधिकृत प्रक्रिया ही अपनाएँ।
जरूरत हो, तो संबंधित उच्चाधिकारी या निर्वाचन नियंत्रण व्यवस्था को तुरंत सूचना दें। घटना का समय, स्थान, तथ्य और की गई कार्रवाई लिखित रूप में दर्ज कराएँ।
सेक्टर मजिस्ट्रेट ये बातें याद रखें। मतदान से पिछले दिन पक्का करें कि दल, सारी सामग्री और पुलिस बल केंद्र पर पहुँच गए हैं। नियंत्रण कक्ष को ओ.के. रिपोर्ट भेजें। मतदान केन्द्र की 200 मीटर परिधि में किसी दल या अभ्यर्थी का कार्यालय न हो। मॉक पोल मतदान से 60 मिनट पहले होता है। अभिकर्ता एक ही हो या कोई न हो, तो 15 मिनट इंतज़ार होता है।
जिला परिषद सदस्य का रंग पीला है, पंचायत समिति सदस्य का नीला, टैग पर भी और पर्ची पर भी। गलत मशीन या सेट हो, तो मतदान शुरू न होने दें। MPMV मशीन में CLOCK ERROR आए, तो CU न बदलें, पंचनामा तैयार करें। मॉक पोल के वोट CLEAR करना अनिवार्य है।
मतदान केन्द्र के 100 मीटर में प्रचार बहुत गंभीर स्थिति है। ऐसा हो, तो प्रचार बंद कराएँ और पुलिस की मदद लें। नेताओं या अभ्यर्थियों के नाम, फोटो या चुनाव-चिह्न वाले बैज भी केन्द्र के अंदर या 100 मीटर में नहीं चलते। समापन पर CLOSE दबाएँ, फिर TOTAL से कुल वोट देखकर रजिस्टर-12 से मिलाएँ। हर घटना का समय, स्थान, तथ्य और कार्रवाई लिखित में दर्ज हो।
संदेह हो तो अधिनियम, नियम और आयोग के निर्देश देखें
यह प्रस्तुति प्रशिक्षण के लिए बनी है। किसी संशय या संदेह में इससे जुड़े सभी अधिनियम, नियम और राजस्थान निर्वाचन आयोग के निर्देश देखते रहें। आयोग की वेबसाइट भी लगातार देखते रहें। अपना काम रिटर्निंग अधिकारी के तात्कालिक दिशा-निर्देशों के अधीन करें।
पंचायत चुनाव 2026: मतदान से पहले की ज़िम्मेदारियाँ और मतदान के दिन की ज़िम्मेदारियाँ
आदर्श आचार संहितामतदान दलों की रवानगीमतदान का दिन
एक नज़र में
ज़ोनल अधिकारी / प्रेक्षक: दो दौर की ज़िम्मेदारी
जोनल अधिकारी और प्रेक्षक की ज़िम्मेदारी दो दौर में बँटी है: मतदान से पहले और मतदान के दिन। मतदान से पहले पहला काम आदर्श आचार संहिता की पालना है। इसके बाद प्रचार सामग्री, खर्च, वाहन और लाउडस्पीकर की पाबंदियाँ आती हैं। दूसरा काम मतदान दलों की रवानगी की व्यवस्था है।
मतदान के दिन एक कंट्रोल रूम चलता है, और उस दिन वाहनों का नियमन देखना होता है। केंद्र के 100 मीटर में प्रचार नहीं होता, और उम्मीदवारों के बूथ के अपने नियम हैं। फिर मतदाता की पहचान और केंद्र में प्रवेश के नियम आते हैं। मतदान से पहले, दौरान और बाद के लिए नियम 34, 69, 34-46, 41 और 47 काम आते हैं।
आदर्श आचार संहिता, भ्रष्ट आचरण और चुनावी अपराधों के प्रावधान एक साथ चलते हैं। ये राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22 के तहत आते हैं।
धारा 22 के साथ आर.पी. अधिनियम, 1951 की कई धाराएँ जुड़ी हैं। ये हैं: 125, 126, 127, 127-ए, 128, 129, 130, 131, 132, 132-ए, 133, 134, 134-ए, 135, 135-ए, 135-बी, 135-सी और 136। भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए, 153-बी, 171-ए, 171-बी, 171-सी, 171-डी, 171-ई, 171-एफ, 171-जी और 505 भी इनमें हैं। साथ में संविधान का अनुच्छेद 243 है, और "राज. पी.आर. (इलेक्ट्रॉनिक) नियम, 1994 के नियम 79" (जैसा छपा है)।
संहिता के पहले सात बिंदुओं की पालना जोनल अधिकारी को पक्की करनी है। कोई ऐसा काम न हो जिससे जातियों, समुदायों आदि के बीच आपसी द्वेष या तनाव पैदा हो। उम्मीदवार विरोधियों के निजी जीवन की आलोचना से बचें। पूजा स्थलों से जातिगत या सांप्रदायिक भावनाएँ भड़काने का प्रयास न हो। सभी दल भ्रष्टाचार से जुड़े हर काम से बचें।
बिंदु 5 से 7 के अनुसार किसी के घर के सामने प्रदर्शन या धरना मना है। मालिक की अनुमति के बिना पोस्टर लगाना या झंडे/बैनर फहराना मना है। दूसरे दलों या उम्मीदवारों की सार्वजनिक सभा में अशांति पैदा करना भी मना है।
संहिता के बिंदु 8 से 14 की पालना भी पक्की करनी है। तय समय सीमा से ज़्यादा और बिना अनुमति लाउडस्पीकर और वाहनों का उपयोग निषिद्ध है। सत्ताधारी दल अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग नहीं कर सकता। जैसे, मंत्री का आधिकारिक दौरा चुनाव प्रचार के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी/वाहन, सार्वजनिक स्थान और विश्राम गृह आदि का उपयोग भी निषिद्ध है।
विवेकाधीन निधियों से अनुदान और भुगतान स्वीकृत करना, और शिलान्यास करना निषिद्ध है। सड़कों आदि के निर्माण का वादा करना भी निषिद्ध है। सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों में तदर्थ नियुक्तियाँ करना भी निषिद्ध है।
बिंदु 13 के अनुसार केंद्र/राज्य सरकार के मंत्री उम्मीदवार के रूप में ही मतदान/मतगणना केंद्र में प्रवेश करेंगे। बिंदु 14 संहिता में इन शब्दों में छपा है: "सत्ताधारी दल द्वारा अपने आधिकारिक पद का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए करने की किसी भी शिकायत का कोई कारण नहीं दिया जाएगा।"
मंत्रियों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश है, जो आयोग ने अपने पत्र 10568 (15.10.2026) से हर ज़िला निर्वाचन अधिकारी को भेजा। चुनाव पूरा होने तक मंत्री चुनाव वाले इलाक़े में सरकारी दौरे पर नहीं जाएँगे। छूट सिर्फ़ तब है, जब कानून-व्यवस्था बिगड़ जाए या कोई आपात स्थिति हो और उस विभाग के मंत्री का वहाँ होना ज़रूरी हो; तब विभाग के शासन सचिव इसकी सूचना आयोग को भेजेंगे। दौरे पर मंत्री सरकारी गाड़ी नहीं लेंगे, और निजी गाड़ी पर लाल बत्ती या सायरन नहीं लगाएँगे। दौरे पर रहते हुए वे चुनाव से जुड़े अधिकारियों को नहीं बुलाएँगे। सरकारी अधिकारी उनके किसी स्वागत या प्रोटोकॉल में नहीं जाएँगे।
वहाँ के विश्राम गृह, डाक बंगले और दूसरे सरकारी आवास, या उनसे लगे परिसर, मंत्री न प्रचार दफ़्तर की तरह इस्तेमाल करेंगे, न चुनाव से जुड़ी बैठक के लिए। ये आवास दूसरे दलों और उम्मीदवारों को भी बिना भेदभाव के मिलेंगे, पर वे भी इन्हें चुनाव के काम में नहीं लेंगे। ये बातें उन बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों पर भी लागू हैं, जिन्हें मंत्री या राज्य मंत्री का दर्जा मिला है।
ज़ोनल अधिकारी के प्रशिक्षण की स्लाइडों में भी मंत्रियों के दौरे और विश्राम गृहों पर नियम दिए हैं।
विवेकाधीन अनुदान पर भी रोक है। आयोग की आदर्श आचरण संहिता (राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए, 2026) के अनुसार, जब से राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करे, तब से मंत्री और दूसरे प्राधिकारी विवेकाधीन निधि से अनुदान या भुगतान स्वीकृत न करें।
ज़ोनल अधिकारी के प्रशिक्षण की स्लाइड में सांसदों/विधायकों के कोटे से धन जारी करना और सुविधाओं का विस्तार भी निलंबित लिखा है।
आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 129, 134, 134-ए · Civil Services (Conduct) Rules
सरकारी कर्मचारियों का आचरण
सरकारी कर्मचारियों के आचरण पर आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 129, 134 और 134-ए लागू होती हैं। साथ में Civil Services (Conduct) Rules भी लागू हैं। चुनाव सभा में सरकारी अधिकारी खुद मौजूद न हों। छूट सिर्फ़ उन्हें है जिनका कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के लिए वहाँ होना ज़रूरी हो।
कोई सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ सकता। वह किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग भी नहीं ले सकता। वह चुनाव एजेंट, मतदान एजेंट या मतगणना एजेंट का काम भी नहीं कर सकता।
सरकारी कर्मचारियों के आचरण पर नज़र रखी जानी है और उचित कार्रवाई की जानी है। चुनाव से जुड़े आधिकारिक कर्तव्य को तोड़ने वाले पर मुकदमा चलेगा।
आयोग का पत्र क्रमांक एफ. 7(7)(1)/पंचा/रानिआ/2026/8703, दिनांक 14.9.2026 सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलक्टर) (पंचायत) के नाम है। पत्र में लिखा है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता प्रभावी हो जाएगी, और निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक प्रभावी रहेगी। पत्र में संहिता की पालना रिपोर्ट के प्रपत्र और समय तय हैं।
कौन-सी रिपोर्ट किस प्रपत्र में और कितने समय में जाती है, यह पत्र की तालिका में है:
प्रपत्र संख्या
प्रपत्र विवरण
समयावधि
01
सरकारी संपत्ति को विरूपित करना
24 घंटे
01
सरकारी वाहनों का दुरूपयोग, शिकायतों की निगरानी
24 घंटे
02
सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करना और सार्वजनिक स्थान का दुरूपयोग करना
48 घंटे
03
निजी संपत्ति का विरूपण
72 घंटे
04
विकास/निर्माण संबंधी गतिविधियाँ
72 घंटे
जिला निर्वाचन अधिकारी को पक्का करना है कि पूरी पालना रिपोर्ट इन प्रपत्रों में भरकर भेजी जाए। रिपोर्ट हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी (Excel Sheet format) में आयोग के विभागीय ईमेल पर जाती है।
सरकारी परिसरों पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ की अनुमति नहीं है। इसमें दीवार लेखन, बैनर, पोस्टर, झंडे, होर्डिंग आदि सब आते हैं। शैक्षणिक संस्थानों को चुनाव प्रचार या रैलियों के लिए काम में नहीं लेना चाहिए। प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 7) में ये दोनों बातें आयोग के आदेश 4489, दिनांक 6.1.2000 के हवाले से दी गई हैं।
सार्वजनिक जगह पर पोस्टर और बैनर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही लग सकते हैं। आयोग की अधिसूचना क्रमांक एफ. 1(2)(1)नपा-पंचा/सा.आ./रानिआ/14/5052, दिनांक 23.12.2025 के खंड 6(2) में यह लिखित अनुमति है। यह संबंधित स्थानीय प्राधिकारी या कानून से प्राधिकृत सक्षम अधिकारी से ली जाती है। सार्वजनिक जगह पर कट आउट और होर्डिंग्स के लिए भी यही शर्त है।
अधिसूचना 5052 का खंड 6 कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर और बैनर की शर्तें बताता है। सार्वजनिक या निजी जगह पर उम्मीदवार या राजनैतिक दल इन्हें प्रतिबंधों के अधीन लगा सकते हैं। पोस्टर छपवाते समय लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127-क की पालना करनी है। आमसभा, जुलूस या रैली के लिए अधिकारिता रखने वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति ज़रूरी है।
निजी परिसर पर पोस्टर या बैनर के लिए मालिक की अनुमति ज़रूरी है। स्थानीय कानून इसकी साफ़ अनुमति दे, या इसके लिए कोई स्थानीय अनुमति न हो, दोनों हालत में यही नियम है। इस खर्च का लेखा-जोखा भी होगा। जहाँ स्थानीय कानून में कोई प्रावधान ही न हो, वहाँ निजी संपत्ति पर सिर्फ़ आसानी से हटने वाली सामग्री लगेगी। जैसे झंडियाँ, बैनर आदि। इसके लिए भी पहले संपत्ति के स्वामी की लिखित अनुमति लेनी है।
किसी भी मतदान बूथ के भवन के 200 मीटर के दायरे में कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर या बैनर नहीं लगेंगे। मतदान के दिन उम्मीदवार के चुनाव बूथ पर एक बैनर लग सकता है, जो 2x5 फीट से बड़ा न हो।
प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 7) में आदेश 4489 (6.1.2000) के हवाले से सार्वजनिक या निजी स्थानों पर कटआउट और होर्डिंग लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित लिखा है।
अधिसूचना 5052 का खंड 7 चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा तय करता है। यह सीमा धारा 22क के तहत अधिसूचना में ऊपर बताए मदों पर होने वाले खर्च की है। पद के हिसाब से सीमा यह है:
पद का नाम
अधिकतम खर्च सीमा
जिला परिषद सदस्य
रुपये 3,00,000
पंचायत समिति सदस्य
रुपये 1,50,000
सरपंच
रुपये 1,00,000
एक उम्मीदवार के पोस्टर और बैनर के खर्च की अलग सीमा आदेश 4489 के हवाले से प्रशिक्षण प्रस्तुति में है। यह जिला परिषद सदस्य के लिए 20000 रुपये, पंचायत समिति सदस्य के लिए 10000 रुपये और सरपंच के लिए 5000 रुपये है। चुनाव खर्च का लेखा प्ररूप "क" में, परिणाम की घोषणा के 15 दिन के अंदर देना है। यह जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) (कलक्टर) या उनके प्राधिकृत अधिकारी को जाता है। वे इसे अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर तीन दिन लगाते हैं। अगले सात दिन में कोई भी व्यक्ति इस खर्च पर आपत्ति दे सकता है।
पाबंदी तोड़ने की शिकायत जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या उनके प्राधिकृत अधिकारी से की जा सकती है। वे खुद जाँच कर सकते हैं, या किसी अधीनस्थ अधिकारी से करा सकते हैं। वह अधिकारी तहसीलदार स्तर से नीचे का नहीं होगा। शिकायत के तथ्य साबित हों तो प्रकरण क्षेत्राधिकार वाले उपखंड अधिकारी को कार्रवाई के लिए भेजा जाता है।
अधिसूचना 5052 का खंड 3 कुछ वाहनों को प्रचार में पूरी तरह मना करता है। उम्मीदवार या उसका निर्वाचन अभिकर्ता बस, ट्रक, मिनी बस और मेटाडोर काम में नहीं ले सकता। किसी भी तरह का पशुचालित वाहन भी मना है, जैसे तांगा, ऊँटगाड़ी, बैलगाड़ी आदि। यह रोक चुनाव की अधिसूचना की तिथि से चुनाव समाप्ति तक है। यह प्रचार और चुनाव से जुड़ी यात्रा, दोनों पर लागू है।
बाकी वाहन शर्तों के साथ चल सकते हैं। अधिसूचना के स्पष्टीकरण में वाहन का मतलब जीप, कार, तिपहिया टैम्पो आदि है। कितने वाहन चलें और किस सूचना पर, यह खंड 4 बताता है।
प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 13-14) में आदेश 4489 (6.1.2000) के हवाले से भी बस, ट्रक, मिनी बस और मैटाडोर प्रचार में मना हैं। उसमें प्रचार के लिए जीप, कार, तिपहिया वाहन, तांगा और पशुगाड़ी गिनाए गए हैं।
एक उम्मीदवार प्रचार में कितने वाहन चला सकता है, यह अधिसूचना 5052 के खंड 4 में है। जिला परिषद सदस्य के चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम तीन वाहन काम में ले सकता है। पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में अधिकतम दो वाहन चल सकते हैं। सरपंच पद के चुनाव में अधिकतम एक वाहन चल सकता है।
प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 14) में आदेश 4489 (6.1.2000) के हवाले से जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम दो वाहन और पंचायत समिति सदस्य या सरपंच के लिए एक वाहन लिखा है।
काफिले की सीमा एक अलग नियम है। किसी भी चुनाव में इन वाहनों को मिलाकर 3 से ज़्यादा वाहनों की रैली या काफिला नहीं निकलेगा।
वाहन काम में लेने से पहले उम्मीदवार या उसका निर्वाचन अभिकर्ता लिखित सूचना देगा। इसमें वाहन संख्या, उसका प्रकार और चालक का नाम-पता होगा। सूचना संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को कम से कम 24 घंटे पहले जानी है। सरपंच के मामले में यह उपखंड अधिकारी को जाती है। इस सूचना पर रिटर्निंग अधिकारी लिखित अनुमति प्ररूप "ख" में देते हैं। यह अनुमति उसी वाहन पर प्रदर्शित की जाती है।
प्रचार की मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार/जीप बड़े काफिले में नहीं चल सकतीं। ऐसे सभी बड़े काफिले भंग कर दिए जाएँगे। किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति का काफिला 3 वाहनों से ज़्यादा नहीं होगा। साथ में सुरक्षा वाहनों को भी अनुमति दी जाएगी। मतदान समाप्ति के तय समय से 48 घंटे पहले की अवधि में कोई रैली या काफिला नहीं निकलेगा।
प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 14) के अनुसार प्रावधान तोड़कर वाहन चलाना प्रतिबंधित है। वहीं लिखा है: "आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 123(5) के तहत पारित अधिकार जब्त किए जाने चाहिए"। रिटर्निंग अधिकारी ने अनुमति दी हो, तो वह रद्द की जानी चाहिए।
M.V. Act, 1988 · IPC की धारा 171-H · धारा 22A (आदेश 4489)
वाहनों पर झंडे, स्टिकर और फिटिंग
वाहनों पर झंडे, स्टिकर और फिटिंग के नियम मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और आईपीसी की धारा 171-एच से आते हैं। साथ में राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22A और आयोग की अधिसूचना 4489, दिनांक 6.1.2000 है। आयोग के लगाए प्रतिबंध तोड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
निजी वाहन पर झंडे और स्टिकर का मकसद किसी उम्मीदवार के लिए वोट माँगना हो, तो आईपीसी की धारा 171-एच लागू होगी। प्रचार के लिए अनुमत वाहनों को छोड़कर किसी वाणिज्यिक वाहन पर पोस्टर, झंडा या प्रचार सामग्री नहीं लगेगी। इस पर कार्रवाई आईपीसी की धारा 171-एच और धारा 22ए के तहत होगी।
मोटर वाहन अधिनियम तोड़ने वाले बाहरी संशोधन या फिटिंग वाहनों पर नहीं होंगे। इनमें लाउडस्पीकर भी शामिल हैं।
लाउडस्पीकर का उपयोग केवल सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच हो सकता है, वाहन पर हो या सभा में। इस समय में भी अनुमति ज़रूरी है। अधिसूचना 5052 के अनुसार यह प्ररूप "ग" में लिखित अनुमति है। यह क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या दूसरे सक्षम प्राधिकारी देते हैं। आवेदन में साफ़ लिखना है कि लाउडस्पीकर कब, कैसे और कहाँ चलेगा।
कुछ समय और जगहों पर पूरी रोक है। मतदान समाप्ति से पहले के 48 घंटे में लाउडस्पीकर पूरी तरह प्रतिबंधित है। उम्मीदवार के चुनाव कार्यालय पर इसका उपयोग पूरी तरह मना है। अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थल के 100 मीटर में भी पूरी रोक है।
वाहन पर लाउडस्पीकर हो, तो सरकारी परमिट में वाहन का पंजीकरण/पहचान क्रमांक लिखा होना चाहिए। परमिट का विवरण स्थानीय पुलिस अधिकारियों को बताया जाना चाहिए। यह वाहन पर लगे और किसी तय जगह पर लगे, दोनों तरह के लाउडस्पीकर पर लागू है। लिखित अनुमति के बिना चले वाहन और उसके सभी उपकरण जब्त किए जा सकते हैं।
मतदान दलों की रवानगी के समय जोनल अधिकारी को ये सामान्य व्यवस्थाएँ देखनी हैं। मतदान दलों की उपस्थिति दल संख्या के आधार पर पक्की करनी है। मतदान दलों और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की उपस्थिति भी जाँचनी है। दल के सभी सदस्यों को अपना परिचय देना है और उनका परिचय लेना है। ज़रूरत हो तो अनुपस्थित व्यक्ति की जगह किसी और को भेजना है।
यह भी पक्का करना है कि सभी दलों को मतदान सामग्री मिल गई है। मतदान दलों को आखिरी समय का प्रशिक्षण भी देना है।
प्रशिक्षण में डिस्पर्सल सेंटर की सुविधाएँ (Facilities at Dispersal Centres) ये गिनाई गई हैं। वाहनों में बैठने की व्यवस्था (Boarding of vehicles) और प्रशिक्षण की जगह हो। मतदान दलों के लिए EVM और सामग्री जाँचने की जगह हो। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुनाव के लिए डाक मतपत्रों का सुविधा केंद्र हो। मतदान सामग्री और EVM के भंडारण की जगह और वितरण काउंटर भी हो।
रवानगी के समय कुछ और व्यवस्थाएँ भी देखनी हैं। पहली बात, यह पक्का करना है कि "मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले तक कोई प्रचार नहीं किया जाएगा"। हर मतदान सामग्री किट की पहले से अच्छी तरह जाँच होगी।
मतदान दलों को सलाह दी जाएगी कि वे मतदान मशीन, चिह्नित मतदाता सूची की प्रति आदि जाँच लें। कोई विसंगति मिले तो उसे वितरण व्यवस्था के प्रभारी अधिकारी के ध्यान में लाया जाएगा। फिर उसका समाधान किया जाएगा।
अगर जिला परिषद सदस्य का चुनाव हो रहा है, तो नमूना हस्ताक्षर भी देने हैं। ये सभी उम्मीदवारों और उनके चुनाव एजेंटों के नमूना हस्ताक्षर हैं। ये मतदान दलों, सेक्टर मजिस्ट्रेटों आदि को भी उपलब्ध कराए जाएँगे।
मतदान के दिन एक सुसज्जित कंट्रोल रूम बनाया जाना है। इसमें संचार व्यवस्था रहती है, और डीईओ और एसईसी के संपर्क में रहना है। मोबाइल फोन हर समय चालू रहना चाहिए।
कंट्रोल रूम में शिकायत निवारण की व्यवस्था हो। आरक्षित कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था हो। किसी भी आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त मतपेटी या दूसरी सामग्री की व्यवस्था हो।
R.P. Act, 51 की धारा 123(5) और 133 · राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22
मतदान के दिन वाहन: 200 मीटर का नियम
मतदान के दिन वाहनों पर आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 123(5) और 133 लागू हैं। ये राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22 के साथ पढ़ी जाती हैं। उम्मीदवार, उसका चुनाव प्रतिनिधि या कोई और व्यक्ति कोई वाहन या पोत (Vessel) किराए पर नहीं लेगा, न प्राप्त करेगा। मतदाताओं को केंद्र तक लाने-ले जाने के लिए ऐसे वाहन या पोत का उपयोग भी नहीं होगा।
मालिक अपने या परिवार के सदस्यों के लिए मतदान केंद्र तक जाने में जो निजी वाहन काम में लेते हैं, उनकी केंद्र के 200 मीटर के दायरे में अनुमति नहीं है। उम्मीदवार खुद, उसके परिवार के सदस्य या उसका चुनाव प्रतिनिधि केंद्र तक वाहन से आ-जा सकते हैं। पर यह उपयोग मतदान केंद्र से 200 मीटर से अधिक दूरी पर ही हो सकता है।
अधिसूचना 5052 का खंड 4(6) भी मतदान दिवस की बात करता है। उप खंड (1) से (3) तक के वाहनों के लिए मतदान दिवस को लिखित अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से लेनी है। धारा 133 सपठित धारा 123(5) का उल्लंघन हो, तो यह अनुमति बिना किसी नोटिस के निरस्त होगी। इसे रिटर्निंग अधिकारी या उपखंड अधिकारी निरस्त करते हैं।
Sec. 130 of R.P. Act, 1951 · राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22
केंद्र के 100 मीटर में: प्रचार नहीं, फोन नहीं
मतदान के दिन केंद्र के आसपास प्रचार पर आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 130 लागू है। इसे राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22 के साथ पढ़ा जाता है। केंद्र के भीतर या उससे 100 मीटर के भीतर, किसी सार्वजनिक या निजी जगह पर, कोई वोट के लिए प्रचार नहीं करेगा। वहाँ कोई किसी मतदाता से वोट नहीं माँगेगा।
वहाँ कोई किसी मतदाता को किसी खास उम्मीदवार को वोट न देने के लिए नहीं मनाएगा। किसी को चुनाव में वोट न देने के लिए भी नहीं मनाएगा। आधिकारिक सूचना के अलावा चुनाव से जुड़ी कोई सूचना या चिह्न भी नहीं दिखाया जाएगा।
इसी 100 मीटर के दायरे में और मतदान बूथ के भीतर सेलुलर फोन, कॉर्डलेस फोन, वायरलेस सेट आदि नहीं चलेंगे। स्लाइड के अनुसार यह रोक चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों पर नहीं है। मतदाता पर्ची सादी सफेद हो, उस पर उम्मीदवार या दल का नाम या चिह्न न हो। ध्यान रहे, इस स्लाइड में 100 मीटर का नियम प्रचार और फोन का है। आयोग की अधिसूचना 5052 (23.12.2025) के पैरा 6(4) के अनुसार किसी भी मतदान बूथ के भवन के 200 मीटर के दायरे में कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर या बैनर नहीं लगाए जाएँगे। आयोग के आदेशों के संकलन में दी गई आदर्श आचरण संहिता के अनुसार अभ्यर्थी मतदान केन्द्र से 200 मीटर की परिधि में अपना कैम्प किसी भी स्थिति में न लगाएँ। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव बूथ लगाने की अनुमति है। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइडों के अनुसार मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में मालिक अपने या परिवार के सदस्यों के लिए मतदान केंद्र तक जाने को निजी वाहन नहीं ले जा सकते, और इन्हीं स्लाइडों में उम्मीदवारों के बूथ मतदान केंद्र से 200 मीटर से अधिक दूरी पर लिखे हैं।
Sec. 131 of R.P. Act 1951 · राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22A
लाउडस्पीकर, मेगाफोन आदि पर रोक
लाउडस्पीकर, मेगाफोन आदि पर रोक के लिए आर.पी. अधिनियम, 1951 की धारा 131 लागू है। साथ में राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22A भी लागू है। किसी भी उपकरण से मानव आवाज़ को बढ़ाना या दोबारा सुनाना मना है। उल्लंघन हो, तो ऐसे उपकरण जब्त कर लिए जाएँगे।
चिल्लाना या किसी भी तरह का अव्यवस्थित व्यवहार भी मना है। इन मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
Sec. 131 of R.P. Act 1951 · राज. पी.आर. अधिनियम, 1994 की धारा 22A
उम्मीदवारों के बूथ: 100 मीटर के बाद
आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका (अध्याय 15, बिंदु 4) के अनुसार उम्मीदवार अपना चुनाव बूथ मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद लगा सकते हैं। ज़ोनल अधिकारी के प्रशिक्षण की स्लाइड में यह दूरी 200 मीटर लिखी है। यहाँ भी धारा 131 और धारा 22A लागू हैं। इस बूथ में एक मेज़ और दो कुर्सियाँ हो सकती हैं, साथ में एक बैनर। अधिसूचना 5052 के खंड 6(4) के अनुसार मतदान के दिन इस बैनर का आकार 2x5 फीट से अधिक नहीं होगा। बैनर पर किसी राजनैतिक दल के नेता या उम्मीदवार का चित्र/फोटो, चुनाव चिह्न या नारा नहीं होगा।
बूथ के किनारों पर कनात या तंबू लगाने की अनुमति नहीं है। हाँ, छाता या तिरपाल का उपयोग किया जा सकता है। दल या उम्मीदवार का चिह्न या नाम दिखाने वाली पहचान पर्चियों की अनुमति नहीं होगी। बूथ पर भीड़ की अनुमति नहीं होगी, और मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास भी नहीं चलेंगे।
मतदाता की पहचान के बारे में आयोग का आदेश क्रमांक एफ. 1(2)(1)नपा-पंचा/सा.आ./रानिआ/14/5310, दिनांक 30.07.2026 लागू है। पहचान के लिए मतदाता मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) दिखाए। EPIC न हो, तो इस आदेश में तय वैकल्पिक दस्तावेजों से पहचान पक्की की जा सकती है। यानी पहचान EPIC से या एसईसी के अनुमोदित वैकल्पिक दस्तावेजों से होती है। इसमें मामूली विसंगतियों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है।
प्रशिक्षण प्रस्तुति (पृ. 25) में आयोग के आदेश 3131, दिनांक 10.9.09 के हवाले से लिखा है कि निर्दिष्ट दस्तावेजों पर आधारित पहचान पत्र के बिना मतदाता को वोट डालने की अनुमति नहीं है।
पहचान के लिए मतदाता पहले मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) दिखाए। EPIC न हो, तो आयोग के आदेश 5310, दिनांक 30.07.2026 के वैकल्पिक दस्तावेजों से पहचान पक्की की जा सकती है। ऐसे 11 दस्तावेज हैं।
पहला आधार कार्ड है। दूसरा विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) / मनरेगा कार्ड है। तीसरा बैंक या डाकघर की जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक है। चौथा श्रम मंत्रालय की योजना का स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत हैल्थ कार्ड है। पाँचवाँ ड्राइविंग लाइसेंस है और छठा पैन कार्ड।
सातवाँ भारतीय पासपोर्ट है। आठवाँ फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज है। नौवाँ केंद्र/राज्य सरकार, लोक उपक्रम या पब्लिक लिमिटेड कंपनियों का अपने कर्मचारियों को दिया फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र है। दसवाँ सांसदों और विधानसभा सदस्यों को जारी सरकारी पहचान पत्र है। ग्यारहवाँ यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड है, जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार का है।
मतदान केंद्र में कौन आ सकता है, यह नियम 24ए तय करता है। यह राज. पी.आर. (चुनाव) नियम, 1994 का नियम है। इसके तहत पात्र व्यक्तियों के अलावा कोई भी केंद्र में प्रवेश नहीं कर सकता। उसकी सामाजिक, राजनीतिक या कोई और पदवी कुछ भी हो, नियम यही रहेगा।
मीडियाकर्मी वीडियो या कैमरे के साथ केंद्र में वहाँ नहीं जा सकते, जहाँ Voting Compartment हो। उनके पास प्राधिकार पत्र हो, तब भी नहीं। मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और सुरक्षा पाए दूसरे व्यक्तियों को केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं है, सिवाय एक मतदाता के रूप में।
मतदान शुरू होने से पहले की प्रक्रिया राज. पी.आर. (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 34 में है। मतदान अधिकारी मतपेटी या मशीन दिखाकर सत्यापित करेंगे कि वह खाली है। यानी मॉक पोल किया जाएगा।
मतदाता सूची की चिह्नित प्रति भी उपस्थित उम्मीदवारों या मतदान एजेंटों को दिखाई जाएगी। फिर मतदान अधिकारी के घोषणा पत्र पर उनके हस्ताक्षर लिए जाएँगे। घोषणा पत्र पर मतदान अधिकारी भी हस्ताक्षर करेंगे। मतदान शुरू होने से पहले मतपेटियाँ या मशीन ठीक से बंद और सील की जाएँगी।
मतदान प्रतिनिधि (Polling Agent): किस चुनाव में कितने
मतदान प्रतिनिधि (Polling Agent) कितने हों, यह नियम 69 बताता है। जिला परिषद सदस्य के चुनाव में हर मतदान केंद्र पर एक मतदान प्रतिनिधि नियुक्त किया जा सकता है। सरपंच चुनाव में भी हर मतदान केंद्र पर एक मतदान प्रतिनिधि नियुक्त किया जा सकता है।
पंच चुनाव के लिए कोई मतदान प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया जाता। राहत प्रतिनिधि (Relief agent) का कोई प्रावधान नहीं है।
मतदान के दौरान के काम नियम 34 से 46 में हैं। मतदान अधिकारी मतदाताओं को विनियमित करेंगे और चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखेंगे। मतदान अधिकारी प्रस्तुत वोटों, चुनौती दिए गए वोटों आदि से निपटेंगे। साथ में पूरी मतदान प्रक्रिया पर समग्र पर्यवेक्षण होना है।
मतदाताओं की पहचान ईपीसी से या एसईसी के अनुमोदित वैकल्पिक दस्तावेजों से होगी। मामूली विसंगतियों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। जब भी नई मतपेटी या मशीन लगे, नियम 34 की प्रक्रिया अपनानी है। साथ ही मतदान अधिकारी की घोषणा पूरी करनी है।
शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं को केंद्र में प्रवेश में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्हें कतार में इंतज़ार नहीं कराना है। मतदान केंद्र भवन में रैंप उपलब्ध होने चाहिए। उनकी व्हीलचेयर केंद्र के अंदर ले जाने की पूरी सुविधा होनी चाहिए।
दृष्टिहीन या Infirm voter के लिए मतदान अधिकारी को नियम 41 के प्रावधानों का पालन करना है। प्रशिक्षण प्रस्तुति में इसके साथ यह पंक्ति छपी है: "ऐसे मतदाता के साथ किसी भी साथी को चुनाव में प्रवेश की अनुमति नहीं है।"
मतदान समाप्त होने के बाद के काम नियम 47 में हैं। मशीनों की ठीक से सीलिंग होनी है। चुनाव पत्रों के पैकेट बनें और उन पर सील लगे। मतदान डायरी भरी जाए।
मतपत्र खाता (Ballot Paper Account) की प्रतिलिपि बनाने की अनुमति मतदान एजेंटों को है। इस चरण के लिए प्रस्तुति का निर्देश है: "Zonal मजिस्ट्रेट व्यवस्था सुनिश्चित करें।"
आखिर में, जोनल अधिकारी और प्रेक्षक ये बातें याद रखें। अधिसूचना 5052 के अनुसार कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर और बैनर प्रतिबंधों के अधीन लग सकते हैं। पर मतदान बूथ के भवन के 200 मीटर में ये नहीं लगेंगे। वाहन, लाउडस्पीकर और कट आउट, होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर पर खर्च की अधिकतम सीमा (धारा 22क) जिला परिषद सदस्य के लिए रुपये 3,00,000 है। पंचायत समिति सदस्य के लिए यह रुपये 1,50,000 और सरपंच के लिए रुपये 1,00,000 है। इसी अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार ज़्यादा से ज़्यादा इतने वाहन चला सकता है: जिला परिषद सदस्य के चुनाव में 3, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में 2 और सरपंच के चुनाव में 1।
उम्मीदवार या उसका निर्वाचन अभिकर्ता प्रचार या चुनाव से जुड़ी यात्रा में बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर और पशुचालित वाहन नहीं चला सकता। वाहन के उपयोग से 24 घंटे पहले लिखित सूचना देनी है, और अनुमति प्ररूप "ख" में मिलती है। काफिले में 3 से अधिक वाहन नहीं होंगे। लाउडस्पीकर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक, प्ररूप "ग" की लिखित अनुमति से ही चलेगा। मतदान समाप्ति से पहले के 48 घंटे में इस पर पूरी रोक है। मंत्री आधिकारिक दौरे को प्रचार से नहीं जोड़ेंगे, और सरकारी विश्राम गृह चुनावी बैठकों के लिए नहीं हैं।
रवानगी पर दलों की उपस्थिति, मतदान सामग्री की जाँच और आखिरी प्रशिक्षण देखना है। जिला परिषद सदस्य का चुनाव हो, तो सभी उम्मीदवारों और उनके चुनाव एजेंटों के नमूना हस्ताक्षर मतदान दलों, सेक्टर मजिस्ट्रेटों आदि को भी उपलब्ध कराए जाएँगे। केंद्र के 100 मीटर में प्रचार और फोन नहीं चलेंगे; फोन की यह रोक ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर नहीं है। आयोग की ईवीएम मार्गदर्शिका के अनुसार मतदान बूथ से 100 मीटर की दूरी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव बूथ लगाने की अनुमति है। ज़ोनल अधिकारी की प्रशिक्षण स्लाइड में उम्मीदवारों के बूथ मतदान केंद्र से 200 मीटर से अधिक दूरी पर लिखे हैं। पहचान EPIC से होगी, वह न हो तो 11 वैकल्पिक दस्तावेजों से। पंच चुनाव में मतदान प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया जाता, और मतदान प्रतिनिधियों के लिए राहत प्रतिनिधि (Relief agent) का कोई प्रावधान नहीं है।
संदेह हो तो अधिनियम, नियम और आयोग के निर्देश देखें
यह प्रस्तुति प्रशिक्षण के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी संशय या संदेह में सभी सुसंगत अधिनियम, नियम और राजस्थान निर्वाचन आयोग के निर्देश देखते रहें। आयोग की वेबसाइट भी लगातार देखते रहें। अपना काम रिटर्निंग अधिकारी के तात्कालिक दिशा-निर्देशों के अधीन करें।
पंच-सरपंच चुनाव के दिन के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट या ज़ोनल अधिकारी का कोई अलग प्रशिक्षण डेक नहीं है। उस दिन का जो काम आयोग की मतपेटी मार्गदर्शिका में जोनल मजिस्ट्रेट के नाम लिखा है, वह यहाँ है।
रिटर्निंग अधिकारी (पंच/सरपंच) जो लिफाफे तैयार करता है, उनकी सूची में सातवाँ लिफाफा P-10 है: "पंच/सरपंच के सांख्यिकीय आंकड़े"। यह लिफाफा सील नहीं होता और हर रिटर्निंग अधिकारी का एक होता है। इसमें तीन फार्म जाते हैं: सांख्यिकीय फार्म-पंच, सांख्यिकीय फार्म-सरपंच, और बूथवार मतदान के आंकड़े (महिला-पुरूष वार)।
इन फार्मों पर मार्गदर्शिका का नोट यह है:
"नोटः- पंच व सरपंच के आंकड़ों के तीनों फार्म पृथक काउंटर पर जमा करायें या जिला निर्वाचन अधिकारी के द्वारा निर्देशों के अनुसार जोनल मजिस्ट्रेट के माध्यम से शीघ्र पहुचा देवें।"
यानी तीनों फार्म या तो अलग काउंटर पर जमा होते हैं, या जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार जोनल मजिस्ट्रेट के हाथ जल्दी पहुँचाए जाते हैं।